गुरुवार, 17 अक्तूबर 2013

सुप्रीम कोर्ट ने नीरा राडिया के छह नए मामले सीबीआई को सौंपे



नीरा राडिया और कई जानी-मानी हस्तियों के बीच फ़ोन पर हुई बातचीत के टेप मीडिया में लीक हुए थे.

नीरा राडिया: छह नए मामले सीबीआई को
गुरुवार, 17 अक्तूबर, 2013
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131017_neera_radia_sc_ml.shtml


नीरा राडिया टेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नौकरशाहों और उद्यमियों साथ हुई बातचीत के आधार पर छह मामले सीबीआई को जाँच के लिए सौंपे हैं. हालांकि अदालत ने इन मामलों का ख़ुलासा नहीं किया, लेकिन सीबीआई से कहा है कि वो दो महींनों के भीतर जाँच पूरी करें और रिपोर्ट अदालत को सौंपे.

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कठोर शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि टेलीफ़ोन की बातचीत से संकेत मिलते हैं कि निजी लोगों ने अपने फ़ायदे के लिए ग़लत तरीकों का इस्तेमाल किया. अदालत ने नीरा की क्लिक करें टेलीफोन की बातचीत के विश्लेषण के लिए एक विशेष दल नियुक्त किया था. इस दल की रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत ने छह मामले सीबीआई को सौंपे.

अब इस मामले में 16 दिसंबर को सुनवाई होगी. मूल रिकार्ड नहीं
इसी साल अगस्त में केन्द्र सरकार नीरा राडिया के टेलीफ़ोन टैप करने के लिए अधिकृत किए जाने से संबंधित मूल रिकॉर्ड उच्चतम न्यायालय में पेश नहीं कर सकी थी, जिसे अदालत ने ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया.
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सरकार को उस समय शर्मसार होना पड़ा था जब मूल रिकॉर्ड पेश करने में उसकी असफलता के बाद न्यायालय ने फ़ोन टैपिंग पर उसके दृष्टिकोण को सुनने से इनकार कर दिया.
पिछले साल अगस्त में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वो मीडिया में लीक हुए विवादित क्लिक करें नीरा राडिया टेप के स्रोत का पता नहीं कर पाई है. 

अमरीका और कांग्रेस का सच : पूर्वी पाक में हिंदुओं के नरसंहार पर चुप रहे थे निक्सन



अमरीका और कांग्रेस का सच

विश्व स्तर तमाम मानवता की बातें तब बेमानी लगती हैं
जब इन अतंराष्ट्रीय संस्थाओं को और सबसे शक्तिशाली देशों को 
पाकिस्तान और बांगलादेश में हिन्दु सफाये की मुहिम में रत देख कर, जान कर भी 
चुप्पी के रूप में देखा जात है।
जो रोल विश्वस्तर पर इसाई ताकतों ने और कम्युनिष्ट ताकतों ने हिन्दू विरोध में चुप्पी का प्ले किया वही रोल प्ले देश के अंदर कांग्रेस ने प्ले किया !
अब तो हालात यह है कि हिन्दू को बेइज्जत करने का फैशन निकल पडा है ! 
मीडिया से लेकर क्षैत्रीय राजनैतिक दल तक हिन्दू हितों की उपेक्षा कर रहे हैं।
क्यों कि हिन्दू में जातीवाद का बिखराव है। इसी का फायदा दूसरी ताकतें उठा रहीं हैं।
जिस दिन हिन्दू सिर्फ हिन्दू के नाम एक जुट होने लगेगा और वोट की ताकत बनेगा,

उस दिन हिन्दू शक्ति का नवोदय होगा !!

पूर्वी पाक में हिंदुओं के नरसंहार पर चुप रहे थे निक्सन
Updated on: Thu, 17 Oct 2013
http://www.jagran.com/news

वाशिंगटन। वर्ष उन्नीस सौ इकहत्तर में बांग्लादेश की स्वतंत्रता से पहले पाकिस्तान की सेना ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में सुनियोजित तरीके से हिंदू समुदाय के नरसंहार को अंजाम दिया था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनकी सरकार इस नरसंहार पर अपनी आंखें मूंदे रही थी। एक नई पुस्तक में यह खुलासा हुआ है।

लेखक गैरी जे बास ने अपनी किताब 'द ब्लड टेलीग्राम : निक्सन किसिंगर एंड ए फॉरगॉटेन जेनोसाइड' में लिखा है कि भारत सरकार इस बारे में जानती थी, लेकिन उसने इसे ज्यादा तवज्जो देने के बजाय बांग्लादेश में बंगाली समुदाय के जनसंहार की संज्ञा दी थी, ताकि जनसंघ के नेता इसको लेकर हाय-तौबा न मचाएं।

प्रिंसटन विश्वविद्यालय में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर बास कहते हैं, इसे मूल रूप से हिंदुओं की प्रताड़ना के रूप में सामने लाने के बजाए भारत ने इसे बंगालियों के विनाश के रूप में पेश करने पर ध्यान केंद्रित किया।

बास के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह तर्क दिया था कि देश में बंगालियों की संख्या बहुत ज्यादा होने के कारण चुनाव हार गए पाकिस्तानी जनरल उनकी हत्याएं कर रहे हैं, ताकि पूर्वी बंगाल में वे बहुसंख्यक न बने रह सकें।

चुन-चुन कर मारे गए थे हिंदू
बास ने किताब में रूस में भारत के राजदूत डीपी धर के हवाले से लिखा है, पाकिस्तान की सेना पर हिंदुओं की चुन-चुनकर हत्या करने का आरोप लगा था, लेकिन जनसंघ जैसे हिंदू राष्ट्रवादी दल की उग्र प्रतिक्रिया के भय से हमने इस बात की पूरी कोशिश की कि यह मामला भारत में प्रचारित न हो।

ढाका में तत्कालीन अमेरिकी राजनयिकों ने विदेश मंत्रालय और ह्वाइट हाउस दोनों को लिखा था कि पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई हिंदुओं के नरसंहार से कम नहीं है।