शनिवार, 19 अक्तूबर 2013

कानपुर में नरेन्द्र मोदी ने क्या - क्या कहा....



1.कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए वोट बैंक की राजनीति करती है और भाजपा कहती है देश के सारे धर्म मिल कर भारत माता की सेवा करो - नरेन्द्र मोदी

2.जनता की तपस्या बेकार नहीं जाएगी: नरेंद्र मोदी

3.अहंकारी हैं कांग्रेस के नेता : नरेंद्र मोदी

4=60 सालों से कांग्रेस झूठ बोल रही- नरेंद्र मोदी

5.यूपी में आतंकवादियों को छोड़ा जा रहा है= नरेंद्र मोदी

6.दिल्ली की सरकार चिकन बिरयानी का भोजन परोसती है -नरेंद्र मोदी

7.मैंने गरीबी को जिया है, इसीलिए गरीबों का दर्द समझता हूँ।- नरेन्द्र मोदी

8.सरकार को गरीबों की चिंता नहीं: नरेंद्र मोदी

9.चुनावों में झूठे वादे करती हैं कांग्रेस: नरेंद्र मोदी

10.कांग्रेस पार्टी ने देश को बर्बाद किया-नरेंद्र मोदी

11.कांग्रेस अहंकार में जी रही है। कांग्रेस को देश की परवाह नहीं। सोनिया ने कभी महंगाई की बात नहीं कीः नरेंद्र मोदी
12. ‘शहजादे जी कहते हैं गरीबी कुछ नहीं होती, सिर्फ मन की एक अवस्‍था है.’=नरेंद्र मोदी

13.शहजादे कैमरे की नजर से शहजादे गरीबी देखते हैं.=नरेंद्र मोदी

14.धूप में आप तपस्या कर रहे हैं। देश के कोने-कोने में यह प्यार उमड़ रहा है। आपकी तपस्या व्यर्थ नहीं जाने दूंगा -नरेंद्र मोदी

अब कॉंग्रेस वालो की नींद हराम हो गयी होगी। राहुल अपनी ही भाषणों को कई बार सुन रहा होगा। कॉंग्रेस वालों के साथ बिकाऊ मीडीया को ६ दिनों के लिये मसाला मिल गया अब भौकने का। अब मुलायम, अखिलेश , आज़म खान जैसों को कई दिनों तक होगा दस्त। नीतीश अभी से ही बुला लिया होगा ना जाने कई सारे चिकित्सकों को।
केवल ६ दिन, क्यूकि इसके बाद होगा पटना मे हुँकार , देखेगा भारत का शेर ,कैसा है बिहार। बिहार मे मौजूद हैं,तुष्टिकरण करनेवाले गद्दार। उन्ही होगी फुफकार, हमारी होगी हुँकार. हम लाकर रहेंगे मोदी राज। वंदे मातरम.

लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित - मोदी


Narendra Modi's rally in Kanpur

कानपुर रैली में नरेंद्र मोदी
NDTV India, 19 अक्टूबर 2013
http://khabar.ndtv.com/news/india/narendra-modis
कानपुर: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कांग्रेस से पिछले 10 वर्ष का हिसाब मांगा। मोदी ने कहा कि गुजरात की जनता को पिछले वर्ष ही मैंने अपना हिसाब दे दिया है और वहां के लोगों ने मुझे 2012 में विशेष योग्यता का अंक देकर पास घोषित कर दिया है। अब 2014 के चुनाव में कांग्रेस को पिछले 10 वर्ष का हिसाब पूरे देश की जनता को देना चाहिए।

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस देश की जनता को गुमराह न करे क्योंकि जनता जनार्दन है और उसने इन्हें पिछले 10 वर्ष से देश की बागडोर सौंपी है। इसलिए उसको जवाब मांगने का हक है और इन्हें भी चाहिए कि वह पाई-पाई का हिसाब जनता को दें।

कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की चुटकी लेते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकसभा चुनाव के पहले जब हिन्दुस्तान महंगाई और भ्रष्टाचार का जवाब मांग रहा है तो ये कहते हैं कि मैंने कानून बना दिया है। मोदी ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या संविधान कानून नहीं है।

महंगाई :
मोदी ने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा था कि सरकार बनते ही वह 100 दिन के भीतर महंगाई कम कर देगी लेकिन उसने क्या किया। मोदी ने जनता से कहा कि अब आपको उनका हिसाब चुकता करना है।

मंहगाई के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इन लोगों ने महंगाई कम न होने पर एक शब्द भी नहीं बोला और न ही दुख प्रकट किया। इन्होंने देश की जनता के सामने यह भी स्पष्टीकरण नहीं दिया कि हमने बहुत प्रयास किया लेकिन विफल रहे। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस अपने अहंकार में जी रही है, उसे जनता जनार्दन की परवाह नहीं है।

भ्रष्टाचार :
मोदी ने कहा कि जब भारत सरकार का एक अधिकारी यह कहे कि यदि मैं आरोपी हूं तो मुझसे पहले प्रधानमंत्री आरोपी हैं। यही नहीं भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय को भी गुमराह कर रही है और अदालत को यह बताती है कि फाइलें गुम हो गई हैं।

मोदी ने कोयला घोटाले की चर्चा करते हुए बगैर नाम लिए चुटकी ली कि दिल्ली के कोयले की राख कानपुर के ऊपर भी छायी हुई है। उनका इशारा कानपुर के सांसद और केंद्र सरकार में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल की तरफ था।

गरीबी :
मोदी ने आरोप लगाया कि देश के गरीब और किसान कांग्रेस के लिए मजाक बन गए हैं। राहुल गांधी को शहजादे की पदवी देते हुए मोदी ने कहा कि वह कहते हैं कि गरीबी-वरीबी कुछ नहीं होती है। यह तो सिर्फ मन की अवस्था है।

राहुल के इस वक्तव्य का परिहास करते हुए मोदी ने कहा, जो सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, उन्हें क्या मालूम गरीबी क्या होती है।

अपराध :
मोदी ने केंद्र सरकार को समर्थन दे रही उप्र की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पर भी जमकर निशाना साधा और कहा कि उप्र में पिछले एक वर्ष में 5000 निर्दोष लोगों की हत्याएं हुई है। यही नहीं उप्र की सपा सरकार वोट के खातिर आतंकवादियों को भी जेल से छोड़ने की बात कर रही है। क्या यह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं है।

मोदी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन की याद दिलाते हुए उप्र की जनता से अपील की कि जिस तरह प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज कानपुर से उठी थी, उसी तरह आज कांग्रेस मुक्त भारत की आवाज यहीं से उठनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सुराज की लड़ाई है और देश पिछले 60 वषरें से सुराज की तरफ  निहार रहा है।

मोदी ने दावा किया कि 2014 में परिवर्तन निश्चित है और लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित है।

मोदी से पहले भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और कलराज मिश्र सहित कई नेताओं ने सभा को सम्बोधित किया।

खजाने की खुदाई से सरकार ने देश का मजाक बनाया : मोदी




नवभारतटाइम्स.कॉम |
1 8 Oct , 2013,
http://navbharattimes.indiatimes.com
चेन्नै।। बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने अब यूपी के डौंडियाखेड़ा में चल रही खजाने की खोज को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। मोदी ने कहा कि एक साधु के सपने के आधार पर खजाने की खुदाई से आज पूरी दुनिया हमारा मजाक उड़ा रही है। उन्होंने कहा सिर्फ सपने के आधार पर खुदाई हो रही है। किसी को सपना आया और दिल्ली की सरकार एक हजार टन सोने की खुदाई करने में लगी है। हालांकि कांग्रेस ने यह कहकर खुदाई के फैसले का बचाव किया है कि जिऑलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की गई थी।

मोदी ने कहा, 'अरे दिल्ली की सरकार... स्विट्जरलैंड के बैंकों में हिन्दुस्तान के चोर-लुटेरों ने जो रुपये रखे हैं वे एक हजार टन सोने से भी ज्यादा कीमत के हैं। उनके बारे में तो पता है, उन्हें ले आओ। विदेशी बैंको में चोरों ने जो पैसे रखे हैं उन्हें अगर वापस लाते तो, सोना खोजने की जरूरत नहीं पड़ती और देश की बेइज्जती नहीं होती।'

मोदी के इस हमले पर जब कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने पहले इसे राज्य सरकार का मसला बताया। उन्होंने कहा कि इससे केंद्र का कोई लेना-देना नहीं। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि एएसआई जिऑलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद यह खुदाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में महल परिसर में मेटल का पता चला है। नरेंद्र मोदी पर पलटवार करते हुए चौधरी ने कहा कि अगर उनके पास भी विदेशों में जमा काले धन के बारे में जानकारी है, तो वह बताएं। सरकार उसे वापस लेकर आएगी।
हालांकि खजाने की खुदाई पर बीजेपी उपाध्यक्ष उमा भारत ने मोदी से कुछ अलग राय जाहिर की है। उमा भारती से जब सोने की खुदाई पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'सोने की खुदाई सपने के आधार पर नहीं हो रही है। इसका का वैज्ञानिक आधार है। जांच में यह सामने आया है कि वहां कोई मेटल मौजूद है।'

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में तमिलनाडु के लोगों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'मेरे उत्तर भारतीय समर्थक यह विश्वास नहीं करते कि तमिलनाडु में भी बदलाव की बयार बह चुकी है। मैं आप सबको त्रिचि की रैली की सफलता के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।

मोदी ने पूर्वी तट आए साइक्लोन पर दुख जताया और कहा, 'हाल ही में उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, बिहार और बंगाल में एक बहुत बड़ा साइक्लोन आया था। लगता था कि साइक्लोन इन राज्यों का विनाश कर देगा। लेकिन जैसा भय था वैसा विनाश नहीं हुआ। पूरे हिंदुस्तान और दुनिया ने शांति महसूस की। यह क्यों हुआ? इतना बड़ा साइक्लोन क्यों नहीं टिक पाया? इसका कारण क्या है? इतना बड़ा साइक्लोन इसलिए नहीं टिक पाया क्योंकि हिंदुस्तान में बदलाव का साइक्लोन उठा है। यह साइक्लोन किसी और साइक्लोन को आने नहीं देता।'
मोदी ने कहा, 'मैं देख रहा हूं तमिलनाडु के लोगों ने भी दिल्ली के तख्त को बदलने का फैसला ले लिया है। अगर एकबार दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनी तो तमिल जनता के सपने पूरे होंगे।' अपने भाषण के दौरान नरेंद्र मोदी ने एकबार फिर कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया।

विभाजन पर, एक बार फिर सुभाष की आत्मा रोई होगी..





विभाजन पर, एक बार फिर सुभाष की आत्मा रोई होगी..
अरविन्द सीसौदिया
    ‘‘हमारा कार्य           आरम्भ हो
  चुका है।      ‘दिल्ली चलो’ के नारे के साथ हमें तब तक अपना श्रम और संघर्ष समाप्त नहीं करना चाहिए, जब तक कि दिल्ली में ‘वायसराय हाउस’ पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाता है और आजाद हिन्द फौज भारत की राजधानी के प्राचीन ‘लाल किले’ में विजय परेड़ नहीं निकाल लेती है।’’
    ये महान स्वप्न, एक महान राष्ट्रभक्त नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का था, जो उन्होंने 25 अगस्त 1943 को आजाद हिन्द फौज के सुप्रीम कमाण्डर के नाते अपने प्रथम संदेश में कहे थे। यह सही है कि नेताजी ने जो सोचा होगा, उस योजना से सब कुछ नहीं हो सका, क्योंकि नियति की योजना कुछ ओर थी। मगर यह आश्चर्यजनक है कि उस वायसराय भवन पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने और लाल किले पर भारतीय सेना की परेड़ निकालने का अवसर महज चार वर्ष बाद ही यथा 15 अगस्त 1947 को नेताजी की ही आजाद हिन्द फौज की गिरफ्तारी के कारण उत्पन्न सैन्य विद्रोह और राष्ट्र जागरण के कारण ही मिल गया और आज हम आजाद हैं....।
    यद्यपि नेताजी हमारे बीच नहीं हैं, उनकी कथित तौर पर मृत्यु 18 अगस्त 1945 को हवाई दुर्घटना में हो चुकी है। मगर उसे महज एक युद्ध कूटनीति की सूचना ही मानी जाती है ! उनकी मृत्यु के सही तथ्य पता लगाने के लिये तीन कमीशन बनाये गये, शहनबाज कमीशन 1956, खोसला कमीशन 1970 से 74 तक, और तीसरा जस्टिस मुखर्जी कमीशन जिसने 2005 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। मगर नेताजी की कथित मृत्यु का रहस्य नहीं खोजा जा सका है।
सच जानना होगा...
    सांसद सुब्र्रत बोस ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रहस्यमय मौत के संदर्भ को लोकसभा में उठाया और मुखर्जी आयोग के सच को सामने लाने की बात कही। उन्होंने यह रहस्य उजागर भी किया कि उस दिन हवाई दुर्घटना हुई ही नहीं थी।
    ताईवान सरकार कहती है  कि 18 अगस्त 1945 के दिन पूरे ताईवान में कहीं कोई हवाई दुर्घटना नहीं हुई है ।
    अर्थात जब दुर्घटना नहीं हुई तो मृत्यु कैसी, मृत्यु का सर्टिफिकेट देने वाला कोई चिकित्सक अथवा उनका अंतिम संस्कार करने वाले की पुष्टि नहीं होती है। सर्वाधिक आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि 18 अगस्त की हवाई दुर्घटना की प्रथम सूचना, पूरे पांच दिन बाद जापानी रेडियो से 22 अगस्त को प्रचारित की गई थी, अर्थात इतने बडे नेता के निधन की सूचना में इतना विलम्ब गले नहीं उतरता है।
वे छुप नहीं सकते...
    इतना तो स्पष्ट है कि नेताजी का जो व्यक्तित्व रहा है, चाहे वह कांग्रेस के मंच पर रहा हो अथवा कांग्रेस से बाहर व देश से बाहर विदेशों में रहकर देशहित के मंच पर रहा हो, यह शेर किसी चूहे की तरह छिपने वाला न था और न ही छिपा होगा। यह अवश्य हो सकता है कि उनके साथ कोई कूटनीतिक दुर्दान्त दुर्घटना घटी हो। जैसे कि वे किसी शत्रु राष्ट्र की किसी गुप्तचर एजेंसी के हाथ पड़ गये हों, उनका अपहरण हो गया हो, उन्हें कूटनीतिक कारणों से किसी अज्ञात जेल में डाल दिया गया हो या उनकी कहीं और हत्या कर दी गई हो। क्योंकि ब्रिटिश गवरमेंट की दृष्टि में भारत में सुभाष चन्द्र बोस से बड़ा उनका काई शत्रु नहीं था और आयरिश इतिहासकार यूनन ओ हैल्विन इसका रहस्योद्घाटन करते है।
ब्रिटिश सरकार ने नेताजी की हत्या के आदेश दिये थे.....
    आयरिश इतिहासकार यूनन ओ हैल्विन ने ब्रिटिश खुफिया सेवाओं के संदर्भ रहस्योद्घाटन करने वाली अनेकों पुस्तकें लिखी हैं और उन्हें न तो चुनौती दी जा सकी और न ही उनका खंडन किया गया।
    इसी इतिहासकार ने कोलकाता में दिये एक भाषण में कई दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि ‘‘जब 1941 में अचानक सुभाष नजरबंदी से गायब हो गए तो तुर्की में तैनात दो जासूसों को लंदन स्थित मुख्यालय से निर्देश दिया गया कि वे सुभाष चन्द्र बोस को जर्मनी पहुंचने से पहले खत्म कर दें। उन्होंने बताया कि ब्रितानी जासूस नेताजी तक नहीं पहुंच पाए, क्योंकि नेताजी मध्य एशिया होते हुए रूस के रास्ते जर्मनी पहुंच गए और वहां से वे जापान पहुंचे थे।’’
    कोलकाता के एक अन्य इतिहासकार लिपि घोष का कहना है कि ‘‘अंग्रेजों ने बोस से मिलने वाली चुनौती का सही आंकलन किया था और इससे यह भी पता चलता है कि ब्रितानी हुकूमत उनसे कितनी घबरा रही थी।’’
    21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिन्द की अस्थायी सरकार का गठन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की अध्यक्षता में किया गया। इस सरकार का ब्यौरा इस प्रकार है:-
1. सुभाषचन्द्र बोस: राज प्रमुख, प्रधानमंत्री और युद्ध तथा विदेशी मामलों के मंत्री।
देशभक्ति गीत
‘‘सूरज बनकर जग पर चमके,
भारत नाम सुभागा।
जय हो, जय हो, जय हो,
जय जय जय जय हो।।’’
राष्ट्रीय अभिवादन: जय हिन्द
राष्ट्रीय ध्वज: चरखे के साथ तिरंगा
राष्ट्रीय चिन्ह: बाघ
नारा: ‘चलो दिल्ली’ ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘आजाद हिन्द जिंदाबाद’
लक्ष्य: ‘विश्वास-एकता-बलिदान’
आव्हानः ‘‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’’
आजाद हिन्द सैनिको का महाबलिदान
    22 दिसम्बर 1967 को लोकसभा में ‘आजाद हिन्द फौज के भूतपूर्व सैनिक’ विषय पर आधे घंटे की चर्चा की गई। चर्चा शुरू करते हुए सांसद समर गुहा ने कहा:
    ‘‘आजाद हिन्द फौज के भूतपूर्व सैनिकों के बारे में इस चर्चा का आरम्भ मैं इन महान सेनानियों और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की महान विरासत और उन लोगों को श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुए करूंगा, जिन्होंने अपना वर्चस्व न्यौछावर किया, बल्कि उन सभी 26,000 व्यक्तियों को श्रृद्धांजली अर्पित करूंगा जिन्होंने कोहिमा, इम्फाल और चटगांव के युद्ध क्षैत्रों को अपने प्राणों की आहूति दी।’’
आजाद हिन्द फौज की तीसरी बड़ी शख्सियत कर्नल पी.के. सहगल के शब्दों में:
    1945 में भारत के कमाण्डर इन चीफ जनरल सर क्लाउड आउचिनलेक को उनके एजुटेंट जनरल ब्रांच ने सुझाव दिया कि आजाद हिन्द फौज के अधिकारियों पर जब मुकदमा चलाया जायेगा तब कोर्ट मार्शल का जो भी निर्णय होगा, आम भारतीयों और विशेष तौर पर भारतीय सशस्त्र सेना द्वारा आजाद हिन्द फौज तिरस्कृत होगा।
    लेकिन वादी और प्रतिवादी पक्ष के गवाहों ने कोर्ट में जब आजाद हिन्द फौज की पूरी कहानी सुनाई तब पूरे देश में इसका तीव्र प्रभाव हुआ। लाखों भारतीयों को जो ब्रिटिश दमन से पीडि़त और हतोत्साहित हुए थे, नई शक्ति और गौरव की अनुभूति हुई। जब उन्हें यह महसूस हुआ कि उनके दुश्मन अपराजेय नहीं हैं, तो उनमें क्रांति की भावना प्रस्फुटित हुई।
    यही भावना भारतीय सशस्त्र बलों के सैनिकों में भी फैल गई। जब अधिकारियों एवं सैनिकों के एक विशेष समूह को भारतीय सेना के सभी यूनिटों में आजाद हिन्द फौज के प्रति उनके दृष्टिकोण जानने के लिए भेजा गया तो सभी से यही उत्तर मिला कि आजाद हिन्द फौज के सभी सैनिकों को मुक्त कर दिया जाये और उनके भारतीय यूनिटों में भेज दिया जाये।
    भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय सेना में विद्रोह उभरा था, वह भारतीय सशस्त्र बलों के सैनिकों में आ रही नवजागृति का प्रत्यक्ष परिणाम था। भारतीय सशस्त्र बलों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत हो गई थी और ब्रिटिश सरकार यह अच्छी तरह समझ गई थी कि उसके लिए अब भारत में ब्रिटेन के निरंकुश शासन को अधिक समय तक बनाए रखना और उसे समर्थन देना अब सम्भव नहीं है। भारतीय सशस्त्र बलों में आई इस जागृति से ब्रिटेन का भारत में ब्रिटिश शासन जारी रखने का इरादा खंडित हो गया था।
    इस प्रकार अंतिम विश्लेषण में आजाद हिंद फौज अंग्रेजों के विरूद्ध अपने सशस्त्र संघर्ष के द्वारा नेताजी की रणनीति के अनुरूप ऐसी स्थिति पैदा करने में सफल हो गई थी कि ब्रिटिश शासन इस देश में अब अपना शासन नहीं चला सकता था।
    तथापि यह दुःख की बात है कि आजाद हिन्द फौज और भारतीय जनता युद्ध में मित्र राष्ट्रों की विजय से पूर्व अंग्रेजों को बाहर नहीं निकाल सके और देश का बंटवारा तथा उसके बाद घटी घटनाएं नहीं रोक सके।
सुभाष का स्वप्न जो सच हुआ
    ‘‘भाईयों और बहनों! इस समय जबकि हमारे शत्रुओं को भारत की भूमि से खदेड़ा जा रहा है, आप पहले की ही तरह स्वतंत्र नर नारी होने जा रहे हैं। आज आजाद हिन्द की अपनी अस्थायी सरकार के चारों ओर एकत्रित हो जाइये और उससे आप नव प्राप्त स्वतंत्रता की सुरक्षा और संरक्षा में सहायता करें।’’
    नियति का यह खेल देखिये की यह शब्द सही साबित हुए, दिल्ली में जब ब्रिटिश सरकार ने आजाद हिन्द फौज के अधिकारियों पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया तो पूरा देश इनकी सहायता के लिए उमड़ पड़ा था। गांधी जी के सारे सिद्धान्तों को ठोकर मारकर पंडित जवाहरलाल नेहरू और भूलाभाई देसाई ने आजाद हिंद फौज के सैनिकों का केस लड़ने के लिए फिर से वकालत का कोट पहन लिया था। सेना के तीनों अंगों ने विद्रोह प्रारम्भ कर दिया। केन्द्रीय विधान परिषद, संविधान सभा में आजाद हिन्द फौज के गिरफ्तार लोगों की बिना शर्त मुक्ति की बहसें हो रही थी। श्रमिकों ने काम बंद कर दिया था, जनता गली कूचों में जय हिन्द के नारे लगा रही थी। पूरा देश एक जुट होकर इन महान बलिदानियों के लिए मैदान में उतर आया था। काश ! उस समय नेताजी मौजूद होते...!! न पाकिस्तान बनता, न अंग्रेजों का षडयंत्र सफल होता !
    पाकिस्तान सिर्फ इसलिये बना कि वक्ते ए जरूरत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का नेतृत्व हमें, 1947 में नहीं मिल सका।
आजाद हिन्द फौज के कारण मिली आजादी का बिन्दुवार लेखा-जोखा
    आजाद हिन्द फौज को गिरफ्तार भले ही कर लिया गया हो, मगर उनका अभिवादन ‘जय हिन्द’ भारतीय सेना में फैशन बन कर उभरा और वे भी आजाद हिन्द फौज की तरह कुछ कर दिखाने का मन बनाने लगे। इधर दिल्ली के लाल किले में लगी अदालत आजाद हिन्द फौज के तीन अफसर यथा मेजर जनरल शाहनवाज खां, कर्नल गुरूबख्श सिंह ढि़ल्लन और कर्नल प्रेम कुमार सहगल को मुकदमा चलाकर फांसी के फंदों पर लटकाने की तैयार कर रही थी। यह समाचार भारतीय फौज में उत्तेजना का, विद्रोह का संवाहक बन गया।
    नौसेना इमारतों पर जगह-जगह नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बड़े-बड़े चित्र लगा दिये गये या बनाये गये और ‘जय हिन्द’ लिखा गया।
    बम्बई में 18 फरवरी 1946 को नौसैनिक विद्रोह प्रारम्भ हुआ। बम्बई के सागर तट पर नौसैनिकों के प्रशिक्षण स्थल ‘तलवार’ की दीवारों पर ‘जय हिन्द’ और ‘भारत छोड़ो’ नारे लिखे देखकर अंग्रेज चैंक उठे थे।
    बम्बई में जितने भी छोटे बड़े जहाज थे, उन सभी में विद्रोह की लपटें फैलने में देर नहीं लगी। बड़े जहाजों में कुछ के नाम इस प्रकार थे, हिन्दुस्तान, कावेरी, सतलज, नर्मदा और यमुना। छोटे जहाजों में प्रमुख असम, बंगाल, पंजाब, ट्रावरकोर, काठियावाड़, बलूचिस्तान और राजपूत सहित कुछ प्रशिक्षण देने वाले जहाज डलहौजी, कलावती, दीपावली, नीलम और हीरा विद्रोह की चपेट में थे।
    करांची, विशाखापत्तनम, मद्रास, कोचीन, कोलकाता और अन्य बंदरगाहों पर जहाजों में तीव्रता के साथ विद्रोह फैल गया। कोलम्बो में खड़े ‘बड़ौदा’ जहाज पर भी विद्रोह हो चुका था। नौसेना के शाही जहाज ‘गोंडवाना’ पर भी विद्रोह की खबर से लंदन और नई दिल्ली थर्रा उठी थी, तब बी.बी.सी. लंदन से यह समाचार प्रसारित हुआ था:
    ‘‘19 फरवरी 1946 को प्रातःकाल तक सभी जहाजों, प्रशिक्षण केन्द्रांे और आवास बैरकों में हड़ताल फैल चुकी थी। हड़तालियों की संख्या 20 हजार से अधिक थी, ‘कैसल बैरक’ में झुंड के झुंड सैनिक एकत्र हो गये और वे किसी योजना के जुलूस के रूप में सड़क पर आ गये और ‘तलवार’ की ओर बढ़ने लगे। उनके समर्थन में जनता भी उनके साथ हो ली। राजनैतिक दलों के झंडे भी आ गये। क्या कांग्रेस, क्या मुस्लिम लीग, क्या कम्यूनिस्ट जैसे सारा मुम्बई उमड़ पड़ा।’’
हमारी मंजिल आजादी है,
अंग्रेजों भारत छोड़ो,
इंकलाब जिन्दाबाद, जय हिन्द,
हिन्दु-मुस्लिम एक हैं,
चलो ‘तलवार’ पर चलो,
‘तलवार’ पर चलो।
हम आ रहे हैं, हम आ रहे हैं।

    विदेशी दुकानें लूट ली गई। विदेशी झंडे उतार लिये गये और तिरंगा फहरा दिया गया। परेड मैदान में विशाल आमसभा हुई, उसमें तलवार के एक विद्रोही ने सम्बोधित करते हुए कहा ‘‘हडताल चैहत्तर जहाजों, चार बेड़ों और बीस तटवर्ती अड्डों तक फैल चुकी है, बीस हजार नौसेनिकों ने बरतानिया झंडा उतार कर फेंक दिया है। अंग्रेज सरकार अपनी सेना के समूचे विभाग पर नियंत्रण खो चुकी है।’’
    इस हड़ताल की एक समन्वय और संचालन समिति बनी जिसका नाम ‘‘नौसेना केन्द्रीय हड़ताल समिति’’ रखा गया, इसके अध्यक्ष एम.एस. खान और उपाध्यक्ष मदन सिंह थे।
    इस विद्रोह को शांत करने के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने ‘हाउस आॅफ काॅमंस’ में एक वक्तव्य देते हुए बताया कि ‘‘भारत को स्वतंत्रता देने संबंधी मुद्दे का अध्ययन करने के लिए शीघ्र ही मंत्रीमण्डलीय स्तर का एक आयोग भारत भेजा जायेगा।’’
    हर तरफ से एक ही आवाज आती थी ‘‘काश आज सुभाष चन्द्र बोस जैसा कोई मर्द नेता होता’’
    आजाद हिन्द फौज का मुख्य गीत, इस विद्रोह का महान गीत बन चुका था:
‘‘कदम-कदम बढ़ाये जा,
खुशी के गीत गाये जा।
ये जिंदगी है कौम की,
तू कौम पर लुटाये जा।।’’
   महात्मा गांधी ने कहा ‘कुछ गुण्डों का उत्पात’ सरदार पटेल और मोहम्मद अली जिन्ना ने विद्रोहियों से अपील की कि वे बिना शर्त समर्पण करें।    भारतीय नेताओं के द्वारा पीठ दिखने पर, 23 फरवरी को हड़ताल वापसी का निर्णय हुआ। इस सैनिक विद्रोह के पश्चात पाकिस्तान में उन सभी सैनिकों को फिर नौकरियां दे दी गई और भारत में उनकी सेवाएं बहाल नहीं की गई।
विद्रोह से मिली आजादी
    इस विद्रोह के अवसर को हमारे कांग्रेसी नेतागण, किस हीन भावना के चलते नहीं भुना सके, इस बात को तो भगवान ही जानता होगा। हमने अखण्ड भारत आजाद करवाने के इस शुभ अवसर को क्यों छोड दिया, इसका जवाब भी कांग्रेस ही दे सकती है। मगर अंग्रेज समझ चुके थे कि अब भारत छोडना ही होगा, इसी क्रम में मार्च 1946 में एक मंत्रीमण्डल का दल जिसमें लाॅर्ड पैथिक लारैन्स, सर स्टेफर्ड क्रिप्स तथा ए.वी. एलेक्जेण्डर थे, भारत आया। इसकी योजना के अनुसार अंतरिम सरकार की व्यवस्था की गई थी तथा भारत का संविधान बनाने के लिए संविधान सभा बनाने की बात हुई। कांग्रेस ने इसे स्वीकार कर लिया, तब मुस्लिम लीग ने इसे अस्वीकार कर दिया। अगस्त 1946 में कलकत्ता की प्रसिद्ध मारधाड़ हुई, 2 सितम्बर 1946 को पं. नेहरू ने अंतरिम सरकार बनाई। मुस्लिम लीग ने आरम्भ में तो सम्मिलित होने से इंकार कर दिया, किन्तु बाद में वह सम्मिलित भी हुई और विभाजन में सफल भी हुई। यदि इस सैनिक विद्रोह के अवसर पर कांग्रेस ने चूक नहीं की होती तो देश अखण्ड आजाद होता। एक बार फिर सुभाष की आत्मा रोई होगी।
असीम ऊर्जा स्रोत है हमारी संस्कृति!
    कुछ टाई पहनने वाले भारतीय यूरोपपंथी, कुतर्क के द्वारा हिन्दुत्व में, भारतीयता में, मीनमेख निकाल सकते हैं। वे इसे दरिद्र, पिछडी और हीनताग्रस्त ठहरा सकते हैं, मगर अमर सत्य यह है कि यह अक्क्षुण्य है..! क्योंकि इस संस्कृति में सत्य का आत्मविश्वास है, इस धरा ने आत्मविश्वास कभी खोया नहीं है और स्वतंत्रता संग्राम में जिस स्वतंत्रता नायक ने आत्म विश्वास नहीं खोया और अंतिम दौर तक लडता रहा और लडाई के फल को विजय में बदल गया, वह था सुभाष चंद्र बोस!! आज हम उन्हे नमन ही तो कर सकते हैं। उन्हे शत शत नमन्!




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