शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

मुझसे सवाल पूछने की बजाय जनता को जवाब दे कांग्रेस : नरेंद्र मोदी



मुझसे सवाल पूछने की बजाय जनता को जवाब दे कांग्रेस: मोदी
divyabhaskar network   |  Nov 01, 2013,
http://www.bhaskar.com/article/GUJ-narendra-modi-in-pune-4422449-PHO.html
पुणे। दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल के एक हिस्से का उद्घाटन करने के लिए पुणे पहुंचे बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखे हमले किए। मोदी ने इस मौके पर कहा, 'देश के कई राज्यों और केंद्र में कभी गठबंधन सरकार बनी, कभी कांग्रेस की, कभी कम्युनिस्टों की सरकार तो कभी बीजेपी की सरकार बनी। आपने कई पार्टियों के शासन को देखा है। देश के राजनीतिक पंडितों, अर्थशास्त्रियों का आह्वान करता हूं। देश में कुछ पैरामीटर तय किए जाएं। किस दल ने क्या किया। अगर इसका तुलनात्मक नतीजा आए तो देश के सामने यह सवाल नहीं आएगा कि बीजेपी की सरकार आनी चाहिए या नहीं। जब-जब जहां-जहां बीजेपी की सरकार बनी है वहां जन आकांक्षाओं की पूर्ति का प्रयास हुआ है।

यह देश गवाह है अटल बिहारी वाजपेयी और मोरारजी देसाई की सरकार में महंगाई कम थी। गरीब आदमी को दो वक्त खाना मिलता था। लेकिन जब कांग्रेस की या उसके समर्थन वाली सरकार बनी तो गरीब आदमी को भरपेट खाना नसीब नहीं हुआ। कांग्रेस का एक भी नेता, यूपीए का एक भी नेता साढ़े नौ साल में क्या किया, इसका जवाब नहीं दे रहे हैं। हमारे देश के मीडिया वाले भी उन तक नहीं पहुंच पाते हैं। कांग्रेस को अहंकार हो गया है। वे मीडिया वालों के भी जवाब नहीं देते। चुनाव लोकसभा के हैं, आप जनता को जवाब दें।

मोदी ने कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल पर हमला बोलते हुए कहा, 'आए दिन मोदी से सवाल पूछे जा रहे हैं। 2014 में जब जनता बीजेपी को आशीर्वाद देगी, तब हर वर्ष जनता के सामने अपने काम का हिसाब पेश करेगी। लोकतंत्र में दिल्ली में शासक नहीं, सेवक बैठना चाहिए। दिल्ली में कोई नाथ नहीं हो सकता वहां सिर्फ दास होने चाहिए। कांग्रेसी मित्र आए दिन गुब्बारे छोड़ते रहते हैं। मोदी जवाब दे। मोदी जवाब दे। कांग्रेसी मित्रो, हमने तो 10 महीने पहले ही एग्जाम दिया है। लोकतंत्र में जनता ही इम्तिहान लेती है।'
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इसलिए मैं आपके सामने जिंदा हूं: नरेंद्र मोदी
ibnkhabar.com | Nov 01, 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/111087/12
पुणे। बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आज पुणे पहुंचे और अपने भाषण के दौरान कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। मोदी ने कांग्रेस को महंगाई के मुद्दे पर घेरा। साथ ही मोदी ने कांग्रेस सरकार पर उन्हें सीबीआई द्वारा फंसाने की कोशिश का भी आरोप लगाया।

पुणे में दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में मोदी कांग्रेस और यूपीए सरकार पर खूब गरजे। मोदी ने कहा कि पिछले 12 साल में कोई दिन ऐसा नहीं है जब इन्होंने मुझपर जुल्म ना किए हों। अगर ईश्वर ने मुझे सही रास्ते पर चलने की शक्ति नहीं दी होती तो मैं जिंदा भी नहीं रह पाता। सच्चाई का रास्ता है और जनता का आशीर्वाद है कि मैं आपके सामने जिंदा हूं।

मोदी ने कहा कि मेरे पीछे सीबीआई को लगा दिया गया है। अब इन्हें सीबीआई पर भी भरोसा नहीं रहा है। अब पता नहीं कौन सा रास्ता अपनाएंगे। लेकिन मुझे देश की जनता पर भरोसा है। हम जीएंगे तो आपके लिए और अगर जरूरत पड़ी तो ये जीवन भी आपके लिए देंगे।

मोदी ने कहा कि दिल्ली में बैठी सरकार अपने कार्यकाल में क्य़ा किया, इसका जवाब नहीं दे रही है। हमारे देश के मीडिया के लोग भी उन तक पहुंच नहीं पाते हैं। मीडिया की बातों का जवाब नहीं देते हैं। कांग्रेस को इतना अहंकार हो गया है कि मीडिया को जवाब नहीं देती है।

आए दिन मोदी से सवाल पूछे जा रहे हैं। मैं देश की जनता को वादा करता हूं। 2014 में जब देश की जनता बीजेपी को आशीर्वाद देगी। भाजपा हर साल जनता के सामने अपना हिसाब प्रस्तुत करेगी। लोकतंत्र में दिल्ली में शासक नहीं सेवक होना चाहिए। कांग्रेस आए दिन मुझ पर कीचड़ उछालती रहती है। 2012 में गुजरात विधानसभा में भी कांग्रेस ने 5 साल तक यही किया। लेकिन जनता ने बीजेपी को ही मौका दिया। हम तो अभी एक्जाम दे चुके हैं। हमारे काम का हिसाब हम देकर आए हैं।

मोदी ने कहा, मैं आज यूपीए सरकार से सवाल पूछता हूं कि यूपीए सरकार ने 100 दिन में महंगाई कम करने का वादा किया था। क्या महंगाई घटी, ये वादाखिलाफी है या नहीं। जो झूठे वादे करते हैं उन्हें एक पल भी दिल्ली में रहने का अधिकार नहीं है। जिन्होंने वादाखिलाफी की है उनको सीख देनी चाहिए या नहीं। आज ऐसी आंधी आई है कि कांग्रेस का बचना मुश्किल है। मोदी ने कहा कि इस सरकार में महंगाई के चलते गरीब आदमी दो वक्त का खाना नहीं खा पा रहा है। लोकतंत्र में जो भी सरकार हो उसकी जनता के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए। जनता को जवाब मांगने का अधिकार है। 

नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें-भारत रत्न लता मंगेशकर




लता दीदी बोलीं, मैं चाहती हूं मोदी पीएम बनें
आईबीएन-7 | 01 Nov 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/111099/1

पुणे। भारत रत्न लता मंगेशकर ने कहा है कि उनकी इच्छा है कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने कि हर कोई चाहता है कि मोदी देश का प्रधानमंत्री बनें। लता जी ने कहा कि हमारी शुभकामनाएं नरेंद्र मोदी के साथ है। मोदी पुणे में दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल के उद्घाटन समारोह में लता मंगेशकर के साथ मंच साझा कर रहे हैं। इस मौके पर लता मंगेशकर की छोटी बहन और मशहूर गायिका आशा भोसले भी मौजूद थीं।

वहीं इस मौके पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि लता जी ने जो सम्मान दिया इसके वो उनका सदा आभारी रहेंगे। मोदी ने कहा लता जी का आशीर्वाद ही उनके लिए सबसे बड़ा तोहफा है। वहीं जेडीयू और एनसीपी ने साफ कह दिया कि भले ही लता के गीत लोग सुनें लेकिन उनकी बात सुनकर मोदी को वोट नहीं मिलने वाले।

सरदार पटेल ने चीन की कूटनीतिक चाल के प्रति आशंका जाहिर की थी



जब से गुजरात  मुख्यमंत्री और भाजपा की ओर से प्रस्तावित आगामी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने , भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री सरदार वल्ल्भ भाई पटेल को याद करना प्रारंभ् किया और उनकी विशाल प्रतिमा को स्थापित करने की योजना बनाई , तब से ही कोंग्रेस को अचानक पटेल याद आने लगे !!!
अन्यथा सारी सरकारी योजनाएं सिर्फ नेहरू खान दान के इर्दगिर्द ही रखी गई हैं !!! गैर नेहरू कोंग्रेसी को इस तरह भुला दिया गया जैसे उनका कोई योगदान ही नही हो ॥

जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी की गलतियों को देश भुगत रहा है आने वाले समय में हमारी पीढ़ियां इन्हे क्या कहेंगी यह तो समय ही बतायेगा , मगर सरदार पटेल समय के साथ और बड़े कद के होनें वाले हैं यह सच हे ! क्यों कि उन्होंने देशहित से कभी समझोता नहीं किया , इसी कारण रियासतों का एकीकरण हुआ और वे चीन के प्रति कितने सतर्क और चिंतित थे इसका भी उदाहरण यह पत्र है !!!! नेहरू की गलती से तिब्ब्त चीन ने निगल लिया ! मगर पटेल का पत्र इतिहास को यह बताता रहेगा कि सावधानी रखी गई होती तो तस्वीर और होती। पटेल कोंग्रेसी होने से नहीं अपितु देशभक्त होने से आने वाले इतिहास में और बड़े आदरणीय  नेता के रूप में उभरेँगे  !!! उनकी प्रस्तावित प्रतिमा उनके महान कार्यों के ही अनुरूप है ! ईश्वर करे यह जल्द स्थापित हो !!


सरदार पटेल का खत पंडित नेहरू के नाम
Issue Dated: जून 26, 2011
http://www.thesundayindian.com/hi/story/history-letter-patel-letter-to-nehru/12/4187/
यह पत्र भारत के तत्कालीन गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को लिखा था. इस पत्र में उन्होंने चीन की कूटनीतिक चाल के प्रति आशंका जाहिर की थी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि चीन भारतीय राजदूत को यह समझाने में सफल रहा है कि वह तिब्बत की समस्या को सुलझाना चाहता है. उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि तिब्बत ने भारत पर भरोसा किया है पर परेशानी यह है कि भारत तिब्बतियों की मदद करने में खुद को असमर्थ पा रहा है.

मेरे प्रिय जवाहरलाल,
चीन सरकार ने हमें अपने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के आडंबर में उलझाने का प्रयास किया है. मेरा यह मानना है कि वह हमारे राजदूत के मन में यह झूठा विश्वास कायम करने में सफल रहे कि चीन, तिब्बत की समस्या को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहता है. चीन की अंतिम चाल, मेरे विचार से कपट और विश्वासघात जैसी ही है. तिब्बतियों ने हम पर विश्वास किया है. हम उनका मार्गदर्शन भी करते रहे हैं और अब हम ही उन्हें चीनी कूटनीति या चीनी दुर्भावना के जाल से बचाने में असमर्थ हैं. यह दुखद बात है. ताजा प्राप्त सूचनाओं से ऐसा लग रहा है कि हम दलाई लामा को भी नहीं निकाल पाएंगे. यह असंभव ही है कि कोई भी संवेदनशील व्यक्ति तिब्बत में एंग्लो-अमेरिकन दुरभिसंधि से चीन के समक्ष उत्पन्न तथाकथित खतरे के बारे में विश्वास करेगा.
पिछले कई महीनों से रूसी गुट से परे केवल हम ही अकेले थे, जिन्होंने चीन को संयुक्तराष्ट्र की सदस्यता दिलवाने की कोशिश की. हमने फारमोसा के प्रश्न पर अमेरिका से कुछ न करने का आश्वासन भी लिया. मुझे इसमें संदेह है कि चीन को अपनी सदिच्छाओं, मैत्रीपूर्ण उद्देश्यों और निष्कपट भावनाओं के बारे में बताने के लिए हम जितना कुछ कर चुके हैं, उसमें आगे भी कुछ किया जा सकता है. हमें भेजा गया उनका अंतिम टेलीग्राम घोर अशिष्टता का नमूना है. इसमें न केवल तिब्बत में चीनी सेनाओं के घुसने के प्रति हमारे विरोध को खारिज किया गया है, बल्कि परोक्ष रूप से यह गंभीर संकेत भी दिया गया है कि हम विदेशी प्रभाव में आकर ऐसा रवैया अपना रहे हैं. उनके टेलीग्राम की भाषा साफ बताती है कि यह किसी दोस्त की नहीं, बल्कि भावी शत्रु की भाषा है.
हमें इस नई स्थिति को देखना और संभालना होगा. तिब्बत के गायब हो जाने के बाद हमें यह पता था चीन हमारे दरवाजे तक पहुंच गया है. कभी भी हमें अपनी उत्तर-पूर्वी सीमा की चिंता नहीं हुई है. हिमालय शृंखला उत्तर से आने वाले किसी भी खतरे के प्रति एक अभेद्य अवरोध की भूमिका निभाती रही है. तिब्बत हमारे एक मित्र के रूप में था, इसलिए हमें कभी समस्या नहीं हुई. हमने तिब्बत के साथ एक स्वतंत्र संधि कर हमेशा उसकी स्वायत्तता का सम्मान किया है. उत्तर-पूर्वी सीमा के अस्पष्ट सीमा वाले राज्य और हमारे देश में चीन के प्रति लगाव रखने वाले लोग कभी भी समस्या का कारण बन सकते हैं. चीन की कुदृष्टि हमारी ओर वाले हिमालयी इलाकों तक ही सीमित नहीं है. वह असम के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों पर भी नजर गड़ाए हुए है. बर्मा पर भी उसकी नजर है.
बर्मा के साथ और भी समस्या है, क्योंकि उसकी सीमा को निर्धारित करने वाली कोई रेखा नहीं है, जिसके आधार पर वह कोई समझौता कर सके. हमारे उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में नेपाल, भूटान, सिक्किम, दार्जिलिंग और असम के आदिवासी क्षेत्र आते हैं. संचार की दृष्टि से उधर हमारे साधन बड़े ही कमजोर व अपर्याप्त हैं, सो यह क्षेत्र 'कमजोर' है. उधर कोई स्थायी मोर्चा भी नहीं है. इसलिए घुसपैठ के अनेक रास्ते हैं. मेरे विचार से अब आत्मसंतुष्ट रहने या आगे-पीछे सोचने का समय नहीं है. हमारे मन में यह स्पष्ट धारणा होनी चाहिए कि हमें क्या प्राप्त करना है और किन साधनों से प्राप्त करना है. इन खतरों के अलावा हमें गंभीर आंतरिक संकटों का भी सामना करना पड़ सकता है. मैंने एचवीआर आयंगर को पहले ही कह दिया है कि वह इन मामलों की गुप्तचर रिपोर्टों की एक प्रति विदेश मंत्रालय का भेज दें. निश्चित रूप से सभी समस्याओं को बता पाना मेरे लिए थकाऊ और लगभग असंभव होगा, लेकिन समस्याओं का तत्काल समाधान करना होगा.

आपका
सरदार वल्लभ भाई पटेल

देश को वोट बैंक वाला सेक्युलरिज्म नहीं चाहिए : नरेंद्र मोदी



देश को सरदार पटेल वाला सेक्युलरिज्म चाहिए, वोट बैंक वाला नहीं: नरेंद्र मोदी
आज तक वेब ब्यूरो [Edited By: सौरभ द्विवेदी] | भरूच, 31 अक्टूबर 2013 |

बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पटेल जयंती पर कहा कि देश को सरदार पटेल के सेक्युलरिज्म की जरूरत है, वोट बैंक के सेक्युलरिज्म की नहीं. वह गुजरात के भरूच में 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के शिलान्यास कार्यक्रम में बोल रहे थे. प्रस्तावित सरदार पटेल की मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होगी. इसकी ऊंचाई 182 मीटर होगी और इसका चेहरा नर्मदा बांध की ओर होगा. यह अमेरिका की मशहूर 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' से दोगुना ऊंची होगी. 2500 करोड़ के खर्च वाली इस योजना को मोदी ने बड़ी चालाकी से प्रदेश के विकास, आकर्षण, देश के गौरव और पटेल के सपने से जोड़ा.

उन्होंने संकेतों में कहा कि सरदार पटेल की यह प्रतिमा भारत को वैसा स्थान दिला सकती है जैसा चीन को उसके विकसित शहर शंघाई ने या जापान को बुलेट ट्रेन ने दिलाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अब हल्के में लेने के दिन अब लद गए हैं.

पढ़िए उनका भाषण ज्यों का त्यों.

भाइयों-बहनों
नर्मदा के तट पर आज नए इतिहास और नए संकल्प का शिलान्यास हो रहा है. कई सालों से इस सपने को मैंने मन में संजोया था. कई लोगों ने इस सपने में रंग भरे थे, सुझाव दिए थे. कई मनोमंथन के बाद इस योजना गर्भाधान हुआ. अनेक लोगों का मार्गदर्शन, प्रेरणा, आशीर्वाद मिला. उन सबका अभिनंदन-नमन करता हूं. यह हम सबका सपना है.

नर्मदा जिला छोटा जिला है, इसके विकास के लिए और आने वाले दिनों में यह काम और सरलता से हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कई फैसले हुए हैं. लेकिन सबका मूल्यांकन करने के बाद सरकार को लगा कि अच्छा होगा कि इस काम को गति देने के लिए यहां एक छोटे से तालुका (कस्बा) का निर्माण हो.

मुझे पानी के मुद्दे पर कई सुझाव आए. आदिवासी भाइयों का पूरा अधिकार है, पानी उनको मिलेगा. किसानों को भी पानी मिलेगा. हमने टेक्निकल सॉल्यूशन खोजा है. नर्मदा के बाएं किनारे को भी सिंचाई का लाभ मिले, इसके लिए भी काम किया जाएगा.

नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध और इसके जरिये गुजरात-राजस्थान में पानी पहुंचाने का प्रयास सरदार पटेल का सपना था. किसी जमाने में प्यासों के लिए पानी की मटकी भी घर के बाहर रखने वालों को समाज आदर से देखता था. हमारे यहां, खास तौर से गुजरात-राजस्थान में पानी का मू्ल्य है, क्योंकि हमने पानी की तंगी झेली है.

आज भी गुजरात सरकार का सबसे ज्यादा बजट पानी के काम के लिए दिया जाता है. सरदार सरोवर बांध परियोजना के लिए पिछली सरकारों ने जितना खर्च किया, उससे डबल खर्च हमारी सरकार ने पिछले दस सालों में किया. लेकिन इस सारे काम का सपना सरदार पटेल ने देखा. यह उन्हीं के सपने पर सारा काम हो रहा है.

अगर हम पानी की व्यवस्था न कर पाते तो कहां होते, कौन जानता हमें. गुजरात में नेगेटिव ग्रोथ थी, लोग छोड़कर जा रहे थे. आज राजस्थान के किसी भी व्यक्ति से मिलते हैं तो कहता है कि आपने बहुत अच्छा काम किया, जो हमें पानी दिया. इस सबके लिए सरदार पटेल जिम्मेदार हैं.

अब भी गुलामी का इतना बोझ है, आजादी के इतने साल बाद भी. हम गुलामी की छाया से अब तक निकल नहीं पाए हैं. और हमने गुलामी की छाया से निकलने के लिए इस गुलामी के साये को तोड़ने के लिए कुछ ऐसे काम करने होंगे. जिसके कारण हम गर्व के साथ आत्मसम्मान के साथ दुनिया के सामने खड़े हों. आज मैं आपको याद दिलाता हूं. 15-17 साल पहले हिंदु्स्तान में जब बजट पेश किया जाता था, तो उसे शाम को पांच बजे पार्लियामेंट में रखा जाता था. आजादी के पचास साल बाद भी ऐसा होता था. किसी ने सोचा ये क्यों ऐसा था. इसलिए था क्योंकि अंग्रेजों के जमाने से परंपरा थी. जब हमारे यहां शाम के पांच बजते थे, तब ब्रिटेन में 11 बजते थे और उस समय उनके यहां संसद का काम शुरू होता था. जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री बने तब यह परंपरा तोड़ी गई औऱ सुबह 11 बजे बजट रखा जाना शुरू हुआ.

हमारी सोच में पता भी नहीं चलता है कि गुलामी किस कदर दबोच रही है. मित्रों इस सोच के सामने एक स्वाभिमान के साथ खड़े होने की आवश्यकता है. भारत को हीन भाव से देखे जाने की आदत सी हो गई है. भारत से हो, चलो बाजू जाओ. जब वाजपेयी जी ने शासन में आने के कुछ ही समय बाद परमाणु बम विस्फोट किया, तो पूरी दुनिया ने लोहा माना. दुनिया अब हिंदुस्तान का नाम सुनती है, तो कहती है, हां कुछ तो है. मित्रों दुनिया के अंदर हमारे देश का कोई नागरिक क्यों न हो. कोई परंपरा क्यों न हो. आज के युग में समय की मांग की. हिंदुस्तान आजाद होने के बाद भी अगर दूसरे देशों को गौरव से देखा जाता हो, तो हमारे हिंदुस्तान को क्यों न देखा जाए

किसी जमाने में चाइना को कौन देखता था. चाइना ने एक शंघाई बना दिया. दुनिया के सामने पेश कर दिया. लोगों की चाइना की तरफ सोचने की आदत बदल गई. ये जो पुराने पर नया चाइना बना, शांघाई के आसपास बना. जापान ने जब बड़ी स्पीड की बुलेट ट्रेन बनाई तो दुनिया ने कहा, अरे भाई कुछ तो है. अमेरिका ने अरबों डॉलर खर्च कर चांद पर भेजा, दुनिया ने लोहा माना.

हमारा भी एक ग्लोबल पोजिशनिंग करना चाहिए. सवा अऱब का देश एक ताकत बनकर उभरना चाहिए। अनेक मार्ग हो सकते हैं. अनेक क्रिया प्रतिक्रिया हो सकती हैं.

आज ये सरदार पटेल का स्मारक सिर्फ...सरदार सरोवर डैम बना, सरदार साहब का सपना पूरा हुआ. वो हमारे गुजरात के थे. मगर ये सपना बहुत बड़ा है. ये भव्य स्मारक. जिसकी ऊंचाई हिंदुस्तान की तरह देखने के लिए मजबूर करेगी.

इतने बड़े राजे रजवाड़ों को एक करने का काम. अंग्रेजों की कुटिल कूटनीति का पर्दाफाश, ये भारत का सामर्थ हम दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं. अगर इतिहास की धरोहर देखें तो चाणक्य के बाद इस देश को एक करने का काम किसी ने किया, तो वह हैं सरदार पटेल.

क्या हम राणा प्रताप का सम्मान करेंगे. हम छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान करेंगे. हम भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु का सम्मान करेंगे. क्या वो बीजेपी के मेंबर थे क्या. क्या उन्हीं का सम्मान होगा देश में, जो भाजपा का सदस्य हो.

दल से बड़ा देश होता है. और देश के लिए मरने वाला हमारे लिए सबसे बढ़कर है. और इसीलिए सरदार साहब को किसी दल के साथ जोड़ना उनका अपमान है. वो दल उनके इतिहास का हिस्सा है. इससे नरेंद्र मोदी भी इनकार नहीं कर सकता.

हमें विरासत को कभी बांटना नहीं चाहिए. हमारी विरासतें सांझी होती हैं. लेकिन देश आजाद होने के बाद गांधी जी छुआछूत के खिलाफ जीवन भर लड़ते रहे. मगर ये जो नई राजनीतिक छुआछूत बढ़ गई है. हम इसे भी नष्ट करें.

मित्रों मुझे दो दिन पूर्व पीएम से मिलने का अवसर मिला. उन्होंने एक बात बहुत अच्छी कही. मैं आभार व्यक्त करता हूं. मीडिया के मित्र समझ नहीं आए. बात उलटी तरफ चली. हो सकता है उनकी रोजी रोटी की डिमांड थे.

पीएम ने कहा कि सरदार साहब सच्चे सेकुलर थे. हम भी कहते हैं कि देश को सरदार साहब वाला सेकुलरिज्म चाहिए. वोट बैंक वाला नहीं. और इसलिए प्रधानमंत्री जी, सरदार साहब का सेकुलरिज्म चाहिए इस देश को.

भारत एक हुआ. राजे रजवाड़े किसी एक संप्रदाय या समाज के नहीं थे. सब अलग अलग परंपराओँ से थे.

इसलिए मित्रों मैं भारत के प्रधानमंत्री का अभिनंदन करता हूं. आग्रह करता हूं. हम सब मिलकर सरदार साहब का सेकुलरिज्म आगे बढ़ाएं

कुछ लोगों के मन में आता होगा क्यों इतना बड़ा स्मारक. बाबा साहेब आंबेडकर, उनके कई स्मारक हैं. मगर मानना पड़ेगा कि दलित शोषित समाज के लिए वह भगवान का रूप हैं. और जो भी पीड़ित दलितों के लिए भला चाहते हैं, उन्हें बाबा साहेब आंबेडकर को प्रेरणा मिलती है. तब ये नहीं पूछा जाता कि वो किस दल से थे. उनका जीवन हमें प्रेरणा देता है.

ये सांझी विरासत है, हम सबको गर्व होना चाहिए. हम सबका दिल देश के लिए होना चाहिए.

नई पीढ़ी को कहा पता चलेगा कि लौह पुरुष कैसे हुए। वो कौन सी शक्ति थी उनके अंदर. हम सरदार साहब का स्मारक बनाने के साथ साथ हिंदुस्तान के कोने कोने में फिर से एक बार एकता का मंत्र पहुंचाना चाहते हैं. हम इस बात से भली भांति परिचित हैं.कि भारत की प्रगति शांति एकता और सदभाव के बिना नहीं हो सकती. मां के दूध में कभी दरार नहीं हो सकती. प्रांतवाद के झगड़े, भाषावाद के झगड़े, जातिवाद और ऊंच नीच के झगड़े. इन चीजों ने हमारे देश को तबाह कर दिया. किसी दल के किसी राजनेता की झोली तो भर गई होगी, लेकिन मेरी भारत मां का गौरव क्षीण हुआ. अगर हमें वो गौरव फिर से हासिल करना है, तो एकता के मंत्र को घर घऱ तक पहुंचाना होगा. इस स्मारक के जरिए सरदार साहब के सपनों का स्मरण करते हुए, उनकी आवाज जिसे कई बरसों से दबोचा गया था. उसे बुलंद करके. कई लोगों ने सरदार साहब की आवाज पहली बार सुनी होगी. रोंगटे खड़े हो गएं. मन में फीलिंग आता है.

हमने सबसे पहले महात्मा मंदिर बनाया. ये मजे की बात है, जब हमने ये मंदिर बनाया. काम अभी भी चल रहा है. लेकिन उस समय हमें किसी ने चैलेंज किया, कि मोदी तुम तो बीजेपी वाले हो, गांधी बीजेपी में नहीं थे. तो क्यों बना रहे हो. मगर जब सरदार साहब की बात आई, तो परेशानी क्यों हो रही है. मित्रों आज गुजरात गर्व महसूस कर रहा है. पहले 31 अक्टूबर को जो सरकारी एड आते थे, उसमें सरदार साहब कहीं नहीं होते थे. आज ऐसा नहीं है. ये गुजरात इफेक्ट है. हमारे महापुरुषों को भुला कैसे दिया जा सकता है.हमारी भी किसी ने आलोचना की हो, तब भी उनके महान कामों की पूजा करना आगे वाली पीढ़ी का काम होता है. हमारी कोशिश है कि हिंदुस्तान की आने वाली पीढ़ी इतिहास को जिए और जाने ये हमारा प्रयास है.

कोई समाज अपने इतिहास को भूलकर के, अपने इतिहास के ग्रासरूट से अगर बिखर जाता है, तो जैसे मूल से उखड़ा हुआ पेड़ कितना भी बड़ा क्यों न हो. वैसे ही समाज की धारा सूख जाती है, इतिहास से उसको ताकत और प्रेरणा मिलती है. रास्ते खोजने को मिलते हैं. हमारे देश के लिए अगर समाज के मन में आवश्यकता है. तो हमारे समाज का इतिहास बोध होना चाहिए.

ये सरदार साहब की प्रतिमा के माध्यम से हम आने वाली पीढ़ी को वो नजराना देना चाहते हैं. भाइयों बहनों ये मूर्ति कैसे बनेगी. इसमें हम दुनिया भर के एक्सपर्ट लगाएंगे. छोटा काम नहीं है. कितनी धातुओं को मिलना होगा.

ये बता देता हूं कि मूर्ति ऐसी बनेगी, जो सदियों तक सलामत रहे. इस काम को हम हिंदुस्तान की एकता के लिए जोड़ना चाहते हैं. इसलिए तिजोरी से रुपये निकाल मूर्ति बन जाए. ये नहीं चाहते. जन जन को जोड़ना चाहते हैं. क्योंकि सरदार साहब ने एकता का काम किया था, वही सरदार साहब का संदेश बन जाए, इसलिए हर गांव को जोड़ना चाहते हैं. उनसे हम कुछ मांग रहे हैं. क्या मांग रहे हैं. कुछ लोगों ने गंदे शब्द प्रयोग किए। उनके दिमाग में गंदगी है.

किसान, उसके घर में तलवार तोप भी है, तब भी वह सबसे ज्यादा किसी को प्रेम करता है, तो खेती के औजार को करता है. उसके लिए वह सबसे ज्यादा मूल्यवान होता है. सरदार वल्लभ भाई पटेल किसान थे, लौह पुरुष थे. सरदार पटेल ने एकता का काम किया था. इसलिए हिंदुस्तान के हर कोने को जोड़ना है. वह किसान थे, इसलिए किसान को जोड़ना है. वह लौह पुरुष थे, इसलिए लोहे को मांगना है. हमने हर गांव पंचायत से प्रार्थना की है. कि किसान ने खेत के अंदर जिस औजार का प्रयोग किया है. वो औजार जो भारत मां की गोद में खेला है. जिसने गरीब के पेट को भरने के लिए भारत मां के साथ कष्ट झेला है. मुझे तोप नहीं चाहिए. मुझे तलवार चाहिए. मुझे तो मेरे किसान ने खेत में जो औजार इस्तेमाल किया है, उसका टुकड़ा चाहिए. उसे पिघलाएंगे. अच्छे से अच्छा स्टील निकालेंगे. उस लोहे का अर्क उस मूर्ति में जगह पाएगा, तब हिंदुस्तान का हर नागरिक कहेगा, मेरा गांव भी इसमें है.

हम गांव के मुखिया के तस्वीर लेंगे, गांव का छोटा सा इतिहास लेंगे. पूरा स्मारक बनेगा, उसमें एक वर्चुअल वर्ल्ड होगा, जिसमें हिंदुस्तान के सात लाख गांवों की तस्वीर होगी, कथा होगी, कोई पचास साल बाद आएगा, तो अपने गांव का इतिहास देखेगा.ये पवित्र काम हम करेंगे.

आज देश में ताज महल देखने के लिए यात्री आते हैं. अमेरिका में स्टेचू ऑफ लिबर्टी देखने के लिए यात्री जाएंगे. हम चाहते हैं ये पूरे विश्व के लिए महान केंद्र बने. हमारी ऊंचाई को देखे. इस देश की ऊंचाई को नापे. और जब ये पूरा स्मारक बनेगा. हम देशवासियों के लिए वह प्रेरणा का तीर्थ होगा. विश्व भर के लिए प्रवासन का धाम बन जाएगा. हर एक को अपने अपने लिए जो चाहिए वो मिलेगा.

इस स्मारक में भारत के भविष्य को हमने जोड़ा है. देश में आदिवासियों के कल्याण के लिए चाहे जिस सरकार ने जो काम किए हों. उन सबको हम संग्रहित करना चाहते हैं. मेरे आदिवासी भाई बहनों के जीवन में नया उमंग उत्साह कैसे आए, वे संपन्न कैसे बनें. अगुवा कैसे बनें. उसके रिसर्च का काम भी इसी स्मारक के तहत हो.
ये देश गांव का देश है. पटेल किसान पुत्र थे. किसान के कल्याण के लिए कौन से नए विज्ञान की जरूरत है, गांव आधुनिकता की तरफ कैसे बढ़े. किसान आधुनिकता के मार्ग को कैसे आगे बढ़ाए. ये उनको शिक्षा दीक्षा कैसे मिले, एग्रीकल्चर के लिए. गांव गरीब किसान के लिए. ये काम भी हम इससे जोड़ना चाहते हैं.

मित्रों दुनिया में इस काम को करने वाली श्रेष्ठ कंपनियों को बुलाया है. तीन साल पहले उस कल्पना को सामने रखा. उसे साकार करने के लिए एक्सपर्ट आए. तीन साल उसके पहलुओं की बारीकी में लगे. तब जाकर हम इसे आगे बढ़ा रहे है. जब हमने पहली बार कहा था इस काम का. मुझे कच्छ के लोगों ने चांदी से तौलकर भेंट दी थी. मैंने पूछा, भई अभी इतनी जल्दी क्यों दे रहे हो. अभी तो योजना बन रही है. तब कच्छ के लोगों ने जवाब दिया. मोदी जी, अगर सरदार साहब न होते, इस बांध का सपना न देखा होता, तो हमारे कच्छ में पानी न पहुंचता, हम उनके कर्जदार हैं. मुंबई गया. वहां चांदी से तौला, वह भी इसी में लगेगा.

हमें हिंदुस्तान के जन जन को जोड़ना है. शासन, जन देश की शक्ति, भारत सरकार की शक्ति सबको जोड़ना है. धरती भले गुजरात की हो, सपना हिंदुस्तान का है.

हम कई बरसों से कह रहे हैं कि सरदार सरोवर बांध का काम पूरा हो. मगर कुछ लोग हैं, जो बयान नहीं देते, पेट में रोटी नहीं जाते. कुछ मित्रों ने मोदी को समाप्त करने की सुपारी फैलाई है. पता नहीं क्या क्या गंध फैलाते रहते हैं.

मुझे पता कि पीएम की टीम हर शब्द सुनती है, उनके बॉस की टीम सुनती है. इसलिए मैं कहना चाहता हूं, सरदार सरोवर डैम में बस गेट लगाना बाकी है. बाकी काम हो चुका है. गेट के बाद ही सबसे ज्यादा पानी भरेगा. कई बार पीएम से मिला. कहा, तीन साल लगेंगे. बंद मत करने देना, खड़े तो करने तो, मिले पीएम तो बोले कि बात तो आपकी समझने की है. एक साल बाद मिला, तो बोले कि अरे अभी तक नहीं हुआ. फिर मिले तो फिर वही बात.

इतना ही नहीं एमपी वगैरह में पुनर्वास को देखने के लिए पूर्व जजों की अध्यक्षता में कमेटी हो. भले महाराष्ट्र में कांग्रेस की और बाकी दो में हमारी सरकार हो. इन तीनों राज्यों ने पुनर्वास का काम पूरा कर दिया. भारत सरकार की कमेटी ने स्वीकार कर लिया. मौखिक रूप से कहा, अखबारों में छपा. अब बस मीटिंग बुलाकर फाइनल ऑर्डर देना है. गेट बना लीजिए. पिछले आठ महीनों से रुका पड़ा है. मैं अफसरों से कहता हूं. पूछो क्या तकलीफ है.साहब आप समझते तो हैं. मैं खुला बोलूं. समझ गए न. मुझे नहीं बोलना.

इसीलिए काम रुका है. मैं आज फिर नर्मदा मैया के तट से पीएम को आग्रह करता हूं. महाराष्ट्र गुजरात को पानी चाहिए. मध्य प्रदेश को बिजली चाहिए. महाराष्ट्र का चार सौ करोड़ मिल जाएगा.

मैं यहां बड़ा शिलालेख लगाने को तैयार हूं. ये काम केंद्र सरकार ने किया. मोदी का नाम भी मत लो. कम से कम डैम का काम पूरा करने की इजाजत दो. ऐसे काम में राजनीति नहीं होनी चाहिए. भाइयों बहनों मैं आशा करता हं. इस नर्मदा के तट पर, गुजरात के पशुओं की, गरीबों की, किसानों की, पेड़ पौधों की आवाज देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी. दल से बड़ा देश होता है, ये भाव उनके मन में जगेगा और भारत के लिए इतना बड़ा अच्छा काम, पूरा करें, गर्व करें, रिबन कटें. वो चाहें तो मैं आऊंगा नहीं. मैं आज कहता हूं आपका है. आप आनंद कीजिए, मगर पूरा कीजिए.

भाइयों बहनों, आज जब हम एकता का मंत्र लेकर चले हैं, तब देश को जोड़ना ये सपना लेकर चले हैं तब, सरदार पटेल के भव्य स्मारक का निर्माण करने जा रहे हैं तब, विश्व का सबसे ऊंचा स्टेचू ऑफ लिबर्टी से दो गुना बड़ा, उसका निर्माण करने जा रहे हैं तब, एकता का स्मारक है, एकता का संदेश है, भाषा अनेक, भाव एक, राज्य अनेक, राष्ट्र एक, पंथ अनेक, लक्ष्य एक. बोली अनेक, स्वर एक, रंग अनेक, तिरंगा एक, समाज अनेक, भारत एक, रिवाज अनेक, संस्कार एक, कार्य अनेक, संकल्प एक, राह अनेक, मंजिल एक, चेहरे अनेक, मुस्कान एक. ये एकता का संदेश हम लेकर चले और भाइयों बहनों. ये भारत की विशेषता है,विविधता में एकता.
हम अनेक संप्रदाय पंथ बोली भाषा होंगे, हम सब एक हैं.हमारी एकता की गारंटी ही. हमारे उज्जवल भविष्य की गारंटी है. इस स्मारक से सदियों तक एकता को बनाए रखने का काम इसी तीर्थ क्षेत्र से मिले.

मैं आदरणीय आडवाणी जी का बहुत आभारी हूं. सरदार साहब से उनका लगाव रहा है. इस महान काम में उनका आशीर्वाद मिले, इसके लिए आभारी हूं. देश से प्रार्थना है, हर गांव मिलकर जिम्मेदारी ले. 15 दिसंबर को उनके जम्मदिन के दिन रन फॉर यूनिटी है, देश के नौजवान दौड़ें. हर स्कूल कॉलेज में भाषण हों. निबंध प्रतियोगिता हों. पूरे देश में एकता का ही माहौल बने.

राष्ट्रयाम जाग्रयाम वयम. एकता के लिए निरंतर जागरण चाहिए. पुण्य स्मरण चाहिए. एकता के लिए एक होकर चलना चाहिए. सोचना चाहिए, इस मंत्र को पहुंचाने के लिए आज पवित्र काम का प्रारंभ हो रहा है.
दोनों हाथ ऊपर कर पूरी ताकत से बोलिए, सरदार पटेल अमर रहें.