सोमवार, 4 नवंबर 2013

प्री पोल सर्वे में भारी पराजय से घबराई कांग्रेस , बैन के पक्ष में



कांग्रेस भारी पराजय की ओर अग्रसर है,
वह ऐन केन प्रकारेण एक्जेक्ट प्री पोल के सर्वे रूकवानें में लगी है!
ताकि जनता की वास्तविक मानसिकता की अभिव्यक्ति रोकी जा सके!!

प्री पोल सर्वे पर बैन के पक्ष में अटॉर्नी जनरल भी!
आईबीएन-7 | Nov 04, 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/111205/12

नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखें जैसे-जैसे करीब आ रही हैं, कांग्रेस की धड़कनें तेज होने लगी हैं। कांग्रेस चाहती है कि चुनाव पूर्व सर्वे यानी ओपिनियन पोल को तुरंत बैन कर दिया जाए। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह इसकी सबसे तगड़ी पैरवी कर रहे हैं। अटॉर्नी जनरल जी. वाहनवती ने इसपर अपनी सहमति जता दी है लेकिन कानून मंत्रालय चाहता है कि इस पर आखिरी फैसला चुनाव आयोग करे।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों से ओपिनियन पोल पर राय मांगी थी कि क्या इसे बैन कर देना चाहिए। अक्टूबर के पहले हफ्ते में ये राय मांगी गई थी और कांग्रेस ने 30 अक्टूबर के अपने जवाब में चुनाव आयोग के इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से ओपिनियन पोल के बारे में कहा कि इसकी प्रक्रिया न तो वैज्ञानिक है और न ही पारदर्शी। ऐसे में ओपिनियन पोल से लोगों को गुमराह ही किया जा सकता है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि इसे पूरी तरह से बैन किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि आईबीएन7 और सीएसडीएस के ओपिनियन पोल में कांग्रेस तीन राज्यों में हार रही है जबकि दिल्ली में भी उसे आप पार्टी से कड़ी चुनौती मिल रही है। इस मुद्दे पर आईबीएन7 ने दिग्विजय सिंह से बात की तो उन्होंने ओपिनियन पोल को मजाक करार दिया और इस पर रोक लगाने की पुरजोर मांग की। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस अपनी घटती लोकप्रियता से घबराई हुई है। हाल ही में जितने ओपिनियन पोल आए उसमें कांग्रेस की बुरी हालत रही है। ऐसे में कांग्रेस की ओपिनियन पोल पर राय चौंकाने वाली नहीं है।.
बीजेपी के अलावा जेडीयू ने भी कांग्रेस को घेरा है। जेडीयू के मुताबिक सर्वे में अपना ग्राफ गिरता देख कांग्रेस तिलमिलाई हुई है। सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि कांग्रेस की यह राय उसकी घटती लोकप्रियता के कारण है। बीएसपी के पूर्व नेता विजय बहादुर भी कांग्रेस की मांग को गलत बता रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि ओपिनियन पोल पर बैन नहीं लगना चाहिए। कांग्रेस बुरी तरह से हार रही है। उसका करप्शन, बेरोजगारी में कोई जोड़ नहीं है। कोई इंटरनल सिक्योरिटी नहीं है।

उमर अब्दुल्ला ने माना , देश में है मोदी का असर




उमर अब्दुल्ला ने माना , देश में है मोदी  का असर

नई दिल्ली.  यूपीए की सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि देश की जनता पर नरेंद्र मोदी का असर तो है, लेकिन उनकी कोई लहर नहीं है। उमर के इस बयान पर राजनीति तेज हो गई है।
कांग्रेस ने कहा है कि मोदी जैसा नेता कभी इस देश का नेतृत्व नहीं कर सकता है। पार्टी के नेता जगदंबिका पाल ने कहा कि मोदी की छवि अच्छी नहीं है। वहीं, बीजेपी ने कहा है कि मोदी के असर को अब उमर मानने लगे हैं। बीजेपी के नेता कीर्ति आज़ाद ने कहा है कि धीरे-धीरे यह बात कांग्रेस को भी समझ में आ जाएगी।


मोदी की जान को आतंकी खतरा




मोदी की जान के पीछे पड़ा पाकिस्‍तान

dainikbhaskar.com   |  Nov 04, 2013,
मोदी की जान को खतरा!

बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की जान पर खतरा है। आईबी ने पंजाब पुलिस को इस बारे में अलर्ट भेजा है। अलर्ट के मुताबिक पाकिस्तान कट्टरपंथी सिखों के एक संगठन को भारी मात्रा में विस्फोटकों के साथ मोदी की रैली में भेजने की तैयारी में है।
अलर्ट के मुताबिक आतंकी संगठनों की हिट लिस्ट में नंबर एक पर मौजूद नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़नी लाजिमी है। हाल ही में पटना में हुई मोदी की हुंकार रैली स्थल के आसपास सात जगहों पर बम धमाके हुए थे। बम धमाकों के बाद नीतीश सरकार के सुरक्षा इंतजाम पर सवाल खड़े हो गए थे। इसके बाद मोदी की सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

मोदी ने पंचदेव के दर्शन किए 
तमाम खतरों की चेतावनी और अलर्ट के बावजूद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजराती नववर्ष के मौके पर गांधीनगर के पंचदेव मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान भारी सुरक्षा बंदोबस्त रहा। लेकिन इसके बावजूद मोदी की एक झलक पाने के लिए लोग बड़ी संख्या में मंदिर और और उसके आसपास देखे गए। इसके बाद मोदी भद्रकाली मंदिर में दर्शन किए। मंदिरों की यात्रा से पहले मोदी ने गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल से मुलाकात कर उन्हें गुजराती नववर्ष की बधाई दी। 

गोवर्धन पूजन : अहंकार के विनाश और प्रकृति के उपकार का पर्व





इंद्र के अहंकार के विनाश और प्रकृति के सहयोगी उपकार को नमन का पर्व
प्रकृति की उपासना का पर्व है गोवर्धन पूजन
वाई. सी. शर्मा / आभार नवभारत टाईम्स
http://navbharattimes.
      दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजन किया जाता है। इसके लिए महिलाएं गाय के गोबर से गोवर्धन की मानव आकृति बनाती हैं। उसके चारों तरफ गाय, बछड़े तथा अन्य पशुओं की भी आकृति बनाई जाती है। बीच में श्रीकृष्ण की तथा कहीं-कहीं पाँचों पांडवों की भी आकृति बनाने की परंपरा है। चारों तरफ गोबर की छोटी दीवार बनाकर उसके द्वार पर एक ग्वाले की भी आकृति बनाई जाती है और उसके हाथ में एक छोटी लकड़ी थमा दी जाती है। शाम को उसका पूजन किया जाता है। कहीं-कहीं गोवर्धन बनाने की औपचारिकता न कर गोबर का केवल ढेर इकट्ठा करके उसे पहाड़ की आकृति दे दी जाती है और उसी का पूजन किया जाता है।

        इसी दिन अन्नकूट का भी आयोजन होता है। अन्नकूट का अर्थ होता है अन्न का पहाड़। मूलतरू अन्नकूट का आयोजन गोवर्धन पूजन के निमित्त ही था। किन्तु अब कहीं-कहीं नवान्न से अन्नकूट का आयोजन प्रात: काल होता है तथा संध्या को गोवर्धन पूजन के लिए अलग से पकवान बना लिए जाते हैं। गोवर्धन के दिन एक और विशेष आयोजन होता है मुख्यतः  बैल पूजन , आजकल टेकटर पूजन का आयोजन ।
          गाय को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है और इसलिए कहीं-कहीं तो दीपावली के दिन ही  लक्ष्मी पूजन के बाद गऊ पूजन की परंपरा है। गोवर्धन के साथ तो गाय का विशेष संबंध है। इसलिए इस दिन गोधन के पूजन का, गाय, बछड़े तथा बैल का विशेष सम्मान / पूजा की जाती है। उन्हें विभिन्न रंगों में रंगा जाता है तथा उनके गले में माला, घंटियां, घुंघरू तथा अन्य इसी प्रकार के आभूषण पहनाए जाते हैं और तरह-तरह के पकवान खिलाए जाते हैं। इस दिन राजस्थान में कुछ स्थानों पर बैलों की दौड़ का भी आयोजन किया जाता है। छत्तीसगढ़ में इस दिन यादव लोग ढाल-तलवार से सज्जित होकर नाचते-गाते हैं।
         गोवर्धन पर्वत के महात्म्य के बारे में एक पौराणिक कथा प्रसिद्ध है। उस समय अन्नकूट पर देवराज इन्द्र की पूजा होती थी। इससे इन्द्र को अभिमान हो गया था। बृजवासियों का मानना था कि इन्द्र ही उनके लिए वर्षा करते हैं। कृष्ण ने कहा कि इंद्र की वजह से नहीं, गोवर्धन पर्वत की वजह से बृजभूमि धनधान्य से भरपूर रहती है। उनके कहने पर बृजवासियों ने इन्द्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा की। इससे क्रुद्ध होकर इन्द्र ने अपने मेघों को आदेश दिया कि वे वर्षा से बृजभूमि को डुबो दें। घनघोर वर्षा शुरू हुई तो बृजवासी घबराकर कृष्ण की शरण में गए। कृष्ण ने उन्हें अभय करते हुए कहा कि अब गोवर्धन ही उनकी सहायता करेंगे। कृष्ण ने अपनी तर्जनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सभी बृजवासी उसके नीचे आ गए। पूरे सात दिनों तक वर्षा होती रही, लेकिन बृजवासियों का वह कुछ भी नहीं बिगाड़ सकी।

         इस पौराणिक कथा में पहाड़ों तथा वृक्षों के महत्व की ओर संकेत है। संभव है इस कथा को अतिशयोक्ति से काल्पनिक स्वरूप दे दिया गया हो। पर किसी भी देवी-देवता की तुलना में प्राकृतिक सम्पदा को अधिक महत्व देने की दृष्टि से ही संभवत कृष्ण ने गोवर्धन पूजन की परंपरा शुरू की होगी और संयोगवश उसके तत्काल बाद घनघोर वर्षा शुरू हो गई होगी। उस वर्षा से बचने के लिए बृजवासियों ने कृष्ण के परामर्श के अनुसार गोवर्धन पर्वत पर चढ़कर अपनी रक्षा की होगी।

          हमारा देश कृषि प्रधान है और इसलिए हमारे अधिकतर त्योहारों का संबंध कृषि से ही रहा है। इस दृष्टि से गोवर्धन पूजन की परंपरा पूर्णतरू हमारी कृषि परंपरा पर आधारित है। यह पर्व हमें अभिमान से दूर रहने का संकेत अवश्य देता है, लेकिन उससे भी अधिक यह हमारे गोधन के महत्व पर प्रकाश डालता है। खाद के रूप में गोबर के विशिष्ट महत्व और उसके सदुपयोग की आवश्यकता पर बल देता है। यह हमारे जंगल और पहाड़ों के महत्व की तरफ संकेत करता है जो हमारे लिए और हमारे पशुधन के लिए अत्यन्त आवश्यक है। यदि हम इन संकेतों को समझकर उनके अनुरूप आचरण करें, तभी इस पर्व की सार्थकता है।