शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

सीबीआई गैरकानूनी : गुवाहाटी हाईकोर्ट



सीबीआई गैरकानूनी, अपराधों की जांच नहीं कर सकती : गुवाहाटी हाईकोर्ट
From NDTV India, 8 नवम्बर, 2013
http://navbharattimes.indiatimes.com
गुवाहाटी: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक चौंकाने वाले फैसले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को गैरकानूनी ठहरा दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में उस प्रस्ताव को रद्द कर दिया, जिसके तहत सीबीआई का गठन किया गया था। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी की सभी कार्रवाइयों को भी असंवैधानिक करार दिया है। केंद्र सरकार जल्दी ही सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देगी।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई का गठन निश्चित जरूरत को पूरा करने के लिए 'कुछ समय' के लिए ही किया गया था और गृह मंत्रालय का वह प्रस्ताव न केंद्रीय कैबिनेट का फैसला था और न ही उसके साथ राष्ट्रपति की स्वीकृति का कोई कार्यकारी आदेश है। कोर्ट ने कहा है कि अपराध की जांच करने वाली ऐसी एजेंसी, जिसके पास पुलिस बल की शक्तियां हों, उसकी स्थापना केवल एक कार्यकारी निर्देश के जरिये नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने कहा कि मामला दर्ज करने, आरोपियों को गिरफ्तार करने, तलाशी लेने जैसी सीबीआई की कार्रवाई संविधान की धारा-21 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने कहा कि हम 1 अप्रैल, 1963 के उस प्रस्ताव को खारिज करते हैं, जिसके तहत सीबीआई की स्थापना की गई। सीबीआई, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट यानी डीएसपीई का अंग नहीं है। कोर्ट ने कहा कि डीएसपीई कानून 1946 के तहत गठित एक पुलिस बल के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में इस प्रस्ताव को सिर्फ विभागीय निर्देश ही माना जा सकता है और उसे कानून के रूप में नहीं बदला जा सकता है।

किस बाबत आया यह फैसला
असम में बीएसएनएल के कमर्चारी नवेंद्र कुमार के खिलाफ 2001 में सीबीआई ने आपराधिक षडयंत्र रचने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था, जिसके बाद नवेंद्र ने संविधान के तहत सीबीआई के गठन को चुनौती देते हुए अपने खिलाफ दायर एफआईआर को खारिज करने की मांग की। हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

नवेंद्र ने इसके बाद हाईकोर्ट की डबल जज बेंच में याचिका दायर की, जिसके बाद जस्टिस इकबाल अहमद तथा जस्टिस इंदिरा शाह ने यह फैसला सुनाते हुए सीबीआई के गठन को असंवैधानिक करार दिया। हाईकोर्ट ने नवेंद्र के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट तथा मामले की सुनवाई को खारिज कर दिया।

लालकृष्ण आडवाणी : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ट नेता



लालकृष्ण आडवाणी
जन्म- 8 नवम्बर 1927 (आयु 86)
लालकृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ट नेता हैं। भारतीय जनता पार्टी को भारतीय राजनीति में एक प्रमुख पार्टी बनाने में उनका योगदान सर्वोपरि कहा जा सकता है। वे कई बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी शुक्रवार 8 नवंबर को 86 साल के हो गए हैं. आडवाणी को बधाई देने गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पहुंचे. लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवम्बर, 1927 को वर्तमान में पाकिस्तान तथा तत्कालीन भारत के कराची में हुआ था. उनके पिता श्री केडी आडवाणी और माता का नाम ज्ञानी आडवाणी था. आजादी के बाद पाकिस्तान के अलग होने पर आडवाणी भारत आ गए.लालकृष्ण आडवाणी 14 साल की उम्र में ही आरएसएस से जुड़ गए.
] भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ट नेता और भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री हैं। भारतीय जनता पार्टी को भारतीय राजनीति में एक प्रमुख पार्टी बनाने में उनका योगदान सर्वोपरि कहा जा सकता है। वे कई बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्‍व वाली गठबंधन सरकार में दो बार (1998 और 1999) केंद्रीय ग्रहमंत्री नियुक्‍त हुए। आडवाणी ने पार्टी को पुनर्जीवित कर मज़बूत बनाने का प्रमुख रूप से उत्‍तरदायित्‍व निभाया। 1980 के दशक के आरंभ में भारत के राजनीतिक मानचित्र पर वस्‍तुत: अस्‍तित्‍वहीन यह पार्टी भारत की सबसे मज़बूत राजनीतिक शक्‍तियों में एक रूप में उभरी है।

शिक्षा
लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी शुरुआती शिक्षा लाहौर में ही हुई थी पर बाद में भारत आकर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। जब लालकृष्ण आडवाणी सेंट पैट्रिक स्कूल में पढ़ रहे थे, उनके देश भक्ति विचारों ने उन्हें केवल 14 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आर.एस.एस.) से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। तभी से उन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित किया हुआ है। आज वे भारतीय राजनीति में एक बड़ा नाम हैं।

विवाह
25 फ़रवरी, 1965 को 'कमला आडवाणी' को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। लालकृष्ण आडवाणी के परिवार की तरह ही कमलाजी का परिवार भी देश के विभाजन के बाद कराची से विस्थापित होकर आया था। कमला जी को भी आम नागरिक की तरह कठिन जीवन जीना पड़ा। उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक दिल्ली तथा मुम्बई के जनरल पोस्ट ऑफिस में कार्य किया।

संतान
लालकृष्ण आडवाणी के दो बच्चे हैं एक पुत्र जयंत है और एक पुत्री प्रतिभा दोनों अपना प्रोफेशनल जीवन जी रहे हैं। जयंत दिल्ली में अपना एक छोटा सा कारोबार चलाते हैं। वे क्रिकेट के बहुत ही शौकीन हैं। प्रतिभा एक प्रसिद्ध टी.वी. व्यक्तित्व हैं। कई चैनलों पर प्रसारित किये जाने वाले कार्यक्रमों की एंकरिंग तथा प्रस्तुति करती हैं। उन्होंने टी.वी. चैनलों के लिए हिन्दी सिनेमा पर आधारित कथ्यपरक कार्यक्रम तैयार करने में विशेषता हासिल की है। इन कार्यक्रमों में राम, कृष्ण, शिव, गणेश और हनुमान तथा हिन्दी सिनेमा में होली, दीपावली और राखी के त्यौहारों को प्रमुख स्थान दिया है। प्रतिभा ने हिन्दी सिनेमा में 'वन्दे मातरम्' पर एक फ़िल्म भी बनाई है। इन कार्यक्रमों में सांस्कृतिक तथा देशभक्तिपूर्ण मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए इनकी व्यापक रूप से सराहना की है। श्री आडवाणी जी की स्वर्णजंयती रथ यात्रा (1997) तथा भारत सुरक्षा यात्रा (2006) पर बनी फ़िल्में भी प्रतिभा के कार्यों में शामिल हैं।

राजनीतिक जीवन
कराची में आरंभिक स्‍कूली शिक्षा पूरी करने के बाद आडवाणी ने क़ानून की पढ़ाई के लिए बंबई विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। वह राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ में शामिल हो गए और देश के विभाजन के बाद उन्‍होंने राजस्थान में संगठन की गतिविधियों का कार्यभार संभाला। 1951 में जब डॉक्‍टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ (भारतीय जनता पार्टी का पूर्ववर्ती) की स्‍थापना की, तो आडवाणी पार्टी की राजस्‍थान इकाई के सचिव बने। बाद में दिल्‍ली चले गए और उन्‍हे जनसंघ की दिल्‍ली इकाई का सचिव नियुक्‍त किया गया।

भारतीय जनसंघ
मुख्य लेख : भारतीय जनसंघ
1970 में वह राज्यसभा के सदस्‍य बने और 1989 तक इस पद पर बने रहे। 1973 में उन्‍हे भारतीय जनसंघ को अध्‍यक्ष चुना गया और 1977 तक उन्‍होंने पार्टी का संचालन किया। जनता पार्टी के नेतृत्‍व वाली मोरारजी देसाई की गठबंधन सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री नियुक्‍त होने के बाद उन्‍होंने पार्टी अध्‍यक्ष पद छोड़ दिया। मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में उन्‍होंने प्रेस सेंसरशिप समाप्‍त की, आपातकाल के दौरान बनाए गए प्रेस-विरोधी क़ानूनों को निरस्‍त किया और मीडिया की स्‍वतंत्रता को बचाए रखने के लिए सुधारों की शुरुआत की। उन्‍होंने संसद में प्रसार भारती (ब्रॉडकास्‍टिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) विधेयक प्रस्‍तुत किया, जिसमें दूरदर्शन और रेडियो को स्‍वायत्‍तता प्रदान करने का प्रावधान था।

भारतीय जनता पार्टी का गठन
मोरारजी देसाई सरकार के पतन के फलस्‍वरूप भारतीय जनसंघ का विभाजन हो गया। आडवाणी तथा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में बड़ी संख्‍या में भारतीय जनसंघ के लोगों ने 1980 में एक राजनीतिक पार्टी, भारतीय जनता पार्टी का गठन किया। आरंभिक वर्षों में भारतीय जनता पार्टी को नाममात्र का जन समर्थन मिला और 1984 के संसदीय चुनावों में यह लोकसभा की सिर्फ दो सीटें जी जीत पाई। पार्टी को लोकप्रिय बनाने तथा जनता को इसके कार्यक्रम से अवगत कराने के लिए आडवाणी ने 1990 के दशक में देश भर में कई रथ यात्राएं (राजनीतिक अभियान) की। इनमें से पहली यात्रा हिंदुओं के अत्‍यंत पूज्‍य भगवान राम पर केंद्रित थी।

चुनाव क्षेत्र
लालकृष्ण आडवाणी का चुनाव क्षेत्र गाँधीनगर, गुजरात है।

सदस्यता
राज्य सभा, 1970-1989 (चार बार);
विपक्ष के नेता, राज्य सभा, 1979-1981;
विपक्ष के नेता, लोक सभा, 1989-1991 और 1991-1993
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
सूचना और प्रसारण, 1977-1979,
गृहमंत्री, 1998-1999 और 13 अक्टूबर 1999 से 29 जून 2002
उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री, 29 जून 2002 से 1 जुलाई 2002
उपप्रधानमंत्री, गृह मंत्री तथा कोयला और खान मंत्री, 1 जुलाई 2002 से 26 अगस्त 2002
उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री, 26 अगस्त, 2002 - 20 मई, 2004

यात्राएँ
राम यात्रा
राम रथ यात्रा 25 सितम्बर, 1990 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जन्मदिन पर सोमनाथ से शुरू हुई थी और जिसका 10,000 कि.मी. की यात्रा करने के बाद 30 अक्तूबर को अयोध्या में समापन किया जाता था। यात्रा का सीधा सा सन्देश जनता में एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना जागृत करना, परस्पर समझदारी बढ़ाना तथा जनता को सरकार की तुष्टिकरण तथा अल्पसंख्यकवाद की राजनीति के बारे में समझाना था। इस यात्रा को अभूतपूर्व सफलता मिली राजनीतिक तौर पर भीड़ जुटाने हेतु ऐसी लोकप्रियता कभी हासिल नहीं हुई। इस यात्रा ने जनता द्वारा दर्शायी गई लोकशक्ति और दिल्ली के शासकों द्वारा प्रस्तुत राजशक्ति के बीच तुलना की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया।

जनादेश यात्रा
श्री आडवाणी ने निष्ठुर, लोकतंत्र-विरोधी और जन-विरोधी उपायों के विरुद्ध जनमत जुटाने हेतु नेतृत्व प्रदान किया। श्री आडवाणी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में देश की चारों दिशाओं से यात्रा आरंभ करने की योजना बनाई। इन विधेयकों के जरिए छद्म-पंथनिरपेक्षवादी चार प्रमुख उद्देश्य प्राप्त करना चाहते थे।

चुनावों की मूल योजना को बिगाड़ना और पहले से अधिकृत अयोग्यता की अनुमति देना।
प्रतिबंधित संगठनों को संवैधानिक वैद्यता उपलब्ध कराना।
ऐसे राष्ट्र जो सभी धर्मों का समान रूप से आदर करता हो, को अधार्मिक बनाना।
राजनीतिक पार्टियों के पंजीकरण को समाप्त करने की अनुमति देना।
चारों यात्राएं 11 सितम्बर, 1993 को स्वामी विवेकानन्द के जन्मदिन से देश की चारों दिशाओं से यात्रा आरम्भ हुईं। श्री आडवाणी ने मैसूर से यात्रा का नेतृत्व किया था। श्री भैरोसिंह शेखावत ने जम्मू से; मुरली मनोहर जोशी ने पोरबंदर से और श्री कल्याण सिंह ने कलकत्ता से यात्रा आरंभ की थी। 14 राज्यों और 2 केन्द्रशासित क्षेत्रों से यात्रा करते हुए यात्री एक बड़ी रैली में 25 सितम्बर को भोपाल में एकत्र हुए। जनादेश यात्रा को जबरदस्त सफलता भी मिली थी।

कांग्रेस देश को बर्बाद कर रही है : नरेंद्र मोदी



कांग्रेस देश को बर्बाद कर रही है : नरेंद्र मोदी
ज़ी मीडिया ब्यूरो
बहराइच (उप्र) : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बहराइच में रैली को संबोधित करते कहा :-

* यूपी ने नहीं, हमने अमिताभ बच्चन का सही उपयोग किया
* अगर यूपी तरक्की करे तो देश की तस्वीर बदलेगी
* यूपी में भी ऐसा हो सकता है, इसके लिए विल पावर चाहिए
* हमने विज्ञान की मदद से उत्पादकता बढ़ाई
* यूपी में गन्ना किसान मलिकों के नीचे दबा है
* गुजरात के किसान सुख चैन से जी रहे हैं
* हमने सहकारी सुगर मिल किसानों को दिया
* गन्ने किसानों के लिए हमने बेहतर व्यवस्था की
* यूपी गन्ना किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं
* यूपी के नौजवान में बहुत ताकत है
* गुजरात में नौकरियों में भाई-भतीजावाद और सिफारिश नहीं है
* हमारा मकसद देश को नौजवानों को बेहतर अवसर देना
* यूपी के लोग मिट्टी को सोना बना देते हैं
* कांग्रेस 50 साल से ज्यादा बिजली दी शिवराज की सरकार ने
* सिर्फ गुजरात ही नहीं हमने मध्यप्रदेश को भी चमकाया है
* मध्यप्रदेश में यूपी जैसे हालात थे, पर शिवराज की सरकार ने 10 साल में प्रदेश का बहुत विकास किया
* सपा-बसपा-कांग्रेस का गोत्र एक है
* इन्हें बस अपने परिवार और कुर्सी की चिंता है
* सपा बसपा ने यूपी के लिए कुछ नहीं मांगा
* सपा, बसपा केंद्र की सरकार को बचा रही हैं पर प्रदेश के लिए कुछ नहीं मांगते, सिर्फ खुद को सीबीआई से बचाने की मांग करते रहे
* यूपी के दोनों प्रमुख दल केंद्र की भ्रष्ट सरकार को बचा रही है
* यूपी के युवा सीएम को समझ की कमी है
* यूपी सरकार ने शेर मांगे बिजली नहीं
* शासक अपने बारे में बाद में सोचता है
* शासक वो होता है जो पहले जनता की सोचे
* यूपी में बिजली का जाना खबर नहीं, आना खबर है
* गुजरात में पहले 24 घंटे नहीं थी
* गुजरात पहले से विकसित नहीं है
* वोट बैंक की राजनीति करने वालों से कोई उम्मीद नहीं है
* यूपी आगे बढ़ा होता तो देश में बहुत तरक्की होती
* जिस यूपी ने इतने पीएम दिए उसका क्या हुआ
* अपने जिन्हें चुनकर भेजा उन्होंने क्या किया
* देश 21वीं सदी में इन लोगों को झेलने को तैयार नहीं है
* कांग्रेस ने देश से जो वादे किए वो पूरे क्यों नहीं हुए
* कांग्रेस देश को बर्बाद कर रही हैं और हमें गाली दे रही है
* लोकतंत्र में विरोधी दलों को भी आवाज उठाने का अधिकार है
* मीडिया पर भी दबाव डालने की कोशिश की गई
* लोकतंत्र में बम बंदूकों की जगह नहीं होती है
* भारत मां बोलने वालों को सजा दी गई
* अगले चुनाव में सीबीआई और आईएम ही मोर्चा संभालेंगे
* छठ पूजा से पहले आतंकवादियों को खुली छूट दे दी गई है
* इंडियन मुजाहिद्दीन को खुली छूट दे दी गई है
* हम आतंकवाद के सामने झुकने वाले नहीं हैं
* पूरे हिंदुस्तान का मौसम बदल रहा है
* रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ब्रह्मा को तपो भूमि को मेरा प्रणाम
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कानपुर और झांसी में सफल रैली आयोजित करने के बाद अब नमो की गूंज बहराइच में भी सुनाई देगी। इस बीच पटना में हुए बम धमाकों के बाद रैली स्थल की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। मोदी के साथ भाजपा की इस विजय शंखनाद रैली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी मौजूद रहेंगे। विजय शंखनाद रैली के जरिए मोदी के डंके की गूंज इस इलाके में आने वाले समय के लिए भाजपा को ताकतवर बना सकती है।

गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, बस्ती और अयोध्या सहित कई जिलों को अपने में समेटे यह इलाका खेतिहर मजदूरों, आदिवासियों तथा मेहनतकश लोगों के नाम रहा है। हर वर्ष बाढ़ की मार झेलना यहां की नियति बन गई है। यहां तो पिछड़ेपन के हालात यह हैं कि तमाम जनजातियों ने आज तक रेलगाड़ी तक के दर्शन नहीं किए हैं।

इस बीच मोदी की रैली की सुरक्षा को लेकर गुजरात से आए सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय पुलिस महकमे ने पूरी ताकत झौंक दी है। बहराइच में होने वाली रैली की सुरक्षा के लिए एसटीएफ और एटीएस के 86 कमांडो रैली क्षेत्र में तैनात रहेंगे। ये कमांडो रैली के दौरान संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

पटना में मोदी की रैली के दौरान हुए बम धमाकों और बहराइच के नेपाल की सीमा से सटे होने की वजह से प्रदेश पुलिस खासी सतर्क है। नेपाल में मौजूद इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकवादी रैली में गड़बड़ी फैलाने की भरपूर कोशिश कर सकते हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी के अलर्ट के बाद रैली को लेकर खासी चौकसी बरती जा रही है।

रैली स्थल को पहले ही सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। कहीं चूक न हो पाए इस लिए चार पुलिस अधीक्षकों, आठ अपर पुलिस अधीक्षकों, तीस पुलिस उपाधीक्षकों और लगभग 225 उप निरीक्षकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पीएसी की आठ कंपनियां तैनात की गई हैं। रैली स्थल पर बम निरोधक दस्ते एवं डॉग स्क्वोएड दस्ते लगातार निरीक्षण कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी इससे पूर्व कानपुर और झांसी में विजय शंखनाद रैली कर चुके हैं। इन दो रैलियों की सफलता से उत्साहित भाजपाइयों ने मोदी की बहराइच रैली को सफल बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है।