शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

इंटरनेट की बदमाशियां : बदनाम या बर्बाद करना हो



सोशल मीडिया पर बदनाम करना हो या बर्बाद बस पैसे दो और...!
आईबीएन-7 | Nov 29, 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/112667/1
नई दिल्ली। खोजी पत्रकारिता करने वाली वेबसाइट कोबरापोस्ट ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर सनसनीखेज खुलासा किया है। अपने विरोधियों को तबाह करने के लिए आईटी कंपनियों के साथ मिलकर कैसे लोगों की जिंदगी बर्बाद की जा रही है, कैसे किसी को बदनाम किया जा रहा है, कैसे किसी का करियर बर्बाद किया जा रहा है। इसका खुलासा अपने स्टिंग ऑपरेशन में कोबरापोस्ट ने किया है।

खोजी वेबसाइट कोबरापोस्ट ने खुलासा किया है कि पैसे लेकर लोगों को बदनाम करने के लिए आईटी कंपनियां सुपारी ले रही हैं। फेसबुक, ट्विटर और दूसरी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस काम के लिए कुछ लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक की डील होती है। कोबरापोस्ट ने अपने खुफिया कैमरे में ऐसी 22 कंपनियों का पर्दाफाश किया है। स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कोबरापोस्ट ने ये भी खुलासा किया है कि आईटी कंपनियां किन-किन कामों के लिए सुपारी ले रही हैं। इन कंपनियों का काम खतरनाक है जिनसे ये किसी की भी जिंदगी तबाह कर सकती हैं।

-किसी को भी बदनाम करने के लिए फर्जी वीडियो बनाना
-वीडियो बनाकर यूट्यूब के जरिए उसका प्रचार करना
-नेताओं और सरकार के खिलाफ अभियान चलाना
-वोटिंग से पहले अचानक विरोधी नेता पर कीचड़ उछलवाना
-नेता की फर्जी तस्वीरों-वीडियो के जरिए उसे बदनाम करना
-बदनाम करने के लिए SMS अभियान चलाना
-किसी भी तरह की अफवाह फैलाना
-दंगा फैलाने के लिए झूठी बातों-तस्वीरों का प्रचार
-झूठे आरोप लगवाकर नौकरी से निकलवाना
-फर्जी आरोप लगवाकर शादी तुड़वाना।

इन कंपनियों का इस्तेमाल सियासी दल भी अपने हितों के लिए जमकर कर रहे हैं। विरोधी पर कीचड़ उछालने और सोशल मीडिया पर मशहूर बनने के लिए लाखों-करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं। कोबरापोस्ट के मुताबिक स्टिंग के दौरान जिन कामों के लिए कंपनियां तैयार हुईं, वो थेः-

-नेता का फेसबुक पेज बनाकर, उसके लाखों फॉलोअर बनाना।
-फर्जी प्रोफाइल बनाकर लाखों like खरीदना।
-ट्विटर पर लाखों फॉलोअर बनवाना।
-मुसलमानों के फर्जी प्रोफाइल बनवाना।
-मुस्लिमों के फर्जी प्रोफाइल से नेता की तारीफ करवाना।
-नेता के खिलाफ पेज पर कोई कमेंट ना आने देना।
-नेता के विरोधी के खिलाफ अभियान चलाना।
-नेता को उसके वोटबैंक के बारे में सारा डाटा देना।

आईटी कंपनियां जानती हैं कि ये काम गैर-कानूनी है। इसलिए नई तकनीक का सहारा लेकर ऐसे इंतजाम किए जाते हैं कि किसी को पता ना चले कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर कौन रहा है। अपनी पहचान छिपाने के लिए ये कंपनियाः-
-अमेरिका या कोरिया के सर्वर से प्रचार अभियान छेड़ती हैं।
-मकसद ये कि कहां से प्रचार शुरू हुआ, इसका पता ना चले।
-बदनाम करने के बाद कंप्यूटर तोड़ दिया जाता है।
-हर घंटे जगह बदली जाती है ताकि लोकेशन का पता ना लगे।
-दूसरे के कंप्यूटर को हैक किया जाता है।
-बल्क SMS भेजने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल होता है।
-पहचान छिपाने के लिए नई तकनीक अपनाई जाती है।
-ग्राहक की पहचान छिपाने के लिए सिर्फ नकद में पैसा लिया जाता है।
एक अनुमान के मुताबिक देश में 9 करोड़ 10 लाख से ज्यादा लोग इस वक्त सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। इतनी बड़ी आबादी में किसी को बदनाम या मशहूर करना इन कंपनियों के लिए बहुत मुश्किल नहीं। सवाल ये कि इस नए खतरे से आखिर कैसे निपटा जाएगा।