बुधवार, 4 दिसंबर 2013

पोस्ट पोल सर्वेः राजस्थान में चला महारानी वसुंधरा राजे का जादू


पोस्ट पोल सर्वेः राजस्थान में चला महारानी का जादू
आईबीएन-7 | Dec 04, 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/112960/12
नई दिल्ली। राजस्थान के रण में इस बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुर्सी दांव पर लगी है। यहां विधानसभा की 200 में से 199 सीटों पर वोटिंग हुई है। आईबीएन7 और द वीक के लिए सीएसडीएस के पोस्ट पोल सर्वे के मुताबिक राजस्थान में बीजेपी को 126 से 136 सीटें मिलती दिख रही हैं तो कांग्रेस के खाते में 49 से 57 सीटें ही जाती दिख रही हैं। अन्य के खाते में 12 से 20 सीटें गई हैं। वोट प्रतिशत की बात करें तो कांग्रेस को पोस्ट पोल सर्वे में 33% वोट मिलता दिखा जो कि प्री पोल सर्वे में 32 था। लेकिन 2008 के मुकाबले अभी भी कांग्रेस को 4% का नुकसान होता दिख रहा है।

बीजेपी को प्री पोल सर्वे में जहां 41 फीसदी वोट मिलता दिख रहा था वह अब बढ़कर 43 हो गया है। 2008 के मुकाबले यह 9% ज्यादा है। इनके अलावा बीएसपी को 5% जबकि अन्य के खाते में 19% वोट जाते दिख रहे हैं। वसुंधरा राजे को 49% वोटर मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं जबकि अशोक गहलोत को 27 फीसदी।

इस चुनाव में लोगों ने 72.86 फीसदी मतदान कर इतिहास रच दिया। यहां पिछली बार 66.25 फीसदी मतदान हुआ था। कुछ जानकारों का दावा है कि सूबे में वसुंधरा राजे की लहर और राज्य सरकार के खिलाफ गुस्से की वजह से रिकॉडतोड़ मतदान हुआ जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बूते मतदान प्रतिशत बढ़ने का दावा कर रही है।

इन दावों की कलई आठ दिसंबर को वोटों की गिनती के साथ ही खुल जाएगी और चुनाव मैदान में उतरे 2087 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला हो जाएगा। इस बार मैदान में बीजेपी के 34 और कांग्रेस के 29 बागी उम्मीदवार थे। 2008 में कांग्रेस के पास 96 सीटें थीं, जबकि बीजेपी के पास 78 सीटें। अन्य के खाते में 26 सीटें आई थीं।

2008 चुनाव में कांग्रेस को 36.82 फीसदी जबकि बीजेपी को 34.27 फीसदी वोट मिले थे। बीएसपी ने भी 7.6 फीसदी वोट लेकर अपनी ताकत का अहसास कराया था। अन्य ने 21.31 फीसदी वोट काटकर सियासी जानकारों को चौंकाया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल, ममता शर्मा जैसे कांग्रेसी दिग्गजों को वसुंधरा राजे और गुलाब चंद कटारिया जैसे बीजेपी के दिग्गज किस तरह जवाब दे पाए हैं, इसका फैसला 8 दिसंबर को होने ही वाला है।

एग्जिट पोल: दिल्ली समेत 4 राज्यों में बीजेपी आगे



एग्जिट पोल: दिल्ली समेत 4 राज्यों में बीजेपी आगे
4 Dec 2013,नई दिल्ली
http://navbharattimes.indiatimes.com/assembly-elections-2013/delhi/poll-news-extra/exit-polls-hand-over-madhya-pradesh-rajasthan-delhi-to-bjp-close-call-in-chhattisgarh/electionarticleshow/26861513.cms
देश के 5 राज्यों में वोटिंग का आखिरी दौर बुधवार (4 दिसंबर) को पूरा हो जाने के बाद एग्जिट पोल के नतीजे आ गए हैं। तकरीबन सभी चैनल अपने-अपने एग्जिट पोल के नतीजे दिखाए। इन तमाम एग्जिट पोल नतीजों पर नजर डालने से लगता है कि दिल्ली में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी, लेकिन बहुमत से थोड़ी दूर रह जाएगी। एग्जिट पोल पर भरोसा करें तो राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बननी लगभग तय है। वहीं, मिजोरम में कांग्रेस बहुमत के आसपास रह सकती है।

सारे एग्जिट पोल नतीजों पर गौर करें तो ज्यादातर के मुताबिक यह राय उभरती है कि दिल्ली में बीजेपी बहुमत के काफी करीब तक पहुंच सकती है। कांग्रेस का आंकड़ा सिमटकर 20 के आसपास आने के आसार हैं। दिल्ली में बीजेपी को अधिकतम 41 और न्यूनतम 29 सीटें बताई गई हैं। कांग्रेस को अधितम 20 और न्यूनतम 10 मिलती बताई गई हैं। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को अधिकतम 31 और न्यूनतम 06 सीटें मिलने की संभावना व्यक्त की गई है। ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी सत्ता की चाबी अपने हाथ में रख सकती है। एबीपी न्यूज-नीलसन के मुताबिक दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खुद नई दिल्ली सीट से चुनाव हार सकती हैं।

मध्य प्रदेश में बीजेपी हैट-ट्रिक लगने के आसार सभी एग्जिट पोल नतीजों ने बताए हैं। बीजेपी को अधिकतम 161 सीटें और न्यूनतम 128 सीटें बताई गई हैं। कांग्रेस को अधिकतम 92 और न्यूनतम 62 सीटें मिलने की उम्मीद है। ऐसे ही राजस्थान में बीजेपी को अधिकतम 147 और न्यूनतम 110 सीटें मिलती बताई गई हैं जबकि कांग्रेस को अधिकतम 62 और न्यूनतम 39 सीटें।

छ्त्तीसगढ़ में कांटे का मुकाबला लगता है। हालांकि सारे एग्जिट पोल नतीजे बीजेपी को आगे और कांग्रेस को पीछे बता रहे हैं। 90 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को न्यूनतम 44 सीटें और अधिकतम 55 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। मिजोरम में कांग्रेस को एमएनएफ से आगे बताया गया है।
नीचे ये नतीजे विस्तार से अलग-अलग टेबलों समझाए गए हैं।

एग्जिट पोल: विधानसभा चुनाव 2013
दिल्ली : कुल सीटें- 70
न्यूज चैनल कांग्रेस बीजेपी आप बीएसपी/अन्य
टाइम्स नाउ-सी वोटर 20 31 15 04
इंडिया टुडे-ओआरजी 20 41 06 03
स्टार न्यूज- एसी नीलसन 16 37 15 02
IBN-सीएसडीएस-द वीक दिल्ली का एग्जिट पोल नहीं
इंडिया टीवी- सी वोटर 20 31 15 04
न्यूज 24-टुडेज चाणक्य 10 29 31
मध्य प्रदेश : कुल सीटें-230
न्यूज चैनल बीजेपी कांग्रेस बीएसपी अन्य
टाइम्स नाउ-सी वोटर 128 92 10
इंडिया टुडे-ओआरजी 138 80 12
स्टार न्यूज- एसी नीलसन 138 80 06 06
IBN-सीएसडीएस-द वीक 136-146 67-77 13-21
इंडिया टीवी-सी वोटर 128 92 10
न्यूज 24-टुडेज चाणक्य 161 62 07
राजस्थान: कुल सीटें- 200
न्यूज चैनल कांग्रेस बीजेपी बीएसपी अन्य
टाइम्स नाउ-सी वोटर 48 130 04 17
इंडिया टुडे-ओआरजी 62 110 28
स्टार न्यूज- एसी नीलसन एग्जिट पोल अब तक नहीं
IBN-सीएसडीएस-द वीक 49-57 126-136 12-20
इंडिया टीवी- सी वोटर 48 130 04 17
न्यूज 24-टुडेज चाणक्य 39 147 14
छत्तीसगढ़: कुल सीटें- 90
न्यूज चैनल बीजेपी कांग्रेस बीएसपी अन्य
टाइम्स नाउ-सी वोटर 44 41 02 03
इंडिया टुडे-ओरआरजी 53 33 04
स्टार न्यूज- एसी नीलसन एग्जिट पोल अब तक नहीं
IBN-सीएसडीएस-द वीक 45-55 32-40 00
इंडिया टीवी- सी वोटर 44 41 02 03
न्यूज 24-टुडेज चाणक्य 51 39 00
मिजोरम: कुल सीटें:-40
न्यूज चैनल कांग्रेस एमएनएफ अन्य
टाइम्स नाउ-सी वोटर 19 14 07
हेडलाइंस टुडे-आजतक
स्टार न्यूज- एसी नीलसन
IBN-सीएसडीएस-द वीक
इंडिया टीवी-सी वोटर 19 14 07
न्यूज 24-टुडेज चाणक्य

शरीफ सुनले , विभाजन खत्म कर पाकिस्तान भारत को वापस लेना है





भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध कभी भी...
बुधवार, 4 दिसंबर 2013
मुजफ्फराबाद। आमतौर पर उदार चेहरा माने जाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच कभी भी युद्ध हो सकता है। हालांकि बाद में इस बारे में खंडन भी जारी किया गया कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया।

पाकिस्तानी अखबार डान में प्रकाशित खबर के मुताबिक शरीफ ने मंगलवार को मुजफ्फराबाद में कहा कि यदि कश्मीर मसले का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं के अनुकूल नहीं होता है तो इन दो परमाणु शक्तियों के बीच कभी भी चौथा युद्ध हो सकता है। शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहता, लेकिन भारत की वजह से उसे ऐसा करना पड़ता है।

शरीफ ने मुजफ्फराबाद में पाक अधिकृत कश्मीर की परिषद के बजट सत्र को संबोधित करते कहा कि कश्मीर मुद्दा सुलझाए बिना बगैर क्षेत्र में शांति स्थापित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी मंचों और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ हालिया बैठक में कश्मीर मुद्दा उठाया था।
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नवाज शरीफ की धमकी, कश्‍मीर मुद्दा नहीं सुलझा तो भारत से होगा चौथा युद्ध
dainikbhaskar.com   |  Dec 04, 2013
इस्‍लामाबाद. जम्‍मू-कश्‍मीर में भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी की रैली के बाद भारत में चल रही धारा 370 पर बहस के बीच पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि अगर कश्‍मीर मुद्दा जल्‍द से जल्‍द नहीं सुलझाया गया तो भारत-पाक के बीच चौथा युद्ध हो सकता है। पाकिस्‍तान के अखबार 'डॉन' ने शरीफ को कोट करते हुए लिखा- कश्‍मीर एक ऐसा मुद्दा है, जिसे लेकर दोनों परमाणु संपन्‍न मुल्‍कों के बीच कभी भी चौथ युद्ध छिड़ सकता है, इसलिए हमें इस मुद्दे को युद्ध की नौबत आने से पहले सुलझा लेना चाहिए। मेरा यह सपना है कि कश्‍मीर मुद्दा मेरे जीते जी हल हो जाए।

'डॉन' के मुताबिक, शरीफ ने यह बात हाल में गुलाम कमीर के बजट सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्‍होंने भारत पर कश्‍मीर को लेकर गंभीरता न दिखाने का भी आरोप लगाया। शरीफ ने कहा कि भारत सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर को बार-बार अपना अभिन्न अंग बताना इस प्रमुख मुद्दे को हल करने को लेकर उसके रुख में गंभीरता की कमी जाहिर करता है।


असमानता तोड़ देगी देश को - डॉ भरत झुनझुनवाला



असमानता तोड़ देगी देश को
Dec 3 2013
।। डॉ भरत झुनझुनवाला ।। अर्थशास्त्री
बढ़ती असमानता समाज के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ आर्थिक विकास के लिए भी हानिप्रद है. आम नागरिक जब अमीर को कोसता है, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा नकारात्मक हो जाती है. वह हिंसक प्रवृत्ति का हो जाता है. चुनाव के इस माहौल में सभी पार्टियां गरीबों को लुभाने में लगी हुई हैं. कांग्रेस का कहना है कि उसने मनरेगा और खाद्य सुरक्षा लागू करके गरीबों को राहत पहुंचायी है. भाजपा ने महंगाई पर नियंत्रण, बिजली की दरों में कटौती एवं अधिक संख्या में गैस सिलेंडर मुहैया कराने का वादा किया है. आम आदमी पार्टी तो बस नाम से ही आम आदमी की है, ऐसा दर्शाया जा रहा है.

ऐसे ही वादे लगभग सभी पार्टियों के द्वारा पूर्व में हुए चुनावों के दौरान किये गये थे. स्वीकार करना होगा कि देश में मौलिक गरीबी कम हुई है. इस परिणाम को हासिल करने में कांग्रेस के योगदान को स्वीकार करना चाहिए. परंतु इस गरीबी उन्मूलन के बावजूद जनता में असंतोष व्याप्त है. कुछ माह पूर्व छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी काफिले पर हुए हमले में इस असंतोष की झलक दिखती है.

वास्तव में गरीबी दूर होने से समाज में असंतोष बढ़ा है. जो व्यक्ति रात में भूखा सोता है, उसकी ताकत नहीं होती कि वह आंदोलन कर सके. 100 दिन का काम और 2 रुपये किलो अनाज मिलने से वह आंदोलन करने लायक हो गया है. इस तरह देखें, तो अब तक देश का ध्यान गरीबी दूर करने पर केंद्रित था, लेकिन अब असमानता पर केंद्रित हो रहा है.

ऑक्सफैम के एक अध्ययन के अनुसार विश्व के 100 अमीर व्यक्तियों की संपत्ति में गत वर्ष लगभग 13,000 करोड़ रुपये की वृद्घि हुई. इस रकम को यदि दुनिया के सौ करोड़ गरीबों में वितरित कर दिया जाये, तो प्रत्येक गरीब व्यक्ति को 13,200 रुपये मिल सकते हैं, जो उनकी मूल जीविका साधने के लिए पर्याप्त होगा. दुनिया के 100 करोड़ गरीब और 100 अमीर एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. इससे झलक मिलती है कि गरीबी दूर होने के बावजूद असमानता बढ़ रही है.

बढ़ती असमानता समाज को अस्थिर बना देती है. पुरातन यूनान ने असमानता को स्वीकार किया. नागरिक और दास के बीच समाज बंटा हुआ था. लेकिन समृद्धि का वह समाज सुवितरण नहीं कर सका. परिणामस्वरूप यूनान के आम आदमी में असंतोष व्याप्त हो गया. बढ़ती असमानता समाज के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ आर्थिक विकास के लिए भी हानिप्रद है.

आम नागरिक जब अमीर को कोसता है, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा नकारात्मक हो जाती है. वह हिंसक प्रवृत्ति का हो जाता है. आर्थिक विकास के लिए जरूरी है कि आम नागरिक उत्पादन में वृद्घि के लिए सोचे. रिक्शेवाले की सकारात्मक सोच है कि वह बचत करके ऑटो रिक्शा खरीदे. इससे देश का विकास होता है.

परंतु यदि उसके मन में अमीरों के प्रति आक्रोश होता है, तो वह दोषारोपण करता रहता है और यदा-कदा हिंसक व्यवहार में लिप्त हो जाता है. ऐसे में विकास बाधित होता है. आर्थिक विकास के लिए जरूरी है कि असमानता का स्तर उतना ही हो, जिससे आम आदमी उद्वेलित न हो और उसकी मानसिक ऊर्जा प्रस्फुटित हो.

घोर असमानता से लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ता है. आज आम आदमी नेताओं की दुहाई देकर स्वयं भ्रष्ट तरीकों से आगे बढ़ना चाहता है. वह सड़क पर लगे बिल बोर्ड उतार लेता है, गाड़ी का स्टीरियो निकाल लेता है, नकली नोट चलाता है इत्यादि. इनको रोकने के लिए देश को पुलिस पर खर्च बढ़ाना पड़ता है.

अत: आम आदमी की जो ऊर्जा विकास का माध्यम बन सकती थी, उस पर नियंत्रण करने के लिए समाज को खर्च बढ़ाने पड़ते हैं. ध्यान देनेवाली बात है कि एक बिंदु के बाद असमानता आर्थिक विकास में बाधा बन जाती है.

इतिहासकार आर्नोल्ड टायनबी ने विश्व की 20 से ज्यादा सभ्यताओं के पतन का अध्ययन किया है. वे बताते हैं कि सभ्यता के पतन के तीन चरण हैं. पहला, नेता जनता को गांधी सरीखा नैतिक नेतृत्व देने की जगह इदी अमीन या फर्डिनांड मार्कोस जैसा डंडे का नेतृत्व देने लगते हैं.

दूसरा, आम आदमी नेता से खुद को अलग समझने लगता है. तीसरा, आम आदमी संभ्रांत वर्ग का विरोध करने लगता है और समाज बंट जाता है. अपने देश में ऐसी ही स्थिति बन रही है. विश्व के 100 अमीर लोगों में चार भारत से हैं. आम आदमी इस असमानता से उद्वेलित है. नक्सली इस उद्वेलन में शामिल हैं. यह हमारे लिए एक खतरे की घंटी है, क्योंकि दमन से यह आक्रोश और बढ़ता ही जायेगा.

हमने गरीबी दूर करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि स्थापित तो की है, परंतु हमें और आगे बढ़ने की जरूरत है. ऐसी नीतियां लागू करनी होंगी कि असमानता एक सीमा से आगे न जाये. इसके लिए विलासिता की वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाना चाहिए. साथ ही साथ उन लोगों को सम्मानित करना चाहिए, जो सादा जीवन जीते हैं.

समाज में जैसा रोल मॉडल प्रस्तुत किया जाता है, समाज उसी दिशा में चल पड़ता है. दुर्भाग्य है कि वर्तमान चुनावों में किसी भी पार्टी ने बढ़ती असमानता एवं इसके कारण बढ़ते हुए खतरे को नहीं उठाया है.