मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

क्या सिंधुनदी सभ्यता परमाणु विध्वंस से नष्ट हुई ?



द्वारा - हिंदुत्व जिंदाबाद था जिंदाबाद हैं और जिंदाबाद रहेगा

आधुनिक भारत में अंग्रेजों के समय से जो इतिहास पढाया जाता है वह चन्द्रगुप्त मौर्य के वंश से आरम्भ होता है। उस से पूर्व के इतिहास को ‘ प्रमाण-रहित’ कह कर नकार दिया जाता है। हमारे ‘देसी अंग्रेजों’ को यदि सर जान मार्शल प्रमाणित नहीं करते तो हमारे ’बुद्धिजीवियों’ को विशवास ही नहीं होना था कि हडप्पा और मोइन जोदडो स्थल ईसा से लग भग 5000 वर्ष पूर्व के समय के हैं और वहाँ पर ही विश्व की प्रथम सभ्यता ने जन्म लिया था।

विदेशी इतिहासकारों के उल्लेख

विश्व की प्राचीनतम् सिन्धु घाटी सभ्यता मोइन जोदडो के बारे में पाये गये उल्लेखों को सुलझाने के प्रयत्न अभी भी चल रहे हैं। जब पुरातत्व शास्त्रियों ने पिछली शताब्दी में मोइन जोदडो स्थल की खुदाई के अवशेषों का निरीक्षण किया था तो उन्हों ने देखा कि वहाँ की गलियों में नर-कंकाल पडे थे। कई अस्थि पिंजर चित अवस्था में लेटे थे और कई अस्थि पिंजरों ने एक दूसरे के हाथ इस तरह पकड रखे थे मानों किसी विपत्ति नें उन्हें अचानक उस अवस्था में पहुँचा दिया था।

उन नर कंकालों पर उसी प्रकार की रेडियो -ऐक्टीविटी के चिन्ह थे जैसे कि जापानी नगर हिरोशिमा और नागासाकी के कंकालों पर एटम बम विस्फोट के पश्चात देखे गये थे। मोइन जोदडो स्थल के अवशेषों पर नाईट्रिफिकेशन के जो चिन्ह पाये गये थे उस का कोई स्पष्ट कारण नहीं था क्यों कि ऐसी अवस्था केवल अणु बम के विस्फोट के पश्चात ही हो सकती है।

मोइनजोदडो की भूगोलिक स्थिति

मोइन जोदडो सिन्धु नदी के दो टापुओं पर स्थित है। उस के चारों ओर दो किलोमीटर के क्षेत्र में तीन प्रकार की तबाही देखी जा सकती है जो मध्य केन्द्र से आरम्भ हो कर बाहर की तरफ गोलाकार फैल गयी थी। पुरात्तव विशेषज्ञ्यों ने पाया कि मिट्टी चूने के बर्तनों के अवशेष किसी ऊष्णता के कारण पिघल कर ऐक दूसरे के साथ जुड गये थे। हजारों की संख्या में वहां पर पाये गये ढेरों को पुरात्तव विशेषज्ञ्यों ने काले पत्थरों ‘बलैक -स्टोन्स’ की संज्ञा दी। वैसी दशा किसी ज्वालामुखी से निकलने वाले लावे की राख के सूख जाने के कारण होती है। किन्तु मोइन जोदडो स्थल के आस पास कहीं भी कोई ज्वालामुखी की राख जमी हुयी नहीं पाई गयी।

निशकर्ष यही हो सकता है कि किसी कारण अचानक ऊष्णता 2000 डिग्री तक पहुँची जिस में चीनी मिट्टी के पके हुये बर्तन भी पिघल गये । अगर ज्वालामुखी नहीं था तो इस प्रकार की घटना अणु बम के विस्फोट पश्चात ही घटती है।

महाभारत के आलेख
इतिहास मौन है परन्तु महाभारत युद्ध में महा संहारक क्षमता वाले अस्त्र शस्त्रों और विमान रथों के साथ ऐक एटामिक प्रकार के युद्ध का उल्लेख भी मिलता है। महाभारत में उल्लेख है कि मय दानव के विमान रथ का परिवृत 12 क्यूबिट था और उस में चार पहिये लगे थे। देव दानवों के इस युद्ध का वर्णन स्वरूप इतना विशाल है जैसे कि हम आधुनिक अस्त्र शस्त्रों से लैस सैनाओं के मध्य परिकल्पना कर सकते हैं। इस युद्ध के वृतान्त से बहुत महत्व शाली जानकारी प्राप्त होती है। केवल संहारक शस्त्रों का ही प्रयोग नहीं अपितु इन्द्र के वज्र अपने चक्रदार रफलेक्टर के माध्यम से संहारक रूप में प्रगट होता है। उस अस्त्र को जब दाग़ा गया तो ऐक विशालकाय अग्नि पुंज की तरह उस ने अपने लक्ष्य को निगल लिया था। वह विनाश कितना भयावह था इसका अनुमान महाभारत के निम्न स्पष्ट वर्णन से लगाया जा सकता हैः-

“अत्यन्त शक्तिशाली विमान से ऐक शक्ति – युक्त अस्त्र प्रक्षेपित किया गया…धुएँ के साथ अत्यन्त चमकदार ज्वाला, जिस की चमक दस हजार सूर्यों के चमक के बराबर थी, का अत्यन्त भव्य स्तम्भ उठा…वह वज्र के समान अज्ञात अस्त्र साक्षात् मृत्यु का भीमकाय दूत था जिसने वृष्ण और अंधक के समस्त वंश को भस्म करके राख बना दिया…उनके शव इस प्रकार से जल गए थे कि पहचानने योग्य नहीं थे. उनके बाल और नाखून अलग होकर गिर गए थे…बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के बर्तन टूट गए थे और पक्षी सफेद पड़ चुके थे…कुछ ही घण्टों में समस्त खाद्य पदार्थ संक्रमित होकर विषैले हो गए…उस अग्नि से बचने के लिए योद्धाओं ने स्वयं को अपने अस्त्र-शस्त्रों सहित जलधाराओं में डुबा लिया…”

उपरोक्त वर्णन दृश्य रूप में हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु विस्फोट के दृश्य जैसा दृष्टिगत होता है।

ऐक अन्य वृतान्त में श्री कृष्ण अपने प्रतिदून्दी शल्व का आकाश में पीछा करते हैं। उसी समय आकाश में शल्व का विमान ‘शुभः’ अदृष्य हो जाता है। उस को नष्ट करने के विचार से श्री कृष्ण नें ऐक ऐसा अस्त्र छोडा जो आवाज के माध्यम से शत्रु को खोज कर उसे लक्ष्य कर सकता था। आजकल ऐसे मिस्साईल्स को हीट-सीकिंग और साऊड-सीकरस कहते हैं और आधुनिक सैनाओं दूारा प्रयोग किये जाते हैं।

राजस्थान से भी…
प्राचीन भारत में परमाणु विस्फोट के अन्य और भी अनेक साक्ष्य मिलते हैं। राजस्थान में जोधपुर से पश्चिम दिशा में लगभग दस मील की दूरी पर तीन वर्गमील का एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ पर रेडियोएक्टिव राख की मोटी सतह पाई जाती है, वैज्ञानिकों ने उसके पास एक प्राचीन नगर को खोद निकाला है जिसके समस्त भवन और लगभग पाँच लाख निवासी आज से लगभग 8,000 से 12,000 साल पूर्व किसी विस्फोट के कारण नष्ट हो गए थे।

‘लक्ष्मण-रेखा’ प्रकार की अदृष्य ‘इलेक्ट्रानिक फैंस’ तो कोठियों में आज कल पालतु जानवरों को सीमित रखने के लिये प्रयोग की जातीं हैं, अपने आप खुलने और बन्द होजाने वाले दरवाजे किसी भी माल में जा कर देखे जा सकते हैं। यह सभी चीजे पहले आशचर्य जनक थीं परन्तु आज ऐक आम बात बन चुकी हैं। ‘मन की गति से चलने वाले’ रावण के पुष्पक-विमान का ‘प्रोटोटाईप’ भी उडान भरने के लिये चीन ने बना लिया है।

निस्संदेह रामायण तथा महाभारत के ग्रंथकार दो प्रथक-प्रथक ऋषि थे और आजकल की सैनाओं के साथ उन का कोई सम्बन्ध नहीं था। वह दोनो महाऋषि थे और किसी साईंटिफिक – फिक्शन के थ्रिल्लर – राईटर नहीं थे। उन के उल्लेखों में समानता इस बात की साक्षी है कि तथ्य क्या है और साहित्यक कल्पना क्या होती है। कल्पना को भी विकसित होने के लिये किसी ठोस धरातल की आवश्यक्ता होती है।
हमारे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ब्रह्मास्त्र, आग्नेयास्त्र जैसे अस्त्र अवश्य ही परमाणु शक्ति से सम्पन्न थे, किन्तु हम स्वयं ही अपने प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विवरणों को मिथक मानते हैं और उनके आख्यान तथा उपाख्यानों को कपोल कल्पना, हमारा ऐसा मानना केवल हमें मिली दूषित शिक्षा का परिणाम है जो कि, अपने धर्मग्रंथों के प्रति आस्था रखने वाले पूर्वाग्रह से युक्त, पाश्चात्य विद्वानों की देन है, पता नहीं हम कभी इस दूषित शिक्षा से मुक्त होकर अपनी शिक्षानीति के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर भी पाएँगे या नहीं।

खुद को भारतीय कहने वालो गर्व करो

हार्ट अटैक.......सहज सुलभ उपाय ...!


नोट - ये अपने पर आजमाएं नहीं , यह एक जानकारी है । डॉक्टर की दवाओं और उसकी देख रेख में ही इसे आजमाएं , अन्यथा हानी भी हो सकती है ।

हार्ट अटैक: ना घबराये ......!!!
सहज सुलभ उपाय ....
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता.... पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें। पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार। इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें। * पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है। * इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं। * खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें। * प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें। * अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ......

भारतीय राजनयिक के अपमान पर कड़ा रुख


अमरीकियों का व्यवहार हमेशा ही गैर इसाईयों के प्रति अमानवीय, क्रूर और घ्रणास्पद स्वरूप में सामने आता रहा है फिर भी हम लगातार उनकी गुलामी में लगे रहते हैं।

देवयानी के अपमान पर भड़का भारत, 
यूएस राजयनिकों से वापस मांगे आई कार्ड
Tue, 17 Dec 2013
नई दिल्ली। अमेरिका में भारतीय राजनयिक के अपमान पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने देश में स्थिति सभी अमेरिकी राजनयिकों से आई कार्ड लौटाने को कहा है। इस बीच, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी विरोध स्वरूप वरिष्ठ अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ आज होने वाली बैठक को रद्द कर दिया।
अमेरिका में भारतीय राजनयिक की गिरफ्तारी की घटना का असर दोनों देशों के रिश्तों पर दिखने लगा है। इससे पहले घटना के विरोध स्वरूप लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने भारत दौरे पर आए वरिष्ठ अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी प्रस्तावित मुलाकात को रद्द कर दिया। बताते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन भी इसी वजह से अमेरिकी सांसदों से नहीं मिले।
न्यूयॉर्क में तैनात भारत की उप महावाणिज्य दूत देवयानी खोबरागडे को अपनी नौकरानी के वीजा आवेदन में धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में हालांकि उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया था। लेकिन, इस घटना पर भारत ने अमेरिका के समक्ष कड़ा एतराज जताते हुए नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत नैंसी पावेल को तलब किया था। वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने भी अमेरिकी सरकार से राजनयिक के साथ बदसलूकी की घटना पर विरोध दर्ज कराया था।
पढ़ें : अमेरिका में भारतीय राजनयिक के कपड़े उतरवाकर ली तलाशी
सूत्र बताते हैं कि मीरा कुमार ने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से फिलवक्त मुलाकात करना उचित नहीं समझा और प्रस्तावित बैठक को रद्द कर दिया।
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अमेरिका में भारतीय राजनयिक के कपड़े उतरवाकर ली तलाशी
Tue, 17 Dec 2013
न्यूयॉर्क। वीजा धोखाधड़ी और घरेलू नौकरानी का आर्थिक शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागडे की कपड़े उतरवाकर तलाशी लेने की बात सामने आने के बाद हर कोई सन्न है। इस घटना से व्यथित होकर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात का कार्यक्रम रद कर दिया।
भारतीय राजनयिक के साथ बदसलूकी की घटना इतने पर ही नहीं थमी बल्कि उन्हें पुलिस स्टेशन में सेक्स वर्करों, अपराधियों और नसेड़ियों के बीच खड़ा किया गया। साथ ही उनकी डीएनए स्वेबिंग भी की गई। भारत ने अपने राजनयिक के साथ किए गए इस तरह के दु‌र्व्यवहार के खिलाफ अमेरिका से रोष व्यक्त किया है। इससे पहले भी भारत देवयानी को हथकड़ी पहनाने से काफी खफा था और इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी। भारत के मुताबिक अमेरिका ने इस संबंध में राजनयिकों को मिले अधिकारों का सम्मान नहीं किया है।

गौरतलब है कि देवयानी को पिछले दिनों वीजा धोखाधड़ी के आरोप में उस वक्त गिरफ्तार किया गया था जब वह अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने जा रही थीं। उसी वक्त पुलिस ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर हथकड़ी लगाई थी। । देवयानी 1999 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं। हालांकि बाद में उन्हें ढाई लाख डॉलर के बॉण्ड पर जमानत दी गई थी।

नाम जोडऩे की प्रक्रिया शुरू : लोकसभा चुनावों के लिए बनेगी नई मतदाता सूचियां


लोकसभा चुनावों के लिए बनेगी नई मतदाता सूचियां
नाम जोडऩे की प्रक्रिया शुरू, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिए आदेश

कोटा / विधानसभा चुनाव समाप्त होने के साथ ही अब निर्वाचन विभाग की ओर से लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए नामांकन सूचियों में नाम जोडऩे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक जैन ने सभी जिला कलेक्टरों को इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से निर्देश भी जारी किए। निर्वाचन विभाग के अनुसार लोकसभा चुनावों में कोई भी मतदाता मतदान से वंचित नहीं रहे। इसे ध्यान में रखते हुए 16 से 31 दिसंबर तक मतदाता सूची नवीनीकरण अभियान शुरू किया गया है। इसमें मतदाता सूचियों के प्रारूप का अवलोकन कर इसमें नाम जोडऩे, हटाने सहित आवश्यक संशोधन कराए जा सकेंगे। जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 1 जनवरी-2014 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले युवा मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकेंगे। मौजूदा मतदाता सूचियों के संबंध में दावे एवं आपत्तियां 31 दिसंबर तक प्रस्तुत की जा सकती हैं।

उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनावों में किसी कारणवश जिन योग्य मतदाताओं को मतदाता सूची में उनके नाम नहीं मिले या जिन्होंने अभी तक अपना नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़वाया है, वे भी इस अभियान में मतदाता सूची में नाम जुड़वाना सुनिश्चित कर सकते हैं। जिन मतदाताओं का एक से अधिक क्षेत्रों से पहचान पत्र बना हुआ है, वे एक के अतिरिक्त शेष पहचान-पत्र को निरस्त करा लें। जिन मतदाताओं को निधन हो चुका है उनके परिजन भी उनके पहचान-पत्र को भी निरस्त करा लें। अभियान के तहत 22 व 29 दिसंबर विशेष तिथियां निश्चित की गई हैं। जिनमें प्राधिकृत अधिकारी प्रात: 9 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान केन्द्र पर उपस्थित रहकर दावे व आपत्तियां प्राप्त करेंगे।


निर्वाचन आयोग से संबंधित जानकारी

निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदान के लिए प्रेरित किया मत प्रतिशत भी बढ़ा।  कुछ मतदाताओं  कि समस्या थी कि हमारा नाम नहीं था तो कुछ के नाम जुड़वाने कि समस्या।   सजग नागरिक का कर्त्तव्य है कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझे।  आने वाले लोकसभा चुनाव में आप मतदान से वंचित न रहे।  आपने कर्त्तव्य को समझे।  
राजस्थान के निर्वाचन विभाग की वेब साईट पर सभी प्रकार कि जानकारी उपलब्ध रहती है।  वेब साईट का एड्रेस है : http://ceorajasthan.nic.in
BLO (Block Level Officer) कि जानकारी भी वेब साईट पर रहती है उनका एड्रेस मोबाइल नम्बर  सभी उपलब्ध है बस आपको एक्टिव होकर अपना कर्त्तव्य  पूरा करना है . 
समय समय पर निर्वाचन विभाग समाचार पत्रो में भी जानकारी उपलबध करवाता रहता है।