बुधवार, 18 दिसंबर 2013

महंगाई : नतीजा चारों राज्यों में कांग्रेस की भारी हार हो गई



जब अटलबिहारी वाजपेयी प्रधान मंत्री थे , तब प्याज और आलू मामले महंगे क्या हुए थे कि भाजपा की तीन राज्यों  की सरकारें चली गईं थी । उन्होंने फिर मंहगाई पर येसी नकेल कसी की उनके राज में फिर मंहगाई नही हुई । कांग्रेस लगातार ९ साल से मंहगाई की अनदेखी कर रही हे । अब तो हद यह हो गई की खुद कांग्रेस सरकार ने मंहगाई बड़बाई , नतीजा चारों राज्यों में भारी  हार हो गई , जनता का असली दंड तो लोकसभा में आनेवाला हे 

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प्रभात मत : महंगाई के मोरचे पर चेतने का वक्त
http://www.prabhatkhabar.com/news/72377-story.html?google_editors_picks=true
महंगाई के मोरचे से आ रही खबरों को देखते हुए लगता नहीं कि निकट भविष्य में इसकी मार से छुटकारा मिलेगा. ताजा आंकड़ों के मुताबिक खाद्य-पदार्थो, विशेषकर सब्जियों, की कीमतों में खासी तेजी आयी है. इससे थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में बीते 14 माह की रिकॉर्ड ऊंचाई पर रही. सब्जियों की महंगाई का आलम यह है कि अक्तूबर से नवंबर के बीच कीमतों में तकरीबन 17 फीसदी का इजाफा हो गया है.

पिछले साल के नवंबर महीने की तुलना में इस साल नवंबर में आलू की कीमतें 26 फीसदी ऊंची रहीं, तो प्याज की कीमतें 190 प्रतिशत. मांस-मछली, दूध, अंडे आदि की कीमतों में इतनी विकराल तेजी भले न आयी हो, पर इनकी कीमतों में भी पिछले एक साल में 6 से 15 फीसदी का इजाफा हुआ है. फिर एक साल ही क्यों, बीते चार सालों में महंगाई लगातार बढ़ी है, परंतु यूपीए सरकार ने सिर्फ लाचारी का ही इजहार किया है, यह कह कर कि वैश्वीकरण के दौर में अगर वैश्विक बाजारों में चीजों के दाम बढ़ रहे हैं तो भारत में भी बढ़ेंगे.

पेट्रोलियम पदार्थो के मामले में यह बात एक हद तक सच है, लेकिन खाद्य-पदार्थो के मामले में नहीं. वैश्विक संस्था फूड एंड एग्रीकल्चरल एसोसिएशन का हालिया आकलन बताता है कि वैश्विक स्तर पर खाद्य-पदार्थो की कीमतें कम हुई हैं. यूपीए सरकार यह बहाना भी बनाती रही है कि जैसे-जैसे घरेलू स्तर पर खाद्य-पदार्थो की आपूर्ति बढ़ेगी, इनकी कीमतें गिरेंगी, परंतु उत्पादन अच्छा रहने के बावजूद इनकी कीमतों की बढ़वार थमने का नाम नहीं ले रही है. दरअसल सरकार की प्राथमिकताओं में महंगाई रोकना शामिल ही नहीं है.

उल्टे यूपीए सरकार वित्तीय घाटा कम करने के नाम पर सामाजिक कल्याण की योजनाओं के मद में स्वीकृत बजट राशि में भी कमी करने जा रही है. सरकार का उद्देश्य मात्र इतना है कि बाजार से कर्ज लेना इतना महंगा न हो जाये कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां भारत को निवेश के लिए अलाभकर या जोखिम भरा देश करार दे दें. महंगाई की मार सबसे ज्यादा आम लोगों पर पड़ती है. हाल के चुनावी नतीजों में महंगाई का भी असर दिखा है और संभव है 2014 के आम चुनाव में भी यह मतदाताओं का रुझान तय करे. इसलिए यूपीए सरकार के लिए यह समय रहते चेत जाने का वक्त है.

देवयानी गिरफ्तारी : सोची समझी साजिस हे भारतवासियों को नीचा दिखाने की … !


सच यह है कि अमरीका हो या अन्य इसाई देश , सिर्फ बातें मानवता की करते हैं, मगर वास्तविकता में ये बेहद क्रूर और अमानवीय ही होते हें। देवयानी प्रकरण से वास्तविकता में अमरीकी चेहरे से नकाव उतरा है और उसके मानवतावादी का ढ़ोंग जग जाहिर हो गया ।
सच यह हे कि यह येशा मामला नही था कि जिसमें हथकड़ी लगानी  पड़े और नंगा किया जाये ! यह सोची समझी साजिस हे भारत वासियों को नीचा  दिखाने की … !
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देवयानी पर अमेरिका सहीः ह्यूमन राइट्स वॉच
आईबीएन-7 | Dec 18, 2013

न्यूयार्क। अमेरिकी मार्शल सर्विस (यूएसएमएस) ने भारतीय उपमहावाणिज्य दूत देवयानी खोब्रागड़े की गहन तलाशी को न्यायोचित करार दिया और कहा कि उन्हें यूएसएमएस के निर्दिष्ट मानकों और प्रोटोकॉल के तहत हिरासत में लिया गया था। यूएसएमएस ने इस बात की भी पुष्टि की है कि राजनयिक की उसी तरह से तलाशी ली गई थी जिस तरह कि अन्य गिरफ्तार लोगों की ली जाती है।

इस मामले में अमेरिकी मानवाधिकार संस्था यूएस ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी अपनी सरकार का पक्ष लेते हुए बयान जारी किया है। संस्था का कहना है कि पुलिस की कस्टडी में लिए गए लोगों की कपड़े उतारकर तलाशी लेना मानवाधिकारों को लेकर एक बड़ा सवाल है। किसी भी व्यक्ति की निजता का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन देवयानी पर लगे आरोप भी मानवाधिकारों से जुड़े हैं। बहुत से लोग ये कह रहे हैं कि देवयानी भारत सरकार से मिलने वाली तनख्वाह से ज्यादा पैसे यानि 4500 डॉलर अपनी नौकरानी को कैसे दे सकती थी। लेकिन ये भी ध्यान रखना होगा कि अगर आप अपने नौकर को नियमों के मुताबिक तनख्वाह नहीं दे सकते तो आपको नौकर रखने का अधिकार भी नहीं है।

उधर अमेरिकी मार्शल ने एक वक्तव्य में कहा कि 12 दिसंबर को खोब्रागड़े की हुई गिरफ्तारी से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने सिर्फ गिरफ्तारी के मानकों के अनुसार काम किया है। वक्तव्य के मुताबिक खोब्रागड़े को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ डिप्लोमेटिक सिक्युरिटी ने गिरफ्तार कर यूएसएमएस के हवाले कर दिया था।

उन्हें 2,50,000 डॉलर की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया था। वक्तव्य के मुताबिक यूएसएमएस की हिरासत में मानक गिरफ्तारी प्रक्रिया का अनुसरण किया गया है। खोबरागडे के खिलाफ पिछले सप्ताह वीजा धोखाधड़ी और झूठा बयान देने का मामला दर्ज किया गया था। उनकी गिरफ्तारी और उनके साथ किए गए दुर्व्यवहार की भारत में तीखी आलोचना हुई है। इससे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं।
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डिप्लोमैट देवयानी के खिलाफ हुई साजिश?
नवभारत टाइम्स | Dec 18, 2013
रंजीत कुमार, नई दिल्ली
न्यू यॉर्क में भारतीय डिप्लोमैट देवयानी खोब्रागड़े को 12 दिसंबर को गिरफ्तार करने के ठीक 2 दिनों पहले उनकी मेड संगीता के पति अपने 2 बच्चों के साथ न्यू यॉर्क कैसे पहुंचे? यही नहीं यह जानते हुए कि संगीता अमेरिका में कथित गैर कानूनी तौर पर गई थीं, उनके पति को अमेरिकी दूतावास ने यहां क्यों वीजा दिया? अमेरिकी अधिकारियों के देवयानी की गिरफ्तारी और उनके साथ गलत बर्ताव करने के पीछे अब नई कहानी उजागर हो रही है। इस बीच, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने संसद में देवयानी को सम्मान के साथ भारत लाने का वादा किया है।

साजिश के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, संगीता रिचर्ड के पति दोनों बच्चों के साथ एयर इंडिया-101 की उड़ान से 10 दिसंबर को न्यू यॉर्क पहुंचे और उसके 2 दिनों बाद ही देवयानी की गिरफ्तारी से यह साफ उजागर होता है कि उनको फंसाने की साजिश पर काम हो रहा था। शायद यही वजह होगी कि संगीता के लापता होने की 6 महीने से भारतीय काउंसलेट की दी गई जानकारी को अमेरिकी अधिकारी नजरअंदाज कर रहे थे। यह भी रोचक है कि अमेरिका रवाना होने के ठीक 2 दिनों पहले ही संगीता के पति को अमेरिकी वीजा मिला था। अमेरिकी वीजा काफी गहन सुरक्षा जांच पड़ताल के बाद जारी किया जाता है, लेकिन संगीता के पति को वीजा दिया जाना अमेरिकी इरादों पर शक पैदा करता है।

चुप्पी का चक्कर
क्या देवयानी को किसी भी तरह फंसाने की अमेरिकी अधिकारियों की यह कोशिश थी? सवाल यह भी उठता है कि भारत और अमेरिका के बीच दोस्ती के मौजूदा हाल के मद्देनजर अमेरिकी अधिकारी एक भारतीय डिप्लोमैट को शर्मनाक तरीके से तंग करने की साजिश क्यों रच रहे थे? यदि देवयानी ने गलती की तो उनकी मेड को भी हिरासत में लिया जाना चाहिए था। लेकिन, संगीता का पासपोर्ट भारत के रद्द करने के बावजूद अमेरिका ने संगीता के पति को वीजा दिया। यहां माना जा रहा है कि संगीता न्यू यॉर्क में किसी के संरक्षण में है और उनके पति भी उनके साथ हैं। भारतीय डिप्लोमैट ने अमेरिकी अधिकारियों से बार-बार कहा कि संगीता का पता लगाए। उनका पासपोर्ट भारत ने रद्द कर दिया है और अब वह गैरकानूनी तौर पर वहां रह रही हैं, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस जानकारी पर चुप्पी साधे रही।

ब्लैकमेलिंग की कोशिश
यहां जानकारों का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों को जून, 2013 में ही संगीता के लापता होने की जानकारी दी थी और न्यू यॉर्क पुलिस ने इस पर चुप्पी साधे रही। इसके पहले संगीता ने देवयानी को ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी। उसने देवयानी से 10 हजार डॉलर और उसका पासपोर्ट लौटाने की मांग की थी। इसके साथ यह भी कहा था कि वह उन्हें अमेरिका में बसने में मदद दें। न्यू यॉर्क पुलिस के इस पर कार्रवाई नहीं करने पर यहां 21 सितंबर को हाई कोर्ट में दायर याचिका के जवाब में आदेश जारी हुआ कि संगीता से जुड़े सभी मामलों पर भारतीय कोर्ट का ही अधिकार क्षेत्र होगा।

नहीं मानी बात
इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने खुद ही न्यू यॉर्क में भारतीय काउंसलेट से संपर्क किया और भारत की दी गई जानकारियों को नजरअंदाज करते हुए अपनी ओर से देवयानी के खिलाफ कई आरोप लगाए। इसके जवाब में भारतीय अधिकारियों ने कहा कि संगीता अमेरिकी आव्रजन कानूनों का दुरुपयोग कर रही हैं, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। इसी दौरान करीब 17 सितंबर को संगीता के पति ने नई दिल्ली में अपना पासपोर्ट हासिल कर लिया था। यहां जानकारों का कहना है कि मानवाधिकारों की वजह से भारत सरकार ने संगीता के पति को पासपोर्ट लेने से नहीं रोका।
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संसद में गूंजा देवयानी से बदसलूकी का मुद्दा
भाषा | Dec 18, 2013, नई दिल्ली

अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागड़े को वीजा जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार कर हथकड़ी लगाए जाने और जेल में बंद करने का मुद्दा बुधवार को संसद में भी उठा। देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राज्यसभा में सदस्यों ने विदेश नीति में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया और मांग की कि केंद्र सरकार को इस बारे में समुचित और कठोर कदम उठाना चाहिए।

कुछ राजनीतिक दलों के सदस्यों ने अमेरिका को कड़ा संदेश देने के लिए संसद में उसके विरूद्ध एक निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने की मांग की, वहीं बीएसपी प्रमुख मायावती ने मांग की कि सरकार यह साफ करे कि वह महिला राजनयिक को इस मामले से बचाने के लिए कौन से विशिष्ट कदम उठा रही है।

संसद में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा, 'यह अत्यंत गंभीर और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा मुद्दा है। भारतीय राजनयिक को गिरफ्तार कर हथकड़ी लगाना और जेल में अपराधियों के साथ रखना वियना समझौता के तहत राजनयिकों मिली छूट का उल्लंघन है।'

जेटली ने कहा, 'ऐसी स्थिति इसलिए आई है क्योंकि पहले भी भारतीय हस्तियां अमेरिका में अपमानित हुई हैं और सरकार ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। यदि तब कड़ी प्रतिक्रिया जताई गई होती तो आज ऐसा नहीं होता।'

विदेश नीति की समीक्षा पर जोर देते हुए जेटली ने कहा, 'हमारी संप्रभुता को किसी भी तरह की आंच बर्दाश्त नही की जाएगी। अमेरिकी सुरक्षा एजेसियां दूसरे देशों की जासूसी कर रही हैं जिस पर दूसरे देश आपत्ति जता चुके हैं और उनके अधिकारियों ने उच्च स्तरीय बैठकें तक रद्द कीं। लेकिन भारत ने कुछ नहीं कहा। अगर हमारी विदेश नीति का यही हाल रहा तो हमें गंभीरता से कोई नहीं लेगा और ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।'

सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने इस घटना को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि भारत जैसा कोई भी आत्मसम्मान वाला देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं लेकिन हर बार हमने ऐसा संदेश दिया मानो हमें अमेरिका का प्रभुत्व स्वीकार है। इस रवैये को तत्काल बदला जाना चाहिए।

येचुरी ने कहा, 'हमारी विदेश नीति पंचशील के सिद्धांत से तय होती है और जिसमें एक दूसरे को सम्मान देने की बात कही गई है। किसी भी देश के साथ राणनीतिक संबंधों में पंचशील के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। जो भी घटना हुई है, उस पर परिपक्वता जताते हुए हमें उसका कड़ा विरोध करना चाहिए।'

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने मांग की कि भारत में अमेरिकी राजनयिकों को मिल रहे विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध कर यह देखना चाहिए कि अमेरिका में भारतीय राजनयिकों को क्या ऐसे ही विशेषाधिकार मिल रहे हैं। समय आ गया है कि अमेरिका खुद को 'स्वयं नियुक्ति किया गया लोकपाल' समझना बंद करे।

जेडीयू के शिवानंद तिवारी ने सुझाव दिया कि सरकार अमेरिका से कहे कि भारतीय राजनयिक पर न्यू यॉर्क में दर्ज किया गया मामला वापस लिया जाना चाहिए और वॉशिंगटन पूरे घटनाक्रम के लिए माफी मांगे।

एसपी के रामगोपाल यादव ने तिवारी से सहमति जताते हुए कहा कि अगर अभी भी कड़ा रुख नहीं अपनाया गया तो ऐसी घटनाएं आगे भी होती रहेंगी। एआईएडीएमके के वी. मैत्रेयन ने पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा भारतीय भूभाग में घुस कर एक भारतीय सैनिक का सर काटने और श्रीलंकाई नौसेना द्वारा भारतीय मछुआरों को पकड़े जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेश नीति में बदलाव करने का समय आ गया है।

डीएमके की कनिमोई ने कहा, 'दलित महिला को पढ़ाई से लेकर हर क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। देवयानी भी इन चुनौतियों से गुजर कर इस मुकाम तक पहुंची होगी लेकिन उनके साथ जो कुछ हुआ, वह दूसरों का मनोबल निश्चित रूप से गिराएगा।'

बीजेडी के शशिभूषण बेहरा ने कहा, 'हम नहीं चाहते कि द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हों लेकिन हम आत्मसम्मान पर आघात भी नहीं चाहते।'शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने मांग की कि विदेशों में देश की सेवा करने वाले अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा दी जानी चाहिए।

कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि वह इस मामले में पूरे सदन की भावना के साथ हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी मानसिकता बदलनी होगी। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि वह महज 350 साल पुरानी सभ्यता है, जबकि भारतीय सभ्यता पांच हजार साल पुरानी है।

द्विवेदी ने कहा कि इस मामले में सरकार ने जिस तरह का संदेश अमेरिका को दिया है उससे पूरे देश का सिर ऊंचा हुआ है। एलजेपी नेता रामविलास पासवान ने अमेरिका की कड़ी निंदा करते हुए मांग की कि इस मामले में संसद में एक निंदा प्रस्ताव पारित कर पूरे देश की भावना व्यक्त की जानी चाहिए।