शनिवार, 21 दिसंबर 2013

उत्तर प्रदेश के पूर्वजों ने ही रामराज्य की परंपरा डाली : नरेन्द्र मोदी



वाराणसी।
शिव की नगरी काशी में नरेंद्र मोदी की रैली हो और वह इससे जुड़ीं भावनाओं को न उठाएं, यह संभव नहीं है। हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों में सरकार बनाने के बाद जोश से लबरेज भाजपा और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी ने बाबा विश्वनाथ, गंगा की सफाई और पूर्वांचल के पिछड़ेपन का जिक्र करते हुए कांग्रेस व प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी पर  जमकर हमला बोला। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में चिर-परिचित शैली में कहा सोमनाथ की धरती से बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने आया हूं। इसके बाद कहा कि चुनाव से पहले देश में ऐसा माहौल पहली बार देख रहा हूं, 2014 का चुनाव कोई पार्टी या कोई व्यक्ति नहीं लडऩे वाला है। यह चुनाव देश का हर मतदाता लडऩे वाला है। इसके बाद गंगा नदी के प्रदूषण का जिक्र करते हुए उन्होंने स्थानीय लोगों की भावनाओं को छूने की कोशिश की। 

मोदी ने कहा, गंगा माता की चर्चा के बिना हिंदुस्तान की चर्चा अधूरी है। औरों के लिए गंगा सिर्फ नदी हो सकती है, लेकिन हमारे लिए यह मां है। गंगा पानी की धारा नहीं है, यह हमारी संस्कृति की धारा है। इस गंगा की सफाई के लिए न जाने कितनी योजनाएं बनीं, न जाने कितना बजट खर्च हुआ, लेकिन पता नहीं चल रहा है कि गंगा के अंदर ये रूपये भी बह जा रहे हैं क्या? जो गंगा नहीं संभाल सकते वे देश को क्या संभालेंगे? गंगा को शुद्ध करने के लिए दिल्ली और लखनऊ को शुद्ध करना होगा, इन लोगों के रहते हुए गंगा के शुद्धीकरण का सवाल ही नहीं है।

उन्होंने केंद्र में सरकार बनने पर गंगा को प्रदूषणमुक्त करने का भरोसा दिलाते हुए कहा, मैं वादे नहीं इरादे लेकर आया हूं। देश ने वादे बहुते सुने हैं, अब देश की धरती पर सचाई को उतारने का वक्त है। उन्होंने कहा कि लोग मुझसे सवाल करते हैं कि कांग्रेस ने बर्बाद कर दिया लेकिन आप आएंगे तो क्या करेंगे, इसके जवाब में मैं कहना चाहता हूं, महात्मा गांधी के नाम के साथ जुड़ी साबरमती गंदी नाली बन गई थी, आज जाकर देखिए शहर के बीचोबीच शुद्ध जल से लबालब है और निर्मल होकर बह रही है। अगर साबरमती साफ हो सकती है तो गंगा क्य़ों नहीं?

मोदी ने कहा कि यूपीए सरकार ने उत्साह और उमंग के साथ गंगा साफ करने के लिए योजना बनाई और प्रचार किया। लोगों को लगा कि अब कुछ होगा। पांच साल में तीन मीटिंग करने के सिवा कोई काम नहीं किया।
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उत्तर प्रदेश के पूर्वजों ने ही रामराज्य की परंपरा डाली थी: मोदी
Sat, 21 Dec 2013
वाराणसी। राम मंदिर मुद्दे से अभी तक दूरी बनाए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी में रामराज्य स्थापित करने का आह्वान किया। अपने चिर परिचित अंदाज में उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने चाय बेची है, देश नहीं बेचा। मोदी ने कहा कि मुझे उत्तर प्रदेश के लोगों पर पूरा भरोसा है। उनके पूर्वजों ने ही रामराज्य की परंपरा डाली थी। उनमें इस सिलसिले को फिर से शुरू करने की क्षमता है। इस मौके पर मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा भी बुलंद किया। कहा, कांग्रेस मुक्त भारत गरीबी और भ्रष्टाचार से मुक्ति की गारंटी है।

चारों ओर गूंज उठा मोदी का जयघोष
वाराणसी। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी शुक्रवार को जैसे ही खजुरी स्थित रैली स्थल पर पहुंचे तो वहां उपस्थित पांच लाख की भीड़ ने हर-हर मोदी का जयघोष कर उनका जोरदार स्वागत किया।

नमो की रैली को लेकर सुरक्षा एजेंसियां जहां चौकस थीं, वहीं आमजन भी काफी उत्साहित नजर आ रहे थे। बीएचयू हेलीपैड पर मोदी का हेलीकाप्टर उतरने से पूर्व विश्वविद्यालय परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए थे। साथ ही आसपास की दुकानों को भी प्रशासन ने बंद करा दिया था। ऐसे में लोगों को थोड़ी परेशानी हुई और आक्त्रोश भी व्यक्त किया। दोपहर लगभग पौने दो बजे मोदी का काफिला रैली स्थल पहुंचा।

हम जो कहते हैं वह कर के दिखाते हैं: मोदी
वाराणसी [अवनीश त्यागी]। यूपी के पूर्वाचल में भाजपा की जमीन तैयार करने को वाराणसी में शुक्रवार को विजय शंखनाद रैली में नरेंद्र मोदी का अंदाज बदला हुआ था। चार राज्यों के विधानसभा नतीजों के बाद मोदी की यह पहली रैली थी, जिसमें उन्होंने विरोधियों पर हमला कम करते हुए यह ज्यादा अहसास कराने की कोशिश की कि वह जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। इसके लिए उन्होंने गंगा, बुनकर, बेरोजगार आदि का सवाल उठाते हुए इसे गुजरात से जोड़ा। गुजरात में साबरमती नदी, सूरत के बुनकरों और नौकरी देने की नई व्यवस्था का उदाहरण रखते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि ऐसा यूपी में भी हो सकता है।

वाराणसी-इलाहाबाद राजमार्ग पर खजुरी में राजा तालाब मैदान पर रैली में नरेंद्र मोदी ने पूर्वाचल की गरीबी, बेरोजगारी व बदहाली के लिए कांग्रेस के साथ सपा व बसपा को जिम्मेदार ठहराया। मोदी ने गंगा सफाई के मुद्दे को भी शिद्दत से उठाते हुए न केवल सरकार की घेराबंदी की बल्कि जनता की आस्था को भी झकझोरते हुए गंगा नदी के क्षेत्र में उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की 150 संसदीय सीटों में सियासी समीकरण साधने का प्रयास किया। कहा कि गंगा शुद्धिकरण योजनाओं में बहाए हजारों करोड़ रुपये का हिसाब प्रधानमंत्री को देना होगा। केंद्र और प्रदेश पर गंगा को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए दोनों सरकारों की सफाई करने का आह्वान भी किया। मोदी गुजरात में साबरमती नदी की सफाई का उदाहरण देना भी नहीं भूले।

मोदी ने देश की बदहाली के लिए सीधे तौर से नेहरू गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लगभग 45 वर्ष तक इसी परिवार के हाथों में देश की कमान रही। राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब चुनाव आता है तो कांग्रेस गरीब-गरीब की माला जपने लगती है, लेकिन गरीबों को इन्होंने ही तबाह किया। उन्होंने बनारस के एक मुस्लिम युवक द्वारा भेजे पत्र का हवाला देते हुए बनारस के साड़ी कारोबार की बदहाली बयां की और इसके लिए भी कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

नरेंद्र मोदी ने कहा, उत्तर प्रदेश में व्याप्त समस्याओं की सबसे बड़ी वजह यहां पर सही सरकार का न होना है। जिस दिन जनता यहां पर सही सरकार चुन लेगी, उसी दिन से समस्याओं का समाधान शुरू हो जाएगा। इस मौके पर उन्होंने गंगा शुद्धिकरण अभियान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मां के रूप में जानी जाने वाली गंगा नदी का बुरा हाल है। हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद कुछ नहीं हुआ। उन्होंने गुजरात में बहने वाली साबरमती और नर्मदा नदियों का उदाहरण देकर कहा, जब उनको साफ किया जा सकता है तो गंगा को क्यों नहीं। लेकिन इसके लिए सरकार की नीयत साफ होनी चाहिए।

मोदी ने बनारसी साड़ी का जिक्र करके बुनकरों की रोजी-रोटी का सवाल उठाया। कहा, अगर उन्नत तकनीकी से सूरत बदल सकता है तो वाराणसी क्यों नहीं बदल सकती। लेकिन इसके लिए सरकारी इच्छाशक्ति की जरूरत है। गरीबी के सवाल पर मोदी ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। कहा, केवल एक परिवार ने देश पर 45 साल तक शासन किया लेकिन गरीबी की समस्या खत्म नहीं हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनमें गरीबों के प्रति संवेदना का अभाव था। वे नहीं जानते कि गरीबी क्या होती है। उन्हें गरीबों के दर्द से कोई वास्ता नहीं रहा।

मोदी ने कहा कि जब चुनाव आता है तो कांग्रेस गरीब-गरीब की माला जपने लगती है और जैसे ही जीतकर सत्ता में बैठती है-वह उनके बारे में भूल जाती है। खुद को चाय बेचने वाला कहे जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मोदी ने लोगों से पूछा, क्या चाय बेचना गलत है? क्या मेहनत से ईमानदारी की रोटी कमाना गलत है?

जनता के पक्ष में आए जवाब से उत्साहित मोदी ने परोक्ष रूप से फिर कांग्रेस पर प्रहार किया- चाय बेची है पर देश नहीं बेचा। इस देश में खेत में काम करने वाला मजदूर, फुटपाथ पर बैठकर जूता पॉलिश करने वाला और दूसरे गरीब भी मेहनत व संघर्ष करके आगे बढ़ सकते हैं-प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं।