शनिवार, 28 दिसंबर 2013

मोदी की रांची रैली 29 दिसंबर को : जेवीएम नेता सहित दर्जनों भाजपा में शामिल



मोदी की रांची रैली 29 दिसंबर को
पहले जेवीएम नेता सहित दर्जनों भाजपा में शामिल
 Sat, Dec 28th, 2013

रांची. नरेंद्र मोदी विजय संकल्प रैली को संबोधित करने 29 दिसंबर को रांची पहुंचेंगे. श्री मोदी का विशेष विमान सुबह 12.45 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट उतरेगा. यहां से वह हेलीकॉप्टर से सीधे जेएससीए स्टेडियम पहुंचेंगे. एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद हेलीकॉप्टर दो मिनट में जेएससीए स्टेडियम पहुंचेगा. इसके बाद मोदी व उनके साथ आये अतिथि कार से सभा स्थल पर पहुंचेंगे.

इससे पहले जेवीएम नेता उदय भान सिंह समेत आदिवासी छात्र संघ के कई नेता शुक्रवार को भाजपा में शामिल हुए. प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष डॉ रवींद्र राय ने स्वागत किया. श्री राय ने बताया कि उदय भान सिंह का संबंध रामगढ़ के राजघराने से है. इनके आने से पार्टी और मजबूत होगी. इधर आदिवासी छात्र मोरचा के बेलरस कुजूर के नेतृत्व में ईसाई समुदाय के दर्जनों लोग पार्टी में शामिल हुए. श्री कुजूर इससे पहले चमरा लिंडा की पार्टी से जुड़े हुए थे. पार्टी की सदस्यता ग्रहण करनेवालों में सतीश एक्का, कुंदन टोप्पो, शेफाली खलखो समेत कई लोग शामिल हैं.

सरकार ने की हेलिकॉप्टर की व्यवस्था
उनका काफिला जेएससीए स्टेडियम के सात नंबर गेट से निकलेगा. सरकार ने नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर एयरपोर्ट से स्टेडियम तक हेलीकॉप्टर (यूरो कॉप्टर विमान डॉल्फिन 365 एन-2) की व्यवस्था की है. यहां बता दें कि गुरुवार को भाजपा ने सरकार को पत्र लिख कर हेलीकॉप्टर दिलाने का आग्रह किया था. इसलिए सरकार की ओर से हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गयी है.

हुई मॉक ड्रिल
शुक्रवार को मॉक ड्रिल कर जेएससीए स्टेडियम में हेलीकॉप्टर उतारा गया. रैली को लेकर नरेंद्र मोदी रांची में लगभग ढाई घंटे रहेंगे. सभा स्थल पर दो घंटा रहने के बाद श्री मोदी शाम 3.15 बजे रवाना होंगे. इधर, सुरक्षा-व्यवस्था की कमान संभाल रहे पुलिस अधिकारियों को तब राहत मिली, जब यह फैसला हो गया कि मोदी हेलीकॉप्टर से सभास्थल पहुंचेंगे. इससे पहले पुलिस अधिकारी एयरपोर्ट से धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान तक उनके कारकेड को ले जाने को लेकर परेशान थी.

वीआइपी के लिए होगा जगन्नाथपुर मंदिर जानेवाला रास्ता
नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान वीआइपी (एमएलए, एमपी व अन्य गणमान्य) शहीद मैदान के सामने से जगन्नाथपुर मंदिर जानेवाले रास्ते से जेएससीए स्टेडियम होते हुए रैली स्थल तक पहुंचेंगे. ट्रैफिक एसपी राजीव रंजन सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था नरेंद्र मोदी के चौपर से सभा स्थल तक आने का कार्यक्रम तय होने के बाद की गयी. अब रामगढ़ की ओर से आनेवाले वाहन कांटाटोली चौक से मुड़ कर नामकुम सदाबहार चौक , घाघरा पुल, डोरंडा होकर धुर्वा की ओर जायेंगे. पहले रामगढ़ की ओर से आनेवाले वाहनों को शहर के भीड़ को देखते हुए खेल गांव से टाटीसिलवे, नामकुम, घाघरा पुल होते हुए धुर्वा की रूट तय की गयी थी. भाजपा के नेताओं ने रामगढ़ की ओर से रैली में आनेवाले लोगों को होनेवाली असुविधा को देखते हुए जिला प्रशासन से आग्रह किया, उसके बाद यह व्यवस्था की गयी है. नया सराय की ओर से आनेवाले लोग तिरिल रोड होते हुए जेएससीए मोड़ तक आ पायेंगे. कुछ विशेष वाहनों के लिए जिला प्रशासन की ओर से पास जारी किया गया है. पास धारक वाहनों को रैली स्थल से कुछ पहले तक पार्किग करने की व्यवस्था होगी.

एचइसी से सभास्थल तक 12 तोरण द्वार
रैली को लेकर शहर को सजाने-संवारने का काम जारी है. लगभग सभी मार्गो पर भाजपा के झंडे, पोस्टर, बैनर और बड़े-बड़े फ्लैक्स लगाये गये हैं. एचइसी गेट से जगन्नाथ सभा स्थल तक 12 तोरण द्वार बनाये गये हैं. महामंत्री सुनील कुमार सिंह ने बताया कि स्वागत द्वार झारखंड की ऐतिहासिक और बलिदानी परंपरा की याद ताजा करायेंगे.

जरूरी दवाओं के साथ तैनात रहेंगे सिविल सर्जन
मोदी के आगमन से पूर्व सिविल सर्जन को भी एक एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं के साथ उपलब्ध रहने का निर्देश दिया गया है. नरेंद्र मोदी का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है, इसलिए एसएसपी ने सार्जेट मेजर से ए पॉजिटिव वाले पुलिसकर्मियों को सिविल सजर्न के पास रिपोर्ट करने को कहा है. इधर, भाजपा चिकित्सा व्यवस्था के प्रभारी डॉ समर सिंह व डॉ जीतू चरण राम ने बताया कि रैली स्थल पर 40 चिकित्सक टीम के साथ तैनात रहेंगे.  25 एंबुलेंस, तीन मोबाइल मेडिकल वैन व दवाओं की व्यवस्था है.

9 ज़ोन में बंटा स्टेडियम से लेकर सभा स्थल का इलाका
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर डीसी विनय चौबे और एसएसपी भीम सेन टूटी ने समाहरणालय में शुक्रवार को संयुक्त रूप से बैठक की. इसमें सिटी एसपी, एसडीओ, डीएसपी और ट्रैफिक पुलिस और स्पेशल ब्रांच के अधिकारी शामिल थे. डीसी और एसपी ने मोदी की सुरक्षा को लेकर जेएससीए स्टेडियम, धुर्वा से लेकर सभा स्थल तक के विभिन्न क्षेत्रों को नौ जोन में बांटा गया है. सभी जोन की सुरक्षा के लिए अलग से पुलिस अधिकारी हैं.

रैली से पूर्व हर वस्तु की जांच मेटल डिटेक्टर से
साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए छह जोन निर्धारित किये है, जिनमें अलग से पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गयी है. रैली से पूर्व हर वस्तु की जांच मेटल डिटेक्टर से होगी. सभा स्थल से 500 मीटर की परिधि में निगरानी की विशेष व्यवस्था होगी. एयरपोर्ट और सभा स्थल पर हर वस्तु की स्क्रीनिंग होगी. फोटोग्राफरों के कैमरे में लगे फ्लैश की जांच होगी. इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी और और दूरबीन लगाने की भी व्यवस्था की गयी है. डीसी ने कहा कि सुरक्षा में जितने भी अधिकारी तैनात हैं, सबको उनके कार्य से अवगत करा दिया गया है. मोदी की रैली के दौरान सुरक्षा- व्यवस्था में कहीं कोई चूक नहीं होगी.

गुजरात दंगा : नरेंद्र मोदी ने किया दर्द बयां




आईबीएन-7 | Dec 27, 2013

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2002 दंगों पर 11 साल बाद सफाई दी है। बीते गुरुवार को उन्हें गुलबर्ग सोसायटी दंगा मामले में कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने मोदी को मिली एसआईटी की क्लीन चिट बरकरार रखी है। मोदी ने कोर्ट के फैसले को सत्य की जीत बताया, और आज उन्होंने दंगों पर विस्तार से सफाई दी है।
उन दिनों को याद करते हुए मोदी ने कहा कि 2002 दंगों के बाद वे बेहद व्यथित और आहत थे। मोदी के मुताबिक दंगों ने उन्हें भीतर तक हिला दिया था, उस दुख को वो कभी साझा नहीं कर पाए। मोदी ने ब्लॉग पर लिखा है कि वो पहली बार गुजरात दंगों की व्यथा बयां कर रहे हैं।
मोदी के मुताबिक उन्होंने दंगों के दौर की पीड़ा अकेले ही झेली। मोदी कहते हैं कि गुजरात दंगों जैसे क्रूर दिन किसी को देखने नहीं पड़े, और ईश्वर उन्हें ताकत दें इसकी वो कामना करते हैं। मोदी का दावा है कि गुजरात के दंगों के दौरान वो शांति और संयम बनाए रखने की अपील करते रहे। उन्होंने माना कि शांति बनाए रखना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी थी।

मोदी का दावा है कि उनकी सरकार ने दंगाइयों से कड़ाई से निपटने की कोशिश की। उसी वक्त उन्हें अंदेशा हो गया था कि उन पर आरोप लगते रहेंगे। मोदी ने लोगों से गुजरात को बदनाम नहीं करने की अपील की है और कहा है कि गुजरात की 12 साल की अग्निपरीक्षा अब खत्म हो गई है।

प्रकृति का ये नियम है कि हमेशा सत्य की जीत होती है- सत्यमेव जयते। अदालत ने कह दिया है, मुझे महसूस हुआ कि अपने विचार और भावनाएं देश के साथ बांटने चाहिए। ये जो अंत हुआ है उसने मुझे शुरुआत की याद दिला दी। 2001 में गुजरात भयानक भूकंप से तबाही और मौत से असहाय पड़ा हुआ था। हजारों लोगों ने जान गवाई। लाखों बेघर हो गए थ। लोगों की रोजी-रोटी खत्म हो गई थी। दुख और सदमे के ऐसे समय में मुझे फिर से पुनिर्निर्माण की जिम्मेदारी दी गई और हमनें हाथ में आई चुनौती को दिल से स्वीकार किया।
मगर 5 महीनों के अंदर 2002 की अंधी हिंसा के रूप में हम पर आफत बनकर टूटी। निर्दोष मारे गए। परिवार बेसहारा हो गए। सालों की मेहनत से बनाई गई संपत्ति बरबाद कर दी गई। जो गुजरात अभी प्राकृतिक आपदा से जूझते हुए अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रहा था उस पर एक और आफत टूटी।

मोदी ने लिखा ‘मैं भीतर तक हिल गया था। गम, दुख, पीड़ा, क्षोभ, यातना ये सारे शब्द उनके लिए कम हैं जिन्होंने इस अमानवीयता को झेला। एक तरफ भूकंप पीड़ितों का दर्द था तो दूसरी तरफ दंगा पीड़ितों का। इस बड़ी मुसीबत से निपटने के लिए मैंने जो कुछ भी हो सकता था मैंने किया। मुझे ईश्वर ने जो भी ताकत दी थी वो मैंने शांति, न्याय और पुनर्वास में लगाई, अपने दर्द और दुख को छुपाते हुए।

उस चुनौतीपूर्ण वक्त में मैं अक्सर अपने पौराणिक ज्ञान को याद करता था जो ये कहते हैं कि ताकतवर लोगों को अपना दुख और दर्द नहीं व्यक्त करना चाहिए, उन्हें वो अकेले झेलना पड़ेगा। मैं भी उसी गहरे दर्द और दुख के अनुभव से गुजरा हूं। दरअसल, जब भी मैं उन दुख भरे दिनों को याद करता हूं तो ईश्वर से केवल एक प्रार्थना करता हूं कि किसी भी व्यक्ति, समाज, राज्य और देश को ऐसे क्रूर दुर्भाग्यपूर्ण दिन न देखने पड़ें।

हालांकि जिस दिन गोधरा में ट्रेन जली उसी दिन मैंने गुजरात के लोगों से अपील की कि वो शांति बनाए रखे और संयम बरतें ताकि मासूमों का जीवन खतरे में न पड़े। 2002 के फरवरी-मार्च में जब भी मीडिया के सामने आया मैंने बार-बार यही बात दोहराई। कहा कि ये सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और नैतिक जिम्मेदारी है कि वो शांति बनाए, न्याय दे और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दे। हाल के सदभावना उपवास के दौरान भी मैंने कई बार अपनी इन गहरी भावनाओं को व्यक्त किया। मैंने बताया कि इस तरह की निंदनीय घटनाएं सभ्य समाज को शोभा नहीं देती।’

वहीं कांग्रेस का कहना है कि मोदी सिर्फ छवि बदलने के ऐसा कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि जब मोदी मुख्यमंत्री थे तब तो कुछ किया नहीं, लेकिन अब जब उनकी नजर पीएम की कुर्सी पर है तो सफाई दे रहे हैं। जबकि समाजवादी पार्टी के नेता कमाल फारुकी ने मोदी के बयान को उनकी चुनावी रणनीति करार दिया है और कहा है कि मोदी अच्छी तरह जानते हैं कि खुद का प्रमोशन कैसे किया जाता है।

महंगाई की मार से नहीं मिली राहत


कांग्रेस भयानक महंगाई और मोदी के तूफान में अभी बुरी तरह चुनाव हारी है ,कांगेस शाषित दिल्ली और राजस्थान में वह एक बटा 10 के पास पहुच गई , कांग्रेस  मोदी को तो नहीं रोक सकती मगर महंगाई तो रोक सकती है ! मगर देश की जनता को वो अब भी महंगाई की चक्की में पीसे जा रही है ।
जिसका परिणाम उसे लोकसभा चुनावों में भुगतना होगा ।

महंगाई की मार से नहीं मिली राहत
रणविजय प्रताप सिंह First Published:27-12-2013
http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-387862.html
बढ़ती महंगाई ने इस साल उपभोक्ताओं की जेब हल्की करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। डॉलर के मुकाबले रुपये में आई रिकॉर्ड गिरावट और आर्थिक वृद्धि दर में लगातार आती कमी पूरे साल परेशानी का सबब बनी रही। हालांकि इस साल आर्थिक जगत में कुछ अच्छे संकेत भी मिले। देश में पहले महिला बैंक की शुरुआत हुई और भारतीय स्टेट बैंक  (एसबीआई) की कमान पहली बार किसी महिला के हाथ में आई। साल 2013 की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों पर रणविजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट

महंगाई से उपभोक्ता और सरकार परेशान
खाने-पीने के सामान की कीमतें इस साल आसमान पर रहीं। उपभोक्ताओं को इस साल प्याज 100 रुपये प्रति किलो, जबकि टमाटर 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर खरीदना पड़ा। खुदरा महंगाई साल की शुरुआत में 10.79 फीसदी थी, लेकिन यह नवंबर में बढ़ कर 11.24 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। वहीं थोक महंगाई दर, जो जनवरी 2013 में 6.62 फीसदी थी, वह नवंबर में करीब एक फीसदी बढ़ कर 7.52 फीसदी दर्ज की गई, जो पिछले 14 महीने का उच्चतम स्तर है। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी बढ़ती खुदरा महंगाई के सामने लाचार नजर आए। चिदंबरम को यह कहना पड़ा कि खाद्य मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने का कोई आसान तरीका नहीं है।

एफडी ने रिटर्न में शेयरों को पछाड़ा
रिटर्न के लिहाज से शेयर बाजार आकर्षक माना जाता है, लेकिन इस साल निवेशकों को इसमें ज्यादा फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि सुरक्षित लेकिन कम रिटर्न वाला निवेश माना जाने वाला सावधि जमा (एफडी) ने कमाई के मामले में शेयरों को पीछे छोड़ दिया। साल की शुरुआत में सेंसेक्स 19,581 के स्तर पर था, जबकि यह 09 दिसंबर को कारोबार के दौरान अब तक के सर्वोच्च स्तर 21,483.74 के स्तर पर पहुंच गया था। इसके बावजूद निवेशकों को करीब 8% रिटर्न मिला, जबकि पिछले साल रिटर्न 26% था। वहीं एफडी में निवेशकों को इस साल करीब 9% रिटर्न मिला है।

सोने ने निवेशकों को किया निराश
इस बार इसमें निवेश करने वालों को नुकसान उठाना पड़ा। साल की शुरुआत में सोने की कीमत 31,145 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो मौजूदा समय में घट कर करीब 30 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई है। ऐसे में सोने में निवेश करने वाले उपभोक्ताओं को तीन फीसदी से अधिक का नुकसान हुआ है। वहीं चांदी में यह नुकसान 24 फीसदी का रहा।

महंगाई से ज्यादा रिटर्न देने वाला इंफ्लेशन बॉन्ड
रिजर्व बैंक ने छोटे निवेशकों की कमाई को महंगाई से बचाने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित बचत योजना नेशनल सेविंग सिक्यूरिटी-कम्यूलेटिव (आईआईएनएसएस-सी) बॉन्ड लाने की घोषणा की है। इस पर ब्याज दर की गणना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर के मुताबिक होगी। इस पर खुदरा महंगाई की तुलना में सालाना 1.5 फीसदी ज्यादा ब्याज मिलेगा। इसमें आपको न्यूनतम 5,000 निवेश करना होगा, जबकि एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम 5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। निवेश पर ब्याज की गणना छमाही और चक्रवृद्धि आधार पर होगी, जबकि इसकी परिपक्वता अवधि 10 साल रखी गई है।

महंगे कर्ज की पड़ी मार
साल की शुरुआत से सितंबर तक रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर (रेपो) में 0.75 तक की कटौती की, जिससे यह घट कर 7.25 % रह गई थी, लेकिन बैंकों ने इस कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिया। वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के दबाव के बाद बैंकों ने महज 0.25 तक कर्ज सस्ता किया। हालांकि महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा अक्तूबर और नवंबर में मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर लगातार चौथाई फीसदी बढ़ाने के बाद बैंकों ने कर्ज दोबारा महंगा कर दिया। इसके बावजूद साल की शुरुआत में जो रेपो दर आठ फीसदी थी वह नवंबर तक घट कर 7.75% पर आ गई है। रेपो दर पर बैंक रिजर्व बैंक से कम समय के लिए उधार लेते हैं।

डॉलर के मुकाबले धरातल पर रुपया
एक जनवरी को एक डॉलर 54.83 रुपये का था, जो 28 अगस्त को कारोबार के दौरान 68.85 रुपये पर पहुंच गया था। यह भारतीय मुद्रा का अब तक का सबसे निचला स्तर है। रघुराम राजन ने सितंबर में रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद संभालने के बाद रुपये में मजबूती के लिए अदला-बदली (स्वैप) स्कीम शुरू करने और तेल कंपनियों के लिए विशेष व्यवस्था करने जैसे उपाय किए, जिसके बाद मौजूदा समय में एक डॉलर की कीमत घट कर 62 रुपये के करीब पहुंच गई है। एक अनुमान के मुताबिक डॉलर की कीमत एक रुपये बढ़ने पर तेल कंपनियों पर आठ हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

आर्थिक विकास दर पांच फीसदी से नीचे
सरकार की ओर से निवेश बढ़ाने और अटकी परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की पहल के बावजूद देश की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी) ने रफ्तार नहीं पकड़ी। पिछले साल जीडीपी दर पांच फीसदी रही, जो एक दशक का निचला स्तर है। पिछली चार तिमाहियों से देश की जीडीपी पांच फीसदी से नीचे रही है, जो चिंताजनक है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस साल भारत की जीडीपी का अनुमान घटा कर 3.8 फीसदी कर दिया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने इसके 4.8 फीसदी और विश्व बैंक तथा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने इसके 4.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।

कार खरीदने के मिले ज्यादा विकल्प
देश का वाहन उद्योग दो सालों से सुस्ती के दौर से गुजर रहा है, इसके बावजूद कंपनियों ने इस साल नई कारें पेश कीं। साल के मध्य में निसान ने डटसन गो प्रदर्शित की, जो अगले साल बाजार में आएगी। इसकी कीमत चार लाख रुपये से कम रहने की उम्मीद है। वहीं मारुति स्विफ्ट की टक्कर में हुंडई ने आई 10 ग्रांड को डीजल और पेट्रोल, दोनों में पेश किया। इसी तरह होंडा ने कॉम्पैक्ट सेडान (चार मीटर से छोटी) वर्ग में अमेज पेश करने के साथ ही भारत में अपनी पहली डीजल कार उतारी। फोर्ड ने छह लाख रुपये से कम कीमत में कॉम्पैक्ट स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) इको स्पोर्ट उतार बाजार विशेषज्ञों को चौंका दिया। उपभोक्ता इसे काफी पसंद कर रहे हैं। वहीं टाटा मोटर्स ने लखटकिया कार के रूप में मशहूर नैनो और लोकप्रिय मॉडल इंडिका का सीएनजी मॉडल पेश किया।
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