मंगलवार, 7 जनवरी 2014

संघ को बाहर से समझना बेहद मुश्किल - सरसंघचालक मोहन भागवत


यह बिलकुल सच हे कि संघ के बारे में , 
उसमें जाये बिना अंदाज लगाना सिर्फ और सिर्फ गलती ही होगी !
वहाँ जो गया अचंभित हो कर रह गया कि इतना अनुशासित , 
इतना छुआछूत रहित , इतना बड़ा राष्ट्रभक्त , इतना  बड़ा देशचिन्तक ,
बिना प्रसिद्धी के निरंतर समाजसेवा में रत कोई संगठन हो भी सकता है । 
वह भी विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन !

संघ को बाहर से समझ पाना बेहद मुश्किल - सरसंघचालक मोहन भागवत
http://www.patheykan.in/2012-02-29-17-41-19.html
     अयोध्या। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा बाहर से देखकर संघ को समझ पाना बहुत मुश्किल है। यह संगठन स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को आदर्श मानकर परिस्थितियों का डटकर सामना करने में विश्वास करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को भारत माता को देवी और उनके हर पुत्र को भाई मानते हुए राष्ट्र सेवा करने की नसीहत दी। वह रविवार को यहां अवध प्रांत से जुड़े 22 जिलों के स्वयंसेवकों की सभा में बोल रहे थे।
    उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों के बूते चलता है। उनकी संख्या ही हमारा प्राण है। इसी संख्या बल से हमारा आत्मबल बढ़ता है और हमारी वाणी का प्रभाव पड़ता है। भागवत ने कहा कि संघ के लिए शाखा ही सब कुछ है। शाखा में एक भी सदस्य की अनुपस्थिति का पूरे संघ पर प्रभाव पड़ता है। भागवत ने कहा कि जब परिवेश ठीक रहेगा तभी देश का विकास होगा। हमारे संतों-महापुरुषों ने परिवेश को ठीक करने के लिए ही जीवन समर्पित कर दिया। इसी कारण वे हमारे आदर्श बने हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की अयोध्या यात्रा जिक्र करते हुए बंदरों से उनके संघर्ष व डटकर खड़े होने पर बंदरों के भागने के प्रसंग का उल्लेख किया। कहा कि डटकर खड़े होने अथवा परिस्थितियों का सामने करने से ही विजयश्री मिलती है।
    भारत माता को देवी व उनके प्रत्येक पुत्र को अपना भाई मानकर कर्म करने की आवश्यकता है। इस कार्य में यदि तरुणाई भी जुट जाय तो देश की तकदीर बदल जाएगी। सर संघचालक ने कहा कि हमें हिंदू होने का अभिमान करना चाहिए। देश में स्वार्थ के आधार पर राजनीति हो रही है और जातिवाद का जहर घोला जा रहा है। इन परिस्थितियों से उबरते हुए हमें योग्य भारत का निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि संकट के समय आपकी सुसुप्त शक्तियां जाग्रत हो जाती हैं। यदि हम इसी को हमेशा जाग्रत रखें तो हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने इतिहास-संस्कृति से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहिए। इस अवसर पर विहिप के संरक्षक अशोक सिंघल, सह संघचालक देवेंद्र प्रताप, प्रांत संघ चालक धीरज अग्रवाल भी मौजूद रहे। संचालन अनिल मिश्र ने किया।

दुनिया के समस्याओं के निराकरण का मार्ग हिंदुत्व है



दुनिया के समस्याओं के निराकरण का मार्ग हिंदुत्व है
 “हमारी पहचान हिन्दू हैं. हम सब को जोडनेवाला तत्व हिंदुत्व हैं. हिंदुत्व हमारी राष्ट्रीयता हैं. विनाश की कगार पर पहुची आधुनिक दुनिया के समस्याओं के निराकरण का मार्ग हिंदुत्व हैं. प्रत्येक राष्ट्र के जीवन का प्रयोजन होता हैं. रोम और यूनान जैसे देशों का प्रयोजन तात्कालिक था इसलिए वह नष्ट हुए. किन्तु हिन्दू राष्ट्र यह अमर राष्ट्र हैं. यह कभी समाप्त नहीं होगा.”

उक्ताशय के उदगार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ‘संकल्प महाशिविर’ के समापन के अवसर पर व्यक्त किये. आपने आगे कहा की “संघ का मानना हैं की व्यक्ति के जीवन परिवर्तन से समाज के वातावरण में परिवर्तन होगा और इस परिवर्तन से राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा. सदाचरणी, सच्छील, निर्भय ऐसे गुणोंसे समाज में अच्छा वातावरण बनता हैं. और ऐसा वातावरण ही समाज में परिवर्तन लाता हैं. देश में परिवर्तन सामान्य जनता ही लाएगी. किन्तु उसके लिए जनता का मात्र सामान्य होना पूर्ण नहीं हैं. उसका गुणवान होना, सतचारित्र्य होना, संगठित होना अनिवार्य हैं.”
आपने कहा की “रोज निष्काम और निरपेक्ष भाव से देश की सेवा करने से ही हम बलशाली राष्ट्र, समर्थ राष्ट्र बन सकेंगे.”
इस समापन कार्यक्रम में निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी विशेष रूप में उपस्थित थे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आपने कहा की, “हिन्दू समाज की यह विशेषता हैं, की हम किसी के प्रति विद्वेष की भावना नहीं रखते.” आपने आगे कहा की, “राजनैतिक चिन्तन को छोडकर राष्ट्रप्रेम निर्माण का कार्य करने की आवश्यकता हैं. जब प्रजातंत्र की परीक्षा का समय आता हैं, तब हम समुदायों में, जाती में बट जाते हैं. यह अब बदलना होगा.”
प्रारंभ में संघ के महाकोशल प्रान्त कार्यवाह डॉ. भरतशरण सिंह ने संकल्प शिविर का निवेदन प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम का संचालन किया. श्री दिग्विजय सिंह ने संकल्प महाशिविर के सभी सहयोगियों का आभार प्रदर्शित किया. डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के पहले ‘आओ हम बदले वर्तमान..’ यह एकल गीत प्रस्तुत हुआ.
कार्यक्रम में गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने सूर्यनमस्कार लगाये तथा घोष की धुन पर दंड के साथ व्यायामयोग प्रस्तुत किये. ‘पूर्ण विजय संकल्प हमारा, अनथक अविरल साधना..’ यह गीत सभी स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया. प्रारंभ में सरसंघचालक जी ने जीप से स्वयंसेवकों की वाहिनियों में बनी रचना का निरिक्षण किया.
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुध्दजन, आम नागरिक, महिला आदि उपस्थित थे. इस कार्यक्रम की इन्टरनेट से सीधा प्रसारण किया गया, जिसे पूरी दुनिया से हजारो लोगों ने देखा. 

दक्षिण भारत में बढ़ रही जेहादी अतिवादिता -



प्रस्ताव १: दक्षिण भारत में बढ़ रही जेहादी अतिवादिता
http://www.rss.org
अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल देश के दक्षिणी राज्यों में बढ़ रहे जेहादी कट्टरवाद के प्रति अपनी गहरी चिन्ता व्यक्त करता है। यद्यपि अलगाववादी तथा पृथकतावादी शक्तियाँ समूचे भारत में विद्यमान हैं परन्तु गत कुछ समय से विशेषकर दक्षिण भारत में, मुस्लिम युवाओं में इन तत्वों का बढ़ता प्रभाव; आतंकवाद का प्रशिक्षण देकर उन्हें अन्य राज्यों में फैलानेवाले गुट, हिन्दू कार्यकर्ताओं पर हमले, और राष्ट्रविरोधी माओवादी तथा अन्तर्राष्ट्रीय जेहादी संगठनों से इनकी मिलीभगत से ये तत्व देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। अपने ढुलमुल रवैये के चलते अभी तक की सभी सरकारों के इन राष्ट्र विघातक तत्वों के प्रति आँखें मूँदना समस्त देशभक्तों के लिये अत्यंत चिन्ता का कारण बना है।

सिमी पर प्रतिबन्ध के उपरान्त ‘‘पॉपुलर फ्रन्ट ऑफ इण्डिया’’ (PFI)एवं उसके सहयोगी संगठनों के प्रादुर्भाव को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिये। कर्नाटक फॉर डिग्निटी ¼KFD)तमिलनाडू के ‘मनिथा नीति पासराई’ (MNP)व केरल के ‘नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट’ (NDF)जैसे संगठनों के समन्वय से बना यह संगठन ”लोकतंत्र व सामाजिक न्याय के प्रसार“, की आड़ में वस्तुतः कट्टटरपंथी विचारों के प्रसार का ही कार्य कर रहा है। बड़ी मात्रा में मुस्लिम युवकों को बरगलाना; उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण; NIA विशिष्ट न्यायालय द्वारा ‘कश्मीर भर्ती प्रकरण’ के निर्णय से उजागर हुई देश के अन्य राज्यों में आतंकवाद फैलाने की योजना; पुलिस तथा सरकारी तंत्र में घुसपैठ; लश्कर-ए-तोएबा, हिजबुल मुजाहीद्दीन, अलकायदा जैसे संगठनों से इन तत्वों के संबंध की केरल सरकार द्वारा उच्च न्यायालय में दी गई स्वीकारोक्ति से इन संगठनों का असली चेहरा तथा उद्देश्य स्पष्ट होता है। इन संगठनों के द्वारा राजनैतिक मुखौटे की आड़ में देश के अन्यान्य भागों में विस्तार करने के प्रयासों को प्रारम्भ में ही निर्मूल कर देना चाहिए।

ये कट्टरपंथी ताकतें केरल को असामाजिक एवं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का अखाड़ा बना रही हैं। जहाँ उत्तरी केरल आतंकवादियों की प्रशिक्षण-स्थली एवं छिपने का सुरक्षित क्षेत्र बन रहा है वहीं नकली मुद्रा व सोने की तस्करी के बलपर तटीय एवं सामरिक महत्व के अन्य क्षेत्रों में ये तत्व मँहगे दामों पर जमीन की भारी खरीददारी कर रहे हैं। हिन्दू युवक-युवतियों को योजनापूर्वक रूप से बहकाने का कुचक्र, विद्वेषपूर्ण जेहादी साहित्य का बड़ी मात्रा में वितरण; कुछ प्रचार माध्यमों द्वारा किया जा रहा विषैला दुष्प्रचार और विशेषकर उत्तर केरल में मुस्लिम आबादी की विषम अनुपात में वृद्धि आदि से राज्य विस्फोट के कगार पर खड़ा हो चुका है। 1998 के कोयम्बतूर बम विस्फोट प्रकरण सहित अनेकों आतंकवादी घटनाओं में अभियुक्त कुख्यात अपराधी अब्दुल नाज़िर मदनी के पारिवारिक कार्यक्रम में मंत्रियों सहित विभिन्न राजनेताओं का सम्मिलित होना एवं केरल सरकार द्वारा मराड़ नरसंहार के केस को सी.बी.आई. को जाँच हेतु सौंपने से इन्कार करना आदि घटनाओं नें इन्हें मिल रहे खुले राजनैतिक समर्थन को उजागर किया है जिसके चलते इन तत्वों का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि वे केरल में राष्ट्रवादी हिन्दू नेताओं की हत्या के षडयंत्र रचने लग गये है। वर्तमान यू. डी. एफ. (U.D.F.)सरकार इन सभी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के प्रति मूकदर्शक बनी हुई है।

इन आतंकी लपटों ने अब पड़ोसी राज्यों कर्नाटक व तमिलनाडू को भी घेर लिया है। तमिलनाडू में हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं तथा उनके कार्यालयों पर आक्रमण; हिन्दू समाज के धार्मिक आयोजनों पर आघात; अमेरिकन वाणिज्य दूतावास पर उग्र प्रदर्शन; हाल ही में हुई हिन्दू मुन्नानी तथा भा.ज.पा. के राज्यस्तरीय नेताओं की हत्यायें व आन्ध्र प्रदेश के पुत्तुर में पुलिस के साथ हुई सशस्त्र मुठभेड़, इन तत्वों के राज्य में बढ़ते प्रभाव का परिचायक है। दुर्भाग्यवश राज्य के सत्तासीन एवं विपक्षी दल, दोनों ही अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की होड़ में इन तत्वों की पूर्णतया अनदेखी कर रहे हैं। भटकल जैसे कर्नाटक के तटीय क्षेत्र शस्त्रों के गोदाम, बम प्रशिक्षण तथा आतंक फैलाने के केन्द्र बन चुके हैं। ये ताकतें दक्षिण भारत के हिन्दू धार्मिक स्थल यथा तिरुपति, मदुरई, शबरी मलाई, आदि को अपना निशाना बनाने का षड्यन्त्र भी रचती रही हैं।  

अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल केन्द्र एवं सम्बन्धित राज्य सरकारों से यह मांग करता है कि इन कट्टरपंथी समूहों की गुप्त गतिविधियों, उनके भारत तथा भारत से बाहर के सम्पर्क सूत्रों व आर्थिक स्रोतों के बारे में केन्द्रीय एजेन्सियों द्वारा सघन जाँच एवं PFI जैसे संगठनों पर प्रतिबंध सहित अन्य कड़े उपायों द्वारा इन शक्तियों को निर्मूल करें। अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल प्रचार माध्यमों सहित सभी राष्ट्रभक्त शक्तियों का आवाहन करता है कि इन तत्वों के प्रति सजग रहते हुए विभिन्न राजनैतिक दलों व सरकारों को इनके विरूद्ध कठोर कदम उठाने के लिये बाध्य करें।

Resolution-1: Growing Jehadi Radicalization in Southern States of Bharat
The Akhil Bharatiya Karyakari Mandal expresses grave concern over the growing radicalization of Jehadi forces especially in the Southern states of Bharat.  Although separatist and secessionist activities exist all over Bharat, its  menacing portents in recent times especially in Southern Bharat in terms of their penetration among Muslim youth; terror training and export modules; attacks on Hindu activists; and active connivance with anti national Maoists and international Jehadi elements pose an unprecedented challenge to the national security.  The lackadaisical attitude of successive state governments turning a blind eye to these nefarious forces has become more worrying factor to all patriotic minds.

The emergence of ‘Popular Front of India’ (PFI) and its front organizations in Kerala consequent to the ban on SIMI should be seen in this context. It’s formation as a coordinated effort between organizations like ‘Karnataka for Dignity’(KFD) , ‘Manitha Neethi Pasarai’( MNP ) in Tamilnadu and ‘Natioanal Development Front’ ( NDF ) in Kerala , under the purported aim of ‘promotion of democracy and social justice’ is nothing but a camouflage to perpetuate hard-line ideologies.  Large scale brainwashing and weapon’s training of Muslim youth; export of such terror elements in other parts of Bharat as revealed by recent designated NIA court’s verdict in the ‘Kashmir recruitment case’; the penetration in Police and govt machinery; admission by Kerala Government to the state High Court about the links with Hizb ul Mujahideen, Lashkar- e Tyaba and Al-Qaida clearly reveal the real face and agenda of these outfits. Their attempts to develop a political face with a pan Indian presence should be nipped in bud.

These radical forces are turning Kerala into a hotbed of anti social and anti national activities. While the Northern Kerala is becoming safe hideout and training ground for terror elements, the coastal and other areas of strategic importance are witnessing mass purchases of lands by these elements at an exorbitant price supported by rackets of counterfeit currency and gold smuggling. Planned allurement of Hindu boys and girls, rampant distribution of hate literature proclaiming Jehad, poisonous propaganda through certain media elements and disproportionate growth of Muslim population especially in North Kerala are putting the state on a ticking time bomb. The blatant support from political elements as evident from the presence of political leaders including Ministers in the family function of Abdul Naseer Madani, a notorious criminal accused in many terrorist acts including 1998 Coimbatore bomb blast case; refusal by Kerala government to hand over Marad massacre investigation to CBI etc., have emboldened these forces to such an extent as to hatch plans to assassinate nationalist Hindu leaders in Kerala.  The present U.D.F. government in Kerala remains a mute spectator to all such anti-national activities.

These tentacles of terror have engulfed the adjoining states of Tamilnadu and Karnataka too.  In Tamilnadu, attacks on Hindu activists and their offices, vandalizing of Hindu festivals, violent demonstration on American Consulate, recent gruesome killings of state level functionaries of Hindu Munnani and BJP and armed encounter with the Police at Puttur in Andhra Pradesh, are the testimonies of their increasing grip over the State. Unfortunately, they are being completely overlooked as a result of the competitive minority appeasement by both the ruling and opposition political parties of the state.  Areas of coastal Karnataka like Bhatkal town have become a storehouse of weapons, bomb training and terror export. These forces are planning to target Hindu religious places like Tirupati, Madurai, Shabarimalai in many parts of Southern Bharat.

The ABKM demands that the Union and the concerned state governments undertake extensive investigation by the Central agencies about the nature of clandestine activities of these radical groups, their links and source of funding both within and outside the country and take firm measures including a ban on organization like PFI, to put an end to these forces. It also appeals to all patriotic forces including media to be vigilant about such elements and prevail upon the political parties and governments to act firmly against these antinational activities.

कांग्रेस का षड्यंत्र, मोदी को रोकने ‘आप’ के भरोसे


कांग्रेस का षड्यंत्र , कांग्रेस विरोधी वोटो का विभाजन कर अपने आप को सत्ता में बनाये रखने का खेल खेलती ही रहती है ! जो लोग कोंग्रेस को सत्ता से हटाना चाहते हें उन्हें वोट भाजपा को ही देने चाहिए , अन्यथा वे वोट किसी न किसी रूप में कोंग्रेस के ही सहायक होते हें ! जैसे सपा , बसपा, द्रमुक आदी आदी  और अब आम पार्टी !!!

मोदी को रोकने के लिए अब ‘आप’ के भरोसे कांग्रेस!
आईबीएन-7 | Jan 07, 2014
http://khabar.ibnlive.in.com/news/114407/12

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के उदय ने कांग्रेस को आगामी लोकसभा चुनाव में रणनीति की जमीन दे दी है। इस रणनीति का संकेत अब खुलकर दिखने लगा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि दिल्ली की सत्ता में आई आम आदमी पार्टी की मदद लेकर कांग्रेस बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकना चाहती है।

कांग्रेस नेता अय्यर ने सीएनएन आईबीएन के शो में बातचीत के दौरान कहा कि लोकसभा चुनाव में हम दुआ करते हैं कि कांग्रेस आम आदमी पार्टी की मदद से बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और बीजेपी को सत्ता में आने से रोके। अय्यर ने कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि ‘आप’ इस हिटलर (मोदी) को रोकने में सफल होगी।

वहीं बीजेपी ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी में मोदी को रोकने क्षमता नहीं है। बीजेपी लगातार आप पर हमला बोलते हुए इसे कांग्रेस की बी टीम बताती रही है। दिल्ली में आप ने बीजेपी को सत्ता से दूर कर दिया है।

जहां बीजेपी को सरकार बनती नजर आ रही थी, अब वो विपक्ष में बैठी है। दिल्ली में जिस तरह कांग्रेस ने रणनीति अपनाते हुए आप को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है उसने बीजेपी को मुश्किल में डाल दिया है। कांग्रेस यही रणनीति लोकसभा चुनाव में भी अपनाना चाहती है। केजरीवाल की पार्टी अगर लोकसभा में अच्छा प्रदर्शन करती है तो बीजेपी और मोदी का रथ रुक सकता है।

गुरु गोबिन्द सिंह जयंती




07 जनवरी- 2014

गुरु गोबिन्द सिंह जन्मदिवस गुरु के जन्मदिन के वार्षिक उत्सव Nanakshahi कैलेंडर पर आधारित है

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संत सिपाही थे गुरु गोबिन्द सिंह
डॉ. हरमहेंद्र सिंह बेदी
Saturday, January 05, 2008

dainik Bhaskar 

जयंती विशेष. हिंदुस्तान को ऐतिहासिक मोड़ देने में राष्ट्रनायक गुरु गोबिन्द सिंह जी की विशेष भूमिका है। अत्याचार एवं जुल्म का प्रतिरोध करने के लिए जिस खालसे का उन्होंने सृजन किया, भविष्य में उसका प्रभाव भारतीय इतिहास में नजर आया। उनके लिए इंसान की एक ही जाति थी, मानवता। गुरु जी ने ऐसा जीवन दर्शन दिया जिसका पहला पाठ धर्म निरपेक्षता से जुड़ा हुआ था।

वे दार्शनिक एवं भारतीय भाषाओं के ज्ञाता थे। अरबी-फारसी, संस्कृत, हिंदी, पंजाबी, अवधी, ब्रज आदि भाषाओं पर उनका अधिकार था। आनंदपुर साहिब एवं पांउटा साहिब में उन्होंने नए साहित्य सृजन की जमीन तैयार की। उनके विद्या दरबार में भारतीय भाषाओं के 52 कवि थे।

इन सभी ने गुरु जी के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर अमर संस्कृत भारतीय साहित्य का हिंदी एवं पंजाबी में अनुवाद किया। यह भारतीय साहित्य का पुनर्सृजन था। भक्ति के नए अर्थ आम आदमी की जिंदगी को प्रभावित करने लगे। भक्ति कर्म से जुड़ी और कर्म राष्ट्रीय दुख-सुख का हिस्सा बना। गुरु जी द्वारा स्थापित सिख दर्शन और विचारधारा ने विश्व संस्कृति में नए अध्याय जोड़े।

13 अप्रैल 1699 में वैसाखी के मौके पर गुरु जी ने जिस खालसे का निर्माण किया वह गुरमुख भी था तथा अन्याय से सीधा टकराने की शक्ति भी रखता था। बेटों की शहादत पर गुरु जी ने कहा था कि मुझे अपने चार बेटों की कुर्बानी का दुख इसलिए नहीं है क्योंकि मेरे हजारों बेटे राष्ट्र के लिए जीवित हैं।

खालसा पंथ में नैतिकता एवं सच्चई के प्रति उदारता का संचार करने के लिए गुरु जी ने पहले पांच प्यारों को अमृत छकाया फिर उसी में से स्वयं अमृत का पान किया तथा एक हो गए। गुरु जी ने खालसा को अपना खास रूप कहकर पुकारा। खालसा में यह आस्था भी दृढ़ है कि मेरा अध्यात्म चिंतन खालसा में निवास करता है।

वास्तव में यह जिंदगी का नया समाजशास्त्र था जिसका निर्माण गुरु जी की दिव्य दृष्टि से हुआ। भारतीयों में सोई हुई शक्ति को गुरु जी ने फिर से जगाया ही नहीं, बल्कि उसे एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा भी बनाया जिससे वे अपनी गुरु जी के पावन जन्मदिवस पर हम उन्हें शत-शत प्रणाम करते हैं।

लेखक गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर में हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं।

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गुरु गोबिन्द सिंह
( जन्म: २२ दिसंबर १६६६, मृत्यु: ७ अक्टूबर १७०८) सिखों के दसवें एवं अन्तिम गुरु थे। उनका जन्म बिहार के पटना शहर में हुआ था । उनके पिता गुरू तेग बहादुर की मृत्यु के उपरान्त ११ नवम्बर सन १६७५ को वे गुरू बने। वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। उन्होने सन १६९९ में बैसाखी के दिन उन्होने खालसा पन्थ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। उन्होने मुगलों या उनके सहयोगियों ( जैसे, शिवालिक पहाडियों के राजा) के साथ १४ युद्ध लड़े।
गुरू गोबिन्द सिंह ने सिखों की पवित्र ग्रन्थ गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया और इसे ही सिखों को शाश्वत गुरू घोषित किया। बिचित्र नाटक को उनकी आत्मकथा माना जाता है। यही उनके जीवन के विषय में जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। यह दसम ग्रन्थ का एक भाग है। दसम ग्रन्थ, गुरू गोबिन्द सिंह की कृतियों के संकलन का नाम है। सिखों के दस गुरु हैं ।

उस समय औरंगजेब बादशाह दिल्ली के तख्त पर बैठा हुआ था। हिंदू धर्म की रक्षा के लिए जिस महान पुरुष ने अपने शीष की कुरबानी दी, ऐसे सिक्खों के नवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी के घर में सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी का परकाश् हुआ था। उन दिनों गुरु तेग बहादुर जी पटना (बिहार) में रहते थे।
22 दिसंबर, सन् 1666 को गुरु तेग बहादुर की धर्मपरायण पत्नी गूजरी देवी ने एक सुन्दर बालक को जन्म दिया, जो बाद में गुरु गोबिंद सिंह के नाम से विख्यात हुआ। बालक के जन्म पर पूरे नगर में उत्सव मनाया गया। उन दिनों गुरु तेग बहादुर असम-बंगाल में गुरु नानक देव जी के संदेश का प्रचार-प्रसार करते हुए घूम रहे थे।
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 गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। उनका जन्म बिहार के पटना शहर में हुआ था । उनके पिता गुरू तेग बहादुर की मृत्यु के उपरान्त ११ नवम्बर सन १६७५ को वे गुरू बने। वह एक महान योद्धा, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। विकिपीडिया
जन्म: 22 दिसम्बर 1666, पटना
मृत्यु: 7 अक्तूबर 1708, नांदेड़
पूर्ण नाम: गोबिन्द राय
जीवनसाथी: माता सुंदरी (विवा. 1684), माता साहिब कौर
बच्चे: साहिबज़ादा फतेह सिंह, अधिक
अभिभावक: गुरु तेग बहादुर सिंह, माता गुजरी

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गुरु  का चेला 
बन्दा सिंह बहादुर
बन्दा सिंह बहादुर या बन्दा बैरागी पहले ऐसे सिख जरनल हुए, जिन्होंने मुगलों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा; छोटे साहबजादों की शहादत का बदला लिया और गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा संकल्पित प्रभुसत्ता सम्पन्न लोक राज्य की राजधानी लोहगढ़ की नीव रक्खी। यही नहीं, उन्होंने गुरु गोबिन्द सिंह के नाम से सिक्का और मोहर जारी करके, निम्न वर्ग के लोगों की उच्च पद दिलाया और हल वाहक किसान-मजदूरों को जमीन का मालिक बनाया।


परिचय
बाबा बन्दा सिंह बहादुर का जन्म कश्मीर स्थित पुंछ जिले के राजौरी क्षेत्र में 1670 ई. तदनुसार विक्रम संवत् 1727, कार्तिक शुक्ल 13 को हुआ था। वह राजपूतों के भारद्वाज गोत्र से सम्बद्ध था और उसका वास्तविक नाम लक्ष्मणदेव था। 15 वर्ष की उम्र में वह जानकीप्रसाद नाम के एक बैरागी का शिष्य हो गया और उसका नाम माधोदास पड़ा। तदन्तर उसने एक अन्य बाबा रामदास बैरागी का शिष्यत्व ग्रहण किया और कुछ समय तक पंचवटी (नासिक) में रहा। वहाँ एक औघड़नाथ से योग की शिक्षा प्राप्त कर वह पूर्व की ओर दक्षिण के नान्देड क्षेत्र को चला गया जहाँ गोदावरी के तट पर उसने एक आश्रम की स्थापना की।


गुरु गोबिन्द सिंह से प्रेरणा
3 सितंबर, 1708 ई. को नान्देड में सिक्खों के दसवें गुरु गुरु गोबिन्द सिंह ने इस आश्रम को देखा और उसे सिक्ख बनाकर उसका नाम बन्दासिंह रख दिया। पंजाब में सिक्खों की दारुण यातना तथा गुरु गोबिन्द सिंह के सात और नौ वर्ष के शिशुओं की नृशंस हत्या ने उसे अत्यन्त विचलित कर दिया। गुरु गोबिन्द सिंह के आदेश से ही वह पंजाब आया और सिक्खों के सहयोग से मुगल अधिकारियों को पराजित करने में सफल हुआ। मई, 1710 में उसने सरहिंद को जीत लिया और सतलुज नदी के दक्षिण में सिक्ख राज्य की स्थापना की। उसने खालसा के नाम से शासन भी किया और गुरुओं के नाम के सिक्के चलवाये।


सिक्खों के राज्य पर मुस्लिम आक्रमण
बन्दा सिंह के नेतृत्व में, सिक्खों के इस नवीन राज्य में व्यक्ति-व्यक्ति में भेदभाव न रहा और निम्न वर्ग का व्यक्ति शासन में उच्च पद का अधिकारी बना। परन्तु उसका राज्य थोड़े दिनों तक ही रहा। बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) उर्फ शाह आलम ने स्वयं चढ़ाई कर इसे परास्त किया और 10 दिसम्बर, 1710 ई. को सिक्खों के कत्लेआम का आदेश दिया।


राज्य-स्थापना हेतु आत्मबलिदान
बन्दा सिंह ने अपने राज्य के एक बड़े भाग पर फिर से अधिकार कर लिया और इसे उत्तर-पूर्व तथा पहाड़ी क्षेत्रों की ओर लाहौर और अमृतसर की सीमा तक विस्तृत किया। 1715 ई. के प्रारम्भ में बादशाह फर्रुखसियर की शाही फौज ने अब्दुल समद खाँ के नेतृत्व में उसे गुरुदासपुर जिले के धारीवाल क्षेत्र के निकट गुरुदास नंगल गाँव में कई मास तक घेरे रखा। खाद्य सामग्री के अभाव के कारण उसने 7 दिसम्बर को आत्मसमर्पण कर दिया। फरवरी 1716 को 794 सिक्खों के साथ वह दिल्ली लाया गया जहाँ 5 मार्च से 13 मार्च तक प्रति दिन 100 की संख्या में सिक्खों को फाँसी दी गयी। 16 जून को बादशाह फर्रुखसियर के आदेश से बन्दा सिंह तथा उसके मुख्य सैन्य-अधिकारियों के शरीर काटकर टुकड़े-टुकड़े कर दिये गये।


बन्दा बैरागी का सुशासन
मरने से पूर्व बन्दा बैरागी ने अति प्राचीन ज़मींदारी प्रथा का अन्त कर दिया था तथा कृषकों को बड़े-बड़े जागीरदारों और जमींदारों की दासता से मुक्त कर दिया था। वह साम्प्रदायिकता की संकीर्ण भावनाओं से परे था। मुसलमानों को राज्य में पूर्ण धार्मिक स्वातन्त्र्य दिया गया था। पाँच हजार मुसलमान भी उसकी सेना में थे। बन्दासिंह ने पूरे राज्य में यह घोषणा कर दी थी कि वह किसी प्रकार भी मुसलमानों को क्षति नहीं पहुँचायेगा और वे सिक्ख सेना में अपनी नमाज़ और खुतवा पढ़ने में पूरी तरह स्वतन्त्र होंगे।


हिन्दू राष्ट्र : अमर राष्ट्र हैं - सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन भागवत जी






संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढे चलो,
भला हो जिसमे देश का वो काम सब किये चलो!
5 जनवरी को महाकोशल प्रान्त के संकल्प महाशिविर का समापन था. इस समापन कार्यक्रम में निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी विशेष रूप में उपस्थित थे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आपने कहा की, “हिन्दू समाज की यह विशेषता हैं, की हम किसी के प्रति विद्वेष की भावना नहीं रखते.” आपने आगे कहा की, “राजनैतिक चिन्तन को छोडकर राष्ट्रप्रेम निर्माण का कार्य करने की आवश्यकता हैं. जब प्रजातंत्र की परीक्षा का समय आता हैं, तब हम समुदायों में, जाती में बट जाते हैं. यह अब बदलना होगा.” प्रारंभ में संघ के महाकोशल प्रान्त कार्यवाह डॉ. भरतशरण सिंह ने संकल्प शिविर का निवेदन प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम का संचालन किया. श्री दिग्विजय सिंह ने संकल्प महाशिविर के सभी सहयोगियों का आभार प्रदर्शित किया. डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के पहले ‘आओ हम बदले वर्तमान..’ यह एकल गीत प्रस्तुत हुआ. कार्यक्रम में गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने सूर्यनमस्कार लगाये तथा घोष की धुन पर दंड के साथ व्यायामयोग प्रस्तुत किये. ‘पूर्ण विजय संकल्प हमारा, अनथक अविरल साधना..’ यह गीत सभी स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया. प्रारंभ में सरसंघचालक जी ने जीप से स्वयंसेवकों की वाहिनियों में बनी रचना का निरिक्षण किया. “हमारी पहचान हिन्दू हैं. हम सब को जोडनेवाला तत्व हिंदुत्व हैं. हिंदुत्व हमारी राष्ट्रीयता हैं. विनाश की कगार पर पहुची आधुनिक दुनिया के समस्याओं के निराकरण का मार्ग हिंदुत्व हैं. प्रत्येक राष्ट्र के जीवन का प्रयोजन होता हैं. रोम और यूनान जैसे देशों का प्रयोजन तात्कालिक था इसलिए वह नष्ट हुए. किन्तु हिन्दू राष्ट्र यह अमर राष्ट्र हैं. यह कभी समाप्त नहीं होगा.” उक्ताशय के उदगार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ‘संकल्प महाशिविर’ के समापन के अवसर पर व्यक्त किये. आपने आगे कहा की “संघ का मानना हैं की व्यक्ति के जीवन परिवर्तन से समाज के वातावरण में परिवर्तन होगा और इस परिवर्तन से राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा. सदाचरणी, सच्छील, निर्भय ऐसे गुणोंसे समाज में अच्छा वातावरण बनता हैं. और ऐसा वातावरण ही समाज में परिवर्तन लाता हैं. देश में परिवर्तन सामान्य जनता ही लाएगी. किन्तु उसके लिए जनता का मात्र सामान्य होना पूर्ण नहीं हैं. उसका गुणवान होना, सतचारित्र्य होना, संगठित होना अनिवार्य हैं.” आपने कहा की “रोज निष्काम और निरपेक्ष भाव से देश की सेवा करने से ही हम बलशाली राष्ट्र, समर्थ राष्ट्र बन सकेंगे.” इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुध्दजन, आम नागरिक, महिला आदि उपस्थित थे. इस कार्यक्रम का इन्टरनेट से सीधा प्रसारण किया गया, जिसे पूरी दुनिया से हजारो लोगों ने देखा.

भाजपा , जिसका मतलब वास्तविक सुशासन......!


भाजपा , जिसका मतलब वास्तविक सुशासन......!
देश में भाजपा का राज जनता के लिये सुशासन और देश के जिये बेहतर विकास का रहा
है। अटलबिहारी वाजपेयी जी का शासन इसका गवाह है, जिसनें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सरकारी बैंकों से किसान को सस्ते ब्याज में कर्ज के लिये किसान केड्रिट कार्ड,मोबाईल और इन्टरनेट के संसाधनों का विकास तथा , घर बैठे कुंडी खटखटा कर रसोई गैस सिलेण्डर दिये जाते थे। मंहगाई पर पूरी तरह काबू किया गया था। और उसी सुशासन का अनुकरण भाजपा शासित राज्यों में हुआ जिसके कारण गुजरात, छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश में लगातार तीन तीन बार से भाजपा की सरकारें जनता के द्वारा बनाई जा रहीं हैं। गोआ में भी उसकी सरकार है, राजस्थान में जबरदस्त बहूमत से भाजपा लौटी और दिल्ली में भी वही सबसे बड़ी पार्टी है।