गुरुवार, 9 जनवरी 2014

नरेंद्र मोदी ने ली पीएम के बयान पर चुटकियाँ


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नीचे दी गई खबर पर यह एक प्रतिक्रिया है , इसे पहले पढ़ें !
Khari Khari, Kanpur का कहना है :
09/01/2014 at 04:11 PM

सोनिया ने कहा कि हम 100 दिनों में महंगाई खत्म कर देंगे- हमने हंस कर टाल दिया। मनमोहन ने कहा कि हम मुम्बई को शंघाई बना देंगे - हमने हंस कर टाल दिया। कपिल ने कहा कि हम दुनिया का सबसे सस्ता टैबलेट लेकर आएंगे- हमने हंस कर टाल दिया। शरद पवार ने कहा कि हम बहुत जल्द दुनिया को सबसे ज्यादा चावल निर्यात कराएंगे - हमने हंस कर टाल, खुर्शीद ने कहा कि हम चीन के हर संभव युद्ध से लड़ने को तैयार हैं - हमने हंस कर टाल दिया, शिन्दे ने कहा की हम दाउद को पकड कर लाएंगे - हमने हंस कर ताल दिया, लेकिन मनमोहन ने कहा की राहुल गाँधी देश के सबसे प्रखर युवा नेता हैं और उनमें विलक्षण प्रतिभा है वह देश को नई उंचाई पर ले जाएंगे.. . . . . अरे यार, हंसा-हंसा कर मारोगे क्या???
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नरेंद्र मोदी ने ली पीएम के बयान पर चुटकियाँ

नवभारतटाइम्स.कॉम | Jan 9, 2014 नई दिल्ली
http://navbharattimes.indiatimes.com
प्रवासी भारतीयों के सम्मेल में बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने विकास को लेकर राज्यों के बीच विकास को लेकर स्वस्थ प्रतियोगिता को जहां अच्छा बताया, वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर चुटकी भी ली। सरदार पटेल की प्रतिमा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'हमने पटेल की पुण्यतिथि पर रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जो काफी सफल रहा।' उन्होंने कहा, 'पटेल की वजह से ही आज हमें गिर के जंगलों में शेर देखने को मिल रहे हैं। अगर पटेल न होते तो, वहां जाने के लिए वीजा लेना पड़ता।'
इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी ने कहा, 'कल यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आए थे। वह बड़ी अच्छी बात कहकर गए। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द अच्छे दिन आने वाले हैं। मेरा भी ऐसा मानना है कि अच्छे दिन आने वाले हैं। हां, इसमें चार-छह महीने का वक्‍त जरूर लग सकता है। और मुझे आगे कहने की जरूरत नहीं है।'
फिर गंभीरता दिखाते हुए मोदी ने कहा कि मुझे वाकई विश्वास है कि अच्छे दिन आएंगे। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिन में देश का माहौल बदला है। राज्यों में एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा शुरू हुई है। अगर मोदी अपने राज्य को विकास में नंबर वन बताते हैं, तो हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा कहते हैं कि उनके राज्य ने ज्यादा विकास किया है। मोदी ने कहा, 'यह नया चलन है और इसका स्वागत होना चाहिए। राज्यों के बीच इस तरह की स्पर्धा देश को विकास की पटरी पर लाने का काम करती है। पहले हमारे देश में बीमारू राज्यों की बात होती थी, लेकिन अब वही राज्य विकास करने लगे हैं। राज्यों में विकास के लिए दौड़ अच्छी बात है। यह भी खुशी की बात है कि अब फोकस केंद्र से राज्य की तरफ बढ़ रहा है।'
गौरतलब है कि बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इकॉनमी की स्थिति को लेकर प्रवासी भारतीयों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा था कि देश 'बेहतर भविष्य' की ओर बढ़ रहा है और वर्तमान के बारे में निराश होने या भविष्य के बारे में चिंता करने का कोई कारण नहीं है।

गंगासागर तीर्थ पर मकर संक्रांति पर विशेष मेला


Gangasagar Mela : Piligrims taking holy dip during Makar Sankranti



गंगासागर तीर्थ का मकर संक्रांति पर विशेष महत्व
तारीख: 04 Jan 2014
http://www.panchjanya.com
पश्चिम बंगाल स्थित गंगासागर हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। मकर संक्रांति के दिन यहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहंुचकर स्नान करते हैं। स्नान के बाद इस दिन दान का भी विशेष महत्व होता है। यहां संक्रांति पर मेले का आयोजन भी किया जाता है। इसलिए कहा जाता है कि 'सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार'।
गंगासागर जाने के लिए कोलकाता से नामखाना की दूरी करीब 110 किलोमीटर है। यहां से चामागुरी घाट तक नौकाएं जाती हैं और वहां से 10 किलोमीटर की दूरी पर गंगासागर है।  सागर द्वीप पर साधुओं का निवास है और द्वीप 150 वर्गमील के लगभग है। यहां वामनखल नामक प्राचीन मंदिर भी है। इसी के निकट चंदनपीड़ी वन में जीर्ण मंदिर और बुड़बुड़ीर तट पर विशालाक्षी मंदिर है। गंगासागर में एक मंदिर भी है, जो कपिल मुनि के प्राचीन आश्रम स्थल पर बना है। कपिल मुनि के मंदिर में पूजा-अर्चना भी की जाती है। पुराणों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के  60 हजार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी। उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और गंगा यहीं सागर से मिली थीं। यहां स्थित कपिल मुनि का मंदिर सागर में बह गया, उसकी मूर्ति अब कोलकाता में रहती है और मेले से कुछ सप्ताह पूर्व पुरोहितों को पूजा-अर्चना हेतु मिलती है। अब यहां एक अस्थायी मंदिर ही बना है। इस स्थान पर कुछ भाग चार वर्षों में एक बार ही बाहर आता है, शेष तीन वर्ष जलमग्न रहता है।
मान्यता है कि एक बार गंगासागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गाय दान करने के समान फल मिलता है। गंगासागर में पांच दिनों तक मेला लगा रहता है। इसमें स्नान मुहूर्त तीन ही दिनों का होता है। मकर संक्रांति के अवसर पर कई लाख श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं। बंगाल में इस पर्व पर स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। यहां गंगाजी का कोई मंदिर नहीं है, बस एक मील का स्थान निश्चित है। उसे मेले की तिथि से कुछ दिन पूर्व ही संवारा जाता है। यहां गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है।
मकर संक्रान्ति पर दान का विशेष महत्व
शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर मिलता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। मकर संक्रांति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दिए दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है।
सूर्य उत्तरायण होते हैं
सामान्यत सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात भारत से दूर होता है। इसी कारण यहां रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अत: इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अंधकार कम होगा। इसी जिए मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होती है। इस लिए सम्पूर्ण भारतवर्ष में लोगों द्वारा विविध रूपों में सूर्यदेव की उपासना, आराधना एवं पूजन कर, उनके प्रति अपनी आस्था प्रकट की जाती है। भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियां चन्द्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं, किन्तु मकर संक्रांति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष जनवरी में ही पड़ता है।
मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व
माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुईं सागर में जाकर मिल गयी थीं। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए यही व्रत किया था।  प्रतिनिधि 
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गंगासागर

गंगासागर (सागर द्वीप या गंगा-सागर-संगम भी कहते हैं) बंगाल की खाड़ी के कॉण्टीनेण्टल शैल्फ में कोलकाता से १५० कि.मी. (८०मील) दक्षिण में एक द्वीप है। यह भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है और पश्चिम बंगाल सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इस द्वीप का कुल क्षेत्रफल ३०० वर्ग कि.मी. है। इसमें ४३ गांव हैं, जिनकी जनसंख्या १,६०,००० है। यहीं गंगा नदी का सागर से संगम माना जाता है।
इस द्वीप में ही रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतिक आवास है। यहां मैन्ग्रोव की दलदल, जलमार्ग तथा छोटी छोटी नदियां, नहरें हीं। इस द्वीप पर ही प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ है। प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों हिन्दू श्रद्धालुओं का तांता लगता है, जो गंगा नदी के सागर से संगम पर नदी में स्नान करने के इच्छुक होते हैं। यहाँ एक मंदिर भी है जो कपिल मुनि के प्राचीन आश्रम स्थल पर बना है। ये लोग कपिल मुनि के मंदिर में पूजा अर्चना भी करते हैं। पुराणों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के ६० हज़ार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी। उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और गंगा यहीं सागर से मिली थीं। कहा जाता है कि एक बार गंगा सागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हज़ार गाय दान करने के समान फल मिलता है। जहां गंगा-सागर का मेला लगता है, वहां से कुछ दूरी उत्तर वामनखल स्थान में एक प्राचीन मंदिर है। उसके पास चंदनपीड़िवन में एक जीर्ण मंदिर है और बुड़बुड़ीर तट पर विशालाक्षी का मंदिर है।
कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का यहां एक पायलट स्टेशन तथा एक प्रकाशदीप भी है। पश्चिम बंगाल सरकार सागर द्वीप में एक गहरे पानी के बंदरगाह निर्माण की योजना बना रही है। गंगासागर तीर्थ एवं मेला महाकुंभ के बाद मनुष्यों का दूसरा सबसे बड़ा मेला है। यह मेला वर्ष में एक बार लगता है।

गंगा-डेल्टा, सुंदरवन का उपग्रह चित्र, यहीं बीच में गंगा-सागर द्वीप स्थित है।
यह द्वीप के दक्षिणतम छोर पर गंगा डेल्टा में गंगा के बंगाल की खाड़ी में पूर्ण विलय (संगम) के बिंदु पर लगता है। बहुत पहले इस ही स्थानपर गंगा जी की धारा सागर में मिलती थी, किंतु अब इसका मुहाना पीछे हट गया है। अब इस द्वीप के पास गंगा की एक बहुत छोटी सी धारा सागर से मिलती है।  यह मेला पांच दिन चलता है। इसमें स्नान मुहूर्त तीन ही दिनों का होता है। यहां गंगाजी का कोई मंदिर नहीं है, बस एक मील का स्थान निश्चित है, जिसे मेले की तिथि से कुछ दिन पूर्व ही संवारा जाता है। यहां स्थित कपिल मुनि का मंदिर सागर बहा ले गया, जिसकी मूर्ति अब कोलकाता में रहती है, और मेले से कुछ सप्ताह पूर्व पुरोहितों को पूजा अर्चना हेतु मिलती है। अब यहां एक अस्थायी मंदिर ही बना है।  इस स्थान पर कुछ भाग चार वर्षों में एक बार ही बाहर आता है, शेष तीन वर्ष जलमग्न रहता है। इस कारण ही कह जाता है:
बाकी तीरथ चार बार, गंगा-सागर एक बार॥
वर्ष २००७ में मकर संक्रांति के अवसर पर लगभग ३ लाख लोगों ने यहां स्नान किया। यह संख्या अगले वर्ष घटकर २ लाख रह गई। ऐसा कुंभ मेले के कारण हुआ। शेष वर्ष पर्यन्त ५० हजार तीर्थयात्रियों ने स्नान किए।  २००८ में पांच लाख श्रद्धालुओं ने सागर द्वीप में स्नान किया।[6] यहां आने वाले श्रद्धालुओं से १० भारतीय रुपए कर लिया जाता है।

आवागमन
प्रायः यात्री कोलकाता से नाव से गंगा सागर जाते हैं। कोलकाता से ३८ मील दक्षिण में डायमंड हार्बर स्टेशन है। वहां से नावें और जहाज भी गंगा सागर जाते हैं। कोलकता से गंगासागरद्वीप लगभग ९० मील दक्षिण में है।

मजहब बदलने से पुरखे, तहजीब और वतन नहीं बदलता - इन्द्रेश कुमार



मुम्बई में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की त्रिदिवसीय कार्यशाला
तारीख: 04 Jan 2014
मजहब बदलने से पुरखे, तहजीब और वतन नहीं बदलता
" इंडोनेशिया में 27 करोड़ मुसलमान रहते हैं। पर उनके हवाई अड्डे पर घटोत्कच का चित्र है, बजरंग बली की मूर्ति है। वे कहते हैं कि हम राम-कृ ष्ण की संतानें हैं, हमने मजहब बदला, पुरखे नहीं। हिंदुस्थान के मुसलमानों का भी यही सच है। जिस दिन इसको स्वीकार करोगे, सच को अपने आप समझ जाओगे। "
-इन्द्रेश कुमार मार्गदर्शक, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच

गत 14-16 दिसंबर,2013 तक मुम्बई के निकट उत्तन में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अपनी प्रथम अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसको सम्बोधित करते हुए मंच के मार्गदर्शक श्री इन्द्रेश कुमार ने कहा कि अधिकार मनुष्य को जुल्मी बना देता है, और कर्तव्य का बोध प्रेम और अपनेपन की भावना को बढ़ाता है। इसलिए हमारा यह मंच अधिकारों पर आधारित नहीं है, वरन् कर्तव्य पर आधारित है। उन्होंने कहा फर्ज इबादत है। तानाशाही कमजोरों का रास्ता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत में हर जगह मजहबी आदमी मिलता है, लेकिन मजहब के सिद्घांतों को ठीक से नहीं समझ पाता तो वह कट्टरवादी बन जाता है। हमने देश के लिए कुरबानी देने का संकल्प लिया है, और उसके बदले कुछ लेने का इरादा नहीं है। देने में इबादत है, कुरबानी है, और लेने में व्यापार है, स्वार्थ है। इसी तर्ज पर हमने इस तंजीम   (संगठन) को आगे बढ़ाया है। मुझे तंजीम से क्या मिला यह सोचना गलत होगा।
मंच के कार्य के महत्व को समझाते हुए श्री इन्द्रेश कुमार ने बताया कि हम जो कार्य कर रहे हैं किसी और को यह मौका नहीं मिलेगा। इसलिए हम कुरबानी के जज्बात के साथ जीना सीखें।
उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमान अपने बच्चों को शिक्षा दिलाएं। इसलिए मंच ने नारा दिया है कि ' आधी रोटी खाएंगे, बच्चों को पढ़ाएंगे ' और ' तालीम जिन्दगी के लिए और जिन्दगी वतन के लिए।'
उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि हम सभी के पुरखे एक हैं। मजहब बदलने से पुरखे, तहजीब और वतन नहीं बदलता। मजहब से दीन (धर्म) पर चलो, आदम से आदमी बनकर चलो। जिस दिन यह साहस करोगे सभी प्रश्नों के उत्तर दे सकोगे। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में 27 करोड़ मुसलमान रहते हैं। पर उनके हवाई अड्डे पर घटोत्कच का चित्र है, बजरंग बली की मूर्ति है। वे कहते हैं कि हम राम-कृ ष्ण की संतानें हैं, हमने मजहब बदला पुरखे नहीं। हिंदुस्थान के मुसलमानों का भी यही सच है। जिस दिन इसको स्वीकार करोगे, सच को अपने आप समझ जाओगे। राजनीतिक षड्यंत्रों से बचने की बात पर जोर देते हुए इन्द्रेश कुमार ने कहा कि सियासत में मत फंसो। समाज को अपराध की भट्ठी में झोंकने का काम नेता करते हैं।
इन्द्रेश कुमार ने आगे कहा कि बम विस्फोटों में जो पकड़े गए वे सब मुसलमान थे और गैर-भाजपा शासन में पकड़े गए। लेकिन बदनामी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की क्यों? इन सब बातों को हमें समझना और समझाना चाहिए। 2014 चुनाव की दृष्टि से देश के लिए महवपूर्ण वर्ष है। मुसलमान को विश्वास के साथ जीना चाहिए किसी के बहकावे में आकर नहीं।
इस त्रिदिवसीय कार्यशाला में मंच की केंद्रीय कार्यसमिति के सभी सदस्य, क्षेत्रीय संयोजक, प्रान्त संयोजक, सह-संयोजक, प्रान्त के संगठन संयोजक और विशेष आमंत्रित महानुभावों सहित कुल 180 प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे, जिनमें 25 महिलाएं शामिल थीं।  इस कार्यशाला का मुख्य विषय था-' हिन्दुस्थानी मुसलमान की दशा और दिशा : एक समग्र चिंतन '। इस मुख्य विषय के अनेक पहलुओं पर कार्यशाला के दौरान विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर मंच के महाराष्ट्र प्रदेश की पुस्तिका और तिरंगा यात्रा, जम्मू-कश्मीर की आवाज इन दो सीडियों का लोकार्पण किया गया।
इस कार्यशाला में मंच के राष्ट्रीय संयोजक मो़ अफजाल, सह संयोजक लतीफ मगदूम, सलीम अशरफी, शहजाद अली, अब्बास अली बोहरा, अबू बकर नकवी, रेशमा हुसैन, शहनाज अफजाल, सरोज खान, ड़ एस़ एऩ पठान (पूर्व कुलपति, नागपुर विश्वविद्यालय) आदि उपस्थित थे।