मंगलवार, 21 जनवरी 2014

सुनंदा पुष्कर की मौत की जांच न्यायिक देखरेख में की जानी चाहिये ।



शशी थरूर की पत्नि सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत यह तो चीख चीख कर कह रही है कि , शशी के आचरण के कारण सुनंदा की मौत हुई ! परोक्ष अपरोक्ष शशी ही जिम्मेवार हैं। यहां प्रश्न है कि क्या,  शशी अगर हिन्दू होते तो जेल में आशारामजी की तरह होते ?

सुनंदा ने मरने से पहिले कई आरोप, शशी थरुर पर लगाये । क्या पुलिस को उसे हिरासत मे नही लेना चाहिये ? क्या अलग - अलग व्यक्ति के लिये कानून अलग अलग होते है । सुनंदा पुष्कर की मौत की जांच न्यायिक देखरेख में की जानी चाहिये  ।

----------------------
थरूर की पत्‍नी सुनंदा की मौत दवा के ओवरडोज से हुई, एम्‍स ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट SDM को सौंपी
शिवेंद्र श्रीवास्तव [Edited by: पीयूष शर्मा] | नई दिल्ली, 20 जनवरी 2014 |
http://aajtak.intoday.in
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री शश‍ि थरूर की पत्‍नी सुनंदा पुष्‍कर की पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट सामने आ गई है. सूत्रों की मानें, तो सुनंदा की मौत दवा के ओवरडोज से हुई है.

मौत की वजह तो साफ हो गई है, पर मौत की पहेली अब भी अपनी जगह कायम है. ये सवाल अभी भी अपनी जगह पर है कि सुनंदा की मौत को खुदकुशी कहेंगे या फिर गलती से हुई मौत?
एम्स के हेड मेडिकल बोर्ड डॉक्‍टर सुधीर गुप्ता ने सोमवार शाम को वसंत विहार के एसडीएम आलोक शर्मा को सीलबंद लिफाफे में सुनंदा की पोस्टमार्ट रिपोर्ट सौंप दी. वसंत विहार के एसडीएम आलोक शर्मा ही सुनंदा की संदिग्ध मौत की जांच कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ड्रग्स के ओवरडोज को बताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ओवरडोज की वजह से दवा पेट में जाकर जहर बन गई और उसी की वजह से सुनंदा की मौत हो गई.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुनंदा के शरीर पर चोट के कई निशानों का भी जिक्र है. पर रिपोर्ट के मुताबिक जख्म के इन निशानों का सुनंदा की मौत से कोई लेना-देना नहीं है. सूत्रों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ये साफ हो गया है कि सुनंदा ने न तो जहर खाया था और ना ही उनका कत्ल किया गया है. पर रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि ड्रग्स का ओवरडोज सुनंदा ने जान-बूझकर लिया था या फिर अनजाने में?इन्हीं चीजों ने मौत की पहेली को और उलझा दिया है.

एक्सपर्ट की मानें तो आम तौर पर दवा के आदी मरीजों को इतना पता होता है कि कौन-सी दवा कितनी खानी चाहिए और कितनी मात्रा में. सुनंदा पढ़ी-लिखी थीं और चूंकि उनका इलाज भी चल रहा था, लिहाजा वो दवा खाने की आदी थीं. डिप्रेशन की दवा तय मात्रा से ज्यादा एक साथ लेने का अंजाम क्या होता है ये वो अच्छी तरह जानती थीं. ऐसे में सवाल उठता है कि फिर अनजाने में वो एक साथ इतनी मात्रा में जानलेवा दवा कैसे ले सकती थीं?

सूत्रों के मुताबिक लीला होटल के कमरा नंबर 345 से सुनंदा की मौत के बाद तलाशी में बहुत सारी दवाएं मिली थीं. उन्हीं में से डिप्रेशन की दवा की भी दो स्ट्रिप मिली थी. एक स्ट्रिप में पंद्रह गोलियां आती हैं. पुलिस को कमरे से एक खाली स्ट्रिप मिली, जबकि दवा की दूसरी स्ट्रिप में सिर्फ तीन गोलियां मिलीं. यानी तीस गोलियों की इन दो स्ट्रिप्स में से 27 गोलियों का इस्तेमाल किया जा चुका था, पर ये साफ नहीं हो पाया है कि क्या 27 गोलियां एक साथ खाई गईं या फिर कई दिनों में इनका इस्तेमाल हुआ?


अभी चुनाव हों तो : बीजेपी – 39 फीसदी वोट बिहार में



अब इतना तय है कि भाजपा को, बिहार मिलने जा रहा है , अगले चुनाव में नितीश सरकार बहुमत खोने वाली है ! भाजपा नेताओं को पूरी ताकत से बिहार में जूट जाना चाहिए !
--------------------
सर्वेः अभी चुनाव हों तो क्या होंगे बंगाल, बिहार, ओडीशा के नतीजे
आईबीएन-7 / Jan 20, 2014
http://khabar.ibnlive.in.com/news/115001/12/4?google_editors_picks=true
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम वक्त बचा है। सियासी मोर्चे पर सेनाएं कमर कस चुकी हैं। सेनापति विरोधियों को ललकारने में जुट गए हैं, ऐसे में ये जानना दिलचस्प है कि आखिर क्या है देश का मिजाज और क्या है मतदाता की राय। देश की सियासी नब्ज टटोलने के लिए आईबीएन7 अपनी खास पेशकश ‘अगर अभी चुनाव हों तो...’ के लिए लाया है CSDS का देशव्यापी सर्वे। 5 से 15 जनवरी के बीच CSDS ने देश के 18 राज्यों में ये सर्वे किया। 1081 स्थानों पर जाकर कुल 291 सीटों पर 18591 लोगों के बीच ये सर्वे किया गया।

--------------------अगर अभी चुनाव हों तो पश्चिम बंगाल में क्या कहता है सर्वेः

अगर अभी चुनाव हों तो पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस के खाते में 20 से 28 सीटें जा सकती हैं। लेफ्ट को 7 से 13 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को 5 से 9 और बीजेपी को 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं।

पहला सवालः क्या ममता सरकार के कामकाज से आप संतुष्ट हैं?

जवाबः हां-55%, नहीं-34%, कोई राय नहीं-11%

(2013 में इसी सवाल के जवाब में आंकड़े क्रमशः 50, 42 और 8 फीसदी थे।)

दूसरा सवालः क्या मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी संतोषजनक कार्य कर रही हैं?

जवाबः हां-60%, नहीं-31%, कोई राय नहीं-9%

तीसरा सवालः क्या ममता सरकार को एक और मौका मिलना चाहिए?

जवाबः हां-44%, नहीं-30%, कोई राय नहीं-26%

(2013 में इसी सवाल के जवाब में आंकड़े थे क्रमशः 43,, 35 और 22 फीसदी थे।)

चौथा सवालः क्या केंद्र में यूपीए को एक और मौका मिलना चाहिए?

जवाबः हां-29%, नहीं-36%, कोई राय नहीं-35%

(2013 में इसी सवाल के जवाब में आंकड़े क्रमशः 40, 29 और 31 फीसदी थे।)

5वां सवालः कौन बने देश का प्रधानमंत्री?

जवाबः 18 फीसदी लोगों ने कहा-नरेंद्र मोदी।

09 फीसदी लोगों ने कहा-राहुल गांधी।

03 फीसदी लोगों ने कहा-सोनिया गांधी।

05 फीसदी लोगों ने कहा-मनमोहन सिंह।

11 फीसदी लोगों ने कहा ममता बनर्जी।

03 फीसदी लोगों ने कहा-बुद्धदेव भट्टाचार्य।

01 फीसदी लोगों ने कहा-कोई अन्य।

50 फीसदी लोगों ने इस सवाल पर कोई राय नहीं दी।

(2013 में जब ये सवाल पूछा गया कि कौन बने देश का प्रधानमंत्री, तो जवाब था।

नरेंद्र मोदी-9%

राहुल गांधी-12%

सोनिया गाधी-4%

मनमोहन सिंह-11%

ममता बनर्जी-9%

बुद्धदेव भट्टाचार्य-3%

अन्य-6%

कोई राय नहीं-46%)

------------

सवालः पश्चिम बंगाल में किसको कितने वोट मिल सकते हैं?

जवाबः कांग्रेस को 19 फीसदी

बीजेपी को 14 फीसदी

तृणमूल कांग्रेस को 33 फीसदी

लेफ्ट को 25 फीसदी

आम आदमी पार्टी को 2 फीसदी

अन्य को 7 फीसदी

2009 के चुनाव में कांग्रेस को 14 फीसदी वोट मिले थे, और जब पिछले साल जुलाई में लोगों से बात की गई तो कांग्रेस को 22 फीसदी वोट मिलते दिख रहे थे। बीजेपी को 2009 में 6 फीसदी वोट मिले थे और जुलाई 2013 में 12 फीसदी वोट मिलने का अनुमान था। तृणमूल कांग्रेस को 2009 में 31 फीसदी वोट मिले थे, और जुलाई 2013 में 32 फीसदी वोट मिलने का अनुमान था। 2009 में लेफ्ट को 43 फीसदी वोट मिले थे, जुलाई 2013 में 28 फीसदी वोट मिलने का अनुमान था।

-------------अगर अभी चुनाव हों तो क्या कहता है ओडीशा का सर्वे

अगर अभी चुनाव हों तो ओडीशा की 21 सीटों में से बीजेडी के खाते में 10 से 16 सीटें जा सकती हैं। कांग्रेस को 3 से 9 और बीजेपी को 0 से 4 सीटें मिल सकती हैं।

कैसा है सरकार का कामकाज? इस सवाल पर उड़ीसा के 67 फीसदी लोग सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। 29 फीसदी लोग संतुष्ट नहीं हैं जबकि 4 फीसदी लोगों ने कोई राय नहीं दी। यही सवाल जब 2013 में पूछा गया था तो 79 फीसदी लोग संतुष्ट थे। 20 फीसदी लोग संतुष्ट नहीं थे और 1 फीसदी ने कोई राय नहीं दी थी।

कैसे मुख्यमंत्री हैं नवीन पटनायक? इस सवाल पर 70 फीसदी लोग नवीन पटनायक से संतुष्ट मिले, 26 फीसदी संतुष्ट नहीं थे जबकि 3 फीसदी ने कोई राय नहीं दी। क्या नवीन सरकार को एक और मौका मिलना चाहिए इस सवाल पर 51 फीसदी लोग नवीन सरकार को एक और मौका देना चाहते थे, 35 फीसदी मौका देने के पक्षधर नहीं थे जबकि 14 फीसदी ने कोई राय नहीं दी। 2013 में इस सवाल के जवाब में 66 फीसदी लोग नवीन सरकार को दोबारा देखना चाहते थे। 29 फीसदी ने एक और मौका देने से इनकार कर दिया और 5 फीसदी ने कोई राय नहीं दी।

कौन बने देश का प्रधानमंत्री इस सवाल के जवाब में नतीजे कुछ इस प्रकार मिलेः-नरेंद्र मोदी-33 फीसदी, राहुल गांधी-19 फीसदी, सोनिया गांधी-7 फीसदी, मनमोहन सिंह-3 फीसदी, लालकृष्ण आडवाणी-1 फीसदी, नवीन पटनायक-12 फीसदी, अरविंद केजरीवाल-1 फीसदी, 24 फीसदी ने कोई राय नहीं दी।

अगर अभी चुनाव हों तो किसको कितने वोट मिलेंगे? सर्वे के मुताबिक बीजू जनता दल को 33 फीसदी, कांग्रेस को 31 फीसदी, बीजेपी को 25 फीसदी, आम आदमी पार्टी को 1 फीसदी और अन्य को 10 फीसदी वोट मिलेंगे। इन्हें सीटों में तब्दील किया जाए तो ओडिशा की 21 सीटों में से बीजेडी को 10-16 सीटें, कांग्रेस 3-9 सीटें और बीजेपी को 0-4 सीटें मिल सकती हैं।

--------------------------अगर अभी चुनाव हों तो बिहार में क्या कहता है सर्वेः

अगर अभी चुनाव हों तो बिहार की 40 सीटों में से बीजेपी को 16 से 24 सीट मिल सकती हैं। जेडीयू को 7 से 13 सीट जबकि आरजेडी को 6 से 10 सीट मिल सकती हैं। कांग्रेस को 0 से 4 सीट मिल सकती हैं।

कैसा है जेडीयू सरकार का काम?

संतुष्ट - 59 फीसदी

संतुष्ट नहीं - 38 फीसदी

कोई राय नहीं - 3 फीसदी

(2013 में यही सवाल पूछने पर आंकड़ा था क्रमशः 69, 25 और 6 फीसदी।)

------------------

कैसे मुख्यमंत्री हैं नीतीश कुमार?

संतुष्ट - 63 फीसदी

संतुष्ट नहीं - 36 फीसदी

कोई राय नहीं - 1 फीसदी

------------------

क्या जेडीयू सरकार को मिले एक और मौका?

55 फीसदी लोगों ने कहा - हां

38 फीसदी ने कहा - नहीं

7 फीसदी ने कोई राय नहीं दी

--------------------

कौन है बीजेपी-जेडीयू गठबंधन टूटने के लिए जिम्मेदार?

जेडीयू-26 फीसदी

बीजेपी-20 फीसदी

दोनों-39 फीसदी

कोई जिम्मेदार नहीं-4 फीसदी

कोई राय नहीं-12 फीसदी

--------------------

क्या केंद्र में यूपीए को मिले एक और मौका?

21 फीसदी ने कहा - हां

70 फीसदी ने जवाब दिया - नहीं

10 फीसदी ने कोई राय नहीं दी

--------------

कौन है मोदी की रैली में धमाकों का जिम्मेदार?

नीतीश सरकार जिम्मेदार - 51 फीसदी

नीतीश सरकार जिम्मेदार नहीं - 33 फीसदी

कोई राय नहीं - 16 फीसदी

--------------

क्या लालू को चारा घोटाले के लिए पर्याप्त सजा मिल गई?

ज्यादा कठोर - 19 फीसदी

पर्याप्त - 46 फीसदी

बहुत कम - 19 फीसदी

कोई राय नहीं - 16 फीसदी

--------------------

अगर अभी चुनाव हों तो किसको कितने वोट?

कांग्रेस – 11 फीसदी

बीजेपी – 39 फीसदी

जेडीयू – 20 फीसदी

आरजेडी – 15 फीसदी

एजेपी – 2 फीसदी

आप – 3 फीसदी

अन्य – 10 फीसदी