शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

आज भी जीवित हैं चीन युद्ध में शहीद "जसवंत सिंह रावत "




आज भी जीवित हैं महावीर चक्र विजेता शहीद जसवंत सिंह रावत....._/\_....
उनको सुबह तड़के साढ़े चार बजे बेड टी दी जाती है. उन्हें नौ बजे नाश्ता और शाम सात बजे रात का खाना भी मिलता है.चौबीस घंटे उनकी सेवा में भारतीय सेना के पाँच जवान लगे रहते हैं. उनका बिस्तर लगाया जाता है, उनके जूतों की बाक़ायदा पॉलिश होती है और यूनिफ़ॉर्म भी प्रेस की जाती है,लोग जब सुबह उसे देखते थे तो ऐसा प्रतीत होता कि किसी व्यक्ति ने उन पोशाकों और जूतों का इस्तेमाल किया है।इतनी आरामतलब ज़िंदगी है बाबा जसवंत सिंह रावत की, लेकिन आपको ये जानकर अजीब लगेगा कि वे इस दुनिया में नहीं हैं. जसवंत सिंह लोहे की चादरों से बने जिन कमरों में रहा करते थे, वही स्मारक का मुख्य केंद्र बना.गुवाहाटी से तवांग जाने के रास्ते में लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर बना जसवंत युद्ध स्मारक भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध में शहीद हुए महावीर चक्र विजेता सूबेदार जसवंत सिंह रावत के शौर्य व बलिदान की गाथा बयां करता है। उनकी शहादत की कहानी आज भी यहां पहुंचने वालों के रोंगटे खड़े करती है और उनसे जुड़ी किंवदंतियां हर राहगीर को रुकने और उन्हें नमन करने को मजबूर करती हैं। 1962 के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए जसवंत सिंह की शहादत से जुड़ी सच्चाई बहुत कम लोगों को पता हैं। उन्होंने अकेले 72 घंटे चीनी सैनिकों का मुकाबला किया और विभिन्न चौकियों से दुश्मनों पर लगातार हमले करते रहे। जब चीनी सैनिकों ने देखा कि एक अकेले सैनिक ने तीन दिनों तक उनकी नाक में दम कर रखा था तो इस खीझ में चीनियों ने जसवंत सिंह को बंधक बना लिया और जब कुछ न मिला तो टेलीफोन तार के सहारे उन्हें फांसी पर लटका दिया। फिर उनका सिर काटकर अपने साथ ले गए। जसवंत सिंह ने इस लड़ाई के दौरान कम से कम 300 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतारा था। जसवंत सिंह की इस शहादत को संजोए रखने के लिए 19 गढ़वाल राइफल ने यह युद्ध स्मारक बनवाया। स्मारक के एक छोर पर एक जसवंत मंदिर भी बनाया गया है। जसवंत की शहादत के गवाह बने टेलीफोन के तार और वह पेड़ जिस पर उन्हें फांसी से लटकाया गया था, आज भी मौजूद है। यह जसवंत सिंह की वीरता ही थी कि भारत सरकार ने उनकी शहादत के बाद भी सेवानिवृत्ति की उम्र तक उन्हें उसी प्रकार से पदोन्नति दी, जैसा उन्हें जीवित होने पर दी जाती थी। भारतीय सेना में अपने आप में यह मिसाल है कि शहीद होने के बाद भी उन्हें समयवार पदोन्नति दी जाती रही। मतलब वह सिपाही के रूप में सेना से जुड़े और सूबेदार के पद पर रहते हुए शहीद हुए लेकिन सेवानिवृत्त लगभग 40 साल बाद हुए......नमन ऐसी पुण्यात्मा को..''वन्दे मातरम्''
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1962 में शहीद भारतीय फौजी, जो आज भी दे रहा ड्यूटी

20 अक्‍टूबर 2012 hindi.in.com

1962 में चीन ने भारत को करारी शिकस्‍त दी थी, लेकिन उस युद्ध में हमारे देश कई जांबाजों ने अपने लहू से गौरवगाथा लिखी थी। आज 1962 वॉर की 50वीं बरसी है और हम एक ऐसे शहीद की बात करेंगे, जिसका नाम आने पर न केवल भारतवासी बल्कि चीनी भी सम्‍मान से सिर झुका देते हैं। वो मोर्चे पर लड़े और ऐसे लड़े कि दुनिया हैरान रह गई, इससे भी ज्‍यादा हैरानी आपको ये जानकर होगी कि 1962 वॉर में शहीद हुआ भारत माता का वो सपूत आज भी ड्यूटी पर तैनात है।

शहीद राइफलमैन को मिलता है हर बार प्रमोशन
उनकी सेना की वर्दी हर रोज प्रेस होती है, हर रोज जूते पॉलिश किए जाते हैं। उनका खाना भी हर रोज भेजा जाता है और वो देश की सीमा की सुरक्षा आज भी करते हैं। सेना के रजिस्‍टर में उनकी ड्यूटी की एंट्री आज भी होती है और उन्‍हें प्रमोश भी मिलते हैं। अब वो कैप्‍टन बन चुके हैं। इनका नाम है- कैप्‍टन जसवंत सिंह रावत। महावीर चक्र से सम्‍मानित फौजी जसवंत सिंह को आज बाबा जसवंत सिंह के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के जिस इलाके में जसवंत ने जंग लड़ी थी उस जगह वो आज भी ड्यूटी करते हैं और भूत प्रेत में यकीन न रखने वाली सेना और सरकार भी उनकी मौजूदगी को चुनौती देने का दम नहीं रखते। बाबा जसवंत सिंह का ये रुतबा सिर्फ भारत में नहीं बल्कि सीमा के उस पार चीन में भी है।

पूरे तीन दिन तक चीनियों से अकेले लड़ा था वो जांबाज
अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में नूरांग में बाबा जसवंत सिंह ने वो ऐतिहासिक जंग लड़ी थी। वो 1962 की जंग का आखिरी दौर था। चीनी सेना हर मोर्चे पर हावी हो रही थी। लिहाजा भारतीय सेना ने नूरांग में तैनात गढ़वाल यूनिट की चौथी बटालियन को वापस बुलाने का आदेश दे दिया। पूरी बटालियन लौट गई, लेकिन जसवंत सिंह, लांस नायक त्रिलोक सिंह नेगी और गोपाल सिंह गुसाईं नहीं लौटे। बाबा जसवंत ने पहले त्रिलोक और गोपाल सिंह के साथ और फिर दो स्‍थानीय लड़कियों की मदद से चीनियों के साथ मोर्चा लेने की रणनीति तैयार की। बाबा जसवंत सिंह ने अलग अलग जगह पर राईफल तैनात कीं और इस अंदाज में फायरिंग करते गए मानो उनके साथ बहुत सारे सैनिक वहां तैनात हैं। उनके साथ केवल दो स्‍थानीय लड़कियां थीं, जिनके नाम थे, सेला और नूरा। चीनी परेशान हो गए और तीन यानी 72 घंटे तक वो ये नहीं समझ पाए कि उनके साथ अकेले जसवंत सिंह मोर्चा लड़ा रहे हैं। तीन दिन बाद जसवंत सिंह को रसद आपूर्ति करने वाली नूरा को चीनियों ने पकड़ लिया। इसके बाद उनकी मदद कर रही दूसरी लड़की सेला पर चीनियों ने ग्रेनेड से हमला किया और वह शहीद हो गई, लेकिन वो जसवंत तक फिर भी नहीं पहुंच पाए। बाबा जसवंत ने खुद को गोली मार ली। भारत माता का ये लाल नूरांग में शहीद हो गया।

चीनी सेना भी सम्मान करती है शहीद जसवंत का
चीनी सैनिकों को जब पता चला कि उनके साथ तीन दिन से अकेले जसवंत सिंह लड़ रहे थे तो वे हैरान रह गए। चीनी सैनिक उनका सिर काटकर अपने देश ले गए। 20 अक्‍टूबर 1962 को संघर्ष विराम की घोषणा हुई। चीनी कमांडर ने जसवंत की बहादुरी की लोहा माना और सम्‍मान स्‍वरूप न केवल उनका कटा हुआ सिर वापस लौटाया बल्कि कांसे की मूर्ति भी भेंट की।

उस शहीद के स्मारक पर भारतीय-चीनी झुकाते है सर
जिस जगह पर बाबा जसवंत ने चीनियों के दांत खट्टे किए थे उस जगह पर एक मंदिर बना दिया गया है। इस मंदिर में चीन की ओर से दी गई कांसे की वो मूर्ति भी लगी है। उधर से गुजरने वाला हर जनरल और जवान वहां सिर झुकाने के बाद ही आगे बढ़ता है। स्‍थानीय नागरिक और नूरांग फॉल जाने वाले पर्यटक भी बाबा से आर्शीवाद लेने के लिए जाते हैं। वो जानते हैं बाबा वहां हैं और देश की सीमा की सुरक्षा कर रहे हैं। वो जानते हैं बाबा शहीद हो चुके हैं, वो जानते हैं बाबा जिंदा हैं, बाबा अमर हैं। 
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शहीद होने के बाद भी जो गश्त करते हैं भारत-चीन सीमा पर!
शुक्रवार, 6 सितंबर 2013
अमर उजाला, नलिनी गुसाईं, देहरादून

Indian soldier patrols the border at night
मूलरूप से पौड़ी के रहने वाले वीर जवान जसवंत सिंह रावत की दास्तां अब दुनिया देखेगी। महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह ने वर्ष 1962 में हुए युद्ध में अकेले ही चीन की सेना को 72 घंटो तक रोके रखा था।  अरूणाचल में इस जवान को बाबा के नाम से पुकारा जाता है और वहां जसवंत बाबा का मंदिर भी है। अब जल्द ही राइफलमैन जसवंत सिंह की वीरता भरी कहानी सभी बड़े पर्दे पर देख पाएंगे। दून के थियेटर आर्टिस्ट मिलकर जसवंत सिंह पर फिल्म बना रहे हैं।

दून में परिवार
जवान जसवंत सिंह का परिवार दून के डोभालवाला क्षेत्र में ही रहता है। 91 वर्षीय मां लीला देवी को बेटे की वीरता पर बेहद फख्र महसूस होता है। मात्र एक साल फौज की नौकरी करने के बाद 19 साल की आयु में भारत-चीन युद्ध में जसवंत सिंह मारे गए। दुश्मनों ने उन पर पीछे से हमला किया और सिर काट कर ले गए।

मरने के बाद भी प्रमोशन
जसवंत देशभर में अकेले ऐसे सैनिक रहे जिन्हें मरने के बाद भी प्रमोशन और सालाना छुट्टियां मिलती रही। राइफलमैन से वो अब मेजर जनरल बन चुके हैं। भाई विजय सिंह रावत का कहना है कि सुनने में आया था भाई रिटायर हो चुके हैं पर अभी पक्का नहीं पता लग पाया है। विजय ने बताया कि वे लोग मूलरूप से पौड़ी बीरोखाल ब्लॉक के बाड़यू गांव के रहने वाले हैं।

बाबा का मंदिर
शहीद जसवंत ने अरूणाचल में जिस जगह पर चीन की सेना से युद्ध किया। उस जगह का नाम जसवंत गढ़ रख दिया गया है। वहां जसवंत सिंह को बाबा जी कहकर बुलाया जाता है। वहां बिना बाबा को याद किए सैनिक राइफल नहीं उठाते। बाबा की याद में वहां एक मंदिर बनाया गया है। लोगों का मानना है कि अब भी बाबा के लिए बनाए गए कमरे में आकर ठहरते हैं क्योंकि सुबह चादर में सिलवट होती है। कमरे में प्रेस कर रखी गई शर्ट भी मैली होती है।

अब बनेगी फिल्म
दून के शहीद पर अब फिल्म बनने जा रही है। एंफीगौरी फिल्म बनाने के बाद अब मुंबई से लौटे अविनाश इसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। अविनाश ध्यानी ने बताया कि वे अपने पिता के मुंह से हमेशा से जसवंत सिंह के बहादुरी के किस्से सुनता रहा हूं यही वजह है कि मैंने इस पर फि ल्म बनने की सोची।

फिल्म बनाने की योजना
थियेटर आर्टिस्ट अभिषेक मैंदोला ने बताया कि फिल्म बनाने से पहले अरूणाचल जाकर मंदिर सहित वे सभी जगह देखी जाएगी जहां जसवंत सिंह रहते थे।उसके बाद ही स्क्रिप्ट तैयार की जाएगी। इस फिल्म में सहयोग करने वालों में अनुज जोशी, लक्ष्मण सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी आदि हैं।

कई बार गश्त करते हुए देखा गया एक व्यक्ति
शहीद जसवंत सिंह के भाई रणवीर सिंह ने बताया कि कई बार चीन और भारत के बॉर्डर पर एक व्यक्ति रात में गश्त करता हुआ दिखाई दिया।

चीन की ओर से ऑब्जेक्शन
जिस पर चीन की ओर से ऑब्जेक्शन भी उठाया गया। जबकि भारत की सेना ने साफ कहा कि उनकी ओर से किसी को वहां नहीं भेजा गया। जबकि लोग मानते हैं कि वो और कोई नहीं मेरा भाई जसवंत ही है। वो आज भी अपनी मां का ख्याल रखता है और मां की रक्षा के लिए हमारे आसपास ही मौजूद रहता है।

नहीं जानते कौन है महावीर चक्र विजेता
देखकर आश्चर्य होता है लेकिन यही सच है। जसवंत सिंह के मोहल्ले में कोई उनके घर का पता नहीं बता पाता। उनके घर के पास ही महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रहती हैं।

उनका पता बच्चे-बच्चे को मालूम है। लेकिन महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह का पता पूछने पर लोग बगले झांकने लगते हैं। बड़े-बुजुर्ग तक कहते हैं कौन जसवंत सिंह? शहीद की भाभी मधु रावत ने बताया कि मेयर विनोद चमोली कितनी ही बार नजदीकी चौक का नाम शहीद जसवंत सिंह चौक रखने का आश्वासन दे चुके हैं लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। जसवंत को शहीद हुए पूरे पचास साल हो गए लेकिन दून में उनके नाम पर एक सड़क तक नहीं बनाई गई।


सर्वे: मोदी पहली पसंद, बीजेपी शिखर पर, सीटें 192-210 तक



सर्वे: मोदी पहली पसंद, बीजेपी शिखर पर, सीटें 192-210 तक
आईबीएन-7 | Jan 24, 2014
नई दिल्ली। अगर अभी चुनाव हों तो बीजेपी अबतक का अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन कर सकती है जबकि कांग्रेस को तगड़ा झटका लगता नजर आ रहा है। आईबीएन7 के लिए सीएमडीएस के इस सर्वे में बीजेपी को अकेले 192 से लेकर 210 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि कांग्रेस को 92 से 108 तक सीटें मिल सकती हैं। सर्वे में एनडीए को 211 से 231 और यूपीए को 107 से 127 सीटें मिलने का अनुमान है। ममता बनर्जी को 20 से 28 और जयललिता और लेफ्ट फ्रेंट को 15 से 23 सीटें मिल सकती हैं।

मोदी पहली पसंद

आईबीएन7 के लिए सीएसडीएस के 18 राज्यों में किए गए नेशनल ट्रैकर सर्वे में लोगों की पहली पसंद बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी हैं। सर्वे में नरेन्द्र मोदी 34 फीसदी लोगों को ने पसंद किया है जबकि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी महज 15 फीसी लोगों की पसंद हैं और सोनिया 5 फीसदी पर सिमट गई हैं। वहीं जब मोदी और राहुल के बारे में सीधे पूछा गया तो मोदी 42 फीसदी लोग प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं और राहुल को 25 फीसदी लोग प्रधानमंत्री देखना चाहेत हैं।

गौरतलब है कि IBN7 से पहले राज्यवार सर्वे की तस्वीरें पेश की। आइए आपको बताते हैं कि IBN7 के लिए 18 राज्यों में किए गए CSDS के इस सर्वे में किस राज्य में किसको कितनी सीटें मिल रही हैं।

पूरब के तीन राज्यों की तस्वीर

पश्चिम बंगाल में तृणमूल को 20 से 28 सीटें मिल रही हैं तो वाम खेमे को 7 से 13 सीटें जबकि कांग्रेस को 5-9 जबकि बीजेपी को अगर मिलीं तो 2 सीटें मिलेंगी।

ओडिशा में बीजू जनता देल को 10 से 16 तो कांग्रेस को 3 से 9 सीटें मिल रही हैं। बीजेपी को अगर मिलीं तो 4 तक सीटें मिल सकती हैं।

बिहार में बीजेपी को 16 से 24 सीटें मिल रही हैं तो जेडीयू को 7 से 13 सीटें जबकि लालू की आरजेडी को 6 से 10 सीटें मिल रही हैं और कांग्रेस को मिलीं तो 4 सीटें मिलेंगी।

पूरब के बाद अब रुख दक्षिण का

आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक फायदा वाइएसआर कांग्रेस को हो रहा है, उन्हें 11 से 19 सीटें मिल रही हैं तो तेलगू देशम को 9 से 15, कांग्रेस को 5 से 9 और तेलंगाना राष्ट्र समिति को 4 से 8 सीटें।

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ को 12 से 18 सीटें मिल रही हैं तो लेफ्ट को मोर्चे को 2 से 8 सीटें।

वहीं तमिलनाडु में जयाललिता की अन्ना डीएमके को 15 से 23 सीटें मिल रही हैं तो करूणानिधी की डीएमके को 7 से 13 सीटें, तो कांग्रेस को 1 से 5 सीटें मिल रही हैं जबकि अन्य को 4 से 10 सीटें।

अब बारी पश्चिम और मध्य भारत की

सबसे पहले हमने रुख किया गुजरात का जहां बीजेपी को 26 में से 20 से 25 सीटें मिल रही हैं। तो कांग्रेस को 1 से 4 सीटें, जबकि अन्य के खाते में 2 सीटें जा सकती हैं।

जबकि मध्यप्रदेश में बीजेपी को 23 से 27 सीटें और कांग्रेस को 2 से 5 सीटें मिल रही हैं।

वहीं महाराष्ट्र में बीजेपी और उसके सहयोगियों को 25 से 33 सीटें मिल रही हैं तो कांग्रेस को 12 से 20 सीटें और अन्य को 1 से 5 सीटें मिल रही हैं।

सबसे चौंकाने वाले नतीजे उत्तर भारत के हैं दिल्ली में कांग्रेस लड़ाई से ही बाहर है। आम आदमी पार्टी को 4 से 6 सीटें मिलने का अनुमान है तो बीजेपी को 1 से 3 सीटें।

राजस्थान की 25 सीटों में बीजेपी को जहां 20 से 24 सीटें मिलने का अनुमान है तो कांग्रेस को मिलीं तो अधिक से अधिक 2 सीटें मिलेंगी।

यूपी में बीजेपी का सबसे बड़ा फायदा दिख रहा है उसे 41 से 49 सीटें मिलती दिख रही हैं। तो कांग्रेस को 4 से 10 सीटें मिल रही हैं। समाजवादी पार्टी को 8 से 14 सीटें तो बीएसपी को 10 से 16 सीटें मिलती दिख रही हैं।

मैं आपसे साठ महीने मांगता हूं - नरेंद्र मोदी




गोरखपुर. आज भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की गोरखपुर में रैली को संबोधित किया। इस रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए भाजपा ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। वहीं मोदी भी इस रैली को सफल बनाने के लिए गोरखनाथ मंदिर के दर्शन करने पहुंचे।

वहीं मोदी की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस, एटीएस, खुफिया एजेंसियों, गुजरात सुरक्षा बल आदि ने तकरीबन 90 एकड़ रैली क्षेत्र पर नजर रखी। विजय शंखनाद रैली को लेकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं में ही नहीं बल्कि लोगों में भी खासा उत्साह देखा गया।

हजारों की भीड़ में यहां लोग नजर आए। वहीं सुबह से ही यहां सड़कों पर जाम रहा। इस जाम के कारण कई लोगों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।
गोरखपुर. यूपी के गोरखपुर में बीजेपी की विजय शंखनाद रैली को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और सपा पर जमकर निशाना साधा।

मोदी ने कहा 'आपने साठ साल तक शासक चुने हैं, मैं आपसे साठ महीने मांगता हूं। मैं आपके सपनों का हिंदुस्तान देने का वादा करता हूं। आज सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है। उन्होंने कहा था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा, मैं आपसे कहता हूं कि आप मुझे साठ महीने दो, मैं आपको सुख-चैन की जिंदगी दूंगा।'

यूपी के हाल पर चिंता जताते हुए मोदी ने कहा कि यहां किसानों और नौजवानों का बूरा हाल है। किसान यहां ब्लैक में फर्टिलाइजर खरीदते हैं। कॉलेजों में समय से परीक्षाएं नहीं होती। यूपी पूरे देश की शक्ल बदल सकता है लेकिन इसके लिए सही सोच चाहिए, सही नेतृत्व चाहिए। मुलायम न प्रदेश में रोजगार दे रहे न ही सुरक्षा। अकेला यूपी पूरे देश का पेट भर सकता है।

मोदी ने कहा, 'क्या उत्तर प्रदेश में अमूल जैसी डेयरी नहीं बन सकती है। क्या यूपी के किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य नहीं मिल सकता है। यूपी की तस्वीर बदल सकती है। लेकिन मुलायम से यूपी के लिए कुछ नहीं किया।'

मोदी ने मुलायम सिंह यादव पर पलटवार करते हुए कहा 'आज नेता जी (मुलायम सिंह यादव) ने मुझे ललकारा। उन्होंने कहा वे यूपी को गुजरात नहीं बना सकते, सही कहा नेताजी आप यूपी को गुजरात नहीं बना सकते हैं। क्योंकि, गुजरात बनाने का मतलब है चौबीस घंटे बिजली, विकास, सुख चैन और शांति, जोकि आप नहीं कर सकते हैं। लिहाजा आप गुजरात नहीं बना सकते नेताजी।'

मोदी ने कहा कि यूपी का कोई ऐसा गांव नहीं जिसका नौजवान गुजरात में काम न करता हो, मोदी ने कहा कि कौन ऐसा नौजवान है जो अपने मां-बाप को छोड़कर दूर जाना चाहता है? यदि अपने ही प्रदेश में रोजी-रोटी मिलती तो उसे अपना घर छोड़ने की जरूरत ही नहीं होती।

मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह पार्टी चुनावों से पहले ही गरीबी की बात करती है। आजादी के बाद से लगातार कई बार कांग्रेस की सरकार रही लेकिन यह पार्टी केवल बाते ही करती रही। साठ साल में गरीबी क्यों खत्म नहीं हुई। इसका कारण यह है कि कांग्रेस का राजनीतिक भविष्य गरीब को गरीब रखने में ही छिपा हुआ है।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि यूपी में बदलाव की लहर चल रही है। रैली में आए लोग इस हवा का रुख साफ बता रहे हैं।
मोदी से पहले रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि यूपी में संप्रदाय विशेष की राजनीति हो रही है। सपा के दो सालों के शासन काल में जनता के सभी सपने टूट गए हैं। सपा के आते ही सांप्रदायिक दंगे बढ़ जाते हैं। धर्म और राजनीति के आधार पर राजनीति शुरू हो जाती है।

इस प्रदेश में संप्रदाय के आधार पर स्कॉलरशिप दी जाती है। यही काम केंद्र की कांग्रेस सरकार भी करती रही है। सोनिया जी कहती हैं कि बीजेपी देश को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनको समझना होगा कि यदि मोदी के पीएम बनने से देश बर्बाद होगा तो मनमोहन सिंह ने पिछले 10 वर्षों में देश का कौन सा भला किया है?

बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार के चलते फ़र्टिलाइज़र फैक्ट्री में रैली नही हो पाई। इस सेक्युलर सरकार को आइना दिखाते हुए मनबेला के अल्पसंख्यकों ने अपनी जमीन रैली के लिए उपलब्ध कराई।

जहां इन्सेफेलाइटिस के इलाज के लिए सीमित संसाधन हैं, वहां के डॉक्टरों को सपा सरकार ने सैफई में फ़िल्मी कलाकारों की सेवा में लगा दिया। मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर गोरखपुर का बंद फ़र्टिलाइज़र कारखाना चलेगा। योगी ने आरोप लगाया कि एसएसबी नेपाल के रास्ते आए पाकिस्तान परस्त आतंकियों के पुनर्वास में लगी है।

इससे पहले, गोरखनाथ मंदिर में दर्शन के बाद मोदी सड़क के रास्ते मनबेला स्थित रैली स्थल पहुंचे हैं। वहीं मंच पर इस दौरान विनय कटियार ने कहा कि बीजेपी की सरकार बनने के बाद कानून पास कर अयोध्या में राम मंदिर बनेगा। उन्होंने सपा सरकार के आजम खान को दंगाई मंत्री बताते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर में दंगा उन्ही की वजह से हुआ।

रैली स्थल से पुलिस ने दो व्यक्तियों को चाकू के साथ गिरफ्तार किया गया है। रैली में आए लोगों की तलाशी के दौरान दो लोगों के पास चाकू बरामद हुए। पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है।

बीजेपी नेता शिवप्रताप शुक्ला ने मंच से आरोप लगाया है कि बीजेपी समर्थकों और नरेंद्र मोदी को सुनने आने वाली भीड़ को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं के पास फ़ोन आ रहे हैं कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नौसढ़ और खजांची चौराहे पर पुलिस प्रशासन जबरन रोक रहा है। वहीं लालजी टंडन ने कहा जेपी के आन्दोलन की शुरूआत पूर्वांचल से ही हुई थी और आज मोदी को भी पूर्वांचल से पूरा समर्थन मिलेगा।

कांग्रेस को,जब-जब चुनाव होते हैं तभी गरीबों की याद आती है - नरेंद्र मोदी



मुझे 60 महीने दो, मैं आपको सुख-चैन की जिंदगी दूंगा : मोदी
Thursday, January 23, 2014,
ज़ी मीडिया ब्यूरो

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) : यूपी के गोरखपुर में गुरुवार को विजय शंखनाद रैली के दौरान बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने हुंकार भरी। मोदी ने विपक्षी पार्टियों को ललकारते हुए कहा कि चुनाव का फैसला जनता तय कर चुकी है। मोदी ने रैली के दौरान जमा भारी भीड़ से उत्साहित होकर कहा कि ये भीड़ बदलती हवा का रुख दिखा रही है। मोदी ने इस दौरान कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आपने 60 साल शासकों को दिए हैं, अब सेवकों को 60 महीने दीजिए। हम आपकी खुशी के लिए रात-दिन एक दिन कर देंगे। सुभाष चंद्र बोस के नारे को याद करते हुए मोदी ने कहा कि आप मुझे 60 महीने दीजिए मैं आपको सुख-चैन की जिंदगी दूंगा।


उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि जब-जब चुनाव होते हैं तभी कांग्रेस को गरीबों की याद आती है। क्योंकि उन्हें गरीबों और दलितों को वोट चाहिए होता है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा अपने फायदे के लिए लोगों को गरीब रखा है। इसलिए 60 साल में भी हिंदुस्तान से गरीबी नहीं मिटी और गरीबों की जिंदगी भी नहीं बदली। मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा गरीबी और गरीबों को मजाक उड़ाया है। इसलिए कांग्रेस एक चायवाले को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि हाल ही में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और उन राज्यों में जो नतीजे सामने आए वह 2014 आम चुनाव के ट्रेलर की तरह है। मोदी ने यह भी साफ किया कि जनता कांग्रेस को विदाई देने का मन बना चुकी है। गोरखपुर के मानबेला मैदान में आयोजित विजय शंखनाद रैली को सम्बोधित करते हुए मोदी ने यह बातें कही। मोदी ने इस दौरान कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया।

मोदी ने कहा कि अभी हाल ही में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और उसमें जो नतीजे चौंकाने वाले आए। पांच राज्यों में से चार राज्यों में भाजपा ने सबसे अधिक सीटें हासिल की है। मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह पिछड़ों, अतिपिछड़ों, गरीबों और शोषितों को हमेशा वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करती है लेकिन विधानसभा चुनावों में इन वगरें ने भी कांग्रेस को नकार दिया है।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी ने कहा कि राजस्थान में अनुसूचित जाति की 34 सीटें हैं लेकिन उसमें से कांग्रेस को एक भी सीट नही मिली जबकि भाजपा को 32 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। इसी तरह छत्तीसगढ़ की 10 अनुसूचित जाति की सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ एक ही सीट मिली ।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति की 35 सीटें हैं, जिसमें भाजपा को 28 सीटें हासिल हुई। मोदी ने कहा, दलितों, पीड़ितों और शोषितों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि जहां-जहां भाजपा को सेवा करने का अवसर मिला है, वहां-वहां हमारी प्राथमिकता गरीबों और शोषितों का कल्याण करने की रही है। मोदी ने कहा कि देश में बहुत चुनाव हुआ लेकिन इस बार का आम चुनाव सबसे अलग होगा। देश की जनता ने इस बार चुनाव के पहले ही अपना नतीजा सुना दिया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब यह ठान चुकी है कि देश को कांग्रेस मुक्त बनाना है।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा कि देश की जनता कांग्रेस और उसके साथी दलों की विदाई तय कर चुकी है। इस बार कांग्रेस मुक्त भारत का सपना जरूर साकार होगा।

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प्रधानमंत्री पद के लिए ' मोदी ' सबसे पोपुलर



प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी सबसे पोपुलर, रेस में मनमोहन और राहुल पीछे: सर्वे
January 21, 2014
ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली : एक न्यूज चैनल द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री पद के लिए देश में नरेंद्र मोदी की लहर है। इस सर्वे में प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी पहली पसंद है और इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद के दावेदारों की फेहरिस्त में सर्वे के मुताबिक मोदी से पीछे हैं।

बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में आम लोगों पर हुए सर्वे में यह बात सामने आई है। इसके मुताबिक, बिहार, झारखंड में तो बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरेगी, वहीं प. बंगाल में तृणमूल तो ओडिशा में सत्ताधारी बीजू जनता दल के ही आगे रहने के आसार हैं।

पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी 18 फीसदी लोगों की पसंद हैं, जबकि 11 फीसदी लोग ममता बनर्जी को पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार पश्चिम बंगाल में 60 फीसदी लोगों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रदर्शन से संतोष जताया जबकि नरेंद्र मोदी को लोग प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वाधिक तरजीह दे रहे हैं। सर्वे के तहत बिहार में बीजेपी को जबर्दस्त फायदा होने का अनुमान है।

बिहार में 39 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनता हुआ देखना चाहते हैं। बिहार में पीएम के तौर पर नीतीश कुमार 15 फीसदी लोगों की पसंद हैं, जबकि सिर्फ 9 फीसदी लोग राहुल गांधी को पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं।

ओडिशा में बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा होने की तस्वीर सामने आ रही है। ओडिशा में प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी 33 फीसदी लोगों की पसंद हैं, जबकि राहुल गांधी को 19 फीसदी लोग पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं।