सोमवार, 27 जनवरी 2014

'ऐ मेरे वतन...' न होता तो हम भूल जाते शहीदों को : नरेंद्र मोदी



'ऐ मेरे वतन...' न होता तो हम भूल जाते शहीदों को: मोदी
नवभारतटाइम्स.कॉम | Jan 27, 2014,
मुंबई
1962 में चीन से युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों की याद में 1963 में गाए गए गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों...' का स्वर्ण जयंती समारोह मुंबई में मनाया गया। इस गाने को गाने वाली मशहूर गायिका लता मंगेशकर को बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया। समारोह में परमवीर चक्र, महावीर चक्र और अन्य वीरता पुरस्कार प्राप्त 100 से अधिक लोगों को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर बीजेपी के पीएम कैंडिडेड नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर कवि प्रदीप ने यह गीत नहीं लिखा होता तो शायद 1962 के शहीद हमें याद न होते।
लता ने 27 जनवरी 1963 को पहली बार यह गीत गाया था। लता के साथ वहां मौजूद 1,42,000 लोगों ने सुर मिलाए। लता ने कहा कि नरेंद्र मोदी मेरे भाई हैं। उनसे सम्मान पाकर मैं खुश हूं। उन्होंने बताया कि जब पहली बार मैंने यह गीत गाया था तो पंडित नेहरू बहुत खुश हुए थे। इंदिरा गांधी ने अपने दोनों बच्चों से मुझे मिलवाया था। अब तक देश के बाहर 101 शो में मैं यह गाना गा चुकी हूं।
इस मौके पर मोदी ने कहा कि आज से ठीक 50 साल पहले गाया गया यह गीत आज भी गूंजता है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर प्रदीप जी ने यह गीत नहीं लिखा होता तो शायद 1962 के शहीद हमें याद न होते।

गौरतलब है कि लता मंगेशकर ने गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हुए कहा था कि वह चाहती हैं कि मोदी देश के पीएम बनें। पुणे में एक हॉस्पिटल के उद्घाटन के दौरान मोदी की मौजूदगी में लता ने कहा था, 'आज दिवाली है...मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि हम जो चाहते हैं, आप जो चाहते हैं। वह पूरा हो। मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें।'
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नरेंद्र मोदी: ऐ मेरे वतन के लोगों..

09:46 PM'वंदे मातरम्' गाने के वक्त एक साथ खड़े नरेंद्र मोदी और लता मंगेशकर।
09:41 PMमशहूर देशभक्ति गीत, 'ऐ मेरे वतन के लोगो...' के स्वर्ण जयंती वर्ष पर आयोजित समारोह संपन्न। ' वंदे मातरम्' गीत के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम।
09:37 PM1,42,000 लोगों के साथ 'ऐ मेरे वतन के लोगो...' को गातीं लता मंगेशकर।
09:31 PMनरेंद्र मोदी और लता मंगेशकर के साथ मिलकर कुल 1,42,000 हजार लोग एक साथ 'ऐ मेरे वतन के लोगो...' गाना गा रहे हैं।
09:29 PMनरेंद्र मोदी ने कहा, सेना का काम सिर्फ युद्ध लड़ना नहीं होता, वह सेवा का भी काम करती है। गुजरात का भूकंप और उत्तराखंड में आई तबाही में मैंने सेना का सेवा कार्य देखा है। यह सब देखकर मेरा सिर गर्व से ऊंचा हो उठता है। मोदी बोलें, सैनिक दुश्मन के लिए काल और अपनों के लिए जान बन कर आते हैं।
09:24 PMवाजपेयी जी की सरकार में शहीदों के शव को उनके घर तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया था। इसका समाज में व्यापक असर दिखा। पूरा समाज शहीदों के सम्मान में उमर जाता था: नरेंद्र मोदी
09:20 PMदेश के विश्वविद्यालयों में युद्ध इक्विपमेंट बनाने का सिलेबस भी शामिल किया जाना चाहिए: नरेंद्र मोदी
09:18 PMमोदी बोलें, युद्ध नया रूप ले रहा है। साइबर वॉर। एक भी गोली चलाए बिना देश की इकॉनमी को नष्ट किया जा सकता है। चाइना इस का प्रयोग कर रहा है। हमें भी इस क्षेत्र में तुरंत काम शुरू करना चाहिए।
09:16 PMमोदी बोलें, देश को सही नेतृत्व मिले। उचित नीतियां बने तो 10 साल के भीतर देश की तकदीर बदल जाएगी।
09:13 PMवॉर मेमोरियल पर चुटकी लेते हुए मोदी ने कहा, शायद कुछ अच्छे काम मेरे हाथों ही लिखा है।
09:12 PMमोदी ने कहा, शायद सिर्फ हमारे देश में ही वॉर मेमोरियल नहीं है। दुनिया के अधिकतर देशों में वॉर मेमोरियल है।
09:10 PMनरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर देश के लिए जीने वाले नहीं मिलेंगे तो देश के लिए मरने वाले कहां मिलेंगे। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
09:09 PMमोदी ने कहा, हमने युद्ध के अंदर जितने सेना के जवान गवाएं उससे ज्यादा आतंकवादी हमलों में गवाएं हैं।
09:07 PMमोदी बोलें, समाज वीरता की पूजा करता है। योद्धाओं की पूजा करता है। उनके पराक्रम का गान करता है।
09:06 PMमोदी ने कहा, अगर प्रदीप जी ने यह गीत नहीं लिखा होता तो शायद हमें 1962 के शहीद याद न होतें।
09:04 PMमोदी ने कहा, आजादी की लड़ाई में 'वंदे मातरम्' हमारा सबसे बड़ा हथियार था। आजादी के बाद 'ऐ मेरे वतन के लोगो...' ने 4 दशक तक हमें प्रेरणा दिया है।
09:02 PMनरेंद्र मोदी ने कहा, ठीक 50 साल पहले गाया गया यह गीत आज भी गूंजता है।
08:59 PMनरेंद्र मोदी ने मंच पर बैठे लोगों का स्वागत कर शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मोदी ने भाषण शुरू किया।
08:57 PMशहीद गौरव समिति के पदाधिकारियों ने नरेंद्र मोदी का सम्मान किया।
08:54 PMलता मंगेशकर के साथ लाखों लोग गा रहे हैं 'ऐ मेरे वतन के लोगो...'
08:53 PMलता मंगेशकर ने कहा, नरेंद्र मोदी मेरे भाई हैं, उनसे सम्मान पाकर मैं खुश हूं।
08:53 PMभारत के बाहर 101 शोज में मैंने यह गाना गाया है। हर जगह यह गाना गाने के लिए लोग मुझसे आग्रह करते थे।
08:51 PMलता मंगेशकर बोलीं, जब मैंने 'ऐ मेरे वतन के लोगो...' को गाया तो पंडित नेहरू बहुत खुश हुए। इंदिरा गांधी ने अपने दोनों बच्चों से मुझे मिलवाया।
08:50 PMशहीदों के नाम इस कार्यक्रम में बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी ने लता मंगेशकर को सम्मानित किया।
08:46 PMनरेंद्र मोदी ने लता मंगेशकर को सम्मानित किया।
08:39 PMलता मंगेशकर और नरेंद्र मोदी ने सनी देओल और सुनील शेट्ठी को सम्मानित किया।
08:38 PMजनरल (रिटायर्ड) वी.पी. मलिक ने लता मंगेशकर से 'ऐ मेरे वतन के लोगों...' गाने को एक बार फिर गाने का आग्रह किया।
08:36 PM'ऐ मेरे वतन के लोगों...' गाने का इतना असर था कि हमने आज तक कभी भी किसी को अपना बॉर्डर छीनने नहीं दिया है। हमने हर दुश्मन को भगा दिया: जनरल (रिटायर्ड) वी.पी. मलिक
08:32 PMकार्यक्रम में लाखों की संख्या में लोग मौजूद। पूर्व सेनाध्याक्ष जनरल वी.पी. मलिक कार्यक्रम को संबोधित।
08:24 PMअभी नरेंद्र मोदी मुबई हमलों के दैरान शहीदों को सम्मानित कर रहे हैं। यह कार्यक्रम शहीद गौरव समिति द्वारा आयोजित किया गया है।
08:19 PMगौरतलब है कि आज के ही दिन 27 जनवरी 1963 को भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों की याद में लता मंगेशकर ने 'ऐ मेरे वतन के लोगों...' को पहली बार गाया था।
08:18 PMपरमवीर चक्र, महावीर चक्र और अन्य वीरता पुरस्कार प्राप्त 100 से अधिक लोगों को इस समारोह में सम्मानित किया जाएगा
08:18 PMकार्यक्रम में देश के शहीद जवानों के परिवारों के सदस्य भी शामिल।
08:18 PMइस मौके पर नरेंद्र मोदी मोदी लता मंगेशकर को सम्मानित भी करेंगे।
08:18 PMमुंबई में बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और लता मंगेशकर एक मंच पर मौजूद।
08:14 PMमशहूर गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों...' का स्वर्ण जयंती समारोह मुंबई में मनाया जा रहा है।
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‘ऐ मेरे वतन के लोगों...’ गीत से जुड़ी यादें
आईबीएन-7 | Jan 27, 2014
नई दिल्ली। 50 वर्षों से देशभक्ति का ज्वर जगाने वाले गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' का सोमवार को मुंबई में स्वर्ण जयंति समारोह मनाया गया। 27 जनवरी 1963 को इसे पहली बार दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने गया था। तब से देशभक्ति के लोकप्रिय तरानों के बीच इसकी खास जगह है, जिसके पीछे है अनगिनत कहानियां। कहानियां-62 के जंग के वीर सपूतों कीं। कहानियां-देश के लिए कुछ गुजरने की आम नागरिकों के जज्बे की। 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत के 51 बरस के हो जाने पर पेश हैं, इसी गीत की अमर कहानी।

20 अक्टूबर 1962, पूर्वोत्तर सरहद पर सुबह करीब चार बजे का मंजर खौफनाक था। चीटियों की तरह चीनी हमारी जमीन पर घुस आए। जांबाजों ने उनके रास्ते पर लाशों की दीवार खड़ी कर दी। लेकिन कुर्बानी काम नहीं आई। चीनियों के हाथ मिली हार से सदियों की परंपरा, संस्कृति, इतिहास की बुनियाद पर खड़ा स्वाभिमान जख्मी हो गया। चीनियों के छल से मुल्क गहरे सदमे में चला गया।

उस दौर में इन शब्दों ने सचमुच हिंदुस्तान को एक शर्मनाक हार की टीस भुलाने की ताकत दी। भावनाओं का ऐसा ज्वार पैदा हुआ, जिसकी बदौलत हिंदुस्तान अपनी राख से जी उठने वाले गरुड़ पक्षी की तरह नई परवाज के लिए बेताब हो उठा। लेकिन जब पहली बार ये गीत गाया गया तो लगा कि चीन के धोखे से चोट खाया हिमालय भी रो पड़ा।

27 जनवरी 1963, आज से पचास साल पहले की यही वो तारीख है जब दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में करीब 50 हजार हिंदुस्तानियों के हुजूम के सामने पहली बार ये गीत गूंजा था। दिल्ली में हुए उस समारोह में कवि प्रदीप नहीं थे। लेकिन उनके लिखे गीत के एक-एक शब्द पंडित जवाहर लाल नेहरू को उद्वेलित कर रहे थे। दरअसल 62 की जंग में मिली हार से नेहरू व्यक्तिगत रूप से खुद को ठगा महसूस कर रहे थे। संसद में उन्होंने कहा था 'हम आधुनिक दुनिया की सच्चाईयों से दूर हो गए थे, हम एक बनावटी माहौल में जी रहे थे जिसे हमने खुद ही तैयार किया था।'

नेहरू हिंदी-चीनी भाई-भाई के बनावटी माहौल को भूल कर सच का सामना करना चाहते थे। जिस दिन लता मंगेशकर ने नेशनल स्टेडियम में ऐ मेरे वतन के लोगों गीत गया, उसके ठीक एक दिन पहले 14वां गणतंत्र दिवस मनाया गया था, ये इकलौती गणतंत्र दिवस परेड है जिसका नेतृत्व देश का प्रधानमंत्री खुद कर रहा था।

इसी माहौल में कवि प्रदीप के गीत ने करोड़ों भारतवासियों को एकता के सूत्र में पिरो दिया। नेहरू उस कवि से मिलना चाहते थे जिसके गीत ने एक झटके में हिंदुस्तान को उसकी खोई ताकत-इतिहास और क्षमताओं की याद दिला दी, जल्दी ही ये मौका भी आया। 21 मार्च 1963 को पंडित नेहरू मुंबई आए तब मुंबई के रॉबर्ट मोय हाई स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान कवि प्रदीप की उनसे मुलाकात हुई। नेहरू के कहने पर प्रदीप ने अपनी आवाज में ऐ मेरे वतन के लोगों गाकर सुनाया, उन्होंने नेहरू को इस गीत समेत अपने कई गीतों की अपनी हाथ से लिखी डायरी भेंट की। उन्होंने नेहरू को ये भी बताया कि इस गीत को लिखने की प्रेरणा उन्हें कैसे मिली।
रेजांगला दर्रे की जंग की याद : ‘ऐ मेरे वतन के लोगों...’
ये इत्तेफाक नहीं है कि ऐ मेरे वतन के लोगों गीत की एक-एक लाइन उत्तर के मोर्चे पर चूशलू के पास 17 हजार फुट की ऊंचाई पर लड़ी गई रेजांगला दर्रे की जंग की याद दिलाती है। इसी जंग में परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह शहीद हो गए थे।

18 नवंबर 1962 की को बर्फीले तूफान की आड़ में चीनियों ने रेजांगला दर्रे पर मौजूद हिंदुस्तानी चौकियों को घेर लिया था। कुमाऊं रेजीमेंट की 123 जांबाजों की छोटी सी कंपनी तीन पलाटून में बंट कर दर्रे की रक्षा कर रही थी। जांबाजों ने चीनियों के लगातार दो हमलों को सिर्फ बहादुरी की बदौलत पीछे धकेल दिया। तीसरा और सबसे बड़ा हमला पीछे से हुआ। आखिरकार एक प्लाटून अपने आखिरी जवान तक लड़ते हुए खत्म हो गई, दूसरी प्लाटून आखिरी गोली तक लड़ती रही, कुछ नहीं मिला तो संगीनों और पत्थरों तक से जवानों ने चीनियों का मुकाबला किया।

आखिरी हमले में ही मेजर शैतान सिंह बुरी तरह जख्मी हो गए थे। उनके जवान उन्हें एक चट्टान के पीछे छोड़ गए थे, जहां अपनी बंदूक मुट्ठी में भींचे हुए उन्होंने आखिरी सांस ली। युद्ध के अंत में सिर्फ 14 जांबाज बचे, 9 बुरी तरह से जख्मी थे। हमलावर चीनियों के मृतकों और जख्मियों की तादाद कई सौ में थी। कवि प्रदीप ने रेजांगला की इसी लड़ाई को गीत बना कर हमेशा के लिए अमर कर दिया।
 

नरेंद्र मोदी का असर बंगाल में : भाजपा, आरएसएस के सदस्यों में भारी इजाफा



नरेंद्र मोदी का असर बंगाल में : भाजपा, आरएसएस के सदस्यों में भारी इजाफा

नई दिल्ली: प्रतीत होता है कि नरेंद्र मोदी की लहर बंगाल तक पहुंच गई है क्योंकि भाजपा की राज्य इकाई की सदस्यता में दोगुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के एक नेता ने कहा कि वर्ष 2011 में राज्य में पार्टी की कुल सदस्यता करीब तीन लाख थी, जो वर्ष 2013 में सात लाख से अधिक हो गई।

पिछले छह माह में पार्टी के दो लाख नए सदस्य बने हैं। पार्टी के नेता इसका श्रेय अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को देते हैं।

भाजपा के प्रवक्ता और पार्टी की बंगाल इकाई के सह प्रभारी सिद्धांत सिंह ने बताया कि पार्टी की युवा शाखा एबीवीपी की सदस्यता में भी बढ़ोतरी हुई है और पिछले एक साल में ही उसमें 45 हजार नए कार्यकर्ता जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा की अल्पसंख्यक एवं महिला शाखाओं की सदस्यता में भी 50 फीसदी की वृद्धि हुई है।

सिंह ने बताया, 'पश्चिम बंगाल में भाजपा की सदस्यता बढ़ने के पीछे दो मुख्य कारक हैं। पार्टी द्वारा मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना और राज्य में विपक्ष का एक तरह से अभाव।' भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि ऐसा उत्साह पहले दो अवसरों पर देखा गया। एक तो 90 के दशक के शुरू में राम मंदिर आंदोलन के दौरान और दूसरा केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के दौरान।

सिंह ने बताया, 'मोदी का करिश्मा पूरे देश में है और बंगाल इससे अलग नहीं रहा। कोलकाता में 5 फरवरी को मोदी की रैली के दौरान हम इसे साबित कर देंगे।' सामान्यत: भाजपा और आरएसएस का पश्चिम बंगाल में गहरा प्रभाव नहीं रहा। हालांकि पार्टी के पूर्ववर्ती स्वरूप 'जनसंघ' की सह-स्थापना माटी पुत्र श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी।

राज्य में मुस्लिमों की आबादी 27 फीसदी है जो राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से कम से कम 140 में खासा प्रभाव रखती है। यह आबादी सत्ता के समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाती रही है। इस आबादी को अग्रणी राजनीतिक दल लुभाने के लिए प्रयासरत हैं।

वर्ष 2011 में वाम किले के ध्वस्त होने के बाद से पश्चिम बंगाल में वास्तविक विपक्ष लगभग नदारद सा है और भाजपा अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए धीरे-धीरे प्रयास कर रही है। खास कर दक्षिण बंगाल के इलाकों में वह मोदी के बढ़ते ग्राफ की मदद ले रही है।

यह बात वर्ष 2012 में मुर्शिदाबाद जिले की जंगीपुर लोकसभा सीट पर हुए उप चुनाव में जाहिर हुई जब भाजपा प्रत्याशी को 85,867 वोट मिले। यह संख्या डाले गए कुल मतों का करीब दस फीसदी थी और वर्ष 2009 में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में डाले गए मतों की संख्या में 8 फीसदी की वृद्धि बताती थी।

भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने बताया 'वर्ष 1998-99 में भाजपा के तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बाद उसके वोटों में कमी आई। लेकिन 2011 में विधानसभा चुनावों में वाम दलों का सफाया होने के बाद मतदाताओं की नजर नए और ऐसे विपक्ष पर गई जो तृणमूल कांग्रेस पर अंकुश लगा सके।

वर्ष 2013 में संपन्न पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में भी भाजपा के मतों में वृद्धि हुई और भाजपा प्रत्याशियों की हार बहुत ही कम मतों के अंतर से हुई। हावड़ा में तो स्थानीय निकाय चुनाव में वाम उम्मीदवार और मेयर ममता जायसवाल को भाजपा की गीता राय ने हरा दिया।

भाजपा की लोकप्रियता इसी बात से समझी जा सकती है कि आगामी लोकसभा चुनावों में 42 लोकसभा सीटों में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़ने के लिए अलग-अलग वर्ग के 425 आवेदकों ने इच्छा जाहिर की है।

आरएसएस भी दक्षिण और उत्तर भारत में अपनी जगह बना रहा है और इसमें सत्तारूढ़ पार्टी की अल्पसंख्यकों के कथित तुष्टीकरण की नीतियों की भूमिका है। सिन्हा ने बताया कि राज्य के 30,000 इमामों को भत्ता दिया गया जिसे कलकत्ता उच्च न्यायालय ने असंवैधानिक करार दिया।

राज्य में 20 साल के अंतराल के बाद आरएसएस की तीन दिवसीय एक युवा कार्यशाला आयोजित की गई। संघ प्रमुख मोहन भागवत की अगुवाई में हुई इस कार्यशाला के बाद राज्य के हर हिस्से या हर शाखा में सदस्यों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई।

आरएसएस के एक अधिकारी ने बताया 'पिछले करीब ढाई साल में राज्य में आरएसएस का प्रभाव बढ़ा है। अब दक्षिण बंगाल में हमारी 280 शाखाएं और उत्तरी बंगाल में 700 से अधिक शाखाएं हैं।' भाजपा और आरएसएस के प्रभाव में हुई वृद्धि को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने स्वीकार भी किया है।

माकपा नेता एबी बर्धन ने बताया 'हां, पश्चिम बंगाल में भाजपा और आरएसएस का प्रभाव बढ़ रहा है।' लेकिन इसके लिए तृणमूल कांग्रेस, भाजपा के प्रति उसके नर्म रवैये और सांप्रदायिक ताकतों के साथ 'गोपनीय' समझौते को उन्होंने जिम्मेदार बताया। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि वाम दलों की हार से उत्पन्न शून्य को भाजपा भरने की कोशिश कर रही है।

माकपा के केंद्रीय समिति के सदस्य बसुदेव अचार्य ने बताया 'हमारे पास खबरें हैं कि भाजपा और आरएसएस का समर्थन आधार पश्चिम बंगाल में बढ़ रहा है लेकिन मजबूत विपक्ष के अभाव की वजह से ऐसा नहीं हो रहा है।' उन्होंने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के एक दूसरे के प्रति उदार रवैये का जिक्र करते हुए सवाल किया 'क्या आप एक भी ऐसा मुद्दा बता सकते हैं जब भाजपा ने तृणमूल के खिलाफ अभियान चलाया हो ?'

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद ने हालांकि दावा किया 'माकपा समर्थक भाजपा से जुड़ रहे हैं क्योंकि उनकी मूल पार्टी अच्छी हालत में नहीं है। इसीलिए भाजपा और आरएसएस का प्रभाव बढ़ रहा है।' राज्य की कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया 'भाजपा के दावे से मैं सहमत नहीं हूं। आगामी लोकसभा चुनावों में यह साबित भी हो जाएगा।'

मुस्लिम उलेमा मौलाना बरकती ने इस तर्क से सहमति जताई कि पश्चिम बंगाल में मजबूत विपक्ष के अभाव के चलते भाजपा और आरएसएस का आधार बढ़ रहा है।
  

लता और मोदी के साथ लाखों लोग गायेंगे, ऐ मेरे वतन के लोगों.....!




मुबई : लता और मोदी के साथ लाखों लोग गायेंगे, ऐ मेरे वतन के लोगों.....! स्वर्ण जयंती वर्ष
Jan 27 2014

मुंबई : मशहूर देशभक्ति गीत  ऐ मेरे वतन के लोगों... के स्वर्ण जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए आज मुंबई में समारोह का आयोजन किया गया है. इस मौके पर स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एक मंच पर साथ-साथ दिखेंगे. उम्मीद की जा रही है कि इस बार लता मंगेशकर, मोदी की मौजूदगी में मशहूर देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों... भी गायेंगी.

आज करीब एक लाख लोग एक साथ यह गीत गायेंगे. इस मौके पर लता मंगेशकर भी मौजूद रहेंगी. भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी इस मौके पर लता को सम्मानित करेंगे. मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में आयोजित होनेवाले इस कार्यक्रम का आयोजन शहीद गौरव समिति (एसजीएस) कर रहा है.

इस मौके पर लता मंगेशकर के साथ जंग के नायकों और उनके परिवार के लोगों को सम्मानित किया जायेगा. लता ने 27 जनवरी, 1963 को पहली बार ऐ मेरे वतन के लोगों... गाया, तो देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू समेत कई लोगों की आंखें नम हो गयी थीं. गीत को मशहूर कवि प्रदीप ने लिखा था.
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मुंबई। देशभक्ति का जज्बा भर देने वाले गीत ‘ए मेरे वतन के लोगों..’ का मुंबई में आज स्वर्ण जयंती समारोह है। 27 जनवरी 1963 को पहली बार इस गीत को लता मंगेशकर ने जवाहर लाल नेहरू के सामने गाया था। कवि प्रदीप के लिखे इस गीत के 50 साल पूरे होने के मौके पर मुंबई में एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में ‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर के साथ ही बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, उद्धव ठाकरे सहित बॉलीवुड और राजनीति की कई हस्तियां शामिल होंगी। इस गीत को देशभक्ति के हर अवसर पर गाया जाता है।

भारत-चीन युद्ध के बाद इसी गीत ने देशभक्तों के मनोबल को फिर से उठाने का काम किया था। राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत की तरह उतनी ही श्रद्धा के साथ इस गाने को आज भी गाया जाता है। 27 जनवरी 1963 की शाम राजधानी दिल्ली के राष्ट्रीय स्टेडियम में जब लता मंगेशकर ने इस गाने को गाया, तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गई थीं। खुद प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की भी आंखें इस गाने को सुनने के बाद भर आई थीं। तत्कालीन राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, सभी कैबिनेट मंत्रियों सहित पूरी फिल्म इंडस्ट्री, जिसमें दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर, राजेंद्र कुमार, गायक मोहम्मद रफी, हेमंत कुमार इस मौके पर मौजूद थे।

‘ए मेरे वतन के लोगों..’ गीत युद्ध के नायकों और शहीदों के लिए एक श्रद्धांजलि है। इस गीत ने हर उम्र के लोगों को 1962 की हार के बाद पैदा हुए गुस्से को नियंत्रण में करना सिखाया। आज 50 साल बाद भी इस गीत की लोकप्रियता बरकरार है और सभी प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अवसर पर इस गाने को जरूर बजाया जाता है।
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आधी सदी का अमर गीत...
-माहीमीत
ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गंवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो, कुछ याद उन्हें भी कर लो
जो लौट के घर न आए, जो लौट के घर न आए...
ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी

27 जनवरी को उज्जैन की आबोहवा में पले-बढ़े कवि प्रदीप का यह अमर गीत अपने जन्म 50 साल पूरे कर लेगा। पिछली आधी सदी से यह महान गीत आम भारतीयों के दिल को झकझोर रहा है। इस गीत को सुन आज भी देश की कई माताएं, बहनें, पत्नियां और बच्चे उन अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं, जो चीन की 1962 की सुर्ख आंधी में शहीद हो गए थे। हिन्दुस्तान के इतिहास का यह ऐसा इकलौता गीत है, जो इंसानी संवेदनाओं की तह को आधी सदी बीत जाने के बाद भी बार-बार उदासी के सागर में नई हिलोरे पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

प्रदीप ने अपने इस गीत में भारतीय सैनिकों के साहस, वीरता और देशप्रेम के साथ-साथ उनकी दुर्दशा और दुखद अंत का ऐसा अविस्मरणीय चित्र खींचा था, जो आज भी हमारे मानस से ओझल नहीं हो पा रहा है। इसे दुर्भाग्य का गीत कहना कितना उचित होगा मुझे यह तो नहीं पता लेकिन यह चीन की क्रूरता का चित्रण एक अलहदा तरीके से करता है।

बर्फीले पहाड़ों पर मानवीयता के रक्तरंजित होने का इससे वीभत्स दृश्य कहीं नहीं दिखाई देगा। इस गीत की आत्मा उसके शब्द हैं और एक-एक शब्द को प्रदीप ने जिस तह में जाकर लिखा है वही इसे पिछले 50 सालों से हमारे दिलो दिमाग में बैठा हुआ है। अब इस अमर गीत की कुछ पंक्तियां गुनगुनाते हैं-

ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गंवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो, कुछ याद उन्हें भी कर लो
जो लौट के घर न आए, जो लौट के घर न आए...
ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी
ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी

इस अद्वितीय गीत की धुन महान संगीतकार सी. रामचन्द्र ने बनाई थी। सबसे पहले यह गीत स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने संवेदनशीलता के साथ 27 जनवरी 1963 को नेशनल स्टेडियम में संगीतकार सी. रामचन्द्र के लाईव आर्केस्ट्रा के साथ गाकर पूरे देश को रोने पर मजबूर कर दिया था।

इतना गुजर जाने के बावजूद आम भारतीयों की आंखों में इस गीत को सुनकर आंसुओं के सैलाब बहने लगते हैं। 27 जनवरी को एक बार से फिर इस गीत को लता मंगेशकर इसके 50 साल पूरे होने पर मुंबई में 1 लाख लोगों के साथ गाएंगीं। 27 जनवरी को यह दिवस पूरा देश श्रेष्ठ भारत दिवस समारोह के रूप में मनाएगा।

मुंबई में स्वर कोकिला लता मंगेशकर को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान 1 लाख लोग देश के लिए बलिदान देने वाले अमर शहीदों की याद में ये गीत गाएंगे और इस कार्यक्रम में देश के शहीद परिवारों, सैनिकों एवं भारत की जनता की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी इस अमर गीत हेतु लता मंगेशकर का सार्वजनिक अभिनंदन करेंगे।

सबसे पहले जब इस गीत को लता ने गाया था। उस समय देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू यह गीत सुन भाव-विभोर हो गए थे। एक बार फिर से वही ऐतिहासिक मौका आ रहा है। देश के अमर शहीदों को सलाम करते हुए इस गीत की कुछ पंक्तियां और गुनगुनाते हैं।

जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पड़ी आजादी
जब तक थी सांस लड़े वो... जब तक थी सांस लड़े वो...,
फिर अपनी लाश बिछा दी...
संगीन पे धरकर माथा, सो गए अमर बलिदानी...
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी...