शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

अब अमरीका को सद बुद्धि आगई तो स्वागत है - अरविन्द सिसोदिया

- अरविन्द सिसोदिया 
अमरीका का नरेंद्र मोदी के प्रति जो रवैय्या रहा , वह उसका अहंकार था ! गुजरात के दंगों कि शरुआत गोधरा से होती हे , जिसमें कोंग्रेसी शामिल थे  और उन्हें सजा हुई है । अमरीका को इन दंगों के लिए कांग्रेस को चिन्हित करना चाहिए ! अमरीका को १९८४ के सिखों का नरसंहार याद  नही  और गुजरात याद है , यह आश्चर्य भी है और भेदभावपूर्ण भी है । अब अमरीका को सद बुद्धि आगई तो स्वागत है !



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मोदी के साथ पॉवेल की बैठक ‘व्यापक पहुंच’ का हिस्सा: अमेरिका
भाषा | Feb 14, 2014,
वॉशिंगटन अमेरिका ने कहा है कि बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के साथ दूत नैंसी पॉवेल की मुलाकात लोकसभा चुनावों के पहले राजनीतिक नेताओं और कारोबारियों के साथ उसकी समग्र पहुंच का हिस्सा है। विदेश विभाग की उप प्रवक्ता मैरी हर्फ ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'भारतीय चुनाव के पहले राजदूत पॉवेल और अमेरिकी महावाणिज्य दूत समूचे भारत में राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं, कारोबारी प्रतिष्ठानों और एनजीओ तक व्यापक स्तर पहुंच बना रहे हैं।'
मोदी-पावेल की बैठक के बारे में पूछे जाने पर हर्फ ने कहा, 'यह पिछले नवंबर में शुरू हुआ है और तब से राजदूत पॉवेल भारत-अमेरिका संबंधों पर दृष्टिकोण साझा कर रही हैं और सुन रही हैं। उन्होंने इसी तरह की चर्चा में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की।' नौ साल का बहिष्कार खत्म करते हुए, पॉवेल ने गुरुवार को गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी से गांधीनगर में मुलाकात की थी और कहा था कि उनका देश लोकसभा चुनावों के बाद भारत में चुनी जाने वाली सरकार के साथ निकटता से काम करना चाहेगा।


कांग्रेस का दोगला चेहरा उजागर - अरविन्द सिसोदिया




कांग्रेस का दोगला चेहरा उजागर - अरविन्द सिसोदिया
कांग्रेस यह अच्छी तरह जानती है कि आप पार्टी विधानसभा का सदन चलाने का अनुभव नहीं रखती है । मगर कांग्रेस ने चुनावी फायदे के लिए इसे समर्थन दीया !  या तो कांग्रेस  इसे समर्थन ही नही देती  या इसे चलवाते । मगर विधानसभा कि जो मजाक बनवा कर दिल्ली की भद्द पिटवा रहें हें , भारत की भद्द पिटवा रहे हें , यह ठीक नही हे । कांग्रेस को डबल गेम खेल बंद करना चाहिए ।  वे यही महाराष्ट्रा  में राज  ठाकरे से मिल कर कर रहे हें , यही वे तेलंगाना के मामले में कर रहे हें । चित्त भी मेरी पत्त  भी मेरी का खेल …कुल मिला कर देश को नुकसान दायक है । 

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'आप' देखती रह गई, कांग्रेस-बीजेपी ने छीनी स्पीकर की शक्तियां

नवभारतटाइम्स.कॉम | Feb 14, 2014
नई दिल्ली
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/30380011.cms?google_editors_picks=true&google_editors_picks=true
अब तक बीजेपी और कांग्रेस को सड़क की राजनीति में मात देने वाली आम आदमी पार्टी (आप) को इन दोनों पार्टियों ने विधानसभा की रणनीति में करारी मात दी है। विधानसभा की कार्यवाही में 'आप' की अनुभवहीनता का फायदा उठाते हुए कांग्रेस और बीजेपी ने गुरुवार को एक ऐसा प्रस्ताव पास करा दि,या जिससे असेंबली में स्पीकर की सारी शक्तियां ही खत्म हो गईं। सबसे अजीब बात यह रही कि जब यह प्रस्ताव लाया जा रहा था को न तो 'आप' विधायकों और न ही स्पीकर एम. एस. धीर ने इसका विरोध किया और न ही इस प्रस्ताव का मतलब समझ सके। यहां तक कि 'आप' विधायकों ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोटिंग न करके एक तरह से इसका समर्थन कर दिया।

विधानसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस मंशा पर बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर पानी फेर दिया, जिसमें वह कह रहे थे कि अगर जन लोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगे। विधानसभा में कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर ऐसी रणनीति बनाई, जिसके चक्रव्यूह में वह फंसते नजर आए। कार्यवाही के दौरान स्पीकर कई बार मदद और रणनीति के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर देखते दिए। गुरुवार को असेंबली में भारी हंगामा भी हुआ और कई बार कार्यवाही स्थगित भी करनी पड़ी।

विधानसभा में कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली ने नियम 293 को सस्पेंड करने का प्रस्ताव रखा। इस नियम के तहत स्पीकर के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही सदन ने नियम नियम 277 व 278 को भी सस्पेंड कर दिया। इन नियमों के तहत स्पीकर को सदन में शांति बनाए रखने और किसी भी विधायक को सदन से बाहर निकालने का अधिकार है। इन प्रस्तावों के पारित होने से असेंबली में स्पीकर की सर्वोच्च स्थिति ही खत्म हो गई।
प्रस्ताव लाने वाले कांग्रेस के नेता अरविंदर सिंह लवली के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने अब तक विधानसभा में शांत रहने और स्पीकर के जरिए काम कराने की रणनीति अपनाई है। यही वजह रही कि कांग्रेस और बीजेपी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

बीजेपी नेता जगदीश मुखी ने इस रणनीतिक जीत के बाद चुटकी लेते हुए कहा कि सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस ही नहीं आम आदमी पार्टी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। जब स्पीकर ने इस प्रस्ताव पर विरोध के लिए आवाज लगाई तो किसी 'आप' विधायक ने कुछ नहीं कहा और यह प्रस्ताव पास हो गया। प्रस्ताव पारित होने के बाद स्पीकर को अहसास हुआ कि उनकी शक्तियां समाप्त हो गई हैं।

विधानसभा की कार्यवाही को समझने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, कांग्रेस और बीजेपी ने आप सरकार को बड़ा झटका दिया है। अविश्वास प्रस्ताव लाने के बजाय उन्होंने स्पीकर की शक्तियां खत्म करने का प्रस्ताव लाकर आप की रणनीति को फेल कर दिया। दिल्ली असेंबली के सचिव रहे ए. के. शर्मा के मुताबिक, स्पीकर के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव विधानसभा के इतिहास की बहुत ही अनूठी और खास घटना थी।