रविवार, 16 फ़रवरी 2014

मनमोहन ने सबसे भ्रष्ट सरकार का नेतृत्व किया: आडवाणी



 बिना लोक सभा चुनाव जीते, दो बार प्रधान मंत्री बनाने की यह क़ाबलियत है।
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मनमोहन ने सबसे भ्रष्ट सरकार का नेतृत्व किया: आडवाणी
नवभारत टाइम्स | Feb 16, 2014,
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/30527131.cms
नई दिल्ली बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर करारा हमला बोला। ब्लॉग में आडवाणी ने लिखा कि मनमोहन सिंह का एक दशक का कार्यकाल खत्म होने को है और उन्होंने स्वतंत्र भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार का नेतृत्व किया। आडवाणी ने लिखा, मनमोहन ने अपने कार्यकाल की शुरुआत साफ निजी छवि के साथ की।

लेकिन अब जब उनका एक दशक लंबा कार्यकाल खत्म होने के करीब है, वह अपने पीछे स्वतंत्र भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार का नेतृत्व करने का रेकॉर्ड छोड़ जाएंगे। आडवाणी ने यूपीए सरकार पर आरोप लगाया कि उसने संसद की गरिमा को सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। बीजेपी नेता ने इसके लिए लोकसभा में 13 फरवरी को घटी उस घटना का जिक्र किया जिसमे तेलंगाना के विरोध में एक सांसद ने लोकसभा में मिर्च स्प्रे कर दिया था।

इस वाकये को कैश फॉर वोट से जोड़ते हुए आडवाणी ने लिखा कि मिर्च स्प्रे करने की घटना उतनी ही शर्मनाक है जितनी कि कैश फॉर वोट थी। आडवाणी ने कहा, मैं मानता हूं कि यूपीए-1 के दौरान सामने आया कैश फॉर वोट कांड सबसे शर्मनाक घोटाला था। भारतीय संसद की गरिमा के लिए यूपीए-2 के दौरान हाल में संसद में जो स्थिति पैदा हुई वह कम शर्मनाक नहीं है। इस दिन अधिकांश सदस्य यह देख कर हैरान थे कि आधे दर्जन मंत्री सदन में प्रधानमंत्री और सोनिया जी की मौजूदगी को नजरअंदाज कर रहे थे और स्पीकर के आसन के पास जाकर हंगामे में शामिल हुए।

अफगान चुनावों में दखल न दे अमेरिका: करजई



 अमरीका कि यह नीति गलत हे कि वह अपने हितों की सरकार बनाने के लिए हर देश में टांग अड़ाने पहुच जाता हे ! हाल ही में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने अमेरिका से राष्ट्रपति चुनावों में 'हस्तक्षेप' नहीं करने को कहा है !! यह तो वो व्यक्ती कह रहा है जिसे उसने ही बनवाया था । उनका क्या हल होता होगा जिनका अमरीका खुलेआम दुश्मन मानता है ॥ 

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 अफगान चुनावों में दखल न दे अमेरिका: करजई
भाषा | Feb 16, 2014, 

http://navbharattimes.indiatimes.com
कंधार द्विपक्षीय सुरक्षा सहमति पर ओबामा प्रशासन से मतभेदों के बीच अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने अमेरिका से राष्ट्रपति चुनावों में 'हस्तक्षेप' नहीं करने को कहा है। 56 वर्षीय करजई ने कहा कि उनकी सरकार 5 अप्रैल को चुनाव कराएगी। मैं उम्मीद करता हूं कि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी चुनाव में दखलंदाजी से बचेंगे और अफगान नागरिकों को अपना राष्ट्रपति चुनने देंगे।' करजई ने भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के साथ अफगानिस्तान के पहले कृषि विश्वविद्यालय का उद्‌घाटन करने के बाद यह बात कही।

करजई नहीं हैं दौड़ में
करजई तीसरी बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में नहीं हैं। इस रेस में उनके बड़े भाई कयूम करजई, पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला और पूर्व इस्लामिस्ट अब्दुल रसूल सयाफ हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा सुरक्षा सहमति पर दस्तखत करने से इनकार करने की वजह से अमेरिका से रिश्तों में खटास आ गयी है। करजई ने दस्तखत नहीं करने के अपने रुख पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा, 'मैं 2014 के बाद अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों की सीमित मौजूदगी के खिलाफ नहीं हूं। हमारी मांग है कि उनकी मौजूदगी अफगानिस्तान के लिए सहयोग का स्रोत बननी चाहिए। एक ऐसा स्थिर अफगानिस्तान जहां पिछले 10 साल की तरह की घटनाएं नहीं हों।'

करजई को उम्मीद, भारत से जुड़ने का रास्ता देगा पाक हामिद करजई को उम्मीद है कि सड़क मार्ग से भारत और अफगानिस्तान को जोड़ने के लिए पाकिस्तान रास्ता देगा। व्यापार की जरूरतों पर जोर देते हुए करजई ने कहा कि विकास और स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच ऐसा मार्ग बनना चाहिए। उनके अनुसार, 'मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान भारत से जुड़ने के लिए रास्ता देगा।'