मंगलवार, 20 मई 2014

संघ का विश्वास : जनाकांक्षाओं को पूर्ण करेगी नई सरकार





संघ का विश्वास : जनाकांक्षाओं को पूर्ण करेगी नई सरकार
सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्या) जी जोशी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्या) जी जोशी ने विश्वास व्यक्त किया है परिवर्तन की आकांक्षा व्यक्त करने वाले करोड़ों देशवासियों की भावनाओं एवं अपेक्षाओं की पूर्ति करने में नव निर्वाचित सरकार सफल सिद्ध होगी. उन्होंने 16 मई को समस्त देशवासियों और नव निर्वाचित सरकार का हार्दिक अभिनंदन करने के लिये अपना प्रेस वक्तव्य जारी किया.

सरकार्यवाह ने आशा व्यक्त की “ हम सभी के सहयोग से वैचारिक सामाजिक और धार्मिक भिन्नताओं से ऊपर उठकर भेदभाव और विषमतापूर्ण व्यवहार से मुक्त होकर शोषणमुक्त और समरस समाज निर्मिति की दिशा में एकात्म भाव बनाये रखने में नवनिर्वाचित सरकार सफल सिद्ध होगी.”

अपने वक्तव्य में श्री जोशी ने अपने आशा और विश्वास में यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में सरकार की भूमिका निश्चित ही महत्वपूर्ण होती है, किंतु हमें विश्वास रखना होगा कि परिवर्तन की प्रक्रिया की अपनी एक गति होती है और परिवर्तन सरकार, प्रशासन, सभी राजनैतिक दल, जनसामान्य, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से ही संभव है.

सरकार्यवाह ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही सभी लोग सामान्य सौहार्दपूर्ण वातावरण निर्माण करने का सकारात्मक प्रयास करेंगे. श्री जोशी ने कहा कि निर्वाचन के कालखंड में विचारों का खंडन-मंडन, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप स्वाभाविक है किंतु वे सभी से विनम्र प्रार्थना करना चाहेंगे कि समस्त देशवासियों ने आज तक जिस संयम का परिचय दिया है, ऐसा ही सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में सभी लोग अपनी भूमिका निभायें.

उन्होंने कहा कि वर्तमान में संपन्न लोकसभा चुनाव में समस्त देशवासियों ने सारे विश्व के सम्मुख स्वस्थ लोकतंत्र का उदाहरण प्रस्तुत किया है, यह अभिनंदनीय है. हम सभी के लिये यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि चुनाव प्रक्रिया सामान्यत: संयम, शांति एवं जागृतता के साथ संपन्न हुई. इसमें सहभागी सभी राजनैतिक दलों के हजारों कार्यकर्ता, निर्वाचन में सहभागी सभी दलों के सैकड़ों प्रत्याशी, प्रसार माध्यम, प्रशासन तथा सुरक्षा तंत्र, इन सब की भूमिका संतोषजनक रही है
Source vskbharat.com

नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिया सरकार बनाने का न्योता



नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिया सरकार बनाने का न्योता, 26 को लेंगे शपथ
20 मई  2014
http://khabar.ndtv.com/news/election/narendra-modi-to-become-indias-prime-minister-on-may-26-388850?update=1400585807
नई दिल्ली: बीजेपी के बाद एनडीए ने नरेंद्र मोदी को आम राय से संसदीय दल का नेता चुन लिया, जिसके बाद एनडीए के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर 335 सासंदों के समर्थन का पत्र राष्ट्रपति को सौंप सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद राष्ट्रपति से नरेंद्र मोदी मिलने पहुंचे, जहां उन्होंने नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने का न्योता दिया। अब नरेंद्र मोदी 26 मई को शाम 6 बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण समारोह में 3000 मेहमान शिरकत करेंगे।
संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद मोदी ने अपने एनडीए के सहयोगियों से कहा कि यह सरकार सब की है। सबको मिलकर सरकार चलानी है।

उन्होंने आंध्र प्रदेश से आए चंद्रबाबू नायडु का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पूर्ण बहुमत से चुने जाने पर बधाई। शिव सेना प्रमुख ने मोदी से कहा कि पूरा महाराष्ट्र आपके साथ है। वहीं तमाम एनडीए के अन्य दलों के नेताओं को भी मोदी ने धन्यवाद दिया।

बीजेपी संसदीय दल की बैठक में आज बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव किया, जिसका मुरली मनोहर जोशी, वेेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, करिया मुंडा, अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद और मुख्तार अब्बास नकवी ने अनुमोदन किया, जिसके बाद मोदी आम राय से बीजेपी संसदीय दल के नेता चुन लिए गए।

नरेंद्र मोदी आज पहली बार संसद भवन पहुंचे थे। वहां पहुंचकर उन्होंने पहले सीढ़ियों पर माथा टेका और फिर आगे बढ़े।

अब बात उस मंत्रिमंडल की, जो गुजरात भवन से लेकर केशव कुंज और राजनाथ सिंह के घर तक बनाया जा रहा है। हालांकि यह बनेगा सिर्फ एक शख्स के इशारे पर और वह हैं नरेंद्र मोदी। वह जिसे चाहेंगे, वह मंत्री होगा। उनके पास एक विराट बहुमत है। 282 सीटें बीजेपी की हैं और एनडीए के बाकी दो दर्जन दलों से ज्यादा दलों की कुल साढ़े तीन दर्जन से कुछ ज्यादा सीटें।

ऐसा विराट बहुमत काम आसान भी करता है और मुश्किल भी। मोदी जिसे चाहें चुन लें, लेकिन जिसे छोड़ेंगे वह कुछ दुखी होगा। सवाल यह भी है कि उनकी सरकार में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं की नुमाइंदगी करने वाले चेहरे कौन होंगे। फिलहाल यह बताया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी गृह मंत्रालय भी अपने पास रख सकते हैं, हालांकि बताया जा रहा है कि राजनाथ सिंह भी यह महकमा चाहते हैं, लेकिन अगर वे सरकार में शामिल हुए तो उन्हें रक्षा मंत्रालय दिया जा सकता है। वैसे पार्टी के भीतर कैबिनेट को लेकर ऐसी अटकलों पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

वित्त मंत्रालय को लेकर अरुण शौरी और अरुण जेटली का नाम सामने आ रहा है। हालांकि शौरी को शामिल करने पर मोदी को विरोध झेलना पड़ सकता है।

संकल्प पूरा, सफर शुरू - पाञ्चजन्य




संकल्प पूरा, सफर शुरू
तारीख 17 May 2014
http://www.panchjanya.com
पाञ्चजन्य से साभार 
यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। 16 मई को देश के16वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी के नाम पर स्पष्ट बहुमत की मुहर लगाने वाले 16वीं लोकसभा चुनाव के नतीजों ने जहां चुनावी पंडितों के कयासों को कमोबेश सही साबित किया वहीं राजनीतिक दलों के बड़े बड़े नेताओं के आंकड़े धराशायी कर दिए। आजादी के बाद के शायद सबसे अहम रहे इन चुनावों पर देशी.विदेशी मीडिया पैनी नजर गढ़ाए थाए क्योंकि ये चुनाव उस यूपीए के कालिख पुते 10 साल के शासन से त्रस्त भारत की जनता के भाग्य का फैसला करने वाले थे। 16 मई की सुबह 8 बजे से ईवीएम के आंकड़े जहां भाजपा और राजग की उत्तरोत्तर बढ़त दिखाते गए वहीं कांग्रेस इतिहास में अपनी शर्मनाक पराजय की ओर बढ़ती गई। गठबंधन की बात करें तो भाजपा नीत राजग तमाम रिकार्ड तोड़ते हुए आगे बढ़ता गया तो कांग्रेस नीत यूपीए पानी पानी होता गया। आंकड़े देखें तो 16 मई की देर रात तक आए नतीजों और रुझाानों को मिलाकर भाजपा अकेले अपने दम पर 288 सीट जीत चुकी थी और कांग्रेस 50 से भी कम यानी 44 सीटें ही जीत पाई थी।
लहर तो थी। बेशक। श्अच्छे दिन आने वाले हैंश् और श्अबकी बार मोदी सरकारश् के नारे भारत के गली.चौबारों से कस्बों.देहातों और शहरों के मॉल.स्टालों तक ऐसे छाये कि बच्चे बच्चे की जुबान पर श्अबकी बारण्ण्ण्ण्श् ही सुनाई देता था। सोशल मीडिया ने अपना जादुई असर दिखाया। चुनावी संदेश पलक झपकते लाखों मोबाइलों से होते हुए सात समंदर पार तक पहंुचे। मोदी का तिलिस्म सबको लुभाता गया और विकास के पर्याय की उनकी छवि ने देश के करोड़ों युवाओं के दिल में घर कर लिया। मोदी.मंत्र देश में आसेतु हिमाचल गूंजने लगा और इसी का नतीजा है कि लद्दाख से कन्याकुमारी तक और कच्छ से कामरूप तक भाजपा की जबरदस्त आंधी चली जिसमें हर क्षेत्र केए हर प्रांत के विपक्षी दिग्गज ढह गएए गढ़ों में सेंध लगी और किले ताश के महलों की मानिंद भरभराकर औंधे मुंह जा गिरे।
महाराष्ट्र में शरद पवार हों या चव्हाणए सबकी चाल उल्टी पड़ी। भाजपा की आंधी से वहां की कांग्रेस.राकांपा सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कुल 48 सीटों में से भाजपा ने 23 और साथी शिवसेना ने 18 सीटें जीतकर राकांपा को 4 और कांग्रेस को 2 सीट पर समेट दिया। उत्तर प्रदेश में तो आगे पीछे के तमाम रिकार्ड टूट गए। राज्य की 80 सीटों में से भाजपा ने 71सीटें पाईं तो कांग्रेस राहुल और सोनिया की 2 ही सीटें जीत पाई। केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की तो बताते हैं जमानत ही जब्त हो गई। बिहार ने तो बड़बोले नीतीश कुमार को चेहरा दिखाने लायक ही नहीं छोड़ा। खुद को मुस्लिमों का रहनुमा दिखाने की झौंक में भाजपा और खासकर मोदी पर बेबुनियाद आरोप लगाने वाले नीतीश की जदयू को 2 सीटें मिलीं जबकि भाजपा 22 और उसकी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी को 6 सीटें हासिल हुई हैं। भाजपा की एक और सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को 3 सीटें मिलीं। कांग्रेस को बिहार ने 2 सीटों पर ही समेट दिया। तमिलनाडु में भाजपा का पहली बार खाता खुला और उसने कन्याकुमारी की एक सीट जीती है। जम्मू.कश्मीर में अलगाववादी नारे उछालने वाले फारुख और उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला की बेहद किरकिरी हुई। उनकी पार्टी नेशनल कांफें्रस का खाता भी नहीं खुला जबकि भाजपा ने वहां 6 में से 3 सीटें जीतीं। दिल्लीए राजस्थानए गोवा और गुजरात में तो मोदी का जादू साफ झलकाए जहां भाजपा ने सभी सीटें जीतकर रिकार्ड बनाया। कहना न होगाए 2014 का यह जनादेश भाजपा के उस संकल्प को मिला है जो उसने अपने घोषणापत्र में स्पष्ट लिखा और चुनावी रैलियों में देशभर के मतदाताओं से किया हैए जो है सबका साथए सबका विकास। भारत को सुराज की आस हैए अच्छे दिनों की प्रतीक्षा है। सफर शुरू हो गया है। आगे के पृष्ठों पर प्रस्तुत हैं भाजपा द्वारा जीती सीटों के क्षेत्रवार आंकड़े।
. पाञ्चजन्य ब्यूरो.
आवरण कथा संबंधित रू उत्तर भारत
केन्द्र में सरकार बनाने के लिए प्रत्येक लोकसभा चुनाव में उत्तर भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उत्तर प्रदेश और बिहार दो ऐसे राज्य हैं जिन्होंने 2014 के चुनाव में भाजपा को रिकॉर्ड तोड़ सीटें देकर मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक वापसी की है। पार्टी को 80 में से 73 सीटें मिली हैं। बिहार में 31 और झारखंड में 13ए हिमाचल प्रदेश में सभी 4ए उत्तराखंड की सभी 5 और जम्मू.कश्मीर में 3 सीटों पर विजय प्राप्त करने के साथ चंडीगढ़ की एक सीट पर भी केसरिया ध्वज फहराया। पंजाब में भाजपा को 2 सीटें मिलीं और उससे भी बड़ा दुखद यह रहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली को अमृतसर से पराजय का मुंह देखना पड़ा।

आवरण कथा संबंधित रू पूर्वी भारत
देशभर में चली केसरिया बयार से पूर्वी भारत का हिस्सा भी अछूता नहीं रहाए लेकिन उस अनुपात में भाजपा को सीटें प्राप्त नहीं हो सकी। इस क्षेत्र के अंतर्गत पश्चिम बंगालए ओडिशा और असम सहित पूर्वोत्तर के राज्यों के कुल 88 लोकसभा क्षेत्रों में से भाजपा को 11 स्थान और सहयोगी दल को 2 सीटें मिली हैं। ओडिशा.1ए असम.7 और अरुणाचल प्रदेश में 1 सीट मिली हैं।
नेतृत्व में देशभर में भारतीय जनता पार्टी की विजय भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान की विजय है और देश की युवाशक्ति की विजय है। पण् बंगाल को केन्द्र सरकार से क्या अपेक्षा होगी यह तो नहीं कह सकते किन्तु 2016 में हम राज्य विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार जरूर देखना चाहेंगे।

आवरण कथा संबंधित रू मध्य भारत
मध्य भारत में भाजपा ने केसरिया लहर के साथ 82 में से 76 लोकसभा सीटें जीतकर अपूर्व विजय प्राप्त की। ;हरियाणा.7ए राजस्थान.25ए मध्यप्रदेश.27ए छत्तीसगढ़.10 और दिल्ली.7द्ध हरियाणा में भाजपा के अलावा कांग्रेस को एक और इनेलो को 2 सीटें प्राप्त हुई हैं। दिल्ली में सभी 7 सीटों पर भाजपा का परचम लहराया है।
मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री अवश्य थेए किन्तु दबदबा राहुल व सोनिया का था। इन दोनों का देश की रीति.नीति से कोई लेना.देना नहीं थाए जनता नाराज थीए 1977 में भी इतना बुरा हश्र नहीं हुआ था कांग्रेस का। देश की राष्ट्रीय पार्टी भाजपा को नरेन्द्र मोदी के रूप में ऐसा नेता मिला है जो जनआशाओं का केन्द्र बन गए। भारतीय जनता पार्टी के विषय में बात हो रही थी कि यह कांग्रेस का मुकाबला नहीं करेगीए किन्तु इन चुनावों में पार्टी के संगठनए मोदी जी के कुशल नेतृत्व ने चित्र ही बदल डाला।
डॉण् राजकुमार भाटियाए
अध्यक्ष एनडीटीएफ

आवरण कथा संबंधित रू पश्चिमी भारत
पश्चिमी भारत में भाजपा ने 81 में 73 सीटें जीतीं। इनमें गुजरात की सभी 26 सीटेंए महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ की 43 सीटों पर जीत मिली है। गोवा में 2ए दमन.दीव में एक और दादरा.नगर हवेली में एक सीट पर जीत मिली है।

मैं आशा करता हूं कि विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे और युवा वर्ग के लिए नई पहल होगी।
-देवेन्द्रनाथ मिश्र
वरिष्ठ साहित्यकारए मुम्बई, महाराष्ट्र

परिणाम बताते हैं कि भारत की जनता ने दिल से मतदान किया था। उनके लिए अब शायद देश ज्यादा मायने रखता है एक परिवार नहीं। ये देश जागरूक हो चुका है और अब नेताओं की चिकनी चुपड़ी बातों में आने वाला नहीं।
-सुनील स्लेथिया, ब्यूरो चीफ pनून कश्मीर

आवरण कथा संबंधित रू दक्षिण भारत
दक्षिण भारत में मोदी लहर के आगे जाति व पंथ को नकारकर लोगों ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रति अपना विश्वास जताया है। कर्नाटक की 28 सीटों में से भाजपा ने 17 सीटों पर जीत का परचम लहराकर साबित कर दिया है कि देश का यह हिस्सा भी भाजपा की लहर से अछूता नहीं है। तेलंगाना में 17 सीटों में से 11 सीटों पर टीआरएस ने बाजी मारी हैए जबकि तेदेपा.भाजपा गठबंधन को 2 संसदीय क्षेत्रों में विजय प्राप्त हुई है। भाजपा ने 2 संसदीय और 4 विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज की है। तेदेपा को सीमांध्र में 25 में से 15 लोकसभा सीटें प्राप्त हुईं हैं। जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी को 8 सीटें प्राप्त हुई हैं। नरेन्द्र मोदी की व्यापक लोकप्रियता से यह क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा।

अंधेरा छंट चुका हैए कमल खिल चुका हैए तुष्टीकरणण्ण्ण् वंशवादए भ्रष्टाचारियों को मुंहतोड़ जवाब देने वाली भारत की जनता को शत.शत नमन। श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए और भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक विजय संकेत करती है कि जनता क्या चाहती है। हम सभी उम्मीद करते हैं कि अच्छे दिन आने वाले हैंण्ण्ण् जय जनता जनार्दन।
-सुशील पाठक, उज्जैन, मध्य प्रदेश

समस्त कानूनी व्यवस्थाओं के बावजूद आज जीवन के हर क्षेत्र में महिलायें अपने आपको असुरक्षित महसूस करती हैं ! आम महिलाओं की जहां एक ओर दामिनी जैसे कांड व दहेज की आग से रूह कंपकपाती है तो दूसरी ओर कन्या भ्रूण हत्या व स्वास्थ्य सम्बंधी मसलों में भी वह यातनाएं झेलती है इसीलिए आदरणीय मोदी जी को हार्दिक बधाई देते हुए आज हर नारी उन्हें कृष्णावतार के रूप में देखना चाहती है जो उनके कष्टों के निवारण करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे और उन्हें अपने जीवन उत्थान करने के लिए सबल बनाएंगे !
- सुनीता शर्मा, लेखिकाए गाजियाबाद


आदि-अनादि संवाददाता नारद - रमेश शर्मा




आदि-अनादि संवाददाता नारद
तारीखर 17 may 2014 1
- रमेश शर्मा
http://www.panchjanya.com
कुछ विधाएं ऐसी होती हैं, जो कालजयी होती हैं। समय और परिस्थितियां उनकी जरूरत व महत्व को प्रभावित नहीं कर पातीं। बस उनका नाम और रूप बदलता है। कहने.सुनने या उन्हें इस्तेमाल करने का अंदाज बदलता हैए लेकिन उनका मूल तत्व नहीं बदलता। पत्रकारिता ऐसी ही विधा है। पत्रकारिता करने वालों को पत्रकार कहेंए संवाददाता कहें अथवा मीडियाकर्मी। यह नाम समय के बदलाव और तकनीक के विकास के कारण बदले। जब संचार के आधुनिक साधन नहीं थे या संवाद संप्रेषण के लिये कागज.कलम का प्रयोग नहीं होता था तब तक इस विधा से जुड़े लोग संवाददाता ही कहलाते थे। अपनी भावनाओंए अपनी जरूरतों या अपने अनुभव का संदेश देना और दूसरे से संदेश लेना प्रत्येक प्राणी का प्राकृतिक गुण व स्वभाव है। अब वह ध्वनि में हो या संकेत मेंए सभी प्राणी ऐसा करते देखे जाते हैं। मनुष्य ने अपना विकास किया। उसने ध्वनि को पहले स्वर में बदला फिर शब्दों में और शब्दों को संवाद में। वह संवाद संप्रेषण करता है और ग्रहण भी। जीवन का दायरा बढ़ने के साथ संदेशों की जिज्ञासाएं भी बढ़ीं और आवश्यकताएं भी।
महर्षि नारद इसी आवश्यकता की पूर्ति करने वाले पहले संवाददाता प्रतीत होते हैं। हो सकता है उनसे पहले स्थानीय या क्षेत्रीय स्तर पर कुछ संवाददाता रहे होंए किंतु उनका उल्लेख नहीं मिलता। एक संवाददाता के रूप में पहला उल्लेख केवल नारद जी का ही मिलता है। उनका संपर्क संसार के हर कोने मेंए हर प्रमुख व्यक्ति से मिलता है।
भारतीय वांगमय की ऐसी कोई पुस्तक नहीं जिसमें उनका जिक्र न हो। प्रत्येक पुराण कथा में नारद जी एक महत्वपूर्ण पात्र हैं। वे घटनाओं को केवल देखते भर नहीं हैंए बल्कि उन्हें एक सकारात्मक और सृजनात्मक दिशा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं। संसार में घटने वाली हरेक घटना एवं व्यक्ति का विवरण उनकी जिह्वा पर होता है। वे हर उस स्थान पर दिखाई देते हैंए जहां उनकी जरूरत होती है। वे कहीं जाने के लिये आमंत्रण की प्रतीक्षा नहीं करते और न संवाद संप्रेषण के लिये किसी प्रेस.नोट की। वे अपनी शैली में संवाद तैयार करते हैं और संप्रेषित करते हैं। उनका कोई भी संवाद निरर्थक नहीं होता। हरेक संवाद सार्थक है और समाज को दिशा देने वाला। उनकी प्रत्येक गतिविधि प्रत्येक क्रिया आज भी सार्थक है और सीखने लायक।
नारद जी के बारे में माना जाता है कि कभी किसी स्थान पर रुकते नहीं थेए सदैव भ्रमणशील रहते थे। इसका संदेश है कि पत्रकारों अथवा मीडियाकर्मियों को भी सदैव सक्रिय रहना चाहिये। समाचार या संवाद के लिये किसी एक व्यक्ति अथवा एक स्थान पर निर्भर न रहें। आज के मीडिया में विसंगतियां केवल इसलिये हैं कि मीडियाकर्मी अधिकांश समय पार्टी मुख्यालयए शासन मुख्यालय अथवा प्रवक्ताओं पर आश्रित रहते हैं। उनके अपने संवाद सूत्र कम होते हैं। बड़े.बड़े स्टिंग ऑपरेशन अथवा घोटालों का भंडाफोड़ भी इसलिये हो पाया कि पत्रकारों ने उनसे संपर्क किया। लेकिन नारद जी के मामले में ऐसा नहीं था। उनकी दृष्टि की तीक्ष्णता अथवा श्रवण शक्ति की अनंतता का आशय है कि विभिन्न क्षेत्रों में उनके सूत्र कायम रहे होंगे। उनका अपना व्यापक सूचना तंत्र इतना तगड़ा रहा होगा कि उन्हें प्रत्येक महत्वपूर्ण सूचना समय पर मिल जाती थी। नारद जी का समय.समय पर नैमिषारण्य में ऋषियों की सभा मेंए कैलाश पर शिव के ज्ञान सत्संग में जानेए पुलस्त्य से अभिराम ;परशुरामद्ध कथा गरुड़ से रामकथा सुनने में तप करने के प्रसंग मिलते हैं। इन प्रसंगों का संदेश है कि मीडियाकर्मियों को अपने लिये निर्धारित कार्यों के बीच में समय निकालकर स्वयं के लिये ज्ञानार्जन का काम भी करना चाहिये। तप करने का अर्थ कुछ दिनों के लिये थोड़ा हटकर ध्यान हो सकता है। हम अपने सीमित ज्ञान से असीमित काम नहीं कर सकते। जिस प्रकार कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर को डाटा अपडेशन की जरूरत होती हैए ठीक उसी प्रकार हमारे मस्तिष्क को भी ताजी जानकारियोंए बदली परिस्थिति के अनुरूप स्वयं को अपडेट करने की जरूरत होती है। जिन पत्रकारों ने ऐसा नहीं किया वे आउट ऑफ डेट हो गए। नारद युगों तक इसलिये प्रासंगिक रहे कि ऋषियों के पास जाकर स्वयं को अपडेट करते रहे। ऋषियों के पास जाने से उन्हें दोहरा लाभ मिलता था। एक तो वे ज्ञान विज्ञान की दृष्टि से अपडेट होते थे दूसरा उन्हें संसार की सूचनाएं मिलती थीं। उस युग में ऋषि आश्रम सामाजिक गतिविधियोंए संस्कारए शिक्षा और व्यवस्थात्मक मार्गदर्शन का केन्द्र होते थे।
आज भी ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास अनुभव हैए वे चलती.फिरती संस्थाएं हैं और उनका जनसंपर्क बहुत है। यदि मीडियाकर्मी उनसे मिलेंगेए कुछ समय उनके साथ बिताएंगे तो सूचनाएं मिलेंगी। समाचार के नये विचार मिलेंगे और अनुभव का लाभ अलग से मिलेगा। इसी तरह आज की भागदौड़ से भरे जीवन में बहुत तनाव हैए प्रतियोगिता हैए जिससे तनाव होता है। इसका निराकरण ध्यान से होता हैए जो उस युग में तप के रूप में जाना जाता थाए जो नारद वद्रिकाश्रम में जाकर करते थे। नारद जी का संपर्क व्यापक था। वे देवों में जाते थे और दैत्यों में भी । वे गंधर्वों के बीच भी जाते और असुर.राक्षसों के पास भी। वे धरती पर मनुष्यों के बीच भी पहुंचते थे एवं नागों.मरुतों के बीच भी। उनका सब समान आदर करते थे। ऐसे उदाहरण तो हैं कि किसी को उनका आना पसंद न थाए लेकिन ऐसा एक भी प्रसंग नहीं है कि कहीं उनका अपमान हुआ हो। इसकी नौबत आने से पहले ही वह वहां से चल देते थे। उनकी इस शैली से आज के मीडियाकर्मियों को संदेश है कि वे अपना संपर्क कायम रखें। कोई भी उन्हें दुश्मन न समझे। यदि किसी के विरुद्ध भी हों तो भी चेहरे सेए भाव.भाषा से न झलके। भावनाएं चाहे जैसी हों लेकिन व्यवहार के स्तर पर सबसे समान व्यवहार करें। सबसे मीठा बोलोए सबको लगना चाहिये कि वे उनके हित की बातें कर रहे हैं। नारद जी के चरित्र से एक बात साफ झलकती है वह ये कि उनका समर्पण ह्यनारायण के प्रति यानी अंतिम सत्यह्ण के प्रति था। वे अधिकांश सूचनाएं नारायण को ही दिया करते थे। उन्हीं का नाम सदैव उनकी जिह्वा पर होता था और उन्होंने नारायण के विरुद्ध षड्यंत्र करने वालों के विरुद्ध योजनापूर्वक अभियान भी चलाया। उनके इस गुण में दो विशेषताएं साफ हैं एक तो उन्होंने नारायण के प्रति अपना समर्पण नहीं भुलाया और दूसरा यह कि जब उन्होंने नारायण के विरोधियों के विरुद्ध अभियान चलाया तो यह तथ्य अंत तक किसी को पता नहीं चला और न उन्होंने इसका श्रेय लेने का प्रयास किया। इसका उदाहरण हम हिरण्यकश्यप के प्रसंग में देख सकते हैं। उनकी पत्नी कयादु को नारद जी ने ही शरण दी। उन्हीं के संरक्षण में प्रह्लाद का जन्म हुआ उन्होंने ही प्रह्लाद को नारायण के प्रति समर्पण की शिक्षा दी। इतना बड़ा अभियान बहुत धीमी गति से वर्षों चला और जब प्रह्लाद के आह्वान पर भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया तब नारद वहां दिखाई नहीं देते। स्वयं श्रेय लेने का प्रयास नहीं करतेए वे लग जाते हैं किसी दूसरे अभियान में। इस प्रसंग में आज के मीडियाकर्मियों या पत्रकारों को संदेश है कि वे सदैव सत्य के संस्थापकों के संपर्क में रहें। सत्य के विरोधी और अहंकारी की ताकत कितनी भी प्रबल क्यों न हो उससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि उसी के बीच से रास्ता निकाला जाता है। यदि कोई अहंकारी हैए अराजक तत्व है जिससे राष्ट्र कोए संस्कृति को और सत्य को हानि हो रही है तब उसके परिवार में घुसकर सूत्र बनानाए संवाद संग्रह करना बड़ी युक्ति और धीरज से होना चाहिये। वह भी श्रेय लेने की लालसा से दूर रहकरए जैसा नारद जी ने किया लेकिन आज उलटा हो रहा है। अराजक तत्वोंए आतंकवादियों या नक्सलवादियों की मीडियाकर्मियों के माध्यम से जितनी सूचनाएं शासन तक जाती हैं उससे ज्यादा उन्हें मिल जाती हैं। यही कारण है कि उनके हमलों से जन सामान्य आक्रांत हो रहा है।
नारद जी की इतनी विशेषताएं होने के बावजूद उनके चरित्र की समाज में नकारात्मक प्रस्तुति की गई है। उन्हें लड़ाने वाला और इधर की बात उधर करने वाला माना जाता है। इसके संभवतरू दो कारण हो सकते हैं। एक तो यह कि भारत लगभग एक हजार वर्ष तक परतंत्र रहा। कोई भी समाज परतंत्र तब रहता हैए जब उस समाज या देश के संस्कारए संगठनए स्वाभिमान और शक्ति समाप्त हो जाये। इसके लिये जरूरी है कि उसे उसकी जड़ों से दूर किया जाये। उसके गौरव प्रतीकों की जानकारी न दी जाये। भारत में योजनापूर्वक भारतीय महापुरुषों कोए गौरव के प्रतीकों को प्रस्तुत किया गया। नारद जी उसमें से एक हैं। विष्णु कर्मेश्वर हैंए योगेश्वर हैंए नीतेश्वर हैंए लेकिन उनके रास के प्रसंगों के अतिरिक्त चर्चा नहीं होती। परशुराम जी के चरित्र को कैसा प्रस्तुत किया जाता है यह किसी से छिपा नहीं है। राम के चरित्र को कल्पना बताया जाता हैए जबकि विदेशी आक्रांताओं को महान कहकर महिमा मंडित किया जाता है। इसका कारण यह हो सकता है कि हम अपने बच्चों को ऐसा चरित्र समझाने से बचना चाहते हैंए जो यश.ऐश्वर्य के साधन अर्जित करने के बजाय 24 घंटे सेवा में लगा रहे। आज की पीढ़ी इस वास्तविकता को समझ रही है और चरित्रों का अन्वेषण करके सत्य सामने ला रही है। नारद जी के चरित्र पर होने वाले कार्यक्रमए संगोष्ठियां इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। नारद जी के भक्तिसूत्र और नीतिसूत्र भी हैं। उनके नीतिसूत्र में राजकाज चलानेए दंड देने आदि की बातंे हैंए जो आज के पत्रकारों को इस बात का संदेश हैं कि वे अपने अध्ययनए अनुभवए और चिंतन के आधार पर कोई ऐसा संदेश समाज को देंए जो आने वाली पीढियों का मार्गदर्शन कर सके । आज के कितने पत्रकार हैं जो अखबार से हटते ही या टीवी चैनल से दूर होते ही अप्रासंगिक हो जाते हैं। इसका कारण यह है कि उनका जीवन अध्ययन कम होता हैए राष्ट्रबोध कम होता है। इसलिये अनुभव परिपक्व नहीं होता। नारद जी जीवन भर अपना काम करने के साथ.साथ अध्ययन भी करते रहे जिससे वे भक्तिसूत्र और नीतिसूत्र तैयार कर सके। हजारों.लाखों वषोंर् बाद भी नारद जी का चरित्र हमारे लिये आदर्श और तकनीक विकास के बावजूद आज के मीडियाकर्मियों के लिये मार्गदर्शक भी है।’