रविवार, 25 मई 2014

देश को राजा नहीं, सेवक मिला : नरेंद्र मोदी




देश को राजा नहीं, सेवक मिला : नरेंद्र दामोदरदास मोदी 
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वह राजनीतिक नहीं हो सकता! गंगा आरती के जरिए काशी की समस्त जनता का कृतज्ञता ज्ञापन। संसद में प्रवेश से पूर्व सीढि़यों पर मस्तक नवाना। सेंट्रल हॉल में संबोधन के वक्त गले का रुंध जाना!! चूंकि इनमें से कोई भंगिमा विशुद्ध राजनीतिक नहीं इसीलिए राजनेता ज्यादा बौखलाए हुए हैं। राजनीति के बारे में सबसे दिलचस्प बात यही है कि यहां कहे से ज्यादा अनकहे की कीमत होती है। लोग वह समझना चाहते हैं जो बोला ही नहीं गया। खूब बोलने वाले का मौन पढ़ा जा रहा है। संस्कारों का सहज प्रकटीकरणए अपनी सांस्कृतिक पहचान को बेहिचक गले लगाना और भावनात्मक पक्ष की अकस्मात झलक यकीनन यह सब राजनीतिक नहीं हो सकता! और इसी वजह से राजनीतिज्ञ डरे हुए हैं।
स्थापित छवि से एकदम उलट। सौम्य, मृदुल, निर्भीक। नरेंद्र दामोदरदास मोदी के व्यक्तित्व का यह पक्ष राजनेताओं की नींद हराम किए है। जो खुलकर भारतीयता को गले लगाता होए अपनी पहचान ना छिपाता हो उसे जनता का ऐसा प्यार-दुलार मिल सकता है! राजनीति के सेकुलर अथवा वामपंथी खेमों ने कभी ऐसी कल्पना भी नहीं की थी।
खासबात यह कि सरकार के नए अगुआ की उपरोक्त हर मुद्रा विरोधियों द्वारा प्रवर्तित उस खांचे को तोड़ती है जो कल तक उन्हें संवेदनहीन, शुष्क और निष्ठुर ठहराती थी। शायद हार से भी ज्यादा इस खांचे का टूटना वर्तमान विपक्षी दलों की हताशा की वजह है। सेकुलर से सर्वहारा तक, गढ़ी हुई परिभाषाएं बिखर गई हैं।
सेकुलर कैंची इस बार समाज को काट नहीं पाईए एक चाय वाले ने वामपंथ को उसकी जगह दिखा दी है। समाज एक ना हो। एक राष्ट्रीय समाज की सोच ना हो। वर्गीय वैमनस्य की दरारें चौड़ी की जाएं। जातियों में संगठित समाज सिर्फ विभाजन को देखे और राजनैतिक अधिकारों की ही बात करे। स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले से अब तक सोच.समझकर बैठाई ऐसी हर जुगत भारतीय लोकतंत्र के इस मोड़ पर आकर विफल हो गई है।
16 वीं लोकसभा के चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी का चमत्कारी उभार वह घटना है जिसने और भी कई आरोपित मान्यताओं को ध्वस्त कर दिया है। भाजपा की वर्गीय पहचानए कांग्रेस का राष्ट्रीय रुतबाए बहुजन समाज पार्टी का निष्ठावान वोट बैंकए समाजवादी पार्टी की मुस्लिम स्वीकार्यताण्ण्ण् मतदाता की मुहर ने वह हर मान्यता खारिज कर दी जो राजनीतिक सुविधाओं के हिसाब से तैयार की गई थी। लेकिन इस मतपर्व से जो बात सबसे मजबूत होकर निकली वह है संस्कारों में पगे समाज की सज्जन शक्ति का जागरण।
बात ठीक हो तो समाज आगे आता हैए साथ देता है। सबका साथए सबका विकास। इस नारे में वयम् राष्ट्रे जाग्रयाम् का राष्ट्रीय भाव भी है और वैश्विक सौमनस्य की वसुधैव कुटुंबकम् जैसी गूंज भी। नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा को प्राप्त हुआ जनसमर्थन बताता है कि पूर्वाग्रह से मुक्त होकर संपूर्ण भारतीय समाज इस देश की बात करने वाले को अपना प्यार देता है।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की अपार सफलता और भाजपा का पूर्ण बहुमत शुभ संकेत तो है किन्तु इस प्यार में भावी सरकार के लिए जनाकांक्षाओं का भारी ज्वार भी है। 67 साल में जो कुछ नहीं हुआ अथवा व्यापक अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ लोगों ने ऐसे विषयों की सूचियां बनानी शुरू कर दी हैं। नई सरकार से एकाएक चमत्कार की उम्मीद करना ज्यादती है। मगर प्यार जताने वाले यह ज्यादती तो जरूर करेंगे। ऐसा नहीं है कि जिसे यह बात समझनी है वह अनभिज्ञ है। देश को ह्यराजाह्ण नहीं सेवक चाहिएए यह बात समझने वाले नरेंद्र मोदी ने शीर्ष पद की ओर कदम रखने के साथ ही खुद को मजदूर नंबर-1 के तौर पर प्रस्तुत कर दिया है।
वैसेए शपथ ग्रहण से पूर्व के उद्बोधन में भावी प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़कर जिस विनम्रता से परिश्रम की पराकाष्ठा दिखाने का संकल्प जताया है उससे लगता है कि उनके पास साफ सोच है और नीयत भी।
सरकार के पास निश्चित ही अपना दृष्किोण और प्राथमिकताएं होंगी। परंतु पाञ्चजन्य के इस अंक में हमने भी जनता की अपेक्षाओं और विशेषज्ञों की राय के अनुरूप शासन की कार्यसूची के महत्वपूर्ण बिंदुओं को उठाने का प्रयास किया है।
भ्रष्टाचारी कथाओं के अंबार और अधूरे कामों के ढेर पर खड़े मजदूर नंबर-1 के लिए काम काफी है। हम और हमारे पाठक निश्चित ही उस मजदूर के साथ खड़े हैं जिसकी भंगिमा पढ़ी जा रही है और जिसे निश्चित ही कुछ कर दिखाना है।

सोमवार से शुरू होगा नरेंद्र मोदी राज : शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को



सोमवार से शुरू होगा नरेंद्र मोदी राज

राष्ट्रपति भवन का विशाल प्रांगण कल शाम उन यादगार लम्हों का साक्षी होगा, जब नरेंद्र मोदी सैकड़ों देशी-विदेशी मेहमानों की मौजूदगी में देश के 15वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे।

नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन तैयार
http://khabar.ndtv.com
नई दिल्ली: भारत के 15 वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह, अतिथियों की सूची के लिहाज से राष्ट्रपति भवन में अब तक अयोजित सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा, जिसमें दक्षेस देशों के नेताओं सहित 4,000 से अधिक लोग शरीक होंगे।

यह पहला अवसर है जब राष्ट्रपति भवन में इतनी अधिक संख्या में लोग जुट रहे हैं, जहां अब तक हुए सबसे बड़े समारोहों, जैसे कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर होने वाले 'जलपान कार्यक्रम' में अधिकतम 1500 से 2,000 अतिथि शरीक हुए हैं।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की प्रेस सचिव ओमिता पॉल ने बताया कि 1990 में चंद्रशेखर और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में हुआ था और उनमें 1,200 से 1,300 अतिथि शरीक हुए थे। ओमिता ने बताया कि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में करीब 4,000 लोगों के जुटने की उम्मीद है, जिनके लिए इंतजाम करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है और हमें ऐसा करते हुए अच्छा लग रहा है। उन्होंने सोमवार के कार्यक्रम की तैयारियों के बारे में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए यह बात कही। सोमवार शाम 6 बजे मोदी का शपथ ग्रहण समारोह है।

ओमिता ने बताया कि मनोनीत प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्यों के कार्यक्रम में शरीक होने के बारे में फिलहाल कोई सूचना नहीं है। ओमिता के मीडिया से बात करने के साथ-साथ मंच की आखिरी तैयारी भी चल रही थी, जहां मोदी और उनके मंत्रिपरिषद को राष्ट्रपति शपथ दिलाएंगे।

कैबिनेट के आकार के बारे में पूछे जाने पर ओमिता ने कहा, 'हमें इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है कि प्रधानमंत्री के साथ कौन-कौन शपथ लेंगे।' उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने प्रांगण में शपथ ग्रहण समारोह की इजाजत दी है, क्योंकि वह हमेशा ही अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, 'यह राष्ट्रपति की कोशिश है कि राष्ट्रपति भवन को जन हितैषी बनाया जाएगा।'

शपथ वाले दिन बारिश होने की संभावना का संकेत देने वाले मौसम पूर्वानुमानों पर ओमिता ने कहा कि वह आशा करती हैं कि कार्यक्रम के दौरान बारिश नहीं होगी, क्योंकि ऐसा होने पर आयोजन 'दरबार हॉल' के अंदर करना होगा, जहां 500 लोगों के ही बैठने की व्यवस्था है और अन्य 400 लोग खड़े हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रांगण तक पैदल नहीं जा सकने वाले लोगों के लिए 12 बग्घी सेवा में लगाई जाएंगी। अतिथियों के प्रांगण स्थित नार्थ कोर्ट, साउथ कोर्ट और सेंट्रल विस्टा में शाम 5 बजे तक बैठ जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों को लेकर थले या मोबाइल फोन आयोजन स्थल के अंदर ले जाने की इजाजत नहीं होगी।

ओमिता ने बताया, 'हमने गर्मी के मौसम के लिए पंखे, पानी आदि कुछ इंतजाम किए हैं।' उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में कहा, 'सूरज की तपिश का आनंद उठाइए और धूप सेंकिए।' वीवीआईपी के आगमन के लिए शाम 5 बजे राष्ट्रपति भवन को जाने वाले सारे रास्ते बंद कर दिए जाएंगे।
यह पहला मौका है जब दक्षेस देशों के शासनाध्यक्ष इस तरह के कार्यक्रम में शरीक हो रहे हैं। ओमिता ने बताया कि यह इस लिहाज से भी पहला मौका है, जब सभी 777 सांसदों को न्योता भेजा गया है, जिनमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं।

सभी राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री, राजनयिक, दूत और अन्य संवैधानिक प्रमुख कार्यक्रम में शरीक होंगे। इसके अलावा 350 पत्रकार भी उपस्थित रहेंगे। निवर्तमान यूपीए 2 कैबिनेट के सदस्यों को भी कार्यक्रम में शरीक होने के लिए आमंत्रित किया गया है।

इंतजार की घड़ियों के दौरान लोगों के मनोरंजन के लिए नौसेना, सेना और वायुसेना के बैंड देशभक्ति गानों की धुन बजाएंगे। इसके बाद शाम पौने पांच बजे से वीवीआईपी के आगमन के बारे में कमेंट्री भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल के रणनीतिक केंद्रों पर एंबुलेंस और चिकित्सकों की टीम भी रखी गई है।

मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए चाक-चौबंद इंतजाम
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता
http://www.livehindustan.com
भव्यता के साथ नफासत भरी मेहमानवाजी के लिए राष्ट्रपति भवन सजधज कर तैयार है। इंतजाम ऐसा कि किसी गलती को कोई गुंजाइश नहीं। हर चीज अपनी जगह पहले से मौजूद, ताकि देश के नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने वाले मेहमानों को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हो।

ऐसा नहीं है कि राष्ट्रपति भवन ने शपथ ग्रहण की तैयारियों के लिए कोई खास एहतियात बरती है। राष्ट्रपति भवन में हर समारोह इसी भव्यता के साथ किया जाता है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की सूचना अधिकारी रही अर्चना दत्ता कहती हैं कि तैयारियों में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है।

शपथ ग्रहण समारोह किस वक्त होगा और कौन-कौन मेहमान शामिल होंगे, यह मनोनीत प्रधानमंत्री तय करता है। शपथ ग्रहण का वक्त और मेहमानों की सूची के बाद राष्ट्रपति भवन की भूमिका शुरू होती है। इनवाइट सेल फौरन सभी मेहमानों को उनके घर पर दावतनामा पहुंचाने में जुट जाता है।

सेरेमोनियल सेल की जिम्मेदारी होती है कि मेहमान किस जगह बैठेंगे और उन्हें गाड़ी से कौन एस्कोर्ट करके उनकी तय सीट तक पहुंचाएगा। यह सब पहले से तय होता है। समारोह में बैठने का इंतजाम मेहमानों की वरिष्ठता और रुतबे को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। इसके लिए प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।

सबसे अहम जिम्मेदारी हाउस होल्ड सेल संभालता है। हाउस होल्ड सेल ही यह तय करता है कि मेहमान कहां नाश्ता करेंगे और उन्हें क्या परोसा जाएगा। नाश्ते के दौरान राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ नेताओं के बैठने के लिए पहले से जगह तय कर दी जाती है।

समारोह में सबसे पहले राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं। मनोनीत प्रधानमंत्री की तरफ से दी गई सूची के आधार पर कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्रियों को शपथ दिलाई जाती है। फिर राष्ट्रपति और पूरी कैबिनेट के साथ फोटो सेशन होता है।

मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए चाक-चौबंद इंतजाम
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता

भव्यता के साथ नफासत भरी मेहमानवाजी के लिए राष्ट्रपति भवन सजधज कर तैयार है। इंतजाम ऐसा कि किसी गलती को कोई गुंजाइश नहीं। हर चीज अपनी जगह पहले से मौजूद, ताकि देश के नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने वाले मेहमानों को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हो।

ऐसा नहीं है कि राष्ट्रपति भवन ने शपथ ग्रहण की तैयारियों के लिए कोई खास एहतियात बरती है। राष्ट्रपति भवन में हर समारोह इसी भव्यता के साथ किया जाता है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की सूचना अधिकारी रही अर्चना दत्ता कहती हैं कि तैयारियों में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है।

शपथ ग्रहण समारोह किस वक्त होगा और कौन-कौन मेहमान शामिल होंगे, यह मनोनीत प्रधानमंत्री तय करता है। शपथ ग्रहण का वक्त और मेहमानों की सूची के बाद राष्ट्रपति भवन की भूमिका शुरू होती है। इनवाइट सेल फौरन सभी मेहमानों को उनके घर पर दावतनामा पहुंचाने में जुट जाता है।

सेरेमोनियल सेल की जिम्मेदारी होती है कि मेहमान किस जगह बैठेंगे और उन्हें गाड़ी से कौन एस्कोर्ट करके उनकी तय सीट तक पहुंचाएगा। यह सब पहले से तय होता है। समारोह में बैठने का इंतजाम मेहमानों की वरिष्ठता और रुतबे को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। इसके लिए प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।

सबसे अहम जिम्मेदारी हाउस होल्ड सेल संभालता है। हाउस होल्ड सेल ही यह तय करता है कि मेहमान कहां नाश्ता करेंगे और उन्हें क्या परोसा जाएगा। नाश्ते के दौरान राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ नेताओं के बैठने के लिए पहले से जगह तय कर दी जाती है।

समारोह में सबसे पहले राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं। मनोनीत प्रधानमंत्री की तरफ से दी गई सूची के आधार पर कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्रियों को शपथ दिलाई जाती है। फिर राष्ट्रपति और पूरी कैबिनेट के साथ फोटो सेशन होता है।


राष्ट्रपति भवन मोदी के शपथ ग्रहण के लिए तैयार

नई दिल्ली, एजेंसी
http://www.livehindustan.com/news

भारत के 15 वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह, अतिथियों की सूची के लिहाज से राष्ट्रपति भवन में अब तक अयोजित सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा, जिसमें दक्षेस देशों के नेताओं सहित 4,000 से अधिक लोग शरीक होंगे।

यह पहला अवसर है जब राष्ट्रपति भवन में इतनी अधिक संख्या में लोग जुट रहे हैं, जहां अब तक हुए सबसे बड़े समारोहों, जैसे कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर होने वाले जलपान कार्यक्रम में अधिकतम 1500 से 2,000 अतिथि शरीक हुए हैं।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की प्रेस सचिव ओमिता पॉल ने बताया कि 1990 में चंद्रशेखर और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में हुआ था तथा 1,200 से 1,300 अतिथि शरीक हुए थे।

ओमिता ने बताया कि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में करीब 4,000 लोगों के जुटने की उम्मीद है, जिनके लिए इंतजाम करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है और हमें ऐसा करते हुए अच्छा लग रहा है। उन्होंने कल के कार्यक्रम की तैयारियों के बारे में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए यह बात कही। कल शाम 6 बजे मोदी का शपथ ग्रहण समारोह है।

ओमिता ने बताया कि मनोनीत प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्यों के कार्यक्रम में शरीक होने के बारे में फिलहाल कोई सूचना नहीं है। ओमिता के मीडिया से बात करने के साथ़़ साथ मंच की आखिरी तैयारी भी चल रही थी जहां मोदी और उनके मंत्रिपरिषद को राष्ट्रपति शपथ दिलाएंगे।

कैबिनेट के आकार के बारे में पूछे जाने पर ओमिता ने कहा कि हमें इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है कि प्रधानमंत्री के साथ कौन कौन शपथ लेंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने प्रांगण में शपथ ग्रहण समारोह की इजाजत दी है क्योंकि वह हमेशा ही अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी का समर्थन करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपति की कोशिश है कि राष्ट्रपति भवन को जन हितैषी बनाया जाएगा। कल बारिश होने की संभावना का संकेत देने वाले मौसम पूर्वानुमानों पर ओमिता ने कहा कि वह आशा करती हैं कि कार्यक्रम के दौरान बारिश नहीं होगी क्योंकि ऐसा होने पर आयोजन दरबार हॉल के अंदर करना होगा जहां 500 लोगों के ही बैठने की व्यवस्था है और अन्य 400 लोग खड़े हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रांगण तक पैदल नहीं जा सकने वाले लोगों के लिए 12 बग्घी सेवा में लगाई जाएंगी। अतिथियों के प्रांगण स्थित नार्थ कोर्ट, साउथ कोर्ट और सेंट्रल विस्टा में शाम 5 बजे तक बैठ जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों को लेकर थैले या मोबाइल फोन आयोजन स्थल के अंदर ले जाने की इजाजत नहीं होगी।

ओमिता ने बताया कि हमने गर्मी के मौसम के लिए पंखे, पानी आदि कुछ इंतजाम किए हैं। उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि सूरज की तपिश का आनंद उठाइए और धूप सेंकिए। वीवीआईपी के आगमन के लिए शाम 5 बजे राष्ट्रपति भवन को जाने वाले सारे रास्ते बंद कर दिए जाएंगे।

यह पहला अवसर है जब दक्षेस देशों के शासनाध्यक्ष इस तरह के कार्यक्रम में शरीक हो रहे हैं। ओमिता ने बताया कि यह इस लिहाज से भी पहला मौका है जब सभी 777 सांसदों को न्योता भेजा गया है जिनमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं।

सभी राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री, राजनयिक, दूत और अन्य संवैधानिक प्रमुख कार्यक्रम में शरीक होंगे। इसके अलावा 350 पत्रकार भी उपस्थित रहेंगे। निवर्तमान संप्रग 2 कैबिनेट के सदस्यों को भी कार्यक्रम में शरीक होने के लिए आमंत्रित किया गया है।

इंतजार की घड़ियों के दौरान लोगों के मनोरंजन के लिए नौसेना, सेना और वायुसेना के बैंड देशभक्ति गानों की धुन बजाएंगे। इसके बाद शाम पौने पांच बजे से वीवीआईपी के आगमन के बारे में कमेंट्री भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल के रणनीतिक केंद्रों पर एंबुलेंस और चिकित्सकों की टीम भी रखी गई है।