सोमवार, 26 मई 2014

क्यों महत्वपूर्ण है नरेंद्र मोदी की पहल



नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  स्वयंसेवक हैं , यह राष्ट्रवादी संगठन अखंड भारत की साधना करता है , आज की जो परिस्थिती में , दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस)  ही अखण्ड भारत का स्वरूप है ।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) को बुलाया जाना नई, मगर अच्छी परंपरा भी है ।  एक नई सरकार के साथ पहले ही दिन से पड़ोसियों से अच्छे संबंध बनाने का मौका मिलाना भी है !

क्यों महत्वपूर्ण है मोदी की पहल

हर्ष वी पंत, रक्षा विशेषज्ञ, किंग्स कॉलेज, लंदन
http://www.livehindustan.com

नरेंद्र मोदी के शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के सदस्य राष्ट्रों के शासनाध्यक्षों को दिया गया न्योता एक अच्छी शुरुआत है। यह पहल बताती है कि भारत की नई सरकार दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय समीकरणों के अंदर समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है। सच तो यह है कि भारत के दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के नेताओं ने मोदी से संपर्क साधा है, जो नई सरकार के लिए एक अच्छा शगुन है। पाकिस्तान नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। इस्लामाबाद की विदेशी नीति को आकार देने में नागरिक सरकार और फौज के बीच का मतभेद एक महत्वपूर्ण कारक के तौर पर मौजूद है। भारत के मामले में तो खासतौर पर। पाकिस्तान की नवाज शरीफ हुकूमत भारत के साथ ठोस सकारात्मक कदम उठाने की इच्छुक है या वह कदम उठाने में सक्षम है, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं है।

पाकिस्तान द्वारा भारत को सर्वाधिक तरजीही मुल्क का दर्जा देने का निर्णय अभी अटका हुआ है और हाल के महीनों में कश्मीर पर बयानबाजी भी तीखी हो गई है। पाकिस्तान ने कई बार स्वीकार किया है कि मनमोहन सिंह सरकार से उसकी बातचीत निर्थक रही और वह नई सरकार का इंतजार कर रहा है। पाकिस्तान में कई जानकार यह सलाह दे रहे हैं कि मजबूत मोदी सरकार भारत के साथ लंबे समय तक चलने वाले समाधान के अवसर उपलब्ध कराएगी। मोदी की जीत के बाद पाकिस्तानी हुकूमत भारत की नई सरकार के पाले में गेंद डालने की जल्दी में है। इधर, भाजपा ने संकेत दिया था कि पाकिस्तान के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता तभी बढ़ेगी, जब कुछ बुनियादी शर्तें पूरी होंगी। ये शर्तें हैं- मुंबई पर आतंकी हमलों के गुनहगारों की सुपुर्दगी और आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल न होने देने की गारंटी।

बयानबाजी कैसे वास्तविक नीतियों में परिवर्तित होती है, यह भी हमें आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा। लेकिन शपथ-ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को निमंत्रण देकर मोदी पहल करने में तो कामयाब रहे हैं। भारतीय राजनीति में मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के उदय का स्वागत बांग्लादेश ने भी किया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोदी को अपने बधाई संदेश में यह सुझाव दिया है कि विदेश दौरे के तौर पर वह सबसे पहले ढाका आएं। यह बयान काफी महत्वपूर्ण है। बीते कुछ वर्षो से हसीना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी रही हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के दबाव के चलते केंद्र की पूर्व संप्रग सरकार कुछ मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं कर पाई, जिसे ढाका ने शिद्दत से महसूस किया। शेख हसीना ने द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान की ओर बढ़ने के लिए बड़े राजनीतिक जोखिम उठाए। किंतु इस दिशा में भारत की तरफ से सार्थक प्रयास नहीं हुए।

नौकरशाहों की काहिली और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव के चलते कई समझौते-मुद्दे अधर में अटके रह गए। ढाका की मांग है कि बांग्लादेशी उत्पादों पर से चुंगी और गैर-चुंगी बाधाएं हटाई जाएं और इस मामले में वह भारत से फौरी फैसला चाहता है। सीमा से जुड़े मुद्दों पर भी बहुत कम प्रगति हुई है। हसीना के प्रस्तावों का जवाब देने में भारत विफल रहा है। ऐसे में, मोदी सरकार के पास एक अवसर होगा कि वह इस दिशा में नई शुरुआत करे, भारतीय वायदों को पूरा करे, जिनसे द्विपक्षीय संबंधों में कुछ भरोसा बहाल हो। एक साझेदार के तौर पर स्थिर और शांत बांग्लादेश भारत के दीर्घकालीन हित में है। रचनात्मक भारत-बांग्लादेश संबंध दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत के लिए श्रीलंका मुश्किल देश बना हुआ है। कोलंबो महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिंद महासागर मायने रखता है। इस सदी का ‘सबसे बड़ा खेल’ हिंद महासागर में ही खेला जाएगा। भारत की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर में इसे प्रचुर सामरिक लाभ दिलाती है, लेकिन इसका यह निश्चित मतलब नहीं कि नई दिल्ली इस भौगोलिक लाभ पर काबिज होने की स्थिति में है। इस क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व बढ़ रहा है और श्रीलंका के साथ उसके संबंध इसी लक्ष्य की बुनियाद पर टिके हैं कि दुनिया के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी पकड़ बढ़ानी और मजबूत बनानी है। भारतीय नीति-नियंताओं को इधर शीघ्र काम करने की जरूरत है, अन्यथा वे इस खेल को गंवाने की स्थिति में आ जाएंगे। कोलंबो में हमारे लिए एक उम्मीद है। जयललिता की अन्नाद्रमुक केंद्र की नई गठबंधन सरकार की साझेदार नहीं है, इसे देखते हुए भारत कोलंबो के साथ अपने संबंध मधुर और स्थायी बना सकता है। वैसे, राज्यसभा में अन्नाद्रमुक के साथ की जरूरत मोदी सरकार को पड़ेगी और इससे श्रीलंका के लिए भारत की पहल सीमित भी हो सकती है।

लोकतांत्रिक स्थिरता पाने के लिए नेपाल का प्रयोग जारी है। हाल के वर्षों में वहां की राजनीतिक-आर्थिक अस्थिरता ने अधिक अनिश्चितता पैदा की। भारत को वहां की घरेलू सियासत में एक समस्या के तौर पर देखा जाता है। नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता ने वहां भारत-विरोधी भावनाओं को हवा और चीन के विस्तार को अनुमति दी है। हिमालय-राष्ट्र संकट के दौर से गुजर रहा है और भारत को परदे के पीछे से डोर खींचने-कसने का आरोपी ठहराया जाता है। असुरक्षा की इसी भावना का फायदा बीजिंग उठा रहा है। ऐसे समय में, नेपाल की तमाम सियासी पार्टियों ने नरेंद्र मोदी की भावी सत्ता का स्वागत किया है, इस उम्मीद के साथ कि मोदी के विकासवादी एजेंडे का लाभ नेपाल को होगा।

अफगानिस्तान सत्ता हस्तांतरण के अहम पड़ाव पर खड़ा है। दिल्ली में यह बहस वर्षों से चल रही है कि अफगानिस्तान में भारत सुरक्षा के लिए किस हद तक जाए, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं हुआ। यदि भारत यह साफ नहीं करता है कि पश्चिमी फौजों की विदाई के बाद वह अफगानिस्तान में अपने लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था चाहता है तथा अपने रक्षा-हितों को बढ़ाना चाहता है, तो वहां से पश्चिमी फौज के निकलते ही भारत के तमाम निवेश बेकार चले जाएंगे। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई अपने हालिया भारत दौरे पर इसी मुद्दे को तरजीह देते नजर आए और उन्होंने बताया भी कि वह नई दिल्ली से किस तरह की रक्षा मदद चाहते हैं। मोदी सरकार के पास अफगान नीति को पुन: आकार देने का मौका तब होगा, जब काबुल में सरकार बदल चुकी होगी।

विश्व-शक्ति होने के तमाम दावों के बीच भारत दक्षिण एशियाई राष्ट्र की अपनी पहचान खोता गया है। समय आ चुका है कि दक्षिण एशिया पर जोर दिया जाए और इस क्षेत्र के कई संकटों से निपटा जाए। ऐसा इसलिए कि यदि नई दिल्ली ने इस तरह की अपनी उदासीनता दिखाई, तो दूसरी ताकतें इस शून्य को भर देंगी और यह भारत के हित में नहीं होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

लूट की मानसिकता : जाते-जाते UPA गिफ्ट


राजनीति में पहुँच  कर , सफल हो कर , धन वैभव की चकाचैंध से बच कर, सेवा करने का कौशल सोनिया गांधी के नृेतृत्व वाली सरकारों में देखने को ही नहीं मिला , जब देख तब लूट की मानसिकता ही सामने आई। जाते जाते भी अनैतिक नियुक्तियों और गैर जरूरी लोलुपता से इन्होने अपनी ही साख को बट्टा लगाया ।


जाते-जाते UPA ने अपने चहेतों को गिफ्ट में दिए बंगले और प्रमोशन


एसपीएस पन्नू/कुमार गौरव [Edited By: मधुरेन्द्र सिन्हा] | सौजन्‍य: Mail Today | नई दिल्‍ली, 22 मई 2014
http://aajtak.intoday.in/story

यूपीए सरकार का वक्त खत्म हो गया लेकिन यह गठबंधन जाते-जाते कई अनैतिक काम कर गया. सभी तरह की प्रशासनिक शिष्टता और राजनीतिक शालीनता को दरकिनार करते हुए कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार अपने वफादारों को सभी तरह के उपहार देती जा रही है. इनमें बड़े-बडे सरकारी बंगले, नियुक्तियां और तबादले तक हैं. उन्होंने किसी तरह के प्रतिबंध का पालन नहीं किया, चाहे वह चुनाव आचार संहिता हो या चुनाव में हार. अपने खास लोगों को पुरस्कृत करने का उसने कोई भी मौका नहीं छोड़ा.
सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि जब 16 मई को लोकसभा के परिणाम आ रहे थे, तो पी. चिदंबरम के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय 148 IRS अफसरों के तबादले की सूची जारी कर रहा था. ये अफसर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के हैं.

कस्टम और सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट के अन्य पांच अफसरों ने जो केन्द्रीय मंत्रियों के प्राइवेट सेक्रेटरी के शक्तिशाली पद पर थे, यूपीए की हार के आसार देखते ही बढ़िया जगहों में अपनी पोस्टिंग करवा ली. उन्हें पता चल गया था कि उनके आकाओं की अब छुट्टी होने वाली है.

19 मई को वित्त मंत्रालय ने अन्य 11 आईआरएस अफसरों का मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद के महत्वपूर्ण जगहों पर तबादला कर दिया. उस समय तक यह पता चल गया था कि नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति से मिलने वाले हैं.

20 मई को जब मोदी संसद के सेंट्रल हॉल से राष्ट्रपति से मिलने उनके निवास की ओर जा रहे थे तो पास ही में वित्त मंत्रालय कस्टम्स और सेंट्रल एक्साइज के 104 अफसरों के प्रमोशन के ऑर्डर जारी कर रहा था.

अन्य मंत्रालयों में नियुक्तियां भी होती रहीं. सूचना प्रसारण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव का पद राघवेन्द्र सिंह को दे दिया गया. 16 मई को ही सफदरजंग असपताल में डॉक्टर राजपाल को मेडिकल सुपरिटेंडेंट बना दिया गया.

कई अफसरों का मानना है कि वित्त मंत्रालय को इन अफसरों के तबादले या प्रमोशन का मामला नई सरकार पर ही छोड़ देना चाहिए था. उनका मानना है कि तबादले की नीति में बदलाव की जरूरत है. कुछ अफसरों को बड़े शहरों में खूब मौका मिल रहा है. छोटे शहरों में वे जाते ही नहीं. नई सरकार इस पर काम कर सकती थी.

इतना ही नहीं अश्विन पंडया को सेंट्रल वाटर कमीशन का चेयरमैन तथा भारत सरकार का पदेन सचिव भी बना दिया गया. इसी तरह भगवती प्रसाद पांडेय को वाणिज्य मंत्रालय का अतिरिक्त सचिव बना दिया गया. जनरल दलबीर सिंह को थल सेना का प्रमुख तो बनाया ही गया, देवेंद्र कुमार पाठक को BSF का डायरेक्टर जनरल बना दिया गया है. जम्मू-कश्मीर के डीजीपी अशोक प्रसाद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का स्पेशल डायरेक्टर बना दिया गया. वह भी चुनाव परिणाम आने के बाद.

बंगलों का उपहार
यूपीए सरकार ने जाते-जाते अपने वफादारों को बंगले भी दिए. 13 मई को कैबिनेट कमिटी ने असम के सीएम तरुण गोगोई को 5 जनपथ का बंगला दे दिया. नंदन नीलकेणि को अपने सरकारी बंगले में रहने की इजाजत दे दी गई. जाने-माने वकील केटीएस तुलसी को टाइप 8 बंगला मोती लाल नेहरू मार्ग पर आवंटित कर दिया गया. वे रॉबर्ट वाड्रा के मामले की पैरवी कर रहे थे. राज्य सभा के एमपी मुरली देवडा़ को 2 मोतीलाल नेहरू मार्ग का शानदार बंगला दे दिया गया. इस साल फरवरी में वे राज्य सभा में आए थे.

नरेंद्र मोदी : बापू जी को श्रद्धांजलि, अटल जी से आशीर्वाद



बापू जी को श्रद्धांजलि, अटल जी से आशीर्वाद, 
विदेशी मेहमानों का आना शुरू
नई दिल्‍ली, एजेंसी 26-05-2014

10.00 बजे
नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे दिल्ली पहुंचे।

9.50 बजे
अभिनेता रजनीकांत के करीबी सूत्रों ने यह जानकारी दी कि वह नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे। रजनीकांत को समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।

9.00 बजे
गुजरात भवन में मोदी से मिलने सबसे पहले उमा भारती पहुंचीं, उसके बाद रविशंकर प्रसाद, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, निर्मला सीतारमन, नजमा हेपतुल्लाह, सदानंद गौड़ा, रामविलास पासवान, अनंत कुमार, डॉ. हर्षवर्द्धन, विजेंद्र गुप्‍ता और प्रकाश जावड़ेकर सहित भाजपा के कई बड़े नेता यहां पहुंचे।

8.30 बजे
अटल बिहारी वाजपेयी से आशीर्वाद लेने के बाद मोदी गुजरात भवन पहुंचे।

8.15 बजे
नरेंद्र मोदी बापू को श्रद्धांजलि देने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने उनके आवास पर गए और वहां उनका आशीर्वाद लिया।

8.00 बजे
देश के 15वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने से पहले नरेंद्र मोदी ने आज राजघाट पहुंचकर राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देने के बाद मोदी दो मिनट तक समाधि स्‍थल के पास बैठे। मोदी के साथ डॉ. हर्षवर्द्धन, विजेंद्र गुप्‍ता और प्रकाश जावड़ेकर सहित भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद थे।

लोकसभा चुनाव में अकेले दम भाजपा की नैया पार लगाने वाले नरेंद्र मोदी आज शाम छह बजे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे सहित दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन के तमाम नेताओं के साथ लगभग 3000 मेहमानों की मौजूदगी में पद और गोपनीयता की शपथ लेकर देश की बागडोर अपने हाथ में लेंगे।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राजसी भवन के आलीशान प्रांगण में एक आलीशान समारोह में 63 वर्षीय मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के सहयोगियों को भारतीय संविधान की शपथ देकर अपने पद के अनुरूप कार्य करने का दायित्व सौंपेंगे। इस मौके पर निवर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे। इनके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और राजनीतिक दलों के नेता भी इस समारोह में आमंत्रित मेहमानों की सूची में हैं।

मोदी की मां हीरा बा के भी इस समारोह में मौजूद रहने की संभावना है। शरीफ और राजपक्षे के अलावा विदेशी अतिथियों में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई, भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे, नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला और मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम शामिल हैं।

बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व वहां की संसद की स्पीकर शिरीन चौधरी करेंगी, क्योंकि प्रधानमंत्री शेख हसीना शपथ ग्रहण समारोह के समय जापान की यात्रा पर होंगी। यह पहला मौका है, जब दक्षेस देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भारतीय प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

अटल बिहारी वाजपेयी के नक्शे कदम पर चलते हुए मोदी ने राष्ट्रपति भवन की ऐतिहासिक इमारत के प्रांगण में शपथ ग्रहण करने की इच्छा जताई थी, ताकि समारोह में ज्यादा से ज्यादा लोग शिरकत कर सकें। इससे पहले चंद्रशेखर ने भी इसी प्रांगण में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। वैसे राष्ट्रपति भवन का खूबसूरत दरबार हाल इस तरह के समारोहों का साक्षी हुआ करता है, लेकिन वहां चूंकि 500 मेहमानों की आवभगत की व्यवस्था है इसलिए अधिक बड़ी जगह का चयन किया गया।

अपने दृढ़ निश्चय और अटल फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले मोदी का कद पिछले छह आठ महीने में इतना बढ़ गया कि उन्होंने राजनीति के बाकी तमाम खिलाड़ियों को बौना साबित कर दिया। यह मोदी का ही हौसला था कि वह आलोचनाओं की तमाम आंधियों के सामने अडिग खड़े रहे, क्योंकि उनका मानना था कि देश भंवर में फंस चुका है और उन्हें पूरा भरोसा था कि अपने चंद आस्थावान साथियों के सहारे वह देश की कश्ती को भंवर से निकाल लाएंगे।

इसे भारतीय लोकतंत्र की गरिमा ही कहा जाएगा, जिसमें 80 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने करीब 40 दिन तक नौ चरण के मंथन के बाद अपने पसंदीदा प्रतिनिधियों का चयन किया और आज सरकार बनने की पूर्णाहूति के बाद यह पंचवर्षीय यज्ञ संपन्न होगा। मोदी ने हफ्तों तक चले चुनाव प्रचार के दौरान सैकड़ों जनसभाओं को संबोधित किया और लाखों किलोमीटर की यात्रा की। इसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा 543 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के लिए जरूरी सीटों से 10 सीट ज्यादा लेकर 282 के अभूतपूर्व आंकड़े तक जा पहुंची और गुजरात के मुख्यमंत्री के लिए देश की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने का रास्ता साफ हो गया।

चुनाव के दौरान मोदी को इस बात का एहसास तो हो ही चुका था कि भाजपा के पक्ष में लहर होने के साथ ही कांग्रेस के खिलाफ लोगों में आक्रोश और नाराजगी बहुत ज्यादा है। उन्होंने उसी का फायदा उठाया और इस लहर को एक ऐसी सुनामी में बदल दिया, जो कांग्रेस के गढ़ बहा ले गई। शपथ ग्रहण समारोह के लिए राजधानी में भू से नभ तक सुरक्षा के ठीक वैसे ही इंतजामात किए गए हैं, जैसे गणतंत्र दिवस परेड के मौके पर होते हैं।

दिल्ली पुलिस के अनुसार आज रायसीना हिल्स के आसपास कई परत वाला सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा। समारोह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होगा और समारोह के दौरान आसपास के तमाम कार्यालय पांच घंटे के लिये बंद रहेंगे। शपथ ग्रहण शाम 6 बजे होगा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति भवन के आसपास के कार्यालय दोपहर बाद एक बजे बंद कर दिए जाएंगे, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां उनकी जांच करेंगी। सुरक्षा गणतंत्र दिवस के समान होगी।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायु सेना ने क्षेत्र के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक हवाई सुरक्षा व्यवस्था की है और अति सुरक्षा वाले इलाके के आसपास तमाम ऊंची इमारतों में स्नाइपर्स तैनात किए जाएंगे। पुलिस ने बताया कि रायसीना हिल्स की तरफ जाने वाले सभी रास्तों पर सुरक्षा कारणों से अवरोधक लगाए जाएंगे। इलाके की सुरक्षा के लिए सचल सुरक्षा दस्ते, विमान भेदी तोपें और एनएसजी के शॉर्पशूटर तैनात किए जाएंगे। अर्धसैनिक बलों और दिल्ली पुलिस के जवान भी चप्पे-चप्पे की निगरानी करेंगे।