मंगलवार, 27 मई 2014

मोदी सरकार का पहला बड़ा फैसला, रि‍टेल में एफडीआई नहीं




मोदी सरकार का पहला बड़ा फैसला, रि‍टेल में एफडीआई से इनकार
dainikbhaskar.com|May 27, 2014,
http://business.bhaskar.com

नई दि‍ल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम की ओर से पहले दि‍न पहला सबसे बड़ा फैसला सामने आया है। नई वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अभी मल्टी-ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आने का सही वक्त नहीं है। अगर मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई लाया जाता है तो किसानों को नुकसान होगा। मोदी के मंत्रि‍यों ने यह मान कि‍या है कि‍ देश की अर्थव्‍यवस्‍था मुश्‍कि‍ल वक्‍त में हैं, ऐसे में कमान संभालना आसान नहीं होगा। आइये हम आपको बताते हैं कि‍ मोदी सरकार की इस कैबि‍नेट ने जनता से क्‍या कहा।

वि‍त्‍त मंत्री – अरुण जेटली
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने महंगाई कम करने का वादा किया है। अपना पदभार ग्रहण करने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां स्पष्ट हैं। विकास को फिर से पटरी पर लाने, महंगाई को रोकने और राजकोषीय मजबूती पर जोर होगा।
अरुण जेटली ने कहा कि उन्हें अहसास है कि वह मुश्किल समय में इकोनॉमी की बागडोर संभाल रहे हैं। मोदी सरकार को मिले स्पष्ट जनादेश में एक आशा की भावना छिपी है. ऐसे राजनीतिक बदलाव से वैश्विक व घरेलू निवेशकों में अच्छे संकेत गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता अगले दो महीनों में ऐसे फैसले लेने की है, जिसका असर जनता को साफ नजर आये। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में हमारी नीतियां जल्दी ही जनता के सामने होंगी।

टेलीकॉम मंत्री - रवि‍शंकर प्रसाद
टेलीकॉम मंत्री रवि‍शंकर प्रसाद ने कहा कि‍ हमारे वि‍भाग के लि‍ए उत्‍तर पूर्व राज्‍य हमारी प्राथमि‍कता पर है। उन्‍होंने कहा कि‍ यहां सेवाओं की गुणवत्‍ता को सुधारे की जरूरत है। टेलीकॉम सेक्‍टर में एफडीआई की प्रक्रि‍या को तेज कि‍या जाएगा, ताकि‍ नि‍वेशकों का भरोसा बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, सेक्‍टर के नि‍यामक को भी नरम कि‍या जाएगा।

रेल मंत्री- मनोज सिन्‍हा
रेल मंत्री मनोज सिन्‍हा ने कहा कि वह ईंधन से जुड़े कि‍राये में बढ़ोतरी के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वि‍चार-वि‍मर्श करेंगे।

‍कोयला मंत्री- पीयुष गोयल
‍कोयला मंत्री पीयुष गोयल ने कहा कि‍ इंडस्‍ट्री को बढ़ावा देने और पर्यावरण संबंधी मामलों को नि‍पटाने का रास्‍ता ढूंढने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि‍ हम नि‍जी कंपनि‍यों के साथ मि‍लकर काम कर सकते हैं।

खाद्य मंत्री- राम वि‍लास पासवान
खाद्य मंत्री राम वि‍लास पासवान ने कहा कि‍ उनकी प्राथमि‍कता खाद्य वस्‍तुओं की कीमतों को संतुलि‍त करना, सार्वजनि‍क वि‍तरण प्रणाली (पीडीएस) को सुधारना और खाद्य वस्‍तुओं के लि‍ए उपयुक्‍त स्‍टोरेज क्षमता तैयार करना है। उन्‍होंने कहा, ‘मैंने अभी कार्यभार संभाला है। अगले एक सप्‍ताह में महत्‍वूर्ण मुद्दों जैसे पीडीएस, फसीआई गोदाम और कि‍सानों के लि‍ए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) पर फूड और कंज्‍यूमर अफेयर्स सचि‍वों के साथ वि‍चार-वि‍मर्श करूंगा और प्राथमि‍कता के साथ इसे सुधारा जाएगा।’

नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल, मंत्रियों की सूची और उनके विभाग




नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल,  मंत्रियों की सूची और उनके विभाग

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो/बिमल कुमार
http://zeenews.india.com

नई दिल्‍ली : देश के 15वें प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के विभागों का आधिकारिक ऐलान मंगलवार सुबह कर दिया गया। गौर हो कि मोदी मंत्रिमंडल में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्‍वराज, नितिन गडकरी, एम वेंकैया नायडू, शिवसेना के अनंत गीते समेत 45 मंत्री शामिल किए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सोमवार को शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा मंगलवार को कर दिया गया है। मंत्रियों की सूची इस प्रकार है :

प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी): कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन, आणविक ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग। अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत विभागों तथा मंत्रालयों का बंटवारा किसी मंत्री को फिलहाल नहीं किया गया है।


मंत्रियों के नाम और उनके विभाग

कैबिनेट मंत्री:

राजनाथ सिंह : गृह मंत्रालय

सुषमा स्वराज : विदेश मंत्रालय, प्रवासी भारतीय मामलों का मंत्रालय

अरुण जेटली : वित्त, कॉरपोरेट मामला, रक्षा मंत्रालय

एम वेंकैया नायडू : शहरी विकास, आवास व शहरी गरीबी उन्मूलन, संसदीय कार्य मंत्रालय

नितिन गडकरी : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी

डीवी सदानंद गौड़ा : रेलवे

उमा भारती : जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन

नजमा ए हेपुल्ला : अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय

गोपीनाथ राव मुंडे : ग्रामीण विकास, पंजायती राज, पेयजल व स्वच्छता

रामविलास पासवान : उपभोक्ता मामला, खाद्य व सार्वजनिक वितरण

कलराज मिश्र : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

मेनका गांधी : महिला व बाल विकास विभाग

अनंत कुमार : रासायनिक व उवर्रक

रविशंकर प्रसाद : संचार और सूचना प्रौद्योगिकी, कानून व न्याय

अशोक गजपति राजू पसुपति : नागरिक उड्डयन

अनंत गीते : भारी उद्योग व सार्वजनिक उद्यम

हरसिमरत कौर बादल : खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

नरेंद्र सिंह तोमर : खनन, इस्पात, श्रम एवं रोजगार

जुआल ओरांव : जनजातीय मामला

राधा मोहन सिंह : कृषि

थवर चंद गहलोत : सामाजिक न्याय व अधिकारिता

स्मृति ईरानी : मानव संसाधन विकास

हर्षवर्धन : स्वास्थ्य व परिवार कल्याण


राज्य मंत्री :

जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह : पूर्वोत्तर क्षेत्रों का विकास (स्वतंत्र प्रभार), विदेश मंत्रालय, प्रवासी भारतीय मामलों का मंत्रालय

इंद्रजीत सिंह राव : नियोजन (स्वतंत्र प्रभार), सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन (स्वतंत्र प्रभार), रक्षा

संतोष कुमार गंगवार : कपड़ा (स्वतंत्र प्रभार ) संसदीय कार्य मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन

श्रीपद येसो नाइक : संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार), पयर्टन (स्वतंत्र प्रभार)

धर्मेद्र प्रधान : पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)

सर्बनंद सोनोवाल : कौशल विकास, उद्यमशीलता, युवा मामले व खेल (स्वतंत्र प्रभार)

प्रकाश जावड़ेकर : सूचना व प्रसारण (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार), संसदीय मामला

पियूष गोयल : विद्युत (स्वतंत्र प्रभार), कोयला (स्वतंत्र प्रभार), नवीन व नवीनीकृत ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार)

जितेंद्र सिंह : विज्ञान व प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार), भू विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन, आण्विक ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग

निर्मला सीतारमन : वाणिज्य व उद्योग (स्वतंत्र प्रभार), वित्त, कॉरपोरेट मामला

जीएम सिद्देश्वरा : नागरिक उड्डयन

मनोज सिन्हा : रेलवे

निहालचंद : रासायनिक व ऊवर्रक

उपेंद्र कुशवाहा : ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता

पी राधाकृष्णन : भारी उद्योग व सार्वजनिक उद्यम

किरन रिज्जु : गृह मंत्रालय

कृष्ण पाल : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी

संजीव कुमार बलयान : कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

मनसुखभाई धंजीभाई वासवा : जनजातीय मामला

रावसाहेब दादराव दान्वे : उपभोक्ता मामला, खाद्य व सार्वजनिक वितरण

विष्णु देव साईं : खनन, इस्पात, श्रम व रोजगार

सुदर्शन भगत : सामाजिक न्याय व अधिकारिता


गौर हो कि मोदी ने सरकार का पुनर्गठन इस तरह से किया है जिसमें एक-एक कैबिनेट मंत्री अब कई विभागों की कमान संभालेंगे। प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी की ओर से कहा गया था कि विभिन्न मंत्रालयों की गतिविधियों को साथ लाने पर बल दिया गया है जहां एक-एक कैबिनेट मंत्री उन मंत्रालयों के समूह की अगवाई करेंगे को एक दूसरे के पूरक के रूप काम कर रहे हैं। इसमें कहा गया अपने मंत्रिमंडल के गठन में मोदी ने ‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन’ और ‘कार्य संस्कृति एवं शासन की शैली में बदलाव लाने की प्रतिबद्धता के साथ युक्तिसंगत होने’ के सिद्धांत को अपनाया।

यूटर्न : केजरीवाल बॉन्ड भरने को तैयार



 केजरीवाल की जेल यात्रा प्रकरण ने साबित कर दिया की 
उनकी समझ दिमागी दिवालियेपन  की स्थिति में है । एक 
तरफ अपने आप को आम आदमी की पार्टी कहते हैं ,
बनाते संविधान के ऊपर हैं । 

हाई कोर्ट से भी केजरीवाल को झटका 
अरविंद केजरीवाल बॉन्ड भरने को तैयार
एजेंसियां | May 27, 2014 नई दिल्ली
http://navbharattimes.indiatimes.com

दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। केजरीवाल की अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई करते हुए कहा कि उन्हें पर्सनल बॉन्ड भरना ही होगा। इसके बाद अरविंद केजरीवाल इस फैसले को मानते हुए पर्सनल बॉन्ड भरने के लिए तैयार हो गए हैं। उनके वकील प्रशांत भूषण ने हाई कोर्ट को जानकारी दी है कि अरविंद केजरीवाल बॉन्ड भरने के लिए तैयार हैं।

प्रशांत भूषण ने साथ ही यह भी बताया कि बॉन्ड भरना एक फिजूल की प्रक्रिया है, जिसकी वजह से लाखों लोग जेलों में बंद रहते हैं और अदालतों का भी वक्त बर्बाद होता है, इसलिए हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। उन्होंने कहा, 'अरविंद केजरीवाल की यह याचिका इस देश के लिए बहुत अहम साबित हो सकती है। बॉन्ड भरने के इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए 31 जुलाई की तारीख तय की गई है।'

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केजरीवाल से पूछा कि आखिर वह इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न क्यों बना रहे हैं। गौरतलब है कि केजरीवाल ने बीजेपी नेता नितिन गडकरी की ओर से दायर मानहानि के एक मामले में पर्सनल बॉन्ड भरने करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद निचली अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं।

इसके साथ ही गोपाल राय और मनीष सिसोदिया को भी निचली अदालत ने एक नोटिस कर दिया है। मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल को जेल भेजे जाने के अदालत के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा था, 'अच्छे दिन आ गए हैं।' अदालत ने उनसे पूछा है कि ऐसी टिप्पणी किस आधार पर की।
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केजरीवाल ज़मानत का मुचलका भरने को तैयार
 मंगलवार, 27 मई, 2014
http://www.bbc.co.uk/hindi/india

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े मानहानि के मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी के नेता केजरीवाल ज़मानत के लिए निजी मुचलका भरने को तैयार हैं. इस तरह उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हो गया है.

मंगलवार को ये मामला जब दिल्ली हाई कोर्ट के सामने आया तो न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर और सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने केजरीवाल के वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण से कहा कि मुचलका भरने को केजरीवाल 'प्रतिष्ठा का सवाल' न बनाएं.
आम आदमी पार्टी के नेता को छह जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. उनके ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मानहानि का मामला दायर किया था.

केजरीवाल ने दस हज़ार रुपए का ज़मानती मुचलका भरने से इनकार कर दिया था जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

सोमवार को केजरीवाल की तरफ से हाई कोर्ट में एक 'हैबियस कार्पस' याचिका दायर की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें ग़ैर क़ानूनी ढंग जेल में रखा गया है. याचिका में दिल्ली की निचली अदालत के फैसले को भी चुनौती दी गई थी.

'प्रतिष्ठा का सवाल क्यों'
मंगलवार को ये मामला जब उच्च न्यायलय की दो सदस्यों वाली खंडपीठ के सामने पहुंचा तो जजों ने केजरीवाल से कहा कि इस मामले को वह 'प्रतिष्ठा का सवाल' क्यों बना रहे हैं? जजों ने वकीलों से कहा की वे तिहाड़ जेल जाकर केजरीवाल से बात करें और पहले ज़मानत की अर्ज़ी दायर करें.

इसके बाद शांति भूषण और प्रशांत भूषण केजरीवाल से मिलने तिहाड़ पहुंचे और उनसे मुचलका भरने की सहमति ले ली. मामला आम चुनाव से पहले का है जब अरविंद केजरीवाल ने एक पत्रकार वार्ता में 13 लोगों पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया था, जिनमें नितिन गडकरी का भी नाम लिया गया था.

इसके बाद कई अन्य नेताओं समेत नितिन गडकरी ने उन पर मानहानि का मुकदमा किया था. नितिन गडकरी की वकील पिंकी आनंद ने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के आदर्शों का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

नरेंद्र मोदी राष्ट्राध्यक्ष के रूप में ए-1 वीजा के पात्र होंगे - अमेरिका




ओबामा ने दी मोदी सरकार को बधाई,
नई सरकार के साथ काम करने को लेकर उत्सुक
Bhasha मई 26, 2014
http://khabar.ndtv.com/news

वॉशिंगटन: भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शपथ लेने पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बधाई देते हुए कहा है कि रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए वह नए नेता के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने कहा, 'राष्ट्रपति ओबामा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नई भारतीय सरकार को उनके शपथ-ग्रहण पर बधाई देते हैं।'

कार्नी ने कहा, 'चुनाव के बाद अपनी बातचीत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जिस तरह सहमत हुए थे, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के रूप में भारत और अमेरिका गहरे रिश्ते और अपने लोगों तथा दुनिया भर के लिए आर्थिक अवसर, स्वतंत्रता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता साझा करते हैं।'

प्रेस सचिव ने एक बयान में कहा, 'हम नई सरकार के साथ करीबी से काम करने को लेकर उत्सुक हैं ताकि आने वाले सालों में अमेरिका-भारत रणनीतिक नेतृत्व को मजबूत किया जा सके और उनका प्रसार किया जा सके।'

लोकसभा चुनावों के नतीजों के ऐलान के दिन ओबामा ने चुनाव में जीत हासिल करने पर मोदी को फोन पर बधाई दी थी। दोनों नेताओं के बीच पहली बार फोन पर हुई बातचीत के दौरान ओबामा ने बीजेपी नेता को अमेरिका आने का न्योता दिया था, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जा सके।

साल 2002 के गुजरात दंगों के मद्देनजर 2005 से ही मोदी को वीजा देने से इनकार करते रहे अमेरिका ने कहा कि मोदी राष्ट्राध्यक्ष के रूप में ए-1 वीजा के पात्र होंगे।

मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी




मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस।'

बदल दी सरकार की परिभाषा, संगठन की परंपरा
Tuesday,May 27,2014
त्वरित टिप्पणी/प्रशांत मिश्र
http://www.jagran.com/news
भाजपा में एक नए युग की शुरुआत के साथ ही सरकार और पार्टी की प्रकृति और परंपरा भी बदलने लगी है। यह तय हो गया है कि अब न तो सरकार पुराने ढर्रे पर चलेगी और न ही पार्टी। दोनों एक दिशा में एक साथ बढ़ेंगे और संभवत: भाषा भी एक ही होगी।

पिछले कुछ महीनों में जज्बे को जुनून बनाकर ऐतिहासिक जनादेश लाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथग्रहण के साथ ही भाजपा और जनसंघ की तीन पीढि़यों की आस और परिश्रम को पूरा कर दिया। खास बात यह थी कि जब भाजपा और बहुत हद तक कांग्रेस ने भी व्यवहार और सिद्धांत में गठबंधन की सरकार को सच मान लिया था, मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने यह दिखा दिया जनता बहुमत की पार्टी वाली सरकार चाहती है। बशर्ते उसे पार्टी और नेतृत्व पर भरोसा हो। इसके साथ कई समीकरण बदल गए हैं। बदलाव पिछले चार-पांच दिनों में ही दिख गया है। पार्टी और सरकार को भी यह स्पष्ट हो गया कि मोदी 'नो नान्सेंस और जीरो टालरेंस' के सिद्धांत पर चलेंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मोदी चार दिनों से दिल्ली के ही गुजरात भवन में टिके थे। इस दौरान मंत्रिमंडल गठन पर चर्चा हुई और संगठन का चेहरा बदलने पर भी। मोदी के मिजाज से वाकिफ राजनीतिक पंडित जो अंदाजा लगा रहे थे ठीक वैसा ही हुआ। मंत्रिमंडल का स्वरूप बदला और कुछ चौंकानेवाले फैसले हुए। शीर्ष नेतृत्व से लेकर नीचे तक कइयों की आशाओं पर तुषारापात भी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से किसी ने उर्फ तक नहीं किया। कम से कम बाहर नहीं दिखा। बीते डेढ़ दशक में भाजपा में बंद कमरे की बैठकों से नेता बाहर देर से निकलते थे और फैसले पहले। छोटी-छोटी बातों पर विवाद भाजपा के लिए आम हुआ करता था। लोकतांत्रिक मूल्यों का नाम देकर पार्टी अंदरूनी विवादों को भी भले ही सही ठहराती रही हो, लेकिन इससे शायद ही कोई इन्कार करे कि पार्टी को इससे काफी नुकसान पहुंचा है।
केंद्र सरकार के लिए तय कोटे से लगभग आधी संख्या में ही मंत्रियों को शपथ दिलाकर मोदी ने यह भी बता दिया कि वह सरकार की परिभाषा बदलना चाहते हैं। वह कथनी नहीं करनी में विश्वास करते है। मोदी कहते रहे हैं -'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस।' वह सरकार को जो स्वरूप देना चाहते थे, वह आज के शपथग्रहण में दिखा। मंगलवार सुबह आठ बजे से ही मोदी काम पर होंगे।

भारतीय लोकतंत्र में मजबूत प्रशासन के लिए जरूरी है कि सरकार का शीर्ष नेतृत्व संगठन में भी सबसे मजबूत हो। पिछली सरकार में डा. मनमोहन सिंह बार-बार कमजोर करार दिए जाते रहे तो उसका कारण यही था कि वह संगठन के लिए चेहरा नहीं थे। केंद्रीय राजनीति में आने के साथ ही मोदी ने यह साफ कर दिया है कि वह सरकार के मुखिया हैं और संगठन व कार्यकर्ताओं के चहेते।

नींव मजबूत है। लिहाजा आशाएं संजोना अनुचित भी नहीं है। पिछले 12-13 वर्षो से साढ़े छह करोड़ गुजरातियों के गर्व का कारण रहे मोदी के सामने अब सवा सौ करोड़ भारतीयों का सपना है। शुरुआत अच्छी है।