गुरुवार, 19 जून 2014

हिंदी में करें पूरा काम : गृह मंत्रालय का निर्देश





अपने विभागों को गृह मंत्रालय का निर्देश, अब हिंदी में करें पूरा काम
आज तक वेब ब्यूरो [Edited By: पीयूष शर्मा] | नई दिल्‍ली, 19 जून 2014

गृह मंत्रालय में अब सभी कामकाज हिंदी में होंगे. इस संबंध में बुधवार को गृह मंत्रालय ने निर्देंश जारी कर दिए.
बताया जाता है कि सबसे अधिक हिंदी का इस्‍तेमाल करने वाले नौकरशाहों को पुरस्‍कृत भी किया जाएगा. सभी पीएसयू और केंद्रीय मंत्रालयों के लिए सोशल मीडिया और इंटरनेट पर हिंदी को अनिवार्य किया गया. गौरतलब है कि केंद्र सरकार चाहती है कि उसके अफसर हिंदी में ट्वीट करें और साथ ही फेसबुक, गूगल, ब्लॉग्स वगैरह में भी इसका इस्तेमाल करें. ऐसा निर्देश गृह मंत्रालय ने दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद के कारण ऐसा किया जा रहा है.

मालूम हो कि गृह मंत्रालय ने 27 मई को एक पत्र लिखा था, जिसमें सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों (सरकार तथा सरकारी अधिकारियों) के लिए हिंदी भाषा का इस्‍तेमाल अनिवार्य माना गया है. पत्र में कहा गया था कि सरकारी अधिकारियों को अपने कमेंट अंग्रेजी के अलावा हिंदी में भी पोस्ट करने होंगे. कुल मिलाकर उनसे हिंदी को वरीयता देने का कहा गया है. गृह मंत्रालय के पत्र में कहा गया है कि इस निर्देश को सभी विभागों के संज्ञान में लाया जाए.

कई सरकारी अधिकारी ट्वीट तो करते हैं लेकिन अंग्रेजी में. इनमें विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन भी हैं. वह विदेश मंत्रालय की ओर से ट्वीट करते हैं. लेकिन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर हिंदी और इंग्लिश दोनों में ट्वीट करते हैं. निर्मला सीतारमण इंग्लिश, हिंदी और तमिल में ट्वीट करती हैं. बीजेपी के मुख्यमंत्री रमन सिंह, शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे अक्सर हिंदी में ट्वीट करते हैं.

हिंदी की बजाय विकास पर ध्‍यान दें मोदी: करुणा‍निधि
हिंदी पर हर काम करने को लेकर फैसले की चारों तरफ आलोचना होने लगी है. डीएमके प्रमुख करुणनिधि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल नेटवर्क पर हिंदी के इस्‍तेमाल और गृह मंत्रालय के बुधवार को जारी निर्देश पर आपत्ति जताई है. करुणानिधि ने कहा है कि मोदी को हिंदी की बजाय विकास पर ध्‍यान देना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि यह गैर हिंदीभाषियों को दोयम दर्जे की तरह समझने जैसा है.

दिवंगत प्रचारक - स्व. श्री सुन्दर सिंह जी भण्डारी



दिवंगत प्रचारक - स्व. श्री सुन्दर सिंह जी भण्डारी

स्वर्गीय सुन्दर सिंह जी भण्डारी
जन्म -  12 अप्रैल, 1921   स्वर्गवास - 22 जून, 2005

Posted by Manohar
SATURDAY, 21 MAY 2011
BHARTI BHAWAN, JAIPUR

      प्रारम्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक तथा बाद में जनसंघ व भाजपा के नेता तथा बिहार एवं गुजरात के राज्यपाल रहे मा.सुन्दरसिंह जी भण्डारी का जन्म 12 अप्रैल, 1921 को उदयपुर में हुआ । उनके पिता डा.सुजानसिंह जी उदयपुर के ख्याति प्राप्त चिकित्सक थे तथा माता श्रीमति फूल कँवर धार्मिक गृहिणी थी । भण्डारी जी की प्रारम्भिक शिक्षा उदयपुर एवं सिरोही में हुई । एन.बी.कालेज, उदयपुर से इन्टरमीजिएट करने के पश्चात 1937 में सनातन धर्म कालेज, कानपुर में बी.ए.प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया तथा वहाँ से बी.ए. व एल.एल.बी. करने के पश्चात एम.ए.की परीक्षा डी.ए.वी.कालेज, कानपुर से उतीर्ण की । जब ये बी.ए. में अध्ययनरत् थे तो पण्डित दीनदयाल उपाध्याय इनके सहपाठी थे । दोनो ने ही कानपुर की नवाबगंज शाखा में जाना प्रारम्भ किया और उन्हीं दिनो रा.स्व.संघ के प्रति उनका समपर्ण व घनिष्ठता हुई ।

      1940-1941 में लगातार भण्डारी जी ने नागपुर से संघ का प्रथम वर्ष व द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा संघ संस्थापक प.पू.डा.हेडगेवार जी के सम्पर्क में आये । उनकी प्रेरणा से लखनऊ तथा मेरठ के संघ शिक्षा वर्ग में 1941 से 1945 तक प्रबंधक व शिक्षक के रूप में रहे । 1946 में संघ का तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण पूर्ण कर भण्डारी जी ने जोधपुर के विभाग प्रचारक का दायित्व सम्हाला । 1948 में संघ पर प्रतिबंध के समय भण्डारी जी ने भूमिगत रहकर अत्यन्त परिश्रम, निष्ठा व कौशल के साथ जोधपुर से संघ की गतिविधियां चलाई ।

      1951 में जनसंघ के निर्माण पर राजस्थान प्रान्त के महामंत्री का दायित्व सम्हाला व केन्द्रीय कार्य समिति में भी रहे । 1952 के राजस्थान में प्रथम चुनाव श्री भण्डारी जी के नेतृत्व में ही हुए । तथा 8 विधायक राजस्थान विधान सभा में चुने गए । 1954 में श्री भण्डारी जी जनसंघ के अखिल भारतीय मंत्री बनें तथा राजस्थान, गुजरात, हिमाचल तथा उत्तर प्रदेश आदि प्रान्तों का कार्य विशेष रूप से सम्हाला । 1962 में श्री भण्डारी जी जनसंघ के अखिल भारतीय संगठन प्रभारी बनें । 1963 में पण्डित दीनदयाल जी उपाध्याय के विदेश प्रवास की अवधि में महामंत्री का दायित्व भी सफलता पूर्वक संभाला । 1967 में पण्डित दीनदयाल जी उपाध्याय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और श्री भण्डारी जी ने महामंत्री का दायित्व सम्हाला । 1968 से 1972 तक राज्यसभा के सदस्य रहे तथा विभिन्न समितियों में सदस्य के रूप में अपने कौशल का परिचय दिया । 1975 के आपातकाल में श्री भण्डारी जी भूमिगत हुए किन्तु 1976 में दिल्ली स्टेशन पर मीसा के अन्तर्गत गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिये गये जहाँ से भी ये राज्यसभा सदस्य चुने गए । 1977 में आम चुनाव की घोषणा के बाद श्री भण्डारी जी भी अन्य नेताओं के साथ जेल से मुक्त हुए । अन्य दलो के साथ जनसंघ भी नवगठित जनता पार्टी का सदस्य बना तथा श्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व में गैर कांग्रेसी केन्द्र सरकार बनी । दोहरी सदस्यता के प्रश्न पर जनसंघ जनता पार्टी  से पृथक हो गया तथा श्री भण्डारी ने पूर्वानुमान बनाकर युवा मोर्चा व जनता विद्यार्थी मोर्चा का गठन कर लिया था । 8 अप्रैल, 1980 में भारतीय जनता पार्टी का मुम्बई में गठन हुआ तथा पार्टी के संविधान का निर्माण भी श्री भण्डारी के नेतृत्व में हुआ । भण्डारी जी का स्वयं का कोई परिवार नही था, कार्यकर्ता ही  उनके परिवारजन थे । सबसे मधुर सम्बन्ध उनकी विशेषता थी । श्री भण्डारी जी जनसंघ व भाजपा के नीति निर्धारक थे, वे बाद में बिहार व गुजरात के माननीय राज्यपाल भी रहे तथा बाद में मानवाधिकार आयोग के अ.भा.अध्यक्ष रहे । श्री भण्डारी जी के जीवन का कण कण राष्ट्र को समर्पित रहा । 22 जून, 2005 को उस तेजस्वी विभूति का अवसान हो गया । श्री भण्डारी जी सादगी एवं उच्च विचारों की प्रति मूर्ति थे । उन्होने संघ, जनसंघ और भाजपा संगठन को बढ़ाने में अति परिश्रम किया ।