गुरुवार, 26 जून 2014

लव भारत और लीव भारत : इंद्रेशजी



लव भारत और लीव भारत : इंद्रेशजी
June 23, 2014
कुरुक्षेत्र. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केन्द्रीय कार्यसमिति के सदस्य एवं वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि ऐसे लोगों के लिये हिंदुस्थान में कोई जगह नहीं है, जो देश के विभाजन की बात करते हों. ऐसे लोगों को केवल एक ही विकल्प है कि या तो वे भारत भूमि से प्रेम करें अन्यथा इसे छोड़ कर चले जायें.
21 जून को संघ के 20 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर इंद्रेश जी ने कहा कि कोई उन्हें संविधान के अनुच्छेद 370 के दस लाभ गिनवा दे, तो भारतीय इसके समर्थन को तैयार हैं, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं, बल्कि बहुत हानि हुई है. जो अनुच्छेद देश में दो ध्वज, दो संविधान व दोहरी नागरिकता का पक्षधर हो, वह किसी भी प्रकार से जोडऩे वाला प्रावधान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि कश्मीर में तिरंगे के अपमान, संविधान के अपमान पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. कश्मीर का संविधान भारत के संविधान का अपमान करता है. इसके कारण कश्मीर में भारत के ही नागरिकों व महिलाओं में भेद किया जाता है, ऐसे विध्वंसक संवैधानिक प्रावधान का समाप्त होना आज देश की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि अब देश न तो एक इंच भूमि किसी को देगा और न ही कोई जान आतंकवाद की भेंट चढ़ेगी.
उन्होंने कहा कि 1947 में भारत को जो आजादी मिली, वह अधूरी थी. ऐसी सरकारें सत्ता में आईं, जिन्होंने सरदार भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, सरदार बल्लभ भाई पटेल, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई को भुलाकर ऐसे लोगों के नाम से विकास योजनायें चलाईं, जिनका देश की आजादी व विकास में रत्ती भर भी योगदान नहीं रहा. इन्हीं गलत योजनाओं के परिणामस्वरूप देश में दुराचार, नशा, गोहत्या, भ्रूण हत्या, गरीबी व अनेकानेक कुरीतियां पैदा हुईं.
उन्होंने कहा कि 2014 का आम चुनाव भारत की आजादी की दूसरी लड़ाई के रूप में जाना जायेगा. अब पूरे भारत के 125 करोड़ नागरिकों को सशक्त भारत के निर्माण की आशा बंधी है, जिसमें आतंकवाद, अपराध, महिला, भ्रूण हत्या, दुराचार, नशा जैसी प्रवृत्तियों के लिये कोई स्थान नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसे भारत के निर्माण का दायित्व केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है. इसलिये हर व्यक्ति को इस दिशा में अपना योगदान करना चाहिये.
इंद्रेशजी ने बताया कि 1925 में संस्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन है, जिसकी प्रतिदिन 60 हजार शाखायें लगती हैं. विश्व के 137  देशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से 750 शाखायें चल रही हैं तथा महिलाओं के लिये 4500  स्थानों पर राष्ट्र सेविका समिति की शाखायें हैं. 30 हजार विद्यालयों के माध्यम से लाखों-करोड़ों युवाओं को सुसंस्कृत किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज चीन, अमेरिका तथा पूरा पश्चिमी जगत परिवार के पारस्परिक रिश्तों में आई गिरावट के दुष्परिणाम भुगत रहा है, जिसके कुप्रभाव भारत में भी दिखाई देते हैं. हमें ऐसा भारत बनाना है, जिसमें महिला को मां, बहन की दृष्टि से देखा जाता है.
सेवानिवृत्त परमविशिष्ट सेवा मेडल ले. जरनल पीएन हून ने कहा कि देश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों की अवश्यकता है, जो भारत को सबल व सभ्य नागरिक देता है. उन्होंने कहा कि आज ईरान, इराक सहित पूरा विश्व जब आपसी फूट व टकराव की स्थिति में है, तो संघ जैसे संगठन की वजह से ही भारत एकजुट है.

नहीं बढ़ेंगे गैस के दाम - मोदी सरकार



मोदी सरकार का रिलायंस को झटका, 3 महीने नहीं बढ़ेंगे गैस के दाम
इकनॉमिक टाइम्स | Jun 26, 2014

नई दिल्ली
रेल किराए में बढ़ोतरी के झटके बाद मोदी सरकार फिलहाल तीन महीने तक गैस कीमतें बढ़ाने का कड़वा डोज नहीं देगी। रिलायंस को झटका देते हुए कैबिनेट ने गैस के दाम बढ़ाने का फैसला 3 महीने के लिए टाल दिया है। वह इस मामले को अच्छी तरह समझना चाहती है और उसके बाद आम लोगों के हित को ध्यान में रखकर कोई फैसला करना चाहती है। यह रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी जैसी तेल और गैस कंपनियों के लिए झटका है। इससे उन एक्सपर्ट्स की उम्मीदें भी टूटी हैं, जो मोदी सरकार से जल्द बिजनेस-फ्रेंडली फैसले की उम्मीद कर रहे थे।

3 महीने में दूसरी बार सरकार ने गैस प्राइस बढ़ाने का मामला टाला है, जो रिलायंस और ओएनजीसी के कई अरब डॉलर के इनवेस्टमेंट के लिहाज से काफी अहमियत रखता है। यूपीए सरकार की कैबिनेट ने रंगराजन फॉर्म्युले के हिसाब से गैस की कीमत तय करने को मंजूरी दी थी। इससे गैस का दाम 1 अप्रैल से 8.4 डॉलर प्रति यूनिट हो जाता। हालांकि, चुनाव आयोग ने आचार संहिता की वजह से इसे रोक दिया था, जिसकी इंडस्ट्री ने आलोचना की थी। इंडस्ट्री का कहना था कि गैस का दाम डबल करना पॉपुलिस्ट और वोट हासिल करने वाला कदम नहीं है।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को बताया कि आर्थिक और उपभोक्ता मामलों की कैबिनेट कमिटी ने गैस की कीमत में बढ़ोतरी को टालने का फैसला किया है। सितंबर तक गैस 4.2 डॉलर के भाव पर मिलती रहेगी। इस प्राइस को 5 साल के लिए मंजूरी दी गई थी, जिसकी मियाद इस साल 31 मार्च को खत्म हो गई। प्रधान ने कहा कि रंगराजन फॉर्म्युले सहित पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। जानकारों का कहना है कि इस फैसले से सरकारी खजाने पर दबाव भी नहीं बढ़ेगा और महंगाई बढ़ने की आशंका भी कम होगी। इससे बिजली और फर्टिलाइजर कंपनियों को भी राहत मिलेगी। हालांकि इससे ऑयल और गैस फील्ड्स में इनवेस्टमेंट पर नेगेटिव असर हो सकता है। कंपनियों का कहना है कि वे गैस की मौजूदा कीमत पर ये इनवेस्टमेंट नहीं कर सकतीं।

सत्ताधारी बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि सत्ता में आने पर वह गैस के दाम के मुद्दे का समाधान निकालेगी। इस फॉर्म्युले का कई तरफ से विरोध हुआ है, क्योंकि इससे बिजली महंगी हो जाएगी और यूरिया का खर्च, सीएनजी की दर और पाइप से आपूर्ति होने वाली रसोई गैस के दाम बढ़ जाएंगे। लेकिन उद्योग जगत के संगठन सीआईआई ने सरकार को गैस के दाम पर लिए गए फैसले को लागू करने की मांग करते हुए कहा है कि इससे पीछे हटने पर तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश पर बुरा असर पड़ेगा।

इन्दिरा गांधी की हिटलर शाही के कारण लगा था आपातकाल


इन्दिरा गांधी की हिटलर शाही के कारण लगा था आपातकाल

आज के ही दिन लागू हुआ था आपातकाल,मौलिक अधिकार थे सीज
Jun 26 2014
-इंटरनेट डेस्‍क-

नयी दिल्‍ली : भारतीय इतिहास में काला दिन के रूप में दर्ज हो चुके आपातकाल को भला कौन याद करना चाहेगा. भारतीय लोकतंत्र ने इमरजेंसी को युवाकाल में झेला . आज के ही दिन यानी 26 जून 1975 को देश में पहली बार आपातकाल लगाये जाने की घोषणा की गयी थी.

इमरजेंसी के 39 साल बाद

यही वो तारीख है जब तात्‍कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने खिलाफ उठ रही विरोध के आवाज को दबाने के लिए इमरजेंसी जैसी कानून का सहारा लिया. 1971 में बांग्लादेश बनवाकर शोहरत के शिखर पर पहुंचीं इंदिरा को अब अपने खिलाफ उठी हर आवाज एक साजिश लग रही थी. उन्‍होंने लाखों लोगों को जेल में डाल दिया. लिखने-बोलने पर पाबंदी लग गई.

देश में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार और महंगाई से त्रस्‍त जनता ने सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया. इस मुद्दे को लेकर देशव्‍यापी आंदोलन होने लगे. गुजरात कर्फ्यू इसका प्रबल उदाहरण था. इस मामले को लेकर गुजरात के चिमनभाई को इस्‍तीफा भी देना पड़ा. देश में छा रही अशांति को लेकर विपक्ष ने इंदिरा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

इधर 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली से इंदिरा का चुनाव अवैध घोषित कर दिया. विपक्ष उनसे इस्‍तीफा देने की मांग करने लगी. लेकिन सत्ता के मद में चूर इंदिरा ने 25 जून को इमरजेंसी की घोषणा कर दी. विपक्ष के तमाम नेता को गिरफ्तार कर लिया गया. देश में उनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा सकता था, आवाज बुलंद करने वालों को जेल की हवा खानी पड़ी.

बहरहाल जनता की आवाज को इमरजेंसी भी कुछ नहीं बिगाड़ पायी. देश में इंदिरा और कांग्रेस विरोधी नारे लगने लगे. प्रधानमंत्री इंदिरा पर लगातार दबाव बढ़ने लगा था. अंतत: उन्‍हें इंमरजेंसी खत्‍म करने का फैसला लेना पड़ा. इंदिरा ने मार्च 1977 को अचानक आपातकाल हटाने की घोषणा कर दी. अब बारी जनता की थी. 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी. तात्‍कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव हार गईं.
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आपातकाल बंदियों को माना जाएगा स्वतंत्रता सेनानी - नरेन्द्र मोदी







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आपातकाल बंदियों को माना जाएगा स्वतंत्रता सेनानी
Posted On June - 25 - 2014
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा)
सरकार आपातकाल के दौरान बंदी बनाए गये लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष मान्यता देकर उचित सम्मान दिलाने तथा भत्ता या पेंशन देने की मांग पर विचार कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस संबंध में राज्यसभा सांसद केसी त्यागी के पत्र का जवाब देते हुए कहा, ‘आपका पत्र प्राप्त हुआ जो आपात काल के दौरान बंदी बनाए गये लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष मान्यता देकर उचित सम्मान दिलाने एवं भत्ता या पेंशन देने के संबंध में है। मैं इस मामले पर गौर करवा रहा हूं।’
त्यागी ने आपातकाल में मीसा के तहत बंद शिव कुमार मिश्र के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि मिश्र ने केन्द्र सरकार से आपातकालीन बंदियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष मान्यता देकर उनको सम्मानित करने और उनको स्वाधीनता सेनानियों के बराबर भत्ता या पेंशन देने का निवेदन किया है।
आज आपातकाल की 39 वीं वर्षगांठ है। उन्होंने कहा कि स्वाधीन भारत में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में यह जन आंदोलन चला था, जिससे देश में लगे आपातकाल को हटाया गया था एवं प्रेस तथा देश की आजादी को पुन: स्थापित किया गया था।
इस आंदोलन में देश के राजनेता एवं आम जनता ने पूरी ताकत के साथ भाग लिया था।
त्यागी ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि वह मिश्र द्वारा उठाये गये मुद्दे पर संज्ञान लेकर आपातकाल के कैदियों को उचित सम्मान दिलाने के लिए निर्देशित करें।
मिश्र ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जिक्र किया है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात सरकारों ने आपातकालीन बंदियों को मानदेय देना शुरू किया है। बिहार में जयप्रकाश सम्मान निधि के नाम से आपातकालीन बंदियों को मानदेय की व्यवस्था है। उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को तीन हजार रुपए मानदेय प्रति माह देना शुरू किया गया है। तमिलनाडु और पंजाब में मानदेय दिया जा रहा है।