बुधवार, 9 जुलाई 2014

नेशनल हेराल्ड केस:सोनिया, राहुल गांधी को कोर्ट ने समन जारी




नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया, राहुल गांधी की पेशी


पी7 ब्‍यूरो/नई दिल्‍ली 09 July 2014

http://www.p7news.tv

हेराल्ड नेशनल अखबार मामले में पटियाला कोर्ट में बुधवार को सुनवाई है। इस मामले में कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को समन जारी किया है। अगर मामला साबित होता है तो कांग्रेस को चंदे पर मिलने वाली आयकर छूट से वंचित किया जा सकता है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी और ऑस्कर फर्नांडिज इस मामले में कोर्ट में आज पेश हो सकते है। बता दें कि इस मामले में 26 जून को कोर्ट ने समन दिया था, जबकि विपक्ष इस मामले मे सत्ता पक्ष पर बदले की राजनीति का आरोप लगा रहा है।

क्‍या है मामला
कांग्रेस ने नवंबर 2012 में एसोसिएट जर्नल को 90 करोड़ रुपये का ब्याज रहित कर्ज दिया था और नियमों के मुताबिक राजनैतिक पार्टी इस तरह का कर्ज नहीं दे सकती। हालांकि इस मामले में कांग्रेस ने कहा है कि कर्ज सभी कानूनों का पालन करते हुए दिया गया है। कांग्रेस को राजनैतिक पार्टी होने के नाते चंदे पर आयकर से छूट प्राप्त है। लेकिन आरोप है कि कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएट जर्नल को 90 करोड़ रुपये ब्याजमुक्त ऋण दिया था। ऋण लेने के बाद एसोसिएट जर्नल का अधिग्रहण यंग इंडिया नाम की एक नई कंपनी ने कर लिया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा उपाध्यक्ष राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी ऑस्कर फर्नांडिस तथा मोतीलाल वोहरा के नाम है।

अगर मामला साबित होता है..
आयकर विभाग और आरपीए एक्ट के मुताबिक, कोई भी राजनैतिक पार्टी किसी बिजनेस और फंड में इन्वेस्ट नहीं कर सकती। अगर मामला साबित होता है तो कांग्रेस को चंदे पर मिलने वाली आयकर छूट से वंचित किया जा सकता है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले की जांच आयकर विभाग से करवाने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली को खत भी लिखा था।
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नेशनल हेराल्ड केस: आयकर नोटिस पर सोनिया ने कहा-'राजनीतिक बदले की कार्रवाई'

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज नेशनल हेराल्ड मामले में आयकर नोटिस के मद्देनजर सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के राजनीतिक बदले की कार्रवाई से हमें वापसी में मदद ही मिलेगी।
सोनिया गांधी ने कथित नोटिस पर अपनी प्रतिक्रिया में एनडीटीवी से कहा, ‘‘नेशनल हेराल्ड मामले में आयकर नोटिस राजनीतिक प्रतिशोध है। राजनीतिक बदले की कार्रवाई से हमें वापसी और सख्ती से मुकाबला करने में मदद ही मिलेगी।
कांग्रेस ब्रीफिंग के दौरान पार्टी प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने एआईसीसी को कल नोटिस मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस नोटिस और पहले की प्रक्रियाओं का जोरदार, मजबूत और व्यापक जवाब, एक उपयुक्त जवाब दिया जा रहा है।
प्रवक्ता ने कहा कि जवाब से पहले मीडिया को इस बारे में बताने की कांग्रेस की आदत नहीं रही है लेकिन आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध, नई चुनी हुई सरकार के भय और असुरक्षा को प्रदर्शित करता है।
सिंघवी ने कहा कि राजनीति का इतिहास बताता है कि प्रतिशोध की राजनीति का किस तरह उल्टा असर पड़ता है। यह सस्ती राजनीति है और इतिहास जाहिर करता है कि जब किसी ने प्रतिशोध की भावना से काम किया तो क्या हुआ।
सवालों के जवाब में सिंघवी ने कहा कि जो कुछ हुआ है वह राजनीति से प्रेरित है और भाजपा नेता द्वारा शुरू किया गया है इस सचाई के बगैर कि इसमें अपराध का कोई तत्व नहीं है। इसके बावजूद मीडिया के समक्ष इसे सनसनी खेज बनाया गया। उन्होंने कहा कि उपयुक्त मंच पर हमारे पास काफी कुछ कहने के लिए है।
दिल्ली की एक अदालत ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र चलाने वाली कंपनी की संपत्ति अधिग्रहण करने के मामले में तलब किया है।
शिकायत में एक नई गठित कंपनी द्वारा ऐसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की संपति हासिल करने में विभिन्न अपराध करने के आरोप लगाए गए हैं और इस मामले में जांच की मांग की गई है।
(भाषा)
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नेशनल हेराल्‍ड केस: कोर्ट को सोनिया-राहुल के खिलाफ मिले प्रथम दृष्टया सबूत, पेश होने के आदेश
नई दिल्‍ली. गर्मियों की छुट्टी मना रहे कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को दिल्‍ली की एक अदालत ने नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र से जुड़ी वित्तीय अनियमितता के एक मामले में समन जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि सोनिया और राहुल गांधी समेत सभी आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मिले हैं, लिहाजा ये अदालत में पेश हों। पेशी की तारीख 7 अगस्‍त तय की गई है। मामले में कांग्रेसी नेता मोतीलाल वोरा, पूर्व केंद्रीय मंत्री ऑस्‍कर फर्नांडिस, सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के नाम भी समन जारी किया गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर कोर्ट ने यह समन जारी किया है।
नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की स्थापना 1938 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने की थी। यह 2008 में बंद हो गया था। स्‍वामी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने सोनिया की कंपनी यंग इंडिया लिमिटेड को बिना किसी जमानत के लोन दिया ताकि वे नेशनल हेराल्‍ड की होल्‍ड‍िंग वाली कंपनी असोसिएटेड जर्नल्‍स का अधिग्रहण कर सकें। स्‍वामी ने यह भी आरोप लगाया कि नेशनल हेराल्‍ड की 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति को कांग्रेसी नेताओं ने फर्जी कागजात के माध्‍यम से हासिल कर लिया। स्‍वामी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सोनिया और राहुल के हस्‍ताक्षर उनके नेशनल हेराल्‍ड केस में शामिल होने की पुष्टि करते हैं। स्‍वामी ने कहा कि यह फ्रॉड और विश्‍वासघात का मामला है और सोनिया-राहुल को 7 साल से लेकर उम्रकैद की सजा हो सकती है। वहीं, उधर, कांग्रेस प्रवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि डॉ स्‍वामी एंटी कांग्रेसी अभियान चलाने के लिए जाने जाते हैं। वह बिना सबूतों के आरोप लगा रहे हैं। हम इसका कड़ा जवाब देंगे। dainikbhaskar.com|
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महंगाई पर चर्चा : राहुल की आँखें बंद

राहुल गांधी का उंघना , सोना या आँखें बंद करना गलत नहीं हे , क्यों की उनकी सरकार ने आलू चीनी और चावल सहित लाखों टन खाद्द्य वस्तुओं का निर्यात किया था ताकी मंहगाई बनी रहे ! जब तक नई फसल नहीं आये तब तक के लिए ये महंगाई का इंतजाम करके गए हैं । कोई इनकी पोल नहीं खोल दे इस लिए आँखें बंद किये हुए थे ।





महंगाई पर चर्चा के दौरान ऊंघ रहे थे राहुल
Date:Wednesday,Jul 09,2014

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। विपक्ष के जोरदार हंगामे के बाद जब लोकसभा में महंगाई पर चर्चा चल रही थी, उस समय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ऊंघ रहे थे। यह वाकया उस वक्त हुआ जब सांसद महंगाई पर वक्तव्य दे रहे थे। यह वीडियो सोशल साइट्स पर वायरल होने के बाद भाजपा ने जब इस पर तंज कसा तो कांग्रेस भड़क।

महंगाई पर चर्चा के दौरान जब माकपा के सांसद पी. करुणाकरण बोल रहे थे तो ठीक उनके पीछे ऊंघते हुए राहुल गांधी कैमरे में कैद हो गए। सोशल साइट्स पर फैले इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ देर बाद उनकी आंख खुलती है तो वह बहुत सुस्त हैं और उबासी ले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने मौका न गंवाते हुए कहा कि कांग्रेस महंगाई पर चर्चा नहीं बस नारा लगाना जानती है, इसीलिए उनके उपाध्यक्ष सो रहे हैं।'

कांग्रेस ने इस बात खंडन किया है। कांग्रेस ने कहा है कि राहुल गांधी सो नहीं रहे थे।
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने राहुल गांधी के लोकसभा में सोने के विवाद पर मीडिया को ही खरी-खोटी सुना दी। उन्होंने कहा कि यह घटिया दर्जे की पत्रकारिता है। ऐसी घटनाओं पर चर्चा करने की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं, वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी इस विवाद में खींच लाए। शुक्ला ने कहा कि संसद में चर्चा के दौरान अक्सर वाजपेयी आंखें बंद कर लेते थे।

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजनीतिक सफर...


बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बने अमित शाह

आईबीएन-7 | Jul 09, 2014

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खासमखास अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। बीजेपी दफ्तर में हुई पार्टी की संसदीय दल की बैठक में सर्वसम्मति से अमित शाह के नाम पर मुहर लगाई गई। बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत पार्टी के कई बड़े नेता मंच पर आए और राजनाथ सिंह ने अमित शाह को पार्टी का अध्यक्ष बनाए जाने का ऐलान किया। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और दूसरे नेता मौजूद थे। सबने मिठाई खिलाकर अमित शाह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की बधाई दी।

डेढ़ साल के लिए बनेंगे अध्यक्ष!
हाल के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी मिली चमत्कारिक सफलता का श्रेय पार्टी प्रभारी रहे अमित शाह को ही दिया जाता है। अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास सिपहसालार हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव में यूपी को पूरी तरह भगवा रंग में रंग डाला। पार्टी ने भी इनाम के तौर पर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। हांलाकि जेपी नेड्डा और ओ.पी.माथुर जैसे दिग्गजों का नाम भी था, लेकिन जीत अमित शाह की ही हुई।

लोकसभा चुनाव में योगदान
पिछले दो लोकसभा चुनावों में दस सीटों पर अटकी बीजेपी को यूपी में इस बार 71 सीटें मिली हैं। अमित शाह ने अपने सांगठनिक कौशल से सुस्त पड़े पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंक दी। उन्होंने हर गांव तक मोदी की लहर पहुंचाकर सामाजिक समीकरणों की स्थापित दीवारों को तोड़ दिया। हांलाकि बिजनौर की एक सभा में भड़काऊ भाषण देने के आरोप पर निर्वाचन आयोग ने उनकी सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध भी लगाया, लेकिन जल्द ही उन्हें क्लीनचिट मिल गई।

2003 में गुजरात के गृहमंत्री बने
1964 में एक कारोबारी परिवार में जन्मे अमित शाह ने बीएससी करने के बाद कुछ दिन स्टॉकब्रोकर का काम भी किया था। राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर की थी। अमित शाह ने 1997 से लगातार पांच बार गुजरात विधानसभा के लिए चुने गये। मोदी ने 2003 में अमित शाह को गुजरात का गृहराज्यमंत्री बनाया।

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अमित शाह का गुजरात से दिल्ली तक का सफर

Wednesday,Jul 09,2014
नई दिल्ली। गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश में अपने सांगठनिक एवं प्रबंधकीय क्षमता का बेहतर प्रदर्शन कर भाजपा में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे अमित शाह को अब पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जीवन परिचय :
अमित शाह का पूरा नाम अमित अनिलचंद्र शाह है। इनका जन्म शिकागो में व्यवसायी अनिलचंद्र शाह के घर [मुंबई] 1964 में हुआ। अमित शाह ने बॉयोकेमेस्ट्री में बीएससी तक शिक्षा हासिल की। बाद में वह अपने पिता के व्यवसाय से जुड़ गए। आगे चलकर उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से भाजपा में प्रवेश किया। उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य भी बनाया गया।

राजनीतिक सफर :
कुछ समय तक उन्होंने स्टॉक ब्रोकर का भी कार्य किया। उसी दौरान वह आरएसएस से जुड़ गए और साथ ही भाजपा के सक्रिय सदस्य भी बन गए। इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गांधीनगर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उस समय ही अमित शाह उनके करीब आए और गांधीनगर क्षेत्र में चुनाव में आडवाणी के साथ चुनाव प्रचार किया।

शाह गुजरात स्टेट चेस एसोसिएशन के अध्यक्ष और गुजरात राज्य क्रिकेट एसासिएशन के उपाध्यक्ष भी रहे। गुजरात के पूर्व गृहमंत्री तथा लालकृष्ण आडवाणी के सबसे करीबी माने जाते थे। गुजरात के सबसे चर्चित अमित शाह , गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी सबसे चहेते माने जाते हैं।

उपलब्धियां :
अमित शाह सबसे कम्र उम्र के गुजरात स्टेट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष बने। इसके बाद वे अहमदाबाद जिला को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे। 2003 में जब गुजरात में दोबारा नरेंद्र मोदी की सरकार बनी, तब उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया और गृह मंत्रालय सहित कई जिम्मेदारियां सौंपीं। उसके बाद अमित शाह बहुत ही जल्द नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी बन गए।

अमित शाह अहमदाबाद के सरखेज विधानसभा क्षेत्र से लगातार 4 बार से विधायक हैं। 2002 में जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की 182 सीटों में से 126 सीटें जीती तो अमित शाह ने सबसे अधिक [1.58 लाख] वोटों से जीतने का रिकॉर्ड बनाया। अगले चुनाव में उनकी जीत का अंतर बढ़कर 2.35 लाख वोट हो गया।
2004 में केंद्र सरकार द्वारा आतंकवाद की रोकथाम के लिए बनाए गए आतंकवाद निरोधक अधिनियम के बाद अमित शाह ने राज्य विधानसभा में गुजरात कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज क्राइम [संशोधित] बिल पेश किया। हालांकि राज्य विपक्ष ने इस बिल का बहिष्कार किया था।

2008 में अहमदाबाद में हुए बम ब्लास्ट मामले को 21 दिनों के भीतर सुलझाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस बम ब्लास्ट में 56 लोगों की मृत्यु हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। उन्होंने राज्य में और अधिक बम ब्लास्ट करने के इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क के मंसूबों को भी नेस्तनाबूत किया था।

अमित शाह उत्तर प्रदेश लोक सभा चुनाव 2014 में भाजपा की जीत के प्रमुख रणनीतिकार और शख्सियत बनकर उभरे। लोकसभा चुनाव के दौरान एक आमसभा में भड़काऊ भाषण का आरोप लगा और चुनाव आयोग ने चुनावी रैली में भाषण देने पर पाबंदी लगाई। लेकिन उसमें भी उन्हें क्लीनचिट मिली। अमित शाह पर भाजपा ने एक बार अपना फिर से अपना विश्वास जताया और उन्हें आज पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
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उप्र में बेहतर काम करने का मिला इनाम, अमित शाह बने भाजपा अध्यक्ष


नई दिल्ली, जाब्यू। पिछले डेढ़ महीने के संशय को खत्म करते हुए बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ताज अमित शाह को पहना दिया गया। पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि अमित शाह को भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का जिम्मा सौंपा गया है।

'दैनिक जागरण' ने पहले ही इसकी जानकारी दी थी कि शाह के नाम पर अंतिम फैसला हो चुका है। फिलहाल शाह पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के वर्तमान काल के बचे हुए समय तक के लिए अध्यक्ष बनाए जा रहे हैं। बजट सत्र के बाद राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बोर्ड के फैसले पर मुहर लगाई जाएगी।
वैसे शाह को उसी वक्त से भावी अध्यक्ष के तौर पर देखा जा रहा था जब लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश से 73 सीटों का तोहफा दिया था। हर स्तर पर उनके नाम को समर्थन मिल चुका था, लेकिन सही वक्त की प्रतीक्षा की जा रही थी। अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद शाह जल्द ही अपनी टीम की घोषणा कर देंगे। कुछ महासचिवों के पद जहां रिक्त हैं वहीं कुछ चेहरे हटाए जा सकते हैं।
दरअसल, शाह के सामने पहली चुनौती के रूप में महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्य होंगे जहां पार्टी दस से पंद्रह वर्षो से सत्ता से बाहर है। लिहाजा, शाह ऐसे लोगों को स्थान देंगे जो पहले दिन से संगठन को मजबूत करने की स्थिति में हों।

नई करवट ले रहा है अपना राष्ट्र - पाथेयकण



नई करवट ले रहा है अपना राष्ट्र - पाथेयकण

केन्द्र में नई सरकार बन भी गई है और उसने काम भी शुरू कर दिया है। पूत के पैर पालने में ही दिख जाते हैं, उसी प्रकार नई सरकार भी जनता के उसमें जताये विश्वास पर खरी उतरती दिखाई पड़ रही है। भारत का इतिहास एक नई करवट लेता दृष्टिगोचर हो रहा है। परिणामस्वरूप लोगों में उत्साह, आत्मविश्वास और सामर्थ्य प्रकट होता दिख रहा है।

यूं तो परिवर्तन की हवा काफी पहले से चल रही थी लेकिन चुनाव परिणामोें ने इसे नई गति प्रदान कर दी । चुनाव परिणाम रहे भी ऐतिहासिक और उत्साहवर्द्धक। कई कीर्तिमान इस बार बने। पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ । भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार अखिल भारतीय स्वरूप प्रकट किया। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक भाजपा ने उपस्थिति दर्ज की। सुदूर उत्तर में लद्‌दाख लोकसभा सीट से भाजपा का प्रत्याशी विजयी हुआ हैतो धुर दक्षिण में कन्याकुमारी में भी भगवा परचम फहरा है। पश्चिम में गुजरात में सभी 26 सीटें भाजपा की झोली में गई हैंतो एक एकदम पूर्व में अरुणाचल प्रदेश में भी दो में से एक सांसद भाजपा का बना है। उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में तो चारों ओर राष्ट्रवाद का ही शंखनाद हुआ है। दक्षिण में कर्नाटक फिर से केसरिया हो गया है।

भारतीय राजनीति में पहली बार ऐसा हुआ है एक गैर-कांग्रे्रसी और अत्यंत साधारण परिवार में जन्मा व्यक्ति लोकप्रियता के शिखर पर जा कर प्रधानमंत्री बना है। विपरीत परिस्थितियों, घनघोर दुष्प्रचार और वैमनस्यपूर्ण आरोपों को किनारे करते हुए देश के लिये कुछ करने का सामर्थ्य रखने वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री बना है। जबर्दस्त सकारात्मक जनादेश प्राप्त कर पहली बार एक जुझारू व्यक्ति ने देश की बागडोर सम्भाली है। लम्बे अन्तराल के बाद पहली बार देश को एक योग्य, बेहद लोकप्रिय, भरपूर आत्मविश्वास और स्वाभिमान से युक्त सामर्थ्यशाली नेतृत्व मिला है।
हमारे प्रधानमंत्री ने प्रारम्भ में ही यह संदेश दे दिया है कि भारत अब "इण्डिया' नहीं रहेगा, बल्कि भारत बनेगा, इस देश की आत्मा अब सरकार के प्रत्येक क्रिया-कलाप में प्रकट होगी। संसद भवन अब मत्था टेकने योग्य लोकतंत्र का मंदिर बनेगाऔर जनप्रतिनिधि देश, समाज और जन-जन की सेवा का माध्यम बनेंगे। "दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ' (सार्क) के देशों के अतिरिक्त मारिशस के राष्ट्राध्यक्ष को भी श्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया गया था। दूसरे दिन सभी से नव-नियुक्त प्रधानमंत्री ने वार्ता की। यह देशवासियों के लिये गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री ने सभी से राष्ट्रभाषा हिन्दी में बात की।
अब तक टेढ़े-टेढ़े चलने वाला अमरीका भी अब सीधे रास्ते पर आया है। श्री नरेन्द्र भाई मोदी को वीजा देने से यह देश इन्कार करता रहा, जब कि वीजा कभी मॉंगा ही नहीं गया था। दुनिया ताकत की भाषा समझती है और इसलिये अमरीकी राष्ट्रपति ने न केवल श्री मोदी को बधाई दी बल्कि बार-बार अमरीका आने का निमंत्रण भी दिया।
हमारा देश सदा से सामर्थ्यशाली रहा है। अब तक उस ऊर्जा पर राख की परत जमी थी। राष्ट्रवादी शक्तियॉं लम्बे समय से यह राख हटाने का प्रयास कर रही थीं। देश में आ रहा सुखद परिवर्तन उसी भगीरथ प्रयास का नतीजा है।

गुरु पूर्णिमा : गुरु के बिना, राष्ट्र धर्म भी नहीं : तरुण विजय







गुरु पूर्णिमा गुरु के बिना राष्ट्र धर्म भी नहीं : तरुण विजय
तारीख: 05 Jul 2014
http://panchjanya.com



मगध  के छिन्न-भिन्न हो रहे साम्राज्य को कौन बचाता अगर चन्द्रगुप्त के चाणक्य ना होते? बर्बर मुस्लिम आक्रमणकारियों से हिन्दू राष्ट्र की रक्षा कौन करता अगर छत्रपति शिवाजी के समर्थ गुरु रामदास ना होते? गुरू गोदिं सिंह का खलसा पंथ कैसे सिरजा जाता तथा भारत और समाज की रक्षा कैसे होती अगर गुरु ग्रंथ साहिब की अमर बाणी ना होती? वर्तमान भारतवर्ष की पराधीनता की बेडि़यां तोड़कर स्वतंत्रता और हिन्दू स्वाभिमान की क्रांति कैसे प्रारंभ होती अगर डा. हेडगेवार के साथ भगवा ध्वज की शाश्वत बलिदानी परम्परा का गुरु-बल ना होता?

भारत के प्राण सभ्यतामूलक संस्थाओं में बसे हैं। माता, पिता और गुरु-ये वे संस्थान हैं जिन्होंने इस देश की हवा, पानी और मिट्टी को बचाया। रामचरित मानस में श्रीराम के बाल्यकाल के गुणों में सबसे प्रमुख है मात-पिता गुरु नाविही माथा। वे माता-पिता और गुरु के आदेश से बंधे थे और जो भी धर्म तथा देश के हित में हो वही आदेश उन्हें माता-पिता और गुरु से प्राप्त होता था। जब वे किशोरवय के ही थे और उनकी मसें भी नहीं भीगी थीं तभी गुरु वशिष्ठ उन्हें देश, धर्म और समाज की रक्षा के लिए उनके पिता दशरथ से मांग कर ले गये। जब देश संकट में हो और धर्म पर मर्दायाहीनता का आक्रमण हो तो समाज के तरुण और युवा शक्ति क्या सिर्फ अपना कैरियर और भविष्य को बनाने में लगी रहे? यह गुरू का ही प्रताप और मार्गदर्शन होता है कि वह समाज को राष्ट्र तथा धर्म की रक्षा के लिए जागृत और चैतन्य करे।

जब कश्मीर के हिन्दू पंडितों पर संकट आया और इस्लाम के आक्रमणकारियों ने उन्हें घाटी से बाहर खदेड़ दिया तो कश्मीर से 11 पंडित गुरु तेग बहादुर साहिब के पास आये। उनकी व्यथा सुनकर गुरु तेग बहादुर साहिब बहुत पीडि़त हुए। उनके मुंह से शब्द निकले कि आपकी रक्षा के लिए तो किसी महापुरुष को बलिदान देना होगा। उस समय नन्हें बालक गोबिंद राय, जो कालांतर में गुरु गोबिंद कहलाए, हाथ जोड़कर बोले, हे सच्चे पातशाह, आपसे बढ़कर महापुरुष कौन हो सकता है? गुरु तेग बहादुर साहिब ने गोबिंद राय को आशीर्वाद दिया और कश्मीरी पंडितों की रक्षा की। यह गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान ही था कि उन्हें हिन्द की चादर कहा गया। गुरु तेग बहादुर के बलिदान के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी के दोनों साहिबजादे, जोरावर सिंह और फतेह सिंह सरहंद के किले में काजी के द्वारा जिंदा दीवार में चिनवा दिये गये। वीर हकीकत राय ने धर्म के लिए प्राण दे दिये लेकिन धर्म नहीं छोड़ा। यह कौन सी शक्ति थी जो उनके पीछे काम कर रही थी? वह कौन सा ज्ञान धन था कि जिसने इन वीरों के ह्रदय में राष्ट्रधर्म की रक्षा के लिए आत्मोत्सर्ग करने की हिम्मत भर दी?

शिष्य क्या, दुर्जन तक का कल्याण कर देता है गुरु : मुरारी बापू
आचार्य बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने अपनी अमरकृति आनंद मठ में उन्हीं महान आचार्यों की खड्गधारी परम्परा का अद्भुत और आग्नेय वर्णन किया है जो भवानी भारती की रक्षा के लिए शत्रु दल का वैसे ही संहार करते गये जैसे महिषासुर मर्दिनी शत्रुओं का दलन करती है। वंदेमातरम् के जयघोष के साथ जब संन्यासी योद्धा अश्व पर सवार होकर शत्रुओं पर वार करते थे तो अरिदल संख्या में अधिक होते हुए भी काई की तरह फटता जाता था। वंदेमातरम् से विजयी आकाश नादित हो उठता था।
डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की तो परम पवित्र भगवा ध्वज को अपना गुरू मानने के पीछे यही कारण था कि वे शताब्दियों से सिंचित सभ्यता और संस्कृति के बल से हिन्दू राष्ट्र को जीवंत करना चाहते थे। यदि राष्ट्र के घटकों की स्मृति में त्याग, तप और बलिदान की विजयशाली परम्परा जीवित है तो दुनिया की कोई शक्ति ना उन्हें परस्त कर सकती है और ना ही पराधीन बना सकती है। भगवा ध्वज रामकृष्ण, दक्षिण के चोल राजाओं, सम्राट कृष्णदेव राय, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह और महाराजा रणजीत सिंह की पराक्रमी परम्परा और सदा विजयी भाव का सर्वश्रेष्ठ प्रतीक है। इसमें यदि सम्राट हर्ष और विक्रमादित्य का प्रजा वत्सल राज्य अभिव्यक्त होता है तो व्यास, दधीचि और समर्थ गुरु रामदास से लेकर स्वामी रामतीर्थ, स्वामी दयानंद, महर्षि अरविंद, रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद तक का वह आध्यात्मिक तेज भी प्रकट होता है जिसने राष्ट्र और धर्म को संयुक्त किया तथा आदिशंकर की वाणी से यह घोषित करवाया कि राष्ट्र को जोड़ते हुए ही धर्म प्रतिष्ठित हो सकता है। जो धर्म साधना राष्ट्र और जन से विमुख हो केवल अपने मोक्ष के लिए कामना करे वह धर्म साधना भारत के गुरुओं ने कभी प्रतिष्ठित नहीं की। स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना करते हुए उसका उद्देश्य 'आत्मनो मोक्षार्थ जगद् हिताय च' रखा। अर्थात मनुष्यों के कल्याण में ही मेरा मोक्ष है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का रक्षा कवच बना और उसके स्वयंसेवक प्रधानमंत्री पद से लेकर देश के सीमावर्ती गांवों तक में भारत के नये अभ्युदय के लिए कार्य कर रहे हैं और इसके पीछे भारत की सभ्यता और संस्कृति का तपोमय बल है जो गुरु परम्परा से ही जीवित रहा है। इसलिए गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देश भर में करोड़ों स्वयंसेवक भगवा ध्वज के समक्ष प्रणाम निवेदित करते हुए शुद्ध समर्पण भाव से गुरु-दक्षिणा अर्पित करते हैं। यह न तो शुल्क है और न ही चंदा। यह राष्ट्र के लिए बलिदानी भाव से ओत-प्रोत स्वयंसेवकों का श्रद्धामय प्रणाम ही होता है जो दक्षिणा राष्ट्र रक्षा करते हुए शिवाजी ने समर्थ गुरु रामदास को दी। राष्ट्र रक्षा का वही संकल्प संघ के स्वयंसेवक भगवा ध्वज को अर्पित करते हैं।

संघ साधना : परम गुरु : परम पवित्र भगवाध्वज




संघ साधना में गुरु का महत्व
- पृथ्वी सिंह"चित्तौड़"

(श्री गुरु पूर्णिमा 12 july 2014 पर विशेष,
स्वयंसेवक बंधुओं से निवेदन है इसका पूरा अध्ययन करें)

रामराज्य अर्थात इस भारत भूमि के परम वैभव की साधना में लीन कर्मयोगियों के लिये साधना अनुरूप मार्गदर्शन की समय समय पर आवश्यकता पडती हैं ।इस अनिवार्य आवश्यकता को ध्यान में रख कर प.पू.डा.हेडगेवारजी (संघ rss संस्थापक) ने परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरु रूप में हम सभी के समक्ष रखा । संघ कार्य में गुरु के महत्व पर आज कुछ विचार करें । ॐ
गुरु के महत्व पर संत शिरोमणि तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा है –
गुर बिनु भवनिधि तरइ न कोई।
जों बिरंचि संकर सम होई।।
भले ही कोई ब्रह्मा, शंकर के समान क्यों न हो, वह गुरु के बिना भव सागर पार
नहीं कर सकता। धरती के आरंभ से ही गुरु
की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला गया है। वेदों, उपनिषदों, पुराणों, रामायण,
गीता, गुरुग्रन्थ साहिब आदि सभी धर्मग्रन्थों एवं
सभी महान संतों द्वारा गुरु की महिमा का गुणगान किया गया है। गुरु
और भगवान में कोई अन्तर नहीं है। संत शिरोमणि तुलसीदास
जी रामचरितमानस में लिखते हैं –
बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।
अर्थात् गुरू मनुष्य रूप में नारायण ही हैं। मैं उनके चरण
कमलों की वन्दना करता हूँ। जैसे सूर्य के निकलने पर अन्धेरा नष्ट हो जाता है,
वैसे ही उनके वचनों से मोहरूपी अन्धकार का नाश हो जाता है।
किसी भी प्रकार की विद्या हो अथवा ज्ञान हो, उसे
किसी दक्ष गुरु से ही सीखना चाहिए। जप, तप,
यज्ञ, दान आदि में भी गुरु का दिशा निर्देशन जरूरी है
कि इनकी विधि क्या है? अविधिपूर्वक किए गए सभी शुभ कर्म
भी व्यर्थ ही सिद्ध होते हैं जिनका कोई उचित फल
नहीं मिलता। स्वयं की अहंकार की दृष्टि से किए गए
सभी उत्तम माने जाने वाले कर्म भी मनुष्य के पतन का कारण बन
जाते हैं। अत: संघ कार्य हमें अहंकार शून्य बनाता है ।भौतिकवाद में भी गुरू
की आवश्यकता होती है।
सबसे बड़ा तीर्थ तो गुरुदेव ही हैं जिनकी कृपा से फल
अनायास ही प्राप्त हो जाते हैं। गुरुदेव का निवास स्थान शिष्य के लिए
तीर्थ स्थल है। उनका चरणामृत ही गंगा जल है। वह मोक्ष
प्रदान करने वाला है। गुरु से इन सबका फल अनायास ही मिल जाता है।
ऐसी गुरु की महिमा है।
तीरथ गए तो एक फल, संत मिले फल चार।
सद्गुरु मिले तो अनन्त फल, कहे कबीर विचार।।
मनुष्य का अज्ञान यही है कि उसने भौतिक जगत को ही परम
सत्य मान लिया है और उसके मूल कारण चेतन को भुला दिया है
जबकि सृष्टि की समस्त क्रियाओं का मूल चेतन शक्ति ही है।
चेतन मूल तत्व को न मान कर जड़ शक्ति को ही सब कुछ मान
लेनाअज्ञानता है। इस अज्ञान का नाश कर परमात्मा का ज्ञान कराने वाले गुरू
ही होते हैं।
किसी गुरु से ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रथम आवश्यकता समर्पण
की होती है। समर्पण भाव से ही गुरु का प्रसाद शिष्य
को मिलता है। शिष्य को अपना सर्वस्व श्री गुरु देव के चरणों में समर्पित कर
देना चाहिए। इसी संदर्भ में सद गुरु कबीरदास जी ने उल्लेख किया गया है कि
यह तन विष की बेलरी, और गुरू अमृत की खान,
शीश दियां जो गुरू मिले तो भी सस्ता जान।
हमारा गुरु हमसे राष्ट्र यज्ञ में समय की आहुति चाहते है ।
गुरु ज्ञान गुरु से भी अधिक महत्वपूर्ण है। प्राय: शिष्य गुरु को मानते हैं पर
उनके संदेशों को नहीं मानते। इसी कारण उनके जीवन में
और समाज में अशांति बनी रहती है।
गुरु के वचनों पर शंका करना शिष्यत्व पर कलंक है। जिस दिन शिष्य ने गुरु को मानना शुरू
किया उसी दिन से उसका उत्थान शुरू शुरू हो जाता है और जिस दिन से शिष्य ने गुरु
के प्रति शंका करनी शुरू की, उसी दिन से शिष्य
का पतन शुरू हो जाता है।
सद्गुरु एक ऐसी शक्ति है जो शिष्य की सभी प्रकार
के ताप-शाप से रक्षा करती है। शरणा गत शिष्य के दैहिक, दैविक, भौतिक
कष्टों को दूर करने एवं उसे बैकुंठ धाम में पहुंचाने का दायित्व गुरु का होता है।
आनन्द अनुभूति का विषय है। बाहर की वस्तुएँ सुख दे सकती हैं
किन्तु इससे मानसिक शांति नहीं मिल सकती। शांति के लिए गुरु
चरणों में आत्म समर्पण परम आवश्यक है। सदैव गुरुदेव का ध्यान करने से
जीव नारायण स्वरूप हो जाता है। वह
कहीं भी रहता हो, फिर भी मुक्त ही है।
ब्रह्म निराकार है। इसलिए उसका ध्यान करना कठिन है। ऐसी स्थिति में सदैव
गुरुदेव का ही ध्यान करते रहना चाहिए। गुरुदेव नारायण स्वरूप हैं। इसलिए गुरु
का नित्य ध्यान करते रहने से जीव नारायणमय हो जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु रूप में शिष्य अर्जुन को यही संदेश
दिया था –
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्याि माम शुच: ।। (गीता 18/66)
अर्थात् सभी साधनों को छोड़कर केवल नारायण स्वरूप गुरु
की शरणगत हो जाना चाहिए। वे उसके सभी पापों का नाश कर देंगे।
शोक नहीं करना चाहिए।
जिनके दर्शन मात्र से मन प्रसन्न होता है, अपने आप धैर्य और शांति आ
जाती हैं, वे परम गुरु हैं। जिनकी रग-रग में ब्रह्म का तेज व्याप्त
है, जिनका मुख मण्डल तेजोमय हो चुका है, उनके मुख मण्डल से
ऐसी आभा निकलती है कि जो भी उनके
समीप जाता है वह उस तेज से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।संघ स्थान पर विद्यमान प.पवित्र भगवा ध्वज उसी नारायण का मूर्ति मान स्वरूप है ।
उस गुरु के शरीर से निकलती वे अदृश्य किरणें
समीपवर्ती मनुष्यों को ही नहीं अपितु
पशु पक्षियों को भी आनन्दित एवं मोहित कर देती है। उनके दर्शन
मात्र से ही मन में बड़ी प्रसनन्ता व शांति का अनुभव होता है। मन
की संपूर्ण उद्विग्नता समाप्त हो जाती है। ऐसे परम गुरु
को ही गुरु बनाना चाहिए। और ये सभी भगवत गुण हमारे श्री गुरु परम पवित्र भगवद ध्वज में प्रत्यक्ष है ।