मंगलवार, 15 जुलाई 2014

राजस्थान में पालिका वार्डों का पुर्न गठन



राजस्थान में पालिका वार्डों का पुर्न गठन 

स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देश के अनुसार वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर चुनाव से पूर्व वार्डों का पुर्नगठन किया जाएगा। 2011 में पुष्कर की जनसंख्या 21, 626 थी। नतीजतन पुष्कर में मौजूदा 17 वार्डों को बढ़ा कर 20 किए जाएंगे। मालूम हो कि 2011 में ग्राम पंचायत देवनगर के अधीनस्थ गांव कानस, नेडलिया, डांग पालिका सीमा में शामिल थे तथा 20 वार्ड किए गए थे। इन्हें ग्रामीणों के विरोध के चलते वर्ष 2013 में पालिका सीमा से वापस बाहर कर दिया गया था। इस कारण पालिका के 20 में से 3 वार्डो का अस्तित्व समाप्त हो गया तथा वर्तमान में 17 वार्ड अस्तिव में है। गत विधानसभा लोकसभा चुनाव में भी पालिका के 17 वार्डों के अनुसार मतदान हुआ था।

जुलाई तक करना होगा वार्डों का गठन : स्वायत्त शासन विभाग के उप शासन सचिव द्वारा घोषित किए गए कार्यक्रम के अनुसार वार्ड गठन 30 जून से 19 जुलाई तक किया जाएगा। इसके तत्काल बाद वार्ड गठन का प्रकाशन, परिसीमांकन, आपत्तियों पर सुनवाई की जाएगी। इसके के लिए 20 से 30 जुलाई निर्धारित की गई है। इसी अवधि के दौरान जिला कलेक्टर का वार्डों का अंतिम प्रारूप राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। एक से 10 अगस्त तक राज्य सरकार प्रारूप अनुमोदित करेगी। इसके बाद 11 से 16 अगस्त तक वार्डों का आरक्षण तथा अंतिम प्रकाशन होगा।

स्वायत्त शासन विभाग ने घोषित किया कार्यक्रम
नगर निकायों के चुनाव की सरगर्मियां शुरू
भास्कर न्यूज | पुष्कर
पुष्कर समेत प्रदेश की 46 नगर निकायों के आगामी नवंबर में होने वाले चुनाव की सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। चुनाव से पूर्व वार्डों के पुनर्गठन, प्रकाशन, आपत्तियों पर सुनवाई वार्डो का आरक्षण आदि होना है। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग ने कार्यक्रम घोषित करते हुए निर्देश जारी किए है। वहीं पुष्कर नगर पालिका प्रशासन ने विभागीय आदेशानुसार पालिका चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 

सौ से ज्यादा जरूरी दवाएं सस्ती होंगी


व्यापारिक क्षैत्र में कब कहां उपभोक्ता से लूट कर ली जाये, इसकी पूरी स्वतंत्रता है।
इनकी राजनीति पर भारी पकड भी है। इस कारण अभी तक न तो मुनाफे की उच्चतम सीमा तय है और नही स्टाक की उच्चतम सीमा तय है। इसका फायदा उठा कर हर तरफ लूट का साम्राज्य बना हुआ हे। इस मामले में राज्य सरकारें अधिक दोषी हैं उनको कोई चिन्ता ही नहीं है। केंद्र का प्रयास सराहनीय है किन्तु राज्य सरकारों को भी अपनी जिम्मेवारी निभानी चाहिए । 

सौ से ज्यादा जरूरी दवाएं होंगी सस्ती
Date:Monday,Jul 14,2014 


नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। हृदय रोग और मधुमेह सहित कई गंभीर बीमारियों की दवाएं अब सस्ती हो जाएंगी। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 108 और दवाओं का अधिकतम खुदरा मूल्य तय कर दिया है। ये दवाएं आवश्यक औषधि सूची (ईएलएम) में शामिल नहीं हैं। दवा कंपनियों ने इसे दवा उद्योग का गला घोटने वाला कदम बताया है।

एनपीपीए ने औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) 2013 के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अब उन दवाओं की भी अधिकतम कीमत तय कर दी है जो आवश्यक औषधि सूची में शामिल नहीं रही हैं। इसने बीते बृहस्पतिवार को जारी अपने आदेश में कहा है कि ये दवाएं बनाने वाली सभी दवा कंपनियों को इन दवाओं की अधिकतम मूल्य सीमा का पालन करना होगा। आम तौर पर एनपीपीए सिर्फ आवश्यक औषधि सूची में शामिल दवाओं की कीमत ही तय करता है। इस सूची में 652 दवाएं शामिल हैं लेकिन डीपीसीओ के अनुच्छेद 19 के तहत इसे यह अधिकार दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर यह अन्य दवाओं के लिए भी अधिकतम कीमत तय कर सकता है। जिन दवाओं की कीमत नियंत्रित की गई है, उनमें मधुमेह और हृदय रोग के अलावा एचआइवी और मलेरिया आदि की दवाएं भी शामिल हैं। रेनबैक्सी, सनोफी और एबॉट जैसी दवा कंपनियां अभी इन दवाओं को काफी ऊंची कीमत पर बेच रही हैं।

उधर, दवा कंपनियों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्यूटिकल प्रोड्यूसर्स आफ इंडिया (ओपीपीआइ) के अध्यक्ष शैलेश अयंगर कहते हैं कि पिछले साल लाए गए डीपीसीओ में साफ तौर पर लिखा गया है कि इस नीति का मकसद सिर्फ आवश्यक दवाओं की कीमत को नियंत्रण में रखना है, दवा उद्योग पर नियंत्रण रखना नहीं। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में ऐसी दवाओं की कीमत तय कर दिया गया है जो आवश्यक औषधि सूची में शामिल नहीं हैं। एनपीपीए का यह मनमाना कदम बहुत निराशाजनक है।

87 हजार श्रद्धालुओं ने किया नीलकंठ में जलाभिषेक



नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश

Neelkanth Mahadev Temple 
नीलकंठ महादेव मंदिर
temple dedicated to Nilkanth (Lord Shiva).The temple is situated
at 32 kms from Rishikesh

नीलकंठ महादेव मंदिर-
लगभग 5500 फीट की ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। विषपान के बाद विष के प्रभाव के से उनका गला नीला पड़ गया था और उन्हें नीलकंठ नाम से जाना गया था। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहां भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्थान करते हैं।

87 हजार श्रद्धालुओं ने किया नीलकंठ में जलाभिषेक
Date:Monday,Jul 14,2014 जागरण संवाददाता, ऋषिकेश :


श्रावण मास के पहले सोमवार को नीलकंठ महादेव मंदिर में रात्रि 10 बजे तक 87 हजार श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। पंचक काल को देखते हुए देर रात मंदिर से भीड़ छंट गई थी।
सोमवार से श्रावण मास की नीलकंठ यात्रा का शुभारंभ हुआ। बीती रात से ही कांवड़ियों का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। भगवान महादेव के विशेष श्रृंगार के बाद रात्रि 12 बजे सोमवार लगते ही मंदिर को दर्शनार्थ खोल दिया गया। प्रथम जलाभिषेक के लिए सैकड़ों कांवड़िये वहां मौजूद थे। सुबह होते ही मंदिर में भीड़ बढ़नी शुरू हुई थी। दोपहर दो बजे तक मंदिर से डेढ़ किलोमीटर पीछे तक श्रद्धालुओं की लाइन लग गई थी। सायं पांच बजे तक करीब 82900 श्रद्धालु नीलकंठ में जलाभिषेक कर चुके थे। रात्रि आठ बजे यह आंकड़ा 85800 तक पहुंच गया था। रात्रि 10 बजे तक 87000 श्रद्धालु नीलकंठ महादेव को जल चढ़ा चुके थे। सोमवार रात्रि 10:40 से पंचक लगने के कारण मंदिर से भीड़ छंट गई। भीड़ पर नियंत्रण के लिए पुलिस द्वारा सीसीटीवी कैमरों से भीड़ पर नजर रखी जा रही थी। अपर पुलिस अधीक्षक मुकेश चौहान, सीओ श्रीनगर सीएल तितरियाल, प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह मंदिर परिसर में ही जमे थे। पूरा क्षेत्र केसरिया रंग में रंग चुका था। प्रशासन की ओर से उप जिलाधिकारी डीपी सिंह, तहसीलदार सुभाष चंद्र ध्यानी आदि ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।