बुधवार, 30 जुलाई 2014

इंद्रधनुषी त्यौहारों का महीना श्रावण - पांचजन्य


इंद्रधनुषी त्यौहारों का महीना श्रावण


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श्रावण मास का महत्व\इन्द्रधनुष - अनेक पर्वों वाला है श्रावण मास

तारीख: 28 Jul 2014


वैदिक परम्परा में 'श्रावणे पूजयेत शिवम्' के नियमानुसार श्रावण मास में भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। श्रावण मास के आरंभ होते ही शिव भक्त कांवडि़ये हरिद्वार, ऋषिकेश और गोमुख से गंगाजल भरकर कांवड़ उठाये अपने-अपने घर को लौटते हैं। ऐसे में 'बम-बम भोले' के उद्घोष से पूरा वातावरण शोभायमान हो जाता है।
भगवान शंकर अपने भक्तों को इस कठिन साधना का सुफल अवश्य देते हैं। कांवड़ के अतिरिक्त श्रावण मास में अमरनाथ यात्रा, श्रावण की शिवरात्रि, नागपंचमी, हरियाली तीज और अंत में राखी का पर्व मुख्य रूप से आते हैं। श्रावण में सोमवार के व्रत और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है और इसीलिए इस माह को शिव आराधना का 'मास सिद्ध' कहते हैं। मंदिर में शिव परिवार पर जलाभिषेक विशेष महत्व रखता है और गंगाजल से भगवान शंकर का अभिषेक सर्वोत्तम माना गया है। जो श्रद्धालु मंदिर नहीं जा पाते हैं, वे घर में रखी शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं। शिव पुराण में विभिन्न द्रव्यों से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का फल बताया गया है। गन्ने के रस से धन प्राप्ति, शहद से अखण्ड पति का सुख, कच्चे दूध से पुत्र सुख, सरसों के तेल से शत्रु दमन और घी से रुद्राभिषेक करने पर सर्वकामना पूर्ण होती है। भगवान शिव की पूजा का सर्वश्रेष्ठ काल प्रदोष समय माना गया है। किसी भी दिन सूर्यास्त से एक घंटा पूर्व तथा एक घंटा बाद के समय को प्रदोषकाल कहते हैं।
श्रावण मास में त्रयोदशी, सोमवार और शिव चौदस प्रमुख दिन हैं। भगवान शंकर को भस्म, लाल चंदन, रुद्राक्ष, आक का फूल, धतूरा फल, बिल्व पत्र और भांग विशेष रूप से प्रिय हैं। भगवान शिव की आराधना वैदिक, पौराणिक या नाम मंत्रों से की जाती है। सामान्य व्यक्ति भी 'ऊंॅ नम: शिवाय या ऊंॅ नमो भगवते रुद्राय' मंत्र से शिव पूजन तथा अभिषेक कर सकते हैं। शिवलिंग की आधी परिक्रमा करनी चाहिए।
हिमालय नरेश की पुत्री देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए श्रावण मास में ही कठोर तपस्या की थी। इसी मास में समुद्र मंथन से हलाहल विष का पान कर भगवान शिव ने पूरी सृष्टि को बचाया था। इस माह में लघु रुद्र, महारुद्र और अतिरूद्र पाठ कराने का भी विधान है। श्रावण मास में जितने भी सोमवार पड़ें,यदि संभव हो तो श्रद्धालुओं को व्रत रखना चाहिए।
श्रवण कुमार के नाम पर है 'श्रावण मास'।
त्रेता युग में महाराजा दशरथ के हाथों भूलवश मारे गए श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता-पिता को तीर्थ कराकर लौट रहे थे। श्रवण कुमार क ी मृत्यु उपरान्त ही उनके माता-पिता ने भी पुत्र के वियोग में अपने प्राण त्याग दिए थे और उससे पूर्व महाराजा दशरथ को श्राप भी दिया था कि उनकी भी पुत्र के वियोग में मृत्यु होगी। उस समय अपनी भूल का प्रायश्चित करते हुए महाराजा दशरथ ने वचन दिया था कि श्रवणा कुमार को सदा याद रखा जाएगा। तभी से श्रावण मास की परम्परा शुरू हुई थी। श्रावण नक्षत्र भी होता है और राखी वाले दिन घरों में जो सतिया बनाया जाता है, वह श्रवण कुमार से ही संबंधित है। इसकी शुरुआत के बाद से ही कांवड़ लेकर आने की परम्परा शुरू हुई थी।
मंगला गौरी व्रत
श्रावण मास में प्रत्येक मंगलवार को शिव-गौरी का पूजन करना चाहिए जिसे मंगला गौरी व्रत कहते हैं। यह व्रत विवाह के बाद पांच वर्ष तक प्रत्येक स्त्री को करना चाहिए। विवाह के उपरान्त पहले श्रावण मास में पीहर में रहकर तथा अन्य चार वर्ष ससुराल में रहकर यह व्रत संपन्न किया जाता है। मंगल गौरी पूजा में 16-16 प्रकार के पुष्प, मालाएं, वृक्षों के पत्ते, दूर्वा, धतूरे के पत्ते, अनाज पान के पत्ते सुपारी और इलायची पूजा में चढ़ाई जाती है। पूजन के उपरान्त परिवार में सबसे बुजुर्ग महिला को 16 लड्डुओं का बायना देने की परंपरा है।
इन्द्र को बांधी थी सबसे पहले राखी
देवराज इन्द्र जब बार-बार असुरों से युद्ध में पराजय का मंुह देख रहे थे तो सबसे पहले उन्हें इन्द्राणी ने राखी बांधी थी। उस दिन पूर्णिमा का ही दिन था और राखी बंधवाने के बाद इन्द्र ने असुरों पर विजय प्राप्त की थी। तभी से राखी या रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। उसके बाद से बहन अपने भाई और भतीजों की दीर्घायु और रक्षा के लिए उन्हें राखी बांधने लगीं। राखी को मुख्य रूप से ब्राह्मणों का त्योहार माना जाता था। लेकिन आज इसे सभी वर्ग के लोग मनाने लगे हैं। वेद परायण के शुभारंभ को उपाकर्म कहते हैं। पूर्व में राखी के ही दिन पिछले वर्ष के वेदाध्ययन की समीक्षा और अध्ययन के नये सत्र का आरंभ विशेष रूप से किया जाता था। -आचार्य कृष्ण दत्त शर्मा

गाजा की गरज किसे लगती है गलत ? - पाञ्चजन्य




सामयिक- 

गाजा की गरज किसे लगती है गलत?

तारीख: 28 Jul 2014

दोेस्तों ये कैसी चिंतन-धारा है, कैसी मानवता है जो हिंसक के सामने मौन रहती है और आततायी के सामने समर्पित रहती है। ये कैसा हृदय है जो आक्रामक की दुष्टताओं की अवहेलना करता है और प्रत्युत्तर देने वाले की निंदा करता है।
आजकल गाजा पर इजरायल के प्रहारों को लेकर बहुत हाय-हाय की जा रही है. जमीन खो चुके तमाम कांग्रेसी, वामपंथी वाग्वीर कोलाहल मचाये हुए हैं इसलिए आवश्यक हो जाता है कि इस समस्या पर प्रारंभ से विचार किया जाये। संसार की प्राचीनतम किताबों में से एक ओल्ड टेस्टामेंट में इस बात की विस्तार से चर्चा है कि मोजेज या मूसा फिरओन के अत्याचारों से बचाने के लिये अपने लोगों अर्थात यहूदियों को लेकर मिस्र जो उस काल में इस पूरे क्षेत्र में फैला था, से निकल गये। इसी ग्रंथ में उनके इसी पैगंबर का वादा है कि एक दिन तुम अपनी धरती पर वापस लौटोगे। इसी कारण यहूदी इसे प्रतिश्रुत भूमि या प्रॉमिस्ड लैंड कहते हैं। हजारों वषोंर् तक यहूदी संसार भर में बिखरे रहे। एक अपवाद भारत वर्ष को छोड़कर तमाम ईसाई, मुस्लिम देशों में उनके साथ भयानक अत्याचार हुए। यहां तक कि कम्युनिस्ट रूस में भी लेनिन, स्टालिन के काल में लाखों यहूदी यातना दे-दे कर मार डाले गये। यहूदी स्वभाव से ही शांतिप्रिय हैं। ये व्यवसायी जाति है। उन पर सदियों तक अत्याचार हुए। दूसरे विश्व युद्घ में जर्मनी की नात्सी सरकार के हाथों करोड़ों यहूदी मार डाले गये। इसके उपरांत विश्व समुदाय के नेता विवश हो गये कि यहूदियों को उनका देश दिया जाए। कटी-फटी अवस्था में उनका देश इजरायल उन्हें दिया गया। ऐसा नहीं है कि 1948 में इजरायल बनाने के बाद ही यहूदी वहां बसने शुरू हुए। वो सदियों से उस क्षेत्र में इस आशा में रह रहे थे कि एक दिन ये उन्हें मिलेगा। सदियों तक संसार भर में एक यहूदी जब दूसरे यहूदी से विदा लेता था तो जैसे मुसलमान आपस में विदा लेते समय खुदा हाफिज कहते हैं, 'अगले वर्ष येरुशलम में' कहता था। अपनी खोयी हुई मातृभूमि के लिये ऐसी ललक विश्व समुदायों में दुर्लभ है। 1948 में विश्व के नेताओं ने यहूदियों को उनका देश दिया और इजरायल का निर्माण होते ही उस पर मिस्र, जार्डन, सीरिया, इराक, लेबनान ने आक्रमण कर दिया। नवनिर्मित देश के पास न तो नियमित सेना थी, न अस्त्र-शस्त्र थे। वो वीर लोग रसोई के चाकुओं, गैंतियों, कुदालों, हथौड़ों से लड़े। लड़ाई समाप्त होने के अंत में इजरायल का क्षेत्रफल प्राप्त हुए देश से बढ़ चुका था। हमलावरों के न केवल दांत खट्टे हुए बल्कि हाथ-पैर तोड़ डाले गये। मूलत: व्यापारी जाति के लोगों को सदियों के उत्पीड़न और अपने निजी देश की अंतिम आशा ने प्रबल योद्घा बना दिया।
इजरायल पर 1948, 1956, 1967, 1973 में चार बार घोषित आक्रमण हुए हैं। यह देश एक ओर से समुद्र और तीन ओर से मुस्लिम देशों से घिरा हुआ है। ये देश सामान्य कुरआनी सोच से अनुप्राणित हैं यानी काफिरों को खत्म करके इस क्षेत्र को दारूल-हरब से दारूल-इस्लाम बनाना है। इजरायल को घेरे हुए मुस्लिम देशों ने तो उसे समाप्त करने के लिए जोर लगाया ही मगर अन्य मुस्लिम देशों ने भी इन देशों की हर प्रकार से सहायता की। इन चार युद्घों में इजरायल के लिए हार कोई विकल्प थी ही नहीं। हार का अर्थ सदैव के लिए विश्व इतिहास से गायब हो जाना था। व्यापारी वर्ग के लोग, सदियों से पीडि़त लोग ऐसे प्रचंड योद्घा बन गये कि गोलान पहाडि़यां जहां से इजरायल पर आसानी से तोपों से हमला हो सकता था, छीन ली गयीं। इन मुस्लिम देशों की ऐसी धुनाई की गयी कि इनमें सबसे बड़े देश मिस्र को इजरायल से सबसे पहले संधि करने पर विवश होना पड़ा।
इजरायल पर बाह्य आक्रमण ही नहीं हुए अपितु देश में बसे मुसलमानों के आतंकी समूह जैसे फिलिस्तीनी मुक्ति मोर्चा, हमास, हिजबुल्ला लगातार उत्पात करते रहते हैं। इस संघर्ष की जड़ में भी वही कुरानी विश्वास  है। 'संसार का ध्रुव सत्य इस्लाम है। इससे इतर सोचने, जीवन जीने वाले लोग काफिर हैं और काफिर वजिबुल-कत्ल अर्थात मार डाले जाने के योग्य हैं।  वर्तमान संघर्ष का कारण गाजा के नागरिक क्षेत्रों में ठिकाना बनाये बैठे हमास के लोग हैं। इन्हांेने इजरायल को निशाना बनाकर 1200 से भी अधिक राकेट दागे हैं। एक स्वतंत्र राष्ट्र के पास इन हमलों का मुंह-तोड़ जवाब देने के अतिरिक्त कौन-सा विकल्प है? अपने नागरिकों, अपनी भूमि, अपने संस्थानों, अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए किसी राष्ट्र को आक्रमणकारियों को समूल नष्ट करने के अलावा कौन-सा उपाय अपनाना चाहिए? आखिर हर देश के नेता भारतीय नेताओं जैसे तो नहीं हो सकते कि अपनी ही धरती कश्मीर से अपने ही समुदाय को निष्कासित होता देखकर मौन रहें। सुरक्षा के प्रति मानसिक सुस्ती आज नहीं कल पराजय में बदल जाती है। एकमेव शांति की कामना हार और मानसिक दासता में परिणत हो जाती है। पराजय मलिनता लाती है और विजय जीवन को उल्लास से भर देती है। संसार में वीर जातियां भी हैं।
हमास अगर अपने मिसाइल लांचर मस्जिदों, घरों में रखता है तो जवाबी कार्यवाही में मारे जाने वाले लोगों के लिए मूलत: हमास ही जिम्मेदार है। कुछ जिम्मेदारी उन लोगों की भी है जो इन आक्रमण केन्द्रों के पास रहते हैं और इन ठिकानों का विरोध नहीं करते। क्या उन्हें पता नहीं कि जब जवाबी रॉकेट इन केन्द्रों को नष्ट करेंगे तो चपेट में वो भी आएंगे। बुरों की सोहबत के नतीजे भुगतने तो पड़ेंगे। हममें से बहुत से लोग इजरायल से सहानुभूति रखते हैं मगर चुप रहते हैं और इजरायल के पक्ष में मुखर नहीं होते। -तुफैल चतुर्वेदी
दोस्तों ये कैसा प्यार है कि मैं किसी को चाहूं और उसे प्रकट भी न करूं? ये समय इजरायल के पक्ष में खड़े होने का है। एक शत्रु के दो पीडि़तों का मित्र होना न केवल स्वाभाविक है बल्कि अपने समवेत शत्रु से निपटने के लिए आवश्यक भी है।अल-कायदा,हिज्बुल-मुजाहिद्दीन, लश्करे-तय्यबा, बोको-हराम, हिजबुल्ला, हमास सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। इन संगठनों और इनकी जननी कुरआनी विचारधारा से जूझ रहे हर व्यक्ति और देश के साथ हमारा खड़ा होना, हमारे अपने लिए मित्र ढूंढ़ने का काम है। इस पुनीत काम में लगे हर योद्घा देश की पीठ पर हमारा हाथ होना अपने देश की पीठ पर मित्र के हाथ होने की तरह है।
मुहब्बतों को छुपाते हो बुजदिलों की तरह
ये इश्तिहार तो गली में लगाना चाहिए था।
लेखक साहित्यकार है। संपर्क : 9711296239

मोदी सरकार की 'सबका साथ, सबका विकास' नीति का समर्थन करता है अमेरिका : कैरी





मोदी सरकार की 'सबका साथ, सबका विकास' नीति का

 समर्थन करता है अमेरिका : कैरीFrom NDTV India, 30जुलाई, 2014 

वाशिंगटन: अमेरिका के विदेशमंत्री जॉन कैरी आज भारत के दौरे पर आ रहे हैं। इससे पहले वाशिंगटन में कैरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल की तारीफ की। उनके बयान को भारत-अमेरिका के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

दरअसल, गुजरात दंगों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वीजा देने से इनकार करने वाला अमेरिका अब उनसे नजदीकियां बढ़ाने के पुरजोर कोशिश कर रहा है। भारत आ रहे अमेरिका के विदेशमंत्री जॉन कैरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की।

उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को एक ऐसे मुकाम तक ले जाने की भी बात कही, जिससे दोनों एक-दूसरे के साझेदार बन सकें। वाशिंगटन में अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के समारोह में केरी ने मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि सबका साथ सबका विकास की नीति में अमेरिका उनका साथ देना चाहता है।

जॉन कैरी ने कहा कि अब नई सरकार के साथ नई संभावनाओं और नए मौकों के साथ बातचीत का समय है। ये भारत के साथ हमारे रिश्तों में बदलाव का वक्त है और हम साथ मिलकर नया इतिहास रचने को प्रतिबद्ध हैं। भारत सरकार का सबका साथ सबका विकास की नीति का हम समर्थन करते हैं।

हालांकि एक सच्चाई यह भी है कि दोनों देश कई मामलों में आमने-सामने हैं। चाहे वह विश्व व्यापार संगठन के नियमों की बहस हो
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स की बात या सब्सिडी का मुद्दा हो या फिर इस्राइल-फिलस्तीन युद्ध का सवाल हो। इस पर दोनों देशों के बीच तीखी बहस चल रही है।

अमेरिका भारत को एशिया में चीन के खिलाफ एक ताकतवर साझेदार की तरह देखना चाहता है। दूसरी तरफ अमेरिकी उद्योग जगत भारत को एक बड़े बाजार की तरह देख रहा है, लेकिन वहां उसे कई रुकावटें नजर आ रही हैं। दूसरी तरफ भारत सरकार ने अब तक खुलकर अपनी अमेरिकी पॉलिसी साफ नहीं की है। माना जा रहा है कि सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ होने वाली उनकी मुलाकात से इस रिश्ते की दिशा तय होगी।

सावन में बुधवार-चतुर्थी का शुभ योग




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सावन में बुधवार-चतुर्थी का शुभ योग, इन उपायों से प्रसन्न होंगे श्रीगणेश


धर्म डेस्क|Jul 30, 2014, 

उज्जैन। इन दिनों सावन का पवित्र महीना चल रहा है, जो भगवान शिव को बहुत प्रिय है। सावन के महीने में आज (30 जुलाई) बुधवार व चतुर्थी का शुभ योग बन रहा है। बुधवार व चतुर्थी दोनों ही भगवान श्रीगणेश के प्रिय वार व तिथि हैं। इस प्रकार भगवान शिव के प्रिय महीने में उनके पुत्र श्रीगणेश के प्रिय वार व तिथि का संयोग बहुत ही शुभ फलदाई है।

इस दिन श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत व विशेष पूजन किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो भगवान श्रीगणेश अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। अगर भी इस विशेष अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं तो आगे बताए गए उपाय विधि-विधान पूर्वक करें-

1- बुधवार के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद समीप स्थित किसी गणेश मंदिर जाएं और भगवान श्रीगणेश को 21 गुड़ की ढेली के साथ दूर्वा रखकर चढ़ाएं। इस उपाय को करने से भगवान श्रीगणेश भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। ये बहुत ही चमत्कारी उपाय है।

2- अगर आपके जीवन में बहुत परेशानियां हैं, तो आप आज हाथी को हरा चारा खिलाएं और गणेश मंदिर जाकर भगवान श्रीगणेश से परेशानियों का निदान करने के लिए प्रार्थना करें। इससे आपके जीवन की परेशानियां कुछ ही दिनों में दूर हो जाएंगी।

3- यंत्र शास्त्र के अनुसार गणेश यंत्र बहुत ही चमत्कारी यंत्र है। आज घर में इसकी स्थापना करें। बुधवार, चतुर्थी या किसी शुभ मुहूर्त में भी इस यंत्र की स्थापना व पूजन करने से बहुत लाभ होता है। इस यंत्र के घर में रहने से किसी भी प्रकार की बुरी शक्ति घर में प्रवेश नहीं करती।

4- अगर आपको धन की इच्छा है, तो इसके लिए आप आज सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान श्रीगणेश को शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो जाता है।

5- शास्त्रों में भगवान श्रीगणेश का अभिषेक करने का विधान भी बताया गया है। बुधवार के दिन भगवान श्रीगणेश का अभिषेक करने से विशेष लाभ होता है। आज आप शुद्ध पानी से श्रीगणेश का अभिषेक करें। साथ में गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ भी करें। बाद में मावे के लड्डुओं का भोग लगाकर भक्तजनों में बांट दें।
6- आज के दिन किसी गणेश मंदिर जाएं और दर्शन करने के बाद नि:शक्तों को यथासंभव दान करें। दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान श्रीगणेश भी अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।

7- आज सुबह उठकर नित्य कर्म करने के बाद पीले रंग के श्रीगणेश भगवान की पूजा करें। पूजन में श्रीगणेश को हल्दी की पांच गठान श्री गणाधिपतये नम: मंत्र का उच्चारण करते हुए चढ़ाएं। इसके बाद 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर श्री गजवकत्रम नमो नम: का जप करके चढ़ाएं। यह उपाय प्रति बुधवार को करने से प्रमोशन होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

8- यदि किसी युवती का विवाह नहीं हो पा रहा है, तो वह आज विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाए व व्रत रखे। शीघ्र ही उसके विवाह के योग बनने लगेंगे।
9- यदि किसी लड़के के विवाह में परेशानियां आ रही हैं, तो वह आज भगवान श्रीगणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाए। इससे उसके विवाह के योग बनने लगेंगे।

10- आज दूर्वा (एक प्रकार की घास) के गणेश बनाकर उनकी पूजा करें। श्रीगणेश की प्रसन्नता के उन्हें मोदक, गुड़, फल, मावा-मिïष्ठान आदि अर्पण करें। ऐसा करने से भगवान गणेश सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

11- आज के दिन व्रत रखें। शाम के समय घर में ही गणपति अर्थवशीर्ष का पाठ करें। इसके बाद भगवान श्रीगणेश को तिल से बने लड्डुओं का भोग लगाएं। इसी प्रसाद से अपना व्रत खोलें और भगवान श्रीगणेश से मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

भगवान गणेश सभी दु:खों को हरने वाले हैं। इनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए प्रत्येक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को व्रत किया जाता है, इसे विनायकी चतुर्थी व्रत कहते हैं। विनायकी चतुर्थी का व्रत इस प्रकार करें-

- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि काम जल्दी ही निपटा लें।

- दोपहर के समय अपने सामथ्र्य के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

- संकल्प मंत्र के बाद श्रीगणेश की षोड़शोपचार पूजन-आरती करें। गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। गणेश मंत्र (ऊं गं गणपतयै नम:) बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं।

- गुड़ या बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास रख दें तथा 5 ब्राह्मण को दान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद के रूप में बांट दें।

- पूजा में भगवान श्री गणेश स्त्रोत, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक स्त्रोत आदि का पाठ करें।

-ब्राह्मण भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा प्रदान करने के पश्चात संध्या के समय स्वयं भोजन ग्रहण करें। संभव हो तो उपवास करें।

व्रत का आस्था और श्रद्धा से पालन करने पर भगवान श्रीगणेश की कृपा से मनोरथ पूरे होते हैं और जीवन में निरंतर सफलता प्राप्त होती है।