बुधवार, 17 सितंबर 2014

जन्मदिन पर नरेंद्र मोदी ने : मां के पैर छू कर लिया आशीर्वाद







जन्मदिन पर घर पहुंचे मोदी,

 मां के पैर छू लिया आशीर्वाद

आईबीएन-7 | Sep 17, 2014
नई दिल्ली। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। प्रधानमंत्री मोदी आज 64 साल के हो गए। जन्मदिन से एक दिन पहले ही मोदी गुजरात पहुंचे हैं। इस खास मौके पर पीएम मोदी अपनी मां से भेंट करने घर पहुंचे। मोदी ने मां के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

मां ने खुश होकर मोदी को मिठाई खिलाई और तोहफे के रूप में मोदी को शगुन के पांच हजार रुपये भी दिए। मोदी ने मां के दिए हुए 5 हजार रुपये बाढ़ पीड़ितों की राहत के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में जमाकरवा दिए। बता दें प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही अपील की है कि उनका जन्मदिन न मनाया जाए। बल्कि जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ से बेहाल लोगों की मदद की जाए। मोदी को जन्मदिन के मौके पर जापान के पीएम और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी दी बधाई दी।

यही नहीं आज एक और खास मौका है क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग 3 दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। दोपहर ढाई बजे के लगभग वो सीधे अहमदाबाद आएंगे। वहीं पर मोदी और चिनफिंग की मुलाकात होगी। अहमदाबाद में चीनी राष्ट्रपति के स्वागत की तैयारियां जोर शोर से की गईं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिंदगी के 64 सालों में अथक संघर्ष किया।

गुजरात के मेहसाणा जिले में छोटी सी आबादी वाला शहर है वडनगर, कौन जानता था कि एक दिन इसी शहर की गलियों में खेलने-कूदने वाला एक छोटा सा बच्चा देश की बागडोर संभालेगा। वडनगर में ही 1950 में जन्म हुआ था हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का। पिता रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे। और मोदी पढ़ाई के साथ-साथ पिता के काम में हाथ बंटाते थे। स्कूल के अलावा नरेंद्र मोदी रोज दो बार संघ की शाखा में भी जाते थे। स्कूल में सिर्फ थिएटर और परिचर्चाएं ही थींजहां मोदी का मन लगता था।

18 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी ने दो साल के लिए घर छोड़ दिया। कहा जाता है कि ये समय मोदी ने हिमालय में बिताया। इसी दौरान वो संघ के मुख्यालय नागपुर जा पहुंचे। जहां प्रशिक्षण के बाद मोदी 1970 में संघ के पूर्ण प्रचारक बन गए।

मोदी के लिए संघ हमेशा प्राथमिकता रहा। मोदी ने खुद को संघ के लिए पूरी तरह से समर्पित कर दिया। अपने काम के प्रति मोदी के समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवार को उनका साथ कभी-कभी ही मिल पाता था। नरेंद्र मोदी का विवाह छोटी उम्र में ही हो गया था। लेकिन देश की सेवा का व्रत ले चुके मोदी पत्नी को छोड़ सियासी यात्रा पर निकल पड़े। मोदी की धर्मपत्नी जशोदा बेन मेहसाणा के ऊंझा में अपने भाई के साथ रहती हैं।

मोदी की मां हीराबेन भी अपने इस बेटे से बरसों तक नहीं मिल पाईं। बीते कुछ सालों में भी वो उन्हें सिर्फ टीवी पर देखती रहीं। लेकिन जीत के बाद हीराबेन पहली शख्स थीं जिससे मोदी मिलने गए। मोदी के लिए उनकी साधारण सी सलाह थी जब वो मुख्यमंत्री बने थे।

नरेंद्र मोदी सियासत के कर्मक्षेत्र में आगे, और आगे बढ़ते गए। 80 और 90 के दशक में मोदी ने खुद को चुनावी राजनीति से दूर रखा। वो संगठन में रहे और बीजेपी को गुजरात चुनाव जिताने के लिए काम करते रहे। 1991 में मोदी ने मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से श्रीनगर तक की एकता यात्रा का जिम्मा संभाला। स्वर्ण जयंती यात्रा के दौरान वो आडवाणी के सारथी भी रहे। मोदी की एक कुशल प्रशासक और संगठनकर्ता की जो छवि बनी, उसी के चलते साल 2001 में भूकंप राहत कार्य में केशुभाई सरकार की नाकामी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।

मुख्यमंत्री बनने से पहले भले ही मोदी को चुनाव लड़ने का तजुर्बा नहीं था। लेकिन उसके बाद गुजरात में 2002, 2007 और 2012 में लगातार जीत हासिल कर उन्होंने चुनावी सफलताओं का इतिहास लिख दिया। फिर बारी आई 2014 के आम चुनावों की। यहां भी मोदी की अगुवाई में बीजेपी को अब तक की सबसे ने बड़ी जीत मिली। और नरेंद्र मोदी ने 15वें प्रधानमंत्री के तौर पर देश की बागडोर संभाली।

उपचुनाव के नतीजों से हताश नहीं हों : अमित शाह



उपचुनाव के खराब नतीजों से हताश नहीं हों : अमित शाह

भाषा | Sep 17, 2014

बीदर (कर्नाटक)
उपचुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे हताश नहीं हों। वे चार राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव भारी बहुमत से जीतेंगे और इसके लिए वे कांग्रेस-मुक्त भारत के अजेंडा पर आगे बढ़ें।

शाह ने कहा, 'कुछ चुनाव नतीजे आए हैं। विपक्ष अभिभूत है। उन्हें लगता है कि कुछ बहुत अच्छी चीज हुई है, क्योंकि कुछ जगहों पर बीजेपी परास्त कर दी गई है। लेकिन वे नहीं देख सकते हैं कि हमने असम में अपना खाता खोला है, वे नहीं देख सकते कि हम बंगाल में जीते हैं।'

लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के महज चार माह बाद बीजेपी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के अपने गढ़ों में हुए कुछ उप-चुनावों में बुरी तरह से हार गई।

उसे 23 विधानसभा सीटों में से 13 सीटें खोनी पड़ीं। इन उपचुनावों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था।

शाह ने कहा, 'इन उपचुनाव नतीजों को न देखें। चार राज्यों में चुनाव हैं। आप देखेंगे कि बीजेपी इन राज्यों में जबर्दस्त बहुमत से चुनाव जीतेगी और कांग्रेस मुक्त भारत का हमारा अजेंडा आगे बढ़ेगा।
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उपचुनाव रिजल्ट: देखें, कौन कहां से जीता

नवभारतटाइम्स.कॉम | Sep 16, 2014

उत्तर प्रदेश                तब                                  अब
लखनऊ ईस्ट     कलराज मिश्रा (बीजेपी)     आशुतोष टंडन (बीजेपी) ने एसपी की जूही सिंह को 26449 वोटों से हराया
चरखारी             उमा भारती(बीजेपी)         कप्तान सिंह (समाजवादी पार्टी) ने कांग्रेस के रामजीवन को 50805 वोटों से हराया
मैनपुरी(लोकसभा)     मुलायम सिंह यादव     तेज प्रताप यादव(समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्य को 321149 वोटों से हराया
बल्हा             सावित्री बाई फुले(बीजेपी)     बंशीधर बौद्ध (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के अक्षयवर को 25181 वोटों से हराया
हमीरपुर         साध्वी निरंजन ज्योति     शिव प्रजापति (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के जगदीश व्यास को 68556 वोटों से हराया
निघासन        अजय(बीजेपी)     कृष्ण गोपाल पटेल (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के रामकुमार वर्मा को45976 वोटों से हराया
नोएडा         महेश शर्मा(बीजेपी)     बिमला बाथम (बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी की काजल शर्मा को 58952 वोटों से हराया
रोहनिया     अनुप्रिया पटेल(अपना दल)     महेंद्र पटेल (समाजवादी पार्टी) ने अपना दल की कृष्णा पटेल को 14449 वोटों से हराया
सहारानपुर नगर     राघव लखनपाल(बीजेपी)     राजीव गूंबर(बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी के संजय गर्ग को 26676 वोटों से हराया
सिराथु     केशव प्रसाद(बीजेपी)     वाचस्पति (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के संतोष पटेल को 24522 वोटों से हराया
ठाकुरद्वारा     कुंवर सर्वेश कुमार     नवाब जान (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के रामपाल सिंह को 27743 वोटों से हराया
बिजनौर      कुंवर भारतेंदु (बीजेपी)     रुचि वीरा (समाजवादी पार्टी) ने बीजेपी के हेमेंद्र पाल को 11567 वोटों से हराया
       
गुजरात           तब                    अब
दीसा             बीजेपी     गोबा राबरी (कांग्रेस) ने बीजेपी के लेबजी परमार को 10394 वोटों से हराया
मंगरौल        बीजेपी     बाबू वजा (कांग्रेस) ने बीजेपी के लक्ष्मण यादव को 22682 वोटों से हराया
टंकारा           बीजेपी     बावनजी मेटालिया (बीजेपी) ने कांग्रेस के ललित कागथारा को 11731 वोटों से हराया
मणिनगर     बीजेपी     सुरेश पटेल (बीजेपी) ने कांग्रेस के जतिन केल्ला को 49652 वोटों से हराया
लिमखेड़ा      बीजेपी     विंछिया भूरिया (बीजेपी) ने कांग्रेस के छत्र सिंह मेडा को 23934 वोटों से हराया
आणंद          बीजेपी     रोहित भाई पटेल (बीजेपी)
वड़ोदरा(लोकसभा)     बीजेपी     रंजनबेन भट्ट (बीजेपी) ने कांग्रेस के नरेंद्र रावत को 3.29 लाख वोटों से हराया
तलाजा         बीजेपी     शिव गोहिल (बीजेपी) ने कांग्रेस के प्रवीण वाला को 9518 वोटों से हराया
मातर            बीजेपी     केसरी सिंह सोलंकी (बीजेपी) ने कांग्रेस के कालीदास परमार को 8610 वोटों से हराया
खंभालिया     बीजेपी     अहीर मेरामन (कांग्रेस) ने बीजेपी के मुलु बेरा को 1227 वोटों से हराया
       
पश्चिम बंगाल             तब                        अब
बशीरहाट दक्षिण     टीएमसी       सामिक भट्टाचार्य (बीजेपी) ने तृणमूल कांग्रेस के दीपेंदु बिश्वास को 1586 वोटों से हराया
चौरंगी               सीपीआई(एम)     नयन बंदोपाध्याय (तृणमूल कांग्रेस) ने बीजेपी के रितेश तिवारी को 14344 वोटों से हराया
       
राजस्थान            तब         अब
सूरजगढ़             बीजेपी     श्रवण कुमार (कांग्रेस) 3270 वोटों से जीते
वैर                     बीजेपी   भजनलाल (कांग्रेस) 25108 वोटों से जीते
नसीराबाद          बीजेपी       रामनारायण (कांग्रेस) ने बीजेपी की सरिता गैना को 386 वोटों से हराया
कोटा साउथ        बीजेपी     संदीप शर्मा (बीजेपी) 25707 वोटों से जीते
       
तेलंगाना                          तब                        अब
मेडक (लोकसभा)     टीआरएस     प्रभाकर रेड्डी (टीआरएस) ने कांग्रेस की वी. सुनीता को 3,61,277 वोटों से हराया
       
आंध्र प्रदेश     तब                       अब
नंदीगामा     टीडीपी     सौम्या (टीडीपी) ने कांग्रेस के बोदापति बाबू राव को 74827 वोटों से हराया
       
असम              तब                       अब
सिलचर           कांग्रेस     दिलीप कुमार पॉल (बीजेपी) ने कांग्रेस के अरुण दत्ता मजूमदार को हराया
लखीपुर          कांग्रेस     राजदीप गोआला (कांग्रेस) ने बीजेपी के संजय ठाकुर को 9172 वोटों से हराया
जमुनामुख     AIUDF     अब्दुर रहीम अजमल (AIUDF) ने कांग्रेस के बशीरुद्दीन को 22959 वोटों से हराया
       
सिक्किम          तब         अब
रांगेंग-यांगेंग     SDF     आरएन चामलिंग (निर्दलीय) ने एसडीएफ की कुमारी मंगार को 708 वोटों से हराया
       
त्रिपुरा            तब                     अब
मानु             सीपीएम     प्रभात चौधरी (सीपीएम) ने कांग्रेस के माइलाफ्रू मोग को 15971 वोटों से हराया

नरेन्द्र मोदी : Narendra Modi



नरेन्द्र मोदी
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
http://hi.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80
नरेन्द्र मोदी (अंग्रेज़ी: Narendra Modi, जन्म: 17 सितंबर, 1950) भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। नरेन्द्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के प्रसिद्ध नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। 'केशुभाई पटेल' के इस्तीफे के बाद नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे ज़्यादा लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्री हैं। नरेंद्र मोदी 7 अक्तूबर, 2001 से 21 मई, 2014 तक लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान रहे। नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारत की प्रमुख पार्टी भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमन्त्री पद का प्रत्याशी घोषित किया गया तथा इन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी एवं अपने गृहराज्य गुजरात के वडोदरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और दोनों जगह से चुनाव भारी मतों के अंतर से जीता। नरेन्द्र मोदी स्वतन्त्र भारत में जन्मे पहले व्यक्ति हैं जो भारत का प्रधानमन्त्री नियुक्त हुए हैं। इन्होंने 26 मई, 2014 शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन में भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

जीवन परिचय
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के वडनगर में अन्य पिछड़ा वर्ग के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। वे दामोदरदास मूलचंद मोदी और उनकी पत्नी हीराबेन के छह बच्चों में से तीसरे हैं। बचपन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और किशोरावस्था से ही उनका राजनीति के प्रति झुकाव था। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से शाकाहारी व्यक्ति हैं। एक युवा के तौर पर वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं लेकिन इससे भी पहले साठ के दशक में भारत-पाक युद्ध के दौरान किशोर नरेंद्र मोदी रेलवे स्टेशनों से गुजरने वाले सैनिकों की मदद करने के लिए एक स्वयंसेवक के रूप में सक्रिय रहे हैं।


एक किशोर के तौर पर उन्होंने अपने भाई के साथ एक टी स्टाल भी चलाया है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा वडनगर में ही रहकर पूरी की। बाद में, उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में मास्टर डिग्री ली।[1]नरेंद्र मोदी को अपने बाल्यकाल से कई तरह की विषमताओं एवं विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है किन्तु अपने उदात्त चरित्रबल एवं साहस से उन्होंने तमाम अवरोधों को अवसर में बदल दिया, विशेषकर जब उन्‍होने उच्च शिक्षा हेतु कॉलेज तथा विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। उन दिनों वे कठोर संद्यर्ष एवं दारुण मन:ताप से घिरे थे, परन्तु् अपने जीवन- समर को उन्होंने सदैव एक योद्धा-सिपाही की तरह लड़ा है। आगे क़दम बढ़ाने के बाद वे कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखते, साथ-साथ पराजय उन्हें स्वीकार्य नहीं है। अपने व्‍यक्‍तित्‍व की इन्‍हीं विशेषताओं के चलते उन्होंने राजनीति शास्त्र विषय के साथ अपनी एम.ए. की पढ़ाई पूरी की।

राजनीतिक जीवन
1984 में देश के प्रसिद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस) के स्वयं सेवक के रूप में उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की। यहीं उन्हें निस्वार्थता, सामाजिक दायित्वबोध, समर्पण और देशभक्‍ति के विचारों को आत्म सात करने का अवसर मिला। अपने संघ कार्य के दौरान नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिर चाहे वह 1974 में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चलाया गया आंदोलन हो, या 19 महीने (जून 1975 से जनवरी 1977) चला अत्यंत प्रताडि़त करने वाला 'आपात काल' हो।

भाजपा में प्रवेश
1987 में भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) में प्रवेश कर उन्होंने राजनीति की मुख्यधारा में क़दम रखा। सिर्फ़ एक साल के भीतर ही उनको गुजरात इकाई के प्रदेश महामंत्री (जनरल सेक्रेटरी) के रूप में पदोन्नत कर दिया गया। तब तक उन्होंने एक अत्यंत ही कार्यक्षम व्यवस्थापक के रूप में प्रतिष्ठा हासिल कर ली थी। पार्टी को संगठित कर उसमें नई शक्ति का संचार करने का चुनौतीपूर्ण काम भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस दौरान पार्टी को राजनीतिक गति प्राप्त होती गई और अप्रैल, 1990 में केन्द्र में साझा सरकार का गठन हुआ। हालांकि यह गठबंधन कुछ ही महीनो तक चला, लेकिन 1995 में भाजपा अपने ही बलबूते पर गुजरात में दो तिहाई बहुमत हासिल कर सत्ता में आई। वर्ष 1998 में पार्टी के सबसे बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी ने तब उनसे गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनावों की कमान संभालने को कहा था।

 गुजरात के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी अपनी माँ हीराबेन के साथ

विश्वविद्यालय की अपनी शिक्षा के दौरान ही मोदी संघ के पूर्ण कालिक प्रचारक बन गए थे। बाद में उन्होंने राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट किया था और शंकर सिंह वाघेला के साथ मिलकर गुजरात में भाजपा कार्यकर्ताओं का एक मजबूत आधार तैयार किया। शुरुआती दिनों में जहां वाघेला को जनता का नेता माना जाता था वहीं मोदी की ख्याति एक कुशल रणनीतिकार की थी। अप्रैल 1990 में जहां पार्टी को केन्द्र में गठबंधन सरकार बनाने का मौका मिला। केन्द्र में सरकार भले ही लम्बे समय तक नहीं चल सकी हो लेकिन 1995 में गुजरात में भाजपा ने दो तिहाई बहुमत हासिल किया। लाल कृष्ण आडवाणी ने नरेन्द्र मोदी को दो महत्वपूर्ण कामों की जिम्मेदारी सौंपी। एक थी कि सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा की तैयारी करना। इसी तरह का दूसरा मार्च कन्याकुमारी से कश्मीर तक के लिए रखा गया। राज्य में शंकर सिंह वाघेला के पार्टी से निकल जाने के बाद केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया और नरेंद्र मोदी मोदी को पार्टी का महासचिव बनाकर नई दिल्ली भेज दिया गया। पर 2001 में पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को केशूभाई का उत्तराधिकारी चुन लिया। नरेन्द्र मोदी ने चुनाव जीता और वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहे। तब उन्होंने राज्य की 182 विधान सभा सीटों में से पार्टी को 122 सीटों पर जीत दिलाई। तब से अबत्क नरेन्द्र मोदी ही राज्य के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। गुजरात में 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में भी नरेन्द्र मोदी का ही जादू चला और वे अपनी पार्टी को सत्ता में बनाए रखने में कामयाब रहे। मणिनगर सीट से उन्होंने कांग्रेस की प्रत्याशी श्वेता भट्‍ट (आईपीएस अधिकारी संजीव भट्‍ट की पत्नी) को 86 हजार से अधिक वोटों से हराया। राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर विदेशों से निवेश आकृष्ट करने के लिए नरेन्द्र मोदी चीन, सिंगापुर और जापान की यात्राएं कर चुके हैं।

लोकसभा चुनाव 2014

गोवा में भाजपा कार्यसमिति द्वारा नरेन्द्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव अभियान की कमान सौंपी गयी थी। 13 सितम्बर 2013 को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में आगामी लोकसभा चुनावों के लिये प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। इस अवसर पर पार्टी के शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी मौजूद नहीं रहे और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसकी घोषणा की। नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद चुनाव अभियान की कमान राजनाथ सिंह को सौंप दी। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद मोदी की पहली रैली हरियाणा प्रान्त के रेवाड़ी शहर में हुई। रैली को सम्बोधित करते हुए उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश को आपस में लड़ने की बजाय ग़रीबी और अशिक्षा से लड़ना चाहिये। एक सांसद उम्मीदवार के रूप में उन्होंने देश की दो लोकसभा सीटों वाराणसी तथा वडोदरा से चुनाव लड़ा और दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से भारी मतों से विजयी हुए।

जनता ने देखा अद्भुत चुनाव प्रचार
भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमन्त्री प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत का भ्रमण किया। इस दौरान 3 लाख किलोमीटर की यात्रा कर पूरे देश में 437 बड़ी चुनावी रैलियाँ, 3-डी सभाएँ व चाय पर चर्चा आदि को मिलाकर कुल 5827 कार्यक्रम किये। चुनाव अभियान की शुरुआत उन्होंने 26 मार्च 2014 को मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद के साथ जम्मू से की और समापन मंगल पाण्डे की जन्मभूमि बलिया (उत्तर प्रदेश) में किया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की जनता ने एक अद्भुत चुनाव प्रचार देखा।

सफलता का बना नया रिकार्ड
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के चुनावों में अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त की। चुनाव में जहाँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 336 सीटें जीतकर सबसे बड़े संसदीय दल के रूप में उभरा वहीं अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों पर विजय प्राप्त की। काँग्रेस केवल 44 सीटों पर सिमट कर रह गयी और उसके गठबंधन को केवल 59 सीटों से ही सन्तोष करना पड़ा।


नरेन्द्र मोदी स्वतन्त्र भारत में जन्म लेने वाले ऐसे व्यक्ति हैं जो सन 2001 से 2014 तक लगभग 13 वर्ष गुजरात के 14वें मुख्यमन्त्री रहे और भारत के 15वें प्रधानमन्त्री बने। एक ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि नेता-प्रतिपक्ष के चुनाव हेतु विपक्ष को एकजुट होना पड़ेगा क्योंकि किसी भी एक दल ने कुल लोकसभा सीटों के 10 प्रतिशत (54 सीट) का आँकड़ा ही नहीं छुआ।

भाजपा संसदीय दल के नेता बने
20 मई 2014 को संसद भवन में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित भाजपा संसदीय दल एवं सहयोगी दलों की एक संयुक्त बैठक में जब लोग प्रवेश कर रहे थे तो नरेन्द्र भाई मोदी ने प्रवेश करने से पूर्व संसद भवन को ठीक वैसे ही ज़मीन पर झुककर प्रणाम किया जैसे किसी पवित्र मन्दिर में श्रद्धालु प्रणाम करते हैं। संसद भवन के इतिहास में उन्होंने ऐसा करके समस्त सांसदों के लिये उदाहरण पेश किया। बैठक में नरेन्द्र भाई मोदी को सर्वसम्मति से न केवल भाजपा संसदीय दल अपितु राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का भी नेता चुना गया। भाजपा सहित समस्त सहयोगी दलों द्वारा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र सौंपे जाने के पश्चात जब नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन गये तो प्रणब मुखर्जी ने उनका स्वागत किया और भारी बहुमत से विजयी होने की बधाई भी दी। राष्ट्रपति भवन से वापसी में राष्ट्रपति ने नरेन्द्र मोदी को भारत का 15वाँ प्रधानमन्त्री नियुक्त करते हुए इस आशय का विधिवत पत्र सौंपा।

भारत के प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के समक्ष प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हुए
नरेन्द्र भाई मोदी ने सोमवार 26 मई, 2014 को शाम 6 बजे प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली। संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में भाजपा के संसदीय दल का नेता चुने जाने पर बोलते हुए नरेन्द्र भाई मोदी ने देश की जनता को यह विश्वास दिलाया कि उन्हें आज जो दायित्व सौंपा गया है उसे वह पूरी निष्ठा और परिश्रम की पराकाष्ठा से निभायेंगे। इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ग़रीबों, गाँववासियों, दलितों, शोषितों और वंचितों के उत्थान के लिये पूरे समर्पण से काम करेगी। कर्मठ, समर्पित और दृढ़-निश्चयी नरेन्द्र मोदी 100 करोड़ भारतीयों के सपनों और आकांक्षाओं के लिए आशा की एक किरण बन कर आए हैं। विकास पर उनकी पैनी नज़र और परिणाम हासिल करने की उनकी प्रामाणिक क्षमता ने उन्हें भारत के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बनाया है। उनका एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है जो मज़बूत, खुशहाल और समावेशी हो और जहां प्रत्येक भारतीय अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को फलीभूत होते हुए देख सकता हो। नरेन्द्र मोदी ने चौथी बार पश्चिमी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भारत और विश्वभर में अपनी छाप छोड़ी है। इस राज्य में वे जनहितैषी सुशासन द्वारा लोगों के जीवन में भारी बदलाव लाए, जहां सरकार ने सादगी और ईमानदारी से लोगों की सेवा की। उन्होंने विनाशकारी भूकंप के दुष्परिणामों से जूझ रहे गुजरात की कायापलट की और उसे विकास में अग्रणी बनाया जिसने भारत के सर्वांगीण विकास में मजबूत योगदान दिया।


हमेशा आगे आकर नेतृत्व संभालने वाले और गुजरात के चहुंमुखी विकास के लिए काम करने वाले नरेन्द्र मोदी ने राज्यभर में बड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया। उन्होंने सरकार के नौकरशाही तंत्र को नया स्वरूप प्रदान किया और उसे आसान बनाया ताकि वह कुशलतापूर्वक, ईमानदारी से और मानवीय भावना से काम कर सके। उनके नेतृत्व में गुजरात सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्थाओं से 300 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए। वे एक ऐसे 'जन नेता' हैं, जो लोगों के कल्याण के लिए समर्पित हैं। नरेन्द्र मोदी के लिए इससे सुखद और कुछ नहीं कि वे आम लोगों के बीच रहें, उनकी खुशहाली देखें और उनके दुखों को दूर करें। उनकी मज़बूत ऑनलाइन उपस्थिति, जहां वे भारत के एक ऐसे सर्वाधिक प्रौद्योगिकी मूलक सोच रखने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं जो प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल लोगों से जुड़ने और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए करते हैं, ने उनके व्यक्तिगत संपर्क को और मजबूती दी है। वे फेसबुक, ट्वीटर, गूगल+ और अन्य मंचों सहित सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। नरेन्द्र मोदी एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनमें साहस, संवेदनशीलता और दृढ़ निश्चय कूट-कूटकर भरे हैं और जिन्हें देश ने इस उम्मीद के साथ जनादेश दिया है कि वे भारत में नई ऊर्जा का संचार करेंगे और उसे विश्व का पथप्रदर्शक बनाएंगे |

यक्तित्व
नरेन्द्र मोदी

नरेन्द्र मोदी की छवि एक कठोर प्रशासक और कड़े अनुशासन के आग्रही की मानी जाती है, लेकिन साथ ही अपने भीतर वे मृदुता एवं सामर्थ्य की अपार क्षमता भी संजोये हुए हैं। नरेन्द्र मोदी को शिक्षा-व्यवस्था में पूरा विश्वास है। एक ऐसी शिक्षा-व्यवस्था जो मनुष्य के आंतरिक विकास और उन्नति का माध्यम बने एवं समाज को अँधेरे, मायूसी और ग़रीबी के विषचक्र से मुक्ति दिलाये। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नरेन्द्र मोदी की गहरी दिलचस्पी है। उन्होंने गुजरात को ई-गवर्न्ड राज्य बना दिया है और प्रौद्योगिकी के कई नवोन्मेषी प्रयोग सुनिश्चित किये हैं। ‘स्वागत ऑनलाइन’ और ‘टेलि फरियाद’ जैसे नवीनतम प्रयासों से ई-पारदर्शिता आई है, जिसमें आम नागरिक सीधा प्रशासन के उच्चतम कार्यालय का संपर्क कर सकता है। जनशक्ति में अखण्ड विश्वास रखने वाले नरेन्द्र मोदी ने बखूबी क़रीब पाँच लाख कर्मचारियों की मज़बूत टीम की रचना की है। नरेन्द्र मोदी यथार्थवादी होने के साथ ही आदर्शवादी भी हैं। उनमें आशावाद कूटकूट कर भरा है। उनकी हमेशा एक उदात्त धारणा रही है कि असफलता नहीं, बल्कि उदेश्य का अनुदात्त होना अपराध है। वे मानते हैं कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के लिए स्पष्ट दृष्टि, उद्देश्य या लक्ष्य का परिज्ञान और कठोर अध्यवसाय अत्यंत ही आवश्यक गुण हैं।[2]नरेन्द्र मोदी को मितव्ययी और मिताहारी के तौर पर जाना जाता है। उनके निजी स्टाफ में केवल तीन लोग हैं। अंतर्मुखी मोदी को हमेशा ही काम करते रहने वाले व्यक्ति के तौर पर भी जाना जाता है। वे कभी-कभी बिजनेस सूट पहने भी नजर आते हैं लेकिन बहुत कम अवसरों पर। उन्होंने अपने राज्य में बिना सरकारी अनुमति के बने बहुत सारे मंदिरों को भी गिराने का आदेश दिया था जिसकी विश्व हिंदू परिषद ने आलोचना की थी। पर वे अपने विरोधियों को ज्यादा तरजीह नहीं देते हैं। राजनीति के अलावा, नरेन्द्र मोदी की रुचि लेखन में है। उन्होंने विभिन्न विषयों पर कई किताबें लिखी हैं और वे कविताएं भी लिखते हैं। उनके दिन की शुरुआत हमेशा योग से होती है, जो अति सक्रिय दिनचर्या में उन्हें शांति प्रदान करता है।

सम्मान और पुरस्कार
मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यकाल के दौरान राज्य के पृथक-पृथक क्षेत्रों में 60 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किये हैं। उनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया जा रहा है-

दिनांक                    पुरस्कार
16-10-2003     आपदा प्रबंधन और ख़तरा टालने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र की ओर से सासाकावा पुरस्कार।
अक्टूबर-2004     प्रबंधन में नवीनता लाने के लिए ‘कॉमनवेल्थ एसोसिएशन्स’ की ओर से CAPAM गोल्ड पुरस्कार।
27-11-2004     ‘इन्डिया इन्टरनेशनल ट्रेड फेयर-2004 में इन्डिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइज़ेशन फॉर गुजरात्स एक्सेलन्स’ की ओर से ‘स्पेशल कमेन्डेशन गोल्ड मेडल’ दिया गया।
24-02-2005     भारत सरकार की ओर से गुजरात के राजकोट ज़िले में सेनिटेशन सुविधाओं के लिए ‘निर्मल ग्राम’ पुरस्कार दिया गया।
25-04-2005     भारत सरकार के सूचना और तकनीकी मंत्रालय और विज्ञान-तकनीकी मंत्रालय द्वारा ‘भास्कराचार्य इन्स्टिट्यूट ऑफ स्पेस एप्लिकेशन’ और ‘जिओ-इन्फर्मेटिक्स’, गुजरात सरकार को "PRAGATI" के लिए ‘एलिटेक्स’ पुरस्कार दिया गया।
21-05-2005     राजीव गांधी फाउन्डेशन नई दिल्ली की ओर से आयोजित सर्वेक्षण में देश के सभी राज्यों में गुजरात को श्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार मिला।
01-06-2005     भूकंप के दौरान क्षतिग्रस्त हुए गुरुद्वारा के पुनःस्थापन के लिए यूनेस्को द्वारा ‘एशिया पेसिफिक हेरिटेज’ अवार्ड दिया गया।
05-08-2005     ‘इन्डिया टुडे’ द्वारा श्रेष्ठ निवेश पर्यावरण पुरस्कार दिया गया।
05-08-2005     ‘इन्डिया टुडे’ द्वारा सर्वाधिक आर्थिक स्वातंत्र्य पुरस्कार दिया गया।
27-11-2005     नई दिल्ली में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में गुजरात पेविलियन को प्रथम पुरस्कार मिला।
14-10-2005     गुजराती साप्ताहिक चित्रलेखा के पाठकों ने श्री नरेन्द्र मोदी को ‘पर्सन ओफ द इयर’ चुना। इस में टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा दूसरे क्रम पर और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन तीसरे स्थान पर रहे। ये पुरस्कार दिनांक 18-05-2006 को दिये गये।
12-11-2005     इन्डिया टेक फाउन्डेशन की ओर से ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और नवीनता के लिए इन्डिया टेक्नोलोजी एक्सेलन्स अवार्ड दिया गया।
30-01-2006     इन्डिया टुडे द्वारा देश व्यापी स्तर पर कराये गये सर्वेक्षण में श्री नरेन्द्र मोदी देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री चुने गये।
23-03-2006     सेनिटेशन सुविधाओं के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गुजरात के कुछ गाँवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार दिये गये।
31-07-2006     बीस सूत्रीय कार्यक्रम के अमलीकरण में गुजरात एक बार फिर प्रथम स्थान पर रहा।
02-08-2006     सर्व शिक्षा अभियान में गुजरात देश के 35 राज्यों में सबसे प्रथम क्रमांक पर रहा।
12-09-2006     अहल्याबाई नेशनल अवार्ड फंक्शन, इन्दौर की ओर से पुरस्कार।
30-10-2006     चिरंजीवी योजना के लिए ‘वोल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘फाइनान्सियल एक्सप्रेस’ की ओर से (प्रसूति समय जच्चा-बच्चा मृत्यु दर कम करने ले लिए) सिंगापुर में ‘एशियन इन्नोवेशन अवार्ड’ दिया गया।
04-11-2006     भू-रिकार्ड्स के कम्प्यूटराइजेशन के लिए चल रही ई-धरा योजना के लिए ई-गवर्नन्स पुरस्कार।
10-01-2007     देश के सबसे श्रेष्ठ ई-गवर्न्ड राज्य का ELITEX 2007- पुरस्कार भारत की केन्द्र सरकार की ओर से प्राप्त।
05-02-2007     इन्डिया टुडे-ओआरजी मार्ग के देशव्यापी सर्वेक्षण में तीसरी बार श्रेष्ट मुख्यमंत्री चुने गये। पाँच साल के कार्यकाल में किसी भी मुख्यमंत्री के लिए यह अनोखी सिद्धि थी।