रविवार, 26 अक्तूबर 2014

प्रधान मंत्री मोदी की चाय पार्टी में शिवसेना भी हुई शामिल,



                                               प्रधान मंत्री मोदी की चाय पार्टी में शिवसेना भी हुई शामिल,
                                                      मोदी ने गरीबों की मदद पर दिया जोर

aajtak.in [Edited By: स्वपनल सोनल] |
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2014


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर रविवार को आयोजित एनडीए सांसदों की चाय पार्टी खत्म हो चुकी है. इस पार्टी में शिवसेना के सांसद भी मौजूद थे. पीएम ने पार्टी के दौरान अपने भाषण में स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ की. मोदी ने कहा कि हमें गरीबों के हालात सुधारने की कोशिश करनी चाहिए. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जनधन योजना पर रिपोर्ट पेश की. बैठक का संचालन वेंकैया नायडू ने किया, जबकि आडवाणी ने भी सरकार के कामकाज की तारीफ की.

अगले महीने होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र से पहले प्रधानमंत्री की इस बैठक में सबसे खास नाराज चल रहे शिवसेना के सदस्यों का जुटना रहा. दिवाली के मौके पर बुलाई गई इस बैठक में शिवसेना के सदस्यों के आने से महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली इस पार्टी के बीच सहयोग की उम्मीदें बढ़ती दिख रही हैं.

लगभग दो घंटे चली बैठक में प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी 'स्वच्छ भारत अभियान' योजना की महत्ता के बारे में सत्तारूढ़ सांसदों को अवगत कराया और उनसे इसमें बढ़चढ़कर सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार की सभी योजनाओं को गरीबों को केंद्रित करके बनाया जाना चाहिए. पीएम ने विश्वास जताया कि इस तरह से सरकार गरीबी को कम करने में सक्षम हो सकती है.

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सरकार की एक अन्य महत्वपूर्ण जनधन योजना के बारे में सांसदों को जानकारी दी और ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आदर्श ग्राम योजना के बारे में सांसदों बताया.

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चाय पार्टी: मंत्रियों ने दिए प्रेजेंटेशन, मोदी ने दिए सांसदों को निर्देश
नवभारतटाइम्स.कॉम| Oct 26, 2014,
नई दिल्ली

पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को एनडीए के सांसदों के साथ 'चाय पर चर्चा' की। इस चाय पार्टी में सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं पर जहां मंत्रियों ने चर्चा की, वहीं सरकार के काम से जनता को रू-ब-रू कराने की रणनीति भी बनाई गई। चाय की चुस्कियों के बीच मोदी सरकार के 7 मंत्रियों ने डीटेल प्रेजेंटेशन दिए। मोदी ने भी सांसदों से सीधा संवाद किया। उन्होंने एनडीए के सांसदों को निर्देश दिया कि वे सरकार की योजनाओं के बारे में जनता को बताएं। मोदी की इस चाय पार्टी में एनडीए के अन्य सहयोगियों के साथ शिव सेना के सांसद भी शामिल हुए, लेकिन महाराष्ट्र पर कोई चर्चा नहीं हुई।

क्या हुआ मोदी की इस चाय पार्टी में
एनडीए के सांसदों के लिए मोदी की यह टी पार्टी करीब दो घंटे तक चली। बैठक में मोदी सरकार के सात मंत्रियों ने एक-एक कर अपने मंत्रालय की महत्वकांक्षी योजनाओं के बारे में प्रेजेंटेशन दिए। सबसे पहले वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने जनधन योजना पर प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने कोल ऑर्डिनेंस पर बोला। इसके बाद नितिन गडकरी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के बारे में बताया। फिर स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने स्वास्थ्य मंत्रालय की महत्वकांक्षी योजनाओं की जानकारी दी। इसके बाद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गैस कीमतों पर जानकारी दी। प्रधान ने बताया कि नेचरल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का क्या असर पड़ सकता है। इसके बाद लेबर मिनिस्टर नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने मिनिमम पेंशन स्कीम की जानकारी दी। और सबसे आखिर में संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने अपनी बात रखी।नायडू ने एनडीए के सभी सांसदों से संसद के शीतकालीन सत्र में हमेशा उपस्थित रहने और चर्चाओं में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील की।

बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी ने बताया कि टी पार्टी के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से सीधा संवाद किया।उन्होंने सांसदों के सामने सफाई और स्वच्छता को लेकर अपना नजरिया रखा और बताया कि वह इस पर क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बैठक बेहद कामयाब रही। वहीं बीजेपी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के विचार हमेशा जनता के हित के लिए होते हैं। चाय पार्टी में भी उन्होंने यही विचार रखे कि हमें जनता के सेवक के तौर पर काम करना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक बैठक में मोदी ने सभी सांसदों से कहा कि वह राजनीतिक फायदे-नुकसान से ऊपर उठकर काम करें।


आडवाणी बोले, 'यह दिवाली बड़ी शुभ है' इस अवसर पर वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि बीजेपी के लिए यह बहुत शुभ दिवाली है, क्योंकि पार्टी पहली बार अपने बूते बहुमत में आई है।
प्रधानमंत्री की ओर से आयोजित यह दिवाली मिलन खास था, क्योंकि यह महाराष्ट्र में सरकार के गठन के पहले आयोजित हो रहा है । वहां बीजेपी-शिव सेना के संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि एनडीए के कुछ सहयोगी इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि इनमें से कुछ दलों का एक भी निर्वाचित सांसद नहीं है।

रक्षा क्षेत्र में 80 हजार करोड़ की परियोजनाएं मंजूर


        यू पी ए ने सेना को बहुत कमजोर कर दिया था, उन्हे रक्षा संसाधन ही नहीं दिये। आधुनिक रक्षा उपकरणों की खरीद ही नहीं की !! जिससे रक्षा मामले में भारत आस पडौस से पिछडा हुआ था। मोदी सरकार के इस निर्णय से भारतीय सेनायें रक्षा के मामले में आत्म निर्भर हो सकेगीं।

रक्षा क्षेत्र में भी ‘मेक इन इंडिया’, 80 हजार  करोड़ की परियोजनाएं मंजूरaajtak.in [Edited By: महुआ बोस] | मुंबई, 25 अक्टूबर 2014


             केन्द्र सरकार ने शनिवार को 80 हजार करोड़ रुपये की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दे दी. लेकिन यहां भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ आह्वान का ध्यान रखा गया है. सरकार ने तय किया है कि छह पनडुब्बियों का स्वदेशी स्तर पर निर्माण किया जाएगा, जबकि 8000 इस्राइली टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल और 12 उन्नत डोरनियर निगरानी विमान खरीदे जाएंगे.

इन निर्णयों से पहले रक्षा मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में रक्षा खरीद परिषद की दो घंटे से ज्यादा देर तक बैठक चली, जिसमें रक्षा सचिव, तीनों सेनाओं के प्रमुखों, डीआरडीओ प्रमुख एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. अधिकतर निर्णय नौसेना के अनूकुल रहे जो अपग्रेडेशन एवं क्षमता विस्तार की भारी कमी महसूस कर रही है. बड़ा निर्णय बाहर से खरीदने के बजाय 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से भारत में छह पनडुब्बियों का निर्माण करने का है.

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला भारतीय सेना के लिए अमेरिका से जेवलिन मिसाइल खरीदने के बजाय 3200 करोड़ रुपये में इस्राइल से 8356 टैंक रोधी मिसाइल खरीदना है. सेना मिसाइलों के लिए 321 लांचर भी खरीदेगी. हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड 1850 करोड़ रुपये की लागत से उन्नत सेंसरों वाले 12 डोरनियर निगरानी विमान खरीदेगा. डीएसी ने 662 करोड़ रुपये में मेदक के आयुध कारखाना बोर्ड से 36 इंफेट्री फाइटिंग व्हेकिल खरीदने का निर्णय किया है.

देश में छह पनडुब्बियां बनाने के निर्णय का ब्यौरा देते हुए आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब रक्षा मंत्रालय एक समिति का गठन करेगा. यह समिति अगले 6.8 सप्ताह में निजी एवं सार्वजनिक गोदियों का अध्ययन करेगी. इसके बाद अध्ययन के आधार पर मंत्रालय विशिष्ट बंदरगाह को प्रस्ताव का अनुरोध (आरएफपी) जारी करेगा. पनडुब्बी एयर इंडिपेंडेंट संचालन (एआईपी) क्षमता से लैस होगी, जिससे यह पारंपरिक पनडुब्बी की तुलना में अधिक समय तक पानी के भीतर रह सकेगी. इसके अलावा इसकी चलने की गति भी तेज हो जाएगी.

आपको बता दें कि नौसेना के पास इस समय परिचालनरत 13 पनडुब्बी हैं. 1999 में यह लक्ष्य तय किया गया था कि 2030 तक इनकी संख्या 24 होनी चाहिए. पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने छह स्कार्पियन पनडुब्बियों को मंजूरी दी थी और पहली पनडुब्बी की आपूर्ति 2016 तक होने की संभावना है. भारत में पनडुब्बी निर्माण करने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ आह्वान के अनुरूप है. इस पनडुब्बी में जमीनी हमला करने वाली क्रूज मिसाइल को लगाने की क्षमता होगी.

बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में सभी बाधाओं एवं अड़चनों पर शीघ्रता से ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि खरीद की गति बाधित न हो. डीएसी ने नौसेना के विशेष अभियानों के लिए उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी, लेकिन इनकी जानकारी को गोपनीय रखा गया है.

सूत्रों ने बताया कि यह बुनियादी तौर पर नौसेना की प्रतिष्ठित कमांडो शाखा मार्कोस के लिए है. सूत्रों ने बताया कि स्कार्पियन पनडुब्बी के लिए तारपीडो तथा हैवी कैलिबर गन खरीदने का निर्णय तकनीकी आधार पर टाल दिया गया. उन्होंने कहा कि उसके बारे में जल्द ही कोई फैसला किया जाएगा. डीएसी का गठन 2001 में कारगिल युद्ध के बाद रक्षा क्षेत्र में सुधार के तहत किया गया था.