शनिवार, 6 दिसंबर 2014

अब रामलला को आजाद देखना चाहता हूं - हाशिम अंसारी



बाबरी के मुकदमे से हटे मुद्दई हाशिम अंसारी


नवभारत टाइम्स| Dec 3, 2014,

फैजाबाद

बाबरी मस्जिद मुकदमे के पैरोकार और मुद्दई हाशिम अंसारी अब केस की पैरवी नहीं करेंगे। उन्होंने मंगलवार को यह कहते हुए सबको चौंका दिया कि वह रामलला को आजाद देखना चाहते हैं। हाशिम ने यह भी साफ कर दिया कि वह छह दिसंबर को मुस्लिम संगठनों द्वारा आयोजित यौमे गम (शोक दिवस) में भी शामिल नहीं होंगे। वह छह दिसंबर को दरवाजा बंद कर घर में रहेंगे।

हाशिम बाबरी मस्जिद पर हो रही सियासत से दुखी हैं। उन्होंने कहा कि रामलला तिरपाल में रह रहे हैं और उनके नाम की राजनीति करने वाले महलों में। लोग लड्डू खाएं और रामलला इलायची दाना यह नहीं हो सकता...अब रामलला को आजाद देखना चाहता हूं। हालांकि, बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी के संयोजक और यूपी के अपर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी को भरोसा है कि वह अंसारी को मना लेंगे।

हाशिम ने कहा, 'बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी बनी थी मुकदमे की पैरवी के लिए। आजम खां तब साथ थे, अब वे सियासी फायदा उठाने के लिए मुलायम के साथ चल रहे हैं। मुकदमा हम लड़ें और फायदा आजम उठाएं! क्या जरूरत थी आजम को यह कहने की, जब मंदिर बन गया है तो मुकदमे की क्या जरूरत है? इसलिए मैं अब मुकदमे की पैरवी नही करूंगा। अब पैरवी आजम खां करें।'

उन्होंने कहा कि जब मैंने सुलह की पैरवी की थी तब हिन्दू महासभा सुप्रीम कोर्ट चली गई। महंत ज्ञानदास ने पूरी कोशिश की थी कि हम हिंदुओं और मुस्लिमों को इकट्ठा करके मामले को सुलझाएं, लेकिन अब मुकदमे का फैसला कयामत तक नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सभी नेता अपनी रोटियां सेक रहे हैं....बहुत हो गया अब।

रामजन्म भूमि के मुख्य पक्षकार पुजारी रामदास ने कहा कि अंतिम बेला में अंसारी ने अच्छा निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'अंसारी से मुस्लिम पक्ष को सीख लेनी चाहिए। अंसारी का बयान तब आया है जब बाबरी ऐक्शन कमिटी छह दिसंबर को काला दिवस मनाने जा रही है। रामलला हिंदुओं की आस्था के प्रतीक हैं, मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।'

जफरयाब जिलानी को भरोसा है कि वह हाशिम को मना लेंगे। उन्होंने कहा, 'अंसारी पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं। 2010 में जब बाबरी मस्जिद पर फैसला आया था, तब भी उन्होंने काफी बात की थी। हम उन्हें फिर मना लेंगे।' इसके साथ ही जिलानी कहते हैं अगर अंसारी मुकदमे की पैरोकारी नहीं करेंगे, तब भी केस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'मुकदमे में छह वादी और भी मौजूद हैं। इनमें सुन्नी वफ्फ बोर्ड भी वादी है। यह रिप्रेजेन्टिव मुकदमा है, इसमें पार्टी के हटने से मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ता है।'
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मोदी मुस्लिमों की मदद करने वाले सबसे अच्छे इंसान: हाशिम अंसारी

नवभारत टाइम्स| Dec 3, 2014

फैजाबाद, मनोज पांडे
बाबरी मस्जिद मुकदमे के मुस्लिम पैरोकार और मुद्दई हाशिम अंसारी ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने मोदी को सियासी फायदा न उठाने वाला और कौम की मदद करने वाला अच्छा इंसान बताया है। इससे पहले हाशिम ने बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नही करने और रामलला को आजाद देखने की ख्वाहिश जाहिर करते हुए खलबली मचा दी थी।

हाशिम ने कहा कि मोदी इसलिए अच्छे हैं, क्योंकि उन्होंने बनारस में अंसारियों के लिए बहुत किया है और बहुत कुछ कर रहें हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जिसकी मदद कर रहे हैं, वह भी अंसारी हैं और मैं भी अंसारी हूं। इसीलिए अंसारी मोदी का साथ दे रहे हैं। उनकी वजह से मैं भी मोदी का साथ दूंगा। मोदी हमारी कौम के लिए फिक्रमंद हैं और उनका फायदा चाहते हैं।

92 वर्षीय हाशिम अंसारी पिछले 65 साल से बाबरी मस्जिद का मुकदमा लड़ रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस मुकदमे में वह मुस्लिम पक्ष की तरफ से सबसे दमदार पैरोकार माने जाते हैं।

हाशिम ने कहा कि राजनीति करने वाले हुकूमत का पैसा लेकर अपना सियासी फायदा उठाते हैं, मगर पीएम मोदी अपने एमपी, एमएलए से एक-एक पैसे का हिसाब मांगते हैं। वह कहते हैं कि जो रुपया ले गए हो, पहले उसका हिसाब दो। इसके बाद दूसरा रुपया मिलेगा।

हाशिम ने कहा कि एमपी, एमएलए हुकूमत से पैसा ले जाते हैं, लेकिन देश पर खर्च नहीं करते हैं। मोदी उनसे हिसाब तो मांग रहे हैं। इसलिए मोदी सबसे खूबसूरत आदमी हैं और मैं उनका समर्थन करता हूं।

बता दें कि 1949 में जब विवादित स्थल से मूर्तियां बरामद हुई थीं, उस समय जिन लोगों को अरेस्ट किया गया था, उनमें हाशिम भी थे। 1961 में जब वक्फ बोर्ड ने मुकदमा दायर किया था, उसमें भी हाशिम मुद्दई बनाए गए थे।
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रामलला का दर्शन करें आजम खान: हाशिम अंसारी

आईएएनएस| Dec 3, 2014,

लखनऊ/अयोध्या
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुख्य मुद्दई हाशिम अंसारी ने बुधवार को इस मुद्दे के राजनीतिकरण को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की और कोर्ट में मामले की पैरवी न करने की घोषणा की। लेकिन उनके इस बयान पर भी राजनीति शुरू हो गई है। अंसारी ने बुधवार को कहा कि वह अब बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब राजनीति का अखाड़ा बन गया है और सभी इस मुद्दे का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में कर रहे हैं।

हाशिम ने कहा, 'मुकदमा हम लड़ें और राजनीतिक फायदा आजम खान उठाएं। इसलिए मैं अब बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नहीं करूंगा। इसकी पैरवी आजम खान करें।' हाशिम अंसारी ने कहा कि आजम खान चित्रकूट में छह मंदिरों का दर्शन कर सकते हैं, तो अयोध्या दर्शन करने क्यों नहीं आते? भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हाशिम के बयान का स्वागत किया। विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) ने हाशिम के बयान का अपने तरीके से अर्थ निकाला और कहा कि उन्होंने सच स्वीकारने में बहुत देर लगा दी।

पिछले 64 वर्षों से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे हाशिम ने दुख और आक्रोश के साथ मीडियाकर्मियों से कहा, 'बाबरी मस्जिद हो या राम जन्मभूमि, यह राजनीति का अखाड़ा है। मैं हिंदुओं या मुसलमानों को बेवकूफ बनाना नहीं चाहता। अब हम किसी कीमत पर बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे।'
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विवादित ढांचे को ढहाए जाने की तिथि 6 दिसंबर, जो कि करीब आ पहुंची है, का जिक्र करते हुए हाशिम ने कहा, 'छह दिसंबर को मुझे कोई कार्यक्रम नहीं करना है, काला दिवस जैसे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होना है। बल्कि अपना दरवाजा बंद करके घर के अंदर रहना है।' वयोवृद्ध अंसारी ने कहा कि बाबरी मस्जिद का मुकदमा 1950 से चल रहा है। सारे नेता चाहे वह हिंदू हों या मुसलमान, मंदिर-मस्जिद के नाम पर अपनी रोटियां सेंक रहे हैं। 

इस मुद्दे के राजनीतिकरण से नाराज हाशिम ने सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खान का नाम लेकर कहा कि अब वही इसकी पैरवी करें। हाशिम ने कहा कि बाबरी मस्जिद की पैरवी के लिए ऐक्शन कमिटी बनी थी, लेकिन आजम खान उसके संयोजक बना दिए गए। अब सियासी फायदा उठाने के लिए वह मुलायम के साथ चले गए। ऐक्शन कमिटी के जितने नेता थे, उनको पीछे छोड़ दिया गया।

लेकिन वीएचपी और बीजेपी कब सच स्वीकारेगी, इस पर वे कुछ नहीं बोल पाए। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने हाशिम के बयान को सकारात्मक बताया। बकौल पाठक, 'हाशिम के बयान के बाद अब इस मामले से जुड़े अन्य पक्षकारों को भी सोचना चाहिए। हाशिम अंसारी ने अपने बयान में जिस व्यक्ति पर सवाल खड़े किए हैं, उनको भी इसका जवाब देना चाहिए। जहां तक पार्टी का सवाल है तो यह हमारे लिए श्रद्धा और आस्था का विषय है। उनका बयान स्वागत योग्य है।'

लेकिन पाठक इस दौरान यह भूल गए कि हासिम ने मंदिर की राजनीति करने वालों की भी खिंचाई की है। हाशिम के बयान के बाद वीएचपी के प्रदेश प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि हाशिम ने सचाई स्वीकार करने में बड़ी देर लगा दी। अब तक वह कट्टरपंथियों के हाथों में खेलते रहे हैं। लेकिन वीएचपी भी कभी सचाई स्वीकारेगी, इस पर वह कुछ नहीं बोल पाए। सूबे में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (एसपी) राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साधा।

एसपी नेता डॉ. सी. पी. राय ने आईएएनएस से कहा कि जो व्यक्ति पिछले 64 सालों से इस मुद्दे को लड़ता आ रहा है, वह इस तरह का बयान नहीं दे सकता। राय ने कहा, 'मुझे लगता है कि अभी हमें और इंतजार करना चाहिए। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो इसका फैसला भी अदालत के माध्यम से ही होगा।'

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने कहा कि यह मुद्दा फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। इस मुद्दे पर किसी तरह की प्रक्रिया देना ठीक नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी कहा कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, लिहाजा अब इस मामले में किसी के पैरवी करने या न करने का कोई सवाल ही नहीं है। उल्लेखनीय है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।