मंगलवार, 27 जनवरी 2015

अमेरिकी राष्ट्रपति , हनुमान भक्त बराक ओबामा !

ओबामा , प्रतिभा आडवाणी के पास  आए और बड़े गर्व से हनुमान जी की छोटी सी प्रतिमा दिखाई
The photo by Brooks Kraft that appeared in Time on June 2, 2008 shows candidate Obama displaying a palm-full of “lucky” charms.   The full photo is 




कैसे हनुमान भक्त बन गए बराक ओबामा
http://khabar.ibnlive.in.com/news/135284/1

आईबीएन-7 | Jan 27, 2015
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नई दिल्ली। जिंदगी के तमाम पड़ावों में, मुश्किलों में, परेशानी में, जब हौसला चाहिए होता है, हिम्मत चाहिए होती है, तब ओबामा याद करते हैं हनुमान को। एक ऐसा सहारा जो तब से उनने साथ है जब उनके पहले पिता उन्हें छोड़कर चले गए थे जब जिंदगी में दूसरे पिता आए थे।

जी हां, दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को शक्ति मिलती है भगवान हनुमान से। इस बात का चर्चा पिछले काफी सालों से होती रही है। लेकिन रविवार को पहली बार खुद बराक ओबामा ने बताया कि हनुमान जी की उनकी जिंदगी में क्या अहमियत है।

रविवार रात सवा नौ बजे के करीब जब ओबामा राष्ट्रपति भवन में खास मेहमानों से एक एक करके मिल रहे थे। कतार में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी भी थीं। अपनी बारी आने पर प्रतिभा ओबामा के पास पहुंचीं और उनसे कुछ कहा। ओबामा का चेहरा बता रहा है कि उन्होंने बेहद खुशी के साथ किसी बात पर प्रतिभा की हां में हां मिलाई। ओबामा से बात करने के बाद प्रतिभा आगे बढ़ गईं। इस मुलाकात में जो बात हुई वो बेहद दिलचस्प है।

प्रतिभा आडवाणी के मुताबिक उन्होंने बराक ओबामा से कहा, गुड इवनिंग मिस्टर प्रेसिडेंट, भारत में आपका स्वागत है। आपका स्वागत कर हमें काफी खुशी हो रही है। ओबामा ने जवाब दिया- थैंक यू। फिर प्रतिभा ने उनसे कहा- जानते हैं, हम दोनों की जिंदगी में हमारा एक प्यार कॉमन है। ओबामा ने पूछा- वो क्या है? प्रतिभा ने जवाब दिया- भगवान हनुमान के लिए हमारा प्यार। ओबामा ने जवाब दिया- अरे...अच्छा। प्रतिभा ने फिर उनसे कहा- मुझे जब आपके इस प्यार के बारे में पता चला तो बड़ी खुशी हुई। फिर ओबामा बोले- मैं तो अपने पॉकेट में हर वक्त उनकी छोटी सी प्रतिमा रखता हूं।

प्रतिभा आडवाणी का कहना है कि इस बातचीत के दौरान ओबामा अपने पॉकेट में हनुमान जी की मूर्ति तलाश रहे थे। लेकिन मेहमानों से मिलने की हड़बड़ाहट में वो मूर्ति उन्हें मिली नहीं। उस वक्त तक लोग बैंक्वेट से वापस जाने लगे थे। ओबामा उस ओर गए। लेकिन कुछ ही पलों में वो प्रतिभा आडवाणी के पास वापस आए और बड़े गर्व से हनुमान जी की छोटी सी प्रतिमा दिखाई और कहा देखो मैंने इसे ढूंढ लिया, ये दरअसल मेरा लकी चार्म है। भगवान हनुमान के बारे में उनके दो भक्तों की इस बातचीत का खुलासा प्रतिभा ने आज किया।


क्यों बने ओबामा हनुमान भक्त?

आखिर ऐसा क्या हुआ जो अमेरिकी राष्ट्रपति एक हिंदू देवता का भक्त बन गया। आखिर ऐसा क्या हुआ जिसके बाद एक अमेरिकी राष्ट्रपति मुश्किल वक्त में हनुमान जी को याद करता है। इसकी कहानी जितनी पुरानी है, उतनी ही दिलचस्प भी।

हनुमान जी के साथ बराक ओबामा का प्रेम जागा था बचपन में या कहें भक्ति के बीज पड़े थे। उस वक्त बराक ओबामा सिर्फ 6 साल के थे। 1995 में लिखे ड्रीम्स फ्रॉम माई फादर के नाम से लिखे अपने यादगार अनुभवों में बराक ओबामा ने उन दिनों को याद किया है। ओबामा ने विस्तार से लिखा है कि कैसे पहली बार उन्हें पता चला था कि हनुमान नाम के भी कोई देवता हैं।

आपको बता दें कि बराक ओबामा की मां का अपने पहले पति से तभी तलाक हो गया था जब वो सिर्फ दो साल के थे। जब ओबामा पांच साल के हुए तो उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली। ओबामा के सौतेले पिता इंडोनेशिया के रहने वाले थे। अपने दूसरे पति के साथ रहने के लिए ओबामा की मां ने भी जकार्ता चले जाने का फैसला किया। जकार्ता एयरपोर्ट से निकलने के बाद घर के रास्ते में ओबामा के पिता ने उन्हें रास्ते में एक बड़ी सी मूर्ति दिखाकर कहा-

उधर सामने की तरफ देखो। सड़क के किनारे वो दस मंजिला ऊंची इमारत जितनी मूर्ति, जिसका शरीर तो इंसान जैसा है और चेहरा बंदरों जैसा। वो हनुमान हैं। भगवान हैं। वो बहुत बड़े योद्धा थे। सौ आदमियों जितनी ताकत थी उनमें। जब वो बुरी ताकतों से लड़ते थे तो कोई भी उन्हें हरा नहीं सकता था।

ओबामा के मुताबिक उस वक्त वो हैरत से हनुमान जी की मूर्ति की तरफ देखते रहे। उस शक्तिशाली भगवान की मूर्ति ओबामा के जेहन में बस गई थी । उस दिन के बाद से ही भगवान हनुमान ओबामा के लिए हौसले, उम्मीद, शक्ति और हिम्मत का प्रतीक बन गए थे। पहले पिता के दूर जाने के बाद दुनिया की तमाम चुनौतियों का सामना करने के लिए ओबामा को ऐसी हिम्मत की जरूरत भी थी। हनुमान के तौर पर उन्हें एक ऐसा साथी मिला था, जो उन्हें हर हालात से मुकाबला करने का साहस देता था।

हर छोटा बच्चा अपने पिता में एक हीरो को देखता है। एक ऐसा हीरो जो मुसीबत में, परेशानी में उसका हाथ थामकर उस बच्चे को सारी आफतों से बाहर निकाल ले। ओबामा के पास उनका हीरो नहीं था। इसलिए उन्हें भगवान हनुमान में अपने लिए सहारा दिखता था। 6 साल की उम्र में बना वो रिश्ता आज भी कायम है।

बचपन से लेकर आज तक ओबामा की जिंदगी में आए हर अहम पड़ाव के वक्त भगवान हनुमान की झलक जरूर मिली है। अपने विरोधियों को चारों खाने चित कर देने वाले हनुमान हर वक्त ओबामा के दिल में बसे नजर आए। इस बात का भी अंदाजा लगाना जा सकता है कि संघर्ष के दिनों में युवा ओबामा को हनुमान जी से ही शक्ति मिली।

बराक ओबामा और मिशेल ओबामा की बरसों पुरानी एक तस्वीर में दोनों सोफे पर बैठे हैं और उनके पीछे दीवार पर तीन तस्वीरें नजर आती हैं। एक तस्वीर धुंधली है, लेकिन बाकी दो तस्वीरें हनुमान जी की हैं। आपको बता दें इंडोनेशिया में हनुमान जी की ऐसी ही मूर्तियों और तस्वीरों की पूजा की जाती है।

जाहिर है ओबामा की जिंदगी में वक्त -वक्त पर हनुमान की झलक सार्वजनिक भी होती रही है। किताब हो, पेंटिंग हो या फिर साल 2008 के अमेरिकी चुनाव। तब बराक ओबामा को खास तौर पर हनुमान जी की 2 फीट की मूर्ति भिजवाई गई थी। ये मूर्ति सौंपी गई थी ओबामा के भारतीय प्रतिनिधि को। उनकी तरफ से ये भी कोशिश की गई थी चुनाव के नतीजे आने से पहले ये मूर्ति ओबामा तक पहुंच जाए।

पीतल की इस मूर्ति का वजन 15 किलो था और उस पर सोने का पानी चढ़ा था। कहते हैं जब ओबामा के करीबियों से उस वक्त इस मूर्ति के बारे में पूछा गया तो वो सिर्फ मुस्करा दिए थे। वो ओबामा के इस राज को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे। मूर्ति के साथ ही ओबामा को हनुमान चालीसा की एक प्रति भी भेंट की गई थी। ये भी दिलचस्प है कि जिस दिन चुनाव के नतीजे आए उस दिन मंगलवार था और ओबामा की हनुमान भक्ति के बारे में जानने वाले यही कह रहे थे कि उनका मंगल होगा और हुआ भी वही। ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति चुन लिए गए।

ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन का रवैया बदला। व्हाइट हाउस में प्रशासन ने जानना शुरू किया कि हिंदू धर्म क्या है, उसके मूल्य क्या हैं, हनुमान क्या हैं। ये ओबामा की हनुमान भक्ति ही थी कि साल 2009 में पहली बार व्हाइट हाउस में आधिकारिक तौर पर दीवाली का दीया जलाया गया। मैरिलैंड में बने शिव-विष्णु मंदिर के मुख्य पुजारी ने बाकायदा मोदी से पूजा कराई तमाम मेहमानों की मौजूदगी में ओबामा ने दीप प्रज्वलित किया।

इस मौके पर मौजूद हर मेहमान को दीवाली का तोहफा भी दिया गया। इसके बाद मुख्य पुजारी ने बराक ओबामा को लाल रंग की ये खूबसूरत शॉल पहनाई। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस त्योहार से ओबामा हमेशा बहुत प्रभावित रहे। ये जश्न जितना भगवान राम की जीत का है उतना ही हनुमान की भक्ति का भी। व्हाइट हाउस में इसके बाद ओबामा ने एक और परंपरा शुरू की। दीवाली पर उनकी तरफ से एक रिकॉर्डेड संदेश जारी किया जाने लगा।

दीवाली के साथ ओबामा का गहरा रिश्ता एक बार फिर नजर आया साल 2010 में। ओबामा के भारत दौरे का कार्यक्रम इस तरह बनाया गया कि दीवाली के वक्त वो भारत में रहें। एजेंसियों की मानें तो भारत दौरे में बराक ओबामा और मिशेल ने भगवान गणेश और हनुमान जी की मूर्तियां खरीदीं। इनमें से कुछ मूर्तियां उन्होंने बेटियों को तोहफे में दी। हनुमान की धरती से ओबामा का प्यार पूरे दौरे में साफ नजर आया।

पहले दौरे को कामयाबी से निपटाने के बाद ओबामा अमेरिका लौट गए। इस दौरे के बाद व्हाइट हाउस में हनुमान जी और दीवाली के लिए बनी खास जगह और खास हो गई। अगले साल दीवाली आई तो बराक ओबामा ने एक बार फिर व्हाइट हाउस में दीए जलाए। व्हाइट हाउस ने अपने संदेश में कहा भी कि ओबामा पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दीवाली को आधिकारिक तौर पर मनाया। ओबामा की ये भक्ति देख देश में भी संत खुश हैं। उनकी मानें तो हनुमान भक्ति ने ही ओबामा को इस मुकाम तक पहुंचाया है।

बराक ओबामा कभी खुलेआम ये स्वीकारने में नहीं हिचकिचाते कि वो हनुमान के भक्त हैं। ओबामा की ये भक्ति देख उनके प्रशंसकों में भी हनुमान जी को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। कहते हैं एक बार ओबामा की कट्टर समर्थक और चैट शो होस्ट ओप्रा विन्फ्रे ने भारत आने की तैयारी कर ली थी। सिर्फ ये जानने के लिए कि हनुमान जी का जन्म कहां हुआ था। हालांकि स्वाइन फ्लू के चलते उन्हें वो दौरा रद्द करना पड़ा था। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ईसाई धर्म को मानने वाले बराक ओबामा को असल जिंदगी में शक्ति कहां से मिलती है।

ओबामा : भारत और अमरीका विविधता में एकता वाले देश


 ओबामा के भाषण की 12 ख़ास बातें


 अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दिल्ली के सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम में शहर के युवाओं और अन्य निवासियों को संबोधित करते हुए अमरीका को भारत का बेस्ट पार्टनर बताया. उन्होंने भारत में विविधता का ज़िक्र करते हुए ज़ोर देकर कहा कि अमरीका और भारत की सबसे बड़ी ताकत दोनों की अनेकता में एकता है.

भारत और अमरीका विविधता में एकता वाले देश हैं और दोनों देशों को इसे बचाना और बढ़ाना चाहिए.

1 . अमरीका के मार्टिन लूथर किंग गांधी जी से प्रेरित थे. ये बात दोनों देशों को जोड़ती है.

2 . भारत और अमरीका विविधता में एकता वाले देश हैं और दोनों देशों को इसे बचाना और बढ़ाना चाहिए.

3 .   एक और संपर्क है. एक समय विवेकानंद आए थे अमरीका..वो भी मेरे शहर शिकागो में और हिंदू धर्म का संदेश दिया था. उनके शब्द थे अमरीका के भाईयो और बहनो. मैं वो शब्द दोहराता हूं...भाइयो और बहनो

4 . हर धर्म का सम्मान होना चाहिए और धर्म के प्रचार प्रसार की आज़ादी भी.

5 . अमरीका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार हो और भारत को स्थायी सीट मिले.

6 . भारत और अमरीका में ही ये हो सकता है कि एक कुक का बेटा राष्ट्रपति बन सकता है और एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री.

7 . किसी भी देश के बारे में इससे ज्यादा पता चलता है कि वो अपनी महिलाओं को कैसे ट्रीट करता है. भारत में मेरा स्वागत एक महिला कमांडिंग अधिकारी ने स्वागत किया.

8 . हम चाहते हैं कि ऐसी दुनिया बने जहां परमाणु हथियार न हों और इसमें भारत को भी भूमिका निभानी होगी.

9 . भारत में अधिकांश आबादी 30 साल से कम की है. नई दुनिया कैसी होगी ये तय करने की ज़िम्मेदारी इन्हीं युवाओं की है

10 . हम पिछली बार आए थे तो मुंबई में हमने दीवाली मनाई थी. डांस वगैरह भी किया था. इस बार डांस का कार्यक्रम नहीं हो सका.

11 .गणतंत्र दिवस में मुझे मुख्य अतिथि बनाने के लिए मैं यही कहूंगा...बहुत धन्यवाद.

1 2 . ओबामा ने अपने भाषण का अंत भी हिंदी में - जय हिंद - से किया.

भारत-अमेरिका : सुधरते रिश्तों ने शेयर बाजार को लगाए पंख



अमेरिका से सुधरते रिश्तों ने बाजार को लगाए पंख
जागरण Tue, 27 Jan 2015
मुंबई। दलाल स्ट्रीट में मंगलवार को लगातार आठवें सत्र में तेजी का दौर बना रहा। भारत-अमेरिका के सुधरते कारोबारी रिश्तों से उत्साहित निवेशकों ने शेयरों में चौतरफा लिवाली की। इससे बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 292.20 अंक यानी एक फीसद उछलकर नए शिखर पर पहुंच गया। यह संवेदी सूचकांक 29571.04 अंक के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 74.90 अंक की छलांग लगाकर 8900 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। यह 8910.50 अंक पर बंद हुआ।

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआइआइ) बाजार में बड़े लिवाल बने हुए हैं। भारत के साथ कारोबार को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चार अरब डॉलर के निवेश का एलान किया है। इसने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया। ओबामा की भारत यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में हुए समझौतों से भी बाजार का माहौल गरम रहा। इसमें वह करार विशेष रूप से शामिल है जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां भारत में परमाणु संयंत्र बना सकेंगी।

तीस शेयरों वाला सेंसेक्स इस दिन 29451.65 अंक पर मजबूत खुला। इसका निचला स्तर 29286.09 अंक रहा। अंतिम कारोबारी घंटों में निवेशकों की तेज लिवाली के चलते सेंसेक्स ने 29618.59 अंक का स्तर छुआ।

बीएसई के सूचकांकों में बैंकिंग, कैपिटल गुड्स, ऑटो, एफएमसीजी और रीयल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने ज्यादा दिलचस्पी ली। इसके उलट आइटी और टेक्नोलॉजी खंड की कंपनियों के शेयरों को बिकवाली की मार पड़ी। सेंसेक्स की तीस कंपनियों में 19 के शेयर बढ़े, जबकि 11 में गिरावट दर्ज की गई।