सोमवार, 9 फ़रवरी 2015

दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर : अक्षर धाम मंदिर, दिल्ली



                                                अक्षर धाम मंदिर दिल्ली
                            ये है दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर, गिनीज बुक में दर्ज है नाम

Feb 09, 2015,
उज्जैन। नई दिल्ली में स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का नाम दुनिया के सबसे विस्तृत मंदिर के रूप में गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में 2005 में दर्ज हुआ। यह खूबसूरत मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर होने के साथ ही, बहुत ही सुंदर और आकर्षक आर्किटेक्चर के शानदार उदाहरणों में से एक है।
यह मंदिर 10,000 वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति के प्रतीक को बहुत विस्मयकारी, सुंदर, बुद्धिमत्तापूर्ण और सुखद रूप से प्रस्तुत करता है। मंदिर भारतीय शिल्पकला, परंपराओं और प्राचीन आध्यात्मिक संदेशों के तत्वों को शानदार ढंग से दिखाता है। स्वामीनारायण अक्षरधाम परिसर का निर्माण कार्य एचडीएच प्रमुख बोचासन के स्वामी महाराज श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के आशीर्वाद से और 11,000 कारीगरों और हज़ारों बीएपीएस स्वयंसेवकों के धार्मिक प्रयासों से केवल पांच साल में पूरा हुआ था।

मंदिर की विशेषताएं -

नीलकण्ठ वर्णी अभिषेक- एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक परंपरा, जिसमें विश्व शांति और व्यक्ति, परिवार और मित्रों के लिए अनवरत शांति की प्रार्थनाएं की जाती हैं। इस अभिषेक के लिए भारत की 151 पवित्र नदियों, झीलों और तालाबों के पानी का उपयोग किया जाता है।
ये प्रदर्शनियां हैं आकर्षण-

हॉल 1 - हॉल ऑफ वैल्यूज़ (50 मिनट)
अहिंसा, ईमानदारी और आध्यात्मिकता का उल्लेख करने वाली फिल्मों और रोबोटिक शो के माध्यम से चिरस्थायी मानव मूल्यों का अनुभव।

हॉल 2 - विशाल पर्दे पर फिल्म (40 मिनट)
नीलकण्ठ नामक एक ग्यारह वर्षीय योगी की अविश्वसनीय कथा के माध्यम से भारत की जानकारी लें। जिसमें भारतीय रीति-रिवाज़ों को संस्कृति और आध्यात्मिकता के माध्यम से जीवन-दर्शन में उतारा गया है। इसकी कला और शिल्पकला का सौंदर्य तथा अविस्मरणीय दृश्यावलियों, ध्वनियों और इसके प्रेरक पर्वों को अनुभव किया जा सकता है।

हॉल 3 - कल्चरल बोट राइड (15 मिनट)
भारत की शानदार विरासत के 10,000 वर्षों का सफर कराती है। इसमें आप भारत के ऋषियों-वैज्ञानिकों की खोजों और आविष्कारों की जानकारी लें। विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय तक्षशिला देखें। अजंता-एलौरा की गुफाओं से होकर जाएं और प्राचीन काल से ही मानवता के प्रति भारत के योगदान की जानकारी लें।
संगीतमय फव्वारा - जीवन चक्र (सुबह के बाद शाम को - 15 मिनट)
एक दर्शनीय संगीतमय फव्वारा शो। जिसमें भारतीय दर्शन के अनुरूप जन्म, जीवनकाल और मृत्यु चक्र का उल्लेख किया जाता है।

गार्डन ऑफ इंडिया- साठ एकड़ के हरे-भरे लॉन, बाग और कांस्य की उत्कृष्ट प्रतिमा, भारत के उन बाल-वीरों, वीर योद्धाओं, राष्ट्रीय देशभक्तों और महान महिला विभूतियों का सम्मान किया गया है, जो मूल्यों और चरित्र के प्रेरणास्रोत रहे हैं।

लोटस गार्डन- कमल के आकार का एक बागीचा उस आध्यात्मिकता का आभास देता है, जो दर्शनशास्त्रियों, वैज्ञानिकों और लीडरों द्वारा बताई जाती है।
कहां स्थित है-राष्ट्रीय राजमार्ग 24, अक्षरधाम सेतु, नई दिल्ली, भारत - 110092

नजदीकी मेट्रो स्टेशन-
अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन (पैदल - 200 मीटर / 7 मिनट)।

परिसर में प्रवेश - निःशुल्क कोई टिकट नहीं।

समय
प्रथम प्रवेश: प्रातः 9:30 बजे
अंतिम प्रवेश: सायं 6:30 बजे
प्रदर्शनी समय: प्रातः10:00 बजे से 5:30 बजे।

प्रवेश
परिसर में प्रवेश- निःशुल्क कोई टिकट नहीं।
मंदिर एवं बागीचे - निःशुल्क कोई टिकट नहीं।
प्रदर्शनी एवं संगीतमय फव्वारा - शुल्क 7 टिकट।
अभिषेक दर्शन- निःशुल्क कोई टिकट नहीं।
अभिषेक पूजा- टिकट शुल्क।

केवल प्रदर्शनी हेतु
वयस्क (12 वर्ष एवं अधिक) रु. 170
वरिष्ठ नागरिक (65 वर्ष एवं अधिक) रु. 125
बच्चा (4 से 11 वर्ष) रु. 100
बच्चा (4 वर्ष से कम) निःशुल्क
केवल संगीतमय फव्वारा हेतु:
वयस्क (12 वर्ष एवं अधिक) रु. 30
वरिष्ठ नागरिक (65 वर्ष एवं अधिक) रु. 30
बच्चा (4 से 11 वर्ष) रु. 2
बच्चा (4 वर्ष से कम)

सुविधाएं-
पार्किंग- वाहन के प्रकार के अनुसार दरें।
अमानती समानघर- मालिक के जोखिम पर डिपॉजिट (निःशुल्क)
फोटोग्राफ (शुल्क पर)
व्हीलचेयर- रिफंडेबल डिपॉजिट - रु. 100
फूड कोर्ट- भोजन, स्नेक्स एवं पेय-पदार्थ (केवल 100 रु. शाकाहारी)।

स्विस बैंक भारतीयों खाताधारकों के नाम उजागर




                                स्विस बैंक HSBC के 1195 भारतीयों के नाम उजागर, 
                                       जमा रकम 25 हजार करोड़ रुपये: रिपोर्ट
                                                   Monday, February 9, 2015

ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली: स्विस बैंक एचएसबीसी में भारतीय खाताधारकों के नाम और जमा रकम को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 2011 में फ्रेंच अथॉरिटी की ओर से भारत सरकार ( तत्कालीन कांग्रेस सरकार )  को एचएसबीसी बैंक में 628 भारतीय खाताधारकों के नाम बताए गए थे, लेकिन नए खुलासे के मुताबिक एचएसबीसी बैंक में 1,195 भारतीयों के बैंक अकाउंट हैं और उसमें करोड़ों रुपए जमा है।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इन खातों में करीब 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हैं। इस नई लिस्ट में देश के बड़े कारोबारी, राजनीतिक हस्तियां, हीरा कारोबारी और एनआरआई के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें कई विदेश में बस चुके हैं। माना जा रहा है कि कि नए खुलासों के बाद काले धन की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआइटी) की जांच के दायरे में खासा इजाफा होगा।

गौर हो कि पैसा गैरकानूनी तरीके से दूसरे देशों में कालेधन के रूप में जमा कराया गया है। हालांकि अखबार ने इन खाताधारकों के नामों का खुलासा तो कर दिया है। लेकिन सरकार आज आधिकारिक रूप से 60 खाताधारकों के नाम सार्वजनिक कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक इन 60 खाताधारकों में देश के बड़े उद्योग घराने हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इन खाताधारकों के खाते में 1500-1600 करोड़ रुपये तक कालाधन जमा है। इन खाताधारकों की जांच सरकार आयकर विभाग को सौंप सकती है। सरकार ने आज यह भी ऐलान किया है कि इस मसले पर जांच 31 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी।



भारत में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है : सरसंघचालक डा. मोहन भागवत




                                           'भारत में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है'
                                                  डीपी आर्य  सोमवार, 9 फरवरी 2015
                                                     अमर उजाला, गाजियाबाद |

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को हिंदू बताया। रविवार को अपने संबोधन में भागवत ने देश के प्रत्येक ज्वलंत विषय को छुआ, संघ की नई नीति की घोषणा की और पाकिस्तान का उपचार भी बताया, लेकिन बड़ी चतुराई से। उन्होंने कहानी सुनाकर अपना संदेश स्वयंसेवकों तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि भारत माता का प्रत्येक पुत्र हिंदू है। फिर चाहे वह किसी भी संप्रदाय, जाति, क्षेत्र का क्यों न हो? उनका कहना था कि अब परिस्थितियां अनुकूल हैं। मां भारती के प्रत्येक पुत्र को उसका गौरव समझाओ।

संघ में लाकर संघमय करो और अपने व्यवहार-विचार से उसका इतिहास समझाओ। उनको पूर्वजों की जानकारी देकर हिंदू बंधु बनाना है। इस तरह उन्होंने घर वापसी पर मुहर लगा दी, लेकिन जोर-जबरदस्ती से दूर रहने का संदेश भी दिया। संघ प्रमुख ने पाकिस्तान पर ज्यादा महत्व नहीं देने पर जोर दिया।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पीएम मोदी की नीतियों की तुलना योगीराज श्रीकृष्ण से करते हुए पाकिस्तान को ज्यादा तवज्जो ने देने को कहा। उन्होंने महाभारत का कथानक सुनाकर पड़ोसी मुल्क पर निशाना साधा। संकेतों में बताया कि जितना पड़ोसी मुल्क पर प्रतिक्रिया दी जाएगी, उसका अंतर्राष्ट्रीय कद बढ़ता जाएगा। अब पाकिस्तान का मुकाबला नीतियों से करना होगा।

उन्होंने महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन और सेनापति सात्यकी के वन भ्रमण का कथानक सुनाते हुए कहा कि रात में मायावी राक्षस तीनों को खाने का दंभ भरता है। अंगुठे के बराबर के राक्षस का सात्यकी और अर्जुन जितना मुकाबला करते हैं, उसका कद बढ़ता जाता है। जल्द ही वह भीमकाय हो जाता है। उन्होंने पड़ोसी मुल्क को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिलने को ऐसा ही व्यवहार बताया।

इसके बाद श्रीकृष्ण ने राक्षस को तवज्जो ही नहीं दी तथा उसकी उपेक्षा कर दी। कुछ ही देर में मायावी राक्षस का कद घटकर फिर अंगुठे के बराबर हो गया और श्रीकृष्ण ने उसको पल्लू में बांध लिया। देश के वर्तमान समय को श्रीकृष्ण की नीतियों वाला बताते हुए उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर संघ की मुहर लगा दी। संघ प्रमुख का मानना था कि पड़ोसी मुल्क को महत्व न दिया जाएगा तो वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर महत्वहीन हो जाएगा। पाकिस्तान का कद भारत के महत्व देने के कारण ही बढ़ता गया है।

‘पहले के जमाने में राक्षस होते थे, अब आतंकवादी राक्षस की भूमिका अदा कर रहे हैं। इन्हें खत्म करने के लिए महापुरुषों ने योजनाएं बनाईं थीं और धरती से राक्षस जाति का नाश कर दिया था। वर्तमान में राष्ट्र का नेतृत्व करने वालों को आतंकवादियों के सफाए के लिए योजना बनानी होगी।’

यह कहना है राष्ट्रीय आरएसएस के सर संघ चालक डा. मोहन भागवत का। सर संघ चालक रविवार को गाजियाबाद के कमला नेहरू नगर स्थित मैदान में संघ समागम कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे।

अपने 45 मिनट के संबोधन में डा. मोहन भागवत ने कहा कि संघ के बारे में कुछ लोग नहीं जानते हैं। ऐसे लोग खुद भ्रमित होने के साथ ही दूसरों के सामने भी संघ की गलत छवि प्रस्तुत करते हैं। संघ को जानना है तो इसमें लगने वाली शाखाओं में आना होगा।