मंगलवार, 10 मार्च 2015

हिन्दुओं की वैदिक काल गणना

हिन्दुओं की वैदिक काल गणना

वैदिक समय मापन, (काल व्यवहार) का सार निम्न लिखित है :-
लघुगणकीय पैमाने पर, वैदिक समय इकाइयाँ
नाक्षत्रीय मापन :-
एक परमाणु मानवीय चक्षु के पलक झपकने का समय = लगभग 4 सैकिण्ड
एक विघटि = ६ परमाणु = (विघटि) २४ सैकिण्ड
एक घटि या घड़ी = 60 विघटि = २४ मिनट
एक मुहूर्त = 2 घड़ियां = 48 मिनट
एक नक्षत्र अहोरात्रम या नाक्षत्रीय दिवस = 30 मुहूर्त (दिवस का आरम्भ सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, ना कि अर्धरात्रि से)
10 पलक झपकने का समय = 1 काष्ठा
35 काष्ठा= 1 कला
20 कला= 1 मुहूर्त
10 मुहूर्त= 1 दिवस (24 घंटे)
३0 दिवस= 1 मास
6 मास= 1 अयन
2 अयन= 1 वर्ष, = १ दिव्य दिवस
छोटी वैदिक समय इकाइयाँ :-
एक तॄसरेणु = 6 ब्रह्माण्डीय ‘.
एक त्रुटि = 3 तॄसरेणु, या सैकिण्ड का 1/1687.5 भाग
एक वेध =100 त्रुटि.
एक लावा = 3 वेध
एक निमेष = 3 लावा, या पलक झपकना
एक क्षण = 3 निमेष.
एक काष्ठा = 5 क्षण, = 8 सैकिण्ड
एक लघु =15 काष्ठा, = 2 मिनट
15 लघु = एक नाड़ी, जिसे दण्ड भी कहते हैं. इसका मान उस समय के बराबर होता है, जिसमें कि छः पल भार के (चौदह आउन्स) के ताम्र पात्र से जल पूर्ण रूप से निकल जाये, जबकि उस पात्र में चार मासे की चार अंगुल लम्बी सूईं से छिद्र किया गया हो. ऐसा पात्र समय आकलन हेतु बनाया जाता है.
2 दण्ड = एक मुहूर्त.
6 या 7 मुहूर्त = एक याम, या एक चौथाई दिन या रत्रि.[3]
4 याम या प्रहर = एक दिन या रात्रि
चाँद्र मापन :-
एक तिथि वह समय होता है, जिसमें सूर्य और चंद्र के बीच का देशांतरीय कोण बारह अंश बढ़ जाता है। तिथियाँ दिन में किसी भी समय आरम्भ हो सकती हैं, और इनकी अवधि उन्नीस से छब्बीस घंटे तक हो सकती है.
एक पक्ष या पखवाड़ा = पंद्रह तिथियाँ
एक मास = २ पक्ष ( पूर्णिमा से अमावस्या तक कॄष्ण पक्ष; और अमावस्या से पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष)
एक ॠतु = २ मास
एक अयन = 3 ॠतुएं
एक वर्ष = 2 अयन
ऊष्ण कटिबन्धीय मापन
एक याम = 7½ घटि
8 याम अर्ध दिवस = दिन या रात्रि
एक अहोरात्र = नाक्षत्रीय दिवस (जो कि सूर्योदय से आरम्भ होता है)
अन्य अस्तित्वों के सन्दर्भ में काल-गणना
पितरों की समय गणना:-
15 मानव दिवस = एक पितॄ दिवस
30 पितॄ दिवस = 1 पितॄ मास
12 पितॄ मास = 1 पितॄ वर्ष
पितॄ जीवन काल = 100 पितॄ वर्ष= 1200 पितृ मास = 36000 पितॄ दिवस= 18000 मानव मास = 1500 मानव वर्ष
देवताओं की काल गणना
1 मानव वर्ष = एक दिव्य दिवस
30 दिव्य दिवस = 1 दिव्य मास
12 दिव्य मास = 1 दिव्य वर्ष
दिव्य जीवन काल = 100 दिव्य वर्ष= 36000 मानव वर्ष
चार युग :-
2 अयन (छः मास अवधि, ऊपर देखें) = 360 मानव वर्ष = एक दिव्य वर्ष
4,000 + 400 + 400 = 4,800 दिव्य वर्ष = 1 सत युग
3,000 + 300 + 300 = 3,600 दिव्य वर्ष = 1 त्रेता युग
2,000 + 200 + 200 = 2,400 दिव्य वर्ष = 1 द्वापर युग
1,000 + 100 + 100 = 1,200 दिव्य वर्ष = 1 कलि युग
12,000 दिव्य वर्ष = 4 युग = 1 महायुग (दिव्य युग भी कहते हैं)
ब्रह्मा की काल गणना :-
1000 महायुग= 1 कल्प = ब्रह्मा का 1 दिवस (केवल दिन) (चार खरब बत्तीस अरब मानव वर्ष; और यही सूर्य की खगोलीय वैज्ञानिक आयु भी है).
(दो कल्प ब्रह्मा के एक दिन और रात बनाते हैं)
30 ब्रह्मा के दिन = 1 ब्रह्मा का मास (दो खरब 59 अरब 20 करोड़ मानव वर्ष)
12 ब्रह्मा के मास = 1 ब्रह्मा के वर्ष (31 खरब 10 अरब 4 करोड़ मानव वर्ष)
50 ब्रह्मा के वर्ष = 1 परार्ध
2 परार्ध= 100 ब्रह्मा के वर्ष= 1 महाकल्प (ब्रह्मा का जीवन काल)(31 शंख 10 खरब 40अरब मानव वर्ष)
ब्रह्मा का एक दिवस 10,000 भागों में बंटा होता है, जिसे चरण कहते हैं:
चारों युग :-
4 चरण (1,728,000 सौर वर्ष) सत युग
3 चरण (1,296,000 सौर वर्ष) त्रेता युग
2 चरण (864,000 सौर वर्ष) द्वापर युग
1 चरण (432,000 सौर वर्ष) कलि युग
यह चक्र ऐसे दोहराता रहता है, कि ब्रह्मा के एक दिवस में 1000 महायुग हो जाते हैं
एक उपरोक्त युगों का चक्र = एक महायुग (43 लाख 20 हजार सौर वर्ष)
श्रीमद्भग्वदगीता के अनुसार “सहस्र-युग अहर-यद ब्रह्मणो विदुः”, अर्थात ब्रह्मा का एक दिवस = 1000 महायुग. इसके अनुसार ब्रह्मा का एक दिवस = 4 अरब 32 खरब सौर वर्ष. इसी प्रकार इतनी ही अवधि ब्रह्मा की रात्रि की भी है.
एक मन्वन्तर में 71 महायुग (306,720,000 सौर वर्ष) होते हैं. प्रत्येक मन्वन्तर के शासक एक मनु होते हैं.
प्रत्येक मन्वन्तर के बाद, एक संधि-काल होता है, जो कि कॄतयुग के बराबर का होता है (1,728,000 = 4 चरण) (इस संधि-काल में प्रलय होने से पूर्ण पॄथ्वी जलमग्न हो जाती है.)
एक कल्प में 864,000,0000 – ८ अरब ६४ करोड़ सौर वर्ष होते हैं, जिसे आदि संधि कहते हैं, जिसके बाद 14 मन्वन्तर और संधि काल आते हैं
ब्रह्मा का एक दिन बराबर है:
(14 गुणा 71 महायुग) + (15 x 4 चरण)
= 994 महायुग + (60 चरण)
= 994 महायुग + (6 x 10) चरण
=994 महायुग + 6 महायुग
= 1,000 महायुग
वर्तमान तिथि :-
वैवस्वत मनु के शासन में श्वेतवाराह कल्प के द्वितीय परार्ध में, अठ्ठाईसवें कलियुग के प्रथम वर्ष के प्रथम दिवस में विक्रम संवत 2072 में हैं। इस प्रकार अबतक १ अरब, ९६ करोड़, ०८ लाख, ५३ हज़ार, ११६ वर्ष इस ब्रह्मा को सॄजित हुए हो गये हैं।
ग्रेगोरियन कैलेण्डर के अनुसार वर्तमान कलियुग दिनाँक 17 फरवरी / 18 फरवरी को 3102 ई.पू. में हुआ था ।

क्या उमर अब्दुल्ला सरकार की वजह से हुई मसरत की रिहाई ?




By  एबीपी न्यूज़ Tuesday, 10 March 2015


नई दिल्ली: मसरत आलम की रिहाई पर संसद में आज दूसरे दिन भी हंगामा मचा है. मसरत को लेकर ABP न्यूज की पड़ताल में पता चला है कि रिहाई के लिए उमर अब्दुल्ला सरकार की लेटलतीफी जिम्मेदार है.
मसरत की रिहाई के लिए अभी तक मुफ्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था लेकिन एबीपी न्यूज़ की पड़ताल में पता चला है कि मसरत की रिहाई के लिए उमर लसरकार की लेटलतीफी जिम्मेदार है. मसरत आलम को 7 मार्च को रिहा किया गया था.

ABP न्यूज की पड़ताल के मुताबिक मसरत आलम  की PSA में यानी पब्लिक सेफ्टी एक्ट में हिरासत सितंबर में खत्म हो गई थी लेकिन उसे दोबारा हिरासत में लेने के लिए नियमों के मुताबिक कदम नहीं उठाए गए. इस वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या उमर सरकार की ओर से हिरासत को बढ़ाने के लिए क्या माकूल कदम नहीं उठाए गए.

एबीपी न्यूज़ की पड़ताल
दरअसल 30 सितंबर 2014 मसरत की हिरासत की अवधि समाप्त हो रही थी. लेकिन उससे पहले जम्मू के गृह सचिव ने एतिहातन जम्मू के डीएम को चिठ्ठी लिखी जिसमें कहा गया कि मसरत पर पीएसए खत्म हो रहा है.
इसके बाद 26 अक्टूबर को को जम्मू कस्मीर में चुनावों का एलान हुआ इसके साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो गई. 9 दिसंबर को डजीएम ने गृह सचिव के लिखा कि मसरत की मसरत की हिरासत को मंजूरी मिल गई है.

इसके 4 फरबरी को गृह सचिव ने ने डीएम को जवाब दिया कि मंजूरी देने में ज्या वक्त लगा इसलिए हिरासत को अवैध माना जाएगा. मसरत को इसके बाद हिसरासत में नहीं रखा जा सकता.

4 मार्च को जम्मू के डीएम ने नई सरकार बनने के बाद एसपी को चिठ्ठी लिखी. इस चिठ्ठी में डीएम ने 15 फरबरी और 4 फरबरी का हवाला देकर मसरत को रिहा करने के लिए कहा इसके बाद 7 मार्च को मसरत आलम को रहा कर दिया गया.

इस पूरे घटना क्रम में उमर सरकार की लेटलतीफी साफ नजर आती है. डीएम ने गृह सचिव को जवाब देने में 12 दिन से ज्यादा  का समय लगाया जिसके चलते मसरत आलम को रिहा करना सरकार की मजबूरी बन गई.