बुधवार, 8 अप्रैल 2015

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने दी किसानो को ऐतिहासिक राहत



नरेन्द्र मोदी सरकार ने दी किसानो को ऐतिहासिक राहत
कोटा 08 अप्रैल। भाजपा कोटा शहर जिला अध्यक्ष हेमन्त विजयवर्गीय, वरिष्ठ भाजपा नेता अरविन्द सिसोदिया, कोटा देहात जिला अध्यक्ष जयवीरसिंह अमृतकुआ एवं पूर्व जिला अध्यक्ष प्रहलाद पंवार आदि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किसानों को राहत देने के लिये उठाये कदमों का स्वागत करते हुये कहा ” यह देश के इतिहास में किसानों के हित के लिये उठाया गया सबसे बड़ा ऐतिहासिक कदम है। “ उन्होने कहा ” किसानों पर प्राकृतिक आपदा और फसलों के खराबे का सिलसिला तो अनादी काल से चल रहा है। मगर कभी भी किसानों के हित के लिये इतना बड़ा काम नहीं हुआ। विगत दस वर्षों में कांग्रेस के मनमोहनसिंह राज में किसान लगातार परेशान रहा , आत्म हत्यायें करता रहा और प्राकृतिक आपदा ग्रस्त रहा मगर उनके कान पर कभी जूं तक नहीं रेंगी थी। अब उन्हे किसानों में भय उत्पन्न करना बंद कर देना चाहिये।“
सीसौदिया ने बताया कि ” अभी तक 50 प्रतिशत से ज्यादा फसल नुकसान होने पर मुआवजा मिला करता था लेकिन अब मोदी सरकार ने तय किया है कि 33 फीसदी फसल का नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही किसानों को मिलने वाले मुआवजे को भी 1.5 गुना बढ़ाने का सरकार ने फैसला किया है। ” उन्होने बताया कि “ इतना ही नहीं मोदीजी ने बैंकों से भी कहा गया है कि वे बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के ऋण का पुनर्गठन करें, बीमा कंपनियों से भी उनके दावों का निपटान सक्रियता से करने के लिए कहा गया है। किसानों के हित के लिये देश के इतिहास में इतने बडे कदम पहली बार उठाये गये हें। सबसे बडी बात इसमें निरंतरता रहेगी।“
भाजपा ने मोदी सरकार के द्वारा उठाये गये किसान राहत कदमों का स्वागत करते हुये कहा यह कदम किसान को राहत भी देंगे और किसान हितों के लिये होने वाले कल्याणकारी कार्यों में मील का पत्थर साबित होंगें।
अरविन्द सिसोदिया
9414180151


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मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, 

फसल नुकसान पर मुआवजे की रकम डेढ़ गुना बढ़ाई


Last Updated: Wednesday, April 8, 2015 -

नई दिल्ली : बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि से संकट में फंसे किसानों की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फसल नुकसान से जुड़े मानदंडों में ढील देने की घोषणा की, जिससे किसानों को अधिक मुआवजा और सरकारी सहायता मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने बैंकों से भी प्रभावित किसानों के ऋण का पुनर्गठन करने और बीमा कंपनियों से उनके बीमा दावों का त्वरित निपटान करने को कहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने छोटा-मोटा कारोबार करने वाले उद्यमियों के लिये 20,000 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी से मुद्रा वित्तीय एजेंसी का उद्घाटन करने के अवसर पर यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले के नियम के अनुसार किसान तभी मदद का पात्र माना जाता रहा है जब उसकी 50 प्रतिशत फसल का नुकसान होता था लेकिन अब यदि किसान की 33 प्रतिशत फसल का भी नुकसान हुआ है तो उसे सरकारी मदद दी जाएगी। इससे ज्यादा किसानों को मदद मिल सकेगी। इसके साथ ही मुआवजे की राशि को भी बढ़ाकर डेढ़ गुणा कर दिया गया है।

मोदी ने कहा कि हमने दूसरा महत्वपूर्ण फैसला मानकों को बढ़ाने का किया है ताकि किसानों की अधिक मदद की जा सके। मुआवजे की राशि बढ़ाकर डेढ़ (1.5) गुना कर दी गई है। यदि इससे पहले उन्हें 100 रुपये का मुआवजा मिल रहा था तो अब उन्हें 150 रुपये मिलेंगे, यदि उन्हें एक लाख रुपये मिल रहे थे तो उन्हें अब डेढ़ लाख रुपये मिलेंगे। इसमें 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इससे पहले ऐसी प्राकृतिक आपदाओं में किसानों की मदद के जो मानदंड रखे गये थे उनसे किसानों का ज्यादा लाभ नहीं मिल पाता था।

उन्होंने कहा कि पिछले साल ऐसा कम बारिश की वजह से हुआ और इस साल बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसान को नुकसान हुआ। मोदी ने कहा कि बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को हुये नुकसान के आकलन के लिये हमने मंत्रियों को विभिन्न राज्यों में भेजा, हमने इसकी समीक्षा की है। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कल कहा था कि बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि के कारण देशभर में 113 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल को नुकसान हुआ है।

बैंकों से कहा गया है कि वे बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के ऋण का पुनर्गठन करें, बीमा कंपनियों से भी उनके दावों का निपटान सक्रियता से करने के लिए कहा गया है। किसानों को मदद करने के लिए हम इस बार बड़ा कदम उठा रहे हैं।

प्रभावित किसानों के लिये मुआवजा बढ़ाने के संबंध में मोदी ने कहा कि इससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा लेकिन उनकी मदद करना जरूरी है क्योंकि वे तकलीफ में हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें देश के किसानों की चिंता करनी है जो पर्याप्त वर्षा न होने या फिर बेमौसम बारिश की समस्या से जूझ रहे हैं। अपना खुद का काम करने वाले छोटे उद्यमियों के लिए बनी माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट रिफाइनेंस एजेंसी (मुद्रा) के बारे में मोदी ने कहा कि इसका लक्ष्य है उन लोगों को कर्ज देना जिन्हें बैंकों तथा दूसरे संस्थानों से कर्ज नहीं मिल पाता है, जो लोग अपनी जरूरत के लिये साहुकार से कर्ज लेने को मजबूर हैं, उन्हें मुद्रा बैंक के जरिये मदद दी जायेगी। ऐसे छोटे उद्यमी स्वरोजगार करने के साथ साथ दूसरों को भी रोजगार देते हैं।

उन्होंने कहा कि बड़े ताम झाम वाले कारोबारी समूह जो मीडिया का बहुत ध्यान आकषिर्त करते हैं, वे सिर्फ 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं जबकि छोटी मोटी दुकान, ब्यूटी पार्लर, मैकेनिक, दर्जी, कुम्हार तथा ऐसा ही छोटा मोटा धंधा करने वाले 5.75 करोड़ उद्यमी 12 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। मोदी ने कहा कि बड़े उद्योगों की वित्तीय सहायता के लिये कई साधन है लेकिन इन छोटे छोटे उद्यमों की मदद करने के लिये कोई साधन नहीं है। इन उद्यमों में कुल मिलाकर 11,00,000 करोड़ रुपये की पूंजी लगी है जबकि इन्हें औसतन 17,000 रुपये का ही कर्ज मौजूदा संस्थानों से उपलब्ध हो पाता है। इनके लिये साधन बढ़ने चाहिये और औसतन एक लाख रपये तक का कर्ज इन्हें मिलना चाहिये ताकि इनका विकास हो और देश प्रगति करे।
भाषा

धर्मान्तरण अनीश्वरीय अपराध है – इन्द्रेश कुमार


धर्मान्तरण अमानवीय, अलोकतांत्रिक और अनीश्वरीय अपराध है – इन्द्रेश कुमार

कुशलगढ़ (विसंकें). राजस्थान के प्रवेश द्वार कुशलगढ़ में देश के ख्यातनाम संतों और राष्ट्रीय चिंतकों के सानिध्य में असंख्य लोगों ने स्वधर्म में बने रहने दुर्व्यसनों का त्याग करने, अपने गांवों को रूद्राक्ष गांव बनाने की वचनबद्धता व्यक्त करते हुए राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद् की प्रेरणा से एक से पांच अप्रैल के मध्य आयोजित रूद्राक्ष महाभिषेक में भाग लिया.

वैदिक ऋचाओं के बीच सवा लाख रूद्राक्ष से निर्मित पांच फीट उंचे शिवलिंग पर अनुष्ठान के दौरान वेदज्ञ विप्रवरों के सानिध्य में महाभिषेक के दौरान 108 दम्पतियों ने रूद्राक्ष शिवलिंग पर अभिषेक किया. जिसमें राजस्थान सहित मध्यप्रदेश और गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेते हुए पूर्णाहुति पर उमड़ी जनगंगा में श्रद्धालुओं ने हाथ खड़े कर पांच संकल्पों में वृक्षों की रक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन, शिक्षा से वंचितों को सरस्वती के मंदिरों तक पहुंचाने, दुर्व्यसनों को त्यजने, धर्म संस्कृति और परमपराओं पर दृढ़ रहते हुए धर्मान्तरण कर गये समाज बन्धुओं को स्वधर्म से जोड़ने और उनके कंठों में रूद्राक्ष का मनका धारण कराये जाने को लेकर वचनबद्धता व्यक्त की और हर हर महादेव के गगन गुंजित रूद्राक्ष महाभिषेक की पूर्णाहुति धर्म सभा के बाद सम्पन्न हुई.

परिषद की प्रेरणा से यह आयोजन बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ स्थित टाउनहाल परिसर में धन्वन्तरी पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर संत सुरेशानन्द सरस्वती महाराज के सानिध्य में हुआ. जिसमें साध्वी हेमानन्द सरस्वती, महर्षि उत्तम स्वामी सहित कई संतों ने समाज का दिग्दर्शन किया.

धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति प्रसंग पर आयोजित विशाल धर्मसभा को मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार जी ने कहा कि धर्मान्तरण अमानवीय, अलोकतांत्रिक और अनीश्वरीय अपराध है, लोकतांत्रिक मानवीय धर्म है कि हर व्यक्ति अपने धर्म पर चले और दूसरे धर्म का सम्मान करे. यही ईश्वरीय परम्परा है. उन्होंने कहा कि स्वर्ग नरक का फैसला पंथ धर्म से नहीं कर्म व आचरण से होता है. इंसान जन्म लेता है तो देश, जाति भाषा, संस्कृति भगवान से मिलती है. जिसे बदलना न्यायोचित नहीं है. उन्होंने दुनिया के गुरूओं से अपील की कि वह अपने अनुयायियों को सभी धर्म का सम्मान करने की सीख देते हुए देश और दुनिया की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करें.

ईसा और रसूल ने भी यही संदेश दिया. किंतु उनके कुछ अनुयायी धर्म के नाम पर दिग्भ्रमित कर दुनिया में अशांति फैलाकर मानवीय संवेदनाओं के प्रतिकूल प्रयास में लगे हैं. उन्होंने धर्मान्तरण के अपराध से निजात के लिये कड़े कानून बनाये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश और दुनिया को इस पाप व अपराध से तब ही मुक्ति मिल पाना संभव है.

धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए संत सुरेशानन्द महाराज ने दुर्व्यसनों, भ्रूण हत्या, बलात्कार, घरेलू हिंसा को कलंक निरूपित करते हुए पाश्चात्य संसकृति के बढ़ते दुष्प्रभाव से समाज को उभारने के लिये वेदिक सनातन शाश्वत, सत्य को धारण कर जीवन को कुंदन बनाने की सलाह दी और कहा कि शिव और शक्ति के साथ धर्म का पथ प्रदर्शक है रूद्राक्ष, जिसे धारण करने से धारणा शक्ति को बल मिलता है, क्योंकि रूद्र की अश्रुधारा से रूद्राक्ष की उत्पति हुई है जो सभी प्रकार के दुष्प्रभाव से मुक्ति दिलाने में सहायक है.

पांच दिवसीय अनुष्ठान के दौरान साध्वी हेमानन्द सरस्वती, महर्षि उत्तमस्वामी, अ.भा. कल्याण आश्रम के अध्यक्ष जगदेवराम उरांव, केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री सुदर्शन भगत, सहित अन्य ने धर्म सभा में आयोजन की प्रस्तावना के साथ ही संगठन की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला.

राष्ट्रीयता से समझौता नहीं : प्रो. राकेश सिन्हा





भोपाल (विसंकें). दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं नीति प्रतिष्ठान के संचालक प्रो राकेश सिन्हा ने कहा कि जब-जब चिंतन और विमर्श की बात हुई तो एक तरफा चिंतन हुआ, जबकि डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार ने जो बीज बोया था, वह अब पेड़ बन गया है, क्योंकि उन्होंने कभी भी संबंधों के नाम पर राष्ट्रीय विचारधारा से समझौता नहीं किया.

वह समन्वय भवन में आयोजित व्याख्यानमाला के दूसरे एवं समापन दिवस पर संबोधित कर रहे थे. श्री उत्तमचंद इसराणी स्मृति न्यास द्वारा डॉ हेडगेवार: एक शाश्वत विचार विषय पर आयोजित व्याख्यान की श्रृंखला में प्रो सिन्हा ने अनेक अनछुए पहलुओं को उजागर किया और डॉ हेडगेवार की राष्ट्रवादी आत्मा को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ऐसा संगठन है, जिसके बारे में लोग सुनीसुनाई बातें कहते हैं, लेकिन संघ को वास्तव में समझना है तो संघ में आना होगा.

उन्होंने वर्धा कैंप का उदाहरण देते हुए बताया कि जब देश में आंदोलन चल था, और गांधीजी अपना हरिजन आंदोलन चला रहे थे, उसी दौरान वर्धा कैंप में वे जमनालाल बजाज के साथ पहुंचे. जब उन्होंने किसी एक से उसकी जाति पूछी तो उसने केवल हिन्दू बताया, इस तरह से कई लोगों से उन्होंने पूछा तो यही उत्तर मिला. इस पर गांधी जी ने पदाधिकारी से पूछकर जाति बताने का आग्रह किया तो डॉ हेडगेवार ने जाति बताने की उन्हें अनुमति दे दी.

वहां पर खड़े एक व्यक्ति ने अपने आप को ब्राह्मण बताया तो दूसरे ने महार जाति बताई. बस यहीं पर गांधीजी सन्न रह गए कि जिस स्वयंसेवक संघ को लोग कुछ और ही समझ रहे थे उसमें ब्राह्मण और महार दोनों एक साथ उठ-बैठ रहे, सो रहे, खा रहे. यहीं से स्वयंसेवक संघ की गंभीरता सामने आई. डॉ हेडगेवार को एक युगदृष्टा निरूपित करते हुए कहा कि उन्होंने एक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की स्थापना की. कार्यक्रम में विशेष अतिथि सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एसके राउत थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष कांतिलाल चतर ने की.

संभावनाओं को मत मारो
प्रो सिन्हा ने डॉ हेडगेवार के भविष्य के प्रति दूरदर्शिता को निरूपित करते  कहा कि भारतवर्ष एक चौहद्दी भर नहीं है, बल्कि यह तो एक सभ्यता है, जिसकी छाया जगह-जगह दिखाई देती है. इसके आंगन में अनेक लोग थे, और रहे हैं जो आपस में लड़ते हैं, मरते हैं, विरोध करते हैं, लेकिन भारतीयता के नाम पर सब एक हैं. इसलिए भविष्य की संभावनाओं को मत मारो और उसे अनवरत बढऩे दो. जिस सभ्यता के शब्दकोष में विराम नहीं है वह भारतीय सभ्यता है, विचारों को अनवरत बढऩे देती है. अन्यथा वह रोम की तरह होगी, जिसका परिणाम हम सभी जानते हैं.

स्वाधीनता में संघ का योगदान
प्रो सिन्हा ने कहा कि लोग सवाल उठाते हैं कि स्वाधीनता आंदोलन में संघ ने क्या योगदान किया, तो उनको बता दें कि जब असहयोग आंदोलन चल रहा था, तो डॉ हेडगेवार मध्य भारत प्रांत के सचिव थे. इसीलिए अंग्रेजों ने उनपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा भी चलाया था. उन्होंने जंगल सत्याग्रह की शुरूआत की और तीन किलोमीटर की यात्रा पूरी करने में पांच घंटे लगे. क्योंकि उस यात्रा में दस हजार से भी अधिक लोग थे. यह संघ का ही काम था कि जिसके प्रमाण भारतीय अभिलेखागार में सुरक्षित हैं, संघ के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रो सिन्हा ने कहा कि संघ में दो चीजें अहम हैं, एक विचार और दूसरी मूल्य. संघ कभी विचारों के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं करता. यही कारण था कि डॉ हेडगेवार ने मूल्य बचाने के लिए अपने अखबार की तिलांजलि दे दी.
साभार:: vskbharat.com

यही जिंदगी हे !



यही जिंदगी हे     !

- वर्षा साहनी ( फेसबुक वाल से )
ज़िंदगी के 20 वर्ष हवा की तरह उड़ जाते हैं. फिर शुरू होती है नौकरी की खोज .  ये नहीं वो , दूर नहीं पास . ऐसा करते 2-3 नौकरीयां छोड़ते पकड़ते , अंत में एक तय होती है. और ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की शुरूआत होती है.

और हाथ में आता है पहली तनख्वाह का चेक , वह बैंक में जमा होता है और शुरू होता है अकाउंट में जमा होने वाले कुछ शून्यों का अंतहीन खेल.

इस तरह 2-3 वर्ष निकल जाते हैँ  .  'वो' स्थिर होता है. बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं. इतने में  आयु पच्चीस वर्ष हो जाते हैं.

विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है. एक खुद की या माता पिता की पसंद की लड़की से यथा समय विवाह होता है और ज़िंदगी की राम कहानी शुरू हो जाती है.

शादी के पहले 2-3 साल नर्म , गुलाबी , रसीले और सपनीले गुज़रते हैं .
 हाथों में हाथ डालकर बातें और रंग बिरंगे सपने . पर ये दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं. और इसी समय शायद बैंक में कुछ शून्य कम होते हैं. क्योंकि थोड़ी मौजमस्ती, घूमनाफिरना , खरीदी होती है.

और फिर धीरे से बच्चे के आने की आहट होती है और वर्ष भर में पालना झूलने लगता है.

सारा ध्यान अब बच्चे पर केंद्रित हो जाता है.  उसका खाना पीना , उठना बैठना , शु शु पाॅटी , उसके खिलौने, कपड़े और उसका लाड़ दुलार.  समय कैसे फटाफट निकल जाता है.

इन सब में कब इसका हाथ उसके हाथ से निकल गया, बातें करना , घूमना फिरना कब बंद हो गया, दोनों को ही पता नहीं चला ?

इसी तरह उसकी सुबह होती गयी   और. बच्चा बड़ा होता गया. .. वो बच्चे में व्यस्त होती गई और ये अपने काम में.  घर की किस्त , गाड़ी की किस्त और बच्चे कि ज़िम्मेदारी . उसकी शिक्षा और भविष्य की सुविधा. और साथ ही बैंक में शून्य  बढ़ाने का टेंशन. उसने पूरी तरह से अपने आप को काम में झोंक दिया.
बच्चे का स्कूल में एॅडमिशन हुआ और वह बड़ा होने लगा . उसका पूरा समय बच्चे के साथ बीतने लगा.

इतने में वो पैंतीस का हो गया.  खूद का घर , गाड़ी और बैंक में कई सारे शून्य. फिर भी कुछ कमी है, पर वो क्या है समझ में नहीं आता.  इस तरह उसकी चिढ़ चिढ़ बढ़ती जाती है और ये भी उदासीन रहने लगा.

दिन पर दिन बीतते गए , बच्चा बड़ा होता गया और उसका खुद का एक संसार तैयार हो गया. उसकी दसवीं आई और चली गयी. तब तक दोनों ही चालीस के हो गए. बैंक में शून्य बढ़ता ही जा रहा है.

एक नितांत एकांत क्षण में उसे गुज़रे दिन याद आते हैं और वो मौका देखकर उससे कहता है '
अरे ज़रा यहां आओ ,
पास बैठो .
चलो फिर एक बार हाथों में हाथ ले कर बातें करें , कहीं घूम के आएं .... उसने अजीब नज़रों से उसको देखा और कहा " तुम्हें कभी भी कुछ भी सूझता है . मुझे ढेर सा काम पड़ा है और तुम्हें बातों की सूझ रही है " . कमर में पल्लू खोंस कर वो निकल गई .

और फिर आता है पैंतालीसवां साल , आंखों पर चश्मा लग गया .बाल अपना काला रंग छोड़ने लगे,  दिमाग में कुछ उलझनें शुरू ही थीं. . . . . बेटा अब काॅलेज में है. बैंक में शून्य बढ़ रहे हैं. उसने अपना नाम कीर्तन मंडली में डाल दिया और . . . .

बेटे का college खत्म हो गया , अपने पैरों पर खड़ा हो गया.  अब उसके पर फूट गये और वो एक दिन परदेस उड़ गया...

अब उसके बालों का काला रंग और कभी कभी दिमाग भी साथ छोड़ने लगा.... उसे भी चश्मा लग गया था. अब वो उसे उम्र दराज़ लगने लगी क्योंकि वो खुद भी बूढ़ा  हो रहा था.

पचपन  के बाद साठ की ओर बढ़ना शुरू था. बैंक में अब कितने शून्य हो गए, उसे कुछ खबर नहीं है. बाहर आने जाने के कार्यक्रम अपने आप बंद होने लगे ।

गोली -दवाइयों का दिन और समय निश्चित होने लगा . डाॅक्टरों की तारीखें भी तय होने लगीं. बच्चे  बड़े होंगे ये सोचकर लिया गया घर भी अब बोझ लगने लगा. बच्चे कब वापस आएंगे , अब बस यही हाथ रह गया था .

और फिर वो एक दिन आता है. वो सोफे पर लेटा  ठंडी हवा का आनंद ले रहा था . वो शाम की दिया-बाती कर रही थी . वो देख रही थी कि वो सोफे पर लेटा है. इतने में फोन की घंटी बजी , उसने लपक के फोन उठाया . उस तरफ बेटा था. बेटा अपनी शादी की जानकारी देता है और बताता है कि  अब वह परदेस में ही रहेगा. उसने बेटे से बैंक के शून्य के बारे में क्या करना यह पूछा. अब चूंकि विदेश के शून्य की तुलना में उसके शून्य बेटे के लिये शून्य हैं इसलिए उसने पिता को सलाह दी " एक काम करिये , इन पैसों का ट्रस्ट बनाकर वृद्धाश्रम को दे दीजिए और खुद भी वहीं रहीये". कुछ औपचारिक बातें करके बेटे ने फोन रख दिया.

वो पुनः सोफे पर आ कर बैठ गया. उसकी भी दिया बाती खत्म होने आई थी. उसने उसे आवाज़ दी " चलो आज फिर हाथों में हाथ ले के बातें करें "
वो तुरंत बोली " बस अभी आई " उसे विश्वास नहीं हुआ , चेहरा खुशी से चमक उठा , आंखें भर आईं , उसकी आंखों से गिरने लगे और गाल भीग गए .
अचानक आंखों की चमक फीकी हो गई और वो निस्तेज हो गया.

उसने शेष पूजा की और उसके पास आ कर बैठ गई,  कहा " बोलो क्या बोल रहे थे " पर उसने कुछ नहीं कहा . उसने उसके शरीर को छू कर देखा . शरीर बिल्कुल ठंडा पड़ गया था और वो एकटक उसे देख रहा था .

क्षण भर को वो शून्य हो गई,  क्या करूं उसे समझ में नहीं आया . लेकिन एक-दो मिनट में ही वो चैतन्य हो गई,  धीरे से उठी और पूजाघर में गई . एक अगरबत्ती जलाई और ईश्वर को प्रणाम किया  और फिर से सोफे पे आकर बैठ गई.

उसका ठंडा हाथ हाथों में लिया और बोली " चलो कहां घूमने जाना है और क्या बातें करनी हैं तम्हे " बोलो !! ऐसा कहते हुए उसकी आँखें भर आईं. वो एकटक उसे देखती रही , आंखों से अश्रुधारा बह निकली .
उसका सिर उसके कंधों पर गिर गया. ठंडी हवा का धीमा झोंका अभी भी चल रहा था ................

यही जिंदगी हे     !