शनिवार, 2 मई 2015

महाराणा प्रताप का संघर्ष कौशल : वियतनाम की अमरीका पर विजय की प्रेरणा बनी


महाराणा प्रताप का संघर्ष कौशल : 

वियतनाम की अमरीका पर विजय  की प्रेरणा बनी 

राजनाथ ने कहा- इतिहास ठीक होना चाहिए, अकबर महान थे तो महाराणा प्रताप क्यों नहीं?
aajtak.in [Edited By: रोहित गुप्ता] | जयपुर, 18 मई 2015 |

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें अकबर को महान कहने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यह बात उनकी समझ से परे है कि महाराणा प्रताप को महान कहने में क्या आपत्ति हो सकती है. राजस्थान के प्रतापगढ़ में महाराणा प्रताप की एक मूर्ति का अनावरण करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इतिहास को ठीक किया जाना चाहिए.
CBSE के कोर्स में कराएंगे महाराणा की गाथा शामिल 
राजनाथ सिंह ने महाराणा प्रताप को महान बताते हुए कहा कि वह मानव संसाधन मंत्री से महाराणा प्रताप की गाथा को सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए आग्रह करेंगे. उन्होंने कहा, मैं यह मानता हूं कि महाराणा प्रताप भी महान थे और महाराणा प्रताप की चर्चा होने पर तुरंत मेवाड की धरती का स्मरण आ जाता है. महारणा प्रताप की जीवनी को विस्तार में पढाने के संबंध में राजस्थान सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सरकार भी महाराणा प्रताप की गाथा को केवल भारत में नहीं पूरे विश्व में पहुंचाने का प्रयास करेगी.

इतिहास में महाराणा का नहीं हुआ सही मूल्यांकन 
गृह मंत्री के मुताबिक, महाराणा प्रताप की 475वीं जयंती पूरे हिंदुस्तान में मनाई जाएगी और दुनिया के अन्य देशों मे रहने वाले भारतीय भी महाराणा प्रताप की जयंती मनाएंगे. राजनाथ सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया. लेकिन भारत के इतिहास में जिस प्रकार से महाराणा प्रताप का मूल्यांकन होना चाहिए था उतना सही मूल्यांकन नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप देश में नही विदेश में भी प्रेरणा के स्रोत रहें है.

वियतनाम का दिया उदाहरण 

वियतनाम द्वारा अमेरिका की सेना के खिलाफ संघर्ष और सफलता का जिक्र करते हुए राजनाथ ने कहा कि वियतनाम को प्रेरणा महाराणा प्रताप के जीवन से मिली थी और यह बात खुद वियतनाम के राष्ट्रपति ने बतायी थी. उन्होंने कहा कि वियतनाम के तत्कालीन विदेश मंत्री भी अपनी भारत यात्रा के दौरान उदयपुर में आकर महाराणा प्रताप को श्रृांजलि दी थी. देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले महाराणा प्रताप, पन्ना धाय, छत्रपति शिवाजी सहित विभिन्न महापुरूषों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि सभी महापुरूषों के पराक्रम, शौर्य, और वीरता को सदैव याद रखा जाएगा.
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Vijay Singh की facebook से 

वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने..... अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया।

लगभग बीस वर्षों तक
चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष से एक पत्रकार ने एक सवाल पूछा.....

जाहिर सी बात है कि सवाल यही होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया ??

पर उस प्रश्न का दिए गए उत्तर को सुनकर आप हैरान रह जायेंगे और आपका सीना भी गर्व से भर जायेगा।
दिया गया उत्तर पढ़िये।

सभी देशों में सबसे शक्ति शाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान व् श्रेष्ठ भारतीय राजा का चरित्र पढ़ा।
और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनीति का प्रयोग कर हमने सरलता से विजय प्राप्त की।

आगे पत्रकार ने पूछा...
"कौन थे वो महान राजा ?"

मित्रों जब मैंने पढ़ा तब से जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया आपका भी सीना गर्व से भर जायेगा।

वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष ने
खड़े होकर जवाब दिया...
"वो थे भारत के राजस्थान में मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप सिंह !!"

महाराणा प्रताप का नाम
लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी। आगे उन्होंने कहा...

🚩"अगर ऐसे राजा ने हमारे देश में जन्म लिया होता तो हमने सारे विश्व पर राज किया होता।"

कुछ वर्षों के बाद उस राष्ट्राध्यक्ष की मृत्यु हुई तो जानिए उसने अपनी समाधि पर क्या लिखवाया...

"यह महाराणा प्रताप के एक शिष्य की समाधि है !!"

कालांतर में वियतनाम के
विदेशमंत्री भारत के दौरे पर आए थे। पूर्व नियोजित कार्य क्रमानुसार उन्हें पहले लाल किला व बाद में गांधीजी की समाधि दिखलाई गई।

ये सब दिखलाते हुए उन्होंने पूछा " मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप की समाधि कहाँ है ?"

तब भारत सरकार के अधिकारी चकित रह गए, और उनहोंने वहाँ उदयपुर
का उल्लेख किया। वियतनाम के विदेशमंत्री उदयपुर गये, वहाँ उनहोंने महाराणा प्रताप की समाधि के दर्शन किये।

समाधी के दर्शन करने के बाद उन्होंने समाधि के पास की मिट्टी उठाई और उसे अपने बैग में भर लिया इस पर पत्रकार ने मिट्टी रखने का कारण पूछा !!

उन विदेशमंत्री महोदय ने कहा "ये मिट्टी शूरवीरों की है।
इस मिट्टी में एक महान् राजा ने जन्म लिया ये मिट्टी मैं अपने देश की मिट्टी में
मिला दूंगा ..."

"ताकि मेरे देश में भी ऐसे ही वीर पैदा हो। मेरा यह राजा केवल भारत का गर्व न होकर सम्पूर्ण विश्व का गर्व होना चाहिए।"

अपेक्षा व्यक्त करता हूँ की यह पोस्ट आप बड़े अभिमान के साथ ज्यादा से ज्यादा मित्रों शेयर करेंगे।

🚩जय हाे "भारत रत्न" महाराणा प्रताप की
नाम - कुँवर
प्रताप जी {श्री महाराणा प्रतापसिंह जी}
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - राजस्थान कुम्भलगढ़
पुन्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य सीमा - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शा. अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह जी
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह जी
अन्य जानकारी - श्री महाराणा प्रताप सिंह
जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम 'चेतक' था।
"राजपूत शिरोमणि श्री महाराणा प्रतापसिंह जी" उदयपुर,
मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।
वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि परमेवाड़-मुकुट मणि
राणा प्रताप जी का जन्म हुआ। श्री प्रताप जी का नाम
इतिहास मेंवीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है।
श्री महाराणा प्रतापजी की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर
के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती
है।
श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के बारे में कुछ रोचक जानकारी
:-
1... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी एकही झटके में घोड़े समेत
दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।
2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थेतब उन्होने
अपनी माँ सेपूछा कि हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर
आए| तब माँ का जवाब मिला ” उस महान देश की वीर भूमि
हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकरआना जहाँ का राजा अपनी
प्रजा केप्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के
बदले अपनी मातृभूमि को चुना ”
बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था | “बुक ऑफ़
प्रेसिडेंट यु एस ए ‘किताब में आप ये बात पढ़ सकते है |
3.... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के भाले का वजन 80
किलो था और कवच का वजन 80 किलो कवच , भाला, ढाल,
और हाथ में तलवार का वजन मिलाये तो 207 किलो था।
4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान
उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |
5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है
तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहत अकबर
की ही रहेगी पर श्री महाराणा प्रताप जी ने किसी की भी
आधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |
6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और
अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |
7.... श्री महाराणा प्रताप जी के घोड़े चेतक का मंदिर भी
बना हुवा हैं जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |
8.... श्री महाराणा प्रताप जी ने जब महलो का त्याग किया
तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगो ने भी घर छोड़ा
और दिन रात राणा जी कि फौज के लिए तलवारे बनायीं इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गड़लिया
लोहार कहा जाता है मै नमन करता हूँ एसे लोगो को |
9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में
तलवारें पायी गयी। आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985
में हल्दी घाटी में मिला |
10..... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी अस्त्र शस्त्र की
शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी जो 8000 राजपूत
वीरो को लेकर 60000 से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे
जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |
11.... श्री महाराणा प्रताप सिंह जी के देहांत पर अकबर भी
रो पड़ा था |
12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था वो श्री
महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा जी
बिना भेद भाव के उन के साथ रहते थे आज भी मेवाड़ के
राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत है तो दूसरी तरफ भील |
13..... राणा जी का घोडा चेतक महाराणा जी को 26 फीट
का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी
एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहा वो
घायल हुआ वहीं आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहाँ पर चेतक
की म्रत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |
14..... राणा जी का घोडा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमीत करने के लिए हाथी
की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे
|
15..... मरने से पहले श्री महाराणाप्रताप जी ने अपना खोया
हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और
महलो को छोड़ वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे |
16.... श्री महाराणा प्रताप जी का वजन 110 किलो और
लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का
भाला रखते थे हाथ मे।
शेयर करो मित्रों
महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी।:---
मित्रो आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोंड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था।
जिसका नाम था रामप्रसाद।
उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हु।
रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी ने जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने
अपने एक ग्रन्थ में कीया है।
वो लिखता है की जब महाराणा
प्रताप पर अकबर ने चढाई की
थी तब उसने दो चीजो को
ही बंदी बनाने की मांग की
थी एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।
आगे अल बदायुनी लिखता है
की वो हाथी इतना समजदार
व ताकतवर था की उसने
हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही
अकबर के 13 हाथियों को मार
गिराया था
और वो लिखता है की:
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यू बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया तब
कही जाके उसे बंदी बना पाये।
अब सुनिए एक भारतीय
जानवर
की स्वामी भक्ति।
उस हाथी को अकबर के समक्ष
पेश
किया गया जहा अकबर ने
उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।
पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का नही
तो दाना खाया और ना ही
पानी पीया और वो शहीद
हो गया।
तब अकबर ने कहा था कि;-
जिसके हाथी को मै मेरे सामने
नहीं झुका पाया उस महाराणा
प्रताप को क्या झुका पाउँगा।
ऐसे ऐसे देशभक्त चेतक व रामप्रसाद जैसे तो यहाँ
जानवर थे।
इसलिए मित्रो हमेशा अपने
भारतीय होने पे गर्व करो।
पढ़ के सीना चौड़ा हुआ हो
तो शेयर कर देना।

भारतीय जनता पार्टी : विश्व की सबसे बड़ी पार्टी




दिनांक 30.4.2015 को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में श्री अमित शाह,
राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी द्वारा वितरित निवेदन

दस करोड़ से भी अधिक लोगों को पार्टी का सदस्य बना कर भारतीय जनता पार्टी, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है। राजनीतिक दलों के अंदर नये सदस्यों की भर्ती-प्रक्रिया के विषय में भाजपा ने आधुनिक सूचना तंत्र का कल्पनापूर्ण उपयोग करते हुये नया कीर्तीमान स्थापित किया है। पार्टी ने मोबाईल फोन के माध्यम से टोल फ्री नम्बर का उपयोग करते हुये लगातार 6 महिने यह अभियान चलाया, जिसके चलते पार्टी अब सुदूर अरूणाचल प्रदेश के इस्ट कामेंग जिले से कच्छ तक और कारगिल से कन्या कुमारी तक हर तहसिल में उपस्थित है। आधुनिक तकनिक के उपयोग के कारण भारतीय जनता पार्टी का यह अभियान शत प्रतिशत लोकतांत्रिक, पारदर्शी और सर्वसमावेशी हुआ, जिससे पार्टी का सामाजिक जनाधार बढ़ा और भौगोलिक विस्तार भी मजबूत हुआ है।

विश्व के लोकतांत्रिक देशों में जो सैंकड़ों राजनीतिक दल है उनमें इस तरीके से सूचना - तंत्र का सर्व प्रथम प्रयोग करते हुए सदस्यता अभियान संपन्न करने वाली भाजपा एकमात्र पार्टी है।

सदस्यों के पंजिकरण की इस प्रक्रिया में किसी भी मोबाईल धारक को सदस्यता पाने के लिए 1800 266 2020 (टोल फ्री नम्बर) घुमाना पड़ता था। नम्बर घुमने के बाद, उसके मोबाइल पर युनिक मेम्बरशिप नम्बर मेसेज के जरिए आ जाता था। यह नम्बर आने के बाद, दूसरे एक टेलिफोन नम्बर पर उसे अपना पूरा नाम, पता, पिनकोड और हो सके तो वोटर आईडी संख्या लिखकर मेसेज के माध्यम से भेजना होता था। यह एक एस.एम.एस भेजने से उसके पार्टी ज्वाॅइन करने की प्रक्रिया पूर्ण होती थी। सदस्यता अभियान की अवधि समाप्त होने के पश्चात अब कार्यकर्ताओं के द्वारा बनाया रिकार्ड तथा काॅल सेंटर्स के माध्यम से नव-पंजिकृत सदस्यों की सूची बनी है। इन सूचियों में जिनके नाम दर्ज हैं, उनके सत्यापन के साथ . साथ अब एक राष्ट्रव्यापी संपर्क अभियान भी हाथ लिया जा रहा है। इस अभियान में पार्टी कार्यकर्ता सभी नूतन सदस्यों को घर जाकर मिलेंगे और उन तक पार्टी का संदेश पहुंचाएंगे। पार्टी की परिचयात्मक जानकारी दी जाएगी साथ ही सरकार के एक साल के काम का ब्योरा भी दिया जाएगा। नव-संपर्कित सदस्य की जानकारी एक प्रपत्र के द्वारा संकलित की जाएगी। 31 जुलाई तक संपर्क अभियान समाप्त करने के पश्चात पार्टी एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान हाथ लेगी। इससे नव संपर्कित सदस्य के पार्टी कार्यकर्ता बनाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूर्ण होगा।

विगत 1 नवम्बर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पुनः सदस्य बनाकर उन्ही की उपस्थिती में इस अभियान का शुभारंभ हुआ और तब से दिन प्रतिदिन सदस्यता बढ़ती गयी। इस बुनियादी संगठनात्मक कार्यक्रम को पूरी पार्टी ने गंभीरता से संचालित किया। पार्टी के उपाध्यक्ष डाॅ. दिनेश शर्मा के संयोजकत्व में बनी एक समिति इस अभियान की पूर्व तैयारी, संचालन और समीक्षा में लगातार लगी रही जिसमें उपाध्यक्ष डाॅ. विनय सहस्रबुद्धे, राष्ट्रीय सचिव श्री अरूण सिंह और श्रीमती सुधा यादव तथा कर्नाटक के सी.टी. रवि सदस्य थे। सदस्यता की प्रक्रिया पूर्णतः अपारंपारिक होने के कारण, प्रदेश व जिला मंडल के स्तर पर कार्यशालाओं के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षित किया गया। उसके पश्चात अभियान को गति देने तथा संचालन की समीक्षा करने हेतु पार्टी नेताओं ने देश के कोने-कोने में जाकर संभाग और जिला स्तरीय प्रवास किये। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते मैंने स्वयं 53 दिनों में देश के लगभग सभी प्रदेशों की व्यापक यात्राएं की।

साथ ही श्री डाॅ. दिनेश शर्मा ने गुजरात, बिहार, बंगाल, असम तथा पूर्वात्तर भारत के राज्यों में, डाॅ. विनय सहस्रबुद्धे ने महाराष्ट्र, केरल, बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मिर तथा मध्य प्रदेश में; राष्ट्रीय सचिव श्री अरूण सिंह ने उडिसा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में; श्रीमती सुधा यादव ने हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, उत्तराखण्ड तथा दिल्ली में और श्री सी.टी. रवि ने कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, तमलिनाडू तथा तेलंगाना में प्रवास किये।

इस पूरे अभियान में पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी, सभी सांसद, मंत्रि परिषद के सभी सदस्य, प्रदेश और जिला स्तर पर सभी पदाधिकारी तथा जनप्रतिनिधि, राज्यों के मुख्यमंत्री एवं मंत्री इत्यादी समेत लाखों कार्यकर्ताओं ने अहर्निश परिश्रम किये। कई राज्यों में सार्वजनिक स्थलों पर स्टाॅल्स लगाते हुये जनता से अपील की गयी और हजारों को सदस्य के नाते पंजिकृत किया गया। कारखानों और महाविद्यालयों के सामने गेट मिटिंग्ज, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, झुग्गी बस्तियांए मंडिया तथा उपासना स्थलों पर आह्वान, सभाएं और पंजिकरण स्टाल्स लगाए गये। रेल तथा बस यात्रियों, खेत मजदूरों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्य महिलाएं, बैंकों के कर्मचारी, रेहड़ी और पटरी पर विक्रेय करने वाले विक्रता, बूट पाॅलिश करने वाले युवा से लेकर टैक्सी और रिक्शा चालक, सब्जी विक्रेता, हाॅस्पिटल्स की नर्से, काॅल सेंटर्स में काम करने वाले युवा-युवती इत्यादी सभी की इस अभियान में उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।

अधिकांश प्रदेशों में सदस्यता अभियान को अंजाम देने के लिए सामुहिक सदस्यता, व्यक्तिगत सदस्यता, कैम्प सदस्यता इत्यादी विभिन्न पद्धती के प्रयास किये गए। सामुहिक सदस्यता के अंतर्गत कार्यकर्ता एक समूह बनाकर बस्तियों में जाकर जनता का आह्वान करते थे। इसी तरह कई कार्यकर्ता अपने निकट मित्रों, पड़ोसी और परिवारजनों को सदस्य बनाते हुये व्यक्तिगत सदस्यता को आगे बढ़ाते रहे। सार्वजनिक स्थानों पर जहां लोग बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं, वहां स्टाॅल या बूथ लगाकर दिनभर अभियान चलाना यह कैम्प सदस्यता के रूप में जाना गया। साथ ही कई प्रदेशों में जिला, मंडल या बूथ स्तर पर निश्चित समय देकर  इस अभियान को अंजाम देने वाले प्रवासी-कार्यकर्ताओं का भी विशेष योगदान रहा।

इस अपरांपारिक अभियान में औरों को सदस्य बनाने वालें किसी भी वर्तमान कार्यकर्ता को सक्रिय सदस्य बनने के लिए न्यूनतम 100 नये प्राथमिक सदस्य बनाना जरूरी था। इन नव पंजिकृत सदस्यों के नाम, उनका सदस्यता क्रमांक तथा संपूर्ण पता की जानकारी के प्रपत्र जमा करने से ही कोई सक्रिय सदस्यता के लिए जरूरी अर्हता प्राप्त कर सकता है। इस प्रावधान के कारण इस सदस्यता अभियान से सांगठनिक आधार और भी मजबूत करने में मदद हुई है। पार्टी की रणनीति के अनुसार केरल, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिसा, बंगाल तथा असम इन सात राज्यों में सदस्यता विस्तार पर विशेष बल दिया गया। इन सभी राज्यों में तीन से छः माह की अवधि के लिए विस्तारक के रूप में कुल मिलाकर 6782 कार्यकर्ताओं ने पूर्ण समय काम किया। इन सभी सातों राज्यों में सामुदायिक सदस्यता पंजिकरण के लिए दर्जनों सम्मेलन किये गए, नेताओं ने तहसिल स्तर तक जाकर प्रवास किए और सोशल मीडिया के साथ प्रचार साधनों को भिन्न-भिन्न कल्पनापूर्ण तरिकों से उपयोग किया गया। इन सभी राज्यों में इन प्रयासों के कारण सदस्यता की संख्या में 3 से 10 गुना वृद्धि हुयी है जो अपने आप में नया कीर्तिमान है।

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