मंगलवार, 26 मई 2015

मोदी ने देश का गौरव बहाल किया : अमित शाह


देश में विजिबल सरकार, मोदी ने PMO का गौरव बहाल किया : शाह
Last Updated: Tuesday, May 26, 2015

दिल्ली : नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को सक्रिय और काम करती दिखने वाली करार देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आज जोर देकर कहा कि सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में देश को नीतिगत पंगुता से बाहर निकालने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, विश्वास की कमी को दूर करने और प्रधानमंत्री कार्यालय के सम्मान को बहाल करने का काम किया गया है।

राजग सरकार के एक वर्ष के कामकाज के दौरान उठाये गए कदमों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने संघीय ढांचे को मजबूत करने और विदेश में भारत की स्थिति को बेहतर बनाने का काम किया है, साथ ही वह कालाधन वापस लाने और देश को तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर करने को प्रतिबद्ध है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘ पूर्ववर्ती सरकार के विपरीत यह सरकार दिख रही है जबकि पिछली सरकार कहीं नहीं दिखती थी। हमने प्रधानमंत्री कार्यालय के सम्मान को भी बहाल किया है। सरकार नीतिगत पंगुता से बाहर आई है। विश्वास की कमी दूर हो गई है और दुनिया अब भारत की प्रगति को स्वीकार कर रही है।’ उन्होंने कहा, ‘ हम भ्रष्टाचार को समाप्त करने को प्रतिबद्ध थे और हमने भ्रष्टाचार मुक्त शासन प्रदान किया है। हमारे विरोधी भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप लगा नहीं पाए। मैं समझता हूं कि यह इस सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है।’

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कोयला और टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में ‘शून्य नुकसान’ की परिकल्पना पेश करने वाले नेताओं को जनता के समक्ष इसकी फिर से व्याख्या करने की चुनौती दी। भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार ने झूठ को सच बनाकर पेश करने में महारथ हासिल की थी। शाह ने यह भी कहा कि देश में जब भी कांग्रेस सरकार रही , देश की वृद्धि दर नीचे गिरी है लेकिन जब भाजपा सत्ता में आती है तब यह उपर उठती है।

उन्होंने सवाल किया, ‘ आजादी के बाद से 60 साल के शासनकाल में कांग्रेस ने कालाधन पर लगाम लगाने के लिए क्या किया। ’ उन्होंने जोर दिया कि भाजपा कालाधन को वापस लाने के लिए कानूनी कदम उठाने को प्रतिबद्ध है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘ किसी को नहीं बख्शा जायेगा और इसलिए विदेशों में जमा बिना हिसाब के कालेधन के लिए इस सरकार ने नया कानून बनाया है। मैं आपको आश्वस्त कर सकता हू्ं कि अब से कोई धन इस देश से बाहर नहीं जायेगा।’ शाह ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो विदेशों में बिना हिसाब वाला धन जमा करने वालों के नाम जानना चाहते हैं और ऐसे लोगों को कालाधन सृजित करने वालों का वकील बताया क्योंकि नाम उजागर करने से अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन होगा।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के तहत संघीय ढांचा मजबूत हुआ है और प्रधानमंत्री देश को ‘टीम इंडिया’ के माध्यम से प्रगति की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘ पूर्वी भारत के अनेक राज्यों में भाजपा के सत्ता में नहीं होने के बावजूद हम अपने वादे के अनुरूप क्षेत्र के विकास के लिए काम कर रहे हैं। इससे देश के संघीय ढांचा और मजबूत बनेगा।’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘मोदी ने टीम इंडिया का नया विचार पेश किया है जहां केंद्र और राज्य एक ही टीम का हिस्सा हों।’’ आर्थिक मोर्चे पर सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि सत्ता में एक वर्ष रहने के बाद वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत हो गयी है।

उन्होंने कहा, ‘ जब कांग्रेस सत्ता में आती है, वृद्धि दर नीचे आती है लेकिन जब भाजपा सत्ता में आती है तब यह बढ़ता है।’ इस संबंध में उन्होंने वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार, संप्रग और वर्तमान सरकार के समय के आंकड़ों का जिक्र भी किया। शाह ने दावा किया कि राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है, कारोबार बढ़ा है, विदेशी मुदा्र भंडार 10 वषरे में सर्वोच्च है और कीमतों को नियंत्रण में लाया गया है।

पिछले एक वर्ष में गरीबी के संबंध में सरकार की ओर से उठाये गए कदमों का जिक्र करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जनधन योजना के तहत 15 करोड़ लोगों , विशेष तौर पर गरीबों , के खाते खुले और उन्हें देश की वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा गया।

अमित शाह ने प्रत्यक्ष नकद अंतरण के जरिये भ्रष्टाचार में कमी आने का जिक्र किया, साथ ही कहा कि मुद्रा बैंक से छोटे कारोबारियों को रिण सुविधा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने सरकार की मेक इन इंडिया पहल के जरिये रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने और अधिक बिजली पैदा करने के साथ 2019 तक देश के सभी गांवों को बिजली प्रदान करने का भी जिक्र किया।

भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने डब्ल्यूटीओ में किसानों के हितों को बेचने का काम किया लेकिन राजग ने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले। उन्होंने कहा कि हमने सुरक्षा एजेंसियों को एकजुट करने का काम किया और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया। प्रधानमंत्री ने अपने संवाद के जरिये भारत की स्वीकार्यता बढ़ाई है।

बहुमत हासिल होने के मद्देनजर अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे मुद्दों के बारे में पार्टी की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि इनके लिए 370 सांसदों और दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, ‘ हमारे पास इन मुद्दों के लिए (लागू करने) जरूरी बहुमत अभी भी नहीं है।’ मोदी सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा एक जून तक 4413 रैलियां आयोजित करेगी।

उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ता जून, जुलाई और अगस्त में आठ करोड़ घरों तक पहुंचने का पूरा प्रयास करेंगे। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया है। भाजपा अध्यक्ष ने इस अवसर पर सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करने वाली पुस्तिका को भी जारी किया जिसे 12 भाषाओं में लाया गया है।

भाषा
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मंगलवार, 26 मई 2015
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी द्वारा पत्रकार वार्ता में दिए गए वक्तव्य के मुख्य बिंदू

केंद्र की मोदी नेतृत्व वाली सरकार एक विजिबल सरकारः अमित शाह
आज हमारे विरोधी भी इस केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकतेः अमित शाह
मोदी जी ने प्राकृतिक आपदा से किसानों को हुए नुकसान की मुआवजा राशि में डेढ़ गुना वृद्धि कर एवं फसलों के नुकसान का मापदंड 50 प्रतिशत से घटाकर 33 प्रतिशत करके किसानों को राहत दी है: अमित शाह
कृषि पर निर्भरता कम करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए हमने मुद्रा बैंक की योजना शुरू की: अमित शाह
संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने मजबूत कदम उठाये हैंः अमित शाह
हमारी प्राथमिकता गरीबों को विकास की अग्रिम पंक्ति में लाना हैः अमित शाह
केंद्र सरकार के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा हैः अमित शाह
आज केंद्र में एक निर्णायक सरकार हैः अमित शाह
आज 26 मई, 2015 को भारतीय जनता पार्टी की श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जो सरकार बनी उसका ठीक एक साल आज समाप्त होने जा रहा है। देश के लोकतंत्र के इतिहास के लिए और भाजपा के लिए भी गत साल कई मायनों में नए रिकार्ड स्थापित करने वाला रहा। तीस साल के बाद इस महान देश में किसी पार्टी को बहुमत देने का फैसला 2014 के चुनाव में इस देश की जनता ने किया। एक निर्णायक जनादेश किसी एक पार्टी को 30 वर्षों बाद मिला। इस देश की जनता ने आजादी के बाद पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने का मौका दिया। ये दोनों चीजें देश के लोकतंत्र के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है।
भाजपा के लिए यह गौरव की बात है कि देश की जनता ने जो पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को सरकार बनाने का मौका दिया वो भाजपा को दिया। और देश के सभी हिस्सों से करीब-करीब भाजपा और एनडीए का प्रतिनिधित्व आज संसद में, इस सरकार में आज साझीदार है। अरूणाचल में भाजपा का सांसद है तो कच्छ में भी भाजपा का सांसद है। लेह लद्दाख में भाजपा का सांसद है तो कन्याकुमारी में भी भाजपा का सांसद है। पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण चारों ओर भाजपा को इस देश की प्रजा ने सम्मानित किया है और हमें सरकार बनाने का मौका दिया है और आज यह सरकार एक वर्ष समाप्त कर रही है।
इस देश में सरकार के प्रति अविश्वास का जो संकट पैदा हुआ था उसको इस सरकार ने समाप्त किया है। पहले देश की सरकार पर इस देश की जनता को भरोसा नहीं था कि यह सरकार देश को कहां पर ले जाएगी। देश के प्रधानमंत्री को देश की कैबिनेट पर भरोसा नहीं था और ब्यूरोक्रेसी को प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं था। आज वो विश्वास का संकट टल गया है। दुनिया भी बड़े भरोसे से आनंद और आश्चर्य से भारत की प्रगति को देख रही है। हर क्षेत्र में इस सरकार ने नई-नई पहल की है और परिणाम भी पाए हैं।
यह सरकार विजि़बल सरकार रही है। पहले सरकार को ढूंढना पड़ता था। अब शायद मीडिया से भी आगे आकर सरकार प्रोएक्टिव होकर जनता की दिक्कत के समय में जनता के साथ दिखाई पड़ रही है। जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आती है तो कुछ ही घंटों में वहां मंत्री और प्रधानमंत्री दिखाई पड़ते हैं। पड़ोसी देश नेपाल में अगर भूकंप आता है तो तुरंत ही सरकार प्रोएक्टिव होकर नेपाल में दिखाई देती है। तमिलनाडु में यदि भारतीय मछुआरों पर संकट आता है, फांसी दी जाती है तो भारत सरकार हस्तक्षेप करती है। किसी क्रिश्चन पादरी को अफगानिस्तान में अगवा किया जाता है तो भारत सरकार दखल करके उसको छुड़ाकर लाती है।
इस सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा को पुनः स्थापित किया है। एक जमाना था जब हर मंत्री दस साल तक अपने मंत्रालय का प्रधानमंत्री होता था। और प्रधानमंत्री को कोई प्रधानमंत्री ही नहीं मानता था। भाजपा इस स्थिति में परिवर्तन लाई है। आज हरेक मंत्री स्वतंत्रतापूर्वक अपने मंत्रालय का काम कर रहे हैं, फैसले ले रहे हैं। उन पर कोई मंत्री समूह नहीं थौपे गए हैं। मंत्रियों को काम करने की स्वतंत्रता दी गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय का गौरव पुनः स्थापित हुआ है। यह सरकार पाॅलिसि पैरालिसिसि से बाहर आई है। जैसे ही समस्या सामने आती है इसके निवारण के लिए यह सरकार तुरंत प्रोएक्टिव होकर अगर जरूरी है तो नीतियों में परिवर्तन करने के लिए तत्पर रहती है और इसके अच्छे परिणाम हमें मिले हैं।
10 वर्षों तक देश की जनता किसी एक चीज से अगर सबसे ज्यादा त्रस्त थी तो वह भ्रष्टाचार था। 10 वर्षों तक हर महीने कोई न कोई घपला या घोटाला, लाखों करोड़ों रूपयों के भ्रष्टाचार जनता के सामने आते था, जो जनता के आत्मविश्वास को हिलाकर रख देता थे। और दुनिया में भी हिन्दुस्तान की साख इन घोटालों के कारण दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही थी। लोकसभा चुनाव के वक्त हमने वचन दिया था कि हम भ्रष्टाचार को इस व्यवस्था से उखाड़कर फेंक देंगे। मुझे बताते हुए बहुत आनंद हो रहा है कि एक वर्ष में हमारे विरोधी भी इस सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सकते।ये भाजपा की मोदी सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि है।
यूपीए के कुछ मंत्रियों द्वारा जीरो लाॅस की थ्योरी बार-बार प्रतिस्थापित की जाती रही कि कोयला में कोई नुकसान नहीं हुआ, स्पेक्ट्रम में कोई नुकसान नहीं हुआ। आज भाजपा की मोदी सरकार ने 220 खदानें जो कांग्रेस ने आबंटित की थी जिसको सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया उसमें से 29 खादानों की पारदर्शी नीलामी करके दो लाख करोड़ से ज्यादा भारत के खजाने में इज़ाफा किया है। इससे स्पष्ट होता है कि कैग ने नुकसान को कुछ कम ही आंका था। एक-तिहाई क्षमता वाले स्पैक्ट्रम की नीलामी भाजपा की मोदी सरकार ने की और एक लाख नौ हजार करोड़ रूपया देश की तिजोरी में जमा हुआ। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कैग ने नुकसान को कुछ कम ही आंका था। आज एक वर्ष के बाद मैं भारतीय जनता पार्टी की ओर से मांग करता हूं कि कांगे्रस के नेता फिर से एक बार जरा जीरो लाॅस वाली थ्योरी को देश के सामने रखने का साहस करें।
काले धन पर बार-बार भाजपा पर कांग्रेस के नेता निशाना लगाते हैं कि कालेधन में ये नहीं हुआ वो नहीं हुआ। मैं पूछना चाहता हूं कि 68 वर्ष की आजादी में 60 वर्षों तक कांग्रेस का राज रहा, कांग्रेस ने कालेधन की रोकथाम के क्या काम किया? सुप्रीम कोर्ट का आदेश के बावजूद डेढ़ साल तक कांग्रेस की सरकार ने एसआईटी बनाने का काम नहीं किया था। भाजपा की मोदी सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट का पहला ही फैसला कालेधन की जांच के लिए एसआईटी बनाने का हुआ। यह मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है कि हम कालेधन की रोकथाम के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। तीन साल से दुनियाभर के देशों से जो सूचनाएं आकर पड़ी थी उन सूचनाओं पर कोई कार्यवाही नहीं होती थी। हमारी सरकार बनने के बाद 45 दिनों में करीब-करीब 700 सूचनाओं को हमने एसआईटी को जांच के लिए दे दिया और आज एसआईटी उस पर जांच कर रही है। भाजपा की सरकार कटिबद्धता से कालेधन पर जो वैश्विक समाधान हुए इस पर कानूनी रूप से कार्यवाही करने के लिए कटिबद्ध है। और इसीलिए देश की संसद में वित्तीय अनियमित्ताओं के लिए पहली बार सजा का प्रावधान वाला कानून लेकर मोदी सरकार आई है। आजादी के बाद पहली बार एक कानून ऐसा बना है जिसमें वित्तीय अनियमित्ताओं के लिए सजा का प्रावधान किया गया है। यह कानून बनने के बाद यह बात गारंटी से कही जा सकती है कि इस देश में से फूटी कोड़ी भी कालेधन के रूप में बाहर जाने का रास्ता भाजपा की सरकार ने बंद कर दिया है।
संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने जितना किया उतना शायद आजादी के बाद किसी सरकार ने नहीं किया। योजना आयोग भंग कर नीति आयोग में राज्यों के सीएम को शामिल किया गया जिससे योजनाएं राज्यों की आवश्यकता के अनुरूप बने। इससे विकास और कल्याणकारी जो भी योजनाएं बनेंगी उसे वास्तविक रूवरूप देने से जनता को फायदा होगा। खदानों की पारदर्शी निलामी से आने वाली पूरी रकम राज्यों के विकास के लिए देने का निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम है। संघीय ढांचे के अनुरूप राज्यों को साथ लेकर चलने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्रीय करों के लाभांश में 10 फीसदी वृद्धि करते हुए राज्यों का हिस्सा 32 फीसदी से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया। कोयला खदान की नीलामी से जितनी भी राशि आएगी वह बिना किसी पक्षपात के शत-प्रतिशत राज्यों को जाएगी। यह संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार टीम इंडिया की भावना को मोदी सरकार ने देश के समक्ष रखा है।
जब अटल जी को विरासत में 4.4 प्रतिशत विकास दर वाली अर्थव्यवस्था मिली थी तो 6 साल बाद विकास दर को 8.4 प्रतिशत तक पहुंचा कर यूपीए के हाथ में सत्ता सौंपा था। 10 साल बाद 4.4 प्रतिशत विकास दर वाली अर्थव्यवस्था मोदी जी को मिला। 1 साल में हमने जीडीपी को 5.7 फीसदी तक पहुंचाने में सफलता पाई। यह आंकड़े साबित करती है कि कांग्रेस की सरकार जब आती है तो विकास दर गिरता है और भाजपा की सरकार जब आती है तो विकास दर बढ़ता है। बजट घाटा नियंत्रण, व्यापार घाटा नियंत्रण, एफडीआई में वृद्धि-सभी पैमानों पर भाजपा की सरकार अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
लोकसभा चुनाव के समय हमने कहा था कि हमारी प्राथमिकता गरीबों को विकास की अग्रिम पंक्ति में लाना है। हमने जनधन योजना के तहत 15 करोड़ गरीब परिवारों का अकाउंट खुलवाकर उन्हें अर्थतंत्र से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस बजट के अंदर मोदी सरकार दो नई योजनाएं लेकर आई है, पहला साल के 12 रूप्ये प्रीमियम पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा और दूसरा 330 रूप्ए पर 2 लाख का जीवन बीमा योजना।
यदि बेरोजगारी का समाधान कर लेते हैं तो गरीबी अपने आप दूर हो जाएगी। बेरोजगारी दूर करने के लिए मोदी सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल डेवलपमेंट’ जैसी पहल बेरोजगारी दूर करने में बेहद कारगर साबित होंगी। ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को विश्व के अन्य देशों से अच्छा रिस्पापंस मिला है। कृषि पर निर्भरता कम करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए हमने मुद्रा बैंक की योजना शुरू की। मुद्रा बैंक के जरिए 10 हजार से 10 लाख रूपये का लोन उपलब्ध कराने की योजना है।
बुनियादी ढांचे के अंतर्गत यूपीए के समय सड़क 5.3 प्रतिशत की रफ्तार से बन रही थी, अब 10.1 प्रतिशत बन रही है। यूपीए के समय बिजली उत्पादन 6 फीसदी थी अब बढ़कर 8.5 फीसदी हो गई है यानी 2.5 फीसदी की वृद्धि। दीनदयाल ग्रामीण ज्योती योजना के तहत 44,000 करोड़ दिए गए ताकि राज्यों को 24 घंटे बिजली मिले।
‘पहल योजना’ के तहत ़ लोगों को उनकी एलपीजी सब्सिडी की रकम सीधे उनके खाते में पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है और प्रधानमंत्री के आग्रह पर 2.5 लाख लोगों ने सब्सिडी वाले एलपीजी कनेक्शन छोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत 14 प्रतिशत असिंचित भूमि को सिंचन के दायरे में लाया जाएगा। पहले कुदरती आपदा आती थी तो किसानों को सही मुआवजा नहीं मिलता था। हमने पहले के 50 फीसदी नुकसान के साथ-साथ 33 फीसदी नुकसान पर भी मुआवजा देना तय किया है।  मुआवजे का दायरा एक हेक्टेयर से बढ़ाकर दो हेक्टेयर कर दिया गया है। मिट्टी हेल्थ कार्ड के तहत कौन सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है, खेत में कितना पानी कितने अंतराल पर डालनी है, कौन सा फसल अधिकतम फायदा देगा इसकी सलाह दी जाती है। राजस्थान में इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत हुई है। यूपीए के समय डब्ल्यूटीओ में एक समझौता हुआ था कि किसानों को एमएसपी नहीं दे पाएंगे। लेकिन हमने दृढ़तापूर्वक अपनी बात रखते हुए कहा कि किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। डब्ल्यूटीओ में हमारी जीत हुई। राजनीतिक इच्छाशक्ति का यह बेहतरीन उदाहरण है।
सुरक्षा, सम्मान, समृद्धि, संवाद और संस्कृति के आधार पर विदेश नीति तय करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देशों की यात्राएं कीं। केंद्र की मोदी सरकार ने एक ठोस रक्षा नीति बनाई है। हमने तीनों सेनाओं के साधनों के लिए 10 साल का एक रोडमैप तैयार कर उन्हें आश्वस्त किया है कि आप निश्ंिचत होकर सीमा की सुरक्षा करें।
   
(इंजी. अरूण कुमार जैन)

कार्यालय सचिव

नरेंद्र मोदी: 'शून्‍य' से 'शिखर' तक का सफर...




नरेंद्र मोदी: 'शून्‍य' से 'शिखर' तक का सफर...
साल 1950 में वाडनगर, मेहसाना, गुजरात में बेहद साधारण परिवार में जन्‍मे नरेंद्र मोदी भारी मतों से भारत के प्रधानमंत्री बने. एक चाय बेचने वाले कभी देश का पीएम भी बनेगा ये किसी ने सोचा नहीं था. मोदी ने राजनीति शास्त्र में एमए किया. बचपन से ही उनका संघ की तरफ खासा झुकाव था और गुजरात में आरएसएस का मजबूत आधार भी था. वे 1967 में 17 साल की उम्र में अहमदाबाद पहुंचे और उसी साल उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली. इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए. इस तरह सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे.

980 के दशक में जब मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए तो माना गया कि पार्टी को संघ के प्रभाव का सीधा फायदा होगा. वे वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए. नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए.

मोदी को 1995 में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया. इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया. इस पद पर वो अक्‍टूबर 2001 तक रहे. लेकिन 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई. उस समय गुजरात में भूकंप आया था और भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे.

मोदी के सत्ता संभालने के लगभग पांच महीने बाद ही गोधरा रेल हादसा हुआ जिसमें कई हिंदू कारसेवक मारे गए. इसके ठीक बाद फरवरी 2002 में ही गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ़ दंगे भड़क उठे. इन दंगों में सरकार के मुताबिक एक हजार से ज्यादा और ब्रिटिश उच्चायोग की एक स्वतंत्र समिति के अनुसार लगभग 2000 लोग मारे गए. इनमें ज्यादातर मुसलमान थे. जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात का दौर किया तो उन्होंनें उन्हें 'राजधर्म निभाने' की सलाह दी जिसे वाजपेयी की नाराजगी के संकेत के रूप में देखा गया.

मोदी पर आरोप लगे कि वे दंगों को रोक नहीं पाए और उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं किया. जब भारतीय जनता पार्टी में उन्हें पद से हटाने की बात उठी तो उन्हें तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और उनके खेमे की ओर से समर्थन मिला और वे पद पर बने रहे. गुजरात में हुए दंगों की बात कई देशों में उठी और मोदी को अमरीका जाने का वीजा नहीं मिला. ब्रिटेन ने भी दस साल तक उनसे अपने रिश्ते तोड़े रखे.

मोदी पर आरोप लगते रहे लेकिन राज्य की राजनीति पर उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई. मोदी के खिलाफ दंगों से संबंधित कोई आरोप किसी कोर्ट में सिद्ध नहीं हुए हैं. हालांकि, खुद मोदी ने भी कभी दंगों को लेकर न तो कोई अफसोस जताया है और न ही किसी तरह की माफी मांगी है. महत्वपूर्ण है कि दंगों के चंद महीनों के बाद ही जब दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में मोदी ने जीत दर्ज की थी तो उन्हें सबसे ज्यादा फायदा उन इलाकों में हुआ जो दंगों से सबसे ज्यादा प्रभावित थे.

इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने गुजरात के विकास को मुद्दा बनाया और फिर जीतकर लौटे. फिर 2012 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा गुजरात विधानसभा चुनावों में विजयी रहे और अब केंद्र में अपने नेतृत्‍व में सरकार चला रहे हैं.

क्या आप जानते हैं, गुजरात में अपना जादू बिखेरने वाले नरेंद्र मोदी कभी साधु बनना चाहते थे? इतना ही नहीं एक वक्त था जब उन्होंने चाय की दुकान भी लगाई. मोदी के जीवन में इसी तरह के कई उतार-चढ़ाव आए. तो जानिए उनके जीवन से जुड़े दिलचस्प प्रसंग...

नरेंद्र मोदी बचपन में आम बच्चों से बिल्कुल अलग थे. काम भी अलग तरह का कर जाते थे. एक बार वो घर के पास के शर्मिष्ठा तालाब से एक घड़ियाल का बच्चा पकड़कर घर लेकर आ गए. उनकी मां ने कहा बेटा इसे वापस छोड़ आओ, नरेंद्र इस पर राजी नहीं हुए. फिर मां ने समझाया कि अगर कोई तुम्हें मुझसे चुरा ले तो तुम पर और मेरे पर क्या बीतेगी, जरा सोचो. बात नरेंद्र को समझ में आ गई और वो उस घड़ियाल के बच्चे को तालाब में छोड़ आए.

नरेंद्र मोदी को हम कई तरह के गेट अप में देखते हैं. दरअसल स्टाइल के मामले में मोदी बचपन से ही थोड़े अलग थे. कभी बाल बढ़ा लेते थे तो कभी सरदार के गेट अप में आ जाते थे. रंगमंच उन्हें खूब लुभाता था. नरेंद्र मोदी स्कूल के दिनों में नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपने रोल पर काफी मेहनत भी करते थे.

नरेंद्र मोदी वड़नगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे. पढ़ाई में नरेंद्र एक औसत छात्र थे, लेकिन पढ़ाई के अलावा बाकी गतिविधियों में वो बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे. एक तरफ जहां वो नाटकों में हिस्सा लेते थे, वहीं उन्होंने एनसीसी भी ज्वाइन किया था. बोलने की कला में तो उनका कोई जवाब नहीं था, हर वाद विवाद प्रतियोगिता में मोदी हमेशा अव्वल आते थे

बचपन में नरेंद्र मोदी को साधु संतों को देखना बहुत अच्छा लगता था. मोदी खुद संन्यासी बनना चाहते थे. संन्यासी बनने के लिए नरेंद्र मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे और इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे और आखिर में हिमालय पहुंच गए और कई महीनों तक साधुओं के साथ घूमते रहे.

नरेंद्र मोदी बहुत मेहनती कार्यकर्ता थे. आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में वो अपने मैनेजमेंट का कमाल भी दिखाते थे.
आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था. इतना ही नहीं गुजरात के हेडगेवार भवन में आने वाली हर चिट्ठी को खोलने का काम भी नरेंद्र मोदी को ही करना होता था.

नरेंद्र मोदी का मैनेजमेंट और उनके काम करने के तरीके को देखने के बाद आरएसएस में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय कार्यालय नागपुर में एक महीने के विशेष ट्रेनिंग कैंप में बुलाया गया.

90 के दशक में नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई थी.
रेंद्र मोदी की स्टाइल सारे प्रचारकों से जुदा थी. वो दाढ़ी रखते थे और ट्रिम भी करवाते

90 के दशक में नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्हें उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा का संयोजक बनाया गया. ये यात्रा दक्षिण में तमिलनाडु से शुरू होकर श्रीनगर में तिरंगा लहराकर खत्म होनी थी.

2001 में जब गुजरात में भूकंप के आने से 20,000 लोग मारे गए तब राज्य में राजनीतिक सत्ता में भी बदलाव हुआ. दबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को अपना पद छोड़ना पड़ा. पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौंपी गई और इसके बाद मोदी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

वर्ष 2002 में गुजरात ही नहीं पूरे देश के इतिहास में वो काला अध्याय जुड़ गया जिसके बारे में किसी ने सोचा नहीं था. गोधरा में एक ट्रेन में सवार 50 हिंदुओं के जलने के बाद पूरे गुजरात में जो दंगे भड़के उसका कलंक मोदी आज तक नहीं धो पाए हैं.

दंगों में धूमिल हुई छवि के बावजूद वर्ष 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में भी मोदी की जीत हुई.

गोधरा में एक ट्रेन में सवार 50 हिंदुओं के जलने के बाद पूरे गुजरात में जो दंगे भड़के उसका कलंक मोदी आज तक नहीं धो पाए हैं.

मुस्लिम विरोधी दंगों में करीब 1000 से 2000 लोग मारे गए. मोदी पर इल्जाम लगा कि उन्होंने दंगों को भड़काने का काम किया.
आरोप ये भी लगा कि वह चाहते तो दंगे रोक सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
2012 में उन्हीं की मंत्री माया कोडनानी समेत 30 अन्य को 28 साल जेल की सजा सुनाई गई.
वर्ष 2005 में मोदी को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया.
हालांकि नरेंद्र मोदी इससे बिलकुल भी विचलित नहीं हुए.
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक ताकत में लगातार इजाफा होता रहा.
बीजेपी के अग्रणी नेताओं में नरेंद्र मोदी की गिनती लंबे समय से होती रही है.
मोदी ने सत्ता संभालने के साथ ही खुद को राजनीतिक संगठन मजबूत करने और राज्‍य के विकास के कामों में लगा दिया.
उद्योग की बात हो या कृषि की, मोदी ने लोगों के सामने एक बेहतर विकल्‍प देने की कोशिश की. नतीजा यह रहा कि कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्‍थाओं ने उनके काम की तारीफ की.
नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे. 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी. मोदी आरएसएस की शाखाओं में जाने लगे. लेकिन जब मोदी ने चाय की दुकान खोली तो शाखाओं में उनका आना जाना कम हो गया.
2007 में विधानसभा चुनाव में फिर मोदी की जीत हुई और वह दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने.
नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं. सिगरेट, शराब को कभी हाथ नहीं लगाया. वो आम तौर पर अपने आधी बाजू के कुर्ते में नजर आते हैं, लेकिन जब मौज में आते हैं तो सूट बूट में निकलते हैं किसी हीरो की तरह.

नरेंद्र मोदी तकनीक का इस्‍तेमाल भी बखूबी करते हैं. अगर आज फेसबुक और ट्विटर पर देखें तो सबसे ज्‍यादा उनके फॉलोअर्स मिल जाएंगे. इंटरनेट पर पॉपुलर नेताओं की सूची में वो अव्‍वल हैं.

वर्ष 2008 में मोदी ने टाटा को नैनो कार संयंत्र खोलने के लिए आमंत्रित किया. अब तक गुजरात बिजली, सड़क के मामले में काफी विकसित हो चुका था.
वर्ष 2008 में मोदी ने टाटा को नैनो कार संयंत्र खोलने के लिए आमंत्रित किया. अब तक गुजरात बिजली, सड़क के मामले में काफी विकसित हो चुका था. देश के धनी और विकसित राज्यों में उसकी गिनती होने लगी थी. मोदी ने अधिक से अधिक निवेश को राज्य में आमंत्रित किया.
नरेंद्र मोदी को पतंगबाजी का भी शौक है. सियासत के मैदान की ही तरह वो पतंगबाजी के खेल में भी अच्छे-अच्छे पतंगबाजों की कन्नियां काट डालते हैं.
नरेंद्र मोदी की सियासी शालीनता का भी कोई जवाब नहीं...
नरेंद्र मोदी परंपरागत परिधानों से हटकर मॉडर्न ड्रेस भी आजमा चुके हैं.
वर्ष 2012 तक मोदी का बीजेपी में कद इतना बड़ा हो गया कि उन्हें पार्टी के पीएम उम्मीदवार के रूप में देखा जाने लगा.
जब नरेंद्र मोदी ने एक खास तरह की टोपी पहनने से इनकार कर दिया, तो यह चर्चा का विषय बन गया.

31 अगस्त, 2012 को मोदी ने ऑनलाइन तरीके से वैब कैम के जरिए जनता के सवालों के जवाब दिए. ये सवाल देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पूछे गए
22 अक्टूबर, 2012 को ब्रिटिश उच्चायुक्त ने मोदी से मिलकर गुजरात की तारीफ की और वहां निवेश किए जाने की बात की. इसके साथ दंगों के बाद बाधित हुए ब्रिटेन और गुजरात के संबंध फिर से बहाल हो गए.
22 अक्टूबर, 2012 को ब्रिटिश उच्चायुक्त ने मोदी से मिलकर गुजरात की तारीफ की और वहां निवेश किए जाने की बात की. इसके साथ दंगों के बाद बाधित हुए ब्रिटेन और गुजरात के संबंध फिर से बहाल हो गए.
20 दिसंबर, 2012 को मोदी ने फिर बहुमत हासिल किया और राज्य में तीसरी बार अपनी सत्ता का डंका बजाया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपके लिए लिखी खास चिट्ठी, पढ़ी क्या ?




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपके लिए लिखी खास चिट्ठी, पढ़ी क्या ?
टीम डिजिटल मंगलवार, 26 मई 2015
अमर उजाला, नई दिल्ली

केंद्र की सत्‍ता में एक वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने अपनी सरकार की उप‌ल‌ब्धियां गिनाई हैं। लोकसभा चुनावों में स्पष्ट बहुमत पाने के बाद नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष आज ही के दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

भाजपा समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने पिछले वर्ष नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। 30 सालों बाद किसी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत पाया और राजग को 300 से अधिक सीटे मिलीं।

पिछले एक साल में कई वादों को पूरा न कर पाने और काला धन वापस लाने जैसे वादों को जुमला बता देने के कारण मोदी सरकार की आलोचना भी होती रही। हालांकि मोदी सरकार ने उन अलोचनाओं को दरकिनार अपनी उप‌ल‌ब्धियां गिनाने का 'मेगा प्लान' बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देशवासियों के नाम लिखा पत्र उसी मेगा प्लान का हिस्सा है।

मोदी ने गिनाई एक साल की उप‌ल‌ब्धियां

मेरे प्यारे देशवासियों,
पिछले वर्ष आज के दिन जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से मुझे प्रधानमंत्री का दायित्व मिला। मैं स्वंय को 'प्रधान सेवक' मानकर अपनी जिम्मेदारी इसी भावना से निभा रहा हूं। अंत्योदय हमारे राजनैतिक दर्शन का मूल मंत्र है। प्रमुख फैसले लेते समय हमेशा वंचित, गरीब, मजदूर और किसा न हमारी आंखों के सामने रहते हैं। जन-धन योजना में हर परिवार का बैंक खाता और प्रधानमंत्री जीवन-ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेन्शन योजना इसी का प्रमाण हैं।

'अन्न दाता सुखी भवः' हमारी सर्वोच्‍च प्राथमिकता है। हमारे किसान अथक मेहनत कर देश को खाद्य सुरक्षा प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, बिजली की बेहतर उपलब्धता, नई 'यूरिया नीति', कृषि विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों के साथ हम मजबूती से खड़े रहे। सहायता राशि को डेढ़ गुना किया।

भ्रष्टाचारमुक्त, पारदर्शी, नीति-आधारित प्रशासन एवं शीघ्र निर्णय हमारे मूलभूत सिद्धांत हैं। पहले प्राकृतिक सम्पदा जैसे कोयला या स्पैक्‍ट्रम का आबंटन मनमानी से, चहेते उद्यो गपतियों को होता था। किन्तु देश के संसाधन देश की सम्पत्ति हैं। सरकार का मुखिया होने के नाते मैं उसका ट्रस्टी हूं। इसीलिए हमने निर्णय लिया कि इनका आबंटन नीलामी से होगा। कोयले के अब तक हुए आबंटन से लगभग तीन लाख करोड़ रुपए और स्पैक्ट्रम से लगभग एक लाख करोड़ रुपये की आमदनी होगी!

सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद सरकार आवश्यक होती है। जब हमारी सरकार बनी उस समय आर्थिक स्थिति डावांडोल थी। महंगाई तेजी से बढ़ रही थी। मुझे खुशी है कि हमारे प्रयासों से विगत वर्ष में भारत विश्व की तीव्रतम विकास वाली अर्थव्यवस्था बनी, महंगाई नियंत्रित हुई और पूरे वातावरण में नए उत्साह का संचार हुआ।

विश्वस्तर पर भारत की प्रतिष्‍ठा बढ़ी है। पूंजी निवेश बढ़ा है। 'मेक इन इंडिया' और 'स्किल इंडिया' अभियान का उद्देश्य हमारे युवाओं को रोजगार प्रदान कराना है। हमने मुद्रा बैंक की स्थापना की जिससे छोटे-छोटे रोजगार चलाने वाले भाई-बहनों को दस हजार रुपए से दस लाख रुपए तक के बैंक-ऋण सुलभ होंगे। हमने कालाधन वापस लाने का वादा किया था। सरकार बनते ही पहला निर्णय कालेधन पर एसआईटी गठन करने का था। फिर हमने विदेशों में कालाधन रखने वालों को कड़ी सजा देने के लिए कानून बनाया।

'स्वच्छ भारत अभियान' की सोच है कि बहू-बेटी को खुले में शौच न जाना पड़े पड़े, शौचालय के अभाव में बेटियां स्कूल न छोड़े और गंदगी से मासूम बच्चे बार-बार बीमार न पड़ें। बालकों की तुलना में बालिकाओं की गिरती संख्या बहुत चिंता का विषय है, इसलिए हमने ''बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ'' अभियान चलाया।

बताया गंगा सफाई के लिए क्या किया
सदियों से हमारी आस्था का केन्द्र जीवनदायिनी मां गंगा प्रदूषण-मुक्त हो इसलिए हमने 'नमामि गंगे' कार्यक्रम शुरू किया। हमारा इरादा है कि गांव की तस्वीर बदले और मूलभूत सुविधाएं जैसे प्रत्येक परिवार के लिए पक्का घर, चौबीस घंटे बिजली, पीने का शुद्ध पानी, शौचालय, सड़क और इंटरनेट की व्यवस्था हो जिससे लोगों का जीवनस्तर बेहतर हो। इन सबकी सफलता के लिए आपकी भागीदारी आवश्यक है।

हमने जोड़ने का काम किया है- देश की सीमाओं, बंदरगाहों और पूरे भारत को एक कोने से दूसरे कोने तक जोड़ने के लिए सड़कें और रेलवे को नया जीवन देने का प्रयास। लोगों को जोड़ ने के लिए 'डिजिटल इंडिया' कनेक्टिविटी। सभी मुख्यमंत्रियों के साथ 'टीम इंडिया' की अवधारणा भी दूरियां मिटाने की कोशिश है।

प्रथम वर्ष में विकास यात्रा की मजबूत नींव से देश ने खोया विश्वास पाया है। मुझे भरोसा है कि हमारे प्रयासों ने आपकी जिंदगी को छुआ होगा। यह मात्र शुरूआत है। देश आगे बढ़ने के लिए तैयार है। आइये… हम सब संकल्प लें कि हमारा हर कदम देशहित में आगे बढ़ें।

आपकी सेवा में समर्पित, जय हिन्द!
नरेन्द्र मोदी