शनिवार, 6 जून 2015

भाजपा का महासंपर्क अभियान 2015 शुरू

भाजपा का संपर्क अभियान शुरू

महासंपर्क अभियान
Š लगभग 10.5 करोड सदस्यों के
साथ भाजपा दुनिया की सबसे
अध्ािक सदस्यों वाली राजनीतिक
पार्टी
Š संपर्क अभियान 3 महीने चलेगा
Š सभी कार्यकर्ताओं तक पहुंचने
की कोशिश
Š जिला स्तर से राष्टन्न्ीय स्तर तक
का एक व्यापक डाटाबेस तैयार
होगा
Š जन संपर्क अभियान के बाद
भाजपा एक बड़ा प्रशिक्षण
कार्यÿम चलाएगी
Š यह कार्यÿम भी तीन माह चलेगा
और उसमें 15 लाख कायकर्ता
हिस्सा लेंग



ध्ाानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह ने 1 मई को भारतीय जनता पार्टी का संपर्क अभियान प्रारम्भ किया। प्रध्ाानमंत्री श्री मोदी भाजपा के पहले सदस्य हैं, जिनसे भाजपा ने संपर्क किया है। अभियान के अंतर्गत पार्टी के सभी 10 करोड़ से अध्ािक सदस्यों से संपर्क किया जाएगा। इस दौरान सभी सदस्यों को पार्टी की विचारध्ाारा और सरकार की उपलब्ध्ाियों से सम्बंध्ाित साहित्य व राष्टन्न्ीय अध्यक्ष का पत्र दिया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी के संविध्ाान के अनुसार हर छह साल बाद भाजपा सदस्यों को नए सिरे से सदस्यता देकर उसकी पुष्टि की जाती है और साथ ही नए सदस्य बनाए जाते हैं। पिछले साल एक नवंबर को शुरू हुए इस सदस्यता अभियान में श्री मोदी ने अपनी सदस्यता की सबसे पहले पुष्टि कराई थी। पिछले दिनों श्री शाह ने सदस्यता अभियान के समापन पर कहा था कि लगभग 10.5 करोड सदस्यों के साथ भाजपा दुनिया की सबसे अध्ािक सदस्यों वाली राजनीतिक पार्टी बन गई है।

सदस्यता अभियान के समापन के बाद पार्टी ने अब तीन महीने चलने वाला जन संपर्क अभियान शुरू किया है जिसका समापन 31 जुलाई को होगा। इस दौरान सभी कार्यकर्ताओं तक पहुंचने की कोशिश होगी। नेता और पदाध्ािकारी सभी से संपर्क करेंगे। इसके अलावा जिला स्तर से राष्टन्न्ीय स्तर तक का एक व्यापक डाटाबेस तैयार किया जाएगा और सदस्यों की रूचि-अनुसार उन्हें विभिन्न सामाजिक विषयों व क्षेत्रों में पार्टी के विस्तार के लिए कार्य भी सौंपे जाएंगे।

जन संपर्क अभियान के बाद भाजपा  एक बडा प्रशिक्षण कार्यÿम चलाएगी। यह कार्यÿम भी तीन माह चलेगा और उसमें 15 लाख कायकर्ता हिस्सा लेंगे। श्री शाह ने बताया कि जो भी सदस्य अपने द्वारा बनाए गए 100 नए सदस्यों की सूची देंगे और उनसे संपर्क करेंगे,उन्हें जनसंपर्क अभियान के बाद सÿिय सदस्य बना दिया जाएगा। भाजपा अध्यक्ष ने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर घर जाकर नए सदस्यों से मिलें और उन्हें पार्टी की विचारध्ाारा के बारे में बताएं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहल

पार्टी की राष्टन्न्ीय महामंत्री सुश्री सरोज पांडेय ने कहा था कि देश में इस समय भाजपा के सदस्यों की संख्या 10 करोड़ 32 लाख
हो गई है। इस तरह देश का हर 12 वां व्य७ि भाजपा का सदस्य हो गया है। उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह ने पार्टी के रिकार्ड सदस्यता अभियान के समापन के बाद प्रध्ाानमंत्री श्री नरेनर््ी मोदी से मुलाकात करके उनकी सदस्यता की पुष्टि
की और उन्हें पार्टी के नए जन संपर्क अभियान के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर राष्टन्न्ीय अध्यक्ष श्री अमित शाह
ने पार्टी के 10 करोड़ से अध्ािक सदस्य बनने पर प्रसन्नता व्य७ की। यही नहीं, निकट भविष्य में, पार्टी, सरकार की एक वर्ष
की उपलब्ध्ाियां, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस, और अंतर्राष्टन्न्ीय योग दिवस के सम्बन्ध्ा में विशाल जनसम्पर्क
प्रारम्भ करेगी।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष श्री अमित शाह जी, राष्टन्न्ीय महामंत्री ;संगठनद्ध श्री राम लाल, संपर्क अभियान टोली के राष्टन्न्ीय महामंत्री श्री भूर्पेंी यादव, राष्टन्न्ीय महामंत्री सुश्री सरोज पाण्डेय, राष्टन्न्ीय सह-संगठन मंत्री श्री संतोष जी, और मध्य प्रदेश के  मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रध्ाानमंत्री श्री नरेनर््ी मोदी जी को संपर्क अभियान का साहित्य भेंट किया।

‘भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी’

सांगठनिक गतिविधियां: सदस्यता अभियान
‘भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी’
गत 30 अप्रैल को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा के राष्टन्न्ीय अध्यक्ष श्री
अमित शाह ने वक्तव्य जारी कर पार्टी द्वारा संपन्न सदस्यता अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
उल्लेखनीय है कि भाजपा दस करोड़ से भी अध्ािक सदस्य वाली विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।

दस करोड़ से भी अध्ािक लोगों को पार्टी का सदस्य बनाकर भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है। राजनीतिक दलों के अंदर नये सदस्यों की भर्ती-प्रÿिया के विषय में भाजपा ने आध्ाुनिक सूचना तंत्र का कल्पनापूर्ण उपयोग करते हुये नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पार्टी ने मोबाइल फोन के माध्यम से टोल ›ी नम्बर का उपयोग करते हुये लगातार 6 महीने यह अभियान चलाया, जिसके चलते पार्टी अब सुदूर अरूणाचल प्रदेश के इस्ट कामेंग जिले से कच्छ तक और कारगिल से कन्या कुमारी तक हर तहसील में उपस्थित है। आध्ाुनिक तकनीक के उपयोग के कारण भारतीय जनता पार्टी का यह अभियान शत-प्रतिशत लोकतांत्रिक, पारदर्शी और सर्वसमावेशी हुआ, जिससे पार्टी का सामाजिक जनाध्ाार बढ़ा और भौगोलिक विस्तार भी मजबूत हुआ है।
विश्व के लोकतांत्रिक देशों में जो सैंकड़ों राजनीतिक दल है। उनमें इस तरीके से सूचना-तंत्र का सर्वप्रथम प्रयोग करते हुए सदस्यता अभियान संपन्न करने वाली भाजपा एकमात्र पार्टी है।

सदस्यों के पंजीकरण की इस प्रÿिया में किसी भी मोबाइल ध्ाारक को सदस्यता पाने के लिए 1800 266 2020 ;टोल ›ी नम्बरद्ध घुमाना पड़ता था। नम्बर घुमने के बाद, उसके मोबाइल पर यूनिक मेम्बरशिप नम्बर मेसेज के जरिए आ जाता था। यह नम्बर आने के बाद, दूसरे एक टेलिफोन नम्बर पर उसे अपना पूरा नाम, पता, पिनकोड और हो सके तो वोटर आईडी संख्या लिखकर मेसेज के माध्यम से भेजना होता था।

यह एक एस.एम.एस भेजने से उसके पार्टी ज्वॉइन करने की प्रÿिया पूर्ण होती थी। सदस्यता अभियान की अवध्ाि समाप्त होने के पश्चात् अब कार्यकर्ताओं के द्वारा बनाया रिकार्ड तथा कॉल सेंटर्स के माध्यम से नव-पंजीकृत सदस्यों की सूची बनी है। इन सूचियों में जिनके नाम दर्ज हैं, उनके सत्यापन के साथ-साथ अब एक राष्टन्न्व्यापी संपर्क अभियान भी हाथ लिया जा रहा है। इस अभियान में
पार्टी कार्यकर्ता सभी नूतन सदस्यों को घर जाकर मिलेंगे और उन तक पार्टी का संदेश पहुंचाएंगे। पार्टी की परिचयात्मक जानकारी दी जाएगी साथ ही सरकार के एक साल के काम का ब्योरा भी दिया जाएगा। नव-संपर्कित सदस्य की जानकारी एक प्रपत्र के द्वारा कलित
की जाएगी। 31 जुलाई तक संपर्क अभियान समाप्त करने के पश्चात पार्टी एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान हाथ लेगी। इससे नव सपर्कित सदस्य के पार्टी कार्यकर्ता बनाने की प्रÿिया का महत्वपूर्ण चरण पूर्ण होगा।

विगत 1 नवम्बर को प्रध्ाानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पुनः सदस्य बनाकर उन्ही की उपस्थिति में इस अभियान का शुभारंभ हुआ और तब से दिन प्रतिदिन सदस्यता बढ़ती गयी। इस बुनियादी संगठनात्मक कार्यÿम को पूरी पार्टी ने गंभीरता से संचालित किया। पार्टी के
उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा के संयोजकत्व में बनी एक समिति इस अभियान की पूर्व तैयारी, संचालन और समीक्षा में लगातार लगी रही जिसमें उपाध्यक्ष डॉविनय सहस्रबुह्े, राष्टन्न्ीय सचिव श्री अरुण सिंह और श्रीमती सुध्ाा यादव तथा कर्नाटक के सी.टी. रवि सदस्य थे।
सदस्यता की प्रÿिया पूर्णतः अपारंपारिक होने के कारण, प्रदेश व जिला मंडल के स्तर पर कार्यशालाओं के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षित किया गया। उसके पश्चात अभियान को गति देने तथा संचालन की समीक्षा करने हेतु पार्टी नेताओं ने देश के कोने-कोने में जाकर संभाग और जिला स्तरीय प्रवास किये। राष्टन्न्ीय अध्यक्ष के नाते मैंने स्वयं 53 दिनों में देश के लगभग सभी प्रदेशों की व्यापक यात्राएं की।

साथ ही श्री डॉ. दिनेश शर्मा न गुजरात, बिहार, बंगाल, असम तथा पूर्वात्तर भारत के राज्यों में, डॉ. विनय सहस्रबुह्े ने
महाराष्टन्न्, केरल, बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर तथा मध्य प्रदेश में, राष्टन्न्ीय सचिव श्री अरूण सिंह ने ओडिशा, आंध्ा्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में, श्रीमती सुध्ाा यादव ने हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, उत्तराखण्ड तथा दिल्ली में और श्री सी.टी. रवि ने कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु तथा तेलंगाना में प्रवास
किये। इस पूरे अभियान में पार्टी के सभी राष्टन्न्ीय पदाध्ािकारी, सभी सांसद, मंत्री परिषद के सभी सदस्य, प्रदेश और जिला स्तर पर सभी पदाध्ािकारी तथा जनप्रतिनिध्ाि, राज्यों के मुख्यमंत्री एवं मंत्री इत्यादि समेत लाखों कार्यकर्ताओं ने अहर्निश परिश्रम किये। कई राज्यों में सार्वजनिक स्थलों पर स्टॉल्स लगाते हुये जनता से अपील की गयी और हजारों को सदस्य के नाते पंजिकृत किया गया। कारखानों और महाविद्यालयों के सामने गेट मिटिंग्ज, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, झुग्गी बस्तियों मंडियों तथा उपासना स्थलों पर आह्वान, सभाएं और पंजीकरण स्टाल्स लगाए गये। रेल तथा बस यात्रियों, खेत मजदूरों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्य महिलाएं, बैंकों के कर्मचारी, रेहड़ी और पटरी पर विÿेय करने वाले विÿता, बूट पॉलिश करने वाले युवा से लेकर टैक्सी और रिक्शा चालक, सब्जी विÿेता, हॉस्पिटल की नर्से, कॉल सेंटर्स में काम करने वाले युवा-युवती इत्यादी सभी की इस अभियान में उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। अध्ािकांश प्रदेशों में सदस्यता अभियान को अंजाम देने के लिए सामूहिक सदस्यता, व्यक्तिगत सदस्यता, कैम्प सदस्यता इत्यादी विभिन्न पह्ति के प्रयास किये गए। सामूहिक सदस्यता के अंतर्गत कार्यकर्ता एक समूह बनाकर बस्तियों
में जाकर जनता का आह्वान करते थे। इसी तरह कई कार्यकर्ता अपने निकट मित्रों, पड़ोसी और परिवारजनों को सदस्य बनाते हुये व्यक्तिगत सदस्यता को आगे बढ़ाते रहे। सार्वजनिक स्थानों पर जहां लोग बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं, वहां स्टॉल या बूथ लगाकर दिनभर अभियान चलाना यह कैम्प सदस्यता के रूप में जाना गया। साथ ही कई प्रदेशों में जिला, मंडल या बूथ स्तर पर निश्चित समय देकर इस अभियान को अंजाम देने वाले प्रवासी-कार्यकर्ताओं का भी विशेष योगदान रहा। इस अपरांपारिक अभियान में औरों को सदस्य बनाने वाले किसी भी वर्तमान कार्यकर्ता को सÿिय सदस्य बनने के लिए न्यूनतम 100 नये प्राथमिक सदस्य बनाना जरूरी था।
इन नव पंजीकृत सदस्यों के नाम, उनका सदस्यता ÿमांक तथा संपूर्ण पता की जानकारी के प्रपत्र जमा करने से ही कोई सÿिय सदस्यता के लिए जरूरी अर्हता प्राप्त कर सकता है। इस प्रावध्ाान के कारण इस सदस्यता अभियान से सांगठनिक आध्ाार और भी मजबूत करने में मदद हुई है। पार्टी की रणनीति के अनुसार केरल, तमिलनाडु, आंध्ा्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिसा, बंगाल तथा असम इन सात राज्यों में सदस्यता विस्तार पर विशेष बल दिया गया।

इन सभी राज्यों में तीन से छः माह की अवध्ाि के लिए विस्तारक के रूप में कुल मिलाकर 6782 कार्यकर्ताओं ने पूर्ण समय काम किया। इन सभी सातों राज्यों में सामुदायिक सदस्यता पंजीकरण के लिए दर्जनों सम्मेलन किये गए, नेताओं ने तहसील स्तर तक जाकर प्रवास किए और सोशल मीडिया के साथ प्रचार साध्ानों को भिन्न-भिन्न कल्पनापूर्ण तरीकों से उपयोग किया गया। इन सभी राज्यों में इन प्रयासों के कारण सदस्यता की संख्या में 3 से 10 गुना वृह् िहुयी है जो अपने आप में नया कीर्तिमान है। „

गोधरा में कैसे गुम हो गए सैकड़ों पाकिस्तानी ? - आईबीएन-7

बड़ा खुलासा: गोधरा में कैसे गुम हो गए सैकड़ों पाकिस्तानी?
June 05, 2015  नवज्योत आईबीएन-7
नई दिल्ली।
आईबीएन 7 ने एक वर्ल्ड एक्सक्लूसिव खुलासा किया है इस खुलासे की कहानी का एक सिरा जुड़ा है पाकिस्तान से और दूसरा गुजरात के गोधरा से। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि अचानक गोधरा आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की गिनती 10 गुना बढ़ गई। 2014 में कुल 2026 पाकिस्तानियों ने गोधरा का रुख किया यानी हर दिन औसतन 6 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा पहुंचे।
सवाल उठता है क्यों? दरसअल, गोधरा में 13 साल पहले जो कुछ हुआ,  उसका  जिक्र भी नहीं करना चाहते यहां के लोग। उस दशहत को भुला देना चाहते हैं यहां के लोग जो कभी इस शहर की तकदीर बन चुकी थी।
बड़ा खुलासा: गोधरा में कैसे गुम हो गए सैकड़ों पाकिस्तानी? 2014 में कुल 2026 पाकिस्तानियों ने गोधरा का रुख किया यानी हर दिन औसतन 6 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा पहुंचे।

लेकिन कोई है जो वे नाजुक जज्बात फिर कुरेदना चाहता है और उन लोगों का रिश्ता है हमारे उस पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से है। ये खबर पहले भी आती रही हैं कि 2002 के गोधरा दंगों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हवा दी थी। लेकिन अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने देश की खुफिया एजेंसियों को भी चौंका दिया है।

आखिर क्या हो रहा है गोधरा में, आखिर कैसे पाकिस्तान टू गोधरा का एक नया चौंकाने वाला रूट तैयार हो रहा है? 2012 में 105 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा आए थे। 2013 में ये आंकड़ा 876 तक पहुंच गया यानी करीब आठ गुना बढ़ गया। वहीं 2014 में गोधरा आने वाले पाकिस्तानियों की गिनती बढ़कर हो गई 2026 तक यानी दोगुनी से भी ज्यादा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर दिन करीब 6 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा आते रहे। इन आंकड़ों को देखकर आपके जेहन में भी कई सवाल खड़े हो रहे होंगे। आखिर अचानक गोधरा में पाकिस्तानी नागरिकों की दिलचस्पी कैसे और क्योंकर बढ़ गई, आखिर पाकिस्तानी नागरिकों ने भारत आने के लिए गोधरा को ही इतना क्यों चुना, क्या ये महज इत्तेफाक था या फिर कुछ और?
जाहिर है गोधरा में पाकिस्तानी नागरिकों की तेजी से बढ़ती तादाद 2012 में 105 से लेकर 2014 में 2026 होने ने देश की खुफिया एजेंसियों को भी चकरा दिया, चौंका दिया। लिहाजा देश की कई एजेंसियां इस कहानी का सिरा तलाशने में जुट गईं।
पंचमहल के एसपी राघवेंद्र वत्स के मुताबिक ये एक बड़ा स्कैंडल चल रहा है। जांच करने पर पता चला कि पाकिस्तानी विजिटर्स की संख्या इतनी बढ़ गई। गहरी जांच के बाद पता चला कि पाकिस्तानी विजिटर्स अपने फायदे के लिए हमारे प्रोसीजर का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।
पाकिस्तानी नागरिकों का यूं बेहद संवेदनशील शहर गोधरा में यूं दिलचस्पी लेना गंभीर था। सो इसकी जांच गुजरात पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को सौंपी गई। लंबी-चौड़ी पड़ताल के बाद जांच एजेंसी के हाथ एक बड़ा सुराग लगा। ये सुराग एक गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा था। ये बता रहा था कि आखिर पाकिस्तान से गोघरा आने के लिए कानून से खिलवाड़ तक किया जा रहा था लेकिन अब भी दिमाग में ये प्रश्न जरूर कौंध रहा होगा कि आखिर ये पाकिस्तानी गोधरा क्यों आ रहे हैं, गोधरा ही क्यों?
सवाल बड़ा है कि आखिर ये पाकिस्तानी नागरिक गोधरा ही क्यों आए? लेकिन उस सवाल ये भी बड़ी है वो साजिश, जो इन पाकिस्तानियों ने भारत आने के लिए रची। सच ये है कि इनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिकों के दस्तावेज फर्जी थे। उन्होंने गोधरा में जिन लोगों से पहचान का दावा किया था, वो भी फर्जी था। उनके दस्तावेजों में जिन भारतीय अधिकारियों के दस्तखत थे, जिन सरकारी दफ्तरों की मुहर थी। वो भी फर्जी थी।
आखिर साल 2014 में गोधरा आने वाले 2 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों में क्या कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जिनके इरादे नेक नहीं थे। बदनीयत से गुजरात के इस शहर में आने का मकसद क्या था? खुफिया एजेसियों की जांच आगे बढ़ती जा रही थी।
इस साजिश की पहली कड़ी खुली, एक पाकिस्तानी नागरिक से जो फर्जी स्पॉन्सरशिप के सहारे गोधरा आया था। उसके स्पॉन्सरशिप लेटर पर गेजेटेड अफसर के साइन फर्जी पाए गए और ये साइन गोधरा के ही एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने किए थे। इस अवैध लैटर के दम पर ही उस पाकिस्तानी नागरिक ने भारत का वीजा लिया था।
जांच आगे बढ़ी तो पांच चेहरे पकड़ में आए। गोधरा पुलिस ने पांच लोगों को धर दबोचा  और इसी के साथ गोधरा आए पाकिस्तानियों के दस्तावेज खंगालने का सिलसिला शुरू हो गया। इस जांच में एक और चौंका देने वाला सच सामने आया, एक पाकिस्तानी नागरिक के स्पॉन्सरशिप लैटर पर शहर के एसडीएम के साइन थे। बाकायदा स्टैम्प भी लगा हुआ था, लेकिन एसडीएम ने बताया कि उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज साइन किया ही नहीं था।
पंचमहल के एसपी राघवेंद्र वत्स ने इस मामले पर  प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये एक गंभीर मामला है  खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए। पिछले सालों से मैं विजिटर्स की संख्या में जो उछाल आया है। वो फर्जी दस्तावेज की वजह से है।
धीरे-धीरे पाकिस्तान टू गोधरा पर पड़ी धुंध छंटती जा रही थी। ये साफ हो चला था कि कुछ पाकिस्तानियों ने भारत और खास तौर पर गोधरा आने के लिए फर्जी दस्तावेज तक बनवाए, भारतीय कानून की आंखों में धूल झोंकी। मगर वो गोधरा क्यों आना चाहते थे, क्या ये सिरा पूरी साजिश का सिर्फ ट्रेलर मात्र था?
अब सवाल ये है कि आखिर ये सब क्यों किया गया, क्यों उन पाकिस्तानी नागरिकों को भारत आने के लिए फर्जी दस्तावेज देने पड़े? साफ है कि उनमें से ज्यादातर पाकिस्तानियों की नीयत में खोट था। जांच एजेंसियों की मानें तो 2014 में गोधरा पहुंचे 2026 पाकिस्तानी नागरिकों में करीब 1500 नागरिकों के दस्तावेज फर्जी थे। बेशक बिना जांच पड़ताल उन पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की वीजा देना, इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास की लापरवाही है लेकिन ये भी सच है कि ये पूरी साजिश पाकिस्तान से रची गई। सैकड़ों नागरिकों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
साजिश ये नहीं है कि पाकिस्तानी नागरिक भारत आ रहे हैं। ये भी नहीं है कि वो नागरिक गोधरा पहुंच रहे हैं बल्कि साजिश ये है कि उनमें से ज्यादातर नागरिक अवैध दस्तावेजों के सहारे हिन्दुस्तान पहुंच रहे हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक 2014 में 2026 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा पहुंचे। जिसमें से करीब 1500 पाकिस्तानियों के दस्तावेज फर्जी थे। अब सवाल ये उठता है कि आखिर वो फर्जी दस्तावेज बने कैसे, भारत आने में उनकी मदद किसने की? ये समझने से पहले, ये देखना जरूरी है कि पाकिस्तानी नागरिकों के भारत आने के लिए नियम क्या हैं?
इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक नियम कुछ ऐसे हैं। पाकिस्तानी नागरिकों को एक स्पॉन्सरशिप सर्टिफिकेट की जरूरत होती है जो ऑनलाइन मिल जाता है। इस फॉर्म में भारत आने वाले शख्स को अपनी तस्वीर के साथ अपनी पूरी जानकारी देनी पड़ती है। उसके बाद स्पॉन्सर को अपने शहर के किसी क्लास वन ऑफीसर यानी डीएम, एसएसपी, एसडीएम जैसे अधिकारियों अपनी पहचान का सबूत देना होता है, जिससे ये साबित हो कि स्पॉन्सर उसी शहर का रहने वाला है।
नियम के मुताबिक पाकिस्तान में भारतीय दूतावास ऐसे तमाम आवेदनों की जांच करता है। फिर पाकिस्तानी नागरिक को तय समय के लिए भारत का वीजा दिया जाता है, लेकिन गोधरा आए सैकड़ों पाकिस्तानियों ने इन नियमों की धज्जियां कैसे उड़ाईं?
जांच एजेंसियों को ऐसे कई पाकिस्तानी नागरिकों के दस्तावेज मिले। जिनमें न उनके स्पॉन्सर की तस्वीर थी, न अधिकारियों के साइन थे और न सरकारी दफ्तर की स्टैंप। खुफिया एजेंसियां लगातार ये इनपुट दे रही हैं कि आतंकी अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए किसी महिला का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पाकिस्तान से गोधरा आई मारिया की कहानी ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। पंचमहल एसपी राघवेंद्र वत्स ने कहा है कि जो गलत तरीके से आए थे, उनमें से दो तीन लोगों ने शादी करने की कोशिश भी की। उस आधार पर एलटीवी के लिए एप्लाई भी किया। ये जांच विषय है आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होगी।
अब सवाल ये उठता है कि आखिर उन पाकिस्तानी नागरिकों को भारतीय अधिकारियों के स्टैंप और दस्तखत कैसे मिले, कैसे उन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इस मामले में गिरफ्तार हुए कुछ लोगों से पूछताछ में पता लगा कि पाकिस्तान में एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है जो भारतीय अधिकारियों के फर्जी स्टैंप मुहैय्या कराया है। पूछताछ में अनवर कंवल नाम के एक पाकिस्तानी शख्स का भी खुलासा हुआ, जिसने कई लोगों को भारतीय अधिकारियों के फर्जी स्टैंप दिए थे।
मतलब ये कि ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक फर्जी तरीके से गोधरा पहुंचे। अब सवाल ये है कि आखिर पाकिस्तान में भारतीय दूतावास ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें वीजा क्यों दिया, क्यों दूतावास के अधिकारियों ने दस्तावेजों की पड़ताल की जरूरत नहीं समझी।
इस बड़े खुलासे पर पर बात करने के लिए आईबीएन7 के साथ रॉ के पूर्व डायरेक्टर ए के वर्मा, सुरक्षा विशेषज्ञ आलोक बंसल,  यूपी के पूर्व डीजीपी बृज लाल,  पाकिस्तान के इस्लामाबाद से स्काइप पर डॉन न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार इफ्तिशार शिराजी जुड़े।