मंगलवार, 18 अगस्त 2015

यूएई में मंदिर बनाने का वादा लेकर दिल्ली लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



PM मोदी के UAE दौरे की सबसे खास बातें

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने आतंकवाद और कट्टरता के सभी रूपों के खिलाफ मिल कर लड़ने का संकल्प लिया है। इसमें आतंकवाद को सही ठहराने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने वालों और दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद को प्रश्रय देने वालों का विरोध भी शामिल है। इसे पाकिस्तान के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की वार्ता के बाद जारी साझा बयान में ये बातें कही गई हैं।

दोनों देशों ने चरमपंथ को खारिज करते हुए आतंकवाद के धर्म से संबंध की बात को भी खारिज किया। इसमें कहा गया है कि दोनों देश आतंकवाद को जायज ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल के प्रयास का, किसी देश द्वारा ऐसी कोशिश करने का, किसी देश के खिलाफ किसी अन्य देश द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिशों का विरोध करते हैं।

संयुक्त बयान के तमाम बिंदुओं को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट के जरिए बताया है। उन्होंने टूगेदरआनटेरर हैशटैग का इस्तेमाल किया है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों में और इस बारे में खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के बारे में सहयोग बढ़ाएंगे।

दोनों देशों ने कट्टरवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल होने वाले फंड पर निगाह रखने और इससे जुड़ी जानकारियां एक दूसरे को देने पर भी सहमति जताई। यूएई ने भारत के उस प्रस्ताव पर साथ देने का भी वादा किया जिसमें संयुक्त राष्ट्र में समग्र अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद संधि की बात कही गई है।

दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, मादक पदार्थो, कालेधन पर लगाम लगाने और प्रत्यर्पण के मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हर छह महीने में मुलाकात करेंगे। दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में भी संवाद होगा।

आतंकवाद पर साझा बयान की बातों से साफ है कि यूएई ने पाकिस्तान के रुख से दूरी बनाई है। इससे दाऊद इब्राहीम जैसे आतंकियों के यूएई के जमीन के इस्तेमाल पर भी अंकुश लगेगा। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर समझौता हुआ।

साझा बयान में व्यापार और निवेश का भी काफी जिक्र है। दोनों देशों ने अगले पांच साल में अपने बीच के व्यापार को 60 फीसदी तक बढ़ाने पर सहमति जताई है।

दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने पर भी समझौता हुआ है। 75 अरब अमेरिकी डालर से यूएई-भारत आधारभूत निवेश फंड बनाया जाएगा। इससे भारत में रेलवे, बंदरगाहों, सड़कों, हवाई अड्डों, औद्योगिक गलियारों का विकास किया जाएगा।

महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक भागीदारी को बढ़ाने पर भी दोनों देशों में सहमति बनी। भारत में तेल के संरक्षित क्षेत्रों के विकास में यूएई भूमिका निभाएगा।

दोनों देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी सहयोग करेंगे। इनमें उपग्रह प्रक्षेपण भी शामिल है। परमाणु ऊर्जा के सुरक्षा, सेहत, विज्ञान-तकनीक, कृषि के क्षेत्र में शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर भी सहमति बनी।

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे को समर्थन देने के लिए यूएई का आभार जताया। प्रधानमंत्री ने अबु धाबी में मंदिर के लिए जमीन देने पर भी यूएई के शहजादे का आभार जताया।

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दुबई में एक बार फिर मेडिसन स्क्वायर जैसा जलवा दिखा। खचाखच भरे दुबई के क्रिकेट स्टेडियम में नरेंद्र मोदी जमकर दहाड़े। मोदी ने बात तो शुरु की दुबई कनेक्शन से लेकिन पूरे भाषण पर आंतकवाद का मुद्दा छाया रहा। मोदी ने आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि गुड तालिबान बेड तालिबान जैसा कुछ नहीं होता, आतंक तो बस आतंक होता है। मोदी ने कहा कि ये भी कहा कि यूएई ने आतंक पर भारत के रुख का समर्थन किया है। मोदी ने अपने भाषण में क्षेत्रीय सहयोग के मामलें में भारत की पहल का भी उल्लेख किया। यूएई और भारत के द्विपक्षीय संबंधों की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यूएई ने भारत में 4.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश का करार किया है जो भारत पर बढ़ते भरोसे को दिखाता है। इसके अलावा यूएई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। पीएम मोदी ने कहा कि कोई भारतीय पीएम यूएई में 34 साल बाद आया है। इसके बावजूद उनका जोरदार स्वागत हुआ और कोई नाराज़गी तक नहीं जाहिर की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में संभावनाएं हैं और यूएई आर्थिक शक्ति है और अगर भारत-यूएई साथ आएं तो 21 सदीं को एशिया की सदी बनाने का सपना पूरा होगा। भारत की संभावनाएं और यूएई की शक्ति जुड़ जाएं तो आगे की सोच और योजनाओं पर आगे बढ़ा जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि यूएई और भारत अगर मिलकर काम करें तो 21वीं सदी पूरी तरह से एशिया की सदी होगी। उन्होंने कहा कि एशिया के विकास के लिए यूएई मुख्य आर्थिक धारा के केंद्र में होना चाहिए।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल यूएई के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यूएई ने भारत में निवेश बढ़ाकर 75 अरब डॉलर करने का करार किया, जिसमें एक इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के माध्यम से होने वाला निवेश भी शामिल है। साथ ही दोनों देशों ने द्विपक्षीय कारोबार अगले पांच में 60 परसेंट बढ़ाने का भी समझौता किया। इसके अलावा  न्यूक्लीयर पॉवर, एनर्जी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच समझौते हुए। दुबई पहुंचने से पहले मोदी ने मसदर शहर का दौरा किया और वहां अबू धाबी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स में उन्होंने यूएई और भारतीय मूल के कारोबारियों से मुलाकात की।

भारत, यूएई के बीच 7500 करोड़ डॉलर का इंफ्रा इन्वेस्टमेंट फंड बनाने पर समझौता हुआ है। साथ ही यूएई भारत, यूएई न्यूक्लियर एनर्जी के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर सहयोग करेंगे। यूएई एनर्जी सेक्टर में भारत, यूएई के बीच स्ट्रैटेजिक करार हुए हैं और यूएई के साथ 5 साल में व्यापार बढ़ाकर 60 फीसदी करने पर भारत, यूएई में समझौता हुआ है। यूएई भारत-यूएई स्पेस में ज्वाइंट डेवलपमेंट, सैटेलाइट लॉन्च को बढ़ावा देंगे। दोनों देश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के जरिए रक्षा संबंध मजबूत करेंगे।
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4.5 लाख करोड़ इन्वेस्टमेंट, यूएई में मंदिर बनाने का वादा लेकर दिल्ली लौटे मोदी
dainikbhaskar.comAug 18, 2015,
दुबई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई दौरे के आखिरी दिन दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में करीब एक घंटे तक भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारतीयों को नमन कर स्पीच की शुरुआत की। कहा-'मैं एक लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। आपकी वजह से ही भारत गौरव महसूस करता है। भारत में अगर बारिश होती है, तो दुबई के मेरे देशवासी छाता निकाल लेते हैं।" उन्होंने कहा कि अगर भारत पर कोई विपदा आती है, यहां बैठा भारतवंशी चैन से नहीं सोता। बता दें कि मोदी को सुनने के लिए करीब 50 हजार लोग पहुंचे। उनके भाषण से पहले पहले रंगारंग कार्यक्रम हुआ। इसमें इंटरनेशनल कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

2.30AM: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली लौटे।

PM का कांग्रेस पर निशाना, कहा- विरासत में मुश्किलें ही मिलीं, पर भागूंगा नहीं
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11.0PM : दौरा समाप्त, प्रधानमंत्री दिल्ली के लिए रवाना हुए।
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10.09 PM: भारत सरकार ने ई-माइग्रेट पोर्टल शुरू किया।
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10.08 PM: वीजा समस्या में मदद नाम से ऑनलाइन सुविधा शुरू हुई है।
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10.08 PM: पूर्वी भारत में विकास की ज्यादा जरूरत: मोदी
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10.07 PM: हमारी खेती में दूसरी हरित क्रांति हो। पांच साल में देश में 24 घंटे बिजली देंगे।: पीएम
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10.07 PM: 'आज सार्क देशों में सहयोग का नया दौर है। 2016 में सार्क देशों के लिए सेटेलाइट छोड़ेंग'
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10.07 PM: '1 अगस्त को भारत-बांग्लादेश सीमा विवाद सुलझा दिया'
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10.07 PM: नेपाल में आए भूकंप के चंद मिनटों बाद हम वहां पहुंच गए: पीएम
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10.06 PM: 'हमने मालदीव की जलसंकट में मदद की जहाज और स्टीमर से पानी पहुंचाया'
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10.06 PM: 'अफगानिस्तान के संकट में हम हमेशा उसके साथ रहे'
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10.05 PM: अड़ोस-पड़ोस की समस्या का हल भी बातचीत से हो: मोदी
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10.04 PM: 'फैसला करने का वक्त आ गया है, आप किस ओर हैं'
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10.00 PM: आतंकवाद के खिलाफ यहां एकता का स्वर उठा। अमीरात ने भारत का समर्थन किया है: पीएम
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9.41 PM: गुड तालिबान, बैड तैलिबान अब नहीं चलेगा: मोदी
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9.40 PM: आतंकवाद के खिलाफ भारत-UAE एक
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9.40 PM: 'ये बदलाव मोदी के कारण नहीं, बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की वजह से आया है'
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9.40 PM: ये बदले हुए भारत का सम्मान है: मोदी
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9.39 PM: 'क्राउन प्रिंस आतंकवाद पर भारत के रुख के साथ'
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9.39 PM: UN में हमारी स्थाई सदस्यता का समर्थन किया: पीएम
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9.38 PM: क्राउन प्रिंस ने भारत में 4.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश का संकल्प लिया: मोदी
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9.36 PM: मोदी ने केरलवासियों को दी मलयाली नववर्ष की बधाई
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9.36 PM: 'अबु धाबी में मंदिर बनाने की जगह दी, क्राऊन प्रिंस को स्टैंडिंग ओवेशन दीजिए'
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9.35 PM: ये मेरा सम्मान नहीं, सवा सौ करोड़ भारतीयों का सम्मान है: पीएम मोदी
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9.35 PM: क्राउन प्रिंस ने पांचों भाइयों के साथ मेरी अगवानी की: मोदी
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9.35 PM: दुबई की सरकार ने मुझपर प्यार की बारिश की: पीएम
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9.34 PM: मोदी ने लोगों से पूछा- देरी से आने पर नाराजगी का हक बनता है कि नहीं।
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9.34 PM: 'भारतीय प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लगे'
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9.25 PM: दुबई अब एक लघु विश्व बन गया है: पीएम
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9.24 PM: दुनिया के कई देशों के लोग दुबई में रहते हैं: मोदी
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9.24 PM: 'चुनावी नतीजों पर दुबई भी नाच रहा था'
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9.23 PM: मैं एक लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं- मोदी
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9.23 PM: हिंदुस्तान के कोने कोने से आए देशवासियों को मैं नमन करता हूं।-पीएम
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(PM का कांग्रेस पर निशाना, कहा- विरासत में मुश्किलें ही मिलीं, पर भागूंगा नहीं)
बड़े पैमाने पर इंतजाम
- ऑर्गनाइजर्स के मुताबिक, मोदी की स्पीच सुनने के लिए 15 हजार लोग तो सिर्फ स्पेशल बसों के जरिए स्टेडियम पहुंचे थे। दुबई रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने मोदी के प्रोग्राम के लिए खास तौर पर 30 बसें लगाई थीं।
- स्टेडियम कैम्पस में 4 हजार कारों की पार्किंग के इंतजाम किए गए। 1000 टैक्सियों का भी अरेंजमेंट किया गया। 40 हजार फूड पैकेट्स और 2.5 लाख कप पानी का इंतजाम किया गया।
- लोगों को गर्मी न लगे इसके लिए 40 हजार कार्डबोर्ड हैंड फैन डिस्ट्रिब्यूट किए गए।
- स्टेडियम के अंदर 35 डॉक्टरों की टीम और 55 लोगों का नर्सिंग स्टाफ मौजूद था। स्टेडियम के बाहर 3 बड़ी एंबुलेंस थीं।
- यूएई की न्यूज वेबसाइट एमिरेट्स 24/7 के मुताबिक, उन कंपनियों ने एम्प्लॉइज़ को हाफ-डे या फ्लेक्जिबल वर्किंग आवर्स का ऑप्शन दिया था जहां इंडियंस ज्यादा काम करते हैं।
- मोदी के प्रोग्राम के मद्देनजर दुबई अथॉरिटी ने मेट्रो के टाइमिंग्स रात 10.30 से बढ़ाकर 12 बजे तक कर दिए थे। स्टेडियम से करीबी मेट्रो स्टेशंस के बीच शटल बसें अलग से चलाई गईं।

बिहार की प्रगति ही एकमात्र लक्ष्य है - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



बिहार की प्रगति ही एकमात्र लक्ष्य है - प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी

भारत माता की जय
ये जो कोई ऊपर हैं, अगर आप में से कोई नीचे गिरा तो मेरा क्या होगा। मैं देख रहा था कि एयरपोर्ट से यहाँ तक पूरे रास्ते भर ऐसा ही लोगों का हुजूम जमा था  गया वालों से मेरी एक शिकायत है। शिकायत करूं, आप बुरा नहीं मानोगे न। पक्का नहीं मानोगे। मैं गया लोकसभा के चुनाव के समय भी आया था, इसी मैदान में आया था और करीब-करीब इसी समय आया था और चुनाव पीक पर थे तब आया था। मैं ख़ुद चुनाव लड़ रहा था, लोकसभा का चुनाव था, प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय करना था लेकिन उस सभा में तो इससे आधे लोग भी नहीं आये थे और आज उससे डबल से भी ज्यादा मैं देख रहा हूँ। हवा का रुख़ मुझे पता चल रहा है। लेकिन मेरी ये शिकायत प्यार की है, नाराजगी की नहीं है। ये शिकायत आपको अभिनंदन करने के लिए है, आपको बधाई देने के लिए है। कमाल कर दिया है आज गया वालों ने। ये हमारे जीतन राम जी की कर्मभूमि है ना।  
मंच पर विराजमान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान अमित भाई शाह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे वरिष्ठ साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, हम पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, केन्द्रीय मंत्री एवं रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान उपेन्द्र कुशवाहा जी, बिहार विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री अनंत कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री भूपेन्द्र यादव जी, पूर्व मंत्री और हम सबके मार्गदर्शक श्रीमान डॉ. सी पी ठाकुर जी, केंद्र में मेरे साथी मंत्री श्रीमान राधामोहन सिंह जी, श्री रविशंकर प्रसाद जी, श्रीमान राजीव प्रताप रूडी जी, श्री गिरिराज जी, श्री राम कृपाल यादव जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी चौधरी जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष और मेरे मित्र डॉ. अरुण जी, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ हुसैन जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए गया के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।
चुनाव बहुत जल्द आ रहे हैं और मैं साफ देख रहा हूँ जनता ने दो फैसले कर लिये हैं। बिहार की जनता ने दो निर्णय कर लिये हैं - एक निर्णय बिहार के जीवन में, बिहार के विकास में, बिहार का भाग्य बदलने के लिए एक आधुनिक ताकतवर नया बिहार बनाने का निर्णय कर लिया है और दूसरा निर्णय बिहार की जनता ने कर लिया है, बिहार में परिवर्तन का। 25 साल से जिनको झेला है, जिनके हर ज़ुल्म को झेला है, जिनके अहंकार को झेला है, जिनकी धोखाधड़ी को झेला है, इन सबसे मुक्ति का पर्व ये चुनाव आने वाला है भाईयों। और ये चुनाव बिहार को जंगलराज से मुक्ति का पर्व बनने वाला है, ये चुनाव बिहार में अहंकारी हुकूमत से मुक्ति का पर्व बनने वाला है।
भाईयों-बहनों, 25 साल हो गए, इन्हीं लोगों ने बिहार पर राज किया है। आप मुझे बताईये, आज जैसे 25 साल बीते हैं, अगर आने वाले 5 साल भी ऐसे बीते तो नौजवान बर्बाद हो जाएगा कि नहीं हो जाएगा? आपका भविष्य तबाह हो जाएगा, आपको बिहार छोड़कर रोजी-रोटी के लिए कहीं जाना पड़ेगा, बूढ़े मां-बाप को छोड़ना पड़ेगा, क्या हम ऐसा बिहार चाहते हैं? क्या बिहार में परिवर्तन चाहिए? बिहार का भला करने वाली सरकार चाहिए? लोकतंत्र में विश्वास करने वाली सरकार चाहिए? अहंकार से मुक्त सरकार चाहिए? जंगलराज के सपनों को चूर-चूर करना चाहिए? इसलिए भाईयों-बहनों, आज मैं बिहार की जनता के पास आया हूँ। मैं आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। क्या करके रख दिया बिहार को? आज भी हिन्दुस्तान के सांस्कृतिक इतिहास की चर्चा कोई करेगा तो उस चर्चा की शुरुआत बिहार के भव्य भूतकाल से होती है। आज भी विश्व में अहिंसा के संदेश की कोई चर्चा करता है तो भगवान बुद्ध का स्मरण करता है तो बात बिहार से प्रारंभ होती है। सत्ता के लिए संघर्ष के बाद जनता की भलाई के लिए सत्य को छोड़ने का महाप्रयास, इसकी भी चर्चा होगी तो यही बिहार से चर्चा होती है। विज्ञान हो, संस्कृति हो, इतिहास हो, वीरता हो, पराक्रम हो, कोई ऐसा विषय नहीं है, हिन्दुस्तान जब भी उसकी चर्चा करे तो चर्चा का प्रारंभ बिहार से होता है।
ऐसी ये महान भूमि, ऐसी ये पवित्र भूमि, उसके सपनों को सत्ता के नशे में बैठे लोगों ने चूर-चूर कर दिए। आधुनिक भारत में भी बिहार ने देश को जितना दिया है, शायद ही हिन्दुस्तान का कोई राज्य इसका दावा कर सकता है जितना बिहार ने देश को दिया है। जब बिहार देश को उत्तम मानव संसाधन दे सकता है आज हिंदुस्तान का कोई राज्य ऐसा नहीं होगा जिस राज्य में बिहार का नौजवान आईएएस बनकर न बैठा हो, कोई राज्य नहीं होगा। भारत के कोने-कोने में बिहार का नौजवान जिस पद पर बैठा है उस राज्य को विकास के नई ऊंचाईयों पर ले जाने का पराक्रम करके दिखाता है। ये बिहार के नौजवानों की ताकत है, ये बिहार के लोगों की ताकत है लेकिन क्या कारण है कि बिहार आगे बढ़ नहीं पा रहा है। क्या कारण है? बिहार को किसने बर्बाद किया? बिहार के सपनों को किसने चूर-चूर किया? बिहार में जंगलराज कौन लाया? बिहार में जंगलराज लाने का और प्रयास कौन कर रहा है? क्या फिर से बिहार को उन 25 साल की बर्बादी की ओर ले जाना है क्या? फिर से उस दोज़ख में जाना है क्या? क्या बिहार बचाना है? क्या नया बिहार बनाना है? क्या बिहार को आगे ले जाना है? तो भाईयों-बहनों, हम कंधे से कंधे मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं। अब दिल्ली बिहार के साथ है। अब दिल्ली बिहार का भाग्य बदलने के लिए आपकी सेवा में तैनात है और इसलिए भाईयों-बहनों, आज मैं आपके पास आया हूँ बिहार के जीवन को बदलने के लिए, एक अच्छी सरकार चुनने के लिए आपसे प्रार्थना करने के लिए आया हूँ। बिहार की जनता ने पिछले लोकसभा के चुनाव में मुझपर इतना प्यार बरपाया, इतना प्यार बरपाया कि मैं उस प्यार को ब्याज समेत लौटाना चाहता हूँ, विकास करके लौटाना चाहता हूँ लेकिन जो विकास के लिए प्रतिबद्ध हो, ऐसी सरकार यहाँ होना जरुरी है।
भाईयों-बहनों, गंगाजी तो बहती है लेकिन अगर हम उल्टा लोटा लेकर जाएंगे तो कोई एक बूँद भी पानी नहीं ले पाएंगे। दिल्ली से विकास की गंगा तो बह रही है लेकिन यहाँ के शासकों का अहंकार उल्टा लोटा पकड़े हुए है ताकि दिल्ली के विकास की गंगा बिहार के गाँव-गली में ना पहुंचे। पिछले दिनों जब मैं बिहार आया था, अनेक योजनाओं का शिलान्यास किया। 10-10 साल से रुकी पड़ी थी, कोई देखने को तैयार नहीं था। यही लोग दिल्ली की सरकार को चलाते थे और आज वही लोग साथ मिलकर के बिहार के लोगों को फिर से एकबार जंगलराज की ओर घसीटने के लिए, अपने निजी स्वार्थ के लिए तैयार बैठे हैं। आप मुझे बताईए, ये जो राजनीतिक लाभ लेने के लिए गठबंधन हुआ है, क्या चुनाव के बाद भी ये गठबंधन चलेगा क्या? ये जो जहर अभी पीया गया है, चुनाव के बाद जहर उगलेंगे कि नहीं उगलेंगे। ये जहर पीने वाले चुनाव के बाद जब जहर उगलेंगे तो वो जहर किसकी थाली में जाकर पड़ेगा? जनता की थाली में पड़ेगा कि नहीं पड़ेगा? जनता मरेगी कि नहीं मरेगी? जनता बर्बाद होगी कि नहीं होगी? जिन्होंने जहर पीया है, उनको जहर उगलने का मौका देना चाहिए क्या? ये जहर पीने वालों की जरुरत है क्या? जहर पिलाने वालों की जरुरत है क्या? मुझे तो पता ही नहीं चल रहा, ये बिहार में भुजंग प्रसाद कौन है और चंदन कुमार कौन है? नए भुजंग प्रसाद, नए चंदन कुमार, पता नहीं कौन किसको जहर पिला रहा है, कौन किसका जहर पी रहा है लेकिन इतना मुझे पता है कि चुनाव समाप्त होते ही ये जहर उगलना शुरू करेंगे। बिहार को बर्बाद करने में अब जंगलराज के साथ जहरीला वातावरण भी आने वाला है और इसलिए बिहार को बचाना समय की मांग है।
अब देखिए, भाजपा की सरकार क्यों बनानी चाहिए, एनडीए की सरकार क्यों बनानी चाहिए। जीतन राम मांझी, राम विलास पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा, सुशील मोदी, ये सारे अनुभवी लोग, इनके नेतृत्व में बिहार में नई सरकार क्यों बनानी चाहिए। मैं अनुभव से बताता हूँ, हमारे देश में कई वर्षों से ये चर्चा चली, बीमारू राज्य है। बीमारू राज्य शब्द का प्रयोग चल पड़ा। आर्थिक विकास के पैमानों के आधार पर चल पड़ा और उस बीमारू राज्य में बिहार का भी नाम, उत्तरप्रदेश का भी नाम, मध्यप्रदेश का भी नाम, राजस्थान का भी नाम, ये बीमारू राज्य में गिने जाते हैं। लेकिन जब मध्यप्रदेश की जनता ने भाजपा की सरकार बनाई, अभी तो वहां 15 साल का भी सेवा करने का समय पूरा नहीं हुआ, अभी तो 10-12 साल हुए हैं लेकिन 10-12 साल के अन्दर-अन्दर मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा ने मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकाल लिया है। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को बीमारू से बाहर निकालना है? पक्का निकालना है? मध्यप्रदेश को निकाला भाजपा ने, बिहार को कौन निकालेगा? राजस्थान को बीमारू राज्य कहा जाता था। वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और विकास की नई ऊंचाईयों को पार किया। आज राजस्थान बीमारू राज्य से बाहर निकाल आया है तो भाईयों-बहनों, क्या बिहार बीमारू राज्य से बाहर आ सकता है? क्या हम ला सकते हैं? आप मदद करोगे? आप आशीर्वाद दोगे? मैं आपसे वादा करता हूँ कि 5 साल के भीतर-भीतर हम बिहार को बीमारू राज्य से बाहर निकाल देंगे।
दुनिया में कई देशों में मुझे जाने का सौभाग्य मिला, एशिया के कई देशों में जाने का सौभाग्य मिला और वहां पर बड़े से बड़े राजनेता को मिलना हुआ हो, वहां के उद्योगपतियों से मिलना हुआ हो, वहां के साहित्यकारों से मिलना हुआ हो, वहां के छोटे-मोटे व्यापारियों से मिलना हुआ हो, वहां के सरकारी अफसरों से मिलना हुआ हो, हर किसी ने मुझसे एक बात कही। जिन-जिन देशों में बौद्ध धर्म का प्रभाव है, बौद्ध परंपरा का प्रभाव है, उन सभी देशों के मुखिया ने कहा कि एक बार तो बोधगया जाने की इच्छा है। दुनिया का हर व्यक्ति जो बौद्ध परंपरा से जुड़ा हुआ है, कम्युनिस्ट विचारधारा के नेता भी मिले, वो भी मुझे कहते हैं कि एक बार बोधगया के दर्शन के लिए जाएंगे। जितने यात्री ताजमहल देखने के लिए आते हैं, उससे ज्यादा यात्री बोधगया में माथा टेकने के लिए तैयार हैं। मुझे बताईये, क्या हमें बोधगया को ऐसा बनाना चाहिए कि नहीं चाहिए? बोधगया से ऐसा विकास हो टूरिज्म का ऐसा क्षेत्र बने ताकि दुनियाभर में बुद्ध को मानने वाले लोगों को बोधगया आने की व्यवस्था मिले और इतनी बड़ी संख्या में अगर यात्री आएंगे तो इस इलाके में कभी गरीबी रहेगी क्या।
टूरिज्म एक ऐसा उद्योग है, टूरिज्म एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कम से कम पूँजी से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। अगर एक बार बोधगया में विश्वभर के यात्रियों के आने का सिलसिला चालू हो जाए और बहुत बड़ी संख्या में हो जाए तो इस इलाके के किसी नौजवान को बेरोजगार रहने की नौबत नहीं आएगी। इतनी ताकत है उसमें और गरीब से गरीब आदमी कमाता है, ऑटो रिक्शावाला भी कमायेगा, बिस्कुट बेचने वाला भी कमायेगा, चने मुरमुरे बेचने वाला भी कमायेगा, खिलौने बेचने वाला भी कमायेगा, फूल बेचने वाला कमायेगा, अरे चाय बेचने वाला भी कमायेगा। लेकिन भाईयों-बहनों, इनकी राजनीति वोट-बैंक की राजनीति इतनी है कि उन्होंने बोधगया का विकास करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। इतना ही नहीं, जब यहाँ पर बम धमाका हुआ तो पूरे विश्व को बहुत बड़ा सदमा पहुंचा। विश्वभर में बौद्ध परंपरा को निभाने वाले सभी देशों के लोगों को सदमा पहुंचा लेकिन वोट बैंक की राजनीति में डूबे हुए लोग, उनको इसकी कोई परवाह नहीं थी। उनके लिए ऐसी घटनाएं आती है, जाती है। भाईयों-बहनों, मुझे यह स्थिति बदलनी है।
मुझे बोधगया को पूरे एशिया में तीर्थ-क्षेत्र के रूप में परिवर्तित करना है और मुझे आगे बढ़ाना है। ये गया पितृ तर्पण का स्थल है। हिन्दुस्तान का हर युवक, हर बेटा-बेटी, जब पितृ तर्पण की बात आती है तो उसका एक सपना रहता है कि उसके पिता का तर्पण मैं गया जी में जाकर करूँ। हिंदुस्तान भर के लोगों का ये सपना है कि नहीं है? पितृ तर्पण के लिए लोग आते हैं कि नहीं आते हैं? सवा सौ करोड़ का देश, हर वर्ष करोड़ों बड़ी आयु के लोग स्वर्ग सिधारते हैं, उनके संतान पितृ गया में आ करके तर्पण करना चाहते हैं। करोड़ों लोग आने के लिए तैयार बैठे हैं लेकिन यहाँ का समाचार सुनते हैं और इसके लिए आते नहीं हैं वो पितृ भी नाराज होते हैं और यहाँ के लोगों की रोजी-रोटी का भी नुकसान होता है। मुझे बताईये, हर हिन्दुस्तानी का पितृ तर्पण का सपना पूरा हो, ये व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? यहाँ के लोगों को रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए?
आप मुझे बताईये, विकास करने की दिशा में अगर आगे बढ़ना है। भाईयों-बहनों, लेकिन अगर जंगलराज पार्ट-2, ये अगर आ गया फिर तो सब बर्बाद हो जाएगा। कोई व्यक्ति जेल जाता है तो क्या सीख कर आता है भाई? कोई अच्छी चीज़ें सीख कर आता है क्या? बुरी-बुरी चीज़ें सीख कर के आता है ना जितनी बुराईयां हैं सब लेकर के आता है कि नहीं आता है? जंगलराज पार्ट-1 में जेल का अनुभव नहीं था, जंगलराज पार्ट-2 में अब जेल का अनुभव जुड़ गया है और इसलिए बर्बादी की संभावना ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए पिछली बार जब मैं आया था, तब मैंने कहा था आरजेडी का सीधा-सीधा मतलब है – रोजाना जंगलराज का डर और जो लोग उनके साथ जुड़ गए हैं; आपने देखा होगा कि अभी पटना में सवेरे-सवेरे भाजपा के कार्यकर्ता को गोलियों से भून दिया गया, मौत के घाट उतार दिया गया, पटना में हुआ और इनकी नाक के नीचे हुआ। भाईयों-बहनों, ये जंगलराज की शुरुआत है कि नहीं है? और ये जो जंगलराज पार्ट-2 आ रहा है, जंगलराज और जेल का अनुभव जुड़ रहा है, जंगलराज और जहर उगलने का अवसर खड़ा किया जा रहा है तो उस समय एक तरफ रोजाना जंगलराज का डर और दूसरी तरफ जनता का दमन और उत्पीड़न। जेडीयू - जनता का दमन और उत्पीड़न, जनता – जे, दमन – डी और उत्पीड़न – यू। आप बताईये, बिहार को ऐसे लोगों के हाथ में सौंपा जा सकता है, 25 साल जिन्होंने बर्बाद किया, उनको मौका दिया जा सकता है?
भाईयों-बहनों, आपको हैरानी होगी, पूरे हिन्दुस्तान में ये लालटेन वालों ने आपको अँधेरे में रखा है। बिजली आती है? बिजली मिलती है? परीक्षा का समय हो, अगर पढ़ना है तो बिजली मिलती है क्या? अँधेरे में गुजारा करना पड़ता है? मिट्टी के तेल पर गुजारा करना पड़ता है। पिछले चुनाव में यहाँ के नेता ने आपको वादा किया था कि आपको बिजली देंगे। बिजली देने का वादा किया था, बिजली नहीं मिलेगी तो वोट नहीं मांगूंगा, ऐसा कहा था? बिजली मिली? धोखा किया? फिर से वोट मांगने आए, दूसरा धोखा किया। ये बार-बार धोखा हो रहा है। आप इनके झांसे में आ जाएंगे क्या? आज हिन्दुस्तान में प्रति व्यक्ति कम से कम बिजली की खपत कहीं पर है तो दुर्भाग्यशाली मेरे बिहार के भाई-बहन हैं। उनके भाग्य को इन्होंने अंधकारमय बना दिया है। हिन्दुस्तान में औसत प्रति व्यक्ति करीब-करीब एक हजार किलोवाट बिजली की खपत है जबकि बिहार में 150 किलोवाट भी नहीं है। कहाँ हजार और कहाँ ढेढ़ सौ, छठवां हिस्सा है आपका! इतना ही नहीं, बिहार से भी छोटा राज्य सिक्किम के लोगों की छह गुना ज्यादा खपत है। बिहार से निकला हुआ झारखंड, 10 साल के अंदर-अंदर झारखंड का नागरिक बिहार से 5 गुना ज्यादा बिजली का खपत करता है। आपको अँधेरे में रखने वाला पाप किसने किया है? 25 साल की दो सरकारों ने किया है कि नहीं किया है? 25 साल के दो मुख्यमंत्रियों ने किया है कि नहीं किया है? और इसलिए जिन्होंने आपको बर्बाद किया है, उनको दोबारा भार नहीं दिया जा सकता है।
शिक्षा के क्षेत्र में आज हिन्दुस्तान में कोई भी टीवी चैनल उठा लीजिए, आपको दो-चार बिहार के तेजस्वी नौजवान उस टीवी चैनल के माध्यम से देश को संबोधित करते नजर आएंगे। ऐसे तेजस्वी लोगों की यह भूमि है लेकिन यहाँ के नौजवानों को अवसर नहीं दिया जाता है। टेक्निकल एजुकेशन में आज बिहार का क्या हाल है। अगर हमें नौजवानों को रोजगार देना है तो उनको टेक्निकल एजुकेशन देना होगा, स्किल डेवलपमेंट कराना होगा, इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षा दिलाना होगा डिग्री इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इंजीनियरिंग करानी पड़ेगी, सर्टिफिकेट कोर्स करना पड़ेगा। बिहार के अन्दर नौजवानों को शिक्षा मिलनी चाहिए। आज मुझे दुःख के साथ कहना पड़ता है, आज बिहार का हाल क्या है शिक्षा में।
17-20 साल उम्र के 80 लाख से ज्यादा नौजवान बिहार में हैं। इन 80 लाख बच्चों के मां-बाप के सपने हैं कि उनके बच्चों को डिप्लोमा करने का मौका मिले, डिग्री करने का मौका मिले, सर्टिफिकेट कोर्स करने का मौका मिले लेकिन बिहार में ये सारा होने के बावजूद भी बिहार में इंजीनियरिंग की सीटें कितनी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि बिहार में सिर्फ़ 25,000 सीट है। 80 लाख नौजवान पढ़ना चाहते हैं उसमें से 5-10 लाख तो इंजीनियरिंग में जाना चाहते होंगे कि नहीं लेकिन सिर्फ़ 25,000 सीट है और ये जिम्मेवारी बिहार सरकार की है। 25 साल हो गए और सिर्फ़ 25,000 सीट।
इतना बड़ा बिहार और दूसरी तरफ देखिये हिन्दुस्तान के और राज्यों का हाल। मैं बताना चाहता हूँ जो बिहार से बहुत छोटे हैं... हिमाचल प्रदेश, पूरे पटना की जितनी जनसंख्या है, पूरे हिमाचल की जनसंख्या उतनी ही है लेकिन हिमाचल प्रदेश में इंजीनियरिंग में पढने के लिए सीटों की संख्या है - 24,000। इतने छोटे हिमाचल में 24,000 और इतने बड़े बिहार में 25,000। क्या होगा यहाँ के नौजवानों का! उड़ीसा, हमारे बगल में है, पिछड़ा राज्य माना गया लेकिन उस उड़ीसा में इंजीनियरिंग की सीटें कितनी हैं, आप कल्पना नहीं कर सकते कि उड़ीसा जैसा बिहार से भी छोटा प्रदेश, वहां इंजीनियरिंग की सीटें हैं -  1 लाख 13 हजार से भी ज्यादा। इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेवार है? पंजाब बहुत ही छोटा राज्य है और पंजाब में सीटें हैं - 1 लाख 4 हजार। पंजाब बिहार का एक-चौथाई भी नहीं है और वहां 1 लाख सीटें हैं और बिहार में 25 हजार है। कौन जिम्मेवार है? जंगलराज जिम्मेवार है कि नहीं है? ये दोबारा जंगलराज लाना है? उत्तराखंड बहुत छोटा राज्य है, पटना की जितनी जनसंख्या है, उत्तराखंड की उससे ज्यादा नहीं है, पटना से भी कम जनसंख्या और उसके बावजूद भी उत्तराखंड में इंजीनियरिंग की सीटें हैं – 40,000 से ज्यादा। अब मुझे बताईये कि बिहार के नौजवानों के साथ अन्याय है कि नहीं? बिहार के नौजवानों का भाग्य बर्बाद किया जा रहा है कि नहीं किया जा रहा है? क्या बिहार के नौजवानों को इंजीनियरिंग में पढने का हक होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? उनको ये सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? जिन्होंने यह सुविधा नहीं दी है, उन्हें जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए? उनको भगाना चाहिये कि नहीं चाहिए?
इसलिए मैं आज यह कहने आया हूँ कि अगर बिहार के नौजवानों का भाग्य बदलना है तो शिक्षा में बदलाव लाने की जरुरत है और शिक्षा में बदलाव एनडीए की सरकार ला सकती है, बिहार का भाग्य बदल सकती है। हर वर्ष, बिहार के जिन मां-बाप के पास कुछ पैसे हैं वे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बिहार से बाहर भेजते हैं। करीब 4-5 लाख नौजवान बिहार छोड़कर के, अपने मां-बाप को छोड़कर के, यार-दोस्तों को छोड़कर के कहीं न कहीं पढने के लिए जाते हैं और हर साल एक-एक युवक के पढने के पीछे खर्चा करीब-करीब एक लाख रूपया आता है। मुझे बताईये, चार लाख लोग बिहार से बाहर जाएं, हर वर्ष एक लाख रूपया साथ-साथ चला जाए तो बिहार का चार हजार करोड़ का नुकसान होता है कि नहीं होता है? ये बिहार का चार हजार करोड़ रूपया बचना चाहिए कि नहीं चाहिए? अगर बिहार का चार हजार करोड़ रूपया बचाना है तो बिहार के नौजवान को यहाँ पढने के लिए सुविधा मिलनी चाहिए। ये बिहार सरकार भाजपा की सरकार बनाईए, एनडीए की बनाईए और हम बना कर रहेंगे। इसलिए मैं आपसे आग्रह करने आया हूँ कि हमें विकास के लिए वोट चाहिए, बिहार को जंगलराज से मुक्त कराने के लिए वोट चाहिए, धोखेबाजी से बिहार को मुक्त कराने के लिए वोट चाहिए। मैं आपको भरोसा दिलाने आया हूँ कि मैं बिहार की विकास यात्रा में कंधा से कंधा मिलाकर चलूँगा। अगर आप एक कदम चलेंगे तो मैं सवा कदम चलूँगा, मैं ये विश्वास दिलाने आया हूँ। चुनाव के समय भारी मतदान करके परिवर्तन लाकर के रहिये, बिहार का भाग्य बदल के रहिये। 
बहुत बहुत धन्यवाद!