शनिवार, 24 अक्तूबर 2015

शक्तिशाली समाज ही विजयशाली होती है : मा. क्षेत्र संघचालक डॉ. दर्शनलाल जी अरोड़ा


शक्तिशाली समाज ही विजयशाली होती है – डॉ. दर्शन लाल जी

मेरठ (विसंकें). मा. क्षेत्र संघचालक डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा ने कहा कि जिस प्रकार भगवान राम ने साधारण जनजातियों का संगठन कर दुष्ट महाबली रावण व उसकी शक्तिशाली सेना पर विजय प्राप्त की. उसी प्रकार डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य शरू किया. समाज को विस्मृति, जड़ता, दीनता से मुक्त कराने तथा अपनी शक्ति की पहचान कराने लिये 1925 में विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की. क्षेत्र संघचालक जी त्यागी छात्रावास के मैदान में विजयादशमी के उपलक्ष्य में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि पूर्व में भारत एक वैभवशाली, शक्ति सम्पन्न राष्ट्र था. सिकन्दर की विशाल सेना को भी हमारे एक छोटे राज्य की सेना ने परास्त किया. इतनी धन सम्पदा थी कि विदेशियों की गिद्ध दृष्टि लगी रहती थी. हमारे पास विश्व को ज्ञान देने के लिये नालन्दा, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे. लेकिन हम सैकड़ों वर्षों तक आक्रांताओं की दासता में रहे और संघर्ष करते रहना पड़ा. हमारी इस स्थिति का कारण था, एक राष्ट्र, एक समाज की भावना का पतन होना है. उन्होंने कहा कि असंगठित समाज, दुर्बल व पराधीन हो जाता है. जबकि शक्तिशाली समाज विजयशाली होता है. हमारे राष्ट्र की अधोगति का मुख्य कारण असंगठित हिन्दू समाज ही था. विगत 90 वर्षों के लगातार परिश्रम एवं प्रयासों से हिन्दू समाज में नव चेतना जगी है. उत्साह, विजयी भाव का संचार हुआ है. अनुकूल परिस्थितियों में कार्य की गति बढ़ रही है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रान्त संघचालक सूर्यप्रकाश जी ने की. इस अवसर पर सर्वप्रथम शस्त्र पूजन हुआ. तत्पश्चात पथ संचलन निकाला गया. पथसंचलन का स्थान-स्थान पर विजयी नारों एवं पुष्पवर्षा द्वारा भव्य स्वागत किया गया. कार्यक्रम में वरिष्ठ स्वयंसेवक, गणमान्यजन उपस्थित थे. बालकृष्ण नायक (अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद्), सोनपाल (संगठन मंत्री किसान संघ), अनिल जी (सेवा भारती), वरिष्ठ स्वयंसेवक रणजीत सिंह (95वर्ष) शामिल थे.

मानव कल्याण ही अंतिम उद्देश्य : माननीय सरकार्यवाह श्री सुरेश भय्या जी जोशी



मानव कल्याण ही हमारा अंतिम उद्देश्य – माननीय श्री  सुरेश भय्या जी जोशी
ठाणे (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह माननीय श्री सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि नैतिक, धार्मिक, तथा मानव कल्याण के लिए भारत को विश्व का नेतृत्व करना आवश्यक है. जिसके लिए समाज का नेतृत्व करने वाले सामर्थ्यवान व्यक्तियों का निर्माण करने, तथा जागृत, निस्वार्थ, संगठित समाज खड़ा करने के लिए संघ निरंतर प्रयास कर रहा है. विश्व गुरू के पद पर विराजमान होने के लिए भारत को अभी बहुत मार्ग तय करना है. जिसके लिए संघ का प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं. हमारे भारत देश को परम वैभव तक ले जाकर मानव कल्याण करना, यही हमारा अंतिम उद्देश्य है. सरकार्यवाह ठाणे में विजयादशमी के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे. मंच पर उनके साथ जैनाचार्य सुरेश्वर मुनि, विभाग संघचालक मधुकर बापट, जिला संघचालक विवेकानंद जी, ह.भ.प. सद्गिर महाराज, इस्कॉन संस्था, चिन्मय मिशन तथा ज्यू समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

उन्होंने कहा कि संघ स्थापना की 90वीं सालगिरह यह कोई छोटा या बड़ी कालावधि नहीं है. अभी भी मंजिल तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना है. लेकिन अब संघ कार्य योग्य पथ पर है, ऐसे संकेत मिलने शुरू हुए हैं. कई देशों में संस्कृत श्लोक उद्घृत कर कार्यक्रमों का शुभारंभ करना, विश्व के 180 देशों का योग दिवस मनाना, भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को विश्व भर में मान्यता मिलना, यह एक अनूठी पहल है. वर्चस्ववादी मानसिकता के राष्ट्रों से अपने बचाव के लिए विश्व के कई देश भारत की ओर बड़ी आशा से देख रहे हैं. प्रकृति के साथ अनुकूल व्यवहार यह हमारी सभ्यता है, भारत देने वालों का देश है, न कि लेने वालों का. हमने अपने देश की सीमाओं के विस्तार के लिए कभी भी किसी पर आक्रमण नहीं किया. और इसीलिए अपनी और दूसरो की स्वतंत्रता का सम्मान भी हिन्दुत्व ही कर सकता है. हमारी हिंदू परंपरा और संस्कृति हजारों साल में विकसित हुई है. इस परिवर्तनकारी प्रक्रिया से दूर हमारी संस्कृति में कुछ दोष भी आए हैं, इस प्रक्रिया को कुछ अवांछनीय अभ्यास ने कुछ समय के लिए बाधित किया था. उन्होंने कहा कि सब जाति भेद मिटें, एक प्रांत खड़ा हो. धार्मिक समुदाय के बीच अंतर नहीं होना चाहिए. इसके लिए समाज सुधारकों को पहल करनी चाहिए. समाज से दोषों को दूर करने के लिए पहल करनी चाहिए. डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर,बालासाहेब देवरस, पं. दीनदयाल उपाध्याय, एकनाथ रानाडे,नानाजी देशमुख और अन्य हस्तियों के वैचारिक मार्गदर्शन पर अपना देश खड़ा है.

जैनाचार्य सुरेश्वर मुनि जी ने कहा कि हमारे देश में बहादुरी और वीरता की कमी है. लेकिन समाज बंटा होने के कारण विदेशी आक्रामक हमारी स्वतंत्रता छीन सके. आज भी भाषा और प्रांत भेद की आड़ में समाज को विघटित करने का प्रयास जारी है. लेकिन समग्र हिन्दू समाज के संगठन के लिए तथा भारत मां की सेवा के लिए संघ कार्य कर रहा है और इसीलिए यह विशेष कार्य है.