शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों को जैनरिक से परहेज क्यों ?



जैनरिक से परहेज, ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं डॉक्टर
Bhaskar News NetworkJun 10, 2015
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जिला अस्पताल में दवाओं के नाम पर मरीजों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की पर्ची पर दवा का सॉल्ट लिखा होना चाहिए। दवा का ब्रांड नेम नहीं लिखा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज लगातार गरीब मरीजों को बेहतर सुविधा दिलाने का दावा करते हैं। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीजों को महंगे ब्रांड की दवा लिखने की रस्म शुरू कर दी है।

पैसों के अभाव में लोग सुबह सात बजे से ही सामान्य अस्पताल में लाइन में लग जाते हैं। इसके बाद आठ बजे रजिस्ट्रेशन कराने के बाद डॉक्टर को दिखाते हैं। लेकिन डॉक्टर जैनरिक दवाओं के स्थान पर ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।

दैनिक भास्कर ने सुबह 8 बजे से 11 बजे तक करीब 50 मरीजों के पर्चे चेक किए। इनपर डॉक्टरों ने मरीजों को दवा का सॉल्ट लिखकर दवा का ब्रांड नाम लिखा था। इसमें भी करीब 90 प्रतिशत दवाएं मरीज को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।

नहींहै सस्ता इलाज : रामनगर निवासी प्रभा जैन ने डॉ. जागीर नैन को दिखाया। प्रभा, निजी अस्पताल में इलाज करा चुकी हैं। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने सामान्य अस्पताल में इलाज कराना उचित समझा। लेकिन यहां भी डॉक्टर ने 250 रुपए से लेकर 300 रुपए तक के ब्रान्डेड दवाओं की लिस्ट थमा दी। प्रभा ने बताया कि अगले महीने उसकी शादी है, जिसके चलते इलाज जरूरी है, लेकिन दवा महंगी होने के कारण इलाज नहीं हो पा रहा है।

नहींलिखी जैनरिक दवा : झारखंडनिवासी लल्लन चौधरी पैसों की तंगी के चलते जिला अस्पताल में इलाज के लिए आए। डॉक्टर पंकज अग्रवाल ने ब्रांडेड दवा का लंबा पर्चा लिख दिया। इसमें डी जैन नाम की दवा शामिल है, जबकि उसका जैनरिक वर्जन भी बाजार में है।

बाहरसे लेनी पड़ी दवा : नाहरपुरनिवासी रुक्साना ठाकुर एक सप्ताह से जिला अस्पताल में इलाज करा रही हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में कुछ दवाएं तो मिल गई थीं, लेकिन बाकी बाहर से लेनी पड़ीं। डॉक्टर ने उसे अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। लेकिन यहां डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करने से मना कर रहे हैं, जबकि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है।

ग्राहकों के इंतजार में

जैनरिक स्टोर

सीएमओपुष्पा बिश्नोई का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहल कर शहर में 89 जैनरिक मेडिकल स्टोर खोले गए हैं। जहां पर सस्ती दवाएं उपलब्ध रहेंगी। दूसरी तरफ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का दावा है कि इस समय केवल 51 जैनरिक मेडिकल स्टोर खोले गए हैं। इन स्टोर मालिकों का कहना है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवा लिखते ही नहीं हैं, जिससे लोगों का धंधा चौपट हो गया है। कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का आरोप है कि ब्रांडेड दवा कंपनियों की एमआर द्वारा डॉक्टरों से सांठ-गांठ रहती है जिसके चलते डॉक्टर जैनरिक दवा नहीं लिखते हैं।

^अगर कोई मेडिकल स्टोर मालिक कस्टमर को जैनरिक दवा देने से मना करता है, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं, जिसके चलते मरीज जैनरिक दवा नहीं खरीदते। अमनदीपचौहान, ड्रग कंट्रोलर, गुड़गांव

^जैनरिकदवाओं के प्रोत्साहन के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर मरीजों को जैनेरिक दवा नहीं लिखते हैं। ही इसके बारे में मरीजों को बताया जाता है। शरदमेहरोत्रा, अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन गुड़गांव

^डाक्टरोंको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जो दवा स्टोर में नहीं है उस दवा को ब्रांड के नाम से ही बल्कि सॉल्ट के नाम से मरीज के पर्ची पर लिखे जाएं। ताकि मरीज अपनी मर्जी से जैनरिक या ब्रांडेड दवा ले सकें। इसके लिए डॉक्टरों को एक बार फिर लिखित निर्देश जारी किया जाएगा। डॉ.पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन, गुड़गांव

^अगर कोई मेडिकल स्टोर मालिक कस्टमर को जैनरिक दवा देने से मना करता है, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं, जिसके चलते मरीज जैनरिक दवा नहीं खरीदते। अमनदीपचौहान, ड्रग कंट्रोलर, गुड़गांव

^जैनरिकदवाओं के प्रोत्साहन के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर मरीजों को जैनेरिक दवा नहीं लिखते हैं। ही इसके बारे में मरीजों को बताया जाता है। शरदमेहरोत्रा, अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन गुड़गांव

^डाक्टरोंको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जो दवा स्टोर में नहीं है उस दवा को ब्रांड के नाम से ही बल्कि सॉल्ट के नाम से मरीज के पर्ची पर लिखे जाएं। ताकि मरीज अपनी मर्जी से जैनरिक या ब्रांडेड दवा ले सकें। इसके लिए डॉक्टरों को एक बार फिर लिखित निर्देश जारी किया जाएगा। डॉ.पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन, गुड़गांव

^अगर कोई मेडिकल स्टोर मालिक कस्टमर को जैनरिक दवा देने से मना करता है, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं, जिसके चलते मरीज जैनरिक दवा नहीं खरीदते। अमनदीपचौहान, ड्रग कंट्रोलर, गुड़गांव

^जैनरिकदवाओं के प्रोत्साहन के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर मरीजों को जैनेरिक दवा नहीं लिखते हैं। ही इसके बारे में मरीजों को बताया जाता है। शरदमेहरोत्रा, अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन गुड़गांव

^डाक्टरोंको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जो दवा स्टोर में नहीं है उस दवा को ब्रांड के नाम से ही बल्कि सॉल्ट के नाम से मरीज के पर्ची पर लिखे जाएं। ताकि मरीज अपनी मर्जी से जैनरिक या ब्रांडेड दवा ले सकें। इसके लिए डॉक्टरों को एक बार फिर लिखित निर्देश जारी किया जाएगा। डॉ.पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन, गुड़गांव

गुड़गांव. सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयों की एक पर्ची।