शनिवार, 14 नवंबर 2015

ब्रिटिश संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन



ब्रिटिश संसद में बोले PM मोदी- भारत और ब्रिटेन एक साथ चलें तो कमाल हो जाएगा
aajtak.in [Edited By: स्वपनल सोनल] | लंदन, 12 नवम्बर 2015

लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ साझा बयान के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने असहिष्णुता के सवाल पर चुप्पी तोड़ी है. पीएम ने कहा कि भारत गांधी और बुद्ध की धरती है और भारत ऐसी किसी भी बात को स्वीकार नहीं करता है. उन्होंने कहा, 'देश के किसी भी कोने में हुई हर घटना हमारे लिए गंभीर है. कानून कठोरता से काम करेगा. हर नागरिक के विचार की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है.'
साझा बयान के बाद एक सवाल का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'अगर देश के किसी भी कोने में ऐसी कोई घटना घटती है तो हमारे लिए हर घटना गंभीर है. देश के हर नागरिक की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है. हर किसी के विचारों की रक्षा के लिए हम वचनबद्ध हैं. ऐसी किसी भी घटना पर कानूनी कार्रवाई होगी.'

प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन दिन की ब्रिटेन यात्रा पर गुरुवार को लंदन पहुंचे. इससे पहले किंग चार्ल्स स्ट्रीट पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ पीएम का आध‍िकारिक स्वागत किया गया. इस दौरान ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन भी मोदी के साथ थे. दोनों नेताओं के बीच 10 डाउनिंग स्ट्रीट में द्वि‍पक्षीय बातचीत हुई, जिसके बाद दोनों ने साझा बयान जारी किया.

बातचीत शुरू करने से पहले कैमरन ने गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री मोदी का हाथ मिलाकर स्वागत किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कैमरन से कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि आपके नेतृत्व में भारत और ब्रिटेन के संबंध और मजबूत होंगे.'

साझा बयान के दौरान पीएम मोदी ने कहा-
-आपने भारत और ब्रिटेन के संबंध को सशक्त बनाने में अहम योगदान दिया है.
-आपके निमंत्रण, आदर सत्कार और गर्मजोशी से स्वागत के लिए मैं आभारी हूं.
-ऐतिहासिक तौर पर हम एक-दूसरे से परिचित हैं. हमारे मूल्य एक समान हैं.
-हर क्षेत्र में हमारी साझेदारी वायब्रेंट है और हमारे संबंधों में निरंतर विस्तार हो रहा है.
-शि‍क्षा और विज्ञान, तकनीक, क्लीन एनर्जी, कला-संस्कृति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम साझेदारी कर रहे हैं.
-आज हमने निर्णय लिया है कि हम साझा मूल्यों के आधार पर विश्व के अन्य क्षेत्रों में भी विकास के लिए साझेदारी करेंगे.
-सिविल न्यूक्लि‍यर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया है.
-यूके के साथ रक्षा और सुरक्षा को हम मूल्यवान मानते हैं. हम निश्चय ही नियमित तौर पर द्वि‍पक्षीय बातचीत करेंगे.

अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रितानी संसद को भी संबोधित किया. भारत यूके को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद की 1500 करोड़ की संपत्ति पर डोजियर भी सौंपेगा. पीएम के लंदन पहुंचते ही जेम्स कोर्ट होटल के बाहर फैंस ने 'मोदी मोदी' के नारों से उनका स्वागत किया.

ब्रिटिश संसद में मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश संसद की रॉयल गैलरी से भाषण दिया. उन्होंने संबोधन शुरू करते हुए कहा कि मुझे मालूम है कि यह संसद का सत्र नहीं है और उनकी बात सुनकर यहां मौजूद सब हंस पड़े. उन्होंने कहा कि उनके लिए ब्रिटेन की संसद में बोलना बहुत सम्मान की बात है. प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत और ब्रिटेन दोनों कई क्षेत्रों में मिलकर काम काम रहे हैं. दोनों देशों की सेनाएं साझा युद्धाभ्यास कर रही हैं. भारत संभावनाओं से भरा देश है. ब्रिटेन भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक देश है.'

ब्रिटिश करोबारियों से की मुलाकात
प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश कारोबारियों से भी मुलाकात की. उन्होंने कारोबारियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा, 'भारत को व्यापार करने के लिहाज से आसान और सरल स्थान बनाने के लिए सरकार ने बहुत आक्रामकता के साथ काम किया है. हालिया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के बाद भारत विदेशी निवेश के लिए सबसे अधिक खुले देशों में शामिल हो गया है.'

पीमए ने आगे कहा, 'हम लोगों ने स्पष्ट तौर पर यह बता दिया है कि हम पीछे की तारीख से कराधान का सहारा नहीं लेंगे और कई प्रकार से इस रुख को साबित किया है.' पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि 2016 में जीएसटी का काम पूरा हो जाएगा.

मोदी के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह
लंदन में होटल के बाहर फैंस के उत्साह को देखते हुए प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से पैदल चलकर सैकड़ों समर्थकों से मुलाकात की. इस यात्रा से यूके और भारत के बीच रक्षा क्षेत्र और व्यापार से जुड़ी कई समझौतों की उम्मीद है. यह करीब 9 साल बाद ब्रिटेन में किसी भारतीय पीएम का दौरा है. हीथ्रो एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद जब पीएम होटल पहुंचे तो वहां उनके प्रशंसकों ने मोदी सरकार की योजनाओं के नाम से भी नारे लगाए. वहां भारतीयों का उत्साह इस कदर रहा कि पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए भीड़ को काबू करना चुनौती बन गई.

भारतीयों से मुलाकात
अपनी यात्रा के पहले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने लंदन में रह रहे पंजाबी समुदाय के लोगों से मुलाकात की. वह वहां बिजनेस फोरम मीट में भी शामिल होंगे. इसके अलावा प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ से भी मुलाकात शामिल है, जो शुक्रवार को होगी. इसके बाद वेम्बले स्टेडियम में भारतीय समुदाय के बीच मोदी के ग्रैंड इवेंट की तैयारियां चल रही हैं. वहां 60 हजार से ज्यादा लोगों को प्रधानमंत्री संबोधि‍त करेंगे.

दाऊद पर कसेगा शिकंजा
मोदी के यूके दौरे के साथ ही अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर शि‍कंजा और कसेगा. सूत्रों के मुताबिक भारत इस यात्रा के दौरान यूके को दाऊद की संपत्तियों से जुड़ा डोजियर सौंपेगा. 'आज तक' के पास यूके को सौंपे जाने वाले डोजियर की एक्सक्लूसिव जानकारी है. एनएसए अजीत डोभाल ब्रिटिश अधिकारियों को यह डोजियर सौंपेंगे. सूत्रों के मुताबिक यूके में दाऊद की करीब डेढ़ हजार करोड़ की संपत्ति है. भारत ब्रिटिश सरकार से दाऊद की संपत्तियों को सील करने की मांग करेगा.

दाऊद के लिए दूसरा बड़ा झटका
यूके में डोजियर सौंपने के साथ ही दाऊद को दूसरा बड़ा झटका लग सकता है. इससे पहले दुबई में दाऊद की संपत्तियों पर भी भारत ने डोजियर सौंपी थी. दुबई में डॉन की संपत्ति‍ को सीज करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है.

खालिस्तान पर भी यूके को डोजियर
दाऊद इब्राहिम के साथ ही भारत खालिस्तान पर भी यूके को डोजियर सौंपेगा. इसमें आईएसआई पर खालिस्तान समर्थित आतंक को भड़काने का आरोप है. डोजियर के मुताबिक बीकेआई, आईएसवाईएफ, केसीएफ और केजेडएफ जैसी संस्थाओं को आतंक भड़काने के लिए आईएसआई फंड देता है. एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, भारत के डोजियर में आईएसआई के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं. इसमें यूके के कुछ टीवी चैनलों और रेडियो पर भी आतंक भड़काने का आरोप है.

कांग्रेस ने छेड़ा अलग राग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के साथ ही कांग्रेस ने देश में नया राग छेड़ा है. कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान पूर्व आईपीएल चीफ ललित मोदी के प्रत्यर्पण की बात कर सकते हैं. जाहिर तौर पर विपक्ष के लिए आगामी संसद सत्र में भी यह मुद्दा बनने वाला है. कांग्रेस ने पीएम मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को यात्रा से लौटने के बाद देश को जानकारी देनी चाहिए कि उनकी यात्रा से देश को क्या हासिल हुआ है.
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प्रधानमंत्री मोदी जब लंदन के वेंबले फुटबॉल स्टेडियम पहुंचे तो ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन और उनकी पत्नी ने पीएम मोदी का स्वागत किया.
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वेंबले स्टेडियम पहुंचने पर ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन और उनकी पत्नी ने पीएम मोदी का स्वागत किया. मोदी के स्टेज पर पहुंचने के बाद राष्ट्रगान हुआ.
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पीएम मोदी के स्टेडियम पहुंचने पर वंदे मातरम और कथक की प्रस्तुति दी गई. ये बच्चे राष्ट्रगान में शामिल रहे.
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लंदन के वेंबले फुटबॉल स्टेडियम में पीएम मोदी को सुनने के लिए 60 हजार से ज्यादा ब्रिटिश भारतीय जुटे.
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पीएम मोदी और कैमरन ने स्टेज पर पहुंचे बच्चों से बात की. कैमरन ने एक बच्चे से उसका पसंदीदा विषय पूछा तो उसने ड्रामा बताया.
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मोदी ने कहा भारतीय जहां भी गया, वहां जीने का संस्कार लेकर गया. पूरी दुनिया आज भारत के प्रति बड़ी उम्मीदों से देख रही है. भारत के प्रति दुनिया का नजरिया आज बदला है.
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लंदन के वेंबले फुटबॉल स्टेडियम में मोदी को सुनने के लिए लोगों में भारी उत्साह दिखाई दिया.
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मोदी ने कहा विविधता हमारी आन-बान-शान, हमारी शक्ति है. दो महान देशों के रिश्तों का आज खास दिन है. आज का दिन ऐतिहासिक है.
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वेंबले स्टेडियम में मोदी का मेगा शो शुरू होने से पहले बारिश हुई लेकिन लोगों में मौसम की खराबी के बावजूद उत्साह कम नहीं हुआ.
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पाकिस्तानः ' एक भी हिंदू न बचे '

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट 2011 की है, जिसे हाल ही में जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक "पाकिस्तान में 1947 में कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिंदू थे। अभी इनकी जनसंख्या कुल आबादी का मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई है।" वहां गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। 24 मार्च, 2005 को पाकिस्तान में नए पासपोर्ट में धर्म की पहचान को अनिवार्य कर दिया गया। स्कूलों में इस्लाम की शिक्षा दी जाती है। गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता है। जनजातीय बहुल इलाकों में अत्याचार ज्यादा है। इन क्षेत्रों में इस्लामिक कानून लागू करने का भारी दबाव है। हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म, अपहरण की घटनाएं आम हैं। उन्हें इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन मतांतरण का दबाव डाला जाता है। गरीब हिंदू तबका बंधुआ मजदूर की तरह जीने को मजबूर है।

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पाकिस्तानः 'वो दिन दूर नहीं जब एक भी हिंदू न बचे'

  • 5 अगस्त 2015
हिंदू मंदिर
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को अक्सर यह शिकायत रही है कि उनके धर्म स्थलों को पाकिस्तान सरकार की ओर से सुरक्षा नहीं है.
ऐसी कई शिकायतें रिकॉर्ड होने और धार्मिक स्थलों को नुक़सान पहुंचाए जाने की कई घटनाओं के सामने आने के बावजूद अब तक कोई सुनवाई नहीं है.
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले पचास वर्षों में पाकिस्तान में बसे नब्बे प्रतिशत हिंदू देश छोड़ चुके हैं और अब उनके पूजा स्थल और प्राचीन मंदिर भी तेज़ी से ग़ायब हो रहे हैं.
ऐसा ही एक मामला, पिछले बीस साल से चल रहा है और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद इस पर कोई अमल नहीं हुआ.
बात है, पाकिस्तान के प्रांत ख़ैबर पख्तूनख़्वा ज़िले में कर्क के एक छोटे से गांव टेरी में स्थित एक समाधि की.

पढ़ें विस्तार से

पेशावर में हिंदू
यहां किसी ज़माने में, कृष्ण द्वार नामक एक मंदिर भी मौजूद था. मगर अब इसके नामो निशान कहीं नहीं हैं.
समाधि मौजूद है, लेकिन इसके चारों ओर एक मकान बन चुका है और यहां तक कि वहां तक पहुचंने के सारे रास्ते बंद हैं.
मकान में रहने वाले मुफ़्ती इफ़्तिख़ारुद्दीन का दावा है कि 1961 में पाकिस्तान सरकार ने एक योजना (1975) लागू की थी, जिससे तत्कालीन पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में स्थानीय प्रमुख लोगों को ऐसी ग्रामीण संपत्ति मुफ़्त में दी गईं, जिनकी क़ीमत दस हज़ार रुपए से कम थी.
इसी योजना के तहत उन्हें भी जगह का मालिकाना अधिकार मिल गया और 1998 में उन्होंने इस मकान का निर्माण किया.
हिंदुओं के नेता परम हंस जी महाराज का 1929 में निधन हो गया था.
उन्हें श्रद्धांजलि देने दुनिया भर से कई हिंदू पाकिस्तान के क्षेत्र टेरी में स्थित उनकी इस समाधि पर आया करते थे.
1998 में यह मामला तब सामने आया जब कुछ हिंदू यहां पहुंचे तो पता चला कि समाधि को तोड़ने की कोशिश की गई.

समाधि कहां ले जाएं?

पाकिस्तानी दलित
इसके बाद बात पाकिस्तान हिन्दू परिषद तक पहुंची और परिषद ने इस मामले का बीड़ा उठाया.
परिषद के अध्यक्ष और नेशनल असेंबली के सदस्य डॉक्टर रमेश वांकोआनी ने बताया कि पिछले बीस साल के दौरान वे सभी राजनीतिक लोगों से प्रांतीय और संघीय स्तर पर बात कर चुके हैं मगर किसी ने नहीं सुना, अंततः उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में सभी परिस्थितियों को देखते हुए, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा की प्रांतीय सरकार को आदेश दिया कि वह इस समाधि में होने वाले तोड़फोड़ को रोके और हिंदुओं को उनकी जगह वापस दिलाए. मगर आज तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ.
डॉक्टर रमेश कहते हैं, “तीर्थ स्थल तो ऐतिहासिक होते हैं, यह कोई मंदिर तो है नहीं कि क़ानून-व्यवस्था की स्थिति ख़राब होने के नाम पर मैं इसे कहीं और स्थानांतरित कर दूँ, यह तो समाधि है. एक ऐसी हस्ती का मंदिर जिसके करोड़ों श्रद्धालु हैं.”
मगर टेरी में यही अकेली समाधि या मंदिर नहीं है, जो बंद है.
पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के मुताबिक़, इस समय देश भर में सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ऐसे 1,400 से अधिक पवित्र स्थान हैं जिन तक उनकी पहुंच नहीं है.
या फिर उन्हें समाप्त कर वहां दुकानें, खाद्य गोदाम, पशु बाड़ों में बदला जा रहा है.

मंदिर तो है, पर रास्ता नहीं

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर
ऐसा ही एक मंदिर, रावलपिंडी के एक व्यस्त बाज़ार में मौजूद है जिसे यमुना देवी मंदिर कहा जाता है और यह 1929 में बनाया गया था.
चारों ओर छोटी दुकानों में धंसा यह मंदिर केवल अपने एक बचे हुए मीनार के कारण अब भी सांसें ले रहा है.
उसके अंदर प्रवेश से पहले छतों से बातें करती ऊँची क़तारों में चावल, दाल और चीनी से भरी बोरियों से होकर गुज़रना पड़ता है.
वक़्फ़ विभाग के अध्यक्ष सिद्दीकुलफ़ारुख़ का कहना है कि, “जो योजना 1975 की है, मैं उसके बारे में जानता हूँ और इससे पहले क्या था, उसकी जानकारी मुझे नहीं है. संसद के बने इस योजना के तहत, इबादतगाह कोई भी हो, वह किराए पर नहीं दिया जा सकता, लेकिन इससे सटी भूमि को किराए पर दिया जा सकता है.”
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की अनदेखी और ग़लत नीतियों के कारण देश में सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से हैं, जिन्हें पिछड़े होने के कारण हमेशा नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है.

सरकारी उदासीनता

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू मंदिर.
Image captionपाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू मंदिर.
उपमहाद्वीप के बंटवारे के समय, पश्चिमी पाकिस्तान या मौजूदा पाकिस्तान में, 15 प्रतिशत हिंदू रहते थे.
1998 में देश में की गई अंतिम जनगणना के अनुसार, उनकी संख्या मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई और देश छोड़ने की एक बड़ी वजह असुरक्षा थी.
शोधकर्ता रीमा अब्बासी के अनुसार, “पिछले कुछ वर्षों में लाहौर जैसी जगह पर एक हज़ार से अधिक मंदिर ख़त्म कर दिए गए हैं. पंजाब में ऐसे लोगों को भी देखा है जो नाम बदल कर रहने को मजबूर हैं.”
वो कहती हैं, “इन सभी बातों की बड़ी वजह क़ब्ज़ा माफ़िया तो हैं, मगर साथ ही बेघरों के लिए सुरक्षा की कमी भी है, जो आतंकवाद के कारण अपना घर-बार छोड़कर पाकिस्तान के अन्य ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो रहे हैं, जहां उनके धर्म स्थल क़रीब हैं.”
पाकिस्तान हिंदू धर्मस्थल
Image captionपेशावर में स्थित एक मंदिर.
उनके मुताबिक़, “मगर उन्हें वहाँ से डरा-धमका कर निकाल दिया जाता है ताकि वहां पहले से रह रहे लोगों को कोई कठिनाई न हो.”
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान से पलायन कर गई हिंदुओं की नब्बे प्रतिशत आबादी का कारण बढ़ती असहिष्णुता और सरकार की उदासीनता है.
पाकिस्तान के वक़्फ़ विभाग में पुजारी की नौकरी करने वाले जयराम के अनुसार, “1971 के बाद देश में हिंदू संस्कृति ही समाप्त हो गई. कहीं भी अब शास्त्रों को नहीं पढ़ाया जाता, संस्कृत नहीं पढ़ाई जाती, यहाँ तक कि सिंध सरकार से एक बिल पास करवाने की कोशिश हुई कि सिंध में पाठ्यक्रम में संस्कृत को शामिल किया जाए, हिंदू बच्चों के लिए एक हिंदी शिक्षक दिया जाए, मगर वह विधेयक पारित नहीं हुआ. तो यदि इस प्रकार का क़ानून नहीं बन सकता तो वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान में एक भी हिंदू नहीं रहेगा.”

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अल्पसंख्यक हिंदुओं की त्रासदी

सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम को जीवन का आधार मानने वाले हिंदुओं की स्थिति उन देशों में काफी बदतर है जहां वे अल्पसंख्यक हैं। भारत से बाहर रह रहे हिंदुओं की आबादी लगभग 20 करोड़ है।सबसे ज्यादा खराब स्थिति दक्षिण एशिया के देशों में रह रहे हिंदुओं की है। दक्षिण एशियाई देशों- बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ-साथ फिजी, मलेशिया, त्रिनिदाद-टौबेगो में हाल के वर्षों में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार के मामले बढ़े हैं। इनमें जबरन मतांतरण, यौन उत्पीड़न, धार्मिक स्थलों पर आक्रमण, सामाजिक भेदभाव, संपत्ति हड़पना आदि शामिल है। कुछ देशों में राजनीतिक स्तर पर भी हिंदुओं के साथ भेदभाव की शिकायतें सामने आई है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट 2011 की है, जिसे हाल ही में जारी किया गया है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक "पाकिस्तान में 1947 में कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिंदू थे। अभी इनकी जनसंख्या कुल आबादी का मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई है।" वहां गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। 24 मार्च, 2005 को पाकिस्तान में नए पासपोर्ट में धर्म की पहचान को अनिवार्य कर दिया गया। स्कूलों में इस्लाम की शिक्षा दी जाती है। गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता है। जनजातीय बहुल इलाकों में अत्याचार ज्यादा है। इन क्षेत्रों में इस्लामिक कानून लागू करने का भारी दबाव है। हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म, अपहरण की घटनाएं आम हैं। उन्हें इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन मतांतरण का दबाव डाला जाता है। गरीब हिंदू तबका बंधुआ मजदूर की तरह जीने को मजबूर है। 
  • इसी तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर अत्याचार के मामले तेजी से बढ़े हैं। बांग्लादेश ने "वेस्टेड प्रापर्टीज रिटर्न (एमेंडमेंट) बिल 2011"को लागू किया है, जिसमें जब्त की गई या मुसलमानों द्वारा कब्जा की गई हिंदुओं की जमीन को वापस लेने के लिए क्लेम करने का अधिकार नहीं है। इस बिल के पारित होने के बाद हिंदुओं की जमीन कब्जा करने की प्रवृति बढ़ी है और इसे सरकारी संरक्षण भी मिल रहा है। इसका विरोध करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर भी जुल्म ढाए जाते हैं। इसके अलावा हिंदू इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर भी हैं। उनके साथ मारपीट, दुष्कर्म, अपहरण, जबरन मतांतरण, मंदिरों में तोडफोड़ और शारीरिक उत्पीड़न आम बात है। अगर यह जारी रहा तो अगले 25 वर्षों में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी ही समाप्त हो जाएगी। 
  • बहु-धार्मिक, बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी देश कहे जाने वाले भूटान में भी हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार हो रहा है। 1990 के दशक में दक्षिण और पूर्वी इलाके से एक लाख हिंदू अल्पसंख्यकों और नियंगमापा बौद्धों को बेदखल कर दिया गया। 
  • ईसाई बहुल देश फिजी में हिंदुओं की आबादी 34 प्रतिशत है। स्थानीय लोग यहां रहने वाले हिंदुओं को घृणा की दृष्टि से देखते हैं। 2008 में यहां कई हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया। 2009 में ये हमले बंद हुए। फिजी के मेथोडिस्ट चर्च ने लगातार इसे इसाई देश घोषित करने की मांग की, लेकिन बैमानिरामा के प्रधानमंत्रित्व में गठित अंतरिम सरकार ने इसे खारिज कर दिया और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के संरक्षण की बात कही।
  • मलेशिया घोषित इस्लामी देश है, इसलिए वहां की हिंदू आबादी को अकसर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थानों को अक्सर निशाना बनाया जाता है। सरकार मस्जिदों को सरकारी जमीन और मदद मुहैया कराती है, लेकिन हिंदू धार्मिक स्थानों के साथ इस नीति को अमल में नहीं लाती। हिंदू कार्यकर्ताओं पर तरह-तरह के जुल्म किए जाते हैं और उन्हें कानूनी मामलों में जबरन फंसाया जाता है। उन्हें शरीयत अदालतों में पेश किया जाता है। 
  • सिंहली बहुल श्रीलंका में भी हिंदुओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है। पिछले कई दशकों से हिंदुओं और तमिलों पर हमले हो रहे हैं। हिंसा के कारण उन्हें लगातार पलायन का दंश झेलना पड़ रहा है। हिंदू संस्थानों को सरकारी संरक्षण नहीं मिलता है।
  • त्रिनिदाद-टोबैगो में भारतीय मूल की 'कमला परसाद बिसेसर' के सत्ता संभालने के बाद आशा बंधी है कि हिंदुओं के साथ साठ सालों से हो रहा अत्याचार समाप्त होगा। इंडो-त्रिनिदादियंस समूह सरकारी नौकरियों और अन्य सरकारी सहायता से वंचित है। हिंदू संस्थाओं के साथ और हिंदू त्यौहारों के दौरान हिंसा होती है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार का भी जिक्र है। पाकिस्तान ने कश्मीर के 35 फीसदी भू-भाग पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है। 1980 के दशक से यहां पाकिस्तान समर्थित आतंकी सक्रिय हैं। कश्मीर घाटी से अधिकांश हिंदू आबादी का पलायन हो चुका है। तीन लाख से ज्यादा कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं। कश्मीरी पंडित रिफ्यूजी कैंप में बदतर स्थिति में रहने को मजबूर हैं। यह चिंता की बात है कि दक्षिण एशिया में रह रहे हिंदुओं पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन चंद मानवाधिकार संगठनों की बात छोड़ दें तो वहां रह रहे हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। जिस तरह से श्रीलंका में तमिलों के मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर अमेरिका, फ्रांस और नार्वे ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में प्रस्ताव रखा और तमिल राजनीतिक दलों के दबाव में ही सही भारत को प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालना पड़ा उसी तरह की पहल भारत को भी दक्षेस के मंच पर तो करनी ही चाहिए।

कमलेश रघुवंशी
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)   

कांग्रेस का गद्दार चेहरा फिर उजागर - अरविन्द सिसोदिया

कांग्रेस का गद्दार चेहरा फिर उजागर 
कांग्रेस पार्टी जब भी सत्ता से बहज आती हे , सामान्य शिष्टाचार भी भूल जाती है । अपने देश के आंतरिक मामले दूसरे के घर में  जाकर नही उठाये जाते !! मगर कांग्रेस नेता सलमान खुरदीश ने एक गद्दार की तरह पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले  में क्लीनचिट दी और चुनी हुई देश की सरकार की आलोचना की !! शेम शेम !!! कांग्रेस को देश से गद्दारी के लिए क्षमा मांगनी चाहिए !! यूं तो सब जानते हैं की कांग्रेस ने यह सोच समझी चाल के अंतरगर्त किया है ! मुस्लिम वोटों को ठगने के लिए !! 
इससे पहले जब अटलजी की सरकार नें परमाणु परिक्षण किता था तब सोनिया गांधी जी ने विदेशों के घूम घूम कर अटलजी सरकार की निंदा की थी !!
- अरविन्द सिसोदिया , जिला महामंत्री भाजपा कोटा राजस्थान 

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इस्लामाबाद में सलमान खुर्शीद ने की बीजेपी की आलोचना, पाक  मीडिया में सुर्खियों में आए
dainikbhaskar.comNov 13, 2015

इस्लामाबाद. कांग्रेस के सीनियर लीडर और भारत के पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद इस्लामाबाद में अपने बयानों को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियों में आ गए। खुर्शीद ने भारत-पाक रिश्तों पर बीजेपी के रवैये को गलत ठहराया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के अमन के पैगाम का बीजेपी की अगुआई वाली सरकार ने सही जवाब नहीं दिया।" वहीं, उन्होंने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान आर्मी की तारीफ की।
कहां दिए खुर्शीद ने ये बयान?
खुर्शीद गुरुवार शाम इस्लामाबाद के जिन्ना इंस्टीट्यूट में स्पीच दे रहे थे। जिन्ना इंस्टीट्यूट हर साल अलग-अलग टॉपिक पर सेमिनार कराता है। इस बार बतौर स्पीकर खुर्शीद को न्योता दिया गया था। खुर्शीद के स्पीच के वक्त वहां कई देशों के एंबेसडर मौजूद थे।
पाकिस्तानी मीडिया में कैसे छा गए खुर्शीद?

- पाकिस्तानी न्यूज साइट द डॉन ने लिखा- अमन के लिए पाकिस्तान की कोशिशों को नजरअंदाज करने के लिए भारत के ही पूर्व मंत्री ने बीजेपी की आलोचना है।
- पाक ट्रिब्यून ने खुर्शीद के हवाले से लिखा कि मोदी अब भी सीख ही रहे हैं कि अच्छा नेता कैसे बना जाए।
- डेली टाइम्स और पाकिस्तान टुडे ने लिखा कि सलमान खुर्शीद की मानें तो भारत सरकार को कोई अंदाजा ही नहीं है कि उसे पाकिस्तान को लेकर क्या पॉलिसी अपनानी है।
खुर्शीद ने कहा क्या?
> खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ की यह दूर की सोच थी कि वे मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान से दिल्ली आए। नवाज का यह बेबाक फैसला उनकी हिम्मत को दिखाता है। मोदी सरकार को यह समझना था।
> खुर्शीद ने कहा, “कांग्रेस जब सरकार में थी, तब भी बीजेपी इस बात के लिए दबाव बनाती थी कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य न रहें।”
> बीजेपी ने पाकिस्तान को लेकर सख्त रवैया अपनाया है।
> भारत ने साउथ एशिया में शांति के लिए पाकिस्तान की कोशिशों का उस तरह से जवाब नहीं दिया, जिस तरह से देना चाहिए था। बीजेपी की अगुआई वाली भारत सरकार ने पाकिस्तान के अमन के पैगाम का भी वाजिब तरीके से जवाब नहीं दिया।
> पीएम मोदी अब भी स्टेट्समैन बनने के गुर सीख ही रहे हैं। मोदी सरकार को इस बात का साफ तौर पर अंदाजा नहीं है कि उसे पाकिस्तान या बाकी किसी देश के साथ कैसे रिश्ते रखने हैं?
> हैरानी की बात यह है कि इस मौके पर सलमान ने आतंकवाद से निपटने के तरीके को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना कबायली इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ बेहद मुश्किल लड़ाई लड़ रही है।
भारत-पाकिस्तान नहीं सुलझा पाए अपने विवाद
कांग्रेस लीडर ने कहा कि 1947 के बाद दुनिया में कई विवाद हुए और उन्हें सुलझा भी लिया गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान के हाल वही हैं। उनमें झगड़ा खत्म नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत पाकिस्तान से बातचीत चाहता है, तो उसे इस बात का ध्यान रखना होगा कि पाकिस्तान में डेमोक्रेसी को नुकसान न हो। उन्होंने कहा, “एक कामयाब और स्थिर पाकिस्तान ही भारत के लिए बेहतर है।”
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सलमान खुर्शीद ने इस्लामाबाद में की मोदी सरकार की आलोचना, पाक मीडिया में छाए
इस्लामाबाद : कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पाकिस्‍तान यात्रा के दौरान मोदी सरकार की जमकर खिंचाई की। उन्‍होंने इस्‍लामाबाद में कहा, ‘भारत सरकार ने दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए पाकिस्‍तान के अमन के पैगाम का उचित जवाब नहीं दिया।’

पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्राइब्यून’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद में गुरुवार को इस्लामाबाद स्थित जिन्ना इंस्टिट्यूट में दिए एक लेक्चर के दौरान सलमान खुर्शीद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शरीक होकर नवाज शरीफ ने दूरदर्शिता का परिचय दिया था।

‘द एक्सप्रेस ट्राइब्यून’ अखबार सलमान खुर्शीद के हवाले से लिखता है कि भारत में BJP के नेतृत्व वाली सरकार पाकिस्तान के शांति संदेश का माकूल जवाब देने में नाकाम रही। खुर्शीद ने कहा कि साल 1947 के बाद से ही दुनिया ने तमाम तरह के विवादों और संघर्षों का समाधान निकाला है लेकिन भारत-पाकिस्तान के हालात नहीं बदले।

खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ की यह दूर की सोच थी कि वे मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान से दिल्ली आए। नवाज का यह बेबाक फैसला उनकी हिम्मत को दिखाता है। मोदी सरकार को यह समझना था। खुर्शीद ने कहा, कांग्रेस जब सरकार में थी तब भी बीजेपी इस बात के लिए दबाव बनाती थी कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य न रहें। बीजेपी ने पाकिस्तान को लेकर सख्त रवैया अपनाया है।

पीएम मोदी अब भी स्टेट्समैन बनने के गुर सीख ही रहे हैं। मोदी सरकार को इस बात का साफ तौर पर अंदाजा नहीं है कि उसे पाकिस्तान या बाकी किसी देश के साथ कैसे रिश्ते रखने हैं? एक कामयाब और स्थिर पाकिस्तान ही भारत के लिए बेहतर है।

इस मौके पर हैरान करने वाली बात यह थी कि खुर्शीद ने आतंकवाद से निपटने के तरीके को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना की तारीफ की। खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान की सेना कबायली इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ बेहद मुश्किल लड़ाई लड़ रही है।