गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

केजरीवाल : डी डी सी ए बहाना है, असली मकसद राजेन्द्र कुमार बचाना हे।




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आआपा का झूठ तार-तार
तारीख: 21 Dec 2015
- प्रतिनिधि


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी के बाद इसे बदले की राजनीति बताते हुए हाय तौबा कर राजनैतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में जुटे केजरीवाल ने अपने 49 दिनों के कार्यकाल में भी उन्हें प्रधान सचिव बनाया था। वह केजरीवाल के कितने करीब हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाना चाहिए। राजेंद्र कुमार दिल्ली सरकार में परिवहन और माध्यमिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में काम कर चुके हैं। वह दिल्ली सरकार में ऊर्जा सचिव भी रहे हैं।
करीबी ने किया कबाड़ा
जानकारी के अनुसार कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी और पसंदीदा अधिकारियों में रहे दिल्ली संवाद आयोग के पूर्व सचिव आशीष जोशी की शिकायत पर ही राजेंद्र कुमार के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इस मामले की शुरुआत तब से हुई जब जोशी को केंद्र सरकार से प्रतिनियुक्ति द्वारा ‘दिल्ली अरबन शेल्टर इंपू्रवमेंट बोर्ड’ के वित्त विभाग में बतौर सदस्य नियुक्त किया गया था। फरवरी में जब केजरीवाल दोबारा सत्ता में आए तो जोशी को केजरीवाल की टीम में बुद्धिजीवी के तौर पर उनका सबसे करीब माना जाने लगा था। दिल्ली संवाद आयोग की नौ सदस्यों की कमेटी में अरविंद केजरीवाल अध्यक्ष और आशीष खेतान उपाध्यक्ष बने।
इसके बाद आशीष खेतान और जोशी के बीच विवाद होने पर जोशी ने अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि आआपा के कार्यकर्ता और उच्च पदों पर बैठे हुए कई नेता उन्हें परेशान कर रहे हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करने की आदत के चलते आआपा ने जोशी के इस दावे को एक सिरे से खारिज कर दिया। इस वर्ष जून में जोशी ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राजेंद्र कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा से शिकायत की थी। आशीष जोशी ने राजेंद्र कुमार पर शिक्षा और आईटी विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान बेनामी कंपनियां बनाकर वित्तीय धांधली किए जाने का आरोप लगाया था। गत 16 नवंबर को राजेंद्र कुमार पर सीबीआई की छापेमारी को लेकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेसवार्ता की लेकिन जब मीडिया ने उनसे पूछा कि राजेंद्र कुमार को लेकर ‘ट्रांसपरेसी इंटरनेशनल’ ने गत मई में मुख्यमंत्री केजरीवाल को पत्र लिखा था तो आपने इसकी जांच क्यों नहीं कराई थी? इस पर वे प्रेसवार्ता बीच में छोड़कर चले गए। वहीं सीबीआई ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय की फाइलें जब्त करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस मामले में सीबीआई प्रवक्ता देवप्रीत सिंह ने कहा है कि ऐसी एक भी फाइल जब्त नहीं की गई है, जो मामले से संबंधित नहीं हैं। छापे के दौरान स्वतंत्र गवाह मौके पर मौजूद थे और उनके सामने ही सभी दस्तावेज जब्त किए गए हैं। छापे में नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है। जब्त सभी दस्तावेजों की सूची जल्द ही न्यायालय को सौंप दी जाएगी। उन्होंने सीबीआई द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय और आसपास के कमरों में न जाने देने के आरोपों को भी खारिज किया है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट कहा है कि छापा केवल मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार और उनके निजी सहयोगी के कमरे तक सीमित था और केवल उन्हीं दो कमरों में लोगों के आने-जाने पर रोक थी। मुख्यमंत्री के कार्यालय समेत सभी जगहों पर आने-जाने की पूरी आजादी थी।
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CBI ने प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार से 5 ऑडियो क्लिप बरामद किए  

Last Update: 24 Dec 2015
http://www.ibc24.in/Story.aspx?vid=6590
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार पर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. उनके व्यक्तिगत ईमेल आईडी से पांच ऑडियो क्लिप बरामद हुई है. इसमें कथित सौदों को लेकर बातचीत होने का शक है. सीबीआई इस ऑडियो क्लिप की जांच करा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, बरामद की गई ऑडियो क्लिप 2012 से 2013 के बीच की हैं. इसमें वह अपने सहयोगियों को एक निजी कंपनी एंडेवर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में हेरफेर करने के बारे में कथित निर्देश दे रहे हैं. उन्होंने अपने अधिकतर निर्देश ऑडियो क्लिप के जरिए ही भेजा था.
सीबीआई ईमेल आईडी से बरामद ऑडियो क्लिप से राजेंद्र कुमार की आवाज की जांच करा रही है. इसमें अभी फाइनल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों की माने तो आवाज पूरी तरह राजेंद्र कुमार की आवाज से मैच कर रही है, जो कि उनके लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकती है.

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केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के 

खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा सकती है सीबीआई

Reported by Bhasha , Last Updated: गुरुवार दिसम्बर 24, 2015
http://khabar.ndtv.com/news

नई दिल्‍ली: सीबीआई ने ऐसे दस्तावेज मिलने का गुरुवार को दावा किया जो आईसीएसआईएल के जरिए दिल्ली सरकार में की गयी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाने पर वह विचार कर रही है।

एजेंसी सूत्रों ने कहा कि उन्हें दिल्ली सरकार में भर्ती के संबंध में चार फाइलें मिली हैं। एक फाइल डाटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती से संबंधित है और इसमें कई पन्ने गायब मिले हैं। इस वजह ने एजेंसी को भर्ती प्रक्रिया में गहन जांच के लिए प्रेरित किया।

कुमार के खिलाफ सीबीआई अभी पांच मामलों में जांच कर रही है। ये मामले 2009 से 2014 के बीच के हैं। इस दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार में विभिन्न पदों पर काम किया।

सूत्रों ने कहा कि जांच का विस्तार किया जा सकता है और इसमें और अधिकारियों और भर्ती प्रक्रियाओं को शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि किसी भी बात को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और आगे की कोई भी कार्रवाई कुमार से आगे पूछताछ के दौरान सामने आने वाले ब्यौरे पर निर्भर करेगी।

उन्होंने कहा कि कुमार को एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा क्योंकि एजेंसी को पांच ऑडियो क्लि‍पिंग मिले हैं, जिनमें वह कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों को ठेके के करारों में कथित रूप से गड़बडी के लिए मौखिक निर्देश दे रहे हैं। सूत्रों ने दावा किया कि कथित क्लि‍पिंग कुमार के ईमेल एकाउंट से मिले हैं और ये उन अधिकारियों पर उनके प्रभाव का संकेत देते हैं जिनके नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किए गए हैं तथा उन्हें आरोपपत्र में शामिल किया जा सकता है।

सीबीआई ने कहा कि उसने कुमार तथा अन्य के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। अधिकारी के खिलाफ आरोप हैं कि उन्होंने ‘पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली सरकार के विभागों से ठेके दिलाने में एक खास कंपनी को लाभ पहुंचाया।’ एक निजी कंपिनी को 2007 से 2009 के दौरान पांच ठेकों में कथित तौर पर 9.5 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाने के आरोप में कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षडयंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सीबीआई ने मामला दर्ज करने के बाद अपने बयान में कहा था कि आरोपी ने आईसीएसआईएल (इंटेलिजेंट कम्यूनिकेशन सिस्टम्स इंडिया लि.) के जरिए कंपनी को कथित तौर पर करीब 9.50 करोड़ रुपये के ठेके दिलाने में मदद की।
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कौन हैं राजेन्द्र कुमार? क्या-क्या हैं भ्रष्टाचार के आरोप?

By: मनोज मलयानिल, वरिष्ठ पत्रकार | 
Last Updated: Tuesday, 15 December 2015 
नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. केजरीवाल ने राजेन्द्र कुमार को अपने 49 दिन के पहले कार्यकाल के दौरान भी प्रधान सचिव बनाया था. राजेंद्र कुमार अरविंद केजरीवाल के कितने करीब हैं इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसी साल दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने मुख्य सचिव अनिंदो मजुमदार के ऑफिस में ताला डालकर उसे सील कर दिया था और दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर की अनदेखी करते हुए राजेन्द्र कुमार को अपना प्रधान सचिव बनाया था.
राजेन्द्र कुमार दिल्ली सरकार में परिवहन और माध्यमिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में रह चुके हैं. दिल्ली में ऊर्जा सचिव रहते हुए उन्होंने बिजली कंपनियों की मनमानी रोकने को लेकर कई कदम उठाया था. सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधन के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री एक्सलेंसी अवार्ड भी मिल चुका है.

एक तरफ राजेन्द्र कुमार की ईमानदार अधिकारियों के रूप में गिनती होती है वहीं दूसरी तरफ राजेन्द्र कुमार भ्रष्टाचार के कई आरोपों से भी घिरे हैं.

इसी साल 15 जून का मामला है. राजेन्द्र कुमार के खिलाफ दिल्ली डायलॉग के पूर्व सचिव आशीष जोशी ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनकी शिकायत एंट्री करप्शन ब्रांच से की थी. आशीष जोशी ने एसीबी को पत्र लिखकर राजेन्दर कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जिसमें राजेन्द्र पर शिक्षा और आईटी विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान बेनामी कंपनियां बनाकर वित्तीय धांधली किये जाने की बात कही गई थी.
जोशी ने शिकायत में लिखा है कि ‘मेरे डीयूएसआईबी का चीफ डिजिटाइलेशन ऑफिसर रहने के दौरान मुझे आईटी विभाग से जुड़े राजेन्द्र कुमार की भ्रष्ट गतिविधियों का पता चला. मुझे दिल्ली सरकार द्वार डीओपीटी के साल 2010 के आदेशों का उल्लंघन करते हुए एकाएक अपने पद से हटा दिया गया. बाद में मैंने राजेन्द्र कुमार और दूसरे लोगों के खिलाफ संसद मार्ग और आईपी एस्टेट पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी’.

आशीष जोशी ने अपने पत्र में लिखा है कि राजेन्द्र कुमार 10 मई 2002 से लेकर 10 फरवरी 2005 तक निदेशक (शिक्षा) रहे. इस दौरान उन्होंने तिमारपुर में कंप्यूटर लैब बनाते हुए अशोक कुमार नाम के शख्स को इसका इंचार्ज नियुक्त किया. बाद में राजेन्द्र कुमार ने दिनेश कुमार गुप्ता और संदीप कुमार के साथ मिलकर एंडीवर्स सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई. गुप्ता शिक्षा विभाग को स्टेशनरी के सामान की सप्लाई करते थे. संपीप कुमार, अशोक कुमार से जुड़े हुए हैं. खास बात ये है कि अशोक कुमार ने 2009 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. अशोक कुमार डीएएसएस कैडर से हैं और उन्होंने राजेन्द्र कुमार के साथ लंबे समय तक काम किया है.
आशीष जोशी के पत्र के मुताबिक साल 2007 में राजेन्द्र कुमार दिल्ली सरकार के आईटी सेक्रेटरी बने और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एंडीवर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ कंपनी को एक पीएसयू यानी सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रम के साथ इंपैनल करा लिया जिससे कि उनकी कंपनी बिना किसी टेंडर के ही सरकारी विभागों के साथ डील कर सके. आरोप है कि बिना टेंडर काम आवंटित किये जान से दिल्ली सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ. जोशी ने मामले में राजेन्द्र कुमार और बाकी लोगों और इसमें शामिल कंपनियों के गठजोड़ की जांच करने की मांग की थी.

राजेंद्र कुमार के खिलाफ दूसरा मामला सीएनजी फिटनेस घोटाले का है. दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस टेस्ट के दौरान कथित अनियमितता के मामले में आईएएस राजेंद्र कुमार से पहले ही पूछताछ कर चुकी है. दिलचस्प है कि जिस अधिकारी एमके मीणा को निगरानी विभाग का प्रमुख बनने से केजरीवाल ने रोकने की भरपूर कोशिश की थी, उसी अधिकारी ने राजेंद्र कुमार से पूछताछ की थी. बताया जा रहा है कि उनसे इस बारे में पूछताछ हुई है कि उन्होंने सीएनजी फिटनेस घोटाला मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की थी. कहा जा रहा है कि परिवहन सचिव रहते राजेंद्र कुमार ने कार्रवाई नहीं की थी.

क्या है सीएनजी फिटनेस घोटाला ? 
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में सीएनजी किट लगाने के लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया था. आरोप है कि इसमें 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था. 

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय सीएनजी किट लगाने ठेका एक कंपनी को दिया गया था. इसमें कई खामियां मिलीं थी. बिना टेंडर का ठेका दिया गया था. इसमें खर्च सरकार कर रही थी और आमदनी कंपनी ले रही थी. फर्जी फिटनेस टेस्ट करके पैसा लिया जा रहा था. जांच में पाया गया कि 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था .

अरविंद के केजरीवाल के सबसे प्रिय नौकरशाह कहे जाने वाले राजेन्द्र कुमार मूलत: बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं. 48 साल के राजेन्द्र कुमार दिल्ली आईआईटी से बीटेक हैं. राजेन्द्र कुमार झारखंड के नेतरहाट विद्यालय में वर्ष 1979 से लेकर 1984 तक पढ़ाई की है.

      

भारतरत्न अटलजी : ‘‘सु-शासन दिवस’’ : भाषण हेतु बिन्दू

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वापपेयी जन्मदिवस 25 दिसम्बर,(जन्म तिथि 25 दिसम्बर 1924) 


  1. अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म: २५ दिसंबर, १९२४)  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। वे पहले १६ मई से १ जून १९९६ तथा फिर १९ मार्च १९९८ से २२ मई २००४ तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।[1] वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं और १९६८ से १९७३ तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है।
  2. सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नई दिल्ली में ६-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते हैं।
  3. कोटि - कोटि नमन् श्रद्धेय श्री अटल जी को ।।


‘‘सु-शासन दिवस’’

- डाॅ. बीरूसिंह राठौड 
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भाषण हेतु बिन्दू -

भाजपा ने 1998 का चुनाव सुशासन एवं विकास के एजेंडे पर लड़ा। 1998 से 2004 तक वाजपेयी सरकार ने देष को सुषासन का माडल दिया। अटल जी के 6 वर्षीय शासन का निष्पक्ष आंकलन करेंगे तो उसे स्वीकारना ही होगा। श्री अटल जी का शासन उपलब्धियों से भरा था। 6 वर्षीय शासन, सुषासन, विकास और गठबंधन का माडल बना। वाजपेयी सरकार ने पचास वर्षो की कांग्रेस शासन की जड़ता को तोड़कर भारत को शक्ति और प्रगति के सोपान पर जिस तेज गति से आगे बढ़ाया वह सच तो है पर भारत के आमजन को आश्र्चजनक लगता है। भारत को विकास के पथ पर अग्रसर एवं शक्तिशाली और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में ‘‘महत्वपूर्ण देश’’ के रूप में स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य वाजपेयी सरकार ने किया।
सभी बाधाओं के बावजूद राष्ट्र शक्ति का प्रतीक परमाणु बम का विस्फोट किया गया।
अकाल, बाढ़ व पानी की समस्या के स्थाई निदान हेतु 4,70,000 करोड़ रूपयों की नदियों को जोड़ने की योजना चालू की गई।
सरकार के विरूद्ध भ्रष्टाचार की कोई चर्चा तक नहीं थी।
आर्थिक क्षेत्र में सरकार ने आधारभूत ढांचे, राजमार्गों, ग्रामीण सड़कों, सिचांई, ऊर्जा पर ध्यान केन्द्रित किया।
कम्प्यूटर साॅफटवेयर में भारत को सुपर पाॅवर बनाया।
मुद्रास्फिति पर सफलता पूर्वक नियंत्रण रखा। रूपया बहुत मजबूत था, मंहगाई नियंत्रित थी। काला बाजारी खत्म हो गई थी।
कोल्ड स्टोरेज और गोदामों की क्षमता बढ़ गई। ई-गवर्नेंस का पहला प्रयोग सफल रहा।
50 वर्षों में केवल एक करोड़ छियासी लाख (1,86,00,000) टेलीफोन कनेक्शन स्वीकृत किये गये थे। पांच वर्षो में तीन करोड़ से भी अधिक टेलीफोन कनेक्शन दिए।
पांच वर्षो के दौरान तीन करोड़ पचास लाख (3,50,00,000) गैस कनेक्शन जारी किए गये जबकि 40 वर्षो में केवल तीन करोड़ सैंतीस लाख (3,37,00,000) कनेक्शन ही जारी किये गए थे।
2 वर्षों में दो करोड़ सत्तर लाख (2,70,00,000) किसानों को ‘‘क्रेडिट कार्ड’’ जारी किये गए। जिनके द्वारा उन्हें 50,000 करोड़ रूपये से अधिक का ऋण वितरित किया गया।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार जो 1998 में 32.5 बिलियन अमरीकी डाॅलर था, वह 90 बिलियन अमेरिकी डाॅलर से अधिक हुआ।
रोजाना पांच किलोमीटर लंबाई की दर से चार और छह लेन वाली 14,846 किलोमीटर लंबी सड़कों का राष्ट्रीय राजमार्ग निर्मित किया जा रहा था, जबकि 50 वर्षो के दौरान चार लेने वाली सिर्फ 556 किलोमीटर लंबी सड़कों का राष्ट्रीय राजमार्ग निर्मित हुआ था।
‘‘हुडको’’ द्वारा कुल 10,390 करोड़ रूपये आवास निर्माण हेतु स्वीकृत किये गये। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद गरीबों हेतु 70 लाख अतिरिक्त आवास के निर्माण के लिए ऋणों की स्वीकृति की।
भाजपा सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्त्योदय अन्न योजना गरीबों के लिए विश्व का सबसे बड़ा अनाज सुरक्षा कार्यक्रम था, जिससे 1.5 करोड़ परिवार लाभांवित हुए है।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए भाजपा ने 2014 का चुनाव श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुषासन एवं विकास के एजेंडे पर लड़ा। भारत की जनता को हमारा वादा सरकार पर भरोसा वापस लाने का था। हमारे पहले वर्ष में भारत सरकार ने यह विष्वास दिलाया कि व्यवस्था परिणाम दे सकती है। यह परिवर्तन कल्याण, सुरक्षा और सम्मान के तीन स्तंभों पर आधारित है।
कल्याण - वंचितों, पिछड़ों एवं गरीबों की सरकार, जो उनके कल्याण के लिए अंत्योदय पर दृढ़ विष्वास के साथ कृत संकल्प हैं।
सुरक्षा - सुरक्षा के प्रति कड़ा रूख, चाहे महिला सुरक्षा का विषय हो या राष्ट्र के समक्ष किसी चुनौती का, डटकर जवाब देना।
सम्मान - हर व्यक्ति एवं राष्ट्र में सम्मान का भाव, भारत का विष्व में आषा एवं विष्वास की किरण का उभरना।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सही कहा है -
‘‘सरकार वो है, जो गरीबों के बारे में सोचे, गरीबों की सुने और गरीबों के लिए हो।
इसलिए, यह सरकार, करोंड़ों युवाओं, गरीबों, माताओं, बहनों और जो अपने स्वाभिमान एवं सम्मान के लिए संघर्षरत हैं, उनको समर्पित है।
इस देष के जो गरीब, किसान, जनजातीय, दलित, शोषित एवं पीडि़त - यह सरकार उनके लिए, उनकी आकांक्षाओं के लिए हैं और यह हम सब का दायित्व है। ’’
सबका साथ, सबका विकास
जनजातियाॅं के सर्वांगीण विकास के लिए बनबंधु कल्याण योजना
अनुसूचित जातियों के उद्यमियों को 2 नई योजनाओं के माध्यम से आसान वित्तीय उपलब्धता
डाॅ. बाबा साहेब अम्बेडकर स्मारक के लिए मुम्बई में जमीन आवंटित
श्रमिकों को लाभ-ईपीएस के अन्तर्गत एक हजार रूपये की पेंशन की गारंटी तथा यूनिवर्सल एकाउंट नम्बर
कन्या सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम
सुकन्या समृद्धि योजना के अन्तर्गत 9.2 प्रतिशत कर रहित ब्याज पर विशेष बचत खाता 43 लाख खाते खुले
स्वच्छ - स्वस्थ- षिक्षित भारत
मिशन इन्द्रधनुष -35 लाख शिशुओं का इसके अन्तर्गत टीकाकरण
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित
एक समर्पित मंत्रालय के माध्यम से उत्कृष्ट योजनाओं द्वारा स्किल इंडिया के लक्ष्य की ओर अग्रसर। छात्रों के लिए प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी कार्यक्रम
राष्ट्रीय स्वच्छ भारत मिशन तथा नमामि गंगे मिशन
गरीबी के विरूद्ध लड़ाई - गरीबों का सषक्तीकरण
प्रधानमंत्री जन धन योजना, जीवन एवं दुर्घटना बीमा, अटल पेंशन योजना, अटल इनोवेशन मिशन,
रोजगार निर्माण हेतु मेक इन इंडिया
भारत अब विश्व की सबसे तेज वाली अर्थव्यवस्था

अन्नदाता मुक्ती भव - किसानों का कल्याण
प्राकृतिक आपदा - जरूरत के समय राहत, हर खेत को पानी, नीम कोटेड यूरिया, नई यूरिया नीति
मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान टीवी, राष्ट्रीय गोवंश मिशन, आसान ऋण उपलब्धता
आधारभूत संरचना-राष्ट्र के आधार का निर्माण
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 24ग्7 बिजली उपलब्ध कराने के लिए समर्पित योजना प्रक्रियाधीन
कोयला उत्पादन,ऊर्जा और ट्रांसमिशन क्षमता में अतिरिक्त बढ़ोतरी
सड़क सुरक्षा, सड़क निर्माण, स्मार्ट सिटी मिषन, बंदरगाह विकास, शहरी विकास,
स्वच्छ, पारदर्षी एवं भ्रष्टाचार मुक्त सरकार
व्यवस्था में सुधार - टीम इंडिया, नीति आयोग,
सुराज संकल्प व सुषासन को पूरा करने के लिए वर्तमान वसुंधरा सरकार प्रतिबद्ध है। इसी पवित्र उद्देष्य को ध्यान में रखते हुए हमने 13 दिसम्बर, 2013 को जनसेवा का अवसर मिलने के साथ ही सर्वप्रथम सुराज संकल्प पत्र को नीति पत्र के रूप में स्वीकार किया। इसी के आधार पर हमने राज्य की विकास नीतियों, कल्याणकारी कार्यक्रमों को बनाने का फैसला किया।
राजस्थान के नवनिर्माण की परिकल्पना के साथ हमारी सरकार राजस्थान विजन-2020 तैयार कर इस दिषा में निरन्तर आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य विकास के सभी मापदण्डों की प्राथमिकताओं को तय करते हुए विकास दर में वृद्धि करने, मातृ-मृत्यू दर में कमी लाने, स्कूलों में नामांकित बच्चों को स्कूल छोड़ने से रोकने जैसी अनेक चुनौतियों का मुकाबला करते हुए राज्य का चहुंमुखी विकास करना है।
राज्य सरकार ने दो वर्ष के दौरान प्रदेष के समग्र विकास की दृष्टि से आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के साथ ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई, सड़क विकास, पेयजल, जल संसाधन, नगरीय विकास, षिक्षा, चिकित्सा तथा सामाजिक सुरक्षा आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेष में निवेष को बढ़ावा देने के लिए नई निवेष नीति तथा नई सौर ऊर्जा नीति लागू की गई है। 15 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देष्य से कौषल विकास का वृहद विकास कार्यक्रम लागू किया है।
हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी के मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस के दृष्टिकोण के अनुरूप हमारी सरकार सुषासन की दिषा में कदम बढ़ा रही है। जनता से सीधा सम्पर्क स्थापित करने के उद्देष्य से संभाग स्तर पर ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम शुरू किया है। भरतपुर, बीकानेर तथा उदयपुर संभाग में गांव-गांव जाकर सरकार आमजन की समस्याओं से रूबरू हुई और उनके समाधान के प्रयास किए। राजकीय सेवाओं की बेहतर डिलिवरी तथा महिला सषक्तीकरण की दृष्टि से भामाषाह योजना को पुनः शुरू किया गया। श्रम कानूनों में ऐतिहासिक संषोधन किए गए, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना की जा रही है। स्वच्छ राजस्थान - स्वच्छ भारत के मिषन को सभी के सहयोग से पूरा करने के लिए हम दृढ़ संकल्पित हैं।
विकास व सुषासन ही सरकार का मूल मंत्र है। प्रदेष की 36 की 36 कौमों के विकास के लिए हम वचनबद्ध हैं। दो वर्ष के दौरान पिछड़े एवं कमजोर वर्गों, युवाओं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति-जनजाति, किसानों, पषुपालकों के उत्थान के लिए नीतियों और कार्यक्रमों को नया मोड़ दिया गया है। आधुनिक और प्रगतिषील राजस्थान के नवनिर्माण की दिषा में हमारी सरकार प्राण-प्रण से जुटी हुई है।


श्रीमती वसुंधरा राजे सरकार के सुशासन के दो वर्ष


राजस्थान सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में दूरदर्शी सोच के साथ कई पहल और बदलाव किये जिससे लोगों को उनका हक मिला, सुविधाएं बढ़ी, महिलाएं सशक्त हुई, युवा प्रशिक्षित हुए और राज्य में रोजगार के नये अवसर पैदा हुए। हर क्षेत्र और हर वर्ग के विकास के साथ राजस्थान आज उन्नति की राह पर अग्रसर है...
1 सरकार आपके द्वार - में सरकार ने आम जन तक पहुंच कर 3 लाख परिवेदनाएं निस्तारित की ।
2 न्याय आपके द्वार- से लाखों लोगों को मुकदमों से छुटकारा 21.43 लाख राजस्व प्रकरण निस्तारित।
3 35,000 ई-मित्र/सीएससी पर अब 80 विभागों की 200 सेवाएं घर के पास उपलब्ध ।
4 80,868 कृषि एवं 31,561 कुटी ज्योति कनेक्शन जारी।
5 भामाशाह योजना- 1 करोड़ से ज्यादा महिलाएं बनी ‘‘परिवार की मुखिया’’ 3.40 करोड से ज्यादा लोगों का नामांकन।
6 स्वच्छ भारत-स्वच्छ राजस्थान: 22.18 लाख शौचालय निर्मित और 1128 ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्त।
7 भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना -लागू की जा रही है। रू.30,000 से 3 लाख तक का इलाज, 1 करोड़ परिवारों को होगा लाभ।
8 71 स्वामी विवेकानंद माॅडल स्कूल प्रारंभ, हर ग्राम पंचायत पर होगा आदर्श विद्यालय।
9 5 लाख छात्राओं को साईकिल वितरण।
10 रोजगार- 60 हजार नियुक्तियां, 1 लाख नियुक्तियां प्रक्रिया में, 3 लाख युवा प्रशिक्षित।
11 रिसर्जेंट राजस्थान- से 3.21 लाख करोड़ रूपये का निवेश प्रस्तावित, 2 लाख 50 हजार नए रोजगार के अवसर।
12 नई सौर ऊर्जा नीति- किसान अपनी जमीन सीधे लीज पर दे सकते हैं।
13 ग्रामीण गौरव पथ- ग्राम पंचायतों में ग्रामीण गौरव पथ -1185 कार्य पूर्ण
14 भाजपा प्रदेश कार्यालय में मंत्रीमंडल के सदस्यों द्वारा हफ्ते में चार दिन कार्यकर्ता जनसुनवाई।