शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

हर बारह साल में शिवलिंग पर गिरती है बिजली

बिजली महादेव- कुल्लू -

हर बारह साल में शिवलिंग पर गिरती है बिजली

PHOTOS: Lightening breaks this Shivling into pieces every year
भारत में भगवन शिव के अनेक अद्भुत मंदिर है उन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित  बिजली महादेव। कुल्लू का पूरा इतिहास बिजली महादेव से जुड़ा हुआ है। कुल्लू शहर में ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास एक सीधी चढ़ाई वाले ऊंचे पर्वत के ऊपर बिजली महादेव का प्राचीन मंदिर है।

पूरी कुल्लू घाटी में ऐसी मान्यता है कि यह घाटी एक विशालकाय सांप का रूप है। इस सांप का वध भगवान शिव ने किया था। जिस स्थान पर मंदिर है वहां शिवलिंग पर हर बारह साल में भयंकर आकाशीय बिजली गिरती है। बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। यहां के पुजारी खंडित शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित कर मक्खन के साथ इसे जोड़ देते हैं। कुछ ही माह बाद शिवलिंग एक ठोस रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। इस शिवलिंग पर हर बारह साल में बिजली क्यों गिरती है और इस जगह का नाम कुल्लू कैसे पड़ा इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो इस प्रकार है।

Bijli Mahdev - Kullu- History

रहता था कुलान्त राक्षस
कुल्लू घाटी के लोग बताते हैं कि बहुत पहले यहां कुलान्त नामक दैत्य रहता था। दैत्य कुल्लू के पास की नागणधार से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घर धार से होता हुआ लाहौल स्पीति से मथाण गांव आ गया। दैत्य रूपी अजगर कुण्डली मार कर ब्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। इसके पीछे उसका उद्देश्य यह था कि यहां रहने वाले सभी जीवजंतु पानी में डूब कर मर जाएंगे। भगवान शिव कुलान्त के इस विचार से चिंतित हो गए।

Bijli Mahdev - Kullu- History
अजगर के कान में धीरे से बोले भगवान शिव
बड़े जतन के बाद भगवान शिव ने उस राक्षस रूपी अजगर को अपने विश्वास में लिया। शिव ने उसके कान में कहा कि तुम्हारी पूंछ में आग लग गई है। इतना सुनते ही जैसे ही कुलान्त पीछे मुड़ा तभी शिव ने कुलान्त के सिर पर त्रिशूल वार कर दिया। त्रिशूल के प्रहार से कुलान्त मारा गया। कुलान्त के मरते ही उसका शरीर एक विशाल पर्वत में बदल गया। उसका शरीर धरती के जितने हिस्से में फैला हुआ था वह पूरा की पूरा क्षेत्र पर्वत में बदल गया। कुल्लू घाटी का बिजली महादेव से रोहतांग दर्रा और उधर मंडी के घोग्घरधार तक की घाटी कुलान्त के शरीर से निर्मित मानी जाती है। कुलान्त से ही कुलूत और इसके बाद कुल्लू नाम के पीछे यही किवदंती कही जाती है।

 Bijli Mahdev - Kullu- History

भगवान शिव ने इंद्र से कहा था इस स्थान पर गिराएं बिजली
कुलान्त दैत्य के मारने के बाद शिव ने इंद्र से कहा कि वे बारह साल में एक बार इस जगह पर बिजली गिराया करें। हर बारहवें साल में यहां आकाशीय बिजली गिरती है। इस बिजली से शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। शिवलिंग के टुकड़े इकट्ठा करके शिवजी का पुजारी मक्खन से जोड़कर स्थापित कर लेता है। कुछ समय बाद पिंडी अपने पुराने स्वरूप में आ जाती है।

बिजली शिवलिंग पर ही क्यों गिरती है
आकाशीय बिजली बिजली शिवलिंग पर गिरने के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव नहीं चाहते चाहते थे कि जब बिजली गिरे तो जन धन को इससे नुकसान पहुंचे। भोलेनाथ लोगों को बचाने के लिए इस बिजली को अपने ऊपर गिरवाते हैं। इसी वजह से भगवान शिव को यहां बिजली महादेव कहा जाता है। भादों के महीने में यहां मेला-सा लगा रहता है। कुल्लू शहर से बिजली महादेव की पहाड़ी लगभग सात किलोमीटर है। शिवरात्रि पर भी यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

Bijli Mahdev - Kullu- History
सर्दियों में भारी बर्फबारी
यह जगह समुद्र स्तर 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। शीत काल में यहां भारी बर्फबारी होती है। कुल्लू में भी महादेव प्रिय देवता हैं। कहीं वे सयाली महादेव हैं तो कहीं ब्राणी महादेव। कहीं वे जुवाणी महादेव हैं तो कहीं बिजली महादेव। बिजली महादेव का अपना ही महात्म्य व इतिहास है। ऐसा लगता है कि बिजली महादेव के इर्द-गिर्द समूचा कुल्लू का इतिहास घूमता है। हर मौसम में दूर-दूर से लोग बिजली महादेव के दर्शन करने आते हैं।

हिंदुस्तान भगवान राम की धरती है : अजीज कुरैशी


पैगंबर ने भी माना था हिंदुस्तान भगवान राम की धरती है : अजीज कुरैशी


News18 | Fri Jan 01, 2016 

http://hindi.news18.com/news/uttarakhand/former-governor-aziz-qureshi-says-india-is-a-land-of-ram-1209346.html


उत्तराखंड से मिजोरम स्थानांतरित राज्यपाल डॉक्‍टर अजीज कुरैशी एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। अजीज कुरैशी ने हिन्‍दुस्‍तान को भगवान राम की धरती बताया है। कहा कि इस्लाम के पैगंबर ने भी हिंदुस्‍तान को भगवान राम की धरती बताया है। भगवान राम का वजूद मनवाने के लिए किसी के आदेश की जरूरत नहीं है। विश्व में वह बदनसीब व्यक्ति हैं जो भगवान राम के वजूद को नहीं मानते हैं।

राज्‍यपाल ने यहां तक कह डाला कि भगवान राम के आदर्शों को अपनाए बिना विश्‍व का कल्‍याण संभव नहीं है। महामहिम ने ये बातें हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में आयोजित कार्यक्रम और उसके बाद राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में कही।

अजीज कुरैशी ने कहा कि उत्तराखंड के लिए उनकी कई योजनाएं थीं, लेकिन उन योजनाओं को धरातल पर उतारने के ख्वाब पूरे नहीं हो सके। इस पर अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि वे मिजोरम में जाकर गाय, गंगा व हिमालय के लिए काम करेंगे।

राज्यपाल कुरैशी ने कहा कि चारधाम के विकास तथा इन चारों धामों को वेद धाम बनाने का उनका प्रमुख ख्वाब था। देव भूमि उत्तराखंड के इन धामों से ही गंगा यमुना निकल रही है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री में घंटियों की आवाज तथा शंख की गूंज गंगा यमुना की जलधारा में गीत संगीत घोल रही है। जल धारा की इसी आवाज से विश्व में मानवता, प्रेम, भाईचारे का संदेश पहुंच रहा है। यही संदेश चार वेद देते हैं। अगर वैदिक मान्यताओं पर चला जाए तो दुनिया में कहीं पर भी दंगे-फसाद न हों।