रविवार, 31 जनवरी 2016

आखिरी ओवर : युवराज और रैना ने पलटा मैच : ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर क्लीन स्वीप

आखिरी ओवर : युवराज और रैना ने पलटा मैच : 140 साल में पहली बार ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर क्लीन स्वीप




खेल डेस्क. तीसरे और आखिरी टी-20 मैच में जीत के लिए 198 रनों के टारगेट का पीछा कर रही टीम इंडिया के सामने आखिरी ओवर में 17 रन बनाने का चैलेंज था। 19th ओवर की आखिरी बॉल पर युवराज ने एक रन ले लिया। इसका मतलब था कि 20th ओवर की पहली बॉल वही खेलेंगे। युवराज के सामने ऑस्ट्रेलिया के बॉलर टाई थे। युवी ने पहली दो बॉल्स पर 10 रन बनाकर मैच का रुख भारत की तरफ मोड़ दिया। रैना ने आखिरी बॉल पर चौका मारते हुए अपनी टीम को जीत दिला दी। इस तरह भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 7 विकेट से हराते हुए सीरीज3-0 से जीत ली।

20वें ओवर में ऐसे बने रन...

पहली बॉल
- इंडियन इनिंग के 19 वें ओवर में सिर्फ 5 रन बने थे। युवराज कई शॉट्स मिस टाइम कर रहे थे। इससे युवराज पर प्रेशर था।
- 20 वें ओवर की पहली बॉल पर स्ट्राइक युवी के पास थी। ऑस्ट्रेलिया की ओर से बॉलर टाई ने युवराज के पैड्स की तरफ लेंथ बॉल फेंकी। युवी ने फाइन लेग के ऊपर से फ्लिक करते हुए बॉल को बाउंड्री के बाहर भेज दिया।
दूसरी बॉल
- टाई ने फिर युवी के पैड की तरफ लेंथ बॉल फेंकी। युवी ने डीप मिडविकेट के ऊपर से सिक्स मार दिया।
तीसरी बॉल
- टाई ने स्लोअर ऑफकटर फेंकी। युवराज ने शॉट मिस किया। लेकिन तब तक रैना ने दौड़ कर बाई के तौर पर एक रन ले लिया।
चौथी बॉल
- टाई ने रैना के पैड की तरफ यॉर्कर फेंकी। रैना ने लेग साइड की तरफ शॉट खेलकर दो रन ले लिए।
पांचवीं बॉल
- भारत को दो बॉल्स पर चार रन चाहिए थे। टाई ने फुल टॉस फेंकी। रैना ने स्क्वॉयर लेग की तरफ ड्राइव किया। दो रन मिले।
छठी बॉल
- आखिरी बॉल। भारत को जीत के लिए दो रन चाहिए थे। टाई ने शॉर्ट बॉल फेंकी। रैना ने प्वॉइंट के ऊपर से शॉट मारा। चार रन। भारत ने मैच जीत लिया।
ओवर-बाई-ओवर दोनों टीमों के स्कोर्स का COMPARISON
ऑस्ट्रेलियाई इनिंगइंडियन इनिंग
ओवरस्कोरइस ओवर में बने रनस्कोरइस ओवर में बने रन
11/017/07
215/01418/011
324/1942/024
437/11349/17
548/11162/113
657/1974/112
763/1681/17
872/2991/110
975/2396/15
1080/35102/16
1189/39112/110
12103/314122/110
13118/315130/28
14127/39139/29
15140/313147/38
16149/39156/39
17168/419164/38
18176/48176/312
19187/411181/35
20197/510200/319
15 ओवर के बाद 11 से ऊपर चला गया था रन रेट
- 16th ओवर में 9, 17th में 8, 18th 12 और 19th ओवर में सिर्फ 5 रन बनने से ऑस्ट्रेलिया भारी पड़ने लगा। रिक्वायर रन रेट 11 से ऊपर चला गया।
- आखिरी ओवर में 17 रन चाहिए थे। इस ओवर में युवी ने चौका और छक्का लगाकर जोरदार वापसी की।
- इसके बाद रैना ने अंतिम बॉल पर चौका लगाकर जीत दिला दी।
मैच के स्पेशल FACTS...

- विराट पहले ऐसे बैट्समैन हैं, जिन्होंने एक टी-20 सीरीज के सभी मैचों में फिफ्टी लगाई है।
- पिछले 6 मैच में विराट 4 फिफ्टी लगा चुके हैं। ये ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार तीसरी फिफ्टी थी।
- वाटसन (124*) ने कप्तान के रूप में एक इनिंग में सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उनसे पहले ये रिकॉर्ड साउथ अफ्रीका के फॉफ डु प्लेसिस (119) के नाम था।
- शॉन टेट के एक ओवर में 24 रन बने। ये टी-20 में दूसरा सबसे महंगा ओवर रहा। इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड ने 2007 में 36 रन खर्च किए थे।
- 140 साल में पहली बार ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर किसी टीम (भारत) ने उसे क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट (टी-20) में क्लीन स्वीप (3-0) करते हुए हराया है।

भारत के "रन"बांकुरों ने फिर भारत माँ को गौरवान्वित किया।


‪#‎T20‬ में भारतीय क्रिकेट टीम का यह शानदार प्रदर्शन, मार्च में आ रहे #T20‪#‎WorldCup‬ के लिए बहुत ही शुभ संकेत है।
ऑस्ट्रेलिया को 140 साल बाद किसी ने उन्ही की धरती पर सीरिज़ के सारे मैच हरा कर सीरिज़ जीती है, और इस बात से इस जीत का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। भारतीय क्रिकेट टीम के दो अनमोल रत्न, Man Of The Series Virat Kohli व आज के बाज़ीगर रहे Yuvraj Singh को इस ऐतिहासिक जीत पर दिल से विशेष बधाई। यशस्वी भवः।
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टी-20 में भारत का क्लीन स्वीप

बीबीसी हिन्दी
सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए तीसरे और अंतिम टी-20 मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 7 विकेट से हरा दिया है. इसके साथ ही भारत ने तीन मैचों की सिरीज़ 3-0 से जीत ली.
सिरीज़ में बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत भारतीय टीम आईसीसी टी-20 रैंकिंग में चोटी पर पहुँच गई है. दूसरे स्थान पर वेस्टइंडीज़ है.
ऑस्ट्रेलिया ने शेन वॉटसन के शानदार शतक की बदौलत 197 रन बनाए थे. भारत ने 20 ओवरों में तीन विकेट खोकर 200 रन बनाकर मुक़ाबला जीत लिया.
भारत की ओर से सुरेश रैना 49 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि युवराज सिंह 12 गेंदों में 15 रन बनाकर नाबाद रहे.
भारत की पारी में रोहित शर्मा और शिखर धवन ने ठोस शुरूआत की.

शिखर धवन 9 गेंदों में चार चौकों और एक छक्के की मदद से 26 रन बनाकर आउट हुए. जबकि रोहित शर्मा ने 38 गेंदों में पाँच चौकों और एक छक्के की मदद से 52 रन बनाए.
धवन के बाद आए विराट कोहली 36 गेंदों में 50 रन बनाकर आउट हुए.
इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया की ओर से वॉटसन 71 गेंदों में 124 रन बनाकर नाबाद रहे. उन्होंने 10 चौके और छह छक्के लगाए.

ऑस्ट्रेलिया की ओर से वॉटसन के अलावा ट्रेविस हेड ने 26 और उस्मान ख़्वाजा ने 14 रन बनाए.
भारत की ओर से नेहरा, बुमराह, अश्विन, जडेजा और युवराज ने एक-एक विकेट लिया.
ऑस्ट्रेलिया ने 9.85 रन प्रति ओवर की औसत से पाँच विकेट खोकर 197 रन बनाए हैं.
तीन मैचों की इस सीरीज़ को भारत पहले ही दो मैच जीतकर अपने नाम कर चुका है.

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टी-20 में शीर्ष पर पहुंचा भारत

तीसरे टी-20 में आॅस्ट्रेलिया को हराने के साथ ही भारत टी-20 रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंच गया है. 120 अंकों के साथ भारत पहले स्थान पर है.वहीं वेस्टइंडीज़ और श्रीलंका 118 अंकों के साथ दूसरे और 117 अंकों के साथ इंग्लैंड तीसरे स्थान पर हैं.
मैच के ख़त्म होने के बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा, "पिछले मैचों में हमारे बल्लेबाज़ अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे. हमें अपने गेंदबाज़ों से 10 प्रतिशत अधिक मेहनत चाहिए थी."
उन्होंने कहा, "टी-20 में गेंदबाज़ों ने वही किया जिसकी उनसे उम्मीद थी. टी-20 वर्ल्ड कप में लगभग हमारी यही टीम रहने वाली है."
सिडनी मैच में आॅस्ट्रेलिया के कप्तान शेन वॉटसन के 124 रनों की वजह से उनकी टीम 197 रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने में कामयाब रही थी.
लेकिन भारत की तरफ से रोहित शर्मा के 52, विराट कोहली के 50 और सुरेश रैना के 49 रनों की वजह से भारत ने जीत दर्ज की.

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तीसरे रोमांचक टी-20 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 7 विकेट से हराया, 

भारत ने सीरीज 3-0 से जीती
Date: 31/01/2016 

सिडनी, 31 जनवरी (वीएनआई)। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी क्रिकेट मैदान पर आज खेले गए रोमांच के भरपूर तीसरे और अंतिम टी-20 मैच में रोहित शर्मा (52) विराट कोहली (50), सुरेश रैना (नाबाद 49) की शानदार पारियों की मदद से भारत ने आस्ट्रेलिया को सात विकटों से हराकर श्रृंखला पर 3-0 से कब्जा जमा लिया। 
टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आस्ट्रेलिया ने भारत के सामने 198 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था जिसे भारत ने मैच की अंतिम गेंद पर हासिल कर लिया। भारत ने लक्ष्य का पीछा करने के लिए पूरे 20 ओवर खेले और महज तीन विकेट गंवाए। 
विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाजों शिखर धवन (26) ने शुरु से ही तेज खेल खेला। दोनों ने पहले विकेट के लिए 46 रनों की साझेदारी की। शेन वाटसन ने धवन को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा। इसके बाद आए कोहली ने रोहित के साथ पारी को आगे बढ़ाया और आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की जमकर धनाई की। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 78 रनों की साझेदारी की। दोनों ही खिलाड़ियों को कैमरून वॉयस ने आउट किया। 
रोहित ने अपनी आतिशी पारी में 38 गेंदो का सामना करते हुए पांच चौके और एक छक्का लगाया। वहीं कोहली ने अपनी पारी में 36 गेंदे खेलीं। उन्होंने अपनी पारी में दो चौके और एक छक्का लगाया। इन दोनों के बाद मैच जिताने की जिम्मेदारी रैना और युवराज सिंह (15) पर थी। दोनों ने रन गति को बनाए रखा और आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों पर लगातार प्रहार करते रहे। रैना ने अपनी तूफानी पारी में 25 गेंदें खेलीं। उनकी पारी में छह चौके और एक छक्का शामिल है।
अंतिम ओवर की आखिरी गेंद पर भारत को जीत के लिए 2 रनों की जरूरत थी। रैना ने अपने बल्ले से गेंद को सीमांरेखा के पार पहुंचा कर भारत को जीत दिलाई और आस्ट्रेलिया को टी-20 श्रृंखला में 3-0 से हराकर सूपडा साफ किया। आस्ट्रेलिया की तरफ से वाटसन ने एक और वायस ने दो विकेट लिए। 
इससे पहले आस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए कप्तान शेन वाटसन (नाबाद 124) की तूफानी पारी की बदौलत निर्धारित 20 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 197 रन बनाए। आस्ट्रेलिया की तरफ से वाटसन के अलावा ट्रेविस हेड ने 26 रनों का पारी खेली। आस्ट्रेलिया के बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों को ठीक से खेल नहीं पा रहे थे, लेकिन दूसरे छोर पर खड़े वाटसन ने ना सिर्फ पारी को संभाला बल्कि अपना तेज खेल भी जारी रखा। चोटिल एरॉन फिंच की जगह कप्तानी कर रहे वाटसन नाबाद पेवलियन लौटे। उन्होंने अपनी पारी में 71 गेंदों का सामना किया और 10 चौके और छह छक्के लगाए। 
टी-20 में किसी भी कप्तान का यह सर्वाधिक स्कोर है। इससे पहले यह रिकार्ड दक्षिण अफ्रीक के फाफ डू प्लेसी के नाम था। वाटसन और प्लेसी के अलावा श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने टी-20 में कप्तान के तौर पर शतक लगाया है। वाटसन पहले आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं जिन्होंने क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में शतक लगाए हैं। भारत की तरफ से जसप्रीत बुमराह, आशीप नेहरा, रविन्द्र जडेजा, रविचन्द्रन अश्विन और युवराज सिंह ने एक - एक विकेट लिया।
अपनी शानदार शतकीय पारी के लिए वाटसन को मैन ऑफ द मैच चुना गया। तीन मैचों में लगातार तीन अर्धशतक लगाने वाले भारत के कोहली को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। 



दुनिया में चमक रहा है भारतीय मेधा का सितारा : शेषाद्रि चारी


दुनिया में चमक रहा है भारतीय मेधा का सितारा
तारीख: 04 Jan 2016
शेषाद्रि चारी
(लेखक आर्गेनाइजर साप्ताहिक के पूर्व संपादक और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं।)


भारत की विदेश नीति में अनिवासी भारतीयों की एक बड़ी भूमिका है, ठीक वैसे ही जैसी चीन में आधुनिक औद्योगिक समाज बनाने में अनिवासी चीनियों की, इस्रायल के संदर्भ में अमरीका और पश्चिमी यूरोपीय नीतियों में अनिवासी यहूदियों की भूमिका है। आज संगठित अनिवासी समूहों की नीति प्रक्रिया में प्रमुख भागीदारों के नाते भूमिका एकाएक बढ़ गई है। पश्चिम में इस प्रकिया से एकदम विपरीत, एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में अनिवासी भारतीयों का दखल सांस्कृतिक संवाद और सामाजिक-व्यावसायिक आदान-प्रदान के नाते रहा है। अनिवासियों में नस्लीय, राष्ट्रीय, पांथिक और जातीय समूह शामिल हो सकते हैं। इसमें संदेह नहीं कि अनिवासी भारतीय समाज अब खुद को अपने मूल देश यानी भारत में घटने वाली घटनाओं से जुड़ा महसूस करता है। इस देश में किसी वक्त जरूरत पड़ने पर यह समूह राजनीतिक रूप से सक्रिय हो सकता है।
बीते कुछ वर्षों के दौरान अनिवासी समाज पूरी दुनिया में एक ताकतवर आर्थिक और राजनीतिक समूह के नाते उभरा है। चीनी और भारतीय अनिवासी समुदाय अनिवासियों के आर्थिक रूप से शक्तिशाली होने के सर्वोत्तम उदाहरण हैं। हाल के कुछ वर्षों में अनिवासियों के अध्ययन में बौद्धिक पलायन का एक नया आयाम शामिल हुआ है, खासकर भारत जैसे देशों के संदर्भ में। अमरीका में स्नातक शिक्षा ले रहे विदेशी छात्रों में आधे से ज्यादा अपने मूल देश लौट कर नहीं जाते जिससे उनके देशों में कुशल और शिक्षित नागरिकों की कमी हो जाती है। इसीलिए इनमें से कई देशों ने दोहरी नागरिकता, शिक्षा और आंतरिक मामलों से जुड़ी नीतियों में बदलाव लाना शुरू कर दिया है। भारत सरकार बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों और उद्यमियों को अपने वतन वापस लौटकर काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। लौटने वाले ये लोग अपने साथ प्रौद्योगिकी, धन, प्रबंधकीय और संस्थागत दक्षता लेकर आते हैं। उदाहरण के लिए भारत ने सागरपारीय भारतीय मामलों का मंत्रालय स्थापित किया और अनिवासी भारतीयों को अनिवासी भारतीय या एनआरआई के साथ ही पी.आई.ओ. (पर्संस आॅफ इंडियन ओरिजिन) का विशेष दर्जा दिया है। अभी हाल तक पी.आई.ओ. और एनआरआई ने सामाजिक, सांस्कृतिक, पांथिक और आर्थिक जुड़ावों के जरिए भारत से अपने संबंध बनाए रखे हैं। लेकिन अब भारत अनिवासी समाज के सदस्यों के बीच सूत्र जोड़े रखने के लिए वार्षिक सम्मेलन प्रायोजित करता है और उन-उन देशों में उनके सामने आ रहे मुद्दों पर चर्चा करता है, जिनमें आज वे रह रहे हैं।
यूके में वहां के आम चुनावों पर शायद भारतीय राजनीतिक परिदृश्य का कुछ ज्यादा दखल दिखा है जो आज के भारत में बढ़ते आत्मविश्वास को काफी हद तक दर्शाता है। 2010 के यूके चुनावों में कुल उम्मीदवारों में 89 एशियाई मूल के थे जो कि एक रिकार्ड था। पिछले चुनावों में एशिया मूल के 15 उम्मीदवार सांसद चुने गए और ये भी अनिवासी भारतीय समाज की चुनावी उपलब्धियों में मील का पत्थर साबित होता है। दो बहनें, कीथ वाज और वेलेरी वाज भारतीय मूल की महिला सांसद चुनी गर्इं। प्रीति पटेल विल्हम चुनाव क्षेत्र से जीतीं। भारतीय मूल की दो महिलाएं पहली बार हाउस आॅफ कॉमन्स में चुनी गर्इं। यूके संसद के निचले सदन के इतिहास में पहली बार वाज और पटेल एशियाई मूल की पहली महिला सांसद बनीं। जीतने वालों में वीरेन्द्र शर्मा और मारशा सिंह भारतीय मूल के ही हैं। कन्जर्वेटिव उम्मीदवार पॉल उप्पा वोल्वरहेम्प्टन दक्षिण पश्चिम चुनाव क्षेत्र से जीते। रीडिंग वेस्ट से आलोक शर्मा जीते तो कैंब्रिजशायर नार्थ वेस्ट से शैलेश वारा जीते।
लघु भारत कहे जाने वाले मॉरीशस को यह नाम वहां बड़ी तादाद में अनिवासी भारतीयों के बसे होने की वजह से नहीं दिया गया है बल्कि यह उन कुछ विदेशी हिस्सों में से है, जहां अनिवासी भारतीय समाज की जबरदस्त राजनीतिक ताकत है। इस देश के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए अनिवासी भारतीय समाज की राजनीतिक प्रभुता कोई बड़ी खबर नहीं बनती। भारत से इसका सांस्कृतिक जुड़ाव एक नहीं अनेक क्षेत्रों में है। यह नि:संदेह अनिवासी भारतीय समाज की राजनीतिक यात्रा का एक और पहलू है।
इधर अटलांटिक के पार कैरीबियाई देशों में अनिवासी भारतीय समाज ने एक अनूठी राजनीति विजय हासिल की है। भारतीय मूल की श्रीमती कमला प्रसाद बिसेसर त्रिनिदाद और टोबैगो की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने पार्टी के संस्थापक बासुदेव पाण्डे को हराया था, जो खुद इस देश के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री रहे थे। अटलांटिक के और पश्चिम में जाएं तो वहां भी भारतीय अमरीकी, अमरीकी राजनीतिक परिदृश्य में एक ताकतवर शक्ति के रूप में उभर रहे हैं। इसमें उनकी निर्विवाद आर्थिक सफलता, उद्यमशीलता, कड़ी मेहनत और पारिवारिक मूल्यों तथा परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहने का बड़ा हाथ है। दूसरी पीढ़ी के भारतीय अमरीकियों ने तो अपनी राजनीतिक सूझबूझ और दमदारी के साथ प्रस्तुत की है।
भारतीय अमरीकी नागरिकों ने अब अपने देश के सार्वजनिक जीवन में और अधिक भागीदारी लेनी शुरू कर दी है, जिसके पीछे प्रेरणा है भारत की बढ़ती वैश्विक की साख की और नई दिल्ली तथा वाशिंगटन के बीच वैश्विक भू राजनीतिक परिदृश्य की पृष्ठभूमि में बढ़ते मेलमिलाप की। इस समाज का अमरीका की सरकार और राजनीतिक शक्ति केन्द्रों पर अपना आर्थिक असर दिखाने का माद्दा है। यह चचा सैम की नीतियों पर खासतौर पर भारत के दीर्घकालीन हितों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। जहां बराक ओबामा प्रशासन ने एक तरह का रिकार्ड बनाते हुए कई कामयाब भारतीय अमरीकी व्यवसायियों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों के ओहदों पर बैठाया है वहीं भारतीय मूल के लोगों ने राजनीतिक वातावरण में भी अपनी पैठ बढ़ाई है।
जैसा हमने चीन के संदर्भ में देखा, अनिवासी समाज आर्थिक विकास में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर किसी देश को आधुनिक औद्योगिक समाज में बदल सकता है। चीन में 80 और 90 के दशकों में कुल विदेशी निवेश का 68 प्रतिशत सागरपारीय चीनियों से आया था। अनिवासी समाज राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। 2011 में भारत को 56 अरब से ज्यादा अमरीकी डालर प्राप्त हुए थे। केरल के सकल घरेलू उत्पाद का 20 प्रतिशत से कुछ ज्यादा हिस्सा इसी से आता है। पंजाबी अनिवासियों ने खेती के उपकरण खरीदकर हरित क्रान्ति में योगदान दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार की मेक इन इंडिया तथा अन्य आर्थिक योजनाओं के चलते कौशल पलायन, पूंजी बहिर्गमन और प्रौद्योगिकी घाटा कम होना चाहिए ताकि उन्नति की नई कहानी में अनिवासी भारतीयों की भागीदारी और बढ़े।
इसमें संदेह नहीं है कि अनिवासी भारतीय समाज की कामयाबी, खासकर राजनीतिक क्षेत्र में अपने मूल देश यानी भारत पर कोई प्रभाव नहीं डालती। विभिन्न देशों में चुनावी सफलताएं तो अनिवासी भारतीयों के लिए एक ताजा घटा घटनाक्रम है, ऐसा जिसमें अभी उनको काफी माहिर होने की जरूरत है। पहले भी भारतीयों ने पूर्वी अफ्रीका में गजब की कामयाबी दर्ज कराई है, हालांकि उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और भौगोलिक राजनीतिक धारा ने उनके कुल प्रभाव को सीमित कर दिया था। इसके बाद यूके में और भी सफलताएं हासिल हुर्इं, पहले उद्योगों में, और अब हाल ही में राजनीतिक क्षेत्र में शानदार कामयाबी मिली है। कैरेबियाई देशों, पूर्व (उदाहरण के लिए फिजी) और मारीशस में कहानी कुछ अलग है, क्योंकि यहां प्रमुख रूप से अनिवासी भारतीय समाज की बसाहट, उपस्थिति और प्रयासों ने ही उन देशों को आकार दिया है। अमरीका में तो अनिवासी भारतीय समाज का असर निश्चित तौर पर बहुत ज्यादा है। एक बात साफ तौर उभरती है कि अगर भारत अपनी राजनीति समग्र राष्ट्रीय शक्ति को बढ़ाते हुए वैश्विक शक्ति का दर्जा हासिल करना चाहता है तो, देश को भविष्य में अपने अनिवासी समाज के रणनीतिक प्रभाव के लिए स्थान बनाना होगा। सागर पार हमारी ताकत को मजबूत करना है तो अपने देश में राजनीतिक रूप से कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव अपनाने ही पड़ेंगे।