गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

भारतीय नववर्ष अभिनंदन उत्सव

भारतीय नववर्ष अभिनंदन उत्सव
तारीख: 18 Apr 2016 नई दिल्ली


प्रतिवर्ष की तरह नववर्ष के स्वागतार्थ यमुना के सूरघाट पर जैसे ही सूर्य देव ने अपनी लालिमा आसमान में बिखेरी, तभी ढोल नगाड़ों की गूंज, जयकारों के उद्घोष मंत्रोचार के बीच उपस्थित जनसमूह ने हाथों में फूल और दीप प्रज्जवलित कर अभिनंदन करते हुए अर्ध्य दिया। संस्कार भारती दिल्ली प्रांत द्वारा 8 अप्रैल को विक्रमी संवत् 2073 के अभिनंदन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, विशिष्ट अतिथि श्री विजय जिंदल व श्री एस के जिंदल।  डा. कृष्ण गोपाल ने भारतीय नववर्ष को अपनाने और युवा पीढ़ी को इसकी जानकारी देने के आग्रह पर जोर देते हुए कहा कि यह हमारी भारतीय परंपरा और संस्कृति का अटूट हिस्सा है, इस पर हमें गर्व करना चाहिए।
श्री अवनीश त्यागी एवं उनकी टोली ने संस्कार भारती का ध्येय गीत प्रस्तुत किया। मंत्रोच्चारण, हनुमान संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा योग एवं सूर्य नमस्कार किया गया। प्रख्यात गायिका डॉ. कुमुद दीवान ने लोकगीत और भजन गाकर लोगों को मंत्रमुग्ध किया। नृत्यांगना श्रीमती सीमा शर्मा की शिष्याओं ने कथक, भरतनाट्यम एवं असमिया नृत्य का मिश्रण कर सुंदर नाट्य की प्रस्तुतियां दी। वरिष्ठ कवि श्री विमल विभाकर ने कविता पाठ किया।
कार्यक्रम के संयोजक श्री देवेन्द्र खन्ना ने आभार प्रकट किया। दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता एवं श्री शिवकुमार गोयल, महामंत्री श्री सुबोध शर्मा, जितेंद्र मेहता, श्री अनुपम भटनागर, श्री विजय बहल सहित अनेकानेक कार्यकर्ताओं के सहयोग से यह कार्यक्रम सफल रहा।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में एनडीटीएफ द्वारा नववर्ष प्रतिपदा कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील आंबेकर थे जिन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने चाणक्य, चन्द्रगुप्त, विवेकानंद और टैगोर के दर्शन को प्रासंगिक बताया। समारोह में एनडीटीएफ के वरिष्ठ नेता प्रो. एन.के. कक्कड़, एनडीटीएफ अध्यक्ष ए.के. भागी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन एनडीटीएफ के महासचिव डा. वीरेन्द्र सिंह नेगी ने और संचालन डा. गीता भट्ट ने किया। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के कई शिक्षक व शोधार्थी उपस्थित थे।
स्वदेशी जागरण मंच द्वारा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2073 नववर्ष का स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य, स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री अरुण ओझा, राष्ट्रीय संगठक श्री कश्मीरी लाल व अखिल भारतीय सह संयोजक श्री सरोज मित्तल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित कर नववर्ष की बधाई दी।
डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि अतीत में भारत पर 800 वर्षों तक मुसलमानों का शासन था उन्होंने कन्वर्जन के हरसंभव प्रयास किये। लेकिन केवल 12 प्रतिशत हिन्दुओं को ही मुसलमान बना पाए, 150 वर्षों तक अंग्रेजों का शासन रहा उन्होंने भी कन्वर्जन के अनेक प्रयास किये लेकिन 2 प्रतिशत से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन नहीं कर पाए। इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह था कि हमारा समाज शासनों पर आधारित नहीं था। समाज की रचना हमें करनी है तो अपने पुरुषार्थ के बलबूते पर कुछ कार्य-रचनाएं खड़ी करने का प्रयास करना होगा। 1,60,000 सेवा कार्य संघ के स्वयंसेवक देशभर में चलाते हैं। 90 प्रतिशत सेवा कार्य सरकार की मदद के बिना समाज के बलबूते चल रहे हैं। राज्य आधारित नहीं, हम समाज के नाते अपने बलबूते पर अपना काम खड़ा करेंगे। समन्वय, परहित, दूसरों को देने का वातावरण संभवत: बनेगा तो हमारा देश अपने आप आगे बढेगा।
श्री कश्मीरी लाल ने कहा कि विक्रमी संवत् हमें सात्विकता की प्रेरणा देते हुए शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है।
श्री अरुण ओझा ने कहा कि नववर्ष शक्ति की उपासना का पर्व है। कार्यक्रम के समापन पर श्री अश्विनी महाजन ने सभी अधिकारियों व कार्यकर्ताओं का धन्यवाद दिया।
अमरावती
नववर्ष के स्वागत में संस्कार भारती की स्थानीय इकाई द्वारा 'पाडवा पहाट' कार्यक्रम आयोजित किया गया।
गुड़ी पाड़वा के दिन प्रात: साढ़े पांच बजे अमरावती के 5,000 से अधिक नागरिकों की उपस्थिति में संस्कार भारती के करीब सौ से अधिक स्थानीय कला साधक नृत्य, संगीत, नाट्य, चित्रकला आदि विधाओं के माध्यम से किसी एक विषय को लेकर एक सुरुचिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। इस वर्ष भी कार्यक्रम में दर्शकों की रिकॉर्ड भीड़ रही। कार्यक्रम के मध्य नववर्ष का सूयार्ेदय होते ही 'गुड़ी' का पारंपरिक पद्घति से पूजन किया गया, जिसमें राजस्व राज्यमंत्री डॉ. रणजीत पाटील, विधायक डा. सुनील देशमुख, कमिश्नर ज्ञानेश्वर राजूरकर आदि उपस्थित थे।
इस वर्ष के कार्यक्रम का विषय 'भारतमाता की जय' था, वारकरी पंथ ने सामाजिक समरसता के विषय में किये प्रयास, देशभक्तों की आहूतियां आदि विषयों को प्रभावी रूप से नृत्य, नाट्य, संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में विदर्भ के करीब सभी गांव व कस्बों के लोग उपस्थित रहे।
मुरादाबाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा गांधी नगर पार्क में वर्ष प्रतिप्रदा एवं संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जयंती उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में स्वयंसेवकों ने शारीरिक, योग, दण्ड, समता आदि का प्रदर्शन किया। मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र शारीरिक प्रमुख श्री रणवीर सिंह ने भारतीय कालगणना को सर्वाधिक पुरातन, श्रेष्ठ एवं पूर्णत: वैज्ञानिक बताया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री भोपाल सिंह अध्यक्ष मुरादाबाद एलपीज़ी. गैस वितरण संघ ने नव संवत्सर के शुरू होने की शुभकामनाएं दीं। गांधी पार्क पर संचलन का समापन हुआ। संचलन का महानगर में अनेकों स्थानों पर लोगों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर श्री अजय, विभाग संघचालक, श्री हरिकृष्ण महानगर संघचालक, कवीश राना महानगर कार्यवाह, रवि, सुभाष, सुभाष शर्मा, महेंद्र, अजय गोयल, ओम प्रकाश, संदीप, नीरज, अशोक सिंघल, ब्रिजेश,  अर्पित, नमन जैन आदि उपस्थित थे
गुरुग्राम
गौशाला मैदान में अर्घ्यदान के कार्यक्रम में पूरे शहर से सैकड़ों बन्धु-बहनों ने भाग लिया। प्रात: 5  बजे उगते सूर्य की प्रथम रश्मियों को अर्घ्य देने के लिए शहर भर से लोग जुटे।
प्रख्यात अर्थशास्त्री व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र के संघ चालक डॉ. बजरंग लाल गुप्त ने कहा कि भारतमाता की जय बोलने वालों की संख्या निरन्तर बढ़नी चाहिए। भारत में रहने वाला भारत की जय नहीं बोलेगा तो किसकी बोलेगा। मुख्य अतिथि हरियाणा कला परिषद के निदेशक श्री अजय सिंहल ने कहा कि हरियाणा सरकार कला के माध्यम से भारतीय मूल्यों व संस्कृति को बचाने के लिए वचनबद्घ है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष मेजर दीनदयाल सैनी ने धन्यवाद किया। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद की ओर से मंचीय प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया गया और शीतला माता गुरुकुल की ओर से आए बटुकों द्वारा आदित्य हृदय स्त्रोत्र व चाक्षुसी विद्या का पाठ किया गया। मंच संचालन श्री राम बहादुर सिंह ने किया, जबकि संयोजन श्री श्रवण दुबे व यशवंत शेखावत द्वारा किया गया।
गोहाना
संस्कार भारती की गोहाना इकाई ने नववर्ष अभिनन्दन समारोह आयोजित किया। सुबह 5.45  पर ध्येय गीत से प्रारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम सैनी ने की। इस अवसर पर उनके सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए , माधव गंगनेजा ने जहां युवा पीढ़ी को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया वहीं कुमारी खुशबू ने भारतीय नववर्ष की महत्ता बताती कविता प्रस्तुत की। सरस्वती विद्या निकेतन के बच्चों ने सामूहिक देशभक्ति गीत से मन मोहा तो रमन ने बदलती जीवन शैली को सांस्कृतिक रूप देने पर बल दिया। मुख्य अतिथि समाजसेवी अरुण बड़ौक, प्रान्त कोषाध्यक्ष राकेश गंगाना व जितेन्द्र पांचाल ने अपने विचार रखे। संयोजन संतलाल रोहिल्ला व बादल मधु ने किया।
इलाहाबाद
नव संवत्सर के अवसर पर 8 अप्रैल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रयाग उत्तर जिले में स्वयंसेवकों ने बारह स्थानों पर एक साथ और एक ही समय पथ संचलन किया। लोगों ने कई स्थानों पर स्वयंसेवकों पर फूलों की वर्षा कर स्वागत किया।
संघ कार्यालय जॉर्जटाउन से आजाद नगर के पथ संचलन में बाल स्वयंसेवकों के साथ ही कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। यह पथ संचलन चिन्तामणि मार्ग होते हुए सरस्वती हार्ड केयर चौराहे, बालसन चौराहे और गांधी प्रतिमा के पास से वापस संघ कार्यालय पर समाप्त हुआ। इसी तरह भारद्वाज पार्क से शुरू होकर कर्नलगंज कटरा बाजार, वापस भारद्वाज पार्क पर समाप्त हुआ। विश्वविद्यालय नगर और एनी बेसेन्ट स्कूल भगीरथ नगर से शुरू होकर चौथम लाइन होते हुए पुन: वहीं जाकर समाप्त हुआ। दयानन्द नगर, त्रिवेणी नगर, श्रीकृष्ण नगर, साकेत नगर, गंगा नगर में रसूलाबाद ज्वाला देवी, गोविन्दपुर नगर में श्रीराम पार्क से शुरू होकर विभिन्न मागार्े से होते हुए स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया।
पथ संचलन में प्रमुख रूप से विभाग प्रचारक मनोज, जिला प्रचारक अनुराग, विभाग कार्यवाह नागेन्द्र, जिला कार्यवाह संजीव, जिला संघचालक वेंकटेश्वर, विभाग कार्यवाह मनीष के नेतृत्व में हजारों स्वयंसेवकों ने कुल 48 किमी. पथ
संचलन किया।    -प्रतिनिधि

क्या ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है ? : संजय राउत



अतिथि लेखक - क्या ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है?
तारीख: 18 Apr 2016 12:43:21

एक वर्ग ऐसा है जिसने हमेशा देश विरोधी बातें की हैं और उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाम दिया है, और भारत ऐसे लोगों को बर्दाश्त करता रहा है
संजय राउत
(लेखक राज्यसभा सांसद एवं प्रमुख मराठी समाचार पत्र 'सामना' के संपादक हैं)

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में इन दिनों काफी कहा और लिखा जा रहा है। हमारे देश में इस शब्द 'स्वतंत्रता' का मतलब क्या है? हमने स्वतंत्रता की वास्तविक अवधारणा को कभी समझा ही नहीं।  इस कारण पीढियों में स्वतंत्रता क्या होनी चाहिए और क्या नहीं इसे लेकर एक अबूझ भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हमारे देश में स्वतंत्रता से क्या अभिप्राय है इसे लेकर कौतुहल बना हुआ है। हम ऐसे लोग हैं जो भगवान जाने किससे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हममें स्पष्ट समझ नहीं है, हममें जीवन की सही समझ ही नहीं है; और हम कुछ निश्चित विचारों और अवास्तविक विश्वासों से ही स्वतंत्र नहीं हुए हैं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर वाल्टर ने कहा है, ''आप जो भी कहते हैं वह मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है, लेकिन आपको वह बात कहने का पूरा अधिकार है जो आप कहना चाहते हैं। यदि कोई आपको आपके इस अधिकार से वंचित करना चाहता है तो मैं आपके लिए संघर्ष करुंगा।'' लोग जो कुछ कहते हैं उस सब पर हमें सहमत होने की कोई जरूरत नहीं है, लोगों के अपने-अपने विचार हो सकते हैं और फिर भी वे एक साथ रह सकते हैं। जरूरी नहीं कि जो लोग हमारे विचारों से सहमत नहीं, वे हमारे दुश्मन हों।

महान अमेरिकी न्यायाधीश होम्स ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को इस तरह से परिभाषित किया है, ''अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यह नहीं है कि हम उन्हें बोलने दें जिनके विचारों से हम सहमत हैं बल्कि उन्हें बोलने का अवसर देना है जिनसे हम नफरत करते हैं।'' तमाम राजनैतिक दलों के प्रति रूझान रखने वाले और सभी विचारधाराओं के लोगों को अभिव्यक्ति का अवसर मिलना चाहिए, यही लोकतंत्र है। लेकिन हमारे देश में इस तरह की आजादी की अधिकता हो चुकी है। असामाजिक तत्वों को भी अपने देश विरोधी विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए मंच मिल रहा है जो देश के लिए खतरनाक हो सकता है, इससे युवाओं में गलत संदेश जाएगा और  न केवल देश का माहौल खराब होगा बल्कि सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित होगा।

जेएनयू में जो कुछ हुआ वह लोकतंत्र का उपहास था। ''अफजल गुरू जिंदाबाद और ''हम भारत को टुकड़ों में बांट देंगे'' ये नारे कहीं से भी अभिव्यक्ति के आस-पास नहीं थे, इन्हें केवल आतंकवाद से जोड़ा जा सकता है। अफजल गुरू जैसे लोगों ने देश की संपूर्णता और आजादी को कमजोर करने, तोड़ने और उस पर हमला करने की कोशिश की। सर्वोच्च अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई।

जिन लोगों को इस तथ्य पर भरोसा नहीं उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी पर बात करने का अधिकार नहीं है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश विरोधी विचारों का वही लोग समर्थन कर सकते हैं जिनका देश के लिए कोई योगदान नहीं है।

एक वर्ग है जिसने हमेशा देश विरोधी बातें की हैं और उसे आजादी का नाम दिया है। अपने विचारों को व्यक्त करने के नाम पर ऐसे लोगों ने खासतौर पर आतंकवाद को बढ़ावा दिया है। और भारत ऐसे लोगों को बर्दाश्त करता रहा है। एक तरफ हमारी सेना के जवान देश के लिए अपनी जान दे रहे हैं, उसी समय हम कश्मीर को तोड़कर भारत से अलग करने की बातें बर्दाश्त कर रहे हैं। ये केवल भारत में ही हो सकता है।
ओवैसी जैसा व्यक्ति कह सकता है, ''यदि मेरी गर्दन काट दोगे तब भी मैं भारत माता की जय नहीं बोलूंगा'' और उसके बाद भी वह देश में एक संवैधानिक स्थिति में रह सकता है। ये हमारे देश का दुर्भाग्य और अभिव्यक्ति की आजादी है कि हम बेमतलब की बातें बर्दाश्त कर रहे हैं। किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदेह होती है, और अभिव्यक्ति की आजादी के मामले में भी ऐसा ही है। देश में कोई भी व्यक्ति समान नागरिक संहिता और अनुच्छेद 370 पर स्टैंड नहीं लेता लेकिन लोगों की जिंदगियों में हिंसा और जहर घोलने वाले देश विरोधी लोगों को सारे अधिकार दिए जाते हैं।

हमारे देश को सबसे बड़ा खतरा बाहरी लोगों से नहीं है लेकिन भीतर के ऐसे लोगों से हैं जो हमारी मजबूत जड़ों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा पर होने वाले हमलों से ज्यादा देश के भीतर रहने वाले कुछ लोग देश को डराते हैं। इसे सही तरह से नियंत्रित करके ही देश को बचाया जा सकता है। ऐसे तत्वों का दमन और राष्ट्रवादी तत्वों, चाहे वे जेएनयू में संघर्ष कर रहे हों या एनआइटी, श्रीनगर में, का समर्थन करने की जरूरत है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश के मूलाधार पर चोट करने की इजाजत किसी को नहीं मिलनी चाहिए। लोगों को सचेत रहना होगा और विविधता में एकता के जरिए देश की अखंडता की रक्षा करनी होगी। राष्ट्र पहले है, बाकी सब चीजें बाद में।


कांग्रेस के पाप बनाम भगवा आतंक : हरि शंकर व्यास

कांग्रेस के पाप व भगवा आतंक! भाग 1

: हरि शंकर व्यास (नया इंडिया में प्रकाशित)
पता नहीं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को शर्म आई या नहीं! पर डा. मनमोहन सिंह को आनी चाहिए। आखिर बतौर प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के कलंक अभी भी खुल रहे हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए कि वे ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिनकी छत्रछाया में चिदंबरम के नाम का एक ऐसा गृहमंत्री था जिसने अपने हाथों एक आरोपी आतंकी की हकीकत के हलफनामे को बदला। सोचें, भारत का गृहमंत्री ऐसा जिसने सरकार की ही एजेंसियों की रिपोर्ट, आकलन के विपरीत अपनी बात थोपी। किसलिए? ताकि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, उनकी सरकार झूठे हत्यारा बनें। वे फर्जी मुठभेड़ के मामले में फंसें। देश, दुनिया, अदालत जाने कि हिंदू राष्ट्रवादी राजनीति करने वाले कैसे हत्यारे हैं! उन दिनों को याद करें तो कांग्रेस ने चौतरफा हिंदुओं को बदनाम करने की मुहिम चलाई थी। हिंदू की वैश्विक बदनामी का वह मिशन था जिसमें दिग्विजय सिंह से ले कर राहुल गांधी तक ने प्रचार किया था कि भारत में ‘भगवा आतंकवाद’ भी है।

हां, याद है आपको साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद, कर्नल पुरोहित के नाम? याद है अभिनव भारत और उसकी मालेगांव साजिश? मतलब ‘हिंदू आतंकवाद’ की प्रायोजित कालिख! उसे याद कर इशरत जहां मामले के ताजा खुलासे के साथ सोचें तो लगेगा कि कांग्रेस, मनमोहन सिंह, चिदंबरम एंड पार्टी ने ही तो हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इन चेहरों को झूठ मूठ में फंसा कर ‘हिंदू आतंकवाद’ का हल्ला पैदा करने की साजिश तो नहीं बनाई थी?
यह सवाल ‘द इकोनोमिक टाइम्स’ में कल छपी रिपोर्ट और पिछले 6-8 सालों की जांच, उसके नतीजों की हकीकत पर भी बना है। कल रपट थी कि अभिनव भारत के यशपाल भड़ाना ने मजिस्ट्रेट के आगे बयान दे कर कहा है कि स्वामी असीमानंद को फंसाने के लिए उस पर ‘दबाव’ डाला गया। दबाव के चलते उसने झूठ बोला कि जनवरी 2008 में वह फरीदाबाद की हरी पर्वत बैठक में, अप्रैल की भोपाल बैठक में था। इनमें विचार हुआ था कि बम का बदला बम से लेना है।

इस खबर पर चाहे तो आप मान सकते हैं कि फिलहाल क्योंकि मोदी की सरकार है इसलिए एनआईए उसके असर में होगी। उसने इस गवाह से नया बयान करवा दिया। इस बात को मालेगांव बम विस्फोट के मामले में एनआईए की तरफ से पेश होने वाली रोहिणी सालियान के बयान से भी जोड़ सकते हैं। रोहिणी ने केस से हटते हुए आरोप लगाया था कि एनआईए अब हिंदू कट्टरपंथियों के प्रति नरमी बरतने का दबाव बना रही है।
मतलब इशरत जहां की हकीकत खुल रही है, हिंदू आतंकवादी असीमानंद को फंसाने वाला गवाह पलट रहा है तो यह मोदी सरकार का प्रायोजन है। यदि ऐसा है तब पी. चिदंबरम, डा. मनमोहन सिंह, कांग्रेस खुल कर मैदान में क्यों नहीं आते? क्यों नहीं कहते कि इशरत जहां को निर्दोष मानने की उनकी वजह अभी भी कायम है?



कांग्रेस के पाप व भगवा आतंक! भाग 2
: हरि शंकर व्यास

बोलें, बताएं तथ्य।
इससे अधिक संगीन हकीकत भगवा आतंक का हल्ला कराने की कांग्रेसी साजिश की है। 2008 से ले कर मई 2014 तक चिदंबरम के गृहमंत्री रहते, डा. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते अदालत के आगे हिंदू आतंकवादियों उर्फ असीमानंद, कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ सबूत, अदालत में चार्जशीट तक दायर नहीं की जा सकी। मान सकते हैं कि 2014 से 2016 के बीच मोदी सरकार स़ॉफ्ट है। पर रोहिणी सालियान या हिंदू आतंकियों के होने की बात मानने वालों को यह तो बताना चाहिए कि मनमोहन सिंह की ‘हार्ड’ सरकार और उस वक्त की एनआईए क्योंकर प्रमाण, चार्जशीट नहीं पेश कर पाई? इतना बड़ा केस जिससे मनमोहन सरकार ने पूरी दुनिया में हिंदुओं के ‘भगवा आतंकवादी’ चेहरे दिखाए, उसकी वैश्विक बदनामी कराई, उसमें भी यदि अदालत के आगे तथ्य नहीं आए और जो गवाह पेश किए गए वे बदलते गए तो दुनिया में हिंदू को बदनाम करने की सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मनमोहन, चिदंबरम एंड पार्टी की जिम्मेवारी बनती है या नहीं?
मीडिया अपना क्योंकि नेताओं के असर में रहता है इसलिए वह नरेंद्र मोदी, अमित शाह की वजह से आज इशरत जहां मामले में हुई धांधली को प्रचारित कर रहा है पर असलियत में उसे भंडाफोड़ यह करना चाहिए कि हिंदू को दुनिया में बदनाम करने के लिए सोनिया गांधी व कांग्रेस ने 2006 से 2014 के बीच कैसी साजिश रची हुई थी? हिंदू को बदनाम करने वाला भगवा आतंकवाद कितने झूठों से भरा था?
हां, यह तथ्य अब बनता है कि मनमोहन सरकार ने झूठ को सच, सच को झूठ बनवाने के लिए ‘एनआईए’ एजेंसी बनवाई। एक मोटा तथ्य जानें। 2006 में मालेगांव में बम धमाकों में 31 लोग मारे गए थे। महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी एटीएस ने नौ मुस्लिम आरोपी गिरफ्तार किए। 2006 के अंत में इनके खिलाफ चार्जशीट हुई। बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया। उसने 2010 में इन्हीं आरोपियों के खिलाफ एक और चार्जशीट दाखिल की। मगर 2011 में जांच एनआईए ने अपने हाथ में ली। तभी हल्ला हुआ कि यह करतूत हिंदू कट्टरपंथियों की है।
घटना को दस साल हो गए हैं अदालत के आगे दोनों तरह के वाद हैं। मूल जांच क्या थी, क्या हुई और पहुंची कहां? इसके चपेटे में कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा इतने साल से जेल में हैं तो इसलिए कि उन पर महाराष्ट्र का माफिया रोधी मकोका एक्ट लगा हुआ है। उसमें जमानत नहीं हो सकती। मनमोहन सरकार, चिदंबरम ने, एनआईए सबने दम लगाया लेकिन भगवा आतंकवाद के साक्ष्य या तो बनावटी निकले हैं या गवाह दबाव वाले पाए गए। सुप्रीम कोर्ट में बताया जा चुका है कि मकोका के तहत चार्जशीट लायक साक्ष्य नहीं मिले हैं।
क्या अर्थ निकालें?