रविवार, 1 मई 2016

भारतीय मुस्लिमों के पूर्वज हैं राम : मोहम्मद अफजाल





भारतीय मुस्लिमों के पूर्वज हैं राम, जल्द बनेगा मंदिरः अफजाल
Published 24-Apr-2016

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल,

नई दिल्ली। राम मन्दिर के मुद्दे पर सिर्फ वीएचपी ही आवाज नहीं उठा रही है बल्कि अब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच भी अदालत के बाहर राम मंदिर के मुद्दे को सुलझाने की तैयारी में है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए व्यापक सहमति बनाने की तैयारी कर ली है।

मंच इसके लिए बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी से भी बातचीत की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंच की इसी हफ्ते नागपुर में हुई तीन दिन की मीटिंग में भी यह मसला उठा।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने ईनाडु इंडिया से बातचीत में कहा कि अब वक्त आ गया है कि मुस्लिम समुदाय को अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए हिंदू समाज का समर्थन करना चाहिए। अफजाल ने कहा कि असली  असहिष्णुता तो ये है कि बहुसंख्यक हिंदुओं के आराध्य रामलला अयोध्या में तिरपाल में हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का मुस्लिम समाज कोई बाहर से नहीं आया है और ना ही हमारे पूर्वज अरब या बाबर हैं। अफजाल ने कहा कि भारत के मुसलमानों के पूर्वज सिर्फ भगवान राम ही हो सकते हैं। अफजाल ने यहां तक कहा कि अयोध्या में करीब 20 और मस्जिदें हैं जहां नमाज पढ़ी जाती है वहां कई मजार भी हैं लेकिन हिंदू समाज मस्जिद या मजार पर तो दावा नहीं करता। वह बस एक ही जगह दावा कर रहे हैं। इसलिए हमें इसमें सहमति से राम मंदिर बनने देना चाहिए।

मंच नेता ने कहा कि मजहब-ए-इस्लाम के अंदर अगर मस्जिद बनाना चाहते हैं तो जमीन की मलकियत मुस्लिम समाज में किसी की या वक्फ की होनी चाहिए। लेकिन अयोध्या की उस जगह की मलकियत न तो मुस्लिम समाज के पास है न वक्फ बोर्ड के पास है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज का अधिकार उस जमीन पर नहीं है जहां गर्भगृह है। अफजाल ने कहा कि हम नहीं चाहते कि राम के नाम पर इंसानियत का खून बहे इसलिए इसका फैसला जितनी जल्दी हो उतना अच्छा है।

मोहम्मद अफजाल ने ईनाडु से बातचीत में कहा कि हम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही इस मसले का समाधान चाहते हैं। इसलिए मंच अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी से भी बातचीत की पहल कर रहा है। हम चाहते हैं कि हम हिंदू समाज के साथ मिलकर आगे बढ़े।

उन्होंने कहा कि आज भी अयोध्या में रामलला की पूजा हो ही रही है तो इस मसले को और ज्यादा क्यों खींचना चाहिए। हम फसाद नहीं चाहते और मुस्लिम समाज को तरक्की की दरकार है। इसके लिए विवाद न करते हुए मुस्लिम समाज को अयोध्या में  राम मंदिर बनाने में सहयोग कर

70 प्रतिशत लोग चाहते हैं नरेन्द्र मोदीे पांच साल के पहले कार्यकाल के बाद भी प्रधानमंत्री बने रहें



70 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि नरेन्द्र मोदीे पांच साल के पहले कार्यकाल के बाद भी प्रधानमंत्री बने रहें

- भाषा

मीडिया अध्ययन केंद्र (सीएमएस) के सर्वेक्षण में नरेन्द्र मोदी सरकार के दो साल के कामकाज प्रदर्शन का आकलन करने पर पता चला कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कामकाज को बड़ी संख्या में लोगों ने पसंद किया है जिनकी संख्या 62 फीसदी है और करीब 70 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि वे पांच साल के पहले कार्यकाल के बाद भी प्रधानमंत्री बने रहें।

सर्वेक्षण में गिनाई गयीं बड़ी उपलब्धियों में जन धन योजना (36 प्रतिशत), स्वच्छ भारत मिशन (32 प्रतिशत) और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश लाने के प्रयास (23 प्रतिशत) का जिक्र हुआ। अलग अलग मंत्रालयों के आकलन में रेल मंत्रालय सर्वश्रेष्ठ आंका गया। प्रतिभागियों ने इसके बाद वित्त और विदेश मंत्रालय के कामकाज पर संतोष प्रकट किया। केंद्रीय मंत्रियों को पसंद करने के मामले में सबसे ज्यादा मत श्रीमती सुषमा स्वराज को मिले। इसके बाद राजनाथ सिंह, सुरेश प्रभु, मनोहर पर्रिकर और अरूण जेटली को लोगों ने पसंदीदा मंत्री बताया।


एक संवाददाता सम्मेलन में सर्वेक्षण के नतीजे घोषित करते हुए लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी. कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत छवि उजली बनी हुई और बड़ी संख्या में लोग उनके कामकाज को पसंद कर रहे हैं। दुनियाभर में भारत की स्थिति सुधारने और घरेलू स्तर पर प्रशासन सुधारने में मोदी के प्रयासों को सर्वेक्षण में शामिल अधिकतर लोगों ने पसंद किया।

सीएमएस के महानिदेशक पी.एन. वसंती ने कहा, 15 राज्यों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में करीब 4000 प्रतिभागियों के बीच सर्वेक्षण कराया गया जिसमें यह बात सामने आई है। ‘राजग सरकार की योजनाओं की सामान्य तौर पर जहां सराहना की गयी, वहीं बढ़ती कीमतें और बेरोजगारी को लेकर जमीनी स्तर पर चिंता बनी हुई है।’ केंद्र सरकार की जो नाकामियां इस सर्वेक्षण में गिनाई गयीं उनमें 32 प्रतिशत ने महंगाई का जिक्र किया, उसके बाद 29 फीसदी लोग रोजगार नहीं दे पाने से नाखुश दिखे और काला धन वापस नहीं ला पाने की बात पर 26 प्रतिशत ने अपनी बात रखी।