शुक्रवार, 6 मई 2016

देश की सिर्फ एक प्रतिशत आबादी करती है आयकर देने लायक



देश की सिर्फ एक प्रतिशत आबादी करती है आयकर का भुगतान


नई दिल्ली |   देश की कुल आबादी में आयकर दाताओं की संख्या सिर्फ एक प्रतिशत हैं। हालांकि, 5,430 लोग ऐसे हैं जो सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक का कर देते हैं। सरकार के आकलन वर्ष 2012-13 के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
पारदर्शिता अभियान के तहत सरकार ने पिछले 15 साल के प्रत्यक्ष कर आंकड़ों को सार्वजनिक किया है। आकलन वर्ष 2012-13 के लिए लोगों के आंकड़ों को प्रकाशित किया गया है। इसमें 31 मार्च, 2012 को समाप्त वित्त वर्ष के आयकर आंकड़े दिए गए हैं। कुल मिलाकर 2.87 करोड़ लोगों ने वित्त वर्ष के लिए आयकर रिटर्न दाखिल किया। इनमें से 1.62 करोड़ ने कोई कर नहीं दिया। इस तरह करदाताओं की कुल संख्या 1.25 करोड़ रही, जो उस समय देश की 123 करोड़ की आबादी का लगभग एक प्रतिशत बैठता है।
आंकड़ों के अनुसार ज्यादातर यानी 89 प्रतिशत या 1.11 करोड़ लोगों ने 1.5 लाख रुपये से कम का कर दिया। इस दौरान औसत कर भुगतान 21,000 रुपये रहा। कुल कर संग्रहण 23,000 करोड़ रुपये रहा। 100 से 500 करोड़ रुपये के दायरे में तीन लोगों ने 437 करोड़ रुपये का कर दिया। इस तरह औसत कर भुगतान 145.80 करोड़ रुपये रहा।
कुल मिलाकर 5,430 लोगों ने एक करोड़ रुपये से अधिक का आयकर अदा किया। इनमें से 5,000 लोगों का कर भुगतान एक से पांच करोड़ रुपये के दायरे में रहा। इन लोगों का कुल कर भुगतान 8,907 करोड़ रुपये रहा। कुल आंकड़ों के अनुसार 2015-16 में कुल आयकर संग्रहण नौ गुना बढ़कर 2.86 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह 2000-01 में 31,764 करोड़ रुपये था।

नरेन्द्र मोदी सरकार के दो वर्ष

मोदी सरकार के दो वर्ष

मोदी सरकार आगामी 26 मई को अपने दो वर्ष पूरे करने जा रही है। अब तक सरकार ने जो भी काम किए हैं उन्हें देखकर कहा जा सकता है कि वह अब तक लोगों की आशाओं पर खरी उतरी है। फिर चाहे वह जन-धन योजना हो, एलपीजी कवरेज में वृद्धि, गांवों में विद्युतीकरण, सस्ता एलईडी बल्ब उपलब्ध कराने सम्बन्धी योजनाओं का लाभ जनता को मिल रहा है। हालांकि अभी भी कई योजनाओं के अपेक्षित लाभ सामने आना है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार से मायूस होकर लोगों ने भाजपा को अपार जनसमर्थन देकर केन्द्र की सत्ता सौंपी थी जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र भाई मोदी कर रहे हैं।


उनके नेतृत्व में जहां विदेशों में भारत की छवि में सुधार आया है। वहीं आर्थिक गति भी मिली है। कुल मिलाकर जोरदार बहुमत और जनता की उम्मीदों का दामन थामकर सत्तासीन हुई मोदी सरकार ने पिछले लगभग दो साल में पुरानी जड़ता खत्म करने और विकास को गति देने और आमजन को विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनाने का प्रयास किया है। आमतौर पर यह माना जाता है कि लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना प्रत्येक सरकार के लिए चुनौतीभरा होता है, लेकिन यदि पिछले दो वर्ष की बात करें तो केन्द्र सरकार की योजनाओं ने लोगों को आकर्षित किया है लोग उनसे जुड़े हैं और यह हकीकत योजनाओं की सफलता में साफ दिखाई देती है। वास्तविकता यह है कि पार्टियां सत्ता में आने के लिए अगले पांच साल में बहुत से कार्य करने के दावे करती हैं लेकिन सच्चाई यह है कि जनता इंतजार नहीं करती और उसे तुरंत परिणाम की आकांक्षा रहती है। प्रधानमंत्री मोदी भी यह जानते हैं कि जनादेश उनके नाम पर मिला है। यदि जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं