शनिवार, 16 जुलाई 2016

मीठी रस से भरी राधा रानी लागे


मीठी रस से भरी राधा रानी लागे,
मने करो करो जमुनाजी को पानी लागे...

जमनाजी तो कारी कारी ,राधा गोरी गोरी,
वृन्दावन धूम मचाये ,बरसाने की छोरी,
बृजधाम राधाजी की जिंदगानी लागे,
मने करो करो ................

काना नित मुरली में टेरे सुमिरे बारम्बार,
कोटिन्ह रूप धरे मन मोहन तरु न पावे पार,
रूप रंग की छबीली पटरानी लागे,
मने करो करो...........

न भावे मन माखन मिसरी, अब न कोई मिठाई,
म्हारी जिभड़ली ने भावे, राधा नाम मलाई
वृषभान की लली तो गुड धानी लागे,
मने करो करो..............

राधा राधा नाम रटत है, जे नर आगे पाप,
तिनकी बाधा दूर करत है, राधा राधा नाम,
राधा नाम में सफल जिंदगानी लागे,
मने करो करो...........................

श्री वृन्दावन धाम अपार रटे जा राधे-राधे


श्रीवृन्दावन-धाम अपार रटे जा राधे-राधे।
भजे जा राधे-राधे! कहे जा राधे-राधे॥१॥

वृन्दावन गलियाँ डोले, श्रीराधे-राधे बोले।
वाको जनम सफल हो जाय, रटे जा राधे-राधे॥२॥
या ब्रज की रज सुन्दर है, देवनको भी दुर्लभ है।
मुक्ता रज शीश चढ़ाय, रटे जा राधे-राधे॥३॥
ये वृन्दावन की लीला, नहीं जाने गुरु या चेला।
ऋषि-मुनि गये सब हार, रटे जा राधे-राधे॥४॥
वृन्दावन रास रचायो, शिव गोपी रुप बनायो।
सब देवन करें विचार, रटे जा राधे-राधे॥५॥
जो राधे-राधे रटतो, दु:ख जनम-जनम को कटतो।
तेरो बेड़ो होतो पार, रटे जा राधे-राधे॥६॥
जो राधे-राधे गावे, सो प्रेम पदारथ पावे।
भव-सागर होवें पर, रटे जा राधे-राधे॥७॥
जो राधा नाम न गयो, सो विरथा जन्म गँवायो।
वाको जीवन है धिक्कार, रटे जा राधे-राधे॥८॥
जो राधा-जन्म न होतो, रसराज विचारो रोतो।
होतो न कृष्ण अवतार, रटे जा राधे-राधे॥९॥
मंदिर की शोभा न्यारी, यामें राजत राजदुलारी।
डयौढ़ी पर ब्रह्मा राजे, रटे जा राधे-राधे॥१०॥
जेहि वेद पुराण बखाने, निगमागम पार न पाने।
खड़े वे राधे के दरबार, रटे जा राधे-राधे॥११॥
तू माया देख भुलाया, वृथा ही जनम गँवाया।
फिर भटकैगो संसार, रटे जा राधे-राधे॥१२॥