बुधवार, 31 अगस्त 2016

आजाद हिंद फौज का फंड पाक के साथ बांटने पर राजी थे नेहरू



नेताजी की फाइलों से खुलासा : 1953 में आजाद हिंद फौज का फंड 

PAK के साथ बांटने पर राजी हुई थी नेहरू सरकार

dainikbhaskar.com | Aug 31, 2016,
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नई दिल्ली. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की डिक्लासिफाइड फाइल्स से खुलासा हुआ है कि भारत ने 1953 में इंडियन नेशनल आर्मी (INA) और इंडियन इंडिपेंडेंस लीग (IIL) का फंड पाकिस्तान के साथ शेयर करने पर सहमति जताई थी। जवाहर लाल नेहरू ने वेस्ट बंगाल के तब के सीएम को लेटर लिखा था, "बातचीत में सहमति बनी है कि फंड को भारत-पाक के बीच 2:1 के रेशो में बांट दिया जाए।" सोमवार को नेताजी से जुड़ी 25 फाइल्स को डिक्लासिफाई किया गया था। नेहरू के लेटर से ही पता चली थी पाक को फंड देने की बात...

- नेताजी के संगठनों (INA और IIL) के फंड्स को पाक को दिए जाने का पता नेहरू के लेटर से चला है।
- नेहरू ने ये लेटर 18 अक्टूबर, 1953 को वेस्ट बंगाल के तब के सीएम बीसी रॉय को लिखा था। इसमें नेहरू ने बंगाल सरकार की ओर से पास किए एक रेजोल्यूशन का जवाब दिया था।
- रेजोल्यूशन के मुताबिक, 'बंगाल सरकार ने नेताजी और उनकी आजाद हिंद सरकार के छोड़े गए फंड्स के बारे में केंद्र सरकार से जांच करने के लिए कहा था।'
नेहरू ने अपने नोट में क्या लिखा था?
- नोट के मुताबिक, "सुदूर पूर्व में अंतिम वॉर खत्म होने के बाद गोल्ड, ज्वेलरी और कुछ अन्य चीजें अफसरों ने सीज की थीं। ये चीजें साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज में INA और IIL से जुड़ी थीं।"
- "सिंगापुर इसका कस्टोडियन ऑफ प्रॉपर्टी (संपत्ति का संरक्षक) था। 1950 में सिंगापुर सरकार ने इस संपत्ति की वैल्यू आंकी। संपत्ति की कीमत 1 लाख 47 हजार 163 स्ट्रेट डॉलर पाई गई।" स्ट्रेट डॉलर ब्रिटेन के मलक्का स्ट्रेट पर किए सेटलमेंट के लिहाज से करंसी थी।
- नोट में ये भी कहा गया, "रिवैल्यूलेशन के मुताबिक संपत्ति की कीमत का सही आकलन करना मुश्किल है।"
- "पाकिस्तान के साथ लंबी बातचीत चली। अंत में सहमति बनी कि संपत्ति को भारत-पाकिस्तान के बीच 2:1 के रेशो में बांट दिया जाए।"
- हालांकि, फंड रिलीज किए जाने का मामला संपत्ति के बतौर कस्टोडियन माने जाने वाले सिंगापुर की लेजिस्लेटिव काउंसिल में पेश किया गया। इसके मुताबिक, रकम को किसी भी शख्स या बॉडी को देने का राइट नहीं था।
कल्चर मिनिस्ट्री ने डिक्लासिफाई कीं फाइल्स
- 30 अगस्त को कल्चर सेक्रेटरी एनके सिन्हा ने 25 फाइलों के 7th बैच को जारी किया। ये फाइलें 1951 से 2006 के बीच की हैं।
- नरेंद्र मोदी ने इसी साल 23 जनवरी को नेताजी की 119th जयंती के मौके पर पहली बार 100 फाइल्स को डिक्लासिफाई किया था।
- इसके बाद मार्च में 50 फाइलें जारी की गईं और बाद के महीनों में 25-25 फाइलें जारी हुईं।
क्या है नेताजी का रहस्य?
- 70 साल पहले नेताजी का गायब होना आज भी रहस्य बना हुआ है।
- इसकी जांच के लिए दो कमीशन बनाए गए थे। दोनों ने अपनी रिपोर्ट में ताइपे (ताइवान) में 18 अगस्त, 1945 को एक प्लेन क्रैश में नेताजी के मारे जाने की बात कही थी।
- इसके बाद मामले की जांच के लिए जस्टिस एमके मुखर्जी की अगुआई में तीसरा कमीशन बनाया गया।
- मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'प्लेन क्रैश में नेताजी बच गए थे।'

30 अगस्त को कल्चर सेक्रेटरी ने नेताजी से जुड़ी 25 फाइलें डिक्लासिफाई की।

जवाहर लाल नेहरू ने नेताजी की संपत्ति के सिलसिले में वेस्ट बंगाल के तब के सीएम बीसी रॉय को लेटर लिखकर जानकारियां दी थीं। (फाइल)

हिन्दुओं को सामर्थ्य सम्पन्न बनना चाहिए - परमपूज्य डॉ. मोहन भागवत जी




हिन्दुत्व की विचारधारा किसी के विरोध में नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी


लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हिन्दुत्व की विचारधारा किसी के विरोध में नहीं है. किसी का द्वेष और विरोध हिन्दुत्व नहीं है, बल्कि सबके प्रति प्रेम, सबके प्रति विश्वास और आत्मीयता यही हिन्दुत्व है. हम देश के लिए काम करते हैं. हिन्दुत्व कोई कर्मकांड भी नहीं है. यह अध्यात्म व सत्य पर आधारित दर्शन है. उन्होंने कहा कि भारत की एकता अखण्डता को अक्षुण्ण रखते हुए भारत को परम वैभव पर पहुँचाने के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कुछ नहीं करना है. हम दुनिया में भारत माता की जय-जयकार कराने के लिए काम कर रहे हैं. लेकिन भारत माता की पूजा में विचारों की अपवित्रता नहीं आनी चाहिए. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी रविवार 28 अगस्त को निरालानगर स्थित सरस्वती कुंज माधव सभागार में लखनऊ विभाग के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि केवल दुर्बल रहना भी हिन्दुत्व नहीं है. हिन्दुओं को सामर्थ्य सम्पन्न बनना चाहिए. सबको अपनापन, सबको ऊपर उठाना, लेकिन कट्टरता नहीं, ऐसा समाज चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘‘समाज हमारा भगवान है. हम समाज की सेवा करने वाले लोग हैं. मुझे इसके बदले में क्या मिलेगा, इसके बारे में सोचना भी नहीं. हम हिन्दू राष्ट्र के सम्पूर्ण विकास के लिए कार्य करेंगे. हम यह काम कर रहे हैं, यह अभिमान भी हममें नहीं आना चाहिए.’’ डॉ. भागवत जी ने कहा कि हमें प्रतिक्रिया में कोई काम नहीं करना है. धर्म स्थापना के लिए ही महाभारत का युद्ध हुआ. भगवान बुद्ध ने सम्पूर्ण करुणा और अहिंसा का उपदेश दिया. भगवान राम और भगवान कृष्ण ने भी सब धर्म के लिए किया. इसलिए प्रत्येक कार्यकर्ता को सकारात्मक सोच के आधार पर कार्य करना पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि हमारे लिए भारत एक गुणवाचक शब्द है. अध्यात्म के आधार पर विचार करते हुए हमारे पूर्वजों ने जिस विचारधारा के आधार पर भारत को बनाने का काम किया है, वही हिन्दुत्व है. संघ हिन्दू समाज का संगठन करने के अलावा कुछ नहीं करेगा, लेकिन संघ के स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेंगे. हिन्दू धर्म संस्कृति व समाज के लिए जो कुछ भी उपयोगी होगा, वह सब संघ के स्वयंसेवक करेंगे. संघ के कार्यकर्ता अपने को संघ विचार के अनुरूप ढालने का प्रयास करें. हम संघ के स्वयंसेवक हैं. संघ हिन्दू समाज का संगठन है.

सरसंघचालक जी ने कहा कि जो परिवर्तन समाज में आना चाहिए, उसके लिए पहले स्वयंसेवकों को अपने जीवन अर्थात् कृतित्व में उतारना होगा. उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से कहा कि अपनी आजीविका में भी पहले समाज को सर्वोपरि रखकर उनकी आत्मीयता के आधार पर सेवा करें. संघ जैसा प्रत्येक कार्यकर्ता को बनना पड़ेगा, तभी संघ का काम बढ़ेगा.

सभी संस्कृतियों का आदर करने से समृद्ध होगा विश्व : परमपूज्य श्री भागवत जी



सभी संस्कृतियों का आदर करने से समृद्ध होगा विश्व : परम पूज्य श्री भागवत जी 


लंदन, अगस्त 01: हिन्दू स्वयंसेवक संघ-यूके की ओर से यहाँ आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति महाशिविर का रविवार देर शाम समापन हो गया। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमें सभी धर्म और संस्कृतियों का आदर करना चाहिए और ऐसा करने पर ही विश्व और ज्यादा समृद्ध होगा ।

भागवत ने कहा कि हिन्दू धर्म नहीं बल्कि जीवन पद्धति है। हम विश्व बंधुत्व को मानने वाले हैं और वसुधैव कुटंबकम पर विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सभी धर्म और संस्कृतियों का आदर करना चाहिए और ऐसा करने पर ही विश्व और ज्यादा समृद्ध होगा ।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण के साथ मनुष्य किस प्रकार संतुलन बनाकर रह सकता है, भारतीय संस्कृति में इन प्रश्नों का उत्तर है। उन्होेने कहा कि एक स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है कि वह नियमित व्यायाम और उचित आहार लेते हुए एक संयमित जीवन जिये।

हिन्दू स्वयंसेवक संघ की ओर से लंदन से नजदीक हर्टफोर्डशायर में कंट्री शो मैदान में लगे इस शिविर में ब्रिटेन के एचएसएस से जुड़े 2200 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। 1966 में ब्रिटेन में संगठन की स्थापना की गई थी। इस वर्ष इसकी स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है।

29 जुलाई को श्री भागवत ने तीन दिवसीय कैंप का उद्घाटन किया जिसमें सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और एचएसएस यूके इकाई के राम वैद्य सहित अन्य संगठन के वरिष्ठ जनों ने भाग लिया। इस शिविर की थीम `संस्कार, सेवा और संगठन` थी।

इस दौरान लंदन के उपमहापौर बिजनेस राजेश अग्रवाल ने एचएसएस के शीर्ष बिजनेस नेताओं से शुक्रवार को मुलाकात की। इस दौरान पिछले 50 वर्षों मेे एचएसएस की उपलब्धियों को लेकर एक प्रदर्शनी भी लगाई गई।
संघ से प्रेरित एचएसएस-यूके ब्रिटेन में काम करने वाला एक सामाजिक संगठन है जो समय-समय पर दान, आध्यात्म तथा सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहता है जिसकी सराहना ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरून और मार्गेट थैचर कर चुके हैं।