सोमवार, 26 सितंबर 2016

आतंक पालने-पोसने वाले देशों को अलग-थलग करें : सुषमा स्वराज


आतंक पालने-पोसने वाले देशों को अलग-थलग करें : भारत
पुनः संशोधित सोमवार, 26 सितम्बर 2016
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संयुक्त राष्ट्र। भारत ने दुनिया के सभी देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील करते हुए सोमवार को कहा कि आतंकवाद को पालने-पोसने वाले देशों की पहचान करके उन्हें विश्व समुदाय से अलग-थलग किया जाना चाहिए।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन करार देते हुए कहा, सबसे पहले तो हम सबको यह स्वीकारना होगा कि आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है, क्योंकि यह निर्दोष लोगों को निशाना बनाता है, बेगुनाहों को मारता है, यह किसी व्यक्ति या देश का ही नहीं, बल्कि मानवता का अपराधी है।
     
उन्होंने पाकिस्तान या किसी अन्य देश का नाम लिए बिना आतंकवादियों को पनाह देने वाले देशों की पहचान करने की भी आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा, आतंकवादियों का न तो कोई अपना बैंक है, न हथियारों की फैक्ट्रियां, तो कहां से उन्हें धन मिलता है, कौन इन्हें हथियार देता है, कौन इन्हें सहारा देता है, कौन इन्हें संरक्षण देता है? ऐसे ही सवाल इसी मंच से अफगानिस्‍तान ने भी कुछ दिन पहले उठाए थे।
     
श्रीमती स्वराज ने कहा कि दुनिया में ऐसे देश हैं जो बोते भी हैं आतंकवाद, उगाते भी हैं आतंकवाद, बेचते हैं आतंकवाद और निर्यात भी करते हैं आतंकवाद। आतंकवादियों को पालना उनका शौक बन गया है। ऐसे शौकीन देशों की पहचान करके उनकी जबावदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, हमें उन देशों को भी चिह्नित करना चाहिए, जहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी सरेआम जलसे कर रहे हैं, प्रदर्शन निकालते हैं, जहर उगलते हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके लिए उन आतंकवादियों के साथ वे देश भी दोषी हैं जो उन्हें ऐसा करने देते हैं। ऐसे देशों की विश्‍व समुदाय में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
       
विदेश मंत्री ने कहा कि इस सभा में बैठा हर व्यक्ति आतंकवाद को लेकर चिंतित ही नहीं, बल्कि सोचने पर भी मजबूर है। उन्होंने कहा, इसी महीने इस शहर में हुए 9/11 आतंकी हमले की 15वीं वर्षगांठ थी। पिछले 15 दिनों में इसी शहर में एक और आतंकी हमले में मासूमों को मारने की कोशिश की गई थी। हम इस शहर का दर्द समझते हैं, हम पर भी उड़ी में इन्‍हीं आतंकी ताकतों ने हमला किया था। विश्‍व इस अभिशाप से बहुत समय से जूझ रहा है, लेकिन आतंकवाद का शिकार हुए मासूमों के खून और आसुओं के बावजूद, इस वर्ष काबुल, ढाका, इस्ताम्बुल, मोगादिशू, ब्रुसेल्स, बैंकॉक, पेरिस, पठानकोट और उड़ी में हुए आतंकवादी हमले और सीरिया एवं इराक में रोजमर्रा की बर्बर त्रासदियां हमें यह याद दिलाती हैं कि हम इसे रोकने में सफल नहीं हुए हैं।
       
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन्‍होंने भी अतिवादी विचारधारा के बीज बोए हैं उन्‍हें ही उसका कड़वा फल मिला है। आज उस आतंकवाद ने एक राक्षस का रूप धारण कर लिया है, जिसके अनगिनत हाथ हैं, अनगिनत पांव और अनगिनत दिमाग और साथ में अति आधुनिक तकनीक।      
विदेश मंत्री ने कहा, अब अपना या पराया, मेरा या दूसरे का आतंकवादी कहकर हम इस जंग को नहीं जीत पाएंगे। पता नहीं यह दैत्य किस समय किस तरफ का रुख कर ले। इसीलिए यदि हमें आतंकवाद को जड़ से उखाड़ना है तो एक ही तरीका है- हम अपने मतभेद भुलाकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हों, उसका मुकाबला दृढ़ संकल्‍प से करें और अपने प्रयासों में तेजी लाएं।
     
उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ न देने वाले देशों को अलग-थलग करने की सलाह देते हुए कहा, हम पुराने समीकरण तोड़ें, अपनी पसंदगियां-नापसंदगियां एक तरफ रखें, मोह त्यागें, अहसानों को भूलें और एक दृढ़ निश्चय के साथ इकट्ठा होकर इस आतंकवाद का सामना करने की रणनीति बनाएं। यह मुश्किल काम नहीं है केवल इच्छाशक्ति की कमी है। ये  काम हो सकता है और ये काम हमें करना है, नहीं करेंगे तो हमारी आने वाली संततियां हमें माफ नहीं करेंगी। हां, यदि कोई देश इस तरह की रणनीति में शामिल नहीं होना चाहता तो फिर उसे अलग-थलग कर दें।
       
अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से संबंधित व्यापक संधि (सीसीआईटी) के भारत के 1996 के प्रस्ताव पर आज तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, बीस साल गुजर जाने के बावजदू हम सीसीआईटी को निष्‍कर्ष तक नहीं पहुंचा सके। यही कारण है कि हम कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय मानक नहीं बना सके, जिसके अंतर्गत आतंकवादियों को सजा दी जा सके या उनका प्रत्‍यर्पण हो सके। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से पूरे दृढ़ निश्चय के साथ यथाशीघ्र सीसीआईटी पारित करने की अपील भी की। (वार्ता)

जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाने देंगे : पीएम मोदी




हम जनता के कल्याण के लिए खुद को खपाने आए हैं
बीजेपी की बैठक में पीएम मोदी
प्रकाशित 25 सितम्बर  2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के साथ केरल के कोझिकोड में बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक खत्म हो गई है. अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि सत्ता हासिल करना हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि हम सबका साथ और सबका विकास के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. ऐसा तभी हो सकता है जब विकास की यात्रा में हर ग़रीब और दलित को साथ लिया जाए. पंडित दीन दयाल उपाध्याय जन्मशती वर्ष की शुरुआत का ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अल्पसंख्यकों का ध्यान रखना ज़रूरी है, लेकिन उन्हें वोट बैंक न समझा जाए.

पाकिस्तान के हुक्मरान जान लें हम अपने 18 जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाने देंगे : पीएम मोदी

२४ सितम्बर 2016
कोझिकोड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए पड़ोसी देश के नेतृत्व को चेताया कि भारत उरी हमले को कभी भूलेगा नहीं और 18 जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी.

उरी आतंकी हमले के बाद पहली सार्वजनिक रैली में पीएम मोदी ने कहा कि भारत, पाकिस्तान को कूटनीतिक स्तर पर अलग-थलग करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा और आतंक के निर्यात, निर्दोष लोगों की हत्या और खूनखराबे जैसी उसकी गतिविधियों का पर्दाफाश करेगा.

बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक से इतर कोझिकोड में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'आतंकवादी ध्यान से सुन लें कि भारत उरी हमले को कभी भूलेगा नहीं... मैं पाकिस्तान के नेतृत्व को बताना चाहता हूं कि हमारे 18 जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी.'

उरी आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उस देश द्वारा आतंकवादियों के निर्यात के कारण ही हमारे 18 सैनिक शहीद हुए. प्रधानमंत्री ने कहा कि एशिया में एक देश ऐसा है जिसका मकसद आतंकवाद को फैलाना है और वह देश यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि 21वीं सदी एशिया की सदी नहीं बन सके. प्रधानमंत्री ने कहा, 'आतंकवाद के लिए प्रत्येक राष्ट्र केवल एक देश को जिम्मेदार बता रहा है. एशिया में केवल एक देश आतंकवादियों की पनाहगाह है. वह एकमात्र ऐसा देश है जो दुनियाभर में आतंक का निर्यात करने में लगा है.'


पीएम मोदी ने कहा, 'चाहे अफगानिस्तान हो या बांग्लादेश हो या कोई अन्य देश हो, हमने देखा है कि जहां कहीं से भी आतंकी घटनाओं की खबर आती है, आतंकवादी या तो उस देश (पाकिस्तान) से गए होते हैं या अपराध करने के बाद वहां रह रहे होते हैं.' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद के समक्ष कभी नहीं झुका है और भविष्य में भी नहीं झुकेगा.

पीएम मोदी के भाषण के मुख्य अंश
हमारे देश का भविष्य शांति, एकता और सद्भावना से जुड़ा है.
आज मानव जाति के सामने कई चुनौतियां हैं. हम कई वर्षों से सुन रहे हैं कि 21वीं सदी एशिया की सदी होगी. इसके लिए भरपूर संभावनाएं हैं. सारे अवसर साफ साफ नजर आ रहे हैं.
21वीं सदी एशिया की सदी बने इसके लिए हर देश हर संभव प्रयास कर रहा है. लेकिन एक देश ऐसा है जो 21वीं सदी एशिया की न बने. पूरा एशिया रक्त रंजित हो, पूरा एशिया आतंकवाद की चपेट में आ जाए. खून खराबा हो, इसकी साजिश में जुटा हुआ है.
पाकिस्तान के हुक्मरान आतंकवादियों के आकाओं के लिखे भाषण पढ़ते हैं. दुनिया को पाकिस्तान के हुक्मरानों से कोई उम्मीद नहीं है. मैं यहां से पाकिस्तान की आवाम से बात करना चाहता हूं. 1947 से पहले आपके पूर्वज भी इसी संयुक्त भारत की धरती को प्रणाम करते थे. इसको अपना मानते थे.
पाकिस्तान के हुक्मरान सुन लें, हमारे 18 जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा. हम आपको विश्व समुदाय से अलग करके रखेंगे. वो दिन दूर नहीं जब पाकिस्तानी आवाम अपने हुक्मरानों के खिलाफ खड़ी होगी.
वहां की आवाम अपने हुक्मरानों से पूछे कि दोनों देश एक साथ आजाद हुए थे. हिन्दुस्तान सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करता है और पाकिस्तान आतंकवाद एक्सपोर्ट करता है.
पाकिस्तान की आवाम से मैं कहना चाहता हूं कि आपकी सरकार आपको गुमराह करने के लिए हिन्दुस्तान से 1000 साल तक लड़ने की बात करती है. आज दिल्ली में ऐसी सरकार बैठी है कि मैं आपकी इस चुनौती को स्वीकार करते हैं.
मैं आपसे पूछता हूं आपके पास पीओके है आप उसको नहीं संभाल पा रहे हो. आप पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को नहीं संभाल पाए. आप गिलगित को नहीं संभाल पा रहे, आप बलूचिस्तान को नहीं संभाल पा रहे. कश्मीर की बात करके आपके हुक्मरान आपको गुमराह कर रहे हैं.
पाकिस्तान की जनता का आह्वान करता हूं कि आओ नवजात शिशुओं को बचाने की लड़ाई लड़ें.
मैं पाकिस्तान की आवाम का आह्वान करता हूं मैं लड़ने के लिए तैयार हूं. आओ लड़ते हैं देखें पहले अपने देश की गरीबी कौन खत्म करता है. पहले बेरोजगारी पहले कौन खत्म करता है. दोनों देश अशिक्षा को खत्म करने के लिए लड़ें, देखें पहले कौन अशिक्षा से पार पाता है.
हमारे सुरक्षाबलों के जवान जो इस लड़ाई को जीतते चले गए हैं, इसका कारण सिर्फ शस्त्र नहीं होते हैं, शस्त्र तो खिलौने होते हैं. देश का मनोबल उनका हौसला होता है. आज देश का मनोबल ऊंचा है. देश के सवा सौ करोड़ देशवासियों का मनोबल ऊंचा है और यही सुरक्षाबलों की शक्ति है.
आप कल्पना कर सकते हैं कि पड़ोसी देश एक बार सफल हुआ और हमारे 18 सैनिकों को शहीद होना पड़ा, अगर 17 कोशिशों में भी सफल होता तो कितना दर्द देश को सहना पड़ता.
हमारे देश में अशांति फैलाने के लिए आतंकवादियों ने पिछले कुछ समय में 17 बार घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन हमारी सेना ने 110 आतंकवादियों को मार गिराया है.
जम्मू कश्मीर के उरी में हमारे पड़ोसी देश से एक्सपोर्ट किए गए आतंकवादियों ने हमारे 18 जवानों को शहीद कर दिया. आतंकवादी कान खोलकर सुन लें, यह देश इस घटना को कभी भूलने वाला नहीं है.
आतंकवाद मानवता का दुश्मन है. पूरी दुनिया को एकजुट होकर आतंकवाद को परास्त करना है. भारत न आतंकवाद के आगे झुका है और न झुकेगा. हम आतंकवाद खात्मा कर के रहेंगे.
आतंकवाद कैसा होता है, यह केरलवासी अच्छी तरह से जानते हैं. हमारी केरल की बेटियों को आतंकवादी उठाकर ले गए थे. हमारी बेटिया खाड़ी देशों में सेवा भाव से गई थीं. केरल के लोगों ने दिल्ली की तरफ देखा और हमने हर तरह के प्रयास करके बेटियों को सही-सलामत घर वापस पहुंचा दिया.
एशिया के अंदर जहां जहां आतंकवाद की घटनाएं हो रही हैं सभी देश एक ही देश को गुनहगार मानता है. अफगानिस्तान हो, बांग्लादेश हो आसपास के देश हों. दुनिया में जहां कहीं भी कोई घटना होती है तो साथ ही एक खबर यह भी आती है कि या तो आतंकवादी इसी देश से गया है या फिर घटना को अंजाम देने के बाद ओसामा बिन लादेन की तरह इस देश में छिपने के लिए गया है.
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, केरल का नाम आते ही मन में श्रद्धा और पवित्रता का भाव पैदा होता है.
देशभर में जहां कही भी केरल के लोग रहते हैं उन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता है, यह केरल के संस्कारों के कारण ही है.
विदेश यात्राओं के दौरान भी मैं जब किसी से भी मिलता हूं तो वहां केरल के लोगों के काम और अनुशासन की तारीफ सुनकर गर्व होता है.
आज से 50 साल पहले पंडित दीनदयाल जी को यहां पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी. मुझे नहीं लगता कि उस वक्त किसी अखबार के किसी कोने में भी यह खबर छपी होगी. 50 साल के भीतर-भीतर यह दल देश की नंबर 1 पार्टी बन गया.
आज हम उस पूर्व संध्या पर मिल रहे हैं, जब कल से भारत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्मशती मनाने जा रहा है.
भारत के राजनीतिक जीवन को तीन महापुरुषों ने प्रभावित किया- महात्मा गांधी, दीनदयाल उपाध्याय और राम मनोहर लोहिया. इनके चिंतन का प्रभाव आज की राजनीति पर नजर आता है.
सत्ता में आने से पहले संगठन में काम करने का मौका मिला. केरल में भी कार्यकर्ताओं ने दशकों में बलिदान दिए. उन्हें सत्ता नहीं मिली, इसके बावजूद वे डटे रहे और विचारधारा के लिए बलिदान दिया और सबके लिए प्रेरणा बने.
आपने जो तपस्या की है, आपने जो यातनाएं झेली हैं, आपने जो बलिदान दिया है. वह व्यर्थ नहीं जाएगा. केरल का भी भाग्य बदलेगा और बीजेपी केरल का भाग्य बदलने का निमित्त बनेगी.
केरल में देश का नंबर एक राज्य बनने की पूरी क्षमता है. इसके लिए भारतीय जनता पार्टी और भारत सरकार हर तरह से तैयार रहेगी.
सबका साथ सबका विकास के मंत्र को लेकर देश आगे बढ़ रहा है. आज पूरी दुनिया में एक सुर में कहा जा रहा है कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में भारत नंबर एक पर है.
दिल्ली में बैठी सरकार हर किसी को नई शक्ति और नई सामर्थ्य देने के लिए काम कर रही है.

इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया
अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, केरल में अगली सरकार बीजेपी की बनेगी.
अमित शाह ने जनसंघ से बीजेपी तक के पार्टी के सफर को याद किया और कहा, आज देश के 13 राज्यों में या तो बीजेपी की सरकार है या बीजेपी के समर्थन की सरकार है.
हिंसा से दमन से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता डरेंगे नहीं.
जो लोग हिंसा फैला रहे हैं उन्हें बीजेपी कार्यकर्ता दंड दिलाने का काम करेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोझिकोड़ में मंच पर पहुंचे. कुछ देर में देंगे भाषण.
प्रधानमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय के साथ काम कर चुके केरल बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को सम्मानित किया.
देशभर से जुटे बीजेपी नेताओं के मन में भी इस वक्त उरी हमला ही छाया हुआ है.
बीजेपी ने माना है कि उरी हमले के बाद पार्टी पर दबाव है, ख़ासकर कार्यकर्ताओं का.
राष्ट्रीय परिषद में बीजेपी ने बयान से ज़्यादा कार्रवाई पर ज़ोर की बात कही है.
शुक्रवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक के पहले दिन भी उरी हमले का मुद्दा छाया रहा. (इनपुट भाषा से)

अमित शाह : राष्ट्रीय परिषद् कोझिकोड (केरल)




भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा स्वप्ननगरी, कोझिकोड (केरल) में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय परिषद् में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जन्मशती समारोह 'गरीब-कल्याण वर्ष' की शुरुआत पर दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु

एकात्म मानववाद, एकात्म मानव दर्शन एवं अंत्योदय की विचारधारा हमारा आदर्श और गरीब-कल्याण हमारा एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए: अमित शाह
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अल्पकाल में ही कई सारे दायित्त्वों का निर्वहन करनेवाले पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी का जीवन सरलता, सादगी, विनम्रता, कर्मठता और आदर्शों का प्रतीक है: अमित शाह
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युगद्रष्टा पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने राष्ट्र को एक वैकल्पिक विचारधारा देने का काम किया। पंडित जी की विचारधारा सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए थी: अमित शाह
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आज जब हम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्मशती मना रहे हैं तब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम पंडित जी द्वारा दिखाए गए नीतियों पर चलकर देश को आगे ले जाने के लिए कृतसंकल्पित हों: अमित शाह
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पंडित दीन दयाल जी ने कहा था, “जब तक हम समाज के अंतिम छोर पर खड़े गरीब-से-गरीब व्यक्ति तक विकास की धारा नहीं पहुंचाते, जब तक हम उनको देश के विकास की मुख्यधारा में शामिल नहीं करते, तब तक देश की स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है: अमित शाह
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पंडित जी की ‘अंत्योदय' एवं एकात्म मानव दर्शन की नीतियों औरउनके आदर्शों पर चलकर एक गरीब-कल्याण राज्य की स्थापना की दिशा में सतत प्रयत्नशील है: अमित शाह
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज, रविवार को कोझिकोड (केरल) के स्वप्ननगरी में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक के आख़िरी सत्र में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्म शताब्दी समारोह 'गरीब-कल्याण वर्ष' की शुरुआत के अवसर पर पंडित दीन दयाल जी के जीवन, उनके कृतित्त्व और सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मैं अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मेरे जैसे कार्यकर्ताओं को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्मशती मनाने का मौक़ा मिला है। उन्होंने कहा कि अल्पकाल में ही कई सारे दायित्त्वों का निर्वहन करनेवाले पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी का जीवन सरलता, सादगी, विनम्रता, कर्मठता और आदर्शों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस अपने मध्याह्न काल में देश की सत्ता के केंद्र बिंदु में थी, तो उस वक्त देश के कई मनीषियों को लगा कि देश के विकास के लिए जो योजनायें बन रही हैं, उन योजनाओं के केंद्र में देश की माटी का सुगंध तो है ही नहीं और ऐसे वक्त में युगद्रष्टा पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने राष्ट्र को एक वैकल्पिक विचारधारा देने का काम किया। उन्होंने कहा कि पंडित जी की विचारधारा सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए थी। उन्होंने कहा कि इसी विचारधारा के आधार पर जनसंघ की स्थापना हुई और इसी पर आगे बढ़ते हुए जनसंघ आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में एक विशाल बटवृक्ष बनकर दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है।
श्री शाह ने कहा कि 1967 से 2016 तक जनसंघ से लेकर भाजपा तक की यात्रा में हम एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका में थे जबकि आज हम स्वाभाविक रूप से देश की राजनीति के केंद्र बिंदु में हैं। उन्होंने कहा कि आज जब हम पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्मशती मना रहे हैं तब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम पंडित जी द्वारा दिखाए गए नीतियों पर चलकर देश को आगे ले जाने के लिए कृतसंकल्पित हों। उन्होंने कहा कि दीन दयाल जी ने कहा था, “जब तक हम समाज के अंतिम छोर पर खड़े गरीब-से-गरीब व्यक्ति तक विकास की धारा नहीं पहुंचाते, जब तक हम उनको देश के विकास की मुख्यधारा में शामिल नहीं करते, तब तक देश की स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें देश में विकास की दौड़ में पीछे छूट गए लोगों को समाज की मुख्यधारा के साथ जोड़ना है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश की जनता ने बहुत विश्वास के साथ हमें देश की सत्ता की बागडोर सौंपी है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत में हो रहे विकास के परिवर्तन को बहुत बारीकी और विस्मय के साथ देख रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पंडित जी की ‘अंत्योदय' एवं एकात्म मानव दर्शन की नीतियों औरउनके आदर्शों पर चलकर एक गरीब-कल्याण राज्य की स्थापना की दिशा में सतत प्रयत्नशील है। उन्होंने कहा कि इसी तरह भाजपा की राज्य सरकारें भी अंत्योदय और गरीब कल्याण की योजनाओं को वास्तविक रूप से चरितार्थ करने का काम कर रही है।
श्री शाह ने कहा कि एकात्म मानववाद, एकात्म मानव दर्शन एवं अंत्योदय की विचारधारा हमारा आदर्श और गरीब-कल्याण हमारा एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीब-कल्याण की योजनाओं को सभी राज्य सरकारें पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्मशती वर्ष में लागू करेंगी।
1967 के राष्ट्रीय अधिवेशन में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के भाषण से कुछ अंशों को उद्धृत करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पंडित जी के जन्म शताब्दी वर्ष में हम उनके दिखाए गए रास्तों और सिद्धांतों के आधार पर पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक हम आगे बढ़ें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर राष्ट्र के पुनर्निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं, यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।